मुगल कभी भी चित्तौड पर कब्जा नही कर पाये वरना ताजमहल की तरह राणा कुम्भा का बनवाया यह किर्तिस्तंभ भी मुगलो की देन हो गया होता।। जय हिंद जय मेवाड़ 🇮🇳🕉️🚩🏹श्री राम🙏
*🛕 रघुनाथ मंदिर, श्रीनगर*
*🔶 कश्मीर की खोई विरासत और सनातन परंपरा को सहेजने का कार्य शुरू हो रहा है। करीब तीन दशक पहले इस्लामिक आतंकियों और मुसलमानो द्वारा जला दिए गए श्रीनगर के एतिहासिक रघुनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य आरंभ हो गया है। मज़हबी भीड़ ने भगवान रघुनाथ की प्रतिमा को खंडित कर झेलम में फेंक दिया था। मंदिर के साथ-साथ वहां झेलम के घाट का भी सौंदर्यीकरण किया जाएगा।*
*🔶 डोगरा शासक महाराजा रणबीर सिंह ने करीब 160 वर्ष पूर्व श्रीनगर में झेलम नदी के किनारे इसका निर्माण कराया था। मंदिर में कई अमूल्य पांडुलिपियां और धर्मग्रंथों पर आधारित पुस्तकालय भी थी।*
*🔶कश्मीर में इस्लामिक आतंकवाद का दौर शुरू होने से पहले भी यह मंदिर मुसलमानो के निशाने पर था। 1989 में मुसलमानो की भीड़ ने मंदिर पर पहला हमला बोला। इसके बाद 24 फरवरी 1990, 13 अप्रैल 1991 और फिर 8 मई 1992 को इस हमले हुए। मंदिर में प्रतिष्ठित भगवान श्रीराम और माता सीता की प्रतिमाओं को खंडित कर झेलम में फेंक दिया गया। यज्ञशाला बर्बाद कर दी गई और पुस्तकालय जला दी गई थी।*
*🔶 कश्मीर की खोई विरासत और सनातन परंपरा को सहेजने का कार्य शुरू हो रहा है। करीब तीन दशक पहले इस्लामिक आतंकियों और मुसलमानो द्वारा जला दिए गए श्रीनगर के एतिहासिक रघुनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य आरंभ हो गया है। मज़हबी भीड़ ने भगवान रघुनाथ की प्रतिमा को खंडित कर झेलम में फेंक दिया था। मंदिर के साथ-साथ वहां झेलम के घाट का भी सौंदर्यीकरण किया जाएगा।*
*🔶 डोगरा शासक महाराजा रणबीर सिंह ने करीब 160 वर्ष पूर्व श्रीनगर में झेलम नदी के किनारे इसका निर्माण कराया था। मंदिर में कई अमूल्य पांडुलिपियां और धर्मग्रंथों पर आधारित पुस्तकालय भी थी।*
*🔶कश्मीर में इस्लामिक आतंकवाद का दौर शुरू होने से पहले भी यह मंदिर मुसलमानो के निशाने पर था। 1989 में मुसलमानो की भीड़ ने मंदिर पर पहला हमला बोला। इसके बाद 24 फरवरी 1990, 13 अप्रैल 1991 और फिर 8 मई 1992 को इस हमले हुए। मंदिर में प्रतिष्ठित भगवान श्रीराम और माता सीता की प्रतिमाओं को खंडित कर झेलम में फेंक दिया गया। यज्ञशाला बर्बाद कर दी गई और पुस्तकालय जला दी गई थी।*
सूडान की इस प्राचीन गुफ़ा का नाम जानते है आप ?
