भारत की महान कला
राजस्थान के मूर्तिकारों द्वारा गढ़ी गई इस प्रतिमा को गौर से देखें
चेहरे पर जो घूंघट है वो भी उसी पत्थर से तराशा गया है जिस पत्थर से प्रतिमा बनी है
पत्थर के घूंघट से झांकता हुआ चेहरा यही है हमारे भारत की महान कला..!!
राजस्थान के मूर्तिकारों द्वारा गढ़ी गई इस प्रतिमा को गौर से देखें
चेहरे पर जो घूंघट है वो भी उसी पत्थर से तराशा गया है जिस पत्थर से प्रतिमा बनी है
पत्थर के घूंघट से झांकता हुआ चेहरा यही है हमारे भारत की महान कला..!!
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पहाड़ों की रानी' दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
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विश्व का प्राचीनतम बांध, कल्लनई बांध
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🇮🇳
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भगवान शिव की सबसे ऊँची प्रतिमा, नेपाल 🚩
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
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शारदम्बा मंदिर, शृंगेरी 🛕
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
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श्री जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा 🛕
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चेन्नाकेशव मंदिर , कर्नाटक 🛕
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नरसिम्हा स्वामी मंदिर, शोलिंगुर 🛕
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अम्बाजी मंदिर, गुजरात 🛕
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा।अभिमान 🚩
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समुद्र मंथन से निकला पवित्रतम रत्न, शंख
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अंजनेया स्वामी मंदिर, विजयवाड़ा 🛕
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Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
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*बृज दर्शन*
*हाऊ बिलाऊ मंदिर नंदगाँव*
क्या अपने हाऊ और बिलाऊ का नाम सुना है हाऊ या हउआ वो अजीब सी चीज़… जिससे डर लगता हो या हम बच्चो को डराते है सावधान हउआ आ जायेगा या हउआ है या किसी बात का डर बताना जैसे हौआ खडा करना…. ये अलग बात है कि किसी ने देखा नहीं था l अब प्रश्न ये है कि हऊआ या हाउ क्या है…
कौन है ये बिलाऊ क्या है ….
द्वापर युग की बात है जब भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ और जन्म होने क़े बाद उनके पिता वासुदेव यशोदा मैया के पास गोकुल छोड़ आए थे और जैसे ही कंस को इस बात का पता चला की मुझे मारने वाला कृष्ण पैदा हो चुका है तो उसने अपने सारे राक्षसों को एक एक कर के गोकुल कृष्ण को मारने के लिए भेजा जैसे की पूतना, कालनेमि, अघासुर, वकासुर, कागासुर आदि… लेकिन ये सभी बाल कृष्ण के हाथों मारे गए…. लेकिन नन्द बाबा जो की कृष्ण के धर्म पिता थे इन सब बातो से बहुत घबराते थे और उन्होने इस सब से बचने के लिए एक सुरक्षित स्थान की तलाश शुरु कर दी थी l
