Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
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तमिलनाडु के ऐरावतेश्वर मंदिर परिसर में स्थित यह सीढियां 900 वर्ष पुरानी हैं।
कुछ इतिहासकार बताते हैं कि हमारे पूर्वजों के पास ऐसी तकनीक थी जिससे वो अलग-अलग पत्थरों को पिघलाकर उनके विलयन से नई प्रकृति के पत्थरों को बनाने में सक्षम थे।
इसी तकनीक से वो वांछित हल्कापन, मजबूती या फिर अलग-अलग स्वर उत्पन्न करने वाले पत्थरों का निर्माण करते थे।
कुछ इतिहासकार बताते हैं कि हमारे पूर्वजों के पास ऐसी तकनीक थी जिससे वो अलग-अलग पत्थरों को पिघलाकर उनके विलयन से नई प्रकृति के पत्थरों को बनाने में सक्षम थे।
इसी तकनीक से वो वांछित हल्कापन, मजबूती या फिर अलग-अलग स्वर उत्पन्न करने वाले पत्थरों का निर्माण करते थे।
*🛕 देवरानी जेठानी मंदिर, बिलासपुर(छत्तीसगढ़)*
*🔶बिलासपुर-रायपुर हाईवे से 31 किलोमीटर दूर ताला गांव की रुद्र शिव प्रतिमा अपने शिल्प के चलते शोधकर्ताओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहाँ 6वी शताब्दी की रूद्र शिव की प्रतिमा भी पाई गईं है। यहाँ 5वी शताब्दी की मंदिर स्थित है जिन्हे देवरानी-जेठानी मंदिर कहते है।*
*🔶 इसी मंदिर प्रांगण के जेठानी मंदिर में स्थित है एक ऐसी प्रतिमा जिसे रुद्र शिव कहा जाता है। 9 फुट की ऊंचाई और 4 फुट की चौड़ाई के साथ यह अद्भुत प्रतिमा मंदिर में विराजमान है। इसका वजन करीब 5 टन है। दुनिया भर से लोग मंदिर से अधिक इस मूर्ति को देखने के लिए यहां आते हैं।*
*🔶 मंदिर पुरातनकाल के शिल्पकारी का अद्भुत उदाहरण है, पत्थरो में नक्काशी के द्वारा उकेरा गया चित्र तथा प्रतिमाये यहाँ की विशेषता हैं।*
*🔶बिलासपुर-रायपुर हाईवे से 31 किलोमीटर दूर ताला गांव की रुद्र शिव प्रतिमा अपने शिल्प के चलते शोधकर्ताओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहाँ 6वी शताब्दी की रूद्र शिव की प्रतिमा भी पाई गईं है। यहाँ 5वी शताब्दी की मंदिर स्थित है जिन्हे देवरानी-जेठानी मंदिर कहते है।*
*🔶 इसी मंदिर प्रांगण के जेठानी मंदिर में स्थित है एक ऐसी प्रतिमा जिसे रुद्र शिव कहा जाता है। 9 फुट की ऊंचाई और 4 फुट की चौड़ाई के साथ यह अद्भुत प्रतिमा मंदिर में विराजमान है। इसका वजन करीब 5 टन है। दुनिया भर से लोग मंदिर से अधिक इस मूर्ति को देखने के लिए यहां आते हैं।*
*🔶 मंदिर पुरातनकाल के शिल्पकारी का अद्भुत उदाहरण है, पत्थरो में नक्काशी के द्वारा उकेरा गया चित्र तथा प्रतिमाये यहाँ की विशेषता हैं।*
कबरदेसवरर तपय। शिव और गणेश को समर्पित।
स्वामीमलाई के पास, कुंभकोणम टीएन। जिसे स्वेता विनयगर मंदिर, वलंचुझिनाथर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
एक उत्तम रथ पहिया सीमेंट से बर्बाद हो जाता है। मंदिर हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त विभाग के प्रशासन के अधीन है।
