*हिन्दू जागृति समिति*🚩✊🏻
*✍🏻क्रमांक संख्या०७✍🏻*
*भारत को जानो*
*भगवान शिव ने 26 चेहरे और 52 हाथ मंदिर के टॉवर सुचेन्द्रम तमिलनाडु पर*
सुचिंद्रम थानुमलयन मंदिर:
सुचिन्द्रम में कन्याकुमारी से 13 किलोमीटर की दूरी पर सुचिन्द्रम थुनामलयन मंदिर स्थित है। इसे स्टैनुमलयन मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, जिसमें "स्तानू" भगवान शिव, "मल" और "अयन" भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा का प्रतिनिधित्व करता है।
इस तरह के मंदिर
इसलिए शैव [भगवान शिव के अनुयायी] और वैष्णव [भगवान विष्णु के अनुयायी] दोनों के लिए इसका बहुत महत्व है। यह भारत के बहुत कम मंदिरों में से एक है जहाँ त्रिदेव [ब्रह्मा, विष्णु और शिव] की पूजा की जाती है। त्रिदेव की पूजा यहाँ एक विशाल लिंग के रूप में की जाती है। इसके 3 विभाग हैं, जिनमें सबसे ऊपर शिव, मध्य में विष्णु और क्रमशः लिंग के नीचे ब्रह्मा हैं। त्रिमूर्ति के अलावा, विग्नेश्वरी (विनायगा का एक स्त्री रूप), देवी अरम वालर्था नायक, इंद्र विनायगा, काल भैरव और साक्षी गणपति की भी यहां पूजा की जाती है।
सात मंजिला 134 फीट लंबा सफेद गोपुरम [मंदिर का टॉवर] विभिन्न हिंदू देवी-देवताओं के साथ सामने की ओर नक्काशीदार है जो आगंतुकों के लिए एक वास्तुशिल्प उपचार प्रदान करता है। 17 वीं शताब्दी में निर्मित, पूरा मंदिर द्रविड़ कला का एक शानदार नमूना है। इसमें 4 एकड़ का क्षेत्र शामिल है। एक 22 फीट की हनुमान प्रतिमा कलात्मक रूप से एकल ग्रेनाइट ब्लॉक से बनी हुई है जो इसे भारत में अपने प्रकार का सबसे ऊँचा बना देती है। नंदी की एक 13 फीट ऊंची और 10 फीट चौड़ी मूर्ति है, जो हनुमान प्रतिमा के विपरीत है, जो चूने और मोर्टार से बनी है। मंदिर की वास्तुकला की एक और खास बात यह है कि इसके 4 संगीतमय खंभे 18 फीट लंबे और मंदिर के प्रमुख आकर्षण में से एक है। इन स्तंभों की ख़ासियत यह है कि यह टैप करने पर विभिन्न संगीत नोटों की आवाज़ निकालते हैं। डांसिंग हॉल क्षेत्र में नक्काशीदार
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*✍🏻क्रमांक संख्या०७✍🏻*
*भारत को जानो*
*भगवान शिव ने 26 चेहरे और 52 हाथ मंदिर के टॉवर सुचेन्द्रम तमिलनाडु पर*
सुचिंद्रम थानुमलयन मंदिर:
सुचिन्द्रम में कन्याकुमारी से 13 किलोमीटर की दूरी पर सुचिन्द्रम थुनामलयन मंदिर स्थित है। इसे स्टैनुमलयन मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, जिसमें "स्तानू" भगवान शिव, "मल" और "अयन" भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा का प्रतिनिधित्व करता है।
इस तरह के मंदिर
इसलिए शैव [भगवान शिव के अनुयायी] और वैष्णव [भगवान विष्णु के अनुयायी] दोनों के लिए इसका बहुत महत्व है। यह भारत के बहुत कम मंदिरों में से एक है जहाँ त्रिदेव [ब्रह्मा, विष्णु और शिव] की पूजा की जाती है। त्रिदेव की पूजा यहाँ एक विशाल लिंग के रूप में की जाती है। इसके 3 विभाग हैं, जिनमें सबसे ऊपर शिव, मध्य में विष्णु और क्रमशः लिंग के नीचे ब्रह्मा हैं। त्रिमूर्ति के अलावा, विग्नेश्वरी (विनायगा का एक स्त्री रूप), देवी अरम वालर्था नायक, इंद्र विनायगा, काल भैरव और साक्षी गणपति की भी यहां पूजा की जाती है।
