🌺बाबा केदारनाथ और भीमशिला आज दोनो एक दूसरे के तारणहार हो चुके हैं। भीमशिला ने जहां 2013 के त्रासदी में बाबा केदारनाथ धाम ज्योतिर्लिंग मन्दिर की महाप्रलय से रक्षा की, तो वहीं इस सेवाभाव के बदले बाबा ने भीमशिला को पूजनीय बनाकर अमर कर दिया।
आज भारतीय पुरातत्व विभाग आश्चर्यचकित है कि बाबा केदारनाथ मंदिर के चौड़ाई के ही बराबर का ये भीमशिला आखिर प्रकट कहाँ से हुआ????
आज पूरी दुनिया का हिन्दू समाज व अन्य धर्मों के लोग भी इस चमत्कार को नमस्कार कर रहे हैं।।।।
तो आइये आप सब भी र्दशन कीजिये मन्दिर के पीछे स्थित भीमशिला का जो 2013 में आई आपदा के समय हिंदुओं के महादेव का रखवाला बन केदारनाथ मंदिर के पीछे अपना गदा गाड़कर पूरे प्रलय का अभिमान चकनाचूर कर मन्दिर को लेशमात्र भी क्षति नही होने दिया।
बाद में पूरी बाढ़ के पानी तथा उसके साथ आने वाले बड़े-बड़े पत्थरों को इसी शिला ने रोक कर केदारनाथ मंदिर की रक्षा की थी। भीमशिला की चौड़ाई मन्दिर की चौड़ाई के बिलकुल बराबर है।
भोले बाबा की महिमा वही जानें।
हम बाबा केदारनाथ की जय जयकार कर उनका गुणगान करें।
जंय केदारनाथ🙏
आज भारतीय पुरातत्व विभाग आश्चर्यचकित है कि बाबा केदारनाथ मंदिर के चौड़ाई के ही बराबर का ये भीमशिला आखिर प्रकट कहाँ से हुआ????
आज पूरी दुनिया का हिन्दू समाज व अन्य धर्मों के लोग भी इस चमत्कार को नमस्कार कर रहे हैं।।।।
तो आइये आप सब भी र्दशन कीजिये मन्दिर के पीछे स्थित भीमशिला का जो 2013 में आई आपदा के समय हिंदुओं के महादेव का रखवाला बन केदारनाथ मंदिर के पीछे अपना गदा गाड़कर पूरे प्रलय का अभिमान चकनाचूर कर मन्दिर को लेशमात्र भी क्षति नही होने दिया।
बाद में पूरी बाढ़ के पानी तथा उसके साथ आने वाले बड़े-बड़े पत्थरों को इसी शिला ने रोक कर केदारनाथ मंदिर की रक्षा की थी। भीमशिला की चौड़ाई मन्दिर की चौड़ाई के बिलकुल बराबर है।
भोले बाबा की महिमा वही जानें।
हम बाबा केदारनाथ की जय जयकार कर उनका गुणगान करें।
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श्री सोमनाथ का पुराना चंदन दरवाजा गांधी जिद से कभी सोमनाथ नही पहुच पाया
बाद मे गांधी वध हो गया और पटेल भी स्वर्ग बासी हो गए
1000 साल पुरानी विरासत आगरा लालकिले मे दर्शनार्थियों के लिए पुरातत्व ने खोल दिया है
जाईए दर्शन कीजिए
जाट बटालियन कौ नमन🚩🙏🙏
बाद मे गांधी वध हो गया और पटेल भी स्वर्ग बासी हो गए
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🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
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प्राचीन भारत में रॉकेट युद्ध की गवाही देती हालेबिदू मंदिर में निर्मित एक नक्काशी..
मिसाइल और ज्वलनशील तीरों को धारण करने वाली लॉन्चिंग पैड को ध्यान से देखिये यह प्राचीन भारतीयों के विकसित तकनीकों का सबसे बड़ा सबूत है ।
और फिर भी कुछ लोग कहते हैं..भारत में गोला-बारूद और तोप मुगल लेकर आये थे....
