कर्नाटक राज्य के हासन में स्थित 900 वर्ष पुराना चेन्नाकेशव मंदिर।।
इस मंदिर में कई स्थानों पर इतनी महीन शिल्पकारी है कि जिसे सामान्य आंखों से देख पाना नामुमकिन है ,उसे देखने के लिए मेग्नीफाइंग ग्लॉस की जरूरत होती है। सोचिये 10वीं सदी के कारीगरों ने इसे बनाया कैसे होगा जबकि मेग्नीफाइंग ग्लास की खोज 1296 में इंग्लैंड में हुई है।
आधुनिक दुनिया में होली की पिचकारी की खोज और पेटेंट 1896 का है जबकि इस मंदिर के शिल्पों में 10वीं सदी में ही होली में पिचकारी का उपयोग करते हुए एक शिल्प है ,जिसे हाल ही में खोजा गया है।
जय सनातन
इस मंदिर में कई स्थानों पर इतनी महीन शिल्पकारी है कि जिसे सामान्य आंखों से देख पाना नामुमकिन है ,उसे देखने के लिए मेग्नीफाइंग ग्लॉस की जरूरत होती है। सोचिये 10वीं सदी के कारीगरों ने इसे बनाया कैसे होगा जबकि मेग्नीफाइंग ग्लास की खोज 1296 में इंग्लैंड में हुई है।
आधुनिक दुनिया में होली की पिचकारी की खोज और पेटेंट 1896 का है जबकि इस मंदिर के शिल्पों में 10वीं सदी में ही होली में पिचकारी का उपयोग करते हुए एक शिल्प है ,जिसे हाल ही में खोजा गया है।
जय सनातन
#कर्नाटक का चेन्नकेशवा मंदिर
क्या यह छेनी-हथौड़ी से संभव है ?
सोचिये ! छोटे से छोटे भाग को दर्शाने के लिए पत्थरों के बीच से पत्थरों को काटकर आकृति उकेरना किसी अद्भुत कारीगरी से कम है। यह सब करते समय छेनी पर हथौड़ी का एक गलत प्रहार महीनों की मेहनत बर्बाद कर सकता.
लेकिन भारत की इस सम्रद्ध विरासत से हम सबको दूर रखा गया। हमारे पुरखों की विद्या को नकारा गया। इसलिए वामपंथी इतिहासकारों द्वारा लिखे गए इतिहास को बदलने और पाठ्यक्रमों के पुनर्लेखन की महती आवश्यकता है.
क्या यह छेनी-हथौड़ी से संभव है ?
सोचिये ! छोटे से छोटे भाग को दर्शाने के लिए पत्थरों के बीच से पत्थरों को काटकर आकृति उकेरना किसी अद्भुत कारीगरी से कम है। यह सब करते समय छेनी पर हथौड़ी का एक गलत प्रहार महीनों की मेहनत बर्बाद कर सकता.
लेकिन भारत की इस सम्रद्ध विरासत से हम सबको दूर रखा गया। हमारे पुरखों की विद्या को नकारा गया। इसलिए वामपंथी इतिहासकारों द्वारा लिखे गए इतिहास को बदलने और पाठ्यक्रमों के पुनर्लेखन की महती आवश्यकता है.
