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वर्जिनिया का हिंदु केंद्र, अमेरिका 🛕
अमेरिका के वर्जिनिया क्षेत्र में हिंदु समुदाय ने हिंदु केंद्र की स्थापना की है. यहाँ दूरस्थ क्षेत्रों से हिंदु समाज के श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं.
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
अमेरिका के वर्जिनिया क्षेत्र में हिंदु समुदाय ने हिंदु केंद्र की स्थापना की है. यहाँ दूरस्थ क्षेत्रों से हिंदु समाज के श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं.
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
*बृज दर्शन*
*गहबर वन बरसाना*
बरसाना के निकट गहबर वन स्थित है आज भी गहवरवन में गुनगुनाते हैं घुंघरू।
संत ही नहीं स्थानीय लोग भी कहते हैं कि गहवरवन की वाटिका में राधा के घुंघरुओं की आवाज सुनाई देती है। गहवरवन राधा का सबसे प्रिय वन था। मान्यता है कि इस वन को राधा ने अपने हाथों से रोपा था। रोज अपने प्रियतम के साथ वृषभानु नंदनी इस वन में रास रचाया करती थीं।
*( वीडियो देखें )*
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
*बृजभाषी समाज ( रजि.)*
( बृज की अवाज )
*गहबर वन बरसाना*
बरसाना के निकट गहबर वन स्थित है आज भी गहवरवन में गुनगुनाते हैं घुंघरू।
संत ही नहीं स्थानीय लोग भी कहते हैं कि गहवरवन की वाटिका में राधा के घुंघरुओं की आवाज सुनाई देती है। गहवरवन राधा का सबसे प्रिय वन था। मान्यता है कि इस वन को राधा ने अपने हाथों से रोपा था। रोज अपने प्रियतम के साथ वृषभानु नंदनी इस वन में रास रचाया करती थीं।
*( वीडियो देखें )*
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*बृजभाषी समाज ( रजि.)*
( बृज की अवाज )
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कृष्ण का बटरबॉल, महाबलीपुरम
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
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प्राचीन कंबोज महाजनपद 🛕
प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में से एक था कंबोज. वर्तमान अफगानिस्तान का बगरम क्षेत्र पूर्व में कपिसा के नाम से प्रख्यात था जो कंबोज की राजधानी थी.
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में से एक था कंबोज. वर्तमान अफगानिस्तान का बगरम क्षेत्र पूर्व में कपिसा के नाम से प्रख्यात था जो कंबोज की राजधानी थी.
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
धातु की इस मूर्ति की विशेषता जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे..
*ये हैं महाराष्ट्र के कोल्हापुर की अंबाबाई देवी*
यह मूर्ति तीन धातुओं से मिलकर बनी है, *चांदी_तांबा_कांसा*। खास बात ये है कि *तीनों धातुओं का मेल्टिंग पॉइंट अलग अलग है*, जबकि मूर्ति पर कहीं भी कोई वेल्डिंग नहीं है।
अर्थात चांदी का मुख, तांबे की बाकी मूर्ति और वस्त्र काँसे के, इसी प्रकार सिंह का मुख तांबे का और उसके अयाल काँसे के।
अब खुद ही सोच लीजिए कि आज से सैकड़ों वर्षों पूर्व जब न तो वेल्डिंग थी और ना ही धातुओं को जोड़ने का कोई केमिकल, तो फिर भिन्न भिन्न धातुओं को मिलाकर ये मूर्ति बनाने वाले कलाकार किस स्तर के वैज्ञानिक होंगे।
*ये हैं महाराष्ट्र के कोल्हापुर की अंबाबाई देवी*
यह मूर्ति तीन धातुओं से मिलकर बनी है, *चांदी_तांबा_कांसा*। खास बात ये है कि *तीनों धातुओं का मेल्टिंग पॉइंट अलग अलग है*, जबकि मूर्ति पर कहीं भी कोई वेल्डिंग नहीं है।
अर्थात चांदी का मुख, तांबे की बाकी मूर्ति और वस्त्र काँसे के, इसी प्रकार सिंह का मुख तांबे का और उसके अयाल काँसे के।
अब खुद ही सोच लीजिए कि आज से सैकड़ों वर्षों पूर्व जब न तो वेल्डिंग थी और ना ही धातुओं को जोड़ने का कोई केमिकल, तो फिर भिन्न भिन्न धातुओं को मिलाकर ये मूर्ति बनाने वाले कलाकार किस स्तर के वैज्ञानिक होंगे।
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सोमपुर बौद्ध विहार, बांग्लादेश 🛕
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
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कानथाल्लूर शाला, तिरुवनंतपुरम 🛕
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
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*_अद्भुत अतिसुन्दर ड्रोन से लिया गया दृश्य "हरि" की "पौड़ी"।🚩🙏_*
*_💞🙏हरि ॐ 🙏💞_*
*_💞🙏हरि ॐ 🙏💞_*
