कर्नाटक राज्य के हासन में स्थित 900 वर्ष पुराना चेन्नाकेशव मंदिर।।
इस मंदिर में कई स्थानों पर इतनी महीन शिल्पकारी है कि जिसे सामान्य आंखों से देख पाना नामुमकिन है ,उसे देखने के लिए मेग्नीफाइंग ग्लॉस की जरूरत होती है। सोचिये 10वीं सदी के कारीगरों ने इसे बनाया कैसे होगा जबकि मेग्नीफाइंग ग्लास की खोज 1296 में इंग्लैंड में हुई है।
आधुनिक दुनिया में होली की पिचकारी की खोज और पेटेंट 1896 का है जबकि इस मंदिर के शिल्पों में 10वीं सदी में ही होली में पिचकारी का उपयोग करते हुए एक शिल्प है ,जिसे हाल ही में खोजा गया है।
जय सनातन
इस मंदिर में कई स्थानों पर इतनी महीन शिल्पकारी है कि जिसे सामान्य आंखों से देख पाना नामुमकिन है ,उसे देखने के लिए मेग्नीफाइंग ग्लॉस की जरूरत होती है। सोचिये 10वीं सदी के कारीगरों ने इसे बनाया कैसे होगा जबकि मेग्नीफाइंग ग्लास की खोज 1296 में इंग्लैंड में हुई है।
आधुनिक दुनिया में होली की पिचकारी की खोज और पेटेंट 1896 का है जबकि इस मंदिर के शिल्पों में 10वीं सदी में ही होली में पिचकारी का उपयोग करते हुए एक शिल्प है ,जिसे हाल ही में खोजा गया है।
जय सनातन