कौरव गुफा -- और क्या प्रमाण चाहिए की पूरे विश्व का एक धर्म सनातन धर्म था ।
El Kurru Caves हिंदी में इल कुरु गुफा । आप स्वयं से गूगल भी कर सकते है ।
इल = चंद्रवंश की प्रथम देवी इला का नाम अर्थात कुरुवंश की कुलदेवी इला
कुरु = कुरुवंश , इस नाम को कौन नही जानता, भीष्म, अर्जुन, दुर्योधन आदि कुरु राज्य के राजकुमार ही थे। जैसे "श्री" भी लक्ष्मी का नाम है, अफ्रीका में श्री की जगह अल- इल इस्तमाल करते है ।
यह गुफाएं ईसा से 3000 साल पहले की पुरानी अर्थात 5000 वर्ष पुरानी, और उस समय हिन्दू मेथोलॉजी के अनुसार महाभारत का महायुद्ध हुआ था ।। यह गुफाएं ऐसी ही प्रतीत होती है, जैसे किसी भट्टी में इन गुफाओं को तपाया गया हो, यहां पानी का नामोनिशान तक नही, विज्ञान कहता है, ऐसी भौगोलिक स्तिथी का निर्माण तभी होता है, जब जापान से भी हजारो गुणा शक्तिशाली परमाणु या अन्य रासायनिक उस स्थान पर गिरे हथियार गिरे ....
यह स्थान ठीक उसी तरह की है । ओर यहां जो चित्रकारी हुई है, यह कौरव/पांडब सेना को गुप्त रूप से गाइडलाइन करने के लिए बनी है, क्यो की गुफाओं, सुरंगों, गुप्त रास्तों का निर्माण , प्रदर्शनी के लिए तो होता नही है, ओर न ही वह मार्ग हर किसी को बताया जाता है । केवल राजवंशों एवं प्रमुख सेनापतियों को ही इस सुरंग मार्ग का पता होता है, युद्धकाल में इन सुरंगों में राजपुत्रो के साथ कोई गाइड रहे या नही रहें, यह चित्र ही गाइड का काम कर दे, इसी लिए इन चित्रों का निर्माण हुआ था
यह गुफ़ा कौरवों की थी, जिसका महाभारत युद्ध मे नाश हो गया, आज भी यह गुफाएं ऐसी है, जैसे भयंकर तरीके से इन्हें जलाया गया हो ।
अब कोई दुर्योधय तो जमीन का पट्टा लेकर आने से रहा, की यह जमीन मेरी है । हमे तो नाम से ही मानना पड़ेगा ।
कौरव गुफा -- और क्या प्रमाण चाहिए की पूरे विश्व का एक धर्म सनातन धर्म था ।
El Kurru Caves हिंदी में इल कुरु गुफा । आप स्वयं से गूगल भी कर सकते है ।
इल = चंद्रवंश की प्रथम देवी इला का नाम अर्थात कुरुवंश की कुलदेवी इला
कुरु = कुरुवंश , इस नाम को कौन नही जानता, भीष्म, अर्जुन, दुर्योधन आदि कुरु राज्य के राजकुमार ही थे। जैसे "श्री" भी लक्ष्मी का नाम है, अफ्रीका में श्री की जगह अल- इल इस्तमाल करते है ।
यह गुफाएं ईसा से 3000 साल पहले की पुरानी अर्थात 5000 वर्ष पुरानी, और उस समय हिन्दू मेथोलॉजी के अनुसार महाभारत का महायुद्ध हुआ था ।। यह गुफाएं ऐसी ही प्रतीत होती है, जैसे किसी भट्टी में इन गुफाओं को तपाया गया हो, यहां पानी का नामोनिशान तक नही, विज्ञान कहता है, ऐसी भौगोलिक स्तिथी का निर्माण तभी होता है, जब जापान से भी हजारो गुणा शक्तिशाली परमाणु या अन्य रासायनिक उस स्थान पर गिरे हथियार गिरे ....
