ये है उड़ीसा का पापनाशिनी शिव मंदिर.. पत्थर पर इतनी बारीकी से नक्काशी की गयी है, जैसे कि लकड़ी पर..की गई हो, फिर भी इस अजूबे निर्माण को कितने लोग जानते हैं, बहुत ज्यादा कम क्योंकि हिन्दु धर्म और सनातन संस्कृति के साथ मुगल काल से और फिर आजादी के बाद से ही काँग्रेस की सब सरकारों द्वारा अन्याय किया जाता रहा!
ऐसे किसी भी अजूबे निर्माण को कभी आम जनता एवं दुनिया के सामने नहीं आने दिया गया, न इतिहास में जगह दी गई एवं न पाठ्य पुस्तकों में स्थान दिया गया.! जब पढाया ही नहीं गया तो हम जानेंगे कैसे! हमें तो सिर्फ ताजमहल., लालकिला. और कुतुबमीनार के...बिषय में पढाया गया है! अब इसे बदलने का समय आ गया है! ऐसे सभी अजूबे निर्माण का...इतिहास फिर से लिखवाया जावे और इन्हें पाठ्यक्रम में शामिल किया जावे!
ऐसे किसी भी अजूबे निर्माण को कभी आम जनता एवं दुनिया के सामने नहीं आने दिया गया, न इतिहास में जगह दी गई एवं न पाठ्य पुस्तकों में स्थान दिया गया.! जब पढाया ही नहीं गया तो हम जानेंगे कैसे! हमें तो सिर्फ ताजमहल., लालकिला. और कुतुबमीनार के...बिषय में पढाया गया है! अब इसे बदलने का समय आ गया है! ऐसे सभी अजूबे निर्माण का...इतिहास फिर से लिखवाया जावे और इन्हें पाठ्यक्रम में शामिल किया जावे!
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
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🕰➡️1.25
*🙏🏻💐*🚩मैं हिंदू हूं 🚩*🙏🏼
तमिलनाडु में तारा राजमार्ग के लिए
ओशिवलिंगम 10 किमी की दूरी पर स्थित है ...
कोई नहीं जानता कि पानी कहां से आ रहा है। साल में 365 दिन यह शिवलिंगम के ठीक ऊपर आसमान से गिरता है। शिवलिंगम के आसपास कोई पानी नहीं है।
क्या आश्चर्य है! शिव महिमा.. हिन्दुत्व विशेष ... ओम नमः शिवाय ।।💐🙏🏻*
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*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
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कोई नहीं जानता कि पानी कहां से आ रहा है। साल में 365 दिन यह शिवलिंगम के ठीक ऊपर आसमान से गिरता है। शिवलिंगम के आसपास कोई पानी नहीं है।
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Video from 🌹 *श्री हरि कृपा* 🌹🙏🏻🙏🏻
*बृज दर्शन*
*गोविंद देव जी मंदिर वृन्दावन*
मंदिरों में भगवान का होना तो सुना होगा लेकिन कभी सुना है किसी मंदिर की रखवाली भूत करते हों। जी हां, यूपी के वृंदावन में एक ऐसा मंदिर है, जिसे भूतों का मंदिर कहा जाता है। मुगल काल में बने इस मंदिर के बारे में लोगों की कई तरह की मान्यताएं हैं जिसे कुछ लोग अंधविश्वास कहते हैं और कुछ सही मानते हैं। आइए जानिए मंदिर से जुड़ी कुछ बातों के बारे में
1. भगवान श्रीकृष्ण जी का यह मंदिर वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। इसका निर्माण जयपुर के राजा मान सिंह ने 1590 में करवाया था।
2. इस मंदिर में 7 मंजिलें थी और सबसे ऊंची मंजिल पर एक बड़ा दीपक जलाया जाता था। लोगों का कहना है कि इस मंदिर में हर रोज 50 किलो देसी घी से दिए जलाए जाते थे। जिसकी लौ आगरा तक जाती थी।
3. एक बार मुगल शासक औंरगजेब की नजर इस मंदिर पर पड़ गई और उसने इस मंदिर को तोड़ने का आदेश दे दिया क्योंकि उसे हिसाब से पूरे भारत में इस मंदिर से बड़ी कोई मस्जिद नहीं थी जिस वजह से उसने मंदिर को तुड़वाना चाहा। औंरगजेब ने इस मंदिर के ऊपर वाली 4 मंजिले तुड़वा दी थी।
