ऐतिहासिक मंदिर और उनकी कथा
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*इस चैनल मे हमारे मंदिरों की कथा के आडियो विडियो और हमारी सभ्यता से जुड़ी जगह का प्रसारण किया जाता है*

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◆◆◆● *महर्षि चरक* ●◆◆◆

*♦️चरक महान आर्युवदाचार्थ थे। आप कुषाण सम्राट कनिष्क प्रथम के राजवैद्य थे। कनिष्क प्रथम का काल सन 200का है । आपका जन्म शल्यक्रिया के जनक महर्षि सुश्रुत तथा व्याकरणाचार्य महर्षि पतत्रजलि के भी पूर्व हुआ था । आपका प्रसिद्ध ग्रन्थ चरक संहिता है। इस ग्रन्थ मूल पाठ वैद्य अग्निवेश ने लिखा था। चरक जी ने उसमें संशोधन कर तथा उसमें नए प्रकरण जोड कर उसे अधिक उपयोगी एवं प्रभावशाली बनाया।*

*♦️आपने आयुर्वेद के क्षेत्र में अनेक शोधकिए तथा अनेकों संशोधन आलेख लिखे, जो बादमें चरक संहिता नाम से प्रसिद्ध हुई । चरक संहिता मूल में संस्कृत भाषा में लिखी गई है । वर्तमान में उसका हिन्दी अनुवाद भी उपलब्धहोता है । आयुर्वेद का ज्ञान प्राप्त करने के लिए यह ग्रन्थ अत्यन्त उपयोगी होने से इसे पाठयक्रम में भी स्थान दिया गया है ।*

*♦️चरक संहिता के आठ विभाग है।*

*(1) सूत्र स्थान (2) निदानस्थान (3) विमानस्थान (4) शारीरस्थान (5) इन्द्रियस्थान (6) चिकित्सास्थान (7) कल्पस्थान एवं (8) सिद्धिस्थान*

*🔶इन आठ विभागों में शरीर के भिन्न भिन्न अंगो की बनावट, वनस्पतियों के गुण तथा परिचय आदि का वर्णन है।*

*♦️महर्षि चरक की यह मान्यता थी कि एक चिकित्सक के लिए महज ज्ञानी या विद्धान होना ही पर्याप्त नहीं है अपितु उसे दयालु और सदाचारी भी होना चाहिए । चिकित्सक बनने से पूर्व ली जानेवाली प्रतिज्ञाओं का उल्लेख चरक संहिता में मिलता है । वैदिक काल में इन प्रतिज्ञाओं का पालन करना सभी वैद्यों के लिए आवश्यक माना जाता था ।*

*♦️चरक संहिता का अनुवाद अरबी तथा युरोपीय भाषाओं में भी हो चुका है । उन उन भाषाओं के विद्धानों ने इस ग्रन्थ पर टीकाएं भी लिखी हैं आयुर्वेद में महर्षि चरक अभूतपूर्व योगदान के लिए ही आपको आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान के महान सम्राट की उपाधी से सन्मानित किया गया था।*
रहस्यमयी जंगल --

यह रहस्यमयी पेड़ Crooked Forest Poland से है, अजीबोगरीब तरीके से इस जंगल के सारे पेड़ मुड़े हुए है ।। ऐसा नही है, की इससे इन पेड़ों की मजबूती पर कोई फर्क पड़ा है, यह पेड़ 50-50 फुट तक बड़े होते है ।।

संसार मे ऐसा बहुत कुछ है, जो मानवों की समझ से परे है ।। जब तक देवता खुद आकर नही बताते, हम बहुत से रहस्य शायद नही जान पाए। ।


*दिपावली आ रही है दोस्तो.सामान ऐसी जगह से खरीदे जिसका दूकानदार आपकी वजह से दशहरा दिपावली मना सके और उन दुकानदारो का विशेष ध्यान रखे जिन्होने CAA के विरोध मे दुकान बंद की थी।*

*उन दुकानदार का भी ध्यान रखे जिनकी औलादे सोशल मिडिया पर राम मंदिर को तोड़ने का कैंपेन चला रही है। इनका आर्थिक और सामाजिक बहिष्कार करे।*

*आपकी वजह से कोई दिपावली मना सके ऐसे दुकानदार से सामान ले ऐसे दुकान से कभी नही जो अपनी कमाई का एक हिस्सा आतंकी संगठनो को देता हो।*

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*🛕 अंबाबाई मंदिर, कोल्हापुर(महाराष्ट्र)*

