आज का अत्याधुनिक कंप्यूटर ग्राफिक्स भी इस मंदिर के भव्यता से मेल नहीं खाएगा।
किसी स्वर्गीय सरंचना की तरह दिखने वाला यह वैभवशाली मंदिर 9वीं शताब्दी में बनाया गया था । यह मंदिर ब्रह्मा, विष्णु और शिव के पवित्र त्रिमूर्ति को समर्पित है।
*(प्रम्बानन मंदिर, इंडोनेशिया)*
किसी स्वर्गीय सरंचना की तरह दिखने वाला यह वैभवशाली मंदिर 9वीं शताब्दी में बनाया गया था । यह मंदिर ब्रह्मा, विष्णु और शिव के पवित्र त्रिमूर्ति को समर्पित है।
*(प्रम्बानन मंदिर, इंडोनेशिया)*
PIC 1:- "महाशिलाकंटाक"
PIC 2:- " रथमुसल"
लगभग 2500 सालो पहले भारत की धरती पर सम्राट अजातशत्रु ओर वर्जि साम्राज्य के बीच गंगा के किनारे मिलने वाले मूल्यवान हीरे ,मोतियो ओर सोने के खनन के लिए भयानक युद्ध हुआ, वर्जि साम्राज्य ओर अजातशत्रु की सेना की ताकत बराबर थी लेकिन अजातशत्रु के वैज्ञानिकों द्वारा अविष्कार किये इन 2 शस्त्रों जिनके नाम "महाशिलकंटाक ओर रथमुस्ल" था इन हथियारों ने वर्जि साम्राज्य की सेना को काटकर रख दिया, अजातशत्रु ने ये युद्ध निर्णायक रूप से जीतकर मगध साम्राज्य का विस्तार किया।
यही हथियार बाहुबली फिल्म में भी दिखाए गये।
जब यूरोपीय लोग नंगे घूमते थे तो भारत के हिन्दू घातक अस्त्रो का प्रयोग करते थे।
सोर्स:- अजातशत्रुज वार अंगेस्ट लिच्छविस
PIC 2:- " रथमुसल"
लगभग 2500 सालो पहले भारत की धरती पर सम्राट अजातशत्रु ओर वर्जि साम्राज्य के बीच गंगा के किनारे मिलने वाले मूल्यवान हीरे ,मोतियो ओर सोने के खनन के लिए भयानक युद्ध हुआ, वर्जि साम्राज्य ओर अजातशत्रु की सेना की ताकत बराबर थी लेकिन अजातशत्रु के वैज्ञानिकों द्वारा अविष्कार किये इन 2 शस्त्रों जिनके नाम "महाशिलकंटाक ओर रथमुस्ल" था इन हथियारों ने वर्जि साम्राज्य की सेना को काटकर रख दिया, अजातशत्रु ने ये युद्ध निर्णायक रूप से जीतकर मगध साम्राज्य का विस्तार किया।
यही हथियार बाहुबली फिल्म में भी दिखाए गये।
जब यूरोपीय लोग नंगे घूमते थे तो भारत के हिन्दू घातक अस्त्रो का प्रयोग करते थे।
सोर्स:- अजातशत्रुज वार अंगेस्ट लिच्छविस
ये है उड़ीसा का पापनाशिनी शिव मंदिर.. पत्थर पर इतनी बारीकी से नक्काशी की गयी है, जैसे कि लकड़ी पर..की गई हो, फिर भी इस अजूबे निर्माण को कितने लोग जानते हैं, बहुत ज्यादा कम क्योंकि हिन्दु धर्म और सनातन संस्कृति के साथ मुगल काल से और फिर आजादी के बाद से ही काँग्रेस की सब सरकारों द्वारा अन्याय किया जाता रहा!
ऐसे किसी भी अजूबे निर्माण को कभी आम जनता एवं दुनिया के सामने नहीं आने दिया गया, न इतिहास में जगह दी गई एवं न पाठ्य पुस्तकों में स्थान दिया गया.! जब पढाया ही नहीं गया तो हम जानेंगे कैसे! हमें तो सिर्फ ताजमहल., लालकिला. और कुतुबमीनार के...बिषय में पढाया गया है! अब इसे बदलने का समय आ गया है! ऐसे सभी अजूबे निर्माण का...इतिहास फिर से लिखवाया जावे और इन्हें पाठ्यक्रम में शामिल किया जावे!