हमारी पीढ़ियों के लिए, इसकी मूल महिमा को वापस बहाल करने के लिए मानव संसाधन और CE के लिए एक अपील।
स्वामीमलाई के पास, कुंभकोणम टीएन। जिसे स्वेता विनयगर मंदिर, वलंचुझिनाथर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
एक उत्तम रथ पहिया सीमेंट से बर्बाद हो जाता है। मंदिर हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त विभाग के प्रशासन के अधीन है।
हमारी पीढ़ियों के लिए, इसकी मूल महिमा को वापस बहाल करने के लिए मानव संसाधन और CE के लिए एक अपील।
Forwarded from ℝajveeℝ Gℍoℝela
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रोचक बातें
Forwarded from Rochak fact india 🇮🇳
कालिका माता मंदिर राजस्थान
में 14 वीं शताब्दी का है। इसमें कहा गया है कि जिस दंपति को पद्मिनी पैलेस में रखा गया है, वह मूल रूप से भगवान का था जो यहां 8 वीं शताब्दी के दौरान बनाया गया था। यह अब नष्ट हो गया है, यह वास्तु रत्न है जो पृथ्वी काल से संबंधित है।
Join @rochakbate
में 14 वीं शताब्दी का है। इसमें कहा गया है कि जिस दंपति को पद्मिनी पैलेस में रखा गया है, वह मूल रूप से भगवान का था जो यहां 8 वीं शताब्दी के दौरान बनाया गया था। यह अब नष्ट हो गया है, यह वास्तु रत्न है जो पृथ्वी काल से संबंधित है।
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चित्र में आप #अरबीय मक्का के #इस्लाम से पूर्व के पूज्य देवीदेवताओं की मूर्तियाँ देख रहे हैं, आपको क्या आभास होता है?
अरब में इस्लाम से पूर्व के कुछ ऐसे साक्ष्य प्राप्य हैं जिससे पूर्णतया प्रमाण दिया जा सकता है कि इस्लाम से पूर्व वह राष्ट्र सनातन धार्मिक था। ऐसा ही एक प्रमाण है वहाँ का हूबल नामक देवता जिसके माथे पर चंद्रमा, हाथ पर त्रिशूल और सिर से एक जलधारा निकलती अनेक भित्तिचित्रों में प्राप्य है। ६२३ ईसवीं के युद्ध के बाद सब अस्तव्यस्त हो गए और ६३० ईसवीं में मुहम्मद के मक्का आने के बाद उसे परमात्मा को निराकार सिद्ध करना था, अतः उसने इस मत को समाप्त कर दिया। इसी प्रकार अल-लात, अल-उज़ा और मनात, ये तीन देवियाँ है जिसकी मूर्तियाँ ६३० ईसवीं के बाद कुछ ध्वस्तप्राय हो गईं हैं। इन देवियों की मूर्तियों में मध्यस्थ अल-लात सिंहासीना हैं। जैसे माता पार्वती हों। बगल की देवियों के चित्र में उनके पोशाकवर्ण से वे सरस्वती, लक्ष्मी सी प्रतीत होतीं हैं। वरदहस्त भी है। आपको ज्ञात ही होगा कि अब्राहम जैसे शब्द ब्रह्म से ही उत्पन्न हैं। ये सब वहाँ पूर्व के सनातनावर्त का प्रत्यक्ष प्रमाण है। ऐसे अनेक प्रमाण सुमेरिया, माया, मिश्र आदि में प्राप्य हैं जो पूर्व के सनातन धर्म की विश्वव्यापकता को सिद्ध करते हैं।
यदि 786 में ज़रा भी शर्म होगी
तो यह पोस्ट पढ़ने के बाद सनातन धर्म अपना लोगे
क्योंकि मूर्ति पूजा वेदों में है
और क़ुरान की तरह वेद man made नहीं बल्कि ईश्वर से प्रकट हुए है।
जय श्री राम