Forwarded from कथा अमृत
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Dass
🌹तव कथामृतम तप्त जीवनम्🌹
हिंदी अनुवाद:
हमारी प्राचीन सभ्यता पर गर्व होना चाहिए।
देखो, हमारे पूर्वज ईश्वर के प्रति अपने को समर्पित करते थे और उनके द्वारा बनाई गई चमत्कार सभी जगह जीवित हैं।भगवान कृष्ण को समर्पित
मिट्टी के ढांचे ( टेराकोटा शिल्पकला) में राधा-कृष्ण के दृश्यों का चित्रण है।
बंगलादेश।
हमारी प्राचीन सभ्यता पर गर्व होना चाहिए।
देखो, हमारे पूर्वज ईश्वर के प्रति अपने को समर्पित करते थे और उनके द्वारा बनाई गई चमत्कार सभी जगह जीवित हैं।भगवान कृष्ण को समर्पित
मिट्टी के ढांचे ( टेराकोटा शिल्पकला) में राधा-कृष्ण के दृश्यों का चित्रण है।
बंगलादेश।
#श्री_चौमुख_नाथ_धाम_मंदिर
सलेहा जिला पन्ना में स्थित सलेहा से 6 किलोमीटर दूर ग्राम हजारों साल पुराना
वैसे तो अपनी-अपनी जगह सभी शिव मंदिरों का महत्व है लेकिन सलेहा क्षेत्र के नचने का चौमुख नाथ महादेव मंदिर का इतिहास ही अनोखा है। कहते है अति प्राचीन इस मंदिर में भगवान शिव के चार मुख वाली प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा का हर मुख अलग-अलग रूप वाला है।
चतुर्मुखी प्रतिमा में एक मुख भगवान के दूल्हे के वेष का है। इसको गौर से देखने पर भगवान के दूल्हे के रूप के दर्शन होते हैं। दूसरे मुख में भगवान अर्धनारीश्वर रूप में हैं। तीसरा मुख भगवान का समाधि में लीन स्थिति का है और चौथा उनके विषपान करने का है। प्रतिमा का सूक्ष्मता के साथ दर्शन करने पर सभी रूप उभरकर आते हैं। यह प्रतिमा अपने आप में अद्भुद है और दुर्लभ है।...
इनके पूजा और दर्शन करने से पुण्य लाभ की प्राप्ति होती है। यहां हर समय स्थानीय श्रद्धालु आते हैं लेकिन सावन के महीने में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। यहां भगवान के दर्शन करने के लिए प्रत्येक सावन के सोमवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालुजन पहुंचते हैं।
इसी मंदिर परिसर में पार्वती मंदिर है जो दुनिया के सबसे प्राचीनतम मंदिरों में से है। यह मंदिर गुप्त कालीन करीब पांचवीं सदी का माना जाता है। माना जाता है जब इंसान मंदिरों के निर्माण की कला सीख रहा था तब इस मंदिर का निर्माण कराया गया। यह केंद्र संरक्षित स्मारक है। यहा सावन सोमवार में पूजा अर्चना करने वालों की भारी भीड़ पहुचती है।
#हर_हर_महादेव..🙏
सलेहा जिला पन्ना में स्थित सलेहा से 6 किलोमीटर दूर ग्राम हजारों साल पुराना
वैसे तो अपनी-अपनी जगह सभी शिव मंदिरों का महत्व है लेकिन सलेहा क्षेत्र के नचने का चौमुख नाथ महादेव मंदिर का इतिहास ही अनोखा है। कहते है अति प्राचीन इस मंदिर में भगवान शिव के चार मुख वाली प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा का हर मुख अलग-अलग रूप वाला है।
चतुर्मुखी प्रतिमा में एक मुख भगवान के दूल्हे के वेष का है। इसको गौर से देखने पर भगवान के दूल्हे के रूप के दर्शन होते हैं। दूसरे मुख में भगवान अर्धनारीश्वर रूप में हैं। तीसरा मुख भगवान का समाधि में लीन स्थिति का है और चौथा उनके विषपान करने का है। प्रतिमा का सूक्ष्मता के साथ दर्शन करने पर सभी रूप उभरकर आते हैं। यह प्रतिमा अपने आप में अद्भुद है और दुर्लभ है।...
