ऐतिहासिक मंदिर और उनकी कथा
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हमारी संस्कृति हमारा अभिमान

*इस चैनल मे हमारे मंदिरों की कथा के आडियो विडियो और हमारी सभ्यता से जुड़ी जगह का प्रसारण किया जाता है*

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👆👆👆🙏🙏🧏‍♂☝👉🚩🕉️⚜️🇮🇳 #कोणार्क_सूर्य_मंदिर का भीतरी गर्भगृह और ऊपर मंडप, जिसके ऊपर सूर्य देवता की मूर्ति को मैग्नेट और लोड पत्थर के प्रभाव के कारण हवा में तैरते हुए कहा गया था
और #जगमोहन के अंदर
1903 में जगमगाना के पतन को रोकने के लिए मंदिर को सील कर दिया गया और रेत से भर दिया गय😢😢😢इस तरह से हमारी सदियों पुरानी सभ्यता को नष्ट किया
#ताजमहल तो केवल एक झांकी है, हमारा पूरा देश एक से बढ़ कर एक अस्चार्यजनक वास्तु कलाओं से भरा हुआ है।

विद्याशंकर मंदिर में 12 स्तंभ हैं, जिसपर सौर चिन्ह बने हैं। हर सुबह जब सूरज की किरणें यहाँ प्रवेश करती हैं, तो वे वर्ष के महीने का संकेत देने वाले एक विशेष स्तंभ से टकराती हैं। है ना अस्चर्य…?

लेकिन क्या हमारे बच्चों को यह दिखाया जाता है? हमारे बच्चों को तो बस लाल किला उअर क़ुतुब मीनार वाला हिन्दुस्तान दिखाया जाता है।
जय सनातन धर्म
जय श्री राम 🚩🚩🎪🎪
विद्याशंकर मंदिर श्रृंगेरी, कर्नाटक में स्थित है। यह विशाल मंदिर कर्नाटक के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। माना जाता है कि 'विद्यारान्य' नाम के एक ऋषि ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। यहाँ आने वाले पर्यटक कई शिलालेख भी यहाँ देख सकते हैं, जो भारतीय इतिहास के प्रसिद्ध 'विजयनगर साम्राज्य' के योगदान को दर्शाते हैं।
फिर से चौंक गए ?

हाँ इसपर किसी छेनी के निशान भी नहीं हैं
हाँ इसे हजारों साल पहले बनाया गया
हाँ तब आज की तरह आधुनिक औजार नहीं थे
हाँ इसके पीछे की तकनीक हमारे पाठ्यक्रम में नहीं है । क्योकिं ?
उन्हें मुगलों के महिमामंडन से फुर्सत नहीं मिली ।
अब हम क्या करें ? आओ हम अपने पूर्वजों की विरासत का प्रचार करें ।
जो लोग अपना इतिहास भुला देते हैं,,, इतिहास उन्हे भुला देता है....!

#मार्तण्ड_सूर्य_मंदिर , अनंतनाग , कश्मीर (भारत)!
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#एरावतेश्वर_मंदिर_तमिलनाडु

मैं दुनियाभर के पुरातत्वविदों को चैलेंज करता हूँ क्या वो मेरे इन तीन प्रश्नों का जवाब दे पाएंगे ?

🔸क्या ऐसी नक्काशियों के लिए किसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया ?
🔸अगर नहीं तो क्या आधुनिक औजारों के इस्तेमाल के बगैर आज के वास्तुकार ऐसे मंदिरों का निर्माण कर सकते हैं ?
🔸अगर नहीं कर सकते तो..आप कैसे कह सकते हैं कि प्राचीन काल में टेक्नोलॉजी नहीं थी ?

इतिहास लिखना वामपंथियों के हाथ में था लेकिन इतिहास बनाना हमारे हाथों में है ।

आओ हम इसका प्रचार कर जन जन तक पहुँचाए l
#अंकोरवाट_मंदिर_कंबोडिया

हमारे देश के प्राचीन मंदिर अपनी भव्यता एवं धार्मिक महत्ता के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं। लेकिन फिर भी क्या आप जानते हैं कि विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर भारत में नहीं है। भारत से 4800 कि.मी. दूर एक ऐसा देश जहां पर है विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर परिसर तथा विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक भी । जी हाँ, हम बात कर रहे हैं ऐसे ही एक विशालकाय हिन्दू मंदिर की। यह मंदिर है अंकोरवाट मंदिर जो कम्बोडिया के अंकोर में स्थित है। इसका पुराना नाम यशोधपुर था। मीकांक नदी के किनारे सिमरिप शहर में बसे इस मंदिर को टाइम मैगज़ीन ने दुनिया के पांच आश्चर्यजनक चीज़ों में शुमार किया था। इसका फैलाव सैंकड़ों वर्ग मील में है।

यह मंदिर जगत के पालनहार विष्णु भगवान को समर्पित है। जबकि इससे पूर्व के शासकों ने यहां बड़े-बड़े शिव के मंदिरों का निर्माण करवाया था।इंडोनेशिया के निवासी इस मंदिर को पानी में डूबा हुआ मंदिर का बगीचा भी कहते है। अंकोरवाट का यह हिन्दू मंदिर इतना ख़ास है कि यह कम्बोडिया राष्ट्र का राष्ट्रीय प्रतीक है, जिसकी तस्वीर को यहां के राष्ट्रीय ध्वज पर अंकित किया गया है। यह मंदिर मेरु पर्वत का प्रतीक भी माना जाता है।

