उनाकोटि मंदिर, त्रिपुरा।
यहाँ जंगल मे शिव और समस्त देवताओं की निन्यानवे लाख निन्यानवे हजार नौ सौ निन्यानवे देव मूर्तियाँ चट्टानों को काट कर उकेरी गई हैं। इतनी तो यहाँ की जनसंख्या भी नहीं है। ये मूर्तियाँ कब और किसने बनायी इसका कोई इतिहास नहीं है, सिर्फ अनुमान है कि यह मूर्तियाँ 8वीं-9वीं शताब्दी में एक शिव भक्त ने उकेरी थी। उनाकोटि की पहाड़ियो में 30 फुट ऊंचे खड़ी चट्टान पर उकेरे गए 'उनाकोटिस्वर काल भैरव' प्रमुख है
इसके उनाकोटी के रघुनंदन पर्वतों पर गणेशजी की प्रतिमा पर ऊपर से गिरता झरने का पानी अदभुत दृश्य पैदा करता है। उनाकोटि का अर्थ होता है एक करोड़ से एक कम। कदाचित् वर्तमान में अत्याधुनिक यंत्रों से पहाड़ों को काटकर भी ऐसी मूर्तियाँ बनाना बेहद दुष्कर कार्य है।
यहाँ जंगल मे शिव और समस्त देवताओं की निन्यानवे लाख निन्यानवे हजार नौ सौ निन्यानवे देव मूर्तियाँ चट्टानों को काट कर उकेरी गई हैं। इतनी तो यहाँ की जनसंख्या भी नहीं है। ये मूर्तियाँ कब और किसने बनायी इसका कोई इतिहास नहीं है, सिर्फ अनुमान है कि यह मूर्तियाँ 8वीं-9वीं शताब्दी में एक शिव भक्त ने उकेरी थी। उनाकोटि की पहाड़ियो में 30 फुट ऊंचे खड़ी चट्टान पर उकेरे गए 'उनाकोटिस्वर काल भैरव' प्रमुख है
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The First One who worked on Language grammer was MAHARISHI PANINI in the book अष्टाध्यायी (Aṣṭādhyāyī)
West Gave all credit to "Lindley Murray's"
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छेनी हथौड़ी से इस तरह के मंदिर बनाए नहीं जा सकते।
हम तो केवल अनुमान लगा सकते हैं कि हमारे पूर्वज लेजर कटिंग से भी अधिक कोई उच्च तकनीक जानते थे और हमें हमारे इतिहास से विमुख किया गया, एक निश्चित षड़यंत्र के अंतर्गत
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Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
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🕰➡️2.19
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विजय स्तम्भ का रियासतकालीन दुर्लभ दृश्य (1880 ई. से पूर्व)
विजय स्तम्भ (चित्तौड़गढ़ दुर्ग) :- इसे भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोष कहते हैं। संसार भर में इसका कोई सानी नहीं। इसका निर्माण महाराणा कुम्भा के शासनकाल में हुआ। इसे बनने में 8 वर्ष लगे। ये भगवान विष्णु को समर्पित है। ये 9 मंजिला एक स्तम्भ है। इसकी ऊंचाई 122 फीट है, जिसमें 157 सीढियां हैं। स्तम्भ का निर्माण वास्तुशिल्पी मंडन द्वारा निर्मित नक्शे के आधार पर उनके निर्देशन में हुआ। इसके वास्तुकार जैता व उनके पुत्र नापा, पुंजा आदि थे।
लोग 8वीं मंज़िल तक ही जाते हैं। 9वीं के लिए उल्टी सीढियां हैं। 9वीं मंज़िल पर कीर्तिस्तंभ प्रशस्ति अंकित है।
कीर्ति स्तम्भ के भीतर व बाहर भगवान विष्णु के सभी स्वरूपों सहित अनेक मूर्तियां सुसज्जित हैं।
पोस्ट लेखक :- तनवीर सिंह सारंगदेवोत (लक्ष्मणपुरा -मेवाड़)
विजय स्तम्भ (चित्तौड़गढ़ दुर्ग) :- इसे भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोष कहते हैं। संसार भर में इसका कोई सानी नहीं। इसका निर्माण महाराणा कुम्भा के शासनकाल में हुआ। इसे बनने में 8 वर्ष लगे। ये भगवान विष्णु को समर्पित है। ये 9 मंजिला एक स्तम्भ है। इसकी ऊंचाई 122 फीट है, जिसमें 157 सीढियां हैं। स्तम्भ का निर्माण वास्तुशिल्पी मंडन द्वारा निर्मित नक्शे के आधार पर उनके निर्देशन में हुआ। इसके वास्तुकार जैता व उनके पुत्र नापा, पुंजा आदि थे।
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