यह स्थान ठीक उसी तरह की है । ओर यहां जो चित्रकारी हुई है, यह कौरव/पांडब सेना को गुप्त रूप से गाइडलाइन करने के लिए बनी है, क्यो की गुफाओं, सुरंगों, गुप्त रास्तों का निर्माण , प्रदर्शनी के लिए तो होता नही है, ओर न ही वह मार्ग हर किसी को बताया जाता है । केवल राजवंशों एवं प्रमुख सेनापतियों को ही इस सुरंग मार्ग का पता होता है, युद्धकाल में इन सुरंगों में राजपुत्रो के साथ कोई गाइड रहे या नही रहें, यह चित्र ही गाइड का काम कर दे, इसी लिए इन चित्रों का निर्माण हुआ था
यह गुफ़ा कौरवों की थी, जिसका महाभारत युद्ध मे नाश हो गया, आज भी यह गुफाएं ऐसी है, जैसे भयंकर तरीके से इन्हें जलाया गया हो ।
अब कोई दुर्योधय तो जमीन का पट्टा लेकर आने से रहा, की यह जमीन मेरी है । हमे तो नाम से ही मानना पड़ेगा ।
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*अन्नामलाई (karthigai) दीपम*
🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔
🛑 *केरल, कर्नाटक और मुख्य रूप से तमिलनाडु में अन्नामलाई दीपम बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है।*
🛑 *इस दिन भगवान शिव की आरती होती है और पूरा शहर रौशनी, अतिशबाजी और दीपो से जगमग हो जाता है।*
🛑 *इस Karthigai दीपम का वर्णन 200-300 ईसा पूर्व लिखी गयी तमिलनाडु की संगम साहित्य की कविताओं में भी है।*
🛑 *तमिलनाडु में ऐसी मान्यता है थिरुवनामालाई शहर के श्री अन्नामलैयार पहाड़ी पर शिव की का वास है और वर्ष में इस दिन शाम 5 बजे पूरे शहर वासी दीपमाला और आरती कर स्वयं को शिव जी के समीप पाते है और इस पवित्र पहाड़ी पर अग्नि प्रज्वलित की जाती है।*
*अन्नामलाई (karthigai) दीपम*
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🛑 *केरल, कर्नाटक और मुख्य रूप से तमिलनाडु में अन्नामलाई दीपम बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है।*
🛑 *इस दिन भगवान शिव की आरती होती है और पूरा शहर रौशनी, अतिशबाजी और दीपो से जगमग हो जाता है।*
🛑 *इस Karthigai दीपम का वर्णन 200-300 ईसा पूर्व लिखी गयी तमिलनाडु की संगम साहित्य की कविताओं में भी है।*
🛑 *तमिलनाडु में ऐसी मान्यता है थिरुवनामालाई शहर के श्री अन्नामलैयार पहाड़ी पर शिव की का वास है और वर्ष में इस दिन शाम 5 बजे पूरे शहर वासी दीपमाला और आरती कर स्वयं को शिव जी के समीप पाते है और इस पवित्र पहाड़ी पर अग्नि प्रज्वलित की जाती है।*
हजारों वर्ष प्राचीन मंदिर को गौर से देखें। महाबलीपुरम में है जो कि एक बड़े पत्थर को ही मंदिर की तरह तैयार कर दिया गया है।
सिर्फ़ एक पत्थर से बनाया गया अद्भुत रथ। महाबलीपुरम में ऐसे कई मंदिर है कुछ समुद्र के नीचे, कुछ समुद्र के ऊपर...।
सनातन धर्म सर्वेश्रेष्ठ है।
सिर्फ़ एक पत्थर से बनाया गया अद्भुत रथ। महाबलीपुरम में ऐसे कई मंदिर है कुछ समुद्र के नीचे, कुछ समुद्र के ऊपर...।
सनातन धर्म सर्वेश्रेष्ठ है।
🚩 *"हिन्दू"* शब्द की खोज 🚩
*"हीनं दुष्यति इति हिन्दूः।”*
*अर्थात* जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिन्दू कहते हैं।
'हिन्दू' शब्द, करोड़ों वर्ष प्राचीन,
संस्कृत शब्द है!
यदि संस्कृत के इस शब्द का सन्धि विछेदन करें तो पायेंगे ....
*हीन+दू* = हीन भावना + से दूर
*अर्थात* जो हीन भावना या दुर्भावना से दूर रहे, मुक्त रहे, वो हिन्दू है !