सात मंजिला 134 फीट लंबा सफेद गोपुरम [मंदिर का टॉवर] विभिन्न हिंदू देवी-देवताओं के साथ सामने की ओर नक्काशीदार है जो आगंतुकों के लिए एक वास्तुशिल्प उपचार प्रदान करता है। 17 वीं शताब्दी में निर्मित, पूरा मंदिर द्रविड़ कला का एक शानदार नमूना है। इसमें 4 एकड़ का क्षेत्र शामिल है। एक 22 फीट की हनुमान प्रतिमा कलात्मक रूप से एकल ग्रेनाइट ब्लॉक से बनी हुई है जो इसे भारत में अपने प्रकार का सबसे ऊँचा बना देती है। नंदी की एक 13 फीट ऊंची और 10 फीट चौड़ी मूर्ति है, जो हनुमान प्रतिमा के विपरीत है, जो चूने और मोर्टार से बनी है। मंदिर की वास्तुकला की एक और खास बात यह है कि इसके 4 संगीतमय खंभे 18 फीट लंबे और मंदिर के प्रमुख आकर्षण में से एक है। इन स्तंभों की ख़ासियत यह है कि यह टैप करने पर विभिन्न संगीत नोटों की आवाज़ निकालते हैं। डांसिंग हॉल क्षेत्र में नक्काशीदार
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12:00 बजने के स्थान पर आदित्य लिखा हुआ है जिसका अर्थ यह है कि सूर्य 12 प्रकार के होते हैं*
1:00 बजने के स्थान पर ब्रह्म लिखा हुआ है इसका अर्थ यह है कि ब्रह्म एक ही प्रकार का होता है ।
🕉️एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति।
2:00 बजने की स्थान पर अश्विन और लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि अश्विनी कुमार दो हैं।
3:00 बजने के स्थान पर त्रिगुणः लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि गुण तीन प्रकार के हैं ---- सतोगुण रजोगुण तमोगुण।
4:00 बजने के स्थान पर चतुर्वेद लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि वेद चार प्रकार के होते हैं -- ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद और अथर्ववेद।
5:00 बजने के स्थान पर पंचप्राणा लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य है कि प्राण पांच प्रकार के होते हैं ।
6:00 बजने के स्थान पर षड्र्स लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि रस 6 प्रकार के होते हैं ।
7:00 बजे के स्थान पर सप्तर्षि लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि सप्त ऋषि 7 हुए हैं ।
8:00 बजने के स्थान पर अष्ट सिद्धियां लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि सिद्धियां आठ प्रकार की होती है ।
9:00 बजने के स्थान पर नव द्रव्यणि अभियान लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि 9 प्रकार की निधियां होती हैं।
10:00 बजने के स्थान पर दश दिशः लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि दिशाएं 10 होती है।
11:00 बजने के स्थान पर रुद्रा लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि रुद्र 11 प्रकार के हुए हैं।
इति सिद्धम।
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1:00 बजने के स्थान पर ब्रह्म लिखा हुआ है इसका अर्थ यह है कि ब्रह्म एक ही प्रकार का होता है ।
🕉️एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति।
2:00 बजने की स्थान पर अश्विन और लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि अश्विनी कुमार दो हैं।
3:00 बजने के स्थान पर त्रिगुणः लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि गुण तीन प्रकार के हैं ---- सतोगुण रजोगुण तमोगुण।
4:00 बजने के स्थान पर चतुर्वेद लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि वेद चार प्रकार के होते हैं -- ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद और अथर्ववेद।
5:00 बजने के स्थान पर पंचप्राणा लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य है कि प्राण पांच प्रकार के होते हैं ।
