नेपाल का न्यातपोल मंदिर, जिसका निर्माण नरेश भूपतिंद्र मल्ल ने करवाया था।
इस मंदिर पर चित्तौड़गढ़ के तीसरे शाके में अकबर की विशाल सेना से लड़ते हुए वीरगति पाने वाले मेड़ता के वीर योद्धा जयमल जी राठौड़ व मेवाड़ के वीर रावत पत्ताजी चुंडावत की मूर्तियां सुसज्जित हैं।
मेवाड़ के रावल रतनसिंह के भाई कुंभकर्ण के वंशज ही नेपाल के 'राणा' हुए थे।
1837 ई. में नेपाल नरेश राजेन्द्र विक्रमशाह ने अपने कुल के रीति रिवाजों के बारे में अधिक जानकारी के लिए प्रतिष्ठित स्त्री-पुरुषों के एक समूह को महाराणा जवानसिंह जी के शासनकाल में मेवाड़ भेजा था।
पोस्ट लेखक :- तनवीर सिंह सारंगदेवोत
इस मंदिर पर चित्तौड़गढ़ के तीसरे शाके में अकबर की विशाल सेना से लड़ते हुए वीरगति पाने वाले मेड़ता के वीर योद्धा जयमल जी राठौड़ व मेवाड़ के वीर रावत पत्ताजी चुंडावत की मूर्तियां सुसज्जित हैं।
मेवाड़ के रावल रतनसिंह के भाई कुंभकर्ण के वंशज ही नेपाल के 'राणा' हुए थे।
1837 ई. में नेपाल नरेश राजेन्द्र विक्रमशाह ने अपने कुल के रीति रिवाजों के बारे में अधिक जानकारी के लिए प्रतिष्ठित स्त्री-पुरुषों के एक समूह को महाराणा जवानसिंह जी के शासनकाल में मेवाड़ भेजा था।
पोस्ट लेखक :- तनवीर सिंह सारंगदेवोत
जितनी बार मैं इस प्रतिमा को देखता हूँ मेरा यकीन बढ़ जाता है कि हमारे पूर्वजों को उन्नत तकनीकों की जानकारियां थी ।
मेरा मानना है कि शेषनाग पर बैठे भगवान विष्णु की इस प्रतिमा के प्रत्येक हिस्से को जीवंत बनाने के लिए केवल छेनी-हथौड़ी ही पर्याप्त नहीं है । पर्फेक्शन की सीमा को पार करने वाली यह प्रतिमा एक पहाड़ को खोदकर बनाई गई है।
(बादामी-गुफा-3, 580 ईसवी, कर्नाटक)
मेरा मानना है कि शेषनाग पर बैठे भगवान विष्णु की इस प्रतिमा के प्रत्येक हिस्से को जीवंत बनाने के लिए केवल छेनी-हथौड़ी ही पर्याप्त नहीं है । पर्फेक्शन की सीमा को पार करने वाली यह प्रतिमा एक पहाड़ को खोदकर बनाई गई है।
(बादामी-गुफा-3, 580 ईसवी, कर्नाटक)
वैज्ञानिक नहीं पता लगा पा रहे गंगाजल का रहस्य...