हमें बार-बार, सदा झूठ ही बतलाया जाता है कि हिन्दू शब्द मुगलों ने हमें दिया, जो *"सिंधु" से "हिन्दू"* हुआ l
*हिन्दू शब्द की वेद से ही उत्पत्ति है !*
जानिए, कहाँ से आया हिन्दू शब्द, और कैसे हुई इसकी उत्पत्ति ?
कुछ लोग यह कहते हैं कि *हिन्दू शब्द सिंधु से बना है* औऱ यह फारसी शब्द है। परंतु ऐसा कुछ नहीं है!
ये केवल झुठ फ़ैलाया जाता है।
हमारे "वेदों" और "पुराणों" में *हिन्दू शब्द का उल्लेख* मिलता है। आज हम आपको बता रहे हैं कि हमें हिन्दू शब्द कहाँ से मिला है!
"ऋग्वेद" के *"ब्रहस्पति अग्यम"* में हिन्दू शब्द का उल्लेख इस प्रकार आया हैं :-
*“हिमलयं समारभ्य*
*यावत इन्दुसरोवरं ।*
*तं देवनिर्मितं देशं*
*हिन्दुस्थानं प्रचक्षते।*
*अर्थात : हिमालय से इंदु सरोवर तक, देव निर्मित देश को हिंदुस्तान* कहते हैं!
केवल *"वेद"* ही नहीं, बल्कि *"शैव" ग्रन्थ* में हिन्दू शब्द का उल्लेख इस प्रकार किया गया हैं:-
*"हीनं च दूष्यतेव्* *हिन्दुरित्युच्च ते प्रिये।”
अर्थात :- जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिन्दू कहते हैं!
इससे मिलता जुलता लगभग यही श्लोक *"कल्पद्रुम"* में भी दोहराया गया है :
*"हीनं दुष्यति इति हिन्दूः।”*
*अर्थात* जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिन्दू कहते हैं।
*"पारिजात हरण"* में हिन्दू को कुछ इस प्रकार कहा गया है :-
*”हिनस्ति तपसा पापां*
*दैहिकां दुष्टं ।*
*हेतिभिः श्त्रुवर्गं च*
*स हिन्दुर्भिधियते।”*
अर्थात :- जो अपने तप से शत्रुओं का, दुष्टों का, और पाप का नाश कर देता है, वही हिन्दू है !
*"माधव दिग्विजय"* में भी हिन्दू शब्द को कुछ इस प्रकार उल्लेखित किया गया है :-
*“ओंकारमन्त्रमूलाढ्य*
*पुनर्जन्म द्रढ़ाश्य:।*
*गौभक्तो भारत:*
*गरुर्हिन्दुर्हिंसन दूषकः ।*
*अर्थात : वो जो "ओमकार"* को ईश्वरीय धुन माने, कर्मों पर विश्वास करे, गौपालक रहे, तथा बुराइयों को दूर रखे, वो हिन्दू है!
केवल इतना ही नहीं, हमार
*"ऋगवेद" (८:२:४१)* में
*विवहिन्दू* नाम के बहुत ही पराक्रमी और दानी राजा का वर्णन मिलता है, जिन्होंने ४६,००० गौमाता दान में दी थी! और *"ऋग्वेद मंडल"* में भी उनका वर्णन मिलता है l
बुराइयों को दूर करने के लिए सतत प्रयास रत रहनेवाले, सनातन धर्म के पोषक व पालन करने वाले हिन्दू हैं।
,,*"हिनस्तु दुरिताम🙏🏻🙏🏻
*औरो को भी बतायें।*
*जय सियाराम*
*जय श्री राधेश्याम*
*हर हर महादेव*
*जय वीर बजरंगी*
🙏🏻🚩🕉️📿
*"हीनं दुष्यति इति हिन्दूः।”*
*अर्थात* जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिन्दू कहते हैं।
'हिन्दू' शब्द, करोड़ों वर्ष प्राचीन,
संस्कृत शब्द है!