अरब में इस्लाम से पूर्व के कुछ ऐसे साक्ष्य प्राप्य हैं जिससे पूर्णतया प्रमाण दिया जा सकता है कि इस्लाम से पूर्व वह राष्ट्र सनातन धार्मिक था। ऐसा ही एक प्रमाण है वहाँ का हूबल नामक देवता जिसके माथे पर चंद्रमा, हाथ पर त्रिशूल और सिर से एक जलधारा निकलती अनेक भित्तिचित्रों में प्राप्य है। ६२३ ईसवीं के युद्ध के बाद सब अस्तव्यस्त हो गए और ६३० ईसवीं में मुहम्मद के मक्का आने के बाद उसे परमात्मा को निराकार सिद्ध करना था, अतः उसने इस मत को समाप्त कर दिया। इसी प्रकार अल-लात, अल-उज़ा और मनात, ये तीन देवियाँ है जिसकी मूर्तियाँ ६३० ईसवीं के बाद कुछ ध्वस्तप्राय हो गईं हैं। इन देवियों की मूर्तियों में मध्यस्थ अल-लात सिंहासीना हैं। जैसे माता पार्वती हों। बगल की देवियों के चित्र में उनके पोशाकवर्ण से वे सरस्वती, लक्ष्मी सी प्रतीत होतीं हैं। वरदहस्त भी है। आपको ज्ञात ही होगा कि अब्राहम जैसे शब्द ब्रह्म से ही उत्पन्न हैं। ये सब वहाँ पूर्व के सनातनावर्त का प्रत्यक्ष प्रमाण है। ऐसे अनेक प्रमाण सुमेरिया, माया, मिश्र आदि में प्राप्य हैं जो पूर्व के सनातन धर्म की विश्वव्यापकता को सिद्ध करते हैं।
यदि 786 में ज़रा भी शर्म होगी
तो यह पोस्ट पढ़ने के बाद सनातन धर्म अपना लोगे
क्योंकि मूर्ति पूजा वेदों में है
और क़ुरान की तरह वेद man made नहीं बल्कि ईश्वर से प्रकट हुए है।
जय श्री राम
*गरुड़ विष्णु केचना, बाली (इंडोनेशिया)*
*🔶भगवान विष्णु की सबसे ऊंची मूर्ति भारत में नहीं बल्कि इंडोनेशिया में उपस्थित है। हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को धरती का पालनहार माना जाता है। भारत में विभिन्न हिस्सों में भगवान विष्णु को अलग-अलग नामों से जाना जाता है और उनकी पूजा होती है। देश भर के मंदिरों में भगवान विष्णु की मूर्तियां भी उपस्थित हैं।*
*🔶 अब बात भगवान विष्णु की सबसे ऊंची प्रतिमा की, तो यह मूर्ति इंडोनेशिया के सबसे फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स में से एक बाली द्वीप पर उपस्थित है। बाली द्वीप के गरुड़ विष्णु केचना कल्चरल पार्क में मौजूद यह मूर्ति लगभग 400 फुट ऊंची और 217 फुट चौड़ी है। तांबे और पीतल से निर्मित इस मूर्ति को बनाने में लगभग 28 साल का समय लगा है और साल 2018 में बनकर तैयार हुई है। इंडोनेशिया के फेमस मूर्तिकार न्यूमन नुआर्ता ने इस मूर्ति को बनाया है।*
*🔶 90 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया पर रामायण की गहरी छाप है। इंडोनेशिया में लोग बेहतर इंसान बनने के लिए रामायण पढ़ते हैं। साथ ही रामायण यहां की स्कूली शिक्षा का अभिन्न हिस्सा है।*
*🔶भगवान विष्णु की सबसे ऊंची मूर्ति भारत में नहीं बल्कि इंडोनेशिया में उपस्थित है। हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को धरती का पालनहार माना जाता है। भारत में विभिन्न हिस्सों में भगवान विष्णु को अलग-अलग नामों से जाना जाता है और उनकी पूजा होती है। देश भर के मंदिरों में भगवान विष्णु की मूर्तियां भी उपस्थित हैं।*