इनके पूजा और दर्शन करने से पुण्य लाभ की प्राप्ति होती है। यहां हर समय स्थानीय श्रद्धालु आते हैं लेकिन सावन के महीने में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। यहां भगवान के दर्शन करने के लिए प्रत्येक सावन के सोमवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालुजन पहुंचते हैं।
इसी मंदिर परिसर में पार्वती मंदिर है जो दुनिया के सबसे प्राचीनतम मंदिरों में से है। यह मंदिर गुप्त कालीन करीब पांचवीं सदी का माना जाता है। माना जाता है जब इंसान मंदिरों के निर्माण की कला सीख रहा था तब इस मंदिर का निर्माण कराया गया। यह केंद्र संरक्षित स्मारक है। यहा सावन सोमवार में पूजा अर्चना करने वालों की भारी भीड़ पहुचती है।
#हर_हर_महादेव..🙏
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Video from Jaikey
यह भगवान #निक्कलंगेश्वर का मंदिर है,
जो #भावनगर, गुजरात के पास, अरब सागर के अंदर 1KM में स्थित है। प्रतिदिन, दोपहर 1 बजे से 10 बजे के बीच तीर्थयात्रियों को भगवान शिव के दर्शन करने की अनुमति देता है। पांडवों ने इस स्थान की पूजा की थी और उनकी स्मृति में 5 शिवलिंग सथापित किए गए हैं। #स्टोन_टेंपल_फ्लैग (कोडिमाराम प्र दवजस्थमभम) लगभग 20फीट की ऊँचाई पर है जो अब तक बाढ़ या तूफान में अडिग रहा है। प्रतिदिन दोपहर 1 बजे तक, समुद्र का जल स्तर इस स्टोन टेम्पल फ्लैग के शीर्ष को छूता है। दोपहर 1 बजे के बाद, समुद्र का स्तर दोनों तरफ से कम होने लगता है और लोगों को भगवान_शिव की पूजा करने की अनुमति मिलती है! यह इस अद्भुत मंदिर की खासियत है, शायद पूरी दुनिया में यह अपनी तरह का एकमात्र है
दुनिया का एक ऐसा मन्दिर जो रोज #जलस्माधि लेता है।
#हर_हर_महादेव 🚩🚩
जो #भावनगर, गुजरात के पास, अरब सागर के अंदर 1KM में स्थित है। प्रतिदिन, दोपहर 1 बजे से 10 बजे के बीच तीर्थयात्रियों को भगवान शिव के दर्शन करने की अनुमति देता है। पांडवों ने इस स्थान की पूजा की थी और उनकी स्मृति में 5 शिवलिंग सथापित किए गए हैं। #स्टोन_टेंपल_फ्लैग (कोडिमाराम प्र दवजस्थमभम) लगभग 20फीट की ऊँचाई पर है जो अब तक बाढ़ या तूफान में अडिग रहा है। प्रतिदिन दोपहर 1 बजे तक, समुद्र का जल स्तर इस स्टोन टेम्पल फ्लैग के शीर्ष को छूता है। दोपहर 1 बजे के बाद, समुद्र का स्तर दोनों तरफ से कम होने लगता है और लोगों को भगवान_शिव की पूजा करने की अनुमति मिलती है! यह इस अद्भुत मंदिर की खासियत है, शायद पूरी दुनिया में यह अपनी तरह का एकमात्र है
दुनिया का एक ऐसा मन्दिर जो रोज #जलस्माधि लेता है।
#हर_हर_महादेव 🚩🚩
मुगल शासक औरंगजेब द्वारा तोड़े गए काशी विश्वनाथ मंदिर की तस्वीर(Lithograph) . फ़ोटो- जेम्स प्रिंसेप/ ब्रिटिश लाइब्रेरी via @indiahistorypic
यही है स्वर्ण काल और मुगल वास्तुकला का असली नमूना
😰
यही है स्वर्ण काल और मुगल वास्तुकला का असली नमूना
😰
रहस्यमयी !
अलौकिक!
अतुलनीय!
जहाँ पेड़,रास्ते ,मंदिर और गाँव में तीस हज़ार नाग मूर्तियां स्थापित हैं।🐍
विश्व में अपनी तरह का एक मात्र नागालय मंदिर!!!
#मनारशाला_नाग_मंदिर (केरल)
अलौकिक!
अतुलनीय!
जहाँ पेड़,रास्ते ,मंदिर और गाँव में तीस हज़ार नाग मूर्तियां स्थापित हैं।🐍
विश्व में अपनी तरह का एक मात्र नागालय मंदिर!!!
#मनारशाला_नाग_मंदिर (केरल)