इस मंदिर की दीवारों पर रामायण एवं महाभारत जैसे पवित्र धार्मिक ग्रंथों के प्रसंगों का चित्रण शिल्पकारों ने बहुत ही सुन्दर ढंग से किया हुआ है। जगह-जगह अप्सराओं के नृत्य मुद्रा में भित्ति चित्र हैं व असुर और देवताओं के मध्य हुए समुद्र मंथन जैसे दृश्यों को दीवारों पर चित्रित किया गया है। विश्व का लोकप्रिय पर्यटन स्थल होने के साथ ही इस मंदिर को 1992 में यूनेस्को ने विश्व विरासत में भी शामिल किया है ।

आखिर किसने बनवाया यह मंदिर?dk
इस मंदिर का निर्माण राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने सं 1112 से 1153 के बीच कराया था। मंदिर का कार्य सूर्यवर्मन द्वितीय ने प्रारम्भ किया था परन्तु इसका समापन धरणीन्द्रवर्मन के शासन काल में हुआ था । देवालय की रक्षा के लिए चारों तरफ एक विशाल खाई बनाई गई थी जिसकी लम्बाई ढाई मील और चौड़ाई 650 फ़ीट है । दूर से देखने पर यह खाई सुन्दर झील के समान दिखती है । अगर हम किवदंतियों पर चर्चा करें तो इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि स्वयं देवराज इंद्र ने महल के तौर पर अपने पुत्र के लिए इस मंदिर का निर्माण एक ही रात में अपनी आलौकिक शक्तियों के द्वारा किया था ।

जबकि इतिहासकारों की माने तो राजा सूर्यवर्मन द्वितीय के द्वारा 12 वी सदी में बनाया गया था।

फिर भी इसे देखकर सबक ले कि ये धरती और मन्दिर कितने वैदिक मंत्रों से गूंजता होगा जो आज खण्डरों में बदल गया वीरान है क्या कल भारत के मंदिरों में भी लोग खोजे जाएंगे कि कौन बनाया और कितने हिन्दू यँहा थे सोचिएगा जरूर।
सनातन धर्म की जय🚩
#लाल_किला किसने बनाया ??

यह जानना रोचक है कि लाल किले के दरवाजे पर #हाथी की मूर्ति स्थापित है। इतना ही नहीं तो #वराह के मुंह वाले चार नल आज भी लाल किले के एक ख़ास महल में विद्यमान हैं। #वामपंथी इतिहासकार बताते हैं कि लाल किला शाहजहाँ ने बनवाया, लेकिन अगर इसे #शाहजहाँ ने बनवाया होता तो क्या इस्लामी मान्यता के अनुसार किसी भी प्रकार की मूर्ति वहां होतीं और वराह अर्थात उनकी नजर में सूअर की प्रतिमा तो कतई नहीं होती। ऐसे ही सैकड़ो मजबूत साक्ष्य हैं।

भैया यह लाल किला #पृथ्वीराज_चौहान के नाना #अनंतपाल ने बनाया था। तुम किताबें लिख सकते हो लेकिन #तथ्य नहीं बदल सकते और अब तुम्हारी असलियत सामने आ गई है।

ऐसी ही अन्य भारतीय वास्तु कलाओं की जानकारी के लिए इस पेज पुराण विद्या को फॉलो करें और हमसे जुड़ें। धन्यवाद

#भारत_माता_की_जय
#वंदे_मातरम
#जय_श्री_राम🙏
#एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर, सोलन, हिमाचल प्रदेश।
39 साल में बना यह अद्भुत शिव मंदिर, यहां पत्थर को थपथपाने पर आती है #डमरू जैसी ध्वनि 🚩
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कला का बेजोड़ नमूना है हिमाचल प्रदेश के सोलन में स्थित जटोली शिव मंदिर। इसे एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है। मंदिर की ऊंचाई 111 फुट है । मंदिर दक्षिण-द्रविड़ शैली से बना है। मंदिर को बनने में ही करीब 39 साल का समय लगा।

जटोली मंदिर के पीछे मान्यता है कि पौराणिक समय में भगवान शिव यहां आए और कुछ समय यहां रहे थे। बाद में एक सिद्ध बाबा स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने यहां आकर तपस्या की। उनके मार्गदर्शन और दिशा-निर्देश पर ही जटोली शिव मंदिर का निर्माण हुआ। .
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मंदिर में कला और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। -मंदिर की ऊंचाई 111 फुट है और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार यह मंदिर एशिया के सबसे ऊंचे मंदिरों में शामिल है।
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" भारत के हर कोने में इतनी अनूठी और जटिल सनातन विरासत संचनाएँ हैं की पश्चिमी देशों और वामपंथी इतिहासकारों के ब्रेनवाश किये हुए भारतीयों को घूमने के लिए एक जिंदगी कम पड़ जाएगी "

अनगिनत सीढ़ियों वाली इस शानदार बावड़ी को देखिए, माना जाता है कि तुला संक्रांति के दिन कावेरी का पानी इस बावड़ी में रहस्यमय तरीके से प्रवेश करता है, यहीं वजह है कि श्रद्धालुओं के नहाने के लिए इसमें सदैव पानी भरा रहता है ।

(सुब्रमण्य मंदिर, केरल)