6:00 बजने के स्थान पर षड्र्स लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि रस 6 प्रकार के होते हैं ।
7:00 बजे के स्थान पर सप्तर्षि लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि सप्त ऋषि 7 हुए हैं ।
8:00 बजने के स्थान पर अष्ट सिद्धियां लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि सिद्धियां आठ प्रकार की होती है ।
9:00 बजने के स्थान पर नव द्रव्यणि अभियान लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि 9 प्रकार की निधियां होती हैं।
10:00 बजने के स्थान पर दश दिशः लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि दिशाएं 10 होती है।
11:00 बजने के स्थान पर रुद्रा लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि रुद्र 11 प्रकार के हुए हैं।
इति सिद्धम।
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कभी शिखर पर लहराते भगवा झंडे और हर हर महादेव के नारों से गूँजता यह पाकिस्तानी हिन्दू मंदिर आज हिंदुओ के प्रवेश के लिए तरस रहा है ।
(कटास राज मंदिर, पाकिस्तान)
#PakistanAgainstMinorities https://t.co/h2v0X6h6wU
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पिंकी शुक्ला
कभी शिखर पर लहराते भगवा झंडे और हर हर महादेव के नारों से गूँजता यह पाकिस्तानी हिन्दू मंदिर आज हिंदुओ के प्रवेश के लिए तरस रहा है । (कटास राज मंदिर, पाकिस्तान) #PakistanAgainstMinorities
आप बिना चूना, सीमेंट या मिट्टी का प्रयोग किए कितनी ऊंची दीवार उठा सकते हैं..?
10 फीट, 15 या 20 फीट..?
और ये दीवार कितने दिनों तक खड़ी रह सकती है..?
1 साल, 5 या 10 साल..?
हमारे देश में एक ऐसा मंदिर 🛕 है, जो सिर्फ पत्थरों पर पत्थर रख कर बनाया गया है।
जिसकी ऊंचाई 216 फीट है और जो पिछले 1000 वर्षों से बिना झुके खड़ा है, तो क्या आप विश्वास करेंगे..?
शायद नहीं..!
लेकिन ये सच है। आइए जानते है कौन सी है ये इमारत।
परिचय - इस विराट मंदिर का नाम है, बृहदेश्वर मंदिर, जो कि तनजौर, तमिलनाडु राज्य में स्थित है। ये मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसका निर्माण चोल राजा द्वारा 1010 ईसा मे पूर्ण कराया गया था।
- मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। जिसकी ऊंचाई 216 फीट है। मंदिर चारों ओर से ऊंची दीवारों से घिरा है। जो कि 16 वी शताब्दी में जोड़ी गई। परिसर का मुख्य द्वार (गोपुरम) लगभग 30 मीटर ऊंचा है। इसके अतिरिक्त परिसर में नंदी मंडप, प्रार्थना मंडप तथा अन्य देवी देवताओं के लिए भी मंदिर बने है। जो कि कालांतर में अन्य राजाओं द्वारा जोड़े गए हैं।
- ये दुनिया की प्रथम और एकमात्र ऐसी इमारत है। जो पूरी तरह ग्रेनाइट पत्थरों से बनी है। इसको बनाने में 1.3 लाख टन पत्थर का इस्तेमाल हुआ।
आश्चर्य की बात ये है कि मंदिर परिसर के लगभग 60 किमी के दायरे में कोई पहाड़ या पत्थर का स्त्रोत नहीं है। पत्थरों को यहां तक लाने के लिए 3000 हाथियों का प्रयोग किया गया था।
- जिस समय ये मंदिर बन कर तैयार हुआ। उस समय ये दुनिया की सबसे ऊंची इमारत थी। जो विश्व में हमारी स्थापत्य कला का लोहा मनवाने में सक्षम है। इसे बनवाने में मात्र सात वर्ष का समय लगा। जो अद्भुत है।
- मंदिर के शिखर (विमान) पर स्थापित पत्थर (कुंभम) का वजन 81 टन है। जो कि एक ही पत्थर को काट कर बनाया गया है। इस पत्थर को 200 फीट की ऊंचाई पर स्थापित करना मॉडर्न तकनीकों से भी मुश्किल है। तो फिर सोचिए कि इसे 1000 साल पहले हमारे पूर्वजों ने कैसे संभव किया होगा..?