ऐसे किसी भी अजूबे निर्माण को कभी आम जनता एवं दुनिया के सामने नहीं आने दिया गया, न इतिहास में जगह दी गई एवं न पाठ्य पुस्तकों में स्थान दिया गया.! जब पढाया ही नहीं गया तो हम जानेंगे कैसे! हमें तो सिर्फ ताजमहल., लालकिला. और कुतुबमीनार के...बिषय में पढाया गया है! अब इसे बदलने का समय आ गया है! ऐसे सभी अजूबे निर्माण का...इतिहास फिर से लिखवाया जावे और इन्हें पाठ्यक्रम में शामिल किया जावे!
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
*वीडियो👆🏻👆🏻👇🏻👇🏻*
🕰➡️1.25
*🙏🏻💐*🚩मैं हिंदू हूं 🚩*🙏🏼
तमिलनाडु में तारा राजमार्ग के लिए
ओशिवलिंगम 10 किमी की दूरी पर स्थित है ...
कोई नहीं जानता कि पानी कहां से आ रहा है। साल में 365 दिन यह शिवलिंगम के ठीक ऊपर आसमान से गिरता है। शिवलिंगम के आसपास कोई पानी नहीं है।
क्या आश्चर्य है! शिव महिमा.. हिन्दुत्व विशेष ... ओम नमः शिवाय ।।💐🙏🏻*
*👇🏻टेलीग्राम चैनल से जुड़े👇🏻*
https://t.me/joinchat/AAAAAFKtXqZ-TRwRqPB-Uw
*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
*वीडियो👆🏻👆🏻👇🏻👇🏻*
🕰➡️1.25
*🙏🏻💐*🚩मैं हिंदू हूं 🚩*🙏🏼
तमिलनाडु में तारा राजमार्ग के लिए
ओशिवलिंगम 10 किमी की दूरी पर स्थित है ...
कोई नहीं जानता कि पानी कहां से आ रहा है। साल में 365 दिन यह शिवलिंगम के ठीक ऊपर आसमान से गिरता है। शिवलिंगम के आसपास कोई पानी नहीं है।
क्या आश्चर्य है! शिव महिमा.. हिन्दुत्व विशेष ... ओम नमः शिवाय ।।💐🙏🏻*
*👇🏻टेलीग्राम चैनल से जुड़े👇🏻*
https://t.me/joinchat/AAAAAFKtXqZ-TRwRqPB-Uw
*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
VID-20210406-WA0019.mp4
13.4 MB
Video from 🌹 *श्री हरि कृपा* 🌹🙏🏻🙏🏻
*बृज दर्शन*
*गोविंद देव जी मंदिर वृन्दावन*
मंदिरों में भगवान का होना तो सुना होगा लेकिन कभी सुना है किसी मंदिर की रखवाली भूत करते हों। जी हां, यूपी के वृंदावन में एक ऐसा मंदिर है, जिसे भूतों का मंदिर कहा जाता है। मुगल काल में बने इस मंदिर के बारे में लोगों की कई तरह की मान्यताएं हैं जिसे कुछ लोग अंधविश्वास कहते हैं और कुछ सही मानते हैं। आइए जानिए मंदिर से जुड़ी कुछ बातों के बारे में
1. भगवान श्रीकृष्ण जी का यह मंदिर वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। इसका निर्माण जयपुर के राजा मान सिंह ने 1590 में करवाया था।
2. इस मंदिर में 7 मंजिलें थी और सबसे ऊंची मंजिल पर एक बड़ा दीपक जलाया जाता था। लोगों का कहना है कि इस मंदिर में हर रोज 50 किलो देसी घी से दिए जलाए जाते थे। जिसकी लौ आगरा तक जाती थी।
3. एक बार मुगल शासक औंरगजेब की नजर इस मंदिर पर पड़ गई और उसने इस मंदिर को तोड़ने का आदेश दे दिया क्योंकि उसे हिसाब से पूरे भारत में इस मंदिर से बड़ी कोई मस्जिद नहीं थी जिस वजह से उसने मंदिर को तुड़वाना चाहा। औंरगजेब ने इस मंदिर के ऊपर वाली 4 मंजिले तुड़वा दी थी।
4. कुछ लोगों का मानना है कि उस मंदिर के पुजारी को सपने में भगवान कृष्ण ने कहा कि उनकी सारी मूर्तियां इस मंदिर से उठा कर कहीं और स्थापित करवा दो।
