ऐतिहासिक मंदिर और उनकी कथा
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हमारी संस्कृति हमारा अभिमान

*इस चैनल मे हमारे मंदिरों की कथा के आडियो विडियो और हमारी सभ्यता से जुड़ी जगह का प्रसारण किया जाता है*

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Photo from श्री राधे
जिसे वे पौराणिक कथा कहते हैं, वह वास्तव में हमारा इतिहास है।

इस मूर्ति को ध्यान से देखिए जहाँ दिखेंगी आपको पत्थर में उकेरी गई हमारी वास्तविक इतिहास की पुस्तकें..

भीष्म पितामह अपनी मृत्युशय्या पर (तीरों के बिस्तर पर) चेन्नाकेशव मंदिर, बेलूर।
ध्यान से तीरों का बिस्तर देखिए।
कर्नाटक राज्य के हासन जिले में 12वीं सदी का हिंदू मंदिर है 🙏वंदेमातरम 🙏 जय श्री राम 🙏 🙏जय श्री कृष्ण 🙏🙏
🏵️ *श्री रामायण, काव्य ग्रंथों के रचीयता श्री महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती पर हार्दिक बधाई* 🏵️🙏🙏🙏🚩🚩
Photo from जैकी मनवानी
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पर्वतामलाई मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर, तिरुवन्नामलाई
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, गुजरात
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
महाकाल की नगरी का ऐसा व्रतांत पहले कभी नही सुना होगा

वीडियो👆🏻👇🏻
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Video from जैकी मनवानी
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कार्तिक शुक्ल पक्ष अष्टमी, गोपाष्टमी 🐮
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
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पवित्र पंच-बद्री में से एक - योगध्यान बदरी मंदिर, उत्तराखंड
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
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ताड़केश्वर महादेव मंदिर, उत्तराखंड
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
Forwarded from The Narrative
कावलेदुर्गा किला, कर्नाटक 🛕
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
#महाभारत_चक्रव्यूह

विश्व का सबसे बड़ा युद्ध था महाभारत का कुरुक्षेत्र युद्ध। इतिहास में इतना भयंकर युद्ध केवल एक बार ही घटित हुआ था। अनुमान है कि महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्ध में परमाणू हथियारों का उपयॊग भी किया गया था। ‘चक्र’ यानी ‘पहिया’ और ‘व्यूह’ यानी ‘गठन’। पहिए के जैसे घूमता हुआ व्यूह है चक्रव्यूह। कुरुक्षेत्र युद्ध का सबसे खतरनाक रण तंत्र था चक्रव्यूह। यधपि आज का आधुनिक जगत भी चक्रव्यूह जैसे रण तंत्र से अनभिज्ञ हैं। चक्रव्यू या पद्मव्यूह को बेधना असंभव था। द्वापरयुग में केवल सात लोग ही इसे बेधना जानते थे। भगवान कृष्ण के अलावा अर्जुन, भीष्म, द्रॊणाचार्य, कर्ण, अश्वत्थाम और प्रद्युम्न ही व्यूह को बेध सकते थे जानते हैं। अभिमन्यु केवल चक्रव्यूह के अंदर प्रवेश करना जानता था।

चक्रव्यूह में कुल सात परत होती थी। सबसे अंदरूनी परत में सबसे शौर्यवान सैनिक तैनात होते थे। यह परत इस प्रकार बनाये जाते थे कि बाहरी परत के सैनिकों से अंदर की परत के सैनिक शारीरिक और मानसिक रूप से ज्यादा बलशाली होते थे। *सबसे बाहरी परत में पैदल सैन्य के सैनिक तैनात हुआ करते थे। अंदरूनी परत में अस्र शत्र से सुसज्जित हाथियों की सेना हुआ करती थी।* चक्रव्यूह की रचना एक भूल भुलैय्या के जैसे हॊती थी जिसमें एक बार शत्रू फंस गया तो घन चक्कर बनकर रह जाता था।
चक्रव्यूह में हर परत की सेना घड़ी के कांटे के जैसे ही हर पल घूमता रहता था। इससे व्यूह के अंदर प्रवेश करने वाला व्यक्ति अंदर ही खॊ जाता और बाहर जाने का रास्ता भूल जाता था। महाभारत में व्यूह की रचना गुरु द्रॊणाचार्य ही करते थे। चक्रव्यूह को युग का सबसे सर्वेष्ठ सैन्य दलदल माना जाता था। इस व्यूह का गठन युधिष्टिर को बंधी बनाने के लिए ही किया गया था। माना जाता है कि 48×128 किलॊमीटर के क्षेत्र फल में कुरुक्षेत्र नामक जगह पर युद्ध हुआ था जिसमें भाग लेने वाले सैनिकों की संख्या 1.8 मिलियन था!