*🛕 नीलकंठेश्वर मंदिर, उदयपुर(मध्य प्रदेश)*
*🔶परमार राजा भोज के पुत्र उदयादित्य द्वारा 10-11 वीं शताब्दी में बनवाया गया उदयपुर का नीलकंठेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर आस्था और शिल्प का बेजोड़ नमूना है। गगनचुम्बी शिखर, अद्धभुत शिल्प और गर्भगृह में विशाल शिवलिंग के दर्शन करने यहां श्रावण सोमवार पर लाखों दर्शनार्थी पहुंचते हैं।*
*🔶 मंदिर में प्रतिदिन सूर्य किरणाभिषेक होता है। सूरज की पहली किरण मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग पर पड़ती है। मंदिर का वास्तु कुछ इस प्रकार का है कि भोर की पहली किरण वेधशाला, मंडप और गर्भगृह के छोटे से द्वार को चीरती हुई भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर पड़ती है।*
*🔶 सूर्यदेव उदय के साथ ही भोलेनाथ को प्रणाम कर जग में उजियारा फैलाने की अनुमति मांगते हों। मुख्य शिवलिंग पर पीतल का आवरण चढ़ाया गया है। जिसे विशेष अवसर पर जल अर्पित करने और दर्शन के लिए अलग भी रख दिया जाता है। मंदिर मेंं शिवलिंग के पास ही देवी पार्वती की प्रतिमा भी उपस्थित है।*
*🔶परमार राजा भोज के पुत्र उदयादित्य द्वारा 10-11 वीं शताब्दी में बनवाया गया उदयपुर का नीलकंठेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर आस्था और शिल्प का बेजोड़ नमूना है। गगनचुम्बी शिखर, अद्धभुत शिल्प और गर्भगृह में विशाल शिवलिंग के दर्शन करने यहां श्रावण सोमवार पर लाखों दर्शनार्थी पहुंचते हैं।*
*🔶 मंदिर में प्रतिदिन सूर्य किरणाभिषेक होता है। सूरज की पहली किरण मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग पर पड़ती है। मंदिर का वास्तु कुछ इस प्रकार का है कि भोर की पहली किरण वेधशाला, मंडप और गर्भगृह के छोटे से द्वार को चीरती हुई भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर पड़ती है।*
*🔶 सूर्यदेव उदय के साथ ही भोलेनाथ को प्रणाम कर जग में उजियारा फैलाने की अनुमति मांगते हों। मुख्य शिवलिंग पर पीतल का आवरण चढ़ाया गया है। जिसे विशेष अवसर पर जल अर्पित करने और दर्शन के लिए अलग भी रख दिया जाता है। मंदिर मेंं शिवलिंग के पास ही देवी पार्वती की प्रतिमा भी उपस्थित है।*
अद्भुत, दुर्लभ, अकल्पनीय आँध्रप्रदेश के श्रीशैलम वन में पाए जाने वाले हनुमत_वीरा नाम के पेड़ की सभी पत्तियों में श्रीहनुमान जी की छवि पायी जाती है
सनातन धर्म- प्रकृति स्वयं जिसकी साक्षी है
सनातन धर्म- प्रकृति स्वयं जिसकी साक्षी है
सातपुडा के पहाड़ियों पर ऐसे अति प्राचीन मंदिरों के भग्नावशेष आपको बहुत मिलेंगे जो राष्ट्रकूट या चोल या चालुक्य राजवंश के दौरान बने थे ..बाद में दक्कन पर जब मुगलों ने कब्जा कर लिया तब उन्होंने इन तमाम प्राचीन मंदिरों को तोड़ दिया
असल में इस्लाम कभी रचना में विश्वास नहीं करती बल्कि इस्लाम सिर्फ विध्वंस और तोड़फोड़ में ही विश्वास करती है इस इस्लाम ने अफगानिस्तान में चौथी सदी में बने विशाल बामियान बुद्ध की प्रतिमाओं को तहस-नहस कर दिया और जब इस्लाम ने ईरान पर कब्जा जमाया जिसका नाम तब पर्शिया था तब उन्होंने पर्शिया यानी ईरान से सभी ऐतिहासिक स्थलों को तोड़ दिया जो पारसी लोगों से जुड़े थे जिसमें 8000 साल पहले निर्मित विशाल जरथुस्त्र का मंदिर था साथ ही 400 बड़े फायर टेंपल यानी सब मुसलमानों ने ईरान से मिटा दिया अभी हाल में ही जब IS ने इराक के कई शहरों पर कब्जा किया तब उन्होंने मेसोपोटामिया सभ्यता की तमाम निशानियों को तहस-नहस कर दिया
असल में इस्लाम कभी रचना में विश्वास नहीं करती बल्कि इस्लाम सिर्फ विध्वंस और तोड़फोड़ में ही विश्वास करती है इस इस्लाम ने अफगानिस्तान में चौथी सदी में बने विशाल बामियान बुद्ध की प्रतिमाओं को तहस-नहस कर दिया और जब इस्लाम ने ईरान पर कब्जा जमाया जिसका नाम तब पर्शिया था तब उन्होंने पर्शिया यानी ईरान से सभी ऐतिहासिक स्थलों को तोड़ दिया जो पारसी लोगों से जुड़े थे जिसमें 8000 साल पहले निर्मित विशाल जरथुस्त्र का मंदिर था साथ ही 400 बड़े फायर टेंपल यानी सब मुसलमानों ने ईरान से मिटा दिया अभी हाल में ही जब IS ने इराक के कई शहरों पर कब्जा किया तब उन्होंने मेसोपोटामिया सभ्यता की तमाम निशानियों को तहस-नहस कर दिया
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तांबड़ी सुरला शिव मंदिर, गोवा 🛕
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