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🛑 *भीष्म पितामह अपनी मृत्यु के समय बाणों की शय्या पर लेटे हुए।*
🛑 *चेन्नेकेश्वर मंदिर, जिसे केशव या बेलूर के विजयनारायण मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, भारत के कर्नाटक राज्य के हासन जिले में 12 वीं शताब्दी का एक हिंदू मंदिर है। यह 1117 ईस्वी में राजा विष्णुवर्धन द्वारा बनवाया गया था, बेलूर जो यागाची नदी के तट पर स्थित है इसलिए इसे वेलापुरा भी कहा जाता है, जो एक प्रारंभिक होयसला साम्राज्य की राजधानी थी।*
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*जय सनातन धर्म*
🛑 *भीष्म पितामह अपनी मृत्यु के समय बाणों की शय्या पर लेटे हुए।*
🛑 *चेन्नेकेश्वर मंदिर, जिसे केशव या बेलूर के विजयनारायण मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, भारत के कर्नाटक राज्य के हासन जिले में 12 वीं शताब्दी का एक हिंदू मंदिर है। यह 1117 ईस्वी में राजा विष्णुवर्धन द्वारा बनवाया गया था, बेलूर जो यागाची नदी के तट पर स्थित है इसलिए इसे वेलापुरा भी कहा जाता है, जो एक प्रारंभिक होयसला साम्राज्य की राजधानी थी।*
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*जय सनातन धर्म*
*🛕भोजेश्वर मंदिर, भोजपुर(मध्य प्रदेश)*
*🔶 भोजपुर से लगती हुई पहाड़ी पर एक विशाल, अधूरा शिव मंदिर हैं। इस शिव मंदिर का निर्माण परमार वंश के प्रसिद्ध राजा भोज (1010 ई - 1055 ई ) द्वारा किया गया था।*
*🔶 विशाल शिवलिंग जो कि विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग हैं। सम्पूर्ण शिवलिंग कि लम्बाई 5.5 मीटर (18 फीट ), व्यास 2.3 मीटर (7.5 फीट ), तथा केवल लिंग कि लम्बाई 3.85 मीटर (12 फीट ) है।*
*🔶शिवलिंग इतना बड़ा है कि उसका अभिषेक धरती पर खड़े होकर नहीं किया जा सकता। इसलिए हमेशा से ही इस शिवलिंग का अभिषेक और पूजन इसकी जलहरी पर चढ़कर ही किया जाता है।*
*🔶 भोजपुर से लगती हुई पहाड़ी पर एक विशाल, अधूरा शिव मंदिर हैं। इस शिव मंदिर का निर्माण परमार वंश के प्रसिद्ध राजा भोज (1010 ई - 1055 ई ) द्वारा किया गया था।*
*🔶 विशाल शिवलिंग जो कि विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग हैं। सम्पूर्ण शिवलिंग कि लम्बाई 5.5 मीटर (18 फीट ), व्यास 2.3 मीटर (7.5 फीट ), तथा केवल लिंग कि लम्बाई 3.85 मीटर (12 फीट ) है।*
*🔶शिवलिंग इतना बड़ा है कि उसका अभिषेक धरती पर खड़े होकर नहीं किया जा सकता। इसलिए हमेशा से ही इस शिवलिंग का अभिषेक और पूजन इसकी जलहरी पर चढ़कर ही किया जाता है।*
245 फीट ऊंचा महान मुरूडेश्वर मंदिर का जिक्र रामायण काल से माना जाता है, इसकी प्राचीनता का कोई अनुमान नही की यह वास्तव में कितने वर्ष प्राचीन है, शायद हजारो वर्ष या इससे भी प्राचीन ....
यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है ....
मुरुदेश्वर (कन्नड : ಮುರುಡೇಶ್ವರ) दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में उत्तर कन्नड जिले के भटकल तहसील स्थित एक कस्बा है। 'मुरुदेश्वर' भगवान शिव का एक नाम है। यहाँ भगवान शंकर की विश्व की दूसरी सबसे ऊँची मूर्ति स्थित है। यह कस्बा अरब सागर के तट पर स्थित है और मंगलुरु से १६५ किलोमीटर दूर अरब सागर के किनारे बहुत ही सुन्दर एवं शांत स्थान पर बना हुआ है। मुरुदेश्वर सागरतट, कर्णाटक के सब से सुन्दर तटों में से एक है। पर्यटकों के लिए यहाँ आना दोगुना लाभप्रद रहता है, जहां एक ओर इस धार्मिक स्थल के दर्शन होते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्राकृतिक सुन्दरता का आनन्द भी मिलता है।
यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है ....
