लिंगराज के समीप राजा राजा मंदिर
भुवनेश्वर,ओड़ीसा
भुवनेश्वर,ओड़ीसा
Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
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🕰➡️2.37
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*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
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Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
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क्या ये नक्काशियाँ रॉक मेल्टिंग टेक्नोलॉजी की तरफ इशारा नहीं करती ?
सोचिये ऐसे स्तंभों को निर्मित करने के लिए आज के शिल्पकारों को किन-किन मॉडर्न टूल्स की जरूरत पड़ेगी? यह मंदिर 1200 साल पुराना है यह पाँच ओर से पहाड़ियों से घिरा है, मंदिर की नक्काशियाँ को देखकर तो यहीं लगता है कि हमारी प्राचीन सभ्यता की टेक्नोलॉजी को समझने के लिए आज के तथाकथित मॉडर्न लोगों को अभी भी बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।
(भोग नंदीश्वरा मंदिर, कर्नाटक)
सोचिये ऐसे स्तंभों को निर्मित करने के लिए आज के शिल्पकारों को किन-किन मॉडर्न टूल्स की जरूरत पड़ेगी? यह मंदिर 1200 साल पुराना है यह पाँच ओर से पहाड़ियों से घिरा है, मंदिर की नक्काशियाँ को देखकर तो यहीं लगता है कि हमारी प्राचीन सभ्यता की टेक्नोलॉजी को समझने के लिए आज के तथाकथित मॉडर्न लोगों को अभी भी बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।
(भोग नंदीश्वरा मंदिर, कर्नाटक)
Forwarded from ऐतिहासिक मंदिर और उनकी कथा (Jaikey Manwani)
भारतीयों ने सुई भी नहीं बनाई – परन्तु चक्कों पर चलने वाले मंदिर, इमारतें बना दी।
और भारतीयों ने यह सब तब किया, जब पूरा विश्व सुई बनाने में व्यस्त था।
वल्लुवर कोट्टम, चेन्नई
और भारतीयों ने यह सब तब किया, जब पूरा विश्व सुई बनाने में व्यस्त था।
वल्लुवर कोट्टम, चेन्नई
Forwarded from ऐतिहासिक मंदिर और उनकी कथा (Jaikey Manwani)
Forwarded from Sadhak Swami
🚩 *अमेरिका के प्रोफेसर भी खुलकर हिन्दू धर्म को महान बता रहे हैं लेकिन भारत मे सेक्युलर के नाम पर हिन्दू धर्म को नीचा दिखाने की भारी कोशिश की जा रही है और मीडिया, सेक्युलर नेता आदि हिन्दू विरोधी बातें #करते हैं यहाँ तक कि सुप्रीम कोर्ट भी हिन्दू धर्म के खिलाफ कई बार जजमेंट दे चुका है, सरकार भी सेक्युलर एजेंडे में ही चल रही है हिन्दू धर्म पर भारी खतरा मंडार रहा है।*
🚩 *हिन्दू धर्म की महिमा अमेरिका के प्रोफेसर समझ रहे हैं तो भारत के हिन्दू कब समझेंगे ? गीता पढ़कर हिन्दू धर्म की महत्ता समझ गये तो भारत में हिन्दू गीता, उपनिषद आदि हिन्दू धर्मग्रंथों को क्यों नही पढ़ रहे हैं? हिंदुओं ने अपने धर्म की उपेक्षा करने लगे है और पाश्चात्य संस्कृति की ओर आकर्षित होने लगे हैं इसलिए आज हिंदुत्व पर प्रहार होने लगा है और विदेशी ताकतें हिन्दुओं का धर्मान्तरण करवा रहे हैं ।*
🚩 *अभी भी हिन्दू जगा नही और अपने धर्म की महिमा समझकर लौटा नही तो आगे जाकर बहुत भुगतना पड़ेगा। अतः हिन्दू धर्म की महिमा समझकर उस अनुसार आचरण करें और अन्य लोगों को भी प्रेरित करें ।*
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ओजस्वी भारत
राष्ट्र एवं भारतीय संस्कृति पर हो रहे आघातों पर भारतीयों की आवाज बुलंद करने का अचूक माध्यम !!