4. कुछ लोगों का मानना है कि उस मंदिर के पुजारी को सपने में भगवान कृष्ण ने कहा कि उनकी सारी मूर्तियां इस मंदिर से उठा कर कहीं और स्थापित करवा दो।
5. इस सब के बाद भगवान की मूर्ति राजस्थान के जयपुर जिले में किसी दूसरे मंदिर में स्थापित कर दी गई जो आज गोविंद वल्लभ मंदिर के नाम से मशहूर है।
6. वृंदावन में रहने वाले कुछ संतों के अनुसार इस मंदिर में अब कोई मूर्ति नहीं है और काफी समय से बंद पड़ा है। इसके बाद से यहां रहने वाले लोगों ने ऐसी अफवाह फैलानी शुरू कर दी की यहां भूत रहते हैं लेकिन ये बातें बिल्कुल गलत हैं। मुगलकाल के बाद इस मंदिर में दोबारा मूर्तियां स्थापित करवा दी गई थी और पूजा-पाठ शुरू हो गया था। अब इस मंदिर में लोगों का आना-जाना है।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
*बृजभाषी समाज ( रजि.)*
( बृज की अवाज )
*गोविंद देव जी मंदिर वृन्दावन*
मंदिरों में भगवान का होना तो सुना होगा लेकिन कभी सुना है किसी मंदिर की रखवाली भूत करते हों। जी हां, यूपी के वृंदावन में एक ऐसा मंदिर है, जिसे भूतों का मंदिर कहा जाता है। मुगल काल में बने इस मंदिर के बारे में लोगों की कई तरह की मान्यताएं हैं जिसे कुछ लोग अंधविश्वास कहते हैं और कुछ सही मानते हैं। आइए जानिए मंदिर से जुड़ी कुछ बातों के बारे में
1. भगवान श्रीकृष्ण जी का यह मंदिर वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। इसका निर्माण जयपुर के राजा मान सिंह ने 1590 में करवाया था।
2. इस मंदिर में 7 मंजिलें थी और सबसे ऊंची मंजिल पर एक बड़ा दीपक जलाया जाता था। लोगों का कहना है कि इस मंदिर में हर रोज 50 किलो देसी घी से दिए जलाए जाते थे। जिसकी लौ आगरा तक जाती थी।
3. एक बार मुगल शासक औंरगजेब की नजर इस मंदिर पर पड़ गई और उसने इस मंदिर को तोड़ने का आदेश दे दिया क्योंकि उसे हिसाब से पूरे भारत में इस मंदिर से बड़ी कोई मस्जिद नहीं थी जिस वजह से उसने मंदिर को तुड़वाना चाहा। औंरगजेब ने इस मंदिर के ऊपर वाली 4 मंजिले तुड़वा दी थी।
4. कुछ लोगों का मानना है कि उस मंदिर के पुजारी को सपने में भगवान कृष्ण ने कहा कि उनकी सारी मूर्तियां इस मंदिर से उठा कर कहीं और स्थापित करवा दो।
5. इस सब के बाद भगवान की मूर्ति राजस्थान के जयपुर जिले में किसी दूसरे मंदिर में स्थापित कर दी गई जो आज गोविंद वल्लभ मंदिर के नाम से मशहूर है।
6. वृंदावन में रहने वाले कुछ संतों के अनुसार इस मंदिर में अब कोई मूर्ति नहीं है और काफी समय से बंद पड़ा है। इसके बाद से यहां रहने वाले लोगों ने ऐसी अफवाह फैलानी शुरू कर दी की यहां भूत रहते हैं लेकिन ये बातें बिल्कुल गलत हैं। मुगलकाल के बाद इस मंदिर में दोबारा मूर्तियां स्थापित करवा दी गई थी और पूजा-पाठ शुरू हो गया था। अब इस मंदिर में लोगों का आना-जाना है।
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*बृजभाषी समाज ( रजि.)*
( बृज की अवाज )
आज शायद प्लास्टर ऑफ़ पेरिस से भी छत और तोरण का इतना महीन काम नहीं हो सकता जो करीब एक हजा़र साल पहले पत्थरों को तराश कर किया गया। मंडप की छत पर यह 3D नक़्काशी देखते ही बनती है। द्वार पर मकर तोरण एक ही पत्थर को काट कर बनाया गया।
फोटो: कंदरिया महादेव मंदिर, खजुराहो.
#सनातन_धर्म_सर्वश्रेष्ठ_है
#IncredibleIndia
फोटो: कंदरिया महादेव मंदिर, खजुराहो.
