ऐतिहासिक मंदिर और उनकी कथा
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हमारी संस्कृति हमारा अभिमान

*इस चैनल मे हमारे मंदिरों की कथा के आडियो विडियो और हमारी सभ्यता से जुड़ी जगह का प्रसारण किया जाता है*

किसी और को इस ग्रुप में जोड़ने के लिये उन्हें ये लिंक दे

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माल्टा देश की सरकार ने 2003 में मेवाड़ के शूरवीर महाराणा प्रताप पर चांदी का सिक्का जारी किया था। एक किलोग्राम वजनी यह सिक्का दुनिया में सबसे बड़ा सिक्का है, जिसके एक ओर महाराणा प्रताप का चित्र और उनके जन्म-मृत्यु की तारीख अंकित है ताे दूसरी ओर माल्टा देश का चिह्न व नाम है। माल्टा सरकार ने ऐसे 100 सिक्के जारी किए थे
सौलहवीं शताब्दी के एक हिन्दु राजा को एक राष्ट्र के द्वारा दिया गया सम्मान जो हमसें 6500 किलोमीटर दूर है,दुनिया पर महाराणा के प्रभाव को दर्शाता हैं
ओर यहाँ भारत में अकबर ही महान था और महान हैं।🤔🤔
झूठी इस्लामी स्थापत्य कला बहुत पढ़ ली, अब सनातन धर्म की गौरवमयी कलाकारी देखो....🙏

8वीं सदी में दक्षिण भारत के "पल्लव वंश" के सूर्यवंशी क्षत्रियों द्वारा निर्मित यह मंदिर एक.... बेहद रहस्यमयी मंदिर है...🚩
यह गुफा एक ही पत्थर को काटकर बनाई गई है, ऊपर जो मंदिर है, वह भी उसी पहाड़ का हिस्सा है !
यह कैसे किया गया ?? इसका तो हमारे पास क्या...पूरी दुनिया के पास नहीं है !
पता नहीं, कैसे ज्ञानी और ध्यानी थें हमारे पूर्वज, जो वह कार्य कर गए, जिसकी कल्पना भी शायद हम नही कर सकतें...

यह केवल खुद तक सीमित मत रखना, अपने बच्चों को जरूर बताना...की हमारा भारत और उसकी सांस्कृतिक विरासत कितनी महान है, उसके बाद उनके मन में सनातन धर्म को लेकर कभी सवाल खड़े नही होंगे !

जिसको अपनी महान विरासत का स्मरण हो, उसका धर्मपरिवर्तन कोई नहीं करवा सकता...🚩

ओल्क्कन्ननेश्वर मंदिर, महाबलिपुरम तमिलनाडु
*बृज दर्शन... 🙏🏻🙏🏻🙏🏻*
कंदरिया महादेव मंदिर (मध्यप्रदेश) ------
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एक तरफ है पीसा (इटली) की मीनार जो 1372 ई.
में बनकर तैयार हुई, दूसरी तरफ है कंदरिया महादेव मंदिर(मध्यप्रदेश) जो 1003 ई. में बनकर तैयार हुआ।

हमारी वास्तुकला का नमूना देखिए कि पीसा की मीनार समय की मार झेलते-झेलते कई डिग्री तक झुक चुकी है और गिरने के कगार पर खड़ी है वहीं उससे 350 साल पुराना हमारा मंदिर 6 भूकंप सहने के बाद भी दृढ़ता से खड़ा है।।

वामपंथी इतिहासकारों ने इतिहास के नाम पर मात्र हीनभावना ही परोसी है, भारत का इतिहास मंदिरों की दृष्टि से पढ़ा पढ़ाया जाए तो भावी पीढ़ी संस्कृति को लेकर गर्वान्वित हो सकेगी।

🌷 जयतु भारतं 🌷
👆👆

*यह आठवीं शताब्दी का का मंदिर है .. कर्णाटक में*

*जिसमें वराह स्वामी की मूर्ति है,*

*गोलाकार पृथ्वी अर्थात भू .. को धारण किये हुए..*✔

*ये मंदिर गैलीलियो के जन्म से ८०० वर्ष पूर्व का है।*✔

और आज वामपंथी
और अंग्रेजी लेखकों के द्वारा लिखे गये पाठ्य पुस्तकों या व्याख्यानों में
*हमे पढ़ाया और बताया जाता है कि पृथ्वी गोल है .. इस बात का पता सबसे पहले गैलीलियो ने लगाया था!*⁉⁉


अब आप स्वयं निर्णय करें ..🙏
*हमे आधुनिक बौद्धिक आतंकवाद के युग में कितना सफेद झूठ पढ़ाया जाता था।*

और ये मक्कार बौद्धिक आतंकवादी कितने पाखंडी और झूठे होते है...


🚩🚩🚩🚩🚩
ये गणपति भगवान की दुर्लभ फोटो है। इसमें दोनों पत्नियां रिद्धि और सिद्धि ,दोनों पुत्र शुभ और लाभ और पुत्री संतोषीमाता ,दोनों बहुएं तुष्टि और पुष्टि,दोनों पौत्र आनंद और प्रमोद। श्री गणपति गजानंद परिवार की जय ।
ये लकड़ी पर नहीं, बल्कि पत्थर पर की गई नक्काशी है।
पौराणिक हिंदू मंदिरों में ऐसी उत्कृष्ट कलाकृतियों का खजाना है। जो किसी भी अजूबे से कम नहीं।
लेकिन आज भी इन कलाकृतियों को वह पहचान नहीं मिली। जो ताजमहल को मिली है।

(काशीराज काली मंदिर, वाराणसी)