- इस पत्थर को स्थापित करने के लिए 6 किमी ऊंचा एक रैंप तैयार किया गया। जिस पर हाथियों की सहायता से इसे खींच कर ऊपर तक पहुंचाया गया। आप इसके निर्माण की भव्यता का अंदाज़ा केवल इस एक घटना से ही लगा सकते हैं।
- नंदी मंडप में स्थित नंदी कि प्रतिमा की ऊंचाई लगभग 13 फीट और लंबाई 16 फीट है। जो कि एक ही चट्टान को काट कर निर्माण किया गया है।
- गर्भ गृह में स्थित शिवलिंग देश के सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक है। जिसकी ऊंचाई 29 फीट है।
- इस मंदिर का निर्माण पत्थरों कि इंटरलॉकिंग तकनीक द्वारा किया गया है तथा चूने अथवा अन्य किसी पदार्थ से जुड़ाई नहीं की गई है।
- दीवारों तथा मंडपों पर सर्वत्र मूर्तियां, चित्र व तमिल व संस्कृत अभिलेख खुदे हुए हैं।
हमारी सनातन हिंदु 🕉️🚩 संस्कृति की महानता का अंदाज़ा लगाने के लिए एक बार अवश्य इस मंदिर के दर्शन करें।
🙏👏✌️👍🕉️🛕🌞🚩
10 फीट, 15 या 20 फीट..?
और ये दीवार कितने दिनों तक खड़ी रह सकती है..?
1 साल, 5 या 10 साल..?
हमारे देश में एक ऐसा मंदिर 🛕 है, जो सिर्फ पत्थरों पर पत्थर रख कर बनाया गया है।
जिसकी ऊंचाई 216 फीट है और जो पिछले 1000 वर्षों से बिना झुके खड़ा है, तो क्या आप विश्वास करेंगे..?
शायद नहीं..!
लेकिन ये सच है। आइए जानते है कौन सी है ये इमारत।
परिचय - इस विराट मंदिर का नाम है, बृहदेश्वर मंदिर, जो कि तनजौर, तमिलनाडु राज्य में स्थित है। ये मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसका निर्माण चोल राजा द्वारा 1010 ईसा मे पूर्ण कराया गया था।
- मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। जिसकी ऊंचाई 216 फीट है। मंदिर चारों ओर से ऊंची दीवारों से घिरा है। जो कि 16 वी शताब्दी में जोड़ी गई। परिसर का मुख्य द्वार (गोपुरम) लगभग 30 मीटर ऊंचा है। इसके अतिरिक्त परिसर में नंदी मंडप, प्रार्थना मंडप तथा अन्य देवी देवताओं के लिए भी मंदिर बने है। जो कि कालांतर में अन्य राजाओं द्वारा जोड़े गए हैं।
- ये दुनिया की प्रथम और एकमात्र ऐसी इमारत है। जो पूरी तरह ग्रेनाइट पत्थरों से बनी है। इसको बनाने में 1.3 लाख टन पत्थर का इस्तेमाल हुआ।
आश्चर्य की बात ये है कि मंदिर परिसर के लगभग 60 किमी के दायरे में कोई पहाड़ या पत्थर का स्त्रोत नहीं है। पत्थरों को यहां तक लाने के लिए 3000 हाथियों का प्रयोग किया गया था।
- जिस समय ये मंदिर बन कर तैयार हुआ। उस समय ये दुनिया की सबसे ऊंची इमारत थी। जो विश्व में हमारी स्थापत्य कला का लोहा मनवाने में सक्षम है। इसे बनवाने में मात्र सात वर्ष का समय लगा। जो अद्भुत है।
- मंदिर के शिखर (विमान) पर स्थापित पत्थर (कुंभम) का वजन 81 टन है। जो कि एक ही पत्थर को काट कर बनाया गया है। इस पत्थर को 200 फीट की ऊंचाई पर स्थापित करना मॉडर्न तकनीकों से भी मुश्किल है। तो फिर सोचिए कि इसे 1000 साल पहले हमारे पूर्वजों ने कैसे संभव किया होगा..?