🩸बुद्धिजीवी कहते हैं अगर सनातन धर्म सबसे पुराना था तो यह सिर्फ भारत में ही क्यों था पूरे विश्व में क्यों नहीं था ।
🩸यह पुरातन कलश जिस पर स्वास्तिक का निशान है यह एशिया के एक छोटे से देश अरमिनिया में एक खुदाई में मिला है।
🩸 पूरे संसार के अलग-अलग देशों में सनातन संस्कृति की निशानियां मिलती रहती हैं।
🩸सनातन धर्म पूरे संसार में था बस हमसे ही संभाला नहीं गया ।
🩸यह पुरातन कलश जिस पर स्वास्तिक का निशान है यह एशिया के एक छोटे से देश अरमिनिया में एक खुदाई में मिला है।
🩸 पूरे संसार के अलग-अलग देशों में सनातन संस्कृति की निशानियां मिलती रहती हैं।
🩸सनातन धर्म पूरे संसार में था बस हमसे ही संभाला नहीं गया ।
Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
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🕰➡️2.13
*🙏🏻💐Great wall of INDIA💐🙏🏻*
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*अदियोगी प्रतिमा, कोयंबटूर(तमिलनाडु)*
*🔶तमिलनाडु के कोयंबटूर के बाहरी इलाके में ईशा योग फाउंडेशन में स्थित आदियोगी भगवान शिव की 112 फुट की आवक्ष प्रतिमा को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने दुनिया की सबसे बड़ी आवक्ष प्रतिमा के रूप में दर्ज किया है।*
*🔶 भगवान शिव की यह प्रतिमा 112.4 फीट उंची, 24.99 मीटर चौड़ी और 147 फुट लंबी है जिसको 11 मार्च, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा अनावरण किया गया था। यह प्रतिमा मुक्ति का प्रतीक है और उन 112 मार्गों को दर्शाता है, जिनसे इंसान योग विज्ञान के जरिए अपनी परम प्रकृति को प्राप्त कर सकता है।*
*🔶 शिव जी की सवारी नंदी को भी बड़े खास तरीके से तैयार किया गया है। धातु के 6 से 9 इंच बड़े टुकड़ों को जोड़कर नंदी का ऊपरी हिस्सा तैयार किया गया है। इसके अंदर तिल के बीज, हल्दी, पवित्र भस्म, विभूति, कुछ खास तरह के तेल, थोड़ी रेत, कुछ अलग तरह की मिट्टी भरी गई है। प्रतिमा के अंदर 20 टन सामग्री भरी गई है और फिर उसे सील कर दिया गया।*
*🔶भगवान शिव के चेहरे के डिजाइन को तैयार करने के लिए करीब ढाई साल लगे और ईशा फाउंडेशन की टीम ने इसे 8 महीने में पूरा किया। इस प्रतिमा को स्टील से बनाया गया है और धातु के टुकड़ों को जोड़कर इसे तैयार किया गया है। भगवान शिव प्रतिमा का वजन 500 टन है।*
*🔶तमिलनाडु के कोयंबटूर के बाहरी इलाके में ईशा योग फाउंडेशन में स्थित आदियोगी भगवान शिव की 112 फुट की आवक्ष प्रतिमा को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने दुनिया की सबसे बड़ी आवक्ष प्रतिमा के रूप में दर्ज किया है।*
*🔶 भगवान शिव की यह प्रतिमा 112.4 फीट उंची, 24.99 मीटर चौड़ी और 147 फुट लंबी है जिसको 11 मार्च, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा अनावरण किया गया था। यह प्रतिमा मुक्ति का प्रतीक है और उन 112 मार्गों को दर्शाता है, जिनसे इंसान योग विज्ञान के जरिए अपनी परम प्रकृति को प्राप्त कर सकता है।*