मुरुदेश्वर (कन्नड : ಮುರುಡೇಶ್ವರ) दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में उत्तर कन्नड जिले के भटकल तहसील स्थित एक कस्बा है। 'मुरुदेश्वर' भगवान शिव का एक नाम है। यहाँ भगवान शंकर की विश्व की दूसरी सबसे ऊँची मूर्ति स्थित है। यह कस्बा अरब सागर के तट पर स्थित है और मंगलुरु से १६५ किलोमीटर दूर अरब सागर के किनारे बहुत ही सुन्दर एवं शांत स्थान पर बना हुआ है। मुरुदेश्वर सागरतट, कर्णाटक के सब से सुन्दर तटों में से एक है। पर्यटकों के लिए यहाँ आना दोगुना लाभप्रद रहता है, जहां एक ओर इस धार्मिक स्थल के दर्शन होते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्राकृतिक सुन्दरता का आनन्द भी मिलता है।
Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
*वीडियो👆🏻👆🏻👇🏻👇🏻*
🕰➡️3.07
*🙏🏻💐पोंडीचरी में सिर्फ एक गणेशजी का पुराना मंदिर बचा है !बाकी सब को ब्रिटीशराज में तोड दिये गये थे!💐🙏🏻*
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*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
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उनाकोटि मंदिर, त्रिपुरा।
यहाँ जंगल मे शिव और समस्त देवताओं की निन्यानवे लाख निन्यानवे हजार नौ सौ निन्यानवे देव मूर्तियाँ चट्टानों को काट कर उकेरी गई हैं। इतनी तो यहाँ की जनसंख्या भी नहीं है। ये मूर्तियाँ कब और किसने बनायी इसका कोई इतिहास नहीं है, सिर्फ अनुमान है कि यह मूर्तियाँ 8वीं-9वीं शताब्दी में एक शिव भक्त ने उकेरी थी। उनाकोटि की पहाड़ियो में 30 फुट ऊंचे खड़ी चट्टान पर उकेरे गए 'उनाकोटिस्वर काल भैरव' प्रमुख है
इसके उनाकोटी के रघुनंदन पर्वतों पर गणेशजी की प्रतिमा पर ऊपर से गिरता झरने का पानी अदभुत दृश्य पैदा करता है। उनाकोटि का अर्थ होता है एक करोड़ से एक कम। कदाचित् वर्तमान में अत्याधुनिक यंत्रों से पहाड़ों को काटकर भी ऐसी मूर्तियाँ बनाना बेहद दुष्कर कार्य है।
यहाँ जंगल मे शिव और समस्त देवताओं की निन्यानवे लाख निन्यानवे हजार नौ सौ निन्यानवे देव मूर्तियाँ चट्टानों को काट कर उकेरी गई हैं। इतनी तो यहाँ की जनसंख्या भी नहीं है। ये मूर्तियाँ कब और किसने बनायी इसका कोई इतिहास नहीं है, सिर्फ अनुमान है कि यह मूर्तियाँ 8वीं-9वीं शताब्दी में एक शिव भक्त ने उकेरी थी। उनाकोटि की पहाड़ियो में 30 फुट ऊंचे खड़ी चट्टान पर उकेरे गए 'उनाकोटिस्वर काल भैरव' प्रमुख है
इसके उनाकोटी के रघुनंदन पर्वतों पर गणेशजी की प्रतिमा पर ऊपर से गिरता झरने का पानी अदभुत दृश्य पैदा करता है। उनाकोटि का अर्थ होता है एक करोड़ से एक कम। कदाचित् वर्तमान में अत्याधुनिक यंत्रों से पहाड़ों को काटकर भी ऐसी मूर्तियाँ बनाना बेहद दुष्कर कार्य है।