नंद बाबा को यह जानकारी मिली कि वृन्दावन क़े पास एक ऐसा स्थान है जो की शांडिल्य ऋषि क़े श्राप की वजह से राक्षसों क़े लिए वर्जित क्षेत्र था | राक्षसों क़े वहां पर अत्यंत उत्पात मचाने की वजह से क्रुद्ध शांडिल्य ऋषि ने उनको श्राप दे दिया की था जो भी राक्षस इस वन में आएगा तो वो पत्थर का हो जायेगा और उसके बाद कोई राक्षस वहां नहीं आया l ये जान कर नन्द बाबा ने उस स्थान पर बसने का निश्चय किया और परिवार और अपने गोप-गोपियों और गांव वालो क़े साथ वहां बस गए | उनके बसने क़े पश्चात उस गांव का नाम नंदगाँव पड़ा | जैसे ही कंस को इस बात का पता चला की कृष्ण अपने परिवार गांव वाले और गोपियों क़े साथ नंदगाँव चले गए है तो कंस ने अपने दो अनुचर राक्षस जिसके नाम हाऊ और बिलाऊ थे उनको कृष्ण भगवान को मारने क़े लिए नंदगांव भेजा उन दोनों राक्षसों हाऊ और बिलाऊ को शांडिल्य ऋषि क़े श्राप क़े बारे में पता नहीं था और ज्यों ही दोनों एक नए प्रकार के जानवर का रूप बनाकर नंदगाँव में घुसे त्यों ही वो दोनों पत्थर क़े हो गए l
द्वापर युग से कलयुग तक 5,000 साल बीतने के बाद भी उनको मुक्ति नहीं मिली और आज भी पत्थर बने पड़े हैं l यशोदा कुंड क़े पास आज भी वो मूर्तियां पड़ी हैं (जिन्हें मुगल आक्रमणकारियों ने खंडित कर दिया था) और उसके बाद फिर से वहां कोई भी राक्षस नहीं आया और इसके पश्चात भगवान कृष्ण अपने भ्राता बलराम, बाल सखाओ, गोप-गोपियों, नन्द बाबा और यशोदा मैया क़े साथ वहाँ सुख पूर्वक रहने लगे थे |
जब भगवान कृष्ण और बलराम अपने सखाओ क़े साथ खेलते थे तब दोनों भाई खेलने में इतने मगन हो जाते कि उनको पता ही नहीं चलता की खेलते खेलते कितनी देर हो गयी है और भोजन शयन का का खयाल नहीं रहता था | तब मईया यशोदा उन दोनों भाइयो को ढूंढ़ने क़े लिए सभी दिशाओं में जाती l उन्हें पता था की सीमाओं पर हाऊ और बिलाऊ नाम क़े दो जानवरों की मुर्तिया पड़ी हुई है जो की खतरनाक है और वो भगवान कृष्ण और बलदाऊ को उसी हाऊ और बिलाऊ का डर दिखाती की ज्यादा दूर नंदगाव की सीमाओं से बाहर खेलने मत जाओ हाऊ और बिलाऊ आ जायेगे और तुम्हे पकड़ लेंगे और खा जायेगे l और एक बार जब प्यारे कान्हा ने मईया से हऊआ देखने की जिद करते और मईया उन्हें एक बार वो मूर्ति दिखा भी लाई थी | उसके बाद वो परम ब्रह्म, देवों के देव भगवान् कृष्ण अपनी भोली माँ का मन रखने के लिए हाऊ – बिलाऊ से डरने लगे और धीरे धीरे जनमानस में यह बात फैल गई कि हाऊ और बिलाऊ के नाम से बच्चे डरते हैं l
इतना तो हम जानते हैं कि भगवान कृष्ण को मारने के लिए कई राक्षस जानवर का रूप बना कर आते रहे हैं जैसे कोई गधा बन के, कोई कौआ बन के, कोई बैल बन के, कोई बाज बनके, कोई हाउ बनके… अतः इससे भी ये बात सिद्ध होती है कि हाउ बिलाऊ उस समय एक जानवर था जो बिल्ली जैसी कद और सूरत का था l
दूर खेलन मत जाओ लाल यहाँ हाऊ आये है !
हँसकर पूछत कान्ह, मैया!! ये किनै पठाए है !!
