Forwarded from The Narrative
108 शिव मंदिर, वर्धमान 🌸
भगवान शिव को समर्पित '108 शिव मंदिर' कोलकाता से 108 किमी दूर वर्धमान ने अवस्थित है. यहाँ एक ही स्थान पर निर्मित 108 शिव मंदिरों का निर्माण रानी विष्णु कुमारी ने वर्ष 1788 में करवाया था.
मंदिर के बाहरी वृत भाग में 74 मंदिर और अंदरूनी भाग में 34 मंदिर है. सभी एक जैसे ही आकृति के है. ये मंदिर के चारो दिशाओ में बने हुए है.
बाकि 107 में तो भगवान शिव लिंग के दर्शन होते है, सिर्फ एक में शिव लिंग के साथ पार्वती माता के भी दर्शन साथ -साथ होते है.
जहा 54 मंदिर पूरे होते है, वहा जोड़े से श्याम और श्वेत वर्ण के नंदी जी के दर्शन होते है.
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
भगवान शिव को समर्पित '108 शिव मंदिर' कोलकाता से 108 किमी दूर वर्धमान ने अवस्थित है. यहाँ एक ही स्थान पर निर्मित 108 शिव मंदिरों का निर्माण रानी विष्णु कुमारी ने वर्ष 1788 में करवाया था.
मंदिर के बाहरी वृत भाग में 74 मंदिर और अंदरूनी भाग में 34 मंदिर है. सभी एक जैसे ही आकृति के है. ये मंदिर के चारो दिशाओ में बने हुए है.
बाकि 107 में तो भगवान शिव लिंग के दर्शन होते है, सिर्फ एक में शिव लिंग के साथ पार्वती माता के भी दर्शन साथ -साथ होते है.
जहा 54 मंदिर पूरे होते है, वहा जोड़े से श्याम और श्वेत वर्ण के नंदी जी के दर्शन होते है.
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नागशिला , नाग देवता मंदिर , कर्नाटक 🐍
बैंगलोर के पास विदुरश्वथ गाँव स्थित है एक रहस्मय मंदिर. यह मंदिर नाग देवता को समर्पित है.
महाभारत काल मे एक अश्वत्थ (जिसे अंजीर भी कहा जाता है) वृक्ष महात्मा विदुर द्वारा लगाया गया था, इसलिए यह स्थान का नाम विदुरश्वथ पड़ा.
विदुरश्वथ को "दक्षिण भारत का जलियांवाला बाग" के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यहां छोटे पैमाने पर इसी तरह की घटना हुई थी.
25 अप्रैल, 1938 को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक हिस्से के रूप में, ग्रामीणों का एक समूह सत्याग्रह का आयोजन करने के लिए यहां एकत्र हुआ था.
जलियांवाला बाग में जो कुछ हुआ, उसके समान, पुलिस ने इस समूह पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसके परिणामस्वरूप कई लोग मारे गए.
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बैंगलोर के पास विदुरश्वथ गाँव स्थित है एक रहस्मय मंदिर. यह मंदिर नाग देवता को समर्पित है.
महाभारत काल मे एक अश्वत्थ (जिसे अंजीर भी कहा जाता है) वृक्ष महात्मा विदुर द्वारा लगाया गया था, इसलिए यह स्थान का नाम विदुरश्वथ पड़ा.
विदुरश्वथ को "दक्षिण भारत का जलियांवाला बाग" के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यहां छोटे पैमाने पर इसी तरह की घटना हुई थी.
25 अप्रैल, 1938 को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक हिस्से के रूप में, ग्रामीणों का एक समूह सत्याग्रह का आयोजन करने के लिए यहां एकत्र हुआ था.
जलियांवाला बाग में जो कुछ हुआ, उसके समान, पुलिस ने इस समूह पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसके परिणामस्वरूप कई लोग मारे गए.
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हनुमान मंदिर, जाखू 🙏🏻
हिमाचल प्रदेश के जाखू पर्वत में विश्वप्रसिद्ध मंदिर अवस्थित है जहाँ स्वयंभू हनुमान जी विराजे हैं.
हनुमान जी जब संजीवनी बूटी के लिए जा रहे थे तो उन्हें इसी पर्वत में यक्ष ऋषि मिले थे जिनसे उन्होंने बूटी का परिचय प्राप्त किया था.
