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Video from jaikey
इंग्लैण्ड की एक नदी की गहराई से मछुआरों को
60 घनाकार नवग्रह यन्त्र मिले जिन पर भारतीय भाषा में गणित के अंक उत्कीर्ण हैं ,ये नवग्रह यन्त्र सीसे के बने हुए हैं और 6000 वर्ष पूर्व के हैं
अब वैज्ञानिक आश्चर्यचकित हैं कि ये भारतीय यन्त्र 6000 वर्ष पूर्व इंग्लैण्ड कैसे पहुँचे ?
सनातनी हिंदू तो हमेशा से कह रहे हैं हम अनंत काल से हैं। दुनिया भर के इतिहास वेत्ता तथा पुराविद् चाहे जितनी ताकत लगा लो लेकिन सनातन धर्म की प्राचीनता को कब तक दुनिया से छुपा सकोगे लो अब तुम्हारे देश में 6 हजार वर्ष पुराना प्रमाण निकल आया संभाल के रखना काम आएगा ।
Credit - Pawan deo, The Lost Temple of the world
60 घनाकार नवग्रह यन्त्र मिले जिन पर भारतीय भाषा में गणित के अंक उत्कीर्ण हैं ,ये नवग्रह यन्त्र सीसे के बने हुए हैं और 6000 वर्ष पूर्व के हैं
अब वैज्ञानिक आश्चर्यचकित हैं कि ये भारतीय यन्त्र 6000 वर्ष पूर्व इंग्लैण्ड कैसे पहुँचे ?
सनातनी हिंदू तो हमेशा से कह रहे हैं हम अनंत काल से हैं। दुनिया भर के इतिहास वेत्ता तथा पुराविद् चाहे जितनी ताकत लगा लो लेकिन सनातन धर्म की प्राचीनता को कब तक दुनिया से छुपा सकोगे लो अब तुम्हारे देश में 6 हजार वर्ष पुराना प्रमाण निकल आया संभाल के रखना काम आएगा ।
Credit - Pawan deo, The Lost Temple of the world
#ओम्_शिवा-- #अद्भुत,#अकल्पनीय।
।।आरम्भ भी अंत भी,शांत भी प्रचंड भी ।।
#दक्षिणी_भारत में दो पहाड़ो के बीच स्थित शिवलिंग,देखो सनातनियों हमारे पूर्वजों ने कितनी मेहनत व कितनी अद्भुत महान वास्तुकला का हमे परिचय करवाया और विरासत में हमारे लिए इतने अद्भुत अजूबे हमारे लिए छोड़कर गए है।
हमारा दुर्भाग्य ये रहा कि हमारे इतिहास के खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र रचे गए और इतिहास लेखन का कार्य #वामपंथियों को दिया गया और इन सब चीजों को उन्होंने सिर्फ दफन करने का कार्य किया है,
आज इनको हमे हर व्यक्ति तक पहुचाने की आवश्यकता है, और इनको संरक्षण दिलवाना हमारा कर्तव्य है।
जागो हिन्दू जागो हिन्दू जगेगा देश जगेगा देश बचेगा।
।।आरम्भ भी अंत भी,शांत भी प्रचंड भी ।।
#दक्षिणी_भारत में दो पहाड़ो के बीच स्थित शिवलिंग,देखो सनातनियों हमारे पूर्वजों ने कितनी मेहनत व कितनी अद्भुत महान वास्तुकला का हमे परिचय करवाया और विरासत में हमारे लिए इतने अद्भुत अजूबे हमारे लिए छोड़कर गए है।
हमारा दुर्भाग्य ये रहा कि हमारे इतिहास के खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र रचे गए और इतिहास लेखन का कार्य #वामपंथियों को दिया गया और इन सब चीजों को उन्होंने सिर्फ दफन करने का कार्य किया है,
आज इनको हमे हर व्यक्ति तक पहुचाने की आवश्यकता है, और इनको संरक्षण दिलवाना हमारा कर्तव्य है।
जागो हिन्दू जागो हिन्दू जगेगा देश जगेगा देश बचेगा।
इस भूमि की पवित्रता परियों की कहानी से भी अधिक प्राचीन है ..😍
यही वो पवित्र भूमि है जहाँ हनुमान जी का जन्म हुआ था,
और संयोग देखिये कि इस पर्वत के सामने का हिस्सा एक बंदर की शक्ल की तरह दिखता है ।