*🔶श्री अंबाबाई मंदिर भारत के विभिन्न शक्ति पीठों मैं एक है जो महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित है। चालुक्य साम्राज्य के समय में या लगभग 700 AD में इस मंदिर का निर्माण होने का अनुमान किया गया है।*

*🔶 एक काला पत्थर के मंच पर, देवी अंबाबाई की चार हस्थों वाली प्रतिमा, सिर पर मकुट पहने हुए बनाया गया है और गहनों से सजाया हुआ मुकुट लगभग चालीस किलोग्राम वजन का अद्भुत प्रदर्शन है। काले पत्थर में निर्मित अंबाबाई की प्रतिमा की ऊंचाई करीब 3 फीट है।*

*🔶 इसी मंदिर के अन्दर नवग्रहों, भगवान सूर्य, महिषासुर मर्दिनी, विठ्ठल रखमाई, शिवजी, विष्णु, तुलजा भवानी आदी देवी देवताओं को पूजा करने का स्थल भी दिखाई देते हैं।*

*🔶 अन्य पवित्र मंदिरों में देवीजी पूर्व या उत्तर दिशा को देखते हुए मिलते हैं लेकिन यहाँ देवी अंबाबाई पश्चिम दिशा को निरीक्षण करते हुए मिलते है। वहाँ पश्चिमी दीवार पर एक छोटी सी खुली खिड़की मिलती है, जिसके माध्यम से सूरज की किरणें हर साल मार्च और सितंबर महीनों के 21 तारीख के आसपास तीन दिनों के लिए देवीजी की मुख मंडल को रोशनी करते हुए इनके पद कमलों में शरण प्राप्त करते हैं।*
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🕰➡️2.20

*🙏🏻💐*🛕 श्री गंगेश्वर मंदिर, दमन एंड दियू*

*🔶 श्री गंगेश्वर मंदिर भारत के गुजरात के दीव शहर से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर फदुम गांव में है। इस मंदिर को गुजरात के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। यह मंदिर पूर्ण रूप से भगवान शिव को समर्पित है।*

*🔶 गंगेश्‍वर शब्‍द का अर्थ भगवान शिव होता है जो अपनी जटाओं में गंगा समेटे हुए हैं। यह मंदिर अपने आप में अद्भुत मंदिर है। यह मंदिर गुफा में स्थित है, जो समुद्र तट पर है और समुद्र की लहरें शिवलिंग पर आती रहती हैं।*

*🔶 पौराणिक कथाओं के अनुसार जब पांचों पांडव अपने वनवास में थे, तो उसी दौरान इस मंदिर का निर्माण किया था। पांचों पांडव यहां प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा करने आते थे। गंगेश्वर मंदिर में शिव रात्रि का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।💐🙏🏻*

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🕰➡️4.06

*🙏🏻💐तिरुपति बालाजी मंदिर💐🙏🏻*

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हजारो सालों पहले बना यह #शिवमंदिर, क्या वास्तव में मानवों द्वारा निर्मित है ??

यह मंदिर तमिलनाडु के Kulumalagai पंचायत में स्थित है । यह मंदिर एक ही पहाड़ को काटकर बना है । पहाड़ो पर तो यह मंदिर है ही ....लेकिन यह मंदिर पहाड़ो को काटकर भी उससे भी 25 फिट गहरा है ।

क्या यह मंदिर किसी मानव द्वारा निर्मित लगता भी है ?? या फिर यह कोई UFO है ??

अंग्रेजी चैनल पर एक सीरीज चलाई गई थी #Ancient_alians अर्थात प्राचीन परग्रही ।। जो धरती पर आते थे । हमारे प्रत्येक पुराणों में देवताओं का अन्य लोको से आना लिखा है, हमारे प्रत्येक पुराणों धर्मग्रंथों आदि में वर्णित है, देवता अपना विमान लेकर आते थे, ओर वह हवा से भी ज़्यादा तेज गति से चलने वाले होते थे, की पलक झपकते ही आंखों से ओझल । महाभारत में वेदव्यास पांडवों से जब भी मिलने आते है, उनका आना भी अचानक, ओर जाना भी अचानक ही होता था ।


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नंदी ! ऐसा लगता है कि पत्थर में तब्दील होने से पहले यह एक प्राणी की तरह जीवित थे ।

केवल एक पत्थर को काटकर बने नंदी की प्रतिमा को देखिए, इसकी लंबाई 8.23 मीटर और ऊंचाई 4.5 मीटर है । यह दुनियाँ के सबसे बड़े नंदी प्रतिमाओं में से एक है ।

(लेपाक्षी मंदिर, आंध्रप्रदेश)