यहाँ हनुमान जी की 108 फ़ीट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित है। इसके अलावा यहाँ हनुमान जी के पदचिन्ह भी जीवंत स्थिति में है।
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हिमाचल प्रदेश के जाखू पर्वत में विश्वप्रसिद्ध मंदिर अवस्थित है जहाँ स्वयंभू हनुमान जी विराजे हैं.
हनुमान जी जब संजीवनी बूटी के लिए जा रहे थे तो उन्हें इसी पर्वत में यक्ष ऋषि मिले थे जिनसे उन्होंने बूटी का परिचय प्राप्त किया था.
यहाँ हनुमान जी की 108 फ़ीट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित है। इसके अलावा यहाँ हनुमान जी के पदचिन्ह भी जीवंत स्थिति में है।
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सूर्य मंदिर, कोणार्क ☀️
ओडिशा के कोर्णाक में स्थित है विश्वविख्यात सूर्य मंदिर जिसे देखने देश-विदेश से पर्यटक आते हैं.
13वीं शताब्दी में राजा नरसिंह देव ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था.
इस मंदिर को रथ के आकार में बनाया गया है जिसमें सूर्य देवता के रथ की तरह बारह जोड़ी पहिए और 7 घोड़े हैं.
मंदिर की वास्तुकला एवं स्थापत्यकला पूरे विश्व में सबसे अनोखी है.
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ओडिशा के कोर्णाक में स्थित है विश्वविख्यात सूर्य मंदिर जिसे देखने देश-विदेश से पर्यटक आते हैं.
13वीं शताब्दी में राजा नरसिंह देव ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था.
इस मंदिर को रथ के आकार में बनाया गया है जिसमें सूर्य देवता के रथ की तरह बारह जोड़ी पहिए और 7 घोड़े हैं.
मंदिर की वास्तुकला एवं स्थापत्यकला पूरे विश्व में सबसे अनोखी है.
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बटेश्वर मंदिर समूह, मुरैना , ग्वालियर, मध्यप्रदेश 🛕
यह एक प्राचीन मन्दिरों का बड़ा समूह है जो कि भारत के मध्य प्रदेश राज्य में ग्वालियर के पास मुरैना शहर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
बटेश्वर मंदिर समूह लगभग 200 बलुआ पत्थर से बने छोटे और बडे मंदिरों का एक समूह है।
यह मंदिर अब खंडहर बन चुके है। यह मन्दिरों का समूह लगभग 25 एकड जमीन पर फैला हुआ है।
मध्यप्रदेश के पुरातत्व निदेशालय के अनुसार,
200 मंदिरों का यह समूह गुर्जर-प्रतिहार वंश के शासनकाल के दौरान बनाया गया था।
ये सभी मंदिर भगवान शिव, विष्णु और मां शक्ति को समर्पित है। इन मंदिरों के समूह की दीवारों पर कई देवी-देवताओं की मूर्तियों को भी देखा जा सकता है।
भारतीय मंदिर वास्तुकला के विशेषज्ञों द्वारा माना जाता है कि इन मंदिरों का निर्माण 8 वीं शताब्दी के आसपास किया गया था ।
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यह एक प्राचीन मन्दिरों का बड़ा समूह है जो कि भारत के मध्य प्रदेश राज्य में ग्वालियर के पास मुरैना शहर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
बटेश्वर मंदिर समूह लगभग 200 बलुआ पत्थर से बने छोटे और बडे मंदिरों का एक समूह है।
यह मंदिर अब खंडहर बन चुके है। यह मन्दिरों का समूह लगभग 25 एकड जमीन पर फैला हुआ है।
मध्यप्रदेश के पुरातत्व निदेशालय के अनुसार,
200 मंदिरों का यह समूह गुर्जर-प्रतिहार वंश के शासनकाल के दौरान बनाया गया था।
ये सभी मंदिर भगवान शिव, विष्णु और मां शक्ति को समर्पित है। इन मंदिरों के समूह की दीवारों पर कई देवी-देवताओं की मूर्तियों को भी देखा जा सकता है।