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*6 हज़ार साल तक गुफा में बंद रहा ये शिवलिंग, फिर भी नहीं हुआ कुछ*..??👍🙏🎉🤔👇👇
हिंदू धर्म के प्रमुख देव भगवान शंकर के दुनियाभर में कई मंदिर आदि स्थापित है। ज्यादातर भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में ही विराजमान हैं। कहा जाता है कि ये एक मात्र ऐसे देव माने जाते हैं जिनका जन्म कैसे हुआ इसके बारे में किसी को नहीं पता। इन्हें ही संसार के रचयिता कहा गया है और यही हैं जो संसार का विनाश करने की ताकत रखते हैं। केवल भारत देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया इन्हें पूजती है। हम जानते हैं आप में से ऐसे बहुत से लोग होंगे जिन्हें इस बात पर विश्वास नहीं होगा। इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसा बताने जा रहे हैं, जिससे आपको इस बात पर यकीनन विश्वास हो जाएगा। भारत में तो ऐसी कई जगहें हैं जहां शिव शंकर बसे हुए हैं, लेकिन क्या आपको पता है भोलेनाथ के भक्तों ने अफ्रीका में भी उन्हें विराजित कर रखा है। इससे संबंधित प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार लगभग 6 हज़ार साल पुराना शिवलिंग अफ्रीका में स्थापित हैं।
बता दें कि अफ्रीका या कालद्वीप, एशिया के बाद विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप माना जाता है। वैसे तो शिव जी के मंदिर विश्वभर में हैं, चाहे अमेरिका हो, ऑस्ट्रेलिया हो या फिर अफ्रीका। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अफ्रीका में 6 हज़ार वर्ष पहल से ही हिंदू धर्म प्रचलित था। लोगों का कहना है कि दक्षिण अफ्रीका में भी शिव की मूर्ति का पाया जाना इस बात का सबूत है कि शिव की महिमा और प्रताप पूरे विश्व भर में है।
साउथ अफ्रीका के सुद्वारा नाम की एक गुफा में पुरातत्वविदों को महादेव का करीबन 6 हज़ार साल पुराना शिवलिंग मिला, जो कठोर ग्रेनाइट पत्थर से बना हुआ है। इस शिवलिंग को खोजने वाले पुरातत्ववेत्ता का कहना है कि वे हैरान हैं कि ये शिवलिंग इतने वर्षों से यहां आज तक सुरक्षित कैसे रह पाया। अब इस सवाल का जवाब कोई कैसे दे सकता है, क्योंकि भगवान शंकर के रूप शिवलिंग को कोई किसी भी तरह की हानि कैसे पहुंचा सकता है। इस शिवलिंग के सही सलामत होने का केवल एक ही मतलब हो सकता है कि जिस में खुद भगवान शंकर हो वहां किसी भी प्रकार की कोई घटना होने की कोई संभावना नहीं होती।
MB✍️👆👇👌👍💪😎🙏💐
हिंदू धर्म के प्रमुख देव भगवान शंकर के दुनियाभर में कई मंदिर आदि स्थापित है। ज्यादातर भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में ही विराजमान हैं। कहा जाता है कि ये एक मात्र ऐसे देव माने जाते हैं जिनका जन्म कैसे हुआ इसके बारे में किसी को नहीं पता। इन्हें ही संसार के रचयिता कहा गया है और यही हैं जो संसार का विनाश करने की ताकत रखते हैं। केवल भारत देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया इन्हें पूजती है। हम जानते हैं आप में से ऐसे बहुत से लोग होंगे जिन्हें इस बात पर विश्वास नहीं होगा। इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसा बताने जा रहे हैं, जिससे आपको इस बात पर यकीनन विश्वास हो जाएगा। भारत में तो ऐसी कई जगहें हैं जहां शिव शंकर बसे हुए हैं, लेकिन क्या आपको पता है भोलेनाथ के भक्तों ने अफ्रीका में भी उन्हें विराजित कर रखा है। इससे संबंधित प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार लगभग 6 हज़ार साल पुराना शिवलिंग अफ्रीका में स्थापित हैं।