*🔶 शिव जी की सवारी नंदी को भी बड़े खास तरीके से तैयार किया गया है। धातु के 6 से 9 इंच बड़े टुकड़ों को जोड़कर नंदी का ऊपरी हिस्सा तैयार किया गया है। इसके अंदर तिल के बीज, हल्दी, पवित्र भस्म, विभूति, कुछ खास तरह के तेल, थोड़ी रेत, कुछ अलग तरह की मिट्टी भरी गई है। प्रतिमा के अंदर 20 टन सामग्री भरी गई है और फिर उसे सील कर दिया गया।*
*🔶भगवान शिव के चेहरे के डिजाइन को तैयार करने के लिए करीब ढाई साल लगे और ईशा फाउंडेशन की टीम ने इसे 8 महीने में पूरा किया। इस प्रतिमा को स्टील से बनाया गया है और धातु के टुकड़ों को जोड़कर इसे तैयार किया गया है। भगवान शिव प्रतिमा का वजन 500 टन है।*
*🛕त्र्यम्बकेश्वर मंदिर, नाशिक(महाराष्ट्र)*
*🔶 त्र्यम्बकेश्वर मंदिर महाराष्ट्र प्रान्त के नाशिक जनपद में नाशिक शहर से तीस किलोमीटर पश्चिम में अवस्थित है। इसे त्र्यम्बकेश्वर शिव मन्दिर भी कहते है। यहाँ समीप में ही ब्रह्मगिरि नामक पर्वत से गोदावरी नदी निकलती है। जिस प्रकार उत्तर भारत में प्रवाहित होने वाली पवित्र नदी गंगा का विशेष आध्यात्मिक महत्त्व है, उसी प्रकार दक्षिण में प्रवाहित होने वाली इस पवित्र नदी गोदावरी का विशेष महत्त्व है।*
*🔶त्र्यम्बकेश्वर प्राचीन मंदिर का पुनर्निर्माण तीसरे पेशवा बालाजी अर्थात नाना साहब पेशवा ने करवाया था। इस मंदिर का जीर्णोद्धार 1755 में शुरू हुआ था और 31 साल के लंबे समय के बाद 1786 में जाकर पूरा हुआ। कहा जाता है कि इस भव्य मंदिर के निर्माण में करीब 16 लाख रुपए खर्च किए गए थे, जो उस समय काफी बड़ी रकम मानी जाती थी।*
*🔶त्र्यम्बकेश्वर मंदिर तीन पहाड़ियों के बीच स्थित है, जिसमें ब्रह्मगिरी, निलागिरि और कालगिरी शामिल हैं। मंदिर की एक विशेषता यह है कि इस मंदिर शिव, विष्णु और ब्रह्मा का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन लिंगगम (शिव के एक प्रतिष्ठित रूप) हैं।*
*🔶 त्र्यम्बकेश्वर मंदिर महाराष्ट्र प्रान्त के नाशिक जनपद में नाशिक शहर से तीस किलोमीटर पश्चिम में अवस्थित है। इसे त्र्यम्बकेश्वर शिव मन्दिर भी कहते है। यहाँ समीप में ही ब्रह्मगिरि नामक पर्वत से गोदावरी नदी निकलती है। जिस प्रकार उत्तर भारत में प्रवाहित होने वाली पवित्र नदी गंगा का विशेष आध्यात्मिक महत्त्व है, उसी प्रकार दक्षिण में प्रवाहित होने वाली इस पवित्र नदी गोदावरी का विशेष महत्त्व है।*
*🔶त्र्यम्बकेश्वर प्राचीन मंदिर का पुनर्निर्माण तीसरे पेशवा बालाजी अर्थात नाना साहब पेशवा ने करवाया था। इस मंदिर का जीर्णोद्धार 1755 में शुरू हुआ था और 31 साल के लंबे समय के बाद 1786 में जाकर पूरा हुआ। कहा जाता है कि इस भव्य मंदिर के निर्माण में करीब 16 लाख रुपए खर्च किए गए थे, जो उस समय काफी बड़ी रकम मानी जाती थी।*
*🔶त्र्यम्बकेश्वर मंदिर तीन पहाड़ियों के बीच स्थित है, जिसमें ब्रह्मगिरी, निलागिरि और कालगिरी शामिल हैं। मंदिर की एक विशेषता यह है कि इस मंदिर शिव, विष्णु और ब्रह्मा का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन लिंगगम (शिव के एक प्रतिष्ठित रूप) हैं।*