यदि संस्कृत के इस शब्द का सन्धि विछेदन करें तो पायेंगे ....
*हीन+दू* = हीन भावना + से दूर
*अर्थात* जो हीन भावना या दुर्भावना से दूर रहे, मुक्त रहे, वो हिन्दू है !
हमें बार-बार, सदा झूठ ही बतलाया जाता है कि हिन्दू शब्द मुगलों ने हमें दिया, जो *"सिंधु" से "हिन्दू"* हुआ l
*हिन्दू शब्द की वेद से ही उत्पत्ति है !*
जानिए, कहाँ से आया हिन्दू शब्द, और कैसे हुई इसकी उत्पत्ति ?
कुछ लोग यह कहते हैं कि *हिन्दू शब्द सिंधु से बना है* औऱ यह फारसी शब्द है। परंतु ऐसा कुछ नहीं है!
ये केवल झुठ फ़ैलाया जाता है।
हमारे "वेदों" और "पुराणों" में *हिन्दू शब्द का उल्लेख* मिलता है। आज हम आपको बता रहे हैं कि हमें हिन्दू शब्द कहाँ से मिला है!
"ऋग्वेद" के *"ब्रहस्पति अग्यम"* में हिन्दू शब्द का उल्लेख इस प्रकार आया हैं :-
*“हिमलयं समारभ्य*
*यावत इन्दुसरोवरं ।*
*तं देवनिर्मितं देशं*
*हिन्दुस्थानं प्रचक्षते।*
*अर्थात : हिमालय से इंदु सरोवर तक, देव निर्मित देश को हिंदुस्तान* कहते हैं!
केवल *"वेद"* ही नहीं, बल्कि *"शैव" ग्रन्थ* में हिन्दू शब्द का उल्लेख इस प्रकार किया गया हैं:-
*"हीनं च दूष्यतेव्* *हिन्दुरित्युच्च ते प्रिये।”
अर्थात :- जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिन्दू कहते हैं!
इससे मिलता जुलता लगभग यही श्लोक *"कल्पद्रुम"* में भी दोहराया गया है :
*"हीनं दुष्यति इति हिन्दूः।”*
*अर्थात* जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिन्दू कहते हैं।
*"पारिजात हरण"* में हिन्दू को कुछ इस प्रकार कहा गया है :-
*”हिनस्ति तपसा पापां*
*दैहिकां दुष्टं ।*
*हेतिभिः श्त्रुवर्गं च*
*स हिन्दुर्भिधियते।”*
अर्थात :- जो अपने तप से शत्रुओं का, दुष्टों का, और पाप का नाश कर देता है, वही हिन्दू है !
*"माधव दिग्विजय"* में भी हिन्दू शब्द को कुछ इस प्रकार उल्लेखित किया गया है :-
*“ओंकारमन्त्रमूलाढ्य*
*पुनर्जन्म द्रढ़ाश्य:।*
*गौभक्तो भारत:*
*गरुर्हिन्दुर्हिंसन दूषकः ।*
*अर्थात : वो जो "ओमकार"* को ईश्वरीय धुन माने, कर्मों पर विश्वास करे, गौपालक रहे, तथा बुराइयों को दूर रखे, वो हिन्दू है!
केवल इतना ही नहीं, हमार
*"ऋगवेद" (८:२:४१)* में
*विवहिन्दू* नाम के बहुत ही पराक्रमी और दानी राजा का वर्णन मिलता है, जिन्होंने ४६,००० गौमाता दान में दी थी! और *"ऋग्वेद मंडल"* में भी उनका वर्णन मिलता है l
बुराइयों को दूर करने के लिए सतत प्रयास रत रहनेवाले, सनातन धर्म के पोषक व पालन करने वाले हिन्दू हैं।
,,*"हिनस्तु दुरिताम🙏🏻🙏🏻
*औरो को भी बतायें।*
*जय सियाराम*
*जय श्री राधेश्याम*
*हर हर महादेव*
*जय वीर बजरंगी*
🙏🏻🚩🕉️📿