अंजनेयाद्री पहाड़ी, हम्पी, कर्नाटक
#जय_श्रीराम 🚩🙏
यही वो पवित्र भूमि है जहाँ हनुमान जी का जन्म हुआ था,
और संयोग देखिये कि इस पर्वत के सामने का हिस्सा एक बंदर की शक्ल की तरह दिखता है ।
अंजनेयाद्री पहाड़ी, हम्पी, कर्नाटक
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Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
*वीडियो👆🏻👆🏻👇🏻👇🏻*
🕰➡️2.55
*🙏🏻💐51 शक्ति पीठ💐🙏🏻*
🚩 *सनातन धर्म को पहचानो* 🚩
*👇🏻टेलीग्राम चैनल से जुड़े👇🏻*
https://t.me/joinchat/AAAAAFKtXqZ-TRwRqPB-Uw
*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
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*वीडियो👆🏻👆🏻👇🏻👇🏻*
🕰➡️3.06
*🙏🏻💐यह रूस के चर्च में क्या हो रहा है...🤔🤔🤔 आप खुद ही देखलो....फिर में बोलता हू तो लोग बोलेंगे की बहुत बोलता हे.....😎😎😎😎😎😎😎💐🙏🏻*
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*🛕 स्वामीनारायण मंदिर, लंदन*
*🔶 जिनके पूर्वज 800 सालों में हमारे मंदिर नहीं तोड़ पाये वो हमारा हौसला कैसे तोड़ पाएंगे।*
*🔶 लंदन का स्वामीनारायण मंदिर भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। यह ब्रिटेन का पहला प्रामाणिक हिंदू मंदिर माना जाता है। यह एक बहुत ही सुंदर मंदिर है। मंदिर परिसर के साथ-साथ यहां स्थित भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति का श्रृंगार भी बहुत ही सुदंर तरीके से किया जाता है।*
*🔶 इस मंदिर के निर्माण के लिए 2,828 टन बल्गेरियाई चूना पत्थर और 2,000 टन इतालवी संगमरमर भारत भेजा गया था जिसे 1526 भारतीय शिल्पकारों ने अपने कौशल से सुंदर नक्काशियों में बदल दिया। आज यह भारत से बाहर सबसे बड़े मंदिरों में से एक है ।*
*🔶 इस मंदिर की निर्माण वास्तुकला का एक अच्छा उदाहरण है। स्वामीनारायण मंदिर वहां रहने वाले हिंदुओं के लिए आस्था का केन्द्र है। यहां पर लगभग सभी हिंदू त्यौहार बहुत ही धूम-धाम से मनाए जाते हैं। त्यौहार के अनुसार मंदिर की सजावट की जाती है और भगवान के वस्त्र और श्रृंगार भी वैसे ही पहनाए जाते हैं।*
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*🔶 जिनके पूर्वज 800 सालों में हमारे मंदिर नहीं तोड़ पाये वो हमारा हौसला कैसे तोड़ पाएंगे।*
*🔶 लंदन का स्वामीनारायण मंदिर भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। यह ब्रिटेन का पहला प्रामाणिक हिंदू मंदिर माना जाता है। यह एक बहुत ही सुंदर मंदिर है। मंदिर परिसर के साथ-साथ यहां स्थित भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति का श्रृंगार भी बहुत ही सुदंर तरीके से किया जाता है।*
*🔶 इस मंदिर के निर्माण के लिए 2,828 टन बल्गेरियाई चूना पत्थर और 2,000 टन इतालवी संगमरमर भारत भेजा गया था जिसे 1526 भारतीय शिल्पकारों ने अपने कौशल से सुंदर नक्काशियों में बदल दिया। आज यह भारत से बाहर सबसे बड़े मंदिरों में से एक है ।*
*🔶 इस मंदिर की निर्माण वास्तुकला का एक अच्छा उदाहरण है। स्वामीनारायण मंदिर वहां रहने वाले हिंदुओं के लिए आस्था का केन्द्र है। यहां पर लगभग सभी हिंदू त्यौहार बहुत ही धूम-धाम से मनाए जाते हैं। त्यौहार के अनुसार मंदिर की सजावट की जाती है और भगवान के वस्त्र और श्रृंगार भी वैसे ही पहनाए जाते हैं।*