बता दें कि अफ्रीका या कालद्वीप, एशिया के बाद विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप माना जाता है। वैसे तो शिव जी के मंदिर विश्वभर में हैं, चाहे अमेरिका हो, ऑस्ट्रेलिया हो या फिर अफ्रीका। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अफ्रीका में 6 हज़ार वर्ष पहल से ही हिंदू धर्म प्रचलित था। लोगों का कहना है कि दक्षिण अफ्रीका में भी शिव की मूर्ति का पाया जाना इस बात का सबूत है कि शिव की महिमा और प्रताप पूरे विश्व भर में है।
साउथ अफ्रीका के सुद्वारा नाम की एक गुफा में पुरातत्वविदों को महादेव का करीबन 6 हज़ार साल पुराना शिवलिंग मिला, जो कठोर ग्रेनाइट पत्थर से बना हुआ है। इस शिवलिंग को खोजने वाले पुरातत्ववेत्ता का कहना है कि वे हैरान हैं कि ये शिवलिंग इतने वर्षों से यहां आज तक सुरक्षित कैसे रह पाया। अब इस सवाल का जवाब कोई कैसे दे सकता है, क्योंकि भगवान शंकर के रूप शिवलिंग को कोई किसी भी तरह की हानि कैसे पहुंचा सकता है। इस शिवलिंग के सही सलामत होने का केवल एक ही मतलब हो सकता है कि जिस में खुद भगवान शंकर हो वहां किसी भी प्रकार की कोई घटना होने की कोई संभावना नहीं होती।
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गुजरात के सूरत से आई यह तस्वीरे देखकर हृदय को बड़ा सन्तुष्टि मिला।
आजकल के सभी युवा भटके हुये नहीं है, सही नौजवान टूकड़े-टूकड़े गैंग के समर्थक नहीं है।
Small acts of kindness can make a big difference. #MondayMotivation
सूरत के कुछ छात्र हर कुछ दिनों में मकई खरीदने के लिए अपनी पॉकेट मनी खर्च करते हैं और फिर इसे अपने क्षेत्र के पेड़ों पर रख देते हैं ताकि पक्षी और गिलहरी भूखे न रहें। हमें इन बच्चों पर बहुत गर्व है। वे हमें भविष्य की आशा देते हैं.....
#wecandobetter #WeDontDeserveThisPlanet
साभार- मेरे प्रिय मित्र @Amitabh Nishad Amh जी के wall से
आजकल के सभी युवा भटके हुये नहीं है, सही नौजवान टूकड़े-टूकड़े गैंग के समर्थक नहीं है।
Small acts of kindness can make a big difference. #MondayMotivation
सूरत के कुछ छात्र हर कुछ दिनों में मकई खरीदने के लिए अपनी पॉकेट मनी खर्च करते हैं और फिर इसे अपने क्षेत्र के पेड़ों पर रख देते हैं ताकि पक्षी और गिलहरी भूखे न रहें। हमें इन बच्चों पर बहुत गर्व है। वे हमें भविष्य की आशा देते हैं.....
#wecandobetter #WeDontDeserveThisPlanet
साभार- मेरे प्रिय मित्र @Amitabh Nishad Amh जी के wall से
*अद्भुत भारत*
दोनों हाथ की उंगलियाँ एक दूसरे को पीछे से छूती हैं! यह वास्तव में हार्ड रॉक पर की गई नक्काशी है और इसे 12 वीं शताब्दी में हमारे पूर्वजों ने बनाया है ।
यहाँ किस प्रकार की तकनीक का उपयोग किया गया है?
क्या किसी बुद्धिजीवी के पास कोई जवाब है ?
*(चेन्नकेशवा मंदिर, कर्नाटक)*
दोनों हाथ की उंगलियाँ एक दूसरे को पीछे से छूती हैं! यह वास्तव में हार्ड रॉक पर की गई नक्काशी है और इसे 12 वीं शताब्दी में हमारे पूर्वजों ने बनाया है ।
यहाँ किस प्रकार की तकनीक का उपयोग किया गया है?
क्या किसी बुद्धिजीवी के पास कोई जवाब है ?
*(चेन्नकेशवा मंदिर, कर्नाटक)*
*मौलिन्नोंग (एशिया का सबसे स्वच्छ गांव)*
मेघालय के खासी पहाड़ियों के बीच मौलिन्नोंग गांव एशिया के सबसे स्वच्छ गांव के रूप में विश्वप्रसिद्ध है.
इस गांव में प्रवेश करने के लिए ₹50 की प्रवेश शुल्क देना होगा.
यहाँ के मनमोहक दृश्य और अद्भुत सुंदरता प्राकृतिक खूबसूरती और शांति का अनुभव कराने के लिए पर्याप्त है.
इस गांव के हरे-भरे बागानों में एक अलग ही शांति और ठहराव है.