- इस पत्थर को स्थापित करने के लिए 6 किमी ऊंचा एक रैंप तैयार किया गया। जिस पर हाथियों की सहायता से इसे खींच कर ऊपर तक पहुंचाया गया। आप इसके निर्माण की भव्यता का अंदाज़ा केवल इस एक घटना से ही लगा सकते हैं।
- नंदी मंडप में स्थित नंदी कि प्रतिमा की ऊंचाई लगभग 13 फीट और लंबाई 16 फीट है। जो कि एक ही चट्टान को काट कर निर्माण किया गया है।
- गर्भ गृह में स्थित शिवलिंग देश के सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक है। जिसकी ऊंचाई 29 फीट है।
- इस मंदिर का निर्माण पत्थरों कि इंटरलॉकिंग तकनीक द्वारा किया गया है तथा चूने अथवा अन्य किसी पदार्थ से जुड़ाई नहीं की गई है।
- दीवारों तथा मंडपों पर सर्वत्र मूर्तियां, चित्र व तमिल व संस्कृत अभिलेख खुदे हुए हैं।
हमारी सनातन हिंदु 🕉️🚩 संस्कृति की महानता का अंदाज़ा लगाने के लिए एक बार अवश्य इस मंदिर के दर्शन करें।
🙏👏✌️👍🕉️🛕🌞🚩
🙏ॐ नमः शिवाय🙏
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महानदी के जल से 500 साल पुराना मंदिर उजागर हुआ😮
यह खोज INTACH की महानदी वैली हेरिटेज साइट्स डॉक्यूमेंटेशन प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसे इतिहासकार अनिल धीर द्वारा चलाया जा रहा है।
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महानदी के जल से 500 साल पुराना मंदिर उजागर हुआ😮
यह खोज INTACH की महानदी वैली हेरिटेज साइट्स डॉक्यूमेंटेशन प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसे इतिहासकार अनिल धीर द्वारा चलाया जा रहा है।
धर्मराजेश्वर मंदिर
यह गुफा मंदिर मंदसौर जिले की गरोठ तहसील में स्थित है। मध्य प्रदेश, भारत
धर्मराजेश्वर गुफा मंदिर एक अखंड मंदिर है जो आकार में 50 मीटर, चौड़ाई 20 मीटर और गहराई 9 मीटर की ठोस प्राकृतिक चट्टान से उकेरी गई है। यहां एक मुख्य मंदिर है मंदिर में एक बड़ा शिवलिंग है।
इसे लोग लिटिल केलासा भी बोलते हैं
क्योंकि यह देखने पर आपको एलोरा में स्थित कैलाश मंदिर की तरह ही दिखाई पड़ता है
इसी शैली के अंदर उड़ीसा के अंदर लिंगराज मंदिर है इसी शैली में महाराष्ट्र में एलोरा स्थित कैलाश मंदिर है
भारत में इसी शैली में कुछ और मंदिर है जो अलग-अलग शासनकाल में बने हुए हैं
भारत में पहाड़ों को काटकर मंदिर बनाने की कला हजारों साल पूर्व से है
मंदिर में अद्भुत शिल्प कला आपको दिखाई पड़ती है जो इसे और भी सुंदर बनाती हैं
यह गुफा मंदिर मंदसौर जिले की गरोठ तहसील में स्थित है। मध्य प्रदेश, भारत
धर्मराजेश्वर गुफा मंदिर एक अखंड मंदिर है जो आकार में 50 मीटर, चौड़ाई 20 मीटर और गहराई 9 मीटर की ठोस प्राकृतिक चट्टान से उकेरी गई है। यहां एक मुख्य मंदिर है मंदिर में एक बड़ा शिवलिंग है।
इसे लोग लिटिल केलासा भी बोलते हैं
क्योंकि यह देखने पर आपको एलोरा में स्थित कैलाश मंदिर की तरह ही दिखाई पड़ता है
इसी शैली के अंदर उड़ीसा के अंदर लिंगराज मंदिर है इसी शैली में महाराष्ट्र में एलोरा स्थित कैलाश मंदिर है
भारत में इसी शैली में कुछ और मंदिर है जो अलग-अलग शासनकाल में बने हुए हैं
भारत में पहाड़ों को काटकर मंदिर बनाने की कला हजारों साल पूर्व से है
मंदिर में अद्भुत शिल्प कला आपको दिखाई पड़ती है जो इसे और भी सुंदर बनाती हैं