फ्रास के प्रसिद्ध डा0 डी हेरेल ने जब गंगाजल की इतनी प्रशंसा सुनी तो वे भारत आये और गंगाजल का वैज्ञानिक परीक्षण किया ।
उन्होने पाया कि इस जल में संक्रामक रोगों के कीटाणुओं की जबरजस्त शक्ति है। आश्चर्यजनक बात तो यह है कि एक गिलास में किसी नदी या कुएं का पानी लें‚ जिसमें कोई कीटाणु नाशक तत्व नहो‚ उसमें गंगाजल मिला देने पर उसमें कृमिनाशक सामर्थ्य आ जाती है । इससे सिद्ध होता है कि गंगाजी में कोई ऐसा तत्व है जो किसी मिश्रण वाले जल को भी अपने ही समान बना लेता है । यही कारण 1557 मील लम्बी गंगाजी में गोमती‚घाघरा ‚ यमुना ‚सेन ‚ पर उसकी कृमिनाशक क्षमता अक्षृण्ण बनी रही। यह एक प्रकार का चमत्कार ही है।
डा0 डी हेरेल ने अपने प्रयोगो में सिद्ध कर दिया कि इस जल में टी0बी0 अतिसार ‚ संग्रहणी‚ ब्रण‚ हैजा के जीवाणुओं को मारने की शक्ति विद्यमान है ।
डा0 केहिमान ने लिखा है– ʺकिसी की शक्ति जवाब देने लगे तो उस समय उसे गंगाजल दिया जाये तो आश्चर्यजनक ढंग से जीवनी शक्ति बढती और रोगी का ऐसा लगता है कि उसके भीतर किसी सात्विक आनन्द का स्त्रोत फूट रहा है।ʺडा0 हेनकेन आगरा में गवर्नमंण्ट सा
फ्रास के प्रसिद्ध डा0 डी हेरेल ने जब गंगाजल की इतनी प्रशंसा सुनी तो वे भारत आये और गंगाजल का वैज्ञानिक परीक्षण किया ।
उन्होने पाया कि इस जल में संक्रामक रोगों के कीटाणुओं की जबरजस्त शक्ति है। आश्चर्यजनक बात तो यह है कि एक गिलास में किसी नदी या कुएं का पानी लें‚ जिसमें कोई कीटाणु नाशक तत्व नहो‚ उसमें गंगाजल मिला देने पर उसमें कृमिनाशक सामर्थ्य आ जाती है । इससे सिद्ध होता है कि गंगाजी में कोई ऐसा तत्व है जो किसी मिश्रण वाले जल को भी अपने ही समान बना लेता है । यही कारण 1557 मील लम्बी गंगाजी में गोमती‚घाघरा ‚ यमुना ‚सेन ‚ पर उसकी कृमिनाशक क्षमता अक्षृण्ण बनी रही। यह एक प्रकार का चमत्कार ही है।
डा0 डी हेरेल ने अपने प्रयोगो में सिद्ध कर दिया कि इस जल में टी0बी0 अतिसार ‚ संग्रहणी‚ ब्रण‚ हैजा के जीवाणुओं को मारने की शक्ति विद्यमान है ।
डा0 केहिमान ने लिखा है– ʺकिसी की शक्ति जवाब देने लगे तो उस समय उसे गंगाजल दिया जाये तो आश्चर्यजनक ढंग से जीवनी शक्ति बढती और रोगी का ऐसा लगता है कि उसके भीतर किसी सात्विक आनन्द का स्त्रोत फूट रहा है।ʺडा0 हेनकेन आगरा में गवर्नमंण्ट सा
Forwarded from श्रीमद्भागवत कथा मूल पाठ
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद* 🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
*📖श्रीमद्भागवत कथा मूल पाठ📖*
*कुल भाग* ➡️2️⃣9️⃣6️⃣
*आज का भाग* ⬇️⬇️
*42._Vaarha_Avtar_Ki_Katha*
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श्रीमद्भागवत कथा मूल पाठ
इस चैनल श्रीमद्भागवत कथा मूल पाठ का प्रसारण किया जा रहा है
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सौ साल बनने में लगे तोड़ने में तीन सौ साल लग गये #विदिशा_के_विजय_मंदिर को जो तीन सौ फ़िट ऊँचा था।मुग़ल इतिहासकार अलबरूनी ने लिखा है कि यह मंदिर 100 गज ऊँचा था और मीलों दूर से इसका शिखर दिखाई देता था।
