वामपंथियों ने सनातनियों की इस कला को इतिहास मे कोई स्थान नहीं दिया लेकिन आज के तकनीकी युग मे भी क्या हमारे पूर्वजों की शिल्पकला की बराबरी की जा सकती है?
रोम या एथेंस नहीं Srirangam swami ki pavitra bhoomi hai
Tamilnadu
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यह किसी जीवित नर्तकी का पैर नहीं है
मित्रों क्या आप विश्वास करेंगे यह एक पत्थर की प्रतिमा है ?
हाँ ..इसे 900 साल पहले सनातनियों ने तराशा था, जब तक आप इसे स्पर्श नहीं करते तब तक यह किसी जीवित नर्तकी के पैर प्रतीत होते हैं ।
सच में हमारी प्राचीन सभ्यता का मुकाबला दुनियाँ की कोई सभ्यता नहीं कर सकती ।
#चेन्नकेशवा_मंदिर_बेलूर_कर्नाटक_भारतवर्ष
मित्रों क्या आप विश्वास करेंगे यह एक पत्थर की प्रतिमा है ?
हाँ ..इसे 900 साल पहले सनातनियों ने तराशा था, जब तक आप इसे स्पर्श नहीं करते तब तक यह किसी जीवित नर्तकी के पैर प्रतीत होते हैं ।
सच में हमारी प्राचीन सभ्यता का मुकाबला दुनियाँ की कोई सभ्यता नहीं कर सकती ।
#चेन्नकेशवा_मंदिर_बेलूर_कर्नाटक_भारतवर्ष
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*फैशन क्या होता है..ये हमसे पूछो ।*
प्रतिमाओं को ध्यान से देखिये एक प्रतिमा में महिला अपनी आंखों में काजल लगा रही है और पास की ही छोटी प्रतिमा में एक महिला ने पर्स लिया है, अगली बार जब आप किसी को काजल लगाते हुए देखना तो याद रखना की इस फैशन की शुरुआत हजारों वर्ष पहले सनातनियों ने ही की थी ।
(खजुराहो मंदिर, मध्यप्रदेश)
lost temples of world
*फैशन क्या होता है..ये हमसे पूछो ।*
प्रतिमाओं को ध्यान से देखिये एक प्रतिमा में महिला अपनी आंखों में काजल लगा रही है और पास की ही छोटी प्रतिमा में एक महिला ने पर्स लिया है, अगली बार जब आप किसी को काजल लगाते हुए देखना तो याद रखना की इस फैशन की शुरुआत हजारों वर्ष पहले सनातनियों ने ही की थी ।
(खजुराहो मंदिर, मध्यप्रदेश)
lost temples of world
*🛕जगदीश मंदिर, उदयपुर*
*🔶इसका निर्माण महाराणा जगत सिंह ने 1651 में करवाया था , उस समय उदयपुर मेवाड़ की राजधानी था। यह मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है यह उदयपुर का सबसे बड़ा मंदिर है । मंदिर में प्रतिष्ठापित चार हाथ वाली विष्णु की छवि काले पत्थर से बनी है।*
*🔶 यह मंदिर 50 कलात्मक खंभों पर टिका है। मंदिर में भगवान जगन्नाथ का श्रृंगार अति सुंदर है। मंदिर के द्वारपाल के रूप में सीढ़ियों के पास दो हाथियों की मूर्तियां तैनात है।*
*🔶खंभों पर विभिन्न छोटी-छोटी शिल्प कलाकृतियाँ है जिन्हें देखकर लगता है मानो ये कोई कहानी कह रही हो । मंदिर के अंदर लगे शिलालेख हमें इतिहास के बारे में बहुत कुछ बताते हैं।*
*🔶इसका निर्माण महाराणा जगत सिंह ने 1651 में करवाया था , उस समय उदयपुर मेवाड़ की राजधानी था। यह मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है यह उदयपुर का सबसे बड़ा मंदिर है । मंदिर में प्रतिष्ठापित चार हाथ वाली विष्णु की छवि काले पत्थर से बनी है।*
