ऐतिहासिक मंदिर और उनकी कथा
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हमारी संस्कृति हमारा अभिमान

*इस चैनल मे हमारे मंदिरों की कथा के आडियो विडियो और हमारी सभ्यता से जुड़ी जगह का प्रसारण किया जाता है*

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The First One who worked on Language grammer was MAHARISHI PANINI in the book अष्टाध्यायी (Aṣṭādhyāyī)

West Gave all credit to "Lindley Murray's"
छेनी हथौड़ी से इस तरह के मंदिर बनाए नहीं जा सकते।

हम तो केवल अनुमान लगा सकते हैं कि हमारे पूर्वज लेजर कटिंग से भी अधिक कोई उच्च तकनीक जानते थे और हमें हमारे इतिहास से विमुख किया गया, एक निश्चित षड़यंत्र के अंतर्गत
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🕰➡️2.19

*🙏🏻💐👆👆 *हजारो साल पहले किस तरह से बना होगा यह अद्भूत शिल्पकला का यह मंदिर* 🚩 *आश्चर्यचकित करने वाला यह विडिओ देखिऐ*💐🙏🏻*

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🕰➡️1.50

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विजय स्तम्भ का रियासतकालीन दुर्लभ दृश्य (1880 ई. से पूर्व)

विजय स्तम्भ (चित्तौड़गढ़ दुर्ग) :- इसे भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोष कहते हैं। संसार भर में इसका कोई सानी नहीं। इसका निर्माण महाराणा कुम्भा के शासनकाल में हुआ। इसे बनने में 8 वर्ष लगे। ये भगवान विष्णु को समर्पित है। ये 9 मंजिला एक स्तम्भ है। इसकी ऊंचाई 122 फीट है, जिसमें 157 सीढियां हैं। स्तम्भ का निर्माण वास्तुशिल्पी मंडन द्वारा निर्मित नक्शे के आधार पर उनके निर्देशन में हुआ। इसके वास्तुकार जैता व उनके पुत्र नापा, पुंजा आदि थे।

लोग 8वीं मंज़िल तक ही जाते हैं। 9वीं के लिए उल्टी सीढियां हैं। 9वीं मंज़िल पर कीर्तिस्तंभ प्रशस्ति अंकित है।

कीर्ति स्तम्भ के भीतर व बाहर भगवान विष्णु के सभी स्वरूपों सहित अनेक मूर्तियां सुसज्जित हैं।

पोस्ट लेखक :- तनवीर सिंह सारंगदेवोत (लक्ष्मणपुरा -मेवाड़)
मूर्ति के हाथ मे जो डमरू देख रहे हो ना, वो पत्थर का है। ये तो कुछ भी नहीं है, डमरू पर जो रस्सी देख रहे हो ना, वह भी पत्थर की है।
और तो और आप पत्थर की रस्सी के नीचे उंगली भी डाल सकते हो इतनी जगह है।...
हुआ ना आश्चर्य।

अब जरा सोचिए बिना किसी तकनीक के क्या केवल छेनी और हथौड़ी से यह सब कैसे संभव है।
एक हल्की सी गलत चोट क्या पूरी मूर्ति को खराब नहीं कर सकती थी।
और, अगर छेनी -हथौड़े से संभव है तो आज इतनी तकनीक के बावजूद भी इतनी सटीकता से कोई इसकी प्रतिलिपि क्यों नहीं बना पाता है।
ऐसे हजारों आश्चर्य है सनातन में लेकिन कुछ वामपंथी इतिहासकारों ने इनको आश्चर्य ही बनाकर रहने दिया किसी के सामने आने ही नहीं दिया और हमारी विडंबना देखिए कि हम बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन हमें हमारे पूर्वजों द्वारा बनाई गई इन महान कलाकृतियों का ज्ञान भी नहीं है।

धन्य हैं हमारे वह पूर्वज जिन्होंने यह सब कुछ बनाया...
धन्य है हमारी सनातन संस्कृति।

#सनातनहमारीपहचान

केशव मन्दिर,कर्नाटक