तीन सौ साल के ध्वंस के बाद भी जब दीवारें नहीं टूटी तब औरंगज़ेब ने इसे तोप के गोलों से उड़ाने का आदेश दिया। मंदिर को ध्वस्त कर इस विशाल मंदिर के मलवे से ही आलमगीरी मस्जिद का निर्माण कर दिया गया और शहर का नाम भी विदिशा से आलमगीरपुर कर दिया गया।
नब्बे के दशक में तेज बारिश से मस्जिद का मसला धसका और मंदिर का आधार सामने आया भारतीय पुरातत्व ने खुदाई की तब इस एक हज़ार साल पुराने मंदिर से जुड़े तथ्य और अभिलेख प्राप्त हुये। उत्खनन का विरोध हुआ और काम रोक दिया गया।तब से यही स्थिति है इस मंदिर की।
विध्वंस के अवशेष एक किलोमीटर के दायरे में जगह-जगह आज भी बिखरे पड़े हैं।कभी आईये और देखिये कि इतिहास की हत्या यहाँ कितनी बेरहमी से हुई हम नहीं कहेंगे, कहेंगे इस परिसर में फैले पड़े ध्वंस के बाद के अवशेष जो अपनी कहानी खुद बयां करने में पूरी तरह सक्षम है।
🚩🚩🚩सनातन धर्म की जय हो🚩🚩🚩
तीन सौ साल के ध्वंस के बाद भी जब दीवारें नहीं टूटी तब औरंगज़ेब ने इसे तोप के गोलों से उड़ाने का आदेश दिया। मंदिर को ध्वस्त कर इस विशाल मंदिर के मलवे से ही आलमगीरी मस्जिद का निर्माण कर दिया गया और शहर का नाम भी विदिशा से आलमगीरपुर कर दिया गया।
नब्बे के दशक में तेज बारिश से मस्जिद का मसला धसका और मंदिर का आधार सामने आया भारतीय पुरातत्व ने खुदाई की तब इस एक हज़ार साल पुराने मंदिर से जुड़े तथ्य और अभिलेख प्राप्त हुये। उत्खनन का विरोध हुआ और काम रोक दिया गया।तब से यही स्थिति है इस मंदिर की।
विध्वंस के अवशेष एक किलोमीटर के दायरे में जगह-जगह आज भी बिखरे पड़े हैं।कभी आईये और देखिये कि इतिहास की हत्या यहाँ कितनी बेरहमी से हुई हम नहीं कहेंगे, कहेंगे इस परिसर में फैले पड़े ध्वंस के बाद के अवशेष जो अपनी कहानी खुद बयां करने में पूरी तरह सक्षम है।
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वामपंथियों ने सनातनियों की इस कला को इतिहास मे कोई स्थान नहीं दिया लेकिन आज के तकनीकी युग मे भी क्या हमारे पूर्वजों की शिल्पकला की बराबरी की जा सकती है?
रोम या एथेंस नहीं Srirangam swami ki pavitra bhoomi hai
Tamilnadu
Tamilnadu
यह किसी जीवित नर्तकी का पैर नहीं है
मित्रों क्या आप विश्वास करेंगे यह एक पत्थर की प्रतिमा है ?
हाँ ..इसे 900 साल पहले सनातनियों ने तराशा था, जब तक आप इसे स्पर्श नहीं करते तब तक यह किसी जीवित नर्तकी के पैर प्रतीत होते हैं ।
सच में हमारी प्राचीन सभ्यता का मुकाबला दुनियाँ की कोई सभ्यता नहीं कर सकती ।
#चेन्नकेशवा_मंदिर_बेलूर_कर्नाटक_भारतवर्ष
मित्रों क्या आप विश्वास करेंगे यह एक पत्थर की प्रतिमा है ?
हाँ ..इसे 900 साल पहले सनातनियों ने तराशा था, जब तक आप इसे स्पर्श नहीं करते तब तक यह किसी जीवित नर्तकी के पैर प्रतीत होते हैं ।
सच में हमारी प्राचीन सभ्यता का मुकाबला दुनियाँ की कोई सभ्यता नहीं कर सकती ।
#चेन्नकेशवा_मंदिर_बेलूर_कर्नाटक_भारतवर्ष