*🔶 यह मंदिर 50 कलात्मक खंभों पर टिका है। मंदिर में भगवान जगन्नाथ का श्रृंगार अति सुंदर है। मंदिर के द्वारपाल के रूप में सीढ़ियों के पास दो हाथियों की मूर्तियां तैनात है।*
*🔶खंभों पर विभिन्न छोटी-छोटी शिल्प कलाकृतियाँ है जिन्हें देखकर लगता है मानो ये कोई कहानी कह रही हो । मंदिर के अंदर लगे शिलालेख हमें इतिहास के बारे में बहुत कुछ बताते हैं।*
तमिलनाडु से 60 किलोमीटर कन्याकुमारी की ओर
सुचिन्द्रम गोपुरम का यह सिर्फ ऊपर का हिस्सा है। है ना अद्भुत अद्वितीय कलाकारी?? कुछ तो विशेष तकनीक रही होगी हमारे पूर्वजों के पास जिसे फिर से प्राप्त करने की कोशिश हमारी होनी चाहिए।
बाकी तो वामपंथी इतिहासकारों ने अकबर महान और ताजमहल को सर्वश्रेष्ठ कृति बताया है जबकि हम देखे तो हमारे पुराने मंदिर एक विराट धरोवर को संजोए हुए है। गर्व है हमें उन शिल्पकारों पर जिन्होंने इतने जीवंत कलाकृतियों से हमें संजोया है।
सुचिन्द्रम गोपुरम का यह सिर्फ ऊपर का हिस्सा है। है ना अद्भुत अद्वितीय कलाकारी?? कुछ तो विशेष तकनीक रही होगी हमारे पूर्वजों के पास जिसे फिर से प्राप्त करने की कोशिश हमारी होनी चाहिए।
बाकी तो वामपंथी इतिहासकारों ने अकबर महान और ताजमहल को सर्वश्रेष्ठ कृति बताया है जबकि हम देखे तो हमारे पुराने मंदिर एक विराट धरोवर को संजोए हुए है। गर्व है हमें उन शिल्पकारों पर जिन्होंने इतने जीवंत कलाकृतियों से हमें संजोया है।
आप जितनी बार हमारे प्राचीन मंदिरों में जाओगे हमारे पूर्वजों की तकनीक आपको हर-बार चौंका देंगी
एक प्राचीन हिन्दू मंदिर का यह दरवाजा लकड़ी का नहीं बल्कि पत्थर का है, जब तक पर्यटक इसे अपने हाथों से स्पर्श नहीं कर लेते इसे लकड़ी का दरवाजा मान बैठते हैं, यह मंदिर सर्वोच्च शक्ति शिव को समर्पित है, जो कि राजा इंद्रवर्मन द्वारा निर्मित है ।
(प्रिह को मंदिर, कंबोडिया)
एक प्राचीन हिन्दू मंदिर का यह दरवाजा लकड़ी का नहीं बल्कि पत्थर का है, जब तक पर्यटक इसे अपने हाथों से स्पर्श नहीं कर लेते इसे लकड़ी का दरवाजा मान बैठते हैं, यह मंदिर सर्वोच्च शक्ति शिव को समर्पित है, जो कि राजा इंद्रवर्मन द्वारा निर्मित है ।
(प्रिह को मंदिर, कंबोडिया)
आधुनिक कलाकार करोड़ो रूपये लगाकर भी सुंदरता के इस स्तर को प्राप्त नहीं कर सकते ।
यह केदारेश्वर मंदिर का शिखर है, इसका निर्माण 950 वर्ष पूर्व किया गया था, विधर्मियों ने ऐसे 40000 मंदिरो को नष्ट कर दिया, सोचिये अगर सभी मंदिर सुरक्षित होते तो आज विश्व पटल पर भारत की स्थिति कितनी समृद्ध होती ।
(केदारेश्वर मंदिर, कर्नाटक)
यह केदारेश्वर मंदिर का शिखर है, इसका निर्माण 950 वर्ष पूर्व किया गया था, विधर्मियों ने ऐसे 40000 मंदिरो को नष्ट कर दिया, सोचिये अगर सभी मंदिर सुरक्षित होते तो आज विश्व पटल पर भारत की स्थिति कितनी समृद्ध होती ।
(केदारेश्वर मंदिर, कर्नाटक)
इन #मूर्तियों का #रहस्य, क्या रहस्य ही बना रहेगा ???