5. इस सब के बाद भगवान की मूर्ति राजस्थान के जयपुर जिले में किसी दूसरे मंदिर में स्थापित कर दी गई जो आज गोविंद वल्लभ मंदिर के नाम से मशहूर है।
6. वृंदावन में रहने वाले कुछ संतों के अनुसार इस मंदिर में अब कोई मूर्ति नहीं है और काफी समय से बंद पड़ा है। इसके बाद से यहां रहने वाले लोगों ने ऐसी अफवाह फैलानी शुरू कर दी की यहां भूत रहते हैं लेकिन ये बातें बिल्कुल गलत हैं। मुगलकाल के बाद इस मंदिर में दोबारा मूर्तियां स्थापित करवा दी गई थी और पूजा-पाठ शुरू हो गया था। अब इस मंदिर में लोगों का आना-जाना है।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
*बृजभाषी समाज ( रजि.)*
( बृज की अवाज )
*गोविंद देव जी मंदिर वृन्दावन*
मंदिरों में भगवान का होना तो सुना होगा लेकिन कभी सुना है किसी मंदिर की रखवाली भूत करते हों। जी हां, यूपी के वृंदावन में एक ऐसा मंदिर है, जिसे भूतों का मंदिर कहा जाता है। मुगल काल में बने इस मंदिर के बारे में लोगों की कई तरह की मान्यताएं हैं जिसे कुछ लोग अंधविश्वास कहते हैं और कुछ सही मानते हैं। आइए जानिए मंदिर से जुड़ी कुछ बातों के बारे में
1. भगवान श्रीकृष्ण जी का यह मंदिर वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। इसका निर्माण जयपुर के राजा मान सिंह ने 1590 में करवाया था।
2. इस मंदिर में 7 मंजिलें थी और सबसे ऊंची मंजिल पर एक बड़ा दीपक जलाया जाता था। लोगों का कहना है कि इस मंदिर में हर रोज 50 किलो देसी घी से दिए जलाए जाते थे। जिसकी लौ आगरा तक जाती थी।
3. एक बार मुगल शासक औंरगजेब की नजर इस मंदिर पर पड़ गई और उसने इस मंदिर को तोड़ने का आदेश दे दिया क्योंकि उसे हिसाब से पूरे भारत में इस मंदिर से बड़ी कोई मस्जिद नहीं थी जिस वजह से उसने मंदिर को तुड़वाना चाहा। औंरगजेब ने इस मंदिर के ऊपर वाली 4 मंजिले तुड़वा दी थी।
4. कुछ लोगों का मानना है कि उस मंदिर के पुजारी को सपने में भगवान कृष्ण ने कहा कि उनकी सारी मूर्तियां इस मंदिर से उठा कर कहीं और स्थापित करवा दो।
5. इस सब के बाद भगवान की मूर्ति राजस्थान के जयपुर जिले में किसी दूसरे मंदिर में स्थापित कर दी गई जो आज गोविंद वल्लभ मंदिर के नाम से मशहूर है।
6. वृंदावन में रहने वाले कुछ संतों के अनुसार इस मंदिर में अब कोई मूर्ति नहीं है और काफी समय से बंद पड़ा है। इसके बाद से यहां रहने वाले लोगों ने ऐसी अफवाह फैलानी शुरू कर दी की यहां भूत रहते हैं लेकिन ये बातें बिल्कुल गलत हैं। मुगलकाल के बाद इस मंदिर में दोबारा मूर्तियां स्थापित करवा दी गई थी और पूजा-पाठ शुरू हो गया था। अब इस मंदिर में लोगों का आना-जाना है।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
*बृजभाषी समाज ( रजि.)*
( बृज की अवाज )
आज शायद प्लास्टर ऑफ़ पेरिस से भी छत और तोरण का इतना महीन काम नहीं हो सकता जो करीब एक हजा़र साल पहले पत्थरों को तराश कर किया गया। मंडप की छत पर यह 3D नक़्काशी देखते ही बनती है। द्वार पर मकर तोरण एक ही पत्थर को काट कर बनाया गया।
फोटो: कंदरिया महादेव मंदिर, खजुराहो.
#सनातन_धर्म_सर्वश्रेष्ठ_है
#IncredibleIndia
फोटो: कंदरिया महादेव मंदिर, खजुराहो.
#सनातन_धर्म_सर्वश्रेष्ठ_है
#IncredibleIndia