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*🛕सुरकंडा देवी मंदिर,टिहरी(उत्तराखंड)*
*🔶 सुरकंडा देवी एक हिन्दूओं का प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर देवी दुर्गो को समर्पित है जो कि नौ देवी के रूपों में से एक है। सुरकंडा देवी मंदिर 51 शक्ति पीठ में से है। सुरकंडा देवी मंदिर में देवी काली की प्रतिमा स्थापित है। यह मंदिर यूलिसाल गांव, धानाल्टी, टिहरी जिला, उत्तराखंड में स्थित है।*
*🔶 यह मंदिर लगभग 2,757 मीटर की ऊंचाई पर है। सुरकंडा देवी मंदिर घने जंगलों से घिरा हुआ है और इस स्थान से उत्तर दिशा में हिमालय का सुन्दर दृश्य दिखाई देता है। दक्षिण दिशा में देहरादून और ऋ़षिकेश शहरों का सुन्दर नजारा देखा जा सकता है। यह मंदिर साल में ज्यादा दर समय कोहरे से डका रहता है।*
*🔶 पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शंकर देवी सती के मृत शरीर को लेकर पूरे ब्रह्मांड के चक्कर लगा रहे थे, उसी दौरान भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया था, जिसमें सती का सिर इस स्थान पर गिरा था, इसलिए इसे मंदिर को श्री सुरकंडा देवी मंदिर भी कहा जाता है।*
*🔶 सुरकंडा देवी एक हिन्दूओं का प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर देवी दुर्गो को समर्पित है जो कि नौ देवी के रूपों में से एक है। सुरकंडा देवी मंदिर 51 शक्ति पीठ में से है। सुरकंडा देवी मंदिर में देवी काली की प्रतिमा स्थापित है। यह मंदिर यूलिसाल गांव, धानाल्टी, टिहरी जिला, उत्तराखंड में स्थित है।*
*🔶 यह मंदिर लगभग 2,757 मीटर की ऊंचाई पर है। सुरकंडा देवी मंदिर घने जंगलों से घिरा हुआ है और इस स्थान से उत्तर दिशा में हिमालय का सुन्दर दृश्य दिखाई देता है। दक्षिण दिशा में देहरादून और ऋ़षिकेश शहरों का सुन्दर नजारा देखा जा सकता है। यह मंदिर साल में ज्यादा दर समय कोहरे से डका रहता है।*
*🔶 पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शंकर देवी सती के मृत शरीर को लेकर पूरे ब्रह्मांड के चक्कर लगा रहे थे, उसी दौरान भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया था, जिसमें सती का सिर इस स्थान पर गिरा था, इसलिए इसे मंदिर को श्री सुरकंडा देवी मंदिर भी कहा जाता है।*
यह भट्टी श्री राधारमण मंदिर की है जो पिछले 478 सालों से लगातार जल रही है।
कई वर्षों से जल रही इस भट्टी का उपयोग ठाकुर जी की रसोई तैयार करने के लिए किया जाता है। श्री राधारमण मंदिर में दीपक जलाने से लेकर प्रसाद तैयार करने में भी इस भट्टी का इस्तेमाल किया जाता है। मंदिर की प्रथम आरती के लिए अग्नि वैदिक मंत्रों के माध्यम से आज से 478 वर्ष पहले प्रकट की गई थी। इसके लिए अरण्य मंथन का सहारा लिया गया था।
उसके बाद ही ठाकुर ने गोपाल भट्ट गोस्वामी के मन में यह भाव पैदा किया कि इसी अग्नि से भविष्य में ठाकुर की आरती की जाय। यहीं कारण है कि इस मंदिर में करीब पौने पांच सौ वर्ष से माचिस का प्रयोग नहीं किया गया। आज भी ठाकुर की आरती पौने पांच सौ वर्ष पूर्व प्रकट अग्नि से की जाती है।..
