ये निर्माण आपको मानने पर मजबूर कर देंगे कि ताजमहल तो केवल सुंदर है लेकिन असली आश्चर्य तो हमारे मंदिर हमारे इमारत ही हैं..।
पत्थर पर नक्काशी करके बनाई गई इस जाली की तस्वीर जैसलमेर के एक बेहद पुरानी हवेली की है
17 वी सदी में इस जाली को इस तरह से बनाया गया था कि अंदर बैठी महिलाएं बाहर सब कुछ देख सकती थी लेकिन बाहर से अंदर बैठी महिलाओं को कोई नहीं देख सकता था।
पत्थर पर नक्काशी करके बनाई गई इस जाली की तस्वीर जैसलमेर के एक बेहद पुरानी हवेली की है
17 वी सदी में इस जाली को इस तरह से बनाया गया था कि अंदर बैठी महिलाएं बाहर सब कुछ देख सकती थी लेकिन बाहर से अंदर बैठी महिलाओं को कोई नहीं देख सकता था।
झूठी इस्लामी स्थापत्य कला बहुत पढ़ ली, अब सनातन धर्म की गौरवमयी कलाकारी देखो....🙏
8वीं सदी में दक्षिण भारत के "पल्लव वंश" के सूर्यवंशी क्षत्रियों द्वारा निर्मित यह मंदिर एक.... बेहद रहस्यमयी मंदिर है...🚩
यह गुफा एक ही पत्थर को काटकर बनाई गई है, ऊपर जो मंदिर है, वह भी उसी पहाड़ का हिस्सा है !
यह कैसे किया गया ?? इसका तो हमारे पास क्या...पूरी दुनिया के पास नहीं है !
पता नहीं, कैसे ज्ञानी और ध्यानी थें हमारे पूर्वज, जो वह कार्य कर गए, जिसकी कल्पना भी शायद हम नही कर सकतें...
यह केवल खुद तक सीमित मत रखना, अपने बच्चों को जरूर बताना...की हमारा भारत और उसकी सांस्कृतिक विरासत कितनी महान है, उसके बाद उनके मन में सनातन धर्म को लेकर कभी सवाल खड़े नही होंगे !
जिसको अपनी महान विरासत का स्मरण हो, उसका धर्मपरिवर्तन कोई नहीं करवा सकता...🚩
ओल्क्कन्ननेश्वर मंदिर, महाबलिपुरम तमिलनाडु
8वीं सदी में दक्षिण भारत के "पल्लव वंश" के सूर्यवंशी क्षत्रियों द्वारा निर्मित यह मंदिर एक.... बेहद रहस्यमयी मंदिर है...🚩
यह गुफा एक ही पत्थर को काटकर बनाई गई है, ऊपर जो मंदिर है, वह भी उसी पहाड़ का हिस्सा है !
यह कैसे किया गया ?? इसका तो हमारे पास क्या...पूरी दुनिया के पास नहीं है !
पता नहीं, कैसे ज्ञानी और ध्यानी थें हमारे पूर्वज, जो वह कार्य कर गए, जिसकी कल्पना भी शायद हम नही कर सकतें...
यह केवल खुद तक सीमित मत रखना, अपने बच्चों को जरूर बताना...की हमारा भारत और उसकी सांस्कृतिक विरासत कितनी महान है, उसके बाद उनके मन में सनातन धर्म को लेकर कभी सवाल खड़े नही होंगे !
जिसको अपनी महान विरासत का स्मरण हो, उसका धर्मपरिवर्तन कोई नहीं करवा सकता...🚩
ओल्क्कन्ननेश्वर मंदिर, महाबलिपुरम तमिलनाडु
*Krubera Cvae* धरती कि अभी तक ज्ञात सबसे गहरी गुफा है। इसकी गहराई 2197 मीटर ( 7208 फीट ) है। Krubera Cvae ब्लैक सागर के तट पर Abkhazia में स्थित है।
इसका मतलब होता है कौओं कि गुफा, इसको यह नाम इसलिय मिला क्योकि जब 1980 में जब प्रथम बार इस गुफा में प्रवेश किया गया तो वहाँ पर कौओं के बहुत सारे घोसलें बने हुए थे।
इस गुफा के अंदर प्राचीन कई शिवलिंग मिले हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि बहुत पुराने समय से ही शिव संप्रदाय अस्तित्व में था Krubera Cvae का अन्वेषण बहुत ही मुश्किल है क्योकि एक तो यहाँ पर साल के केवल 4 महीने ही जाया जा सकता है और दूसरा Abkhazia में राजनितिक हालात खराब रहते है इसलिए परमिशन आसानी से नहीं मिलती है। Abkhazia ने 1999 में अपने आप को जॉर्जिया से अलग स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया जबकि जॉर्जिया अभी भी इसे अपना हिस्सा मानता है।🔱
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इसका मतलब होता है कौओं कि गुफा, इसको यह नाम इसलिय मिला क्योकि जब 1980 में जब प्रथम बार इस गुफा में प्रवेश किया गया तो वहाँ पर कौओं के बहुत सारे घोसलें बने हुए थे।
इस गुफा के अंदर प्राचीन कई शिवलिंग मिले हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि बहुत पुराने समय से ही शिव संप्रदाय अस्तित्व में था Krubera Cvae का अन्वेषण बहुत ही मुश्किल है क्योकि एक तो यहाँ पर साल के केवल 4 महीने ही जाया जा सकता है और दूसरा Abkhazia में राजनितिक हालात खराब रहते है इसलिए परमिशन आसानी से नहीं मिलती है। Abkhazia ने 1999 में अपने आप को जॉर्जिया से अलग स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया जबकि जॉर्जिया अभी भी इसे अपना हिस्सा मानता है।🔱
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