बोलो बाँके बिहारी लाल की जय
तो ऐसे कर क़े हाऊ और बिलाऊ की कहानी अस्तित्व में आई | आज हज़ारो साल बाद भी हाऊ और हऊआ का नाम जन जन की जबान पर चढ़ा हुआ है और आज भी हम लोग किसी खतरनाक चीज़ को हाऊ और हऊआ कह कर बच्चो को डरा देते हैं जब कि असल में ये राक्षस थे जो कि एक विचित्र जानवर का रूप बनाकर आए थे | आज भी अगर आप नंदगाँव जाएँ तो नंदगाँव की सीमा पर यशोदा कुंड क़े पास हाऊ और बिलाऊ की मूर्ति न देखना भूले हालांकि आज ये खंडित हो गयी है लेकिन ये ५००० साल पुरानी मुर्तिया है जो दुर्लभतम हैं और भगवान कृष्ण क़े युग की निशानी है |
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*बृजभाषी समाज ( रजि.)*
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*हाऊ बिलाऊ मंदिर नंदगाँव*
क्या अपने हाऊ और बिलाऊ का नाम सुना है हाऊ या हउआ वो अजीब सी चीज़… जिससे डर लगता हो या हम बच्चो को डराते है सावधान हउआ आ जायेगा या हउआ है या किसी बात का डर बताना जैसे हौआ खडा करना…. ये अलग बात है कि किसी ने देखा नहीं था l अब प्रश्न ये है कि हऊआ या हाउ क्या है…
कौन है ये बिलाऊ क्या है ….
द्वापर युग की बात है जब भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ और जन्म होने क़े बाद उनके पिता वासुदेव यशोदा मैया के पास गोकुल छोड़ आए थे और जैसे ही कंस को इस बात का पता चला की मुझे मारने वाला कृष्ण पैदा हो चुका है तो उसने अपने सारे राक्षसों को एक एक कर के गोकुल कृष्ण को मारने के लिए भेजा जैसे की पूतना, कालनेमि, अघासुर, वकासुर, कागासुर आदि… लेकिन ये सभी बाल कृष्ण के हाथों मारे गए…. लेकिन नन्द बाबा जो की कृष्ण के धर्म पिता थे इन सब बातो से बहुत घबराते थे और उन्होने इस सब से बचने के लिए एक सुरक्षित स्थान की तलाश शुरु कर दी थी l
नंद बाबा को यह जानकारी मिली कि वृन्दावन क़े पास एक ऐसा स्थान है जो की शांडिल्य ऋषि क़े श्राप की वजह से राक्षसों क़े लिए वर्जित क्षेत्र था | राक्षसों क़े वहां पर अत्यंत उत्पात मचाने की वजह से क्रुद्ध शांडिल्य ऋषि ने उनको श्राप दे दिया की था जो भी राक्षस इस वन में आएगा तो वो पत्थर का हो जायेगा और उसके बाद कोई राक्षस वहां नहीं आया l ये जान कर नन्द बाबा ने उस स्थान पर बसने का निश्चय किया और परिवार और अपने गोप-गोपियों और गांव वालो क़े साथ वहां बस गए | उनके बसने क़े पश्चात उस गांव का नाम नंदगाँव पड़ा | जैसे ही कंस को इस बात का पता चला की कृष्ण अपने परिवार गांव वाले और गोपियों क़े साथ नंदगाँव चले गए है तो कंस ने अपने दो अनुचर राक्षस जिसके नाम हाऊ और बिलाऊ थे उनको कृष्ण भगवान को मारने क़े लिए नंदगांव भेजा उन दोनों राक्षसों हाऊ और बिलाऊ को शांडिल्य ऋषि क़े श्राप क़े बारे में पता नहीं था और ज्यों ही दोनों एक नए प्रकार के जानवर का रूप बनाकर नंदगाँव में घुसे त्यों ही वो दोनों पत्थर क़े हो गए l
द्वापर युग से कलयुग तक 5,000 साल बीतने के बाद भी उनको मुक्ति नहीं मिली और आज भी पत्थर बने पड़े हैं l यशोदा कुंड क़े पास आज भी वो मूर्तियां पड़ी हैं (जिन्हें मुगल आक्रमणकारियों ने खंडित कर दिया था) और उसके बाद फिर से वहां कोई भी राक्षस नहीं आया और इसके पश्चात भगवान कृष्ण अपने भ्राता बलराम, बाल सखाओ, गोप-गोपियों, नन्द बाबा और यशोदा मैया क़े साथ वहाँ सुख पूर्वक रहने लगे थे |
