ऐतिहासिक मंदिर और उनकी कथा
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हमारी संस्कृति हमारा अभिमान

*इस चैनल मे हमारे मंदिरों की कथा के आडियो विडियो और हमारी सभ्यता से जुड़ी जगह का प्रसारण किया जाता है*

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Forwarded from Sadhak Swami
क्या कोई बता सकता है इसे बनाने में किस तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ है ?

यह किसी धातु के स्तम्भ नहीं हैं जिनके पार्ट्स को अलग-अलग आकार देकर वेल्डिंग या अन्य तकनीक से आपस में जोड़ा गया है, बल्कि यह पत्थर के स्तम्भ हैं, और सबसे ज्यादा रोचक बात यह है की प्रत्येक स्तम्भ केवल एक पत्थर से बना है । यह मंदिर इतना प्राचीन है कि इसके निर्माण का निश्चित समय काल ज्ञात नहीं है ।

क्या हमारे पूर्वजों के द्वारा निर्मित ऐसी विरासतें आपको सनातनी होने पर गर्व करने के लिए मजबूर नहीं करती ?

(किराडू मंदिर, राजस्थान, अनुमानतः 11वीं शताब्दी )
साभार
Forwarded from Sadhak Swami
यह रामप्पा मंदिर, वारंगल की एक छत है
इसमें 100 से अधिक प्रतिमा हैं, 900 साल से अधिक समय के बाद भी सभी अभी भी पहचान योग्य हैं ।

यह जानकर आश्चर्य होगा कि यह एक काले रंग की बेसाल्ट चट्टान है । पृथ्वी पर सबसे कठिन चट्टानों में से एक।

इन्हें तराशना कितना मुश्किल रहा होगा
Forwarded from Sadhak Swami
तीनों तस्वीरों को अलग अलग और ध्यान से देखिए। पहली तसवीर में पूरा मंदिर, दूसरी तस्वीर में उस मंदिर का एक हिस्सा और तीसरी तस्वीर में उस हिस्से का का एक छोटा सा हिस्सा। कल्पना कीजिये हमारे महान पूर्वजों के पास वह कौन सी उन्नत टेक्नोलॉजी थी जिसे हमने भुला दिया।

क्या आज के मॉडर्न इंजीनियरिंग ये डिजाइन कर सकती है वानप्रस्थ के श्रीरंगापुरम, श्री रंगनायकास्वामी मंदिर के गोपुरम पर वाक पत्ती पे बालकृष्ण !!

भारत 🚩🇮🇳🚩

साभार
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🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
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🕰➡️3.41

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तमिलनाडु के ऐरावतेश्वर मंदिर परिसर में स्थित यह सीढियां 900 वर्ष पुरानी हैं।

कुछ इतिहासकार बताते हैं कि हमारे पूर्वजों के पास ऐसी तकनीक थी जिससे वो अलग-अलग पत्थरों को पिघलाकर उनके विलयन से नई प्रकृति के पत्थरों को बनाने में सक्षम थे।

इसी तकनीक से वो वांछित हल्कापन, मजबूती या फिर अलग-अलग स्वर उत्पन्न करने वाले पत्थरों का निर्माण करते थे।
*🛕 देवरानी जेठानी मंदिर, बिलासपुर(छत्तीसगढ़)*

*🔶बिलासपुर-रायपुर हाईवे से 31 किलोमीटर दूर ताला गांव की रुद्र शिव प्रतिमा अपने शिल्प के चलते शोधकर्ताओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहाँ 6वी शताब्दी की रूद्र शिव की प्रतिमा भी पाई गईं है। यहाँ 5वी शताब्दी की मंदिर स्थित है जिन्हे देवरानी-जेठानी मंदिर कहते है।*

*🔶 इसी मंदिर प्रांगण के जेठानी मंदिर में स्थित है एक ऐसी प्रतिमा जिसे रुद्र शिव कहा जाता है। 9 फुट की ऊंचाई और 4 फुट की चौड़ाई के साथ यह अद्भुत प्रतिमा मंदिर में विराजमान है। इसका वजन करीब 5 टन है। दुनिया भर से लोग मंदिर से अधिक इस मूर्ति को देखने के लिए यहां आते हैं।*

*🔶 मंदिर पुरातनकाल के शिल्पकारी का अद्भुत उदाहरण है, पत्थरो में नक्काशी के द्वारा उकेरा गया चित्र तथा प्रतिमाये यहाँ की विशेषता हैं।*
कबरदेसवरर तपय। शिव और गणेश को समर्पित।

स्वामीमलाई के पास, कुंभकोणम टीएन। जिसे स्वेता विनयगर मंदिर, वलंचुझिनाथर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

एक उत्तम रथ पहिया सीमेंट से बर्बाद हो जाता है। मंदिर हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त विभाग के प्रशासन के अधीन है।

हमारी पीढ़ियों के लिए, इसकी मूल महिमा को वापस बहाल करने के लिए मानव संसाधन और CE के लिए एक अपील।