कई वर्षों से जल रही इस भट्टी का उपयोग ठाकुर जी की रसोई तैयार करने के लिए किया जाता है। श्री राधारमण मंदिर में दीपक जलाने से लेकर प्रसाद तैयार करने में भी इस भट्टी का इस्तेमाल किया जाता है। मंदिर की प्रथम आरती के लिए अग्नि वैदिक मंत्रों के माध्यम से आज से 478 वर्ष पहले प्रकट की गई थी। इसके लिए अरण्य मंथन का सहारा लिया गया था।
उसके बाद ही ठाकुर ने गोपाल भट्ट गोस्वामी के मन में यह भाव पैदा किया कि इसी अग्नि से भविष्य में ठाकुर की आरती की जाय। यहीं कारण है कि इस मंदिर में करीब पौने पांच सौ वर्ष से माचिस का प्रयोग नहीं किया गया। आज भी ठाकुर की आरती पौने पांच सौ वर्ष पूर्व प्रकट अग्नि से की जाती है।..
*चित्रदुर्ग किला, चित्रदुर्ग(कर्नाटक)*
*🔶 चित्रदुर्ग किला, कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले में पहाड़ी की चोटी पर एक विशालकाय पत्थरों से बना किला है। इस किले को "चित्त्तलदूर्ग" भी कहा जाता हैं। चित्रदुर्ग किला की संरचना बचाव की मुद्रा में है। किले का निर्माण 10वीं से 18वीं शताब्दी के मध्य में हुआ था, इस किले में निर्माण में मुख्य योगदान चालुक्य, होयसला और विजयनगर साम्राज्य का था।*
*🔶 किले के ऊपरी हिस्से में 18 मंदिर हैं, और निचले किले मे एक विशाल मंदिर भी हैं जो देवी को समर्पित है। इनमें से, हिडिम्बेश्वरा मंदिर सबसे पुराना और सबसे आकर्षित है चित्रदुर्ग किला महाभारत महाकाव्य के हिडिम्बा रक्षा की जगह भी माना जाता है। यहां के प्रमुख मंदिर हैं जिनमें से गोपाला कृष्णा, नंदी, सुबराया, एकाननाथम्मा, भगवान हनुमान, फल्नेश्वर, और सिद्देश्वर हैं।*
*🔶 किले में कई आक्रमण भी हुए, मदकर नायक के समय, हैदर अली ने किले में अपनी सेना को घेर लिया और नायक कबीले के अंतिम प्रतिनिधि पर जीत हासिल करने के बाद विजय प्राप्त की। हैदर अली ने वास्तव में इस किले पर तीन बार हमला किया और तीसरी बार 1779 में उसने सफलतापूर्वक विजय प्राप्त की। ऐसा कहा जाता है कि नायक ने लगभग 200 वर्षों तक इस किले पर शासन किया था।*
*🔶 चित्रदुर्ग किला, कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले में पहाड़ी की चोटी पर एक विशालकाय पत्थरों से बना किला है। इस किले को "चित्त्तलदूर्ग" भी कहा जाता हैं। चित्रदुर्ग किला की संरचना बचाव की मुद्रा में है। किले का निर्माण 10वीं से 18वीं शताब्दी के मध्य में हुआ था, इस किले में निर्माण में मुख्य योगदान चालुक्य, होयसला और विजयनगर साम्राज्य का था।*
*🔶 किले के ऊपरी हिस्से में 18 मंदिर हैं, और निचले किले मे एक विशाल मंदिर भी हैं जो देवी को समर्पित है। इनमें से, हिडिम्बेश्वरा मंदिर सबसे पुराना और सबसे आकर्षित है चित्रदुर्ग किला महाभारत महाकाव्य के हिडिम्बा रक्षा की जगह भी माना जाता है। यहां के प्रमुख मंदिर हैं जिनमें से गोपाला कृष्णा, नंदी, सुबराया, एकाननाथम्मा, भगवान हनुमान, फल्नेश्वर, और सिद्देश्वर हैं।*
*🔶 किले में कई आक्रमण भी हुए, मदकर नायक के समय, हैदर अली ने किले में अपनी सेना को घेर लिया और नायक कबीले के अंतिम प्रतिनिधि पर जीत हासिल करने के बाद विजय प्राप्त की। हैदर अली ने वास्तव में इस किले पर तीन बार हमला किया और तीसरी बार 1779 में उसने सफलतापूर्वक विजय प्राप्त की। ऐसा कहा जाता है कि नायक ने लगभग 200 वर्षों तक इस किले पर शासन किया था।*