(हालेबिदू मंदिर, कर्नाटक,12वीं शताब्दी)
मिसाइल और ज्वलनशील तीरों को धारण करने वाली लॉन्चिंग पैड को ध्यान से देखिये यह प्राचीन भारतीयों के विकसित तकनीकों का सबसे बड़ा सबूत है ।
और फिर भी कुछ लोग कहते हैं..भारत में गोला-बारूद और तोप मुगल लेकर आये थे....
(हालेबिदू मंदिर, कर्नाटक,12वीं शताब्दी)
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कौन थे राजा वीर विक्रमादित्य..... ????
बड़े ही शर्म की बात है कि महाराज विक्रमादित्य के बारे में देश को लगभग शून्य बराबर ज्ञान है, जिन्होंने भारत को सोने की चिड़िया बनाया था, और स्वर्णिम काल लाया था
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उज्जैन के राजा थे गन्धर्वसैन , जिनके तीन संताने थी , सबसे बड़ी लड़की थी मैनावती , उससे छोटा लड़का भृतहरि और सबसे छोटा वीर विक्रमादित्य...
बहन मैनावती की शादी धारानगरी के राजा पदमसैन के साथ कर दी , जिनके एक लड़का हुआ गोपीचन्द , आगे चलकर गोपीचन्द ने श्री ज्वालेन्दर नाथ जी से योग दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए , फिर मैनावती ने भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग दीक्षा ले ली ,
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आज ये देश और यहाँ की संस्कृति केवल विक्रमदित्य के कारण अस्तित्व में है
अशोक मौर्य ने बोद्ध धर्म अपना लिया था और बोद्ध बनकर 25 साल राज किया था
भारत में तब सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था, देश में बौद्ध और जैन हो गए थे
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रामायण, और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे, महाराज विक्रम ने ही पुनः उनकी खोज करवा कर स्थापित किया
विष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाये और सनातन धर्म को बचाया
विक्रमदित्य के 9 रत्नों में से एक कालिदास ने अभिज्ञान शाकुन्तलम् लिखा, जिसमे भारत का इतिहास है
अन्यथा भारत का इतिहास क्या मित्रो हम भगवान् कृष्ण और राम को ही खो चुके थे
हमारे ग्रन्थ ही भारत में खोने के कगार पर आ गए थे,
उस समय उज्जैन के राजा भृतहरि ने राज छोड़कर श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग की दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए , राज अपने छोटे भाई विक्रमदित्य को दे दिया , वीर विक्रमादित्य भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से गुरू दीक्षा लेकर राजपाट सम्भालने लगे और आज उन्ही के कारण सनातन धर्म बचा हुआ है, हमारी संस्कृति बची हुई है
--------------
महाराज विक्रमदित्य ने केवल धर्म ही नही बचाया
उन्होंने देश को आर्थिक तौर पर सोने की चिड़िया बनाई, उनके राज को ही भारत का स्वर्णिम राज कहा जाता है
विक्रमदित्य के काल में भारत का कपडा, विदेशी व्यपारी सोने के वजन से खरीदते थे
भारत में इतना सोना आ गया था की, विक्रमदित्य काल में सोने की सिक्के चलते थे , आप गूगल इमेज कर विक्रमदित्य के सोने के सिक्के देख सकते हैं।
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हिन्दू कैलंडर भी विक्रमदित्य का स्थापित किया हुआ है
आज जो भी ज्योतिष गणना है जैसे , हिन्दी सम्वंत , वार , तिथीयाँ , राशि , नक्षत्र , गोचर आदि उन्ही की रचना है , वे बहुत ही पराक्रमी , बलशाली और बुद्धिमान राजा थे ।
कई बार तो देवता भी उनसे न्याय करवाने आते थे ,
विक्रमदित्य के काल में हर नियम धर्मशास्त्र के हिसाब से बने होते थे, न्याय , राज सब धर्मशास्त्र के नियमो पर चलता था
विक्रमदित्य का काल राम राज के बाद सर्वश्रेष्ठ माना गया है, जहाँ प्रजा धनि और धर्म पर चलने वाली थी
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पर बड़े दुःख की बात है की भारत के सबसे महानतम राजा के बारे में कांग्रेसी और वामपंथीयों का इतिहास भारत की जनता को शून्य ज्ञान देता है, कृपया आप शेयर तो करें ताकि देश जान सके कि सोने की चिड़िया वाला देश का राजा कौन था ।
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बड़े ही शर्म की बात है कि महाराज विक्रमादित्य के बारे में देश को लगभग शून्य बराबर ज्ञान है, जिन्होंने भारत को सोने की चिड़िया बनाया था, और स्वर्णिम काल लाया था
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उज्जैन के राजा थे गन्धर्वसैन , जिनके तीन संताने थी , सबसे बड़ी लड़की थी मैनावती , उससे छोटा लड़का भृतहरि और सबसे छोटा वीर विक्रमादित्य...
