ऐतिहासिक मंदिर और उनकी कथा
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हमारी संस्कृति हमारा अभिमान

*इस चैनल मे हमारे मंदिरों की कथा के आडियो विडियो और हमारी सभ्यता से जुड़ी जगह का प्रसारण किया जाता है*

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हमारे प्राचीन मंदिरों की दीवालों पर कुछ ऐसी नक्काशियाँ हैं जो इस बात की ओर इशारा करती हैं कि हमारे पूर्वजों के पास मिसाइल सहित अन्य विध्वंशक हथियारों की जानकारी थी ।

अमेरिका के वैज्ञानिक रॉबर्ट ओपनहाइमर ने अपनी रिसर्च में ब्रह्मास्त्र को एक परमाणु हथियार माना है, क्योंकि महाभारत में लाखों लोगों के एक साथ मारे जाने का उल्लेख है और यह एक परमाणु हथियार से ही संभव था।

ब्रह्मास्त्र एक दैवीय हथियार था। माना जाता है कि यह अचूक और सबसे भयंकर अस्त्र था। रामायण और महाभारतकाल में यह अस्त्र आज की तरह गिने चुने मॉडर्न देशों की तरह ही केवल कुछ गिने-चुने योद्धाओं के पास ही था।

यहाँ तक कि सिंधु घाटी सभ्यता में हुई रिसर्च में ऐसे कई नगर मिले हैं, जो लगभग 5000 से 7000 ईसापूर्व अस्तित्व में थे। यहां मिले नरकंकालों की स्थिति से पता चलता है कि मानो इन्हें किसी भयंकर प्रहार से मारा गया था। इसके भी सबूत मिले हैं कि यहां किसी काल में भयंकर ऊष्मा और रेडिएशन पैदा हुआ था, जैसा कि किसी परमाणु बम के विस्फोट के बाद पैदा होता है।
क्या कभी आपने सोचा है कि पुराणों में सूर्य के रथ को चलाने वाले 7 घोड़ो की बात क्यों कि गयी है ?

यह बात सच है कि विज्ञान की शिक्षा लेने वाला एक बच्चा भी इस बात से इनकार कर देगा कि सूर्य सात घोड़ो वाले किसी रथ पर सवार है, जबकि पुराणों में वर्णित जिस ज्ञान का मूर्ख और वामपंथी मजाक उड़ाते है उस ज्ञान को केवल एक बुद्धिमान ही समझ सकता है, हमारे वेद और पुराणों में अलंकारों का अत्यधिक प्रयोग हुआ है, सोचिये इन घोड़ो की संख्या 8 या 10 या और कुछ क्यों नहीं बताया गया आखिर 7 ही क्यों ? विज्ञान के अनुसार सूर्य के प्रकाश में सात रंग होते हैं इन्ही सात रंगों को ही घोड़ो की उपमा दी गयी है, रंग रूपी यहीं घोड़े समय के रथ पर सवार होकर अंतरिक्ष में आकाशगंगा की परिक्रमा करते रहते हैं
अपनी पहचान को तलाशती हमारी एक वीरान विरासत..

लेटराइट पत्थरों से बना यह तालाब दुनिया में अपनी तरह का एकमात्र तालाब है । इस तालाब में आश्चर्यजनक तरीके से तुला संक्रांति के दिन कावेरी का पानी प्रवेश करता है जिसकी वजह से यह हमेशा पवित्र पानी से भरा रहता है, फ्रेंड्स इस पवित्र स्थान श्रीराम और लक्ष्मण जी लंका जाते वक्त कुछ समय के लिए ठहरे थे ।

(श्री पेरालास्सेरी मंदिर, केरल)
हमारे मंदिरों को नष्ट करने वालों को यह पता नहीं था कि अगर एक भी स्तंभ बच गया तो वह सनातनियों के स्वाभिमान को जगाने के लिए पर्याप्त होगा ..

इन स्तंभों में सजावटी नक्काशियो वाले हिस्से को अलग से नहीं जोड़ा गया बल्कि पूरा स्तम्भ एक ही पत्थर को तोड़कर बना है । क्या इनकी फिनिशिंग देखकर आपको लगता है कि इसे मात्र छेनी से तराशा गया होगा ?

(चेलुवर्यस्वामी मंदिर, मेलुकोट)
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*☝️जयपुर जिले के सामोद इलाके में अरावली की पहाड़ियों के बीच में स्थित मालेश्वर धाम में बारिश के बाद बहते झरनों का अद्भुत नजारा।*

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चतुरभुज मंदिर, ORCHA मध्यप्रदेश
फोटोग्राफर 'वास्तु स्वर्ग!यह सुंदर मंदिर ओरछा शहर को छा जाता है और इसके शिखर आकाश में उड़ते हैं।4.5 मीटर ऊंचे चबूतरे पर बने सीढ़ियों से मुख़्य मंदिर जाता है.यह कहा जाता है कि यहीं सबसे पहले भगवान राम की एक प्रतिमा प्रतिष्ठापित थी।पर ऐसा न कर सकने पर राजा मधुकर ने, जो उस समय ओरछा का शासक था, यहां भगवान विष्णु की प्रतिमा रख देने का निश्चय किया।चतुर्भूज शब्द का शाब्दिक अर्थ है एक जिसके चार बाहें हैं, और वह भगवान राम का वर्णन करता है, जो भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।कहा जाता है कि राजा मधुकर ने यह मंदिर अपनी पत्नी गणेश कुमारी के लिए बनवाया था जो कि भगवान राम के भक्त थे।किंवदंती यह है कि भगवान स्वप्न में रानी को प्रकट हुए और उन्होंने उससे मंदिर निर्माण के लिए कहा।अयोध्या को रानी अपना मूर्ति प्राप्त करने के लिए राम का जन्मस्थान कहती है।वापस आने पर उसने मूर्ति को अपने महल में रख दिया क्योंकि मंदिर अभी भी निर्माणाधीन था।मंदिर बन जाने के बाद उसने मंदिर को बदलने का फैसला किया लेकिन मूर्ति आगे नहीं बढ़ेगी।इस प्रकार भगवान विष्णु की एक प्रतिमा पूजा-स्थल में रखी गई।मंदिर की वास्तुशिल्प सचमुच आश्चर्यजनक है क्योंकि यह अनेक मंजिलों वाले राजप्रासाद जैसे आर्केड द्वार, एक विशाल प्रवेश द्वार, एक केंद्रीय स्तंभ और किलाबंदी दिखाई देते हैं.मंदिर का बाह्य अलंकरण कमल के प्रतीकों और अन्य धार्मिक प्रतीकों के साथ किया गया है