यहाँ स्थित बैलेंसिंग रॉक गांव के बाहरी क्षेत्र में एक छोटे पत्थर पर टिकी हुई है जो तेज़ बारिश और मौसम की मार के बावजूद यूं ही अडिग है. इसे स्थानीय लोगों में ‘मॉ रिंगकू शरतिया’ कहते हैं.
*मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🇮🇳*
वीडियो➡️🕰️.30.sec
मेघालय के खासी पहाड़ियों के बीच मौलिन्नोंग गांव एशिया के सबसे स्वच्छ गांव के रूप में विश्वप्रसिद्ध है.
इस गांव में प्रवेश करने के लिए ₹50 की प्रवेश शुल्क देना होगा.
यहाँ के मनमोहक दृश्य और अद्भुत सुंदरता प्राकृतिक खूबसूरती और शांति का अनुभव कराने के लिए पर्याप्त है.
इस गांव के हरे-भरे बागानों में एक अलग ही शांति और ठहराव है.
यहाँ स्थित बैलेंसिंग रॉक गांव के बाहरी क्षेत्र में एक छोटे पत्थर पर टिकी हुई है जो तेज़ बारिश और मौसम की मार के बावजूद यूं ही अडिग है. इसे स्थानीय लोगों में ‘मॉ रिंगकू शरतिया’ कहते हैं.
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*कुंभलगढ़ किला , राजस्थान*
राजस्थान के राजसमन्द जिले में स्थित इस दुर्ग का निर्माण महाराणा कुम्भा ने सन 1459 कराया था। इस किले को 'अजयगढ़' कहा जाता था क्योंकि इस किले पर विजय प्राप्त करना दुष्कर कार्य था।
कुम्भलगढ़ किले को मेवाड की आँख कहते है यह दुर्ग कई घाटियों व पहाड़ियों को मिला कर बनाया गया है जिससे यह प्राकृतिक सुरक्षात्मक आधार पाकर अजय रहा।
इस दुर्ग में ऊँचे स्थानों पर महल, मंदिर व आवासीय इमारते बनाने, समतल भूमि का उपयोग कृषि कार्य के लिए एवं ढलान वाले भागो का उपयोग जलाशयों के लिए कर इस दुर्ग को यथासंभव स्वाबलंबी बनाया गया।
महाराणा प्रताप की जन्म स्थली कुम्भलगढ़ एक तरह से मेवाड़ की संकटकालीन राजधानी रहा है।
महाराणा कुम्भा से लेकर महाराणा राज सिंह के समय तक मेवाड़ पर हुए आक्रमणों के समय राजपरिवार इसी दुर्ग में रहा।
माड गायक इस दुर्ग की प्रशंसा में अक्सर गीत गाते हैं :
कुम्भलगढ़ कटारगढ़ पाजिज अवलन फेर।
संवली मत दे साजना, बसुंज, कुम्भल्मेर॥
*मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩*
*वीडियो➡️🕰️30.sec*👇🏻👇🏻👆🏻👆🏻
राजस्थान के राजसमन्द जिले में स्थित इस दुर्ग का निर्माण महाराणा कुम्भा ने सन 1459 कराया था। इस किले को 'अजयगढ़' कहा जाता था क्योंकि इस किले पर विजय प्राप्त करना दुष्कर कार्य था।
कुम्भलगढ़ किले को मेवाड की आँख कहते है यह दुर्ग कई घाटियों व पहाड़ियों को मिला कर बनाया गया है जिससे यह प्राकृतिक सुरक्षात्मक आधार पाकर अजय रहा।
इस दुर्ग में ऊँचे स्थानों पर महल, मंदिर व आवासीय इमारते बनाने, समतल भूमि का उपयोग कृषि कार्य के लिए एवं ढलान वाले भागो का उपयोग जलाशयों के लिए कर इस दुर्ग को यथासंभव स्वाबलंबी बनाया गया।
महाराणा प्रताप की जन्म स्थली कुम्भलगढ़ एक तरह से मेवाड़ की संकटकालीन राजधानी रहा है।
महाराणा कुम्भा से लेकर महाराणा राज सिंह के समय तक मेवाड़ पर हुए आक्रमणों के समय राजपरिवार इसी दुर्ग में रहा।
माड गायक इस दुर्ग की प्रशंसा में अक्सर गीत गाते हैं :
कुम्भलगढ़ कटारगढ़ पाजिज अवलन फेर।
संवली मत दे साजना, बसुंज, कुम्भल्मेर॥
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