बहन मैनावती की शादी धारानगरी के राजा पदमसैन के साथ कर दी , जिनके एक लड़का हुआ गोपीचन्द , आगे चलकर गोपीचन्द ने श्री ज्वालेन्दर नाथ जी से योग दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए , फिर मैनावती ने भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग दीक्षा ले ली ,
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आज ये देश और यहाँ की संस्कृति केवल विक्रमदित्य के कारण अस्तित्व में है
अशोक मौर्य ने बोद्ध धर्म अपना लिया था और बोद्ध बनकर 25 साल राज किया था
भारत में तब सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था, देश में बौद्ध और जैन हो गए थे
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रामायण, और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे, महाराज विक्रम ने ही पुनः उनकी खोज करवा कर स्थापित किया
विष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाये और सनातन धर्म को बचाया
विक्रमदित्य के 9 रत्नों में से एक कालिदास ने अभिज्ञान शाकुन्तलम् लिखा, जिसमे भारत का इतिहास है
अन्यथा भारत का इतिहास क्या मित्रो हम भगवान् कृष्ण और राम को ही खो चुके थे
हमारे ग्रन्थ ही भारत में खोने के कगार पर आ गए थे,
उस समय उज्जैन के राजा भृतहरि ने राज छोड़कर श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग की दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए , राज अपने छोटे भाई विक्रमदित्य को दे दिया , वीर विक्रमादित्य भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से गुरू दीक्षा लेकर राजपाट सम्भालने लगे और आज उन्ही के कारण सनातन धर्म बचा हुआ है, हमारी संस्कृति बची हुई है
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महाराज विक्रमदित्य ने केवल धर्म ही नही बचाया
उन्होंने देश को आर्थिक तौर पर सोने की चिड़िया बनाई, उनके राज को ही भारत का स्वर्णिम राज कहा जाता है
विक्रमदित्य के काल में भारत का कपडा, विदेशी व्यपारी सोने के वजन से खरीदते थे
भारत में इतना सोना आ गया था की, विक्रमदित्य काल में सोने की सिक्के चलते थे , आप गूगल इमेज कर विक्रमदित्य के सोने के सिक्के देख सकते हैं।
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हिन्दू कैलंडर भी विक्रमदित्य का स्थापित किया हुआ है
आज जो भी ज्योतिष गणना है जैसे , हिन्दी सम्वंत , वार , तिथीयाँ , राशि , नक्षत्र , गोचर आदि उन्ही की रचना है , वे बहुत ही पराक्रमी , बलशाली और बुद्धिमान राजा थे ।
कई बार तो देवता भी उनसे न्याय करवाने आते थे ,
विक्रमदित्य के काल में हर नियम धर्मशास्त्र के हिसाब से बने होते थे, न्याय , राज सब धर्मशास्त्र के नियमो पर चलता था
विक्रमदित्य का काल राम राज के बाद सर्वश्रेष्ठ माना गया है, जहाँ प्रजा धनि और धर्म पर चलने वाली थी
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पर बड़े दुःख की बात है की भारत के सबसे महानतम राजा के बारे में कांग्रेसी और वामपंथीयों का इतिहास भारत की जनता को शून्य ज्ञान देता है, कृपया आप शेयर तो करें ताकि देश जान सके कि सोने की चिड़िया वाला देश का राजा कौन था ।