भारतीय मंदिर वास्तुकला के विशेषज्ञों द्वारा माना जाता है कि इन मंदिरों का निर्माण 8 वीं शताब्दी के आसपास किया गया था ।
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दशावतार मंदिर, देवगढ़ उत्तर प्रदेश 🛕
दशावतार मंदिर उत्तर प्रदेश के बेतवा नदी घाटी में, झांसी से 125 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर प्रदेश के देवगढ़ में स्थित 6 वीं शताब्दी का विष्णु हिंदू मंदिर है।
इसकी एक सरल, एक कोशिका वर्गाकार योजना है और यह सबसे पुराने हिंदू पत्थर मंदिरों में से एक है जहां आज भी पूजा अर्चना की जाती है ।
दशावतार मंदिर उत्तर भारत का सबसे पहला ज्ञात मंदिर है और यह भगवान विष्णु को समर्पित है। इसका निर्माण गुप्त काल के दौरान हुआ था।
मंदिर में भगवान विष्णु के दस अवतारों को दर्शाया गया है और इसमें कुछ रोचक विशेषताएं हैं, जैसे गंगा और यमुना नदी की नक्काशी, पवित्र गर्भगृह और वैष्णव पौराणिक कथाओं के नक्काशीदार पैनलों दर्शाई गयी है।
मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति भी है, जो नर नारायण तपस्या की स्थिति में है और एक अन्य जिसमे उन्हें शेषषाई मुद्रा में दर्शाया गया है।
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दशावतार मंदिर उत्तर प्रदेश के बेतवा नदी घाटी में, झांसी से 125 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर प्रदेश के देवगढ़ में स्थित 6 वीं शताब्दी का विष्णु हिंदू मंदिर है।
इसकी एक सरल, एक कोशिका वर्गाकार योजना है और यह सबसे पुराने हिंदू पत्थर मंदिरों में से एक है जहां आज भी पूजा अर्चना की जाती है ।
दशावतार मंदिर उत्तर भारत का सबसे पहला ज्ञात मंदिर है और यह भगवान विष्णु को समर्पित है। इसका निर्माण गुप्त काल के दौरान हुआ था।
मंदिर में भगवान विष्णु के दस अवतारों को दर्शाया गया है और इसमें कुछ रोचक विशेषताएं हैं, जैसे गंगा और यमुना नदी की नक्काशी, पवित्र गर्भगृह और वैष्णव पौराणिक कथाओं के नक्काशीदार पैनलों दर्शाई गयी है।
मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति भी है, जो नर नारायण तपस्या की स्थिति में है और एक अन्य जिसमे उन्हें शेषषाई मुद्रा में दर्शाया गया है।
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विजया विट्टला मंदिर , हम्पी , कर्नाटक 🛕
विजयनगर साम्राज्य के प्रतापी राजा देवराय ने यह मंदिर 15 वीं - 16 वीं सदी में बनवाया।भगवान विष्णु के इस मंदिर की वास्तुकला और विशेषताएं अद्वितीय हैं ।
इसका मुख्य हाल , आंतरिक प्रागण , मूर्तियां अद्भुत हैं । पत्थर रथ इस मंदिर का एक और बड़ा आकर्षण है , इसका सौंदर्य मंत्रमुग्ध कर देता है । इस पत्थर रथ को 50 रुपये के नोट में प्रिंट किया गया है ।भारत में तीन प्रसिद्ध पत्थर रथ हैं पहला यह ही , दूसरा कोणार्क ( ओडीशा ) , तीसरा महाबलीपुरम ( तमिलनाडु )
रंगा मंडप के संगीत स्तंभ इस मंदिर के प्रसिद्व केंद्र हैं , इन संगीत स्तंभों को सारेगामा स्तंभों के नाम से भी जाना जाता है । जब इन स्तंभों को धीरे धीरे हाथ से थपकी देते हैं तो संगीत की विभिन्न ध्वनियाँ यहां से निकलती हैं ।
अंग्रेजों ने इनमें से 2 संगीत स्तम्भों को काट दिया था ताकि वो संगीत के पीछे की रचना समझ सकें पर वो कुछ भी समझने में असफल रहे ।