*🔶 अब बात भगवान विष्णु की सबसे ऊंची प्रतिमा की, तो यह मूर्ति इंडोनेशिया के सबसे फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स में से एक बाली द्वीप पर उपस्थित है। बाली द्वीप के गरुड़ विष्णु केचना कल्चरल पार्क में मौजूद यह मूर्ति लगभग 400 फुट ऊंची और 217 फुट चौड़ी है। तांबे और पीतल से निर्मित इस मूर्ति को बनाने में लगभग 28 साल का समय लगा है और साल 2018 में बनकर तैयार हुई है। इंडोनेशिया के फेमस मूर्तिकार न्यूमन नुआर्ता ने इस मूर्ति को बनाया है।*
*🔶 90 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया पर रामायण की गहरी छाप है। इंडोनेशिया में लोग बेहतर इंसान बनने के लिए रामायण पढ़ते हैं। साथ ही रामायण यहां की स्कूली शिक्षा का अभिन्न हिस्सा है।*
1500 साल पुराना 'एकमुखी शिवलिंग' और "शिवालय भूमरामहादेव" मध्यप्रदेश से सतना शहर से लगभग 30-35 किलोमीटर दूर परस्मानिया की पहाड़ी में है। इसे देखकर 1500 वर्ष पुराने भारत की अद्वितीय कलात्मक, संस्कृतिक का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। आइयें जानें इसके बारें में:-
1) इसके प्रवेश द्वार पर गंगा-यमुना की आकृतियाँ बनी हुई हैं।
2) इसके द्वार की चौखट भी अलंगरणों से सजायी गयी हैं।
3) मंदिर की छत चपटी है।
4) गर्भगृह के भीतर एकमुखी शिव-लिंग स्थापित किया गया है।
5) एकमुखी शिव लिंग के ठीक सामने स्तंभयुक्त मंडप तथा चारों ओर प्रदक्षिणा-पथ मिलता है।
गर्व है मुझें अपनी भारतीय वास्तुकला पर।
1) इसके प्रवेश द्वार पर गंगा-यमुना की आकृतियाँ बनी हुई हैं।
2) इसके द्वार की चौखट भी अलंगरणों से सजायी गयी हैं।
3) मंदिर की छत चपटी है।
4) गर्भगृह के भीतर एकमुखी शिव-लिंग स्थापित किया गया है।
5) एकमुखी शिव लिंग के ठीक सामने स्तंभयुक्त मंडप तथा चारों ओर प्रदक्षिणा-पथ मिलता है।
गर्व है मुझें अपनी भारतीय वास्तुकला पर।
अगर आपको लगता है कि यह भारत में है तो आपको प्राचीन सनातन के प्रसार की जानकारी नहीं है ।
काबल स्पैन नदी में लगभग 1000 शिवलिंग और हिन्दू देवताओं की मूर्तियाँ भिखरी पड़ी है, हर साल जब नदी में पानी का स्तर कम होता है तब यह मूर्तियां दिखाई पड़ती हैं, वर्ष 1969 में एक फ्रांसीसी शोधकर्ता ने इन मूर्तियों को खोजा था । इनके निर्माण काल का सही आकलन अभी तक नहीं हो सका है ।
(काबल स्पैन, कंबोडिया)
काबल स्पैन नदी में लगभग 1000 शिवलिंग और हिन्दू देवताओं की मूर्तियाँ भिखरी पड़ी है, हर साल जब नदी में पानी का स्तर कम होता है तब यह मूर्तियां दिखाई पड़ती हैं, वर्ष 1969 में एक फ्रांसीसी शोधकर्ता ने इन मूर्तियों को खोजा था । इनके निर्माण काल का सही आकलन अभी तक नहीं हो सका है ।
(काबल स्पैन, कंबोडिया)
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🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
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🕰➡️2.24
*🙏🏻💐चमत्कारी पत्थर💐🙏🏻*
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