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दुनियाँ के #सात_आश्चर्यों की सामूहिक चमक इस मंदिर की #चौखट पर आकर #दम तोड़ देती है
#मीनाक्षी_अम्मान_मंदिर, तमिलनाडु ! यह मंदिर उन #30_विरासतों की सूची में #शामिल था जिनमें से
#7_आश्चर्यों को चुना जाने वाला था लेकिन #वामपंथ के #अंतर्राष्ट्रीयकरण से उपजी वेद #विरोधी सोच ने इस #मंदिर से इसके #हक को छीन लिया ।
इस स्थान पर मूल मंदिर #3000_साल से अधिक #पुराना है, #मंदिर के प्रत्येक कोने को #जटिल_नक्काशियाँ से डिजाइन किया गया है। मंदिर के ऊपरी आधे भाग को #खूबसूरत_रंगों से भरा गया है । मंदिर के अंदर, लगभग #एक_हजार_स्तम्भ हैं जिनमें कुछ #संगीतमय_स्तंभ हैं, बीच में एक पानी का तालाब है जिसमें सुंदर 'कमल के फूल' खिलते हैं। मंदिर के #चारों ओर #नटराज, #नंदी बैल और #देवताओं की हजारों #प्रतिमाएं हैं।
जहाँ आधुनिक युग में करोड़ों खर्च करने के बाद बनी जल संग्रहण प्रणाली कुछ वर्षों बाद काम करना बंद कर देती है वहीं इस मंदिर में हजारों साल पहले बनी जल संग्रहण प्रणाली आज भी सुचारू रूप से कार्य कर रही है । इस मंदिर में चतुराई से स्तंभ की डिजाइन में निर्मित पाइप की संरचनाएँ आज भी मंदिर की छतों से बारिश की पानी को भूमिगत चैनलों तक ले जाते हैं ।
प्राचीनता और वैभव के आधार पर जिस मंदिर को आश्चर्यों की लिस्ट में पहले स्थान पर होना चाहिए था उसे हम भारत के लोग ही नहीं जानते ।
#मीनाक्षी_अम्मान_मंदिर, तमिलनाडु ! यह मंदिर उन #30_विरासतों की सूची में #शामिल था जिनमें से
#7_आश्चर्यों को चुना जाने वाला था लेकिन #वामपंथ के #अंतर्राष्ट्रीयकरण से उपजी वेद #विरोधी सोच ने इस #मंदिर से इसके #हक को छीन लिया ।
इस स्थान पर मूल मंदिर #3000_साल से अधिक #पुराना है, #मंदिर के प्रत्येक कोने को #जटिल_नक्काशियाँ से डिजाइन किया गया है। मंदिर के ऊपरी आधे भाग को #खूबसूरत_रंगों से भरा गया है । मंदिर के अंदर, लगभग #एक_हजार_स्तम्भ हैं जिनमें कुछ #संगीतमय_स्तंभ हैं, बीच में एक पानी का तालाब है जिसमें सुंदर 'कमल के फूल' खिलते हैं। मंदिर के #चारों ओर #नटराज, #नंदी बैल और #देवताओं की हजारों #प्रतिमाएं हैं।
जहाँ आधुनिक युग में करोड़ों खर्च करने के बाद बनी जल संग्रहण प्रणाली कुछ वर्षों बाद काम करना बंद कर देती है वहीं इस मंदिर में हजारों साल पहले बनी जल संग्रहण प्रणाली आज भी सुचारू रूप से कार्य कर रही है । इस मंदिर में चतुराई से स्तंभ की डिजाइन में निर्मित पाइप की संरचनाएँ आज भी मंदिर की छतों से बारिश की पानी को भूमिगत चैनलों तक ले जाते हैं ।
प्राचीनता और वैभव के आधार पर जिस मंदिर को आश्चर्यों की लिस्ट में पहले स्थान पर होना चाहिए था उसे हम भारत के लोग ही नहीं जानते ।
*"कोदण्ड राम मंदिर पूर्व गोदावरी आंध्र प्रदेश" चित्र जूम कीजिये , कागज़ पर भी इतना सुंदर चित्रांकन मुश्किल हैं ! और हमने सपनो में नही हकीकत में बनाया है गर्व करो सनातन संस्कृति धरोहर पे!🚩*
Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
*वीडियो👆🏻👆🏻👇🏻👇🏻*
🕰➡️6.28
*🙏🏻💐*वृन्दावन का अर्थ क्या है _ __ पूज्य देवकीनन्दन ठाकुर जी*💐🙏🏻*
🚩 *सनातन धर्म को पहचानो* 🚩
*👇🏻टेलीग्राम चैनल से जुड़े👇🏻*
https://t.me/joinchat/AAAAAFKtXqZ-TRwRqPB-Uw
*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
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🕰➡️6.28
*🙏🏻💐*वृन्दावन का अर्थ क्या है _ __ पूज्य देवकीनन्दन ठाकुर जी*💐🙏🏻*
🚩 *सनातन धर्म को पहचानो* 🚩
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*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
#एक_तरफ_12000_अफगान_दूसरी_तरफ_21_सिख
ये लड़ाई यूरोप के सभी स्कूलो मेँ पढाई जाती है पर हमारे देश में इसे कोई जानता तक नहीं...
एक तरफ 12 हजार #अफगान_लुटेरे...तो दूसरी तरफ #21_सिख...
अगर आप को इसके बारे नहीं पता तो आप अपने इतिहास से बेखबर है...
आपने "#ग्रीक_सपार्टा" और "#परसियन" की लड़ाई के बारे मेँ सुना होगा...इनके ऊपर "300" जैसी फिल्म भी बनी है...पर अगर आप "#सारागढ़ी" के बारे मेँ पढोगे तो पता चलेगा इससे महान लड़ाई #सिखलैड मेँ हुई थी...
बात 1897 की है...
नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर स्टेट मेँ 12 हजार अफगानो ने हमला कर दिया...वे #गुलिस्तान और #लोखार्ट के किलो पर कब्जा करना चाहते थे...इन किलोँ को महाराजा रणजीत सिघ ने बनवाया था... इन किलो के पास सारागढी मे एक सुरक्षा चौकी थी...जहाँ पर 36 वीँ सिख रेजिमेट के 21 जवान तैनात थे...ये सभी जवान माझा क्षेत्र के थे और सभी सिख थे...36 वी सिख रेजिमेट मे केवल साबत सूरत (जो केशधारी हों) सिख भर्ती किये जाते थे.... ईशर सिह के नेतृत्व मेँ तैनात इन 20 जवानो को पहले ही पता चल गया कि 12 हजार अफगानो से जिँदा बचना नामुंकिन है...फिर भी इन जवानो ने लड़ने का फैसला लिया और 12 सितम्बर 1897 को सिखलैड की धरती पर एक ऐसी लड़ाई हुयी जो दुनिया की पांच महानतम लड़ाइयो मे शामिल हो गयी...एक तरफ 12 हजार अफगान थे...तो दूसरी तरफ 21 सिख...यंहा बड़ी भीषण लड़ाई हुयी और अफगानो की भारी तबाही हुयी...सिख जवान आखिरी सांस तक लड़े और इन किलो को बचा लिया...अफगानो की हार हुयी...जब ये खबर यूरोप पंहुची तो पूरी दुनिया स्तब्ध रह गयी...ब्रिटेन की संसद मेँ सभी ने खड़ा होकर इन 21 वीरो की बहादुरी को #नमन🙏 किया...इन सभी को मरणोपरांत इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट दिया गया... जो आज के परमवीर चक्र के बराबर था...भारत के सैन्य इतिहास का ये युद्ध के दौरान सैनिकोँ द्वारा लिया गया सबसे विचित्र अंतिम फैसला था...UNESCO ने इस लड़ाई को अपनी 8 महानतम लड़ाइयोँ मेँ शामिल किया...इस लड़ाई के आगे स्पार्टन्स की बहादुरी फीकी पड़ गयी...पर मुझे दुख होता है कि जो बात हर भारतीय को पता होनी चाहिए...उसके बारे मेँ कम लोग ही जानते है...ये लड़ाई यूरोप के स्कूलो मे पढाई जाती है पर हमारे यहा नहीं क्यो...?
