यह गणेश जी की मूर्ति बिरला संग्रालय में रखी है 5000 साल पुरानी
#नारी_लता
हिमालय मे 20 वर्ष में एक बार स्त्री के आकार के फूल खिलते हैं जिसे नारी लता कहते हैं।
इसकी बनावट की वजह से इसे #नारीलता के नाम से जाना जाता है और ये रहस्यों की भूमि यानि हिमालय में पाया जाता है...
क्या कभी आपने किसी पेड़ पर महिलायें उगती हैं ऐसा सुना है नहीं ना...
शायद आपको जानकर यकीन नहीं होगा पर ये सच्चाई है।
ये रहस्यों की भूमि यानि #हिमालय में पाया जाता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि ये फूल 20 साल में एक बार खिलते हैं और देखने पर प्रकृति की अनोखी कलाकृति जैसे मालूम होते हैं।
जब आप इन्हें देखेंगे तो पेड़ पर लटकी हुई गुड़िया की तरह मालूम होती हैं परंतु वास्तव में ये फूल ही होते हैं।
बताया जाता है कि ये श्रीलंका और #थाईलैंड में भी पाये जाते हैं।
जबकि दुर्लभ होने के कारण इन्हें आमतौर पर देखना असंभव होता है।
हिमालय की वादियां अनेक और विचित्र रहस्यों के लिये प्रसिद्ध हैं।
क्योकि ये भगवान शिव का घर कहा जाता है जिसके कारण से यहां करोड़ों वर्षों से ऋषि मुनियों के तपस्या करने की जानकारियां भी सामने आती हैं।
जिनका सम्पूर्ण उल्लेख पुराणों में भी मिलता है।
जबकि इस वृक्ष और फूल के बारे में फिलहाल अभी कुछ अधिक शोध नहीं हुआ है मगर ये बीस साल के अंतर को वैज्ञानिक भी प्रकृति का एक और आश्चर्य ही मानते हैं।
ऑर्किडासिए परिवार का ये फूल हाबेनरिया प्रजाति का है।
हाबेनरिया की सभी प्रजातियों के फूल ट्यूबर युक्त स्थलीय ऑर्किड होते हैं।
ये फूल #श्रीलंका में #लियाथाबरा_माला के नाम से जाना जाता है, जिसकी 10 अलग-अलग प्रजातियां पाई जाती हैं।
वहीं थाईलैंड में इस फूल को #नारीपोल कहा जाता है।
हिमालय मे 20 वर्ष में एक बार स्त्री के आकार के फूल खिलते हैं जिसे नारी लता कहते हैं।
इसकी बनावट की वजह से इसे #नारीलता के नाम से जाना जाता है और ये रहस्यों की भूमि यानि हिमालय में पाया जाता है...
क्या कभी आपने किसी पेड़ पर महिलायें उगती हैं ऐसा सुना है नहीं ना...
शायद आपको जानकर यकीन नहीं होगा पर ये सच्चाई है।
ये रहस्यों की भूमि यानि #हिमालय में पाया जाता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि ये फूल 20 साल में एक बार खिलते हैं और देखने पर प्रकृति की अनोखी कलाकृति जैसे मालूम होते हैं।
जब आप इन्हें देखेंगे तो पेड़ पर लटकी हुई गुड़िया की तरह मालूम होती हैं परंतु वास्तव में ये फूल ही होते हैं।
बताया जाता है कि ये श्रीलंका और #थाईलैंड में भी पाये जाते हैं।
जबकि दुर्लभ होने के कारण इन्हें आमतौर पर देखना असंभव होता है।
हिमालय की वादियां अनेक और विचित्र रहस्यों के लिये प्रसिद्ध हैं।
क्योकि ये भगवान शिव का घर कहा जाता है जिसके कारण से यहां करोड़ों वर्षों से ऋषि मुनियों के तपस्या करने की जानकारियां भी सामने आती हैं।
जिनका सम्पूर्ण उल्लेख पुराणों में भी मिलता है।
जबकि इस वृक्ष और फूल के बारे में फिलहाल अभी कुछ अधिक शोध नहीं हुआ है मगर ये बीस साल के अंतर को वैज्ञानिक भी प्रकृति का एक और आश्चर्य ही मानते हैं।
ऑर्किडासिए परिवार का ये फूल हाबेनरिया प्रजाति का है।
हाबेनरिया की सभी प्रजातियों के फूल ट्यूबर युक्त स्थलीय ऑर्किड होते हैं।
ये फूल #श्रीलंका में #लियाथाबरा_माला के नाम से जाना जाता है, जिसकी 10 अलग-अलग प्रजातियां पाई जाती हैं।
वहीं थाईलैंड में इस फूल को #नारीपोल कहा जाता है।
यह शिवजी की लिंगाकार मूर्ति है, अति प्राचीन है । कम से कम 3000 वर्ष पुरानी, ज़्यादा भी हो सकती है ।।
शिवजी की यह मूर्ति एक ही पत्थर को काटकर बनाई गई है, इस मूर्ति की अंगुली की तरफ आप देखें , चेहरे के हाव भाव देखें । बिना प्राण के भी यह मूर्ति हम जीवित लोगो से ज़्यादा जीवंत है ।
फ़ोटो में ही ऐसे लग रहा है जैसे मूर्ति अभी बात करेगी ।
शिवजी की यह मूर्ति एक ही पत्थर को काटकर बनाई गई है, इस मूर्ति की अंगुली की तरफ आप देखें , चेहरे के हाव भाव देखें । बिना प्राण के भी यह मूर्ति हम जीवित लोगो से ज़्यादा जीवंत है ।
फ़ोटो में ही ऐसे लग रहा है जैसे मूर्ति अभी बात करेगी ।
यह प्रतिमा इस बात की सबूत है कि आज से 3000 साल पहले तकनीकों के मामले में भारतवर्ष सबसे आगे था ।
इस प्रतिमा के मुख में एक पत्थर की गेंद है जिसे आप छू सकते हैं.. हिला सकते हैं..लेकिन किसी भी तरह से मुख से बाहर नहीं निकाल सकते..।
मूर्ति एक ही पत्थर से बनी है, जरा सोचिए गेंद मुख में कैसे स्थापित की गई होगी ?