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विजयनगर साम्राज्य के प्रतापी राजा देवराय ने यह मंदिर 15 वीं - 16 वीं सदी में बनवाया।भगवान विष्णु के इस मंदिर की वास्तुकला और विशेषताएं अद्वितीय हैं ।
इसका मुख्य हाल , आंतरिक प्रागण , मूर्तियां अद्भुत हैं । पत्थर रथ इस मंदिर का एक और बड़ा आकर्षण है , इसका सौंदर्य मंत्रमुग्ध कर देता है । इस पत्थर रथ को 50 रुपये के नोट में प्रिंट किया गया है ।भारत में तीन प्रसिद्ध पत्थर रथ हैं पहला यह ही , दूसरा कोणार्क ( ओडीशा ) , तीसरा महाबलीपुरम ( तमिलनाडु )
रंगा मंडप के संगीत स्तंभ इस मंदिर के प्रसिद्व केंद्र हैं , इन संगीत स्तंभों को सारेगामा स्तंभों के नाम से भी जाना जाता है । जब इन स्तंभों को धीरे धीरे हाथ से थपकी देते हैं तो संगीत की विभिन्न ध्वनियाँ यहां से निकलती हैं ।
अंग्रेजों ने इनमें से 2 संगीत स्तम्भों को काट दिया था ताकि वो संगीत के पीछे की रचना समझ सकें पर वो कुछ भी समझने में असफल रहे ।
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Forwarded from मंदिर • Temple (Alok Sanatan)
पद्मनाभस्वामी मंदिर भारत के केरल राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित एक हिंदू मंदिर है। मलयालम में तिरुवनंतपुरम शहर का नाम "भगवान अनंत का शहर", (दिव्य सर्प का शहर) में अनुवाद किया गया है, जो पद्मनाभस्वामी मंदिर के देवता को संदर्भित करता है। मंदिर चेरा शैली और वास्तुकला की द्रविड़ शैली की एक जटिल संलयन में बनाया गया है, जिसमें ऊंची दीवारें और 16 वीं शताब्दी का गोपुर है।
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जय सनातन
जय श्री राम
@Mandir
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जय श्री राम
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Forwarded from The Narrative
मदुरई मीनाक्षी अम्मन मंदिर के 1000 स्तंभ
प्राचीन भारत का ध्वनिक चमत्कार 🛕
तमिलनाडु के मदुरै मीनाक्षी अम्मन मंदिर के 1000 स्तंभ हॉल, वास्तव में कुल 985 स्तंभ हैं।
आयराम (हजार) काल (स्तंभ) मंडपम मदुरै मीनाक्षी मंदिर के भीतर है। जैसे ही आप मंडपम में प्रवेश करते हैं, आप स्तंभों पर मूर्तियां देख सकते हैं और मध्य गलियारा आपको नटवर प्रतिमा की ओर ले जाता है।
भारतीय नृत्य के पारखी नृत्य "मुद्रा", पोशाक और संगीत वाद्ययंत्र पर प्रदर्शन का आनंद लेंगे।
यह एकदम सही साउंड इंजीनियरिंग तकनीक का एक शास्त्रीय उदाहरण है क्योंकि बिल्कुल "जीरो इको" है।
इसके अलावा, गर्भगृह के अंदर, ध्वनि का स्तर 40 डेसीबल से ऊपर नहीं जाता है।
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तमिलनाडु के मदुरै मीनाक्षी अम्मन मंदिर के 1000 स्तंभ हॉल, वास्तव में कुल 985 स्तंभ हैं।
आयराम (हजार) काल (स्तंभ) मंडपम मदुरै मीनाक्षी मंदिर के भीतर है। जैसे ही आप मंडपम में प्रवेश करते हैं, आप स्तंभों पर मूर्तियां देख सकते हैं और मध्य गलियारा आपको नटवर प्रतिमा की ओर ले जाता है।
भारतीय नृत्य के पारखी नृत्य "मुद्रा", पोशाक और संगीत वाद्ययंत्र पर प्रदर्शन का आनंद लेंगे।
यह एकदम सही साउंड इंजीनियरिंग तकनीक का एक शास्त्रीय उदाहरण है क्योंकि बिल्कुल "जीरो इको" है।
इसके अलावा, गर्भगृह के अंदर, ध्वनि का स्तर 40 डेसीबल से ऊपर नहीं जाता है।
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