ऐसे वीरो का इतिहास एक षडयंत्र के तहत छिपा लिया जाता है।🏹🏹🏹🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
ये लड़ाई यूरोप के सभी स्कूलो मेँ पढाई जाती है पर हमारे देश में इसे कोई जानता तक नहीं...
एक तरफ 12 हजार #अफगान_लुटेरे...तो दूसरी तरफ #21_सिख...
अगर आप को इसके बारे नहीं पता तो आप अपने इतिहास से बेखबर है...
आपने "#ग्रीक_सपार्टा" और "#परसियन" की लड़ाई के बारे मेँ सुना होगा...इनके ऊपर "300" जैसी फिल्म भी बनी है...पर अगर आप "#सारागढ़ी" के बारे मेँ पढोगे तो पता चलेगा इससे महान लड़ाई #सिखलैड मेँ हुई थी...
बात 1897 की है...
नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर स्टेट मेँ 12 हजार अफगानो ने हमला कर दिया...वे #गुलिस्तान और #लोखार्ट के किलो पर कब्जा करना चाहते थे...इन किलोँ को महाराजा रणजीत सिघ ने बनवाया था... इन किलो के पास सारागढी मे एक सुरक्षा चौकी थी...जहाँ पर 36 वीँ सिख रेजिमेट के 21 जवान तैनात थे...ये सभी जवान माझा क्षेत्र के थे और सभी सिख थे...36 वी सिख रेजिमेट मे केवल साबत सूरत (जो केशधारी हों) सिख भर्ती किये जाते थे.... ईशर सिह के नेतृत्व मेँ तैनात इन 20 जवानो को पहले ही पता चल गया कि 12 हजार अफगानो से जिँदा बचना नामुंकिन है...फिर भी इन जवानो ने लड़ने का फैसला लिया और 12 सितम्बर 1897 को सिखलैड की धरती पर एक ऐसी लड़ाई हुयी जो दुनिया की पांच महानतम लड़ाइयो मे शामिल हो गयी...एक तरफ 12 हजार अफगान थे...तो दूसरी तरफ 21 सिख...यंहा बड़ी भीषण लड़ाई हुयी और अफगानो की भारी तबाही हुयी...सिख जवान आखिरी सांस तक लड़े और इन किलो को बचा लिया...अफगानो की हार हुयी...जब ये खबर यूरोप पंहुची तो पूरी दुनिया स्तब्ध रह गयी...ब्रिटेन की संसद मेँ सभी ने खड़ा होकर इन 21 वीरो की बहादुरी को #नमन🙏 किया...इन सभी को मरणोपरांत इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट दिया गया... जो आज के परमवीर चक्र के बराबर था...भारत के सैन्य इतिहास का ये युद्ध के दौरान सैनिकोँ द्वारा लिया गया सबसे विचित्र अंतिम फैसला था...UNESCO ने इस लड़ाई को अपनी 8 महानतम लड़ाइयोँ मेँ शामिल किया...इस लड़ाई के आगे स्पार्टन्स की बहादुरी फीकी पड़ गयी...पर मुझे दुख होता है कि जो बात हर भारतीय को पता होनी चाहिए...उसके बारे मेँ कम लोग ही जानते है...ये लड़ाई यूरोप के स्कूलो मे पढाई जाती है पर हमारे यहा नहीं क्यो...?
ऐसे वीरो का इतिहास एक षडयंत्र के तहत छिपा लिया जाता है।🏹🏹🏹🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