है ना अचंभित करने वाली बात ?
(Uthirakosamangai Mangalanatha swamy temple, Tamilnadu)
इस प्रतिमा के मुख में एक पत्थर की गेंद है जिसे आप छू सकते हैं.. हिला सकते हैं..लेकिन किसी भी तरह से मुख से बाहर नहीं निकाल सकते..।
मूर्ति एक ही पत्थर से बनी है, जरा सोचिए गेंद मुख में कैसे स्थापित की गई होगी ?
है ना अचंभित करने वाली बात ?
(Uthirakosamangai Mangalanatha swamy temple, Tamilnadu)
भारत मे तो सुई भी नहीं बनती थी तो क्या ये तुम्हारे गोरे fathers ने बनाया है क्या ??????
कह दो बाबर और मैकाले की secular & Libranduo से काग़ज़ पर भी बना के दिखाओ तो मान जाएंगे तुम्हें
पत्थर पर नक्काशी
#कोदण्ड_राम_मंदिर
पूर्व गोदावरी
आंध्र प्रदेश
चित्र ज़ूम कीजिये ,
कागज़ पर भी इतना सुंदर चित्रांकन मुश्किल है ।
🚩जय श्री राम🚩🚩
कह दो बाबर और मैकाले की secular & Libranduo से काग़ज़ पर भी बना के दिखाओ तो मान जाएंगे तुम्हें
पत्थर पर नक्काशी
#कोदण्ड_राम_मंदिर
पूर्व गोदावरी
आंध्र प्रदेश
चित्र ज़ूम कीजिये ,
कागज़ पर भी इतना सुंदर चित्रांकन मुश्किल है ।
🚩जय श्री राम🚩🚩
हम कितने भी आधुनिक हो जाएं लेकिन अपने पूर्वजों की कुशलता के स्तर का मुकाबला नहीं कर सकते ।
यह कोणार्क के जगमोहन मंडप के मुख्य प्रवेश द्वार पर निर्मित ढांचा है । इसे 700 वर्ष पूर्व बनाया गया था इसकी लंबाई 38 मीटर है । हमारे पूर्वजों द्वारा पत्थरों को तराश कर बनाई गई ऐसी नक्काशियाँ हमें दुनियाँ के सभी धर्मों के बीच सिर ऊंचा करके जीने का मौका देती हैं ।
(कोणार्क सूर्य मंदिर, उड़ीसा)
यह कोणार्क के जगमोहन मंडप के मुख्य प्रवेश द्वार पर निर्मित ढांचा है । इसे 700 वर्ष पूर्व बनाया गया था इसकी लंबाई 38 मीटर है । हमारे पूर्वजों द्वारा पत्थरों को तराश कर बनाई गई ऐसी नक्काशियाँ हमें दुनियाँ के सभी धर्मों के बीच सिर ऊंचा करके जीने का मौका देती हैं ।
(कोणार्क सूर्य मंदिर, उड़ीसा)
भारत_के_महान_प्रसिद्ध_तीर्थ_स्थल.pdf
1.1 MB
भारत के महान प्रसिद्ध तीर्थ स्थल.pdf
🚩रायपुर (भीलवाड़ा राजस्थान) से लगभग 85 KM की दूरी पर रसीद हरियाली में स्थित है, यह जटमाई माता मन्दिर । 1700 सालों से यह मंदिर पानी में डूबा हुआ है और नदी की धारा उसके बगल से ही बहती है,लेकिन मन्दिर जस्य का तस खड़ा है ।
*न जाने कौन सी तकनीक से बनाया गया है ।
#सच में सनातनी इंजीनियरिंग समझना नामुमकिन है । जरूर कोई दिव्य शक्ति थी हमारे पूर्वजों का जो इस निर्माण में मदद की होगी।
‼️🙏🌹 जय श्री राम🌹🙏🚩💪🔥🏹
*न जाने कौन सी तकनीक से बनाया गया है ।
#सच में सनातनी इंजीनियरिंग समझना नामुमकिन है । जरूर कोई दिव्य शक्ति थी हमारे पूर्वजों का जो इस निर्माण में मदद की होगी।
‼️🙏🌹 जय श्री राम🌹🙏🚩💪🔥🏹
The entire Ramayana is curved on river banks of Ayung river, Bali.