ऐतिहासिक मंदिर और उनकी कथा
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हमारी संस्कृति हमारा अभिमान

*इस चैनल मे हमारे मंदिरों की कथा के आडियो विडियो और हमारी सभ्यता से जुड़ी जगह का प्रसारण किया जाता है*

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*अदियोगी प्रतिमा, कोयंबटूर(तमिलनाडु)*

*🔶तमिलनाडु के कोयंबटूर के बाहरी इलाके में ईशा योग फाउंडेशन में स्थित आदियोगी भगवान शिव की 112 फुट की आवक्ष प्रतिमा को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने दुनिया की सबसे बड़ी आवक्ष प्रतिमा के रूप में दर्ज किया है।*

*🔶 भगवान शिव की यह प्रतिमा 112.4 फीट उंची, 24.99 मीटर चौड़ी और 147 फुट लंबी है जिसको 11 मार्च, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा अनावरण किया गया था। यह प्रतिमा मुक्ति का प्रतीक है और उन 112 मार्गों को दर्शाता है, जिनसे इंसान योग विज्ञान के जरिए अपनी परम प्रकृति को प्राप्त कर सकता है।*

*🔶 शिव जी की सवारी नंदी को भी बड़े खास तरीके से तैयार किया गया है। धातु के 6 से 9 इंच बड़े टुकड़ों को जोड़कर नंदी का ऊपरी हिस्सा तैयार किया गया है। इसके अंदर तिल के बीज, हल्दी, पवित्र भस्म, विभूति, कुछ खास तरह के तेल, थोड़ी रेत, कुछ अलग तरह की मिट्टी भरी गई है। प्रतिमा के अंदर 20 टन सामग्री भरी गई है और फिर उसे सील कर दिया गया।*

*🔶भगवान शिव के चेहरे के डिजाइन को तैयार करने के लिए करीब ढाई साल लगे और ईशा फाउंडेशन की टीम ने इसे 8 महीने में पूरा किया। इस प्रतिमा को स्टील से बनाया गया है और धातु के टुकड़ों को जोड़कर इसे तैयार किया गया है। भगवान शिव प्रतिमा का वजन 500 टन है।*
*🛕त्र्यम्बकेश्वर मंदिर, नाशिक(महाराष्ट्र)*

*🔶 त्र्यम्बकेश्वर मंदिर महाराष्ट्र प्रान्त के नाशिक जनपद में नाशिक शहर से तीस किलोमीटर पश्चिम में अवस्थित है। इसे त्र्यम्बकेश्वर शिव मन्दिर भी कहते है। यहाँ समीप में ही ब्रह्मगिरि नामक पर्वत से गोदावरी नदी निकलती है। जिस प्रकार उत्तर भारत में प्रवाहित होने वाली पवित्र नदी गंगा का विशेष आध्यात्मिक महत्त्व है, उसी प्रकार दक्षिण में प्रवाहित होने वाली इस पवित्र नदी गोदावरी का विशेष महत्त्व है।*

*🔶त्र्यम्बकेश्वर प्राचीन मंदिर का पुनर्निर्माण तीसरे पेशवा बालाजी अर्थात नाना साहब पेशवा ने करवाया था। इस मंदिर का जीर्णोद्धार 1755 में शुरू हुआ था और 31 साल के लंबे समय के बाद 1786 में जाकर पूरा हुआ। कहा जाता है कि इस भव्य मंदिर के निर्माण में करीब 16 लाख रुपए खर्च किए गए थे, जो उस समय काफी बड़ी रकम मानी जाती थी।*

*🔶त्र्यम्बकेश्वर मंदिर तीन पहाड़ियों के बीच स्थित है, जिसमें ब्रह्मगिरी, निलागिरि और कालगिरी शामिल हैं। मंदिर की एक विशेषता यह है कि इस मंदिर शिव, विष्णु और ब्रह्मा का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन लिंगगम (शिव के एक प्रतिष्ठित रूप) हैं।*
अमिर्थकदेसरवर मंदिर -

900 साल पहले Kulothunga Chozha..almost के शासनकाल के दौरान निर्मित।
काशीराज काली मंदिर, इसके प्रत्येक स्तंभ को बनाने में 6 महीने लगे थे। इसका निर्माण काशी नरेश श्री नरनारायण जी की पत्नी ने करवाया था।

इस मंदिर के पिछले हिस्से में एक दरवाजा है, जिसकी नक्काशियों को देखकर देखने वाले लकड़ी का दरवाजा मान बैठेंगे लेकिन वह वास्तव में पत्थर का बना है।
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹

*वीडियो👆🏻👆🏻👇🏻👇🏻*
🕰➡️4.17

*🙏🏻💐सनातन धर्म के अनुसार अशोक वाटिका का बहुत ही महत्व है आज यहां दुर्लभ वीडियो शेयर कर रहे हैं जिसमें श्री हनुमान जी महाराज अशोक वाटिका में माता सीता से मिलने आए थे जहां उन्होंने मां जानकी के लिए जल का प्रबंध किया था कृपा करके पूरा वीडियो देखें और अन्य सनातन प्रेमियों को भी दिखाएं💐🙏🏻*

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*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
इंग्लैण्ड की एक नदी की गहराई से मछुआरों को
60 घनाकार नवग्रह यन्त्र मिले जिन पर भारतीय भाषा में गणित के अंक उत्कीर्ण हैं ,ये नवग्रह यन्त्र सीसे के बने हुए हैं और 6000 वर्ष पूर्व के हैं
अब वैज्ञानिक आश्चर्यचकित हैं कि ये भारतीय यन्त्र 6000 वर्ष पूर्व इंग्लैण्ड कैसे पहुँचे ?
सनातनी हिंदू तो हमेशा से कह रहे हैं हम अनंत काल से हैं। दुनिया भर के इतिहास वेत्ता तथा पुराविद् चाहे जितनी ताकत लगा लो लेकिन सनातन धर्म की प्राचीनता को कब तक दुनिया से छुपा सकोगे लो अब तुम्हारे देश में 6 हजार वर्ष पुराना प्रमाण निकल आया संभाल के रखना काम आएगा ।

Credit - Pawan deo, The Lost Temple of the world
#ओम्_शिवा-- #अद्भुत,#अकल्पनीय।

।।आरम्भ भी अंत भी,शांत भी प्रचंड भी ।।

#दक्षिणी_भारत में दो पहाड़ो के बीच स्थित शिवलिंग,देखो सनातनियों हमारे पूर्वजों ने कितनी मेहनत व कितनी अद्भुत महान वास्तुकला का हमे परिचय करवाया और विरासत में हमारे लिए इतने अद्भुत अजूबे हमारे लिए छोड़कर गए है।

हमारा दुर्भाग्य ये रहा कि हमारे इतिहास के खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र रचे गए और इतिहास लेखन का कार्य #वामपंथियों को दिया गया और इन सब चीजों को उन्होंने सिर्फ दफन करने का कार्य किया है,

आज इनको हमे हर व्यक्ति तक पहुचाने की आवश्यकता है, और इनको संरक्षण दिलवाना हमारा कर्तव्य है।

जागो हिन्दू जागो हिन्दू जगेगा देश जगेगा देश बचेगा।
इस भूमि की पवित्रता परियों की कहानी से भी अधिक प्राचीन है ..😍

यही वो पवित्र भूमि है जहाँ हनुमान जी का जन्म हुआ था,
और संयोग देखिये कि इस पर्वत के सामने का हिस्सा एक बंदर की शक्ल की तरह दिखता है ।

अंजनेयाद्री पहाड़ी, हम्पी, कर्नाटक

#जय_श्रीराम 🚩🙏