उनाकोटि के जंगल- यहां #शिव और समस्त देवताओं की मूर्ति पहाड़ो पर उकेरी हुई है, या पहाड़ो को काटकर बनाई हुई है । यहां की जनसँख्या भी इतनी नही है, यह मूर्ति किसने बनाई, कब बनाई इसका कोई इतिहास नही है ।
सिर्फ अनुमान है कि ये मूर्तियां लाखो वर्ष पुरानी है । हम कहते है , ईसापूर्व मनुष्य इतना उन्नत नही था , तो पहाड़ो को काटकर ऐसी मूर्तियां बनी कैसे ?
हम शायद आज अत्याधुनिक मशीनों से पहाड़ो को काटकर भी ऐसी मूर्तियां नही बना सकते ।
सनातन ने तो पहाड़ काटकर मूर्तियां बनाई है,,,,,
किसी का भवन लूटकर नाम नहीं दिया है अपना,
#उनाकोटि(त्रिपुरा), भारत
ये है दिव्य , भव्य , समृद्ध , श्रेष्ठ और उत्कृष्ट भारत
उनाकोटि के जंगल- यहां #शिव और समस्त देवताओं की मूर्ति पहाड़ो पर उकेरी हुई है, या पहाड़ो को काटकर बनाई हुई है । यहां की जनसँख्या भी इतनी नही है, यह मूर्ति किसने बनाई, कब बनाई इसका कोई इतिहास नही है ।
सिर्फ अनुमान है कि ये मूर्तियां लाखो वर्ष पुरानी है । हम कहते है , ईसापूर्व मनुष्य इतना उन्नत नही था , तो पहाड़ो को काटकर ऐसी मूर्तियां बनी कैसे ?
हम शायद आज अत्याधुनिक मशीनों से पहाड़ो को काटकर भी ऐसी मूर्तियां नही बना सकते ।
सनातन ने तो पहाड़ काटकर मूर्तियां बनाई है,,,,,
किसी का भवन लूटकर नाम नहीं दिया है अपना,
#उनाकोटि(त्रिपुरा), भारत
ये है दिव्य , भव्य , समृद्ध , श्रेष्ठ और उत्कृष्ट भारत
आयरलैण्ड का २२ एकड़ में फैला एक विश्व प्रसिद्ध पार्क है।जिसमें भगवान गणेश के अद्भुत दर्शनीय विग्रह हैं।
संगीत भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है।इस पार्क में भगवान गणेश विभिन्न वाद्ययंत्रों का वादन करते हुए दिखाए गए हैं।
एक विग्रह जिसमें वीणा वादक गणेश जी के चरण सान्निध्य में मूषक (चूहा) विद्यमान है वो दर्शनीय है 👇आयरलैण्ड का २२ एकड़ में फैला एक विश्व प्रसिद्ध पार्क है।जिसमें भगवान गणेश के अद्भुत दर्शनीय विग्रह हैं।
संगीत भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है।इस पार्क में भगवान गणेश विभिन्न वाद्ययंत्रों का वादन करते हुए दिखाए गए हैं।
एक विग्रह जिसमें वीणा वादक गणेश जी के चरण सान्निध्य में मूषक (चूहा) विद्यमान है वो दर्शनीय है 👇
संगीत भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है।इस पार्क में भगवान गणेश विभिन्न वाद्ययंत्रों का वादन करते हुए दिखाए गए हैं।
एक विग्रह जिसमें वीणा वादक गणेश जी के चरण सान्निध्य में मूषक (चूहा) विद्यमान है वो दर्शनीय है 👇आयरलैण्ड का २२ एकड़ में फैला एक विश्व प्रसिद्ध पार्क है।जिसमें भगवान गणेश के अद्भुत दर्शनीय विग्रह हैं।
संगीत भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है।इस पार्क में भगवान गणेश विभिन्न वाद्ययंत्रों का वादन करते हुए दिखाए गए हैं।
एक विग्रह जिसमें वीणा वादक गणेश जी के चरण सान्निध्य में मूषक (चूहा) विद्यमान है वो दर्शनीय है 👇