चक्रव्यूह को घुमता हुआ मौत का पहिया भी कहा जाता था। क्योंकि एक बार जो इस व्यूक के अंदर गया वह कभी बाहर नहीं आ सकता था। यह पृथ्वी की ही तरह अपने अकस में घूमता था साथ ही साथ हर परत भी परिक्रमा करती हुई घूमती थी। इसी कारण से बाहर जाने का द्वार हर वक्त अलग दिशा में बदल जाता था जो शत्रु को भ्रमित करता था। अद्भुत और अकल्पनीय युद्ध तंत्र था चक्रव्यूह। आज का आधुनिक जगत भी इतने उलझे हुए और असामान्य रण तंत्र को युद्ध में नहीं अपना सकता है।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि संगीत या शंख के नाद के अनुसार ही चक्रव्यूह के सैनिक अपने स्थिती को बदल सकते थे। कॊई भी सेनापती या सैनिक अपनी मन मर्ज़ी से अपनी स्थिती को बदल नहीं सकता था। अद्भूत अकल्पनीय।

ज़रा सॊचिये कि सहस्र सहस्र वर्ष पूर्व चक्रव्यूह जैसे घातक युद्ध तकनीक को अपनाने वाले कितने बुद्धिवान रहें होंगे।

चक्रव्यूह ठीक उस आंधी की तरह था जो अपने मार्ग में आनेवाले हर एक चीज को तिनके की तरह उड़ाकर नष्ट कर देता था। अभिमन्यू व्यूह के भीतर प्रवेश करना तो जानता था लेकिन बाहर निकलना नहीं जानता था। इसी कारण वश कौरवों ने छल से अभिमन्यू की हत्या कर दी थी। माना जाता है कि चक्रव्यूह का गठन शत्रु सैन्य को मनोवैज्ञानिक और मानसिक रूप से इतना जर्जर बनाता था कि एक ही पल में हज़ारों शत्रु सैनिक प्राण त्याग देते थे। कृष्ण, अर्जुन, भीष्म, द्रॊणाचार्य, कर्ण, अश्वत्थाम और प्रद्युम्न के अलावा चक्रव्यूह से बाहर निकलने की रणनीति किसी के भी पास नहीं थी।

सदियों पूर्व ही इतने वैज्ञानिक रीति से अनुशासित रण नीती का गठन करना सामान्य विषय नहीं है। महाभारत के युद्ध में कुल तीन बार चक्रव्यूह का गठन किया था, जिनमें से एक में अभिमन्यू की म्रुत्यू हुई थी। केवल अर्जुन ने कृष्ण की कृपा से चक्रव्यूह को वेध कर जयद्रथ का वध किया था। हमें गर्व होना चाहिए कि हम उस देश के वासी है जिस देश में सदियों पूर्व के विज्ञान और तकनीक का अद्भुत निदर्शन देखने को मिलता है। निस्संदेह चक्रव्यूह न भूतो न भविष्यती युद्ध तकनीक था। न भूत काल में किसी ने देखा और ना भविष्य में कॊई इसे देख पायेगा।

(साभार : प्रमोद मिश्र जी के पोस्ट से)
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श्री हनुमान ठाकुर मंदिर (महाबली मंदिर), मणिपुर
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श्रीधर का सादा जीवन उच्च विचार
🟠●अद्भुत ●ঔৣ● अकल्पनीय●🟠
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🌹दिल्ली से लगभग 3700 किलोमीटर दूरी पर एक देश है, जिसका नाम है वियतनाम .....

दिल्ली से अगर वियतनाम जाना हो, तो बीच मे कम से कम 3 या 4 देश पड़ते है । जैसे बांग्लादेश, म्यांमार , लाओस, थाईलैंड ।। वियतनाम में आज हिन्दू धर्म पूरी तरह से लुप्त हो चुका है । जबकि वहां हिन्दू मंदिर प्रचुर मात्रा में आज भी है ।।

यह जो मंदिर आप चित्रों के माध्यम से देख रहे है, इस मंदिर का नाम " My Son Temple " है, जो कि भगवान शिव को समर्पित मंदिर है ।। इस मंदिर की ऑफिशियल साइट्स पर भी इसे शिव मंदिर ही कहा गया है, और तो और इस मंदिर के रखरखाव का खर्च भारत सरकार भी उठाती है ।। इस मंदिर में खंडित शिवलिंग , खंडित मूर्तियों की भरमार है , इस मंदिर का निर्माण 4th सदी में हुआ था, यानि कि आज से लगभग 1600 वर्ष पूर्व ।।

हम जो डिंग हांकते है- "हस्ती मिटती नही हमारी".... उसका मुंह तोड़ जवाब वियतनाम भी है, जहां कभी केवल हमारी हस्ती हुआ करती थी, और आज इन मंदिरों में द्वीप प्रज्वलित करने के लिए भी हिन्दू नही बचे ...."

꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