जब भगवान कृष्ण और बलराम अपने सखाओ क़े साथ खेलते थे तब दोनों भाई खेलने में इतने मगन हो जाते कि उनको पता ही नहीं चलता की खेलते खेलते कितनी देर हो गयी है और भोजन शयन का का खयाल नहीं रहता था | तब मईया यशोदा उन दोनों भाइयो को ढूंढ़ने क़े लिए सभी दिशाओं में जाती l उन्हें पता था की सीमाओं पर हाऊ और बिलाऊ नाम क़े दो जानवरों की मुर्तिया पड़ी हुई है जो की खतरनाक है और वो भगवान कृष्ण और बलदाऊ को उसी हाऊ और बिलाऊ का डर दिखाती की ज्यादा दूर नंदगाव की सीमाओं से बाहर खेलने मत जाओ हाऊ और बिलाऊ आ जायेगे और तुम्हे पकड़ लेंगे और खा जायेगे l और एक बार जब प्यारे कान्हा ने मईया से हऊआ देखने की जिद करते और मईया उन्हें एक बार वो मूर्ति दिखा भी लाई थी | उसके बाद वो परम ब्रह्म, देवों के देव भगवान् कृष्ण अपनी भोली माँ का मन रखने के लिए हाऊ – बिलाऊ से डरने लगे और धीरे धीरे जनमानस में यह बात फैल गई कि हाऊ और बिलाऊ के नाम से बच्चे डरते हैं l
इतना तो हम जानते हैं कि भगवान कृष्ण को मारने के लिए कई राक्षस जानवर का रूप बना कर आते रहे हैं जैसे कोई गधा बन के, कोई कौआ बन के, कोई बैल बन के, कोई बाज बनके, कोई हाउ बनके… अतः इससे भी ये बात सिद्ध होती है कि हाउ बिलाऊ उस समय एक जानवर था जो बिल्ली जैसी कद और सूरत का था l
दूर खेलन मत जाओ लाल यहाँ हाऊ आये है !
हँसकर पूछत कान्ह, मैया!! ये किनै पठाए है !!
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तो ऐसे कर क़े हाऊ और बिलाऊ की कहानी अस्तित्व में आई | आज हज़ारो साल बाद भी हाऊ और हऊआ का नाम जन जन की जबान पर चढ़ा हुआ है और आज भी हम लोग किसी खतरनाक चीज़ को हाऊ और हऊआ कह कर बच्चो को डरा देते हैं जब कि असल में ये राक्षस थे जो कि एक विचित्र जानवर का रूप बनाकर आए थे | आज भी अगर आप नंदगाँव जाएँ तो नंदगाँव की सीमा पर यशोदा कुंड क़े पास हाऊ और बिलाऊ की मूर्ति न देखना भूले हालांकि आज ये खंडित हो गयी है लेकिन ये ५००० साल पुरानी मुर्तिया है जो दुर्लभतम हैं और भगवान कृष्ण क़े युग की निशानी है |
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🚩🤟 *जो कहते हैं कि हमारा महाभारत रामायण पौराणिक कथा है*
*उसको हमें प्रमाणित करने की जरूरत ही नहीं पड़ी* , *क्योंकि हमारे पूर्वजों में इतना इंतजाम कर गए तुम्हारे बाप भी नहीं मिटा पाए*
*12 वीं शताब्दी का मंदिर जहां भीष्म पितामह बाणों की सैया पर लेटे हैं*
*सनातन ही सत्य है* 🚩🚩✊
*जय श्री राम* 🙏
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*उसको हमें प्रमाणित करने की जरूरत ही नहीं पड़ी* , *क्योंकि हमारे पूर्वजों में इतना इंतजाम कर गए तुम्हारे बाप भी नहीं मिटा पाए*
*12 वीं शताब्दी का मंदिर जहां भीष्म पितामह बाणों की सैया पर लेटे हैं*
*सनातन ही सत्य है* 🚩🚩✊
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गुरु पूर्णिमा (आसाढ़ पूर्णिमा) 🚩🌸🙏🏻
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
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भगवान शिव की उपासना का मास, श्रावण मास ☘️
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
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