Forwarded from The Narrative
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कोरंगनाथ स्वामी मंदिर, तमिलनाडु 🚩
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
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*🟠●अद्भुत ●ঔৣ● अकल्पनीय●🟠*
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🌹अकबर का छत्र, मां ज्वाला ज़ी ने तोड़ा था मुगल सम्राट अकबर का अहंकार.. 🚩
मुग़ल सम्राट अकबर ने मां ज्वाला जी की दिव्य ज्योतियों को बुझाने के लाख जतन कर लिए थे यहां तक कि पानी की नहर ज्योति के ऊपर गिरा दी थी, ज्वाला पानी की लहर को चीरती हुई प्रज्वलित हुई। अकबर अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया। तत्पश्चात वो मां ज्वाला जी की अपार महिमा और शक्ति को पहचान गया। और मां को सवा मन (पचास किलो) सोने का छत्र भेंट स्वरूप देना चाहा, और घमंड में कहा संसार में तेरा सबसे बड़ा भक्त मैं हूं। मां ने वो छत्र कबूल नहीं किया और वो जमीन में गिरते ही किसी अन्य धातु में परिवर्तित हो गया, वैज्ञानिक इस छत्र की प्रयोगशाला में जांच कर चुके हैं जो किसी भी धातु से मेल नहीं खाता है जो आज़ भी मां ज्वाला जी मंदिर कांगड़ा में है।
🌹जय मां ज्वाला जी 🙏🚩
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
🌹अ
मुग़ल सम्राट अकबर ने मां ज्वाला जी की दिव्य ज्योतियों को बुझाने के लाख जतन कर लिए थे यहां तक कि पानी की नहर ज्योति के ऊपर गिरा दी थी, ज्वाला पानी की लहर को चीरती हुई प्रज्वलित हुई। अकबर अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया। तत्पश्चात वो मां ज्वाला जी की अपार महिमा और शक्ति को पहचान गया। और मां को सवा मन (पचास किलो) सोने का छत्र भेंट स्वरूप देना चाहा, और घमंड में कहा संसार में तेरा सबसे बड़ा भक्त मैं हूं। मां ने वो छत्र कबूल नहीं किया और वो जमीन में गिरते ही किसी अन्य धातु में परिवर्तित हो गया, वैज्ञानिक इस छत्र की प्रयोगशाला में जांच कर चुके हैं जो किसी भी धातु से मेल नहीं खाता है जो आज़ भी मां ज्वाला जी मंदिर कांगड़ा में है।
🌹जय मां ज्वाला जी 🙏🚩
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
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माँ तारातारिणी शक्तिपीठ, ओडिशा 🛕
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
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*🟠●अद्भुत ●ঔৣ● अकल्पनीय●🟠*
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🌹#Our_Temple_our_pride🙏🚩
#abovethesevenwonders🚩
दुनिया सिर्फ 7 अजूबों की गिनती करती है !!
लेकिन भारत में तो हज़ारों अजूबे हैं...
क्या आप इस मंदिर को जानते थे?
स्थानीय लोग इस मंदिर को 'कोणसीमा अयोध्या' कहते हैं।
इसके ऊंचे उभरते हुए अद्वितीय गोपुरम और शिखर में संपूर्ण रामायण की नक्काशी है।
श्री कोंडांडा राम स्वामी मंदिर, गोलाला ममीदादा, पेद्दापुडी मंडल, आंध्र प्रदेश।
🙏🔱🚩जय श्रीराम 🚩🔱🙏
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
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#abovethesevenwonders🚩
दुनिया सिर्फ 7 अजूबों की गिनती करती है !!
लेकिन भारत में तो हज़ारों अजूबे हैं...
क्या आप इस मंदिर को जानते थे?
स्थानीय लोग इस मंदिर को 'कोणसीमा अयोध्या' कहते हैं।
इसके ऊंचे उभरते हुए अद्वितीय गोपुरम और शिखर में संपूर्ण रामायण की नक्काशी है।
श्री कोंडांडा राम स्वामी मंदिर, गोलाला ममीदादा, पेद्दापुडी मंडल, आंध्र प्रदेश।
🙏🔱🚩जय श्रीराम 🚩🔱🙏
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*🟠●अद्भुत ●ঔৣ● अकल्पनीय●🟠*
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🌹ये कौन से शातिर इतिहासकार थे जो ऐसे मंदिरो को हमसे छुपाए रखे और इनकी अद्भुत रचना का बखान कही नही किये हजारो साल पहले बिना किसी तकनीक के कैसे बने होंगे ये डिजाईन।
कितना उन्नत और विकसित थी हमारी सनातन की इंजीनियरिंग बाबा बडोह मंदिर,कांगड़ा,हिमाचल प्रदेश से!🙏
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
🌹य
कितना उन्नत और विकसित थी हमारी सनातन की इंजीनियरिंग बाबा बडोह मंदिर,कांगड़ा,हिमाचल प्रदेश से!🙏
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
Forwarded from The Narrative
स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी, भाग्यनगर
स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी का उद्घाटन, रामानुजाचार्य जी की 1000 वीं जयंती सहस्राब्दी समारोह में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 5 फरवरी 2022 को किया।
स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी 11वीं सदी के भक्ति शाखा के संत श्री रामानुजाचार्य की स्मृति में है। रामानुजाचार्य एक हिंदू धर्मशास्त्री, भारतीय दार्शनिक, समाज सुधारक और श्री वैष्णववाद परंपरा के एक महान प्रतिपादक थे।
यह मूर्ति ‘पंचलोहा’ से बनी है, जो पांच धातुओं, सोना, चांदी, तांबा, जस्ता और पीतल का एक संयोजन है। यह दुनिया भर में बैठने की स्थिति में सबसे ऊंची धातु की मूर्तियों में से एक है।
इसे ‘भद्र वेदी’ नाम के 54 फुट ऊंचे आधार भवन पर स्थापित किया गया है।
इसमें एक वैदिक डिजिटल लाइब्रेरी और अनुसंधान केंद्र है, जिसमें प्राचीन भारतीय ग्रंथ, एक थिएटर, एक शैक्षिक गैलरी और श्री रामानुज आचार्य के कई कार्यो का विवरण देने वाला बहु-भाषा ऑडियो टूर है.
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी का उद्घाटन, रामानुजाचार्य जी की 1000 वीं जयंती सहस्राब्दी समारोह में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 5 फरवरी 2022 को किया।
स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी 11वीं सदी के भक्ति शाखा के संत श्री रामानुजाचार्य की स्मृति में है। रामानुजाचार्य एक हिंदू धर्मशास्त्री, भारतीय दार्शनिक, समाज सुधारक और श्री वैष्णववाद परंपरा के एक महान प्रतिपादक थे।
यह मूर्ति ‘पंचलोहा’ से बनी है, जो पांच धातुओं, सोना, चांदी, तांबा, जस्ता और पीतल का एक संयोजन है। यह दुनिया भर में बैठने की स्थिति में सबसे ऊंची धातु की मूर्तियों में से एक है।
इसे ‘भद्र वेदी’ नाम के 54 फुट ऊंचे आधार भवन पर स्थापित किया गया है।
इसमें एक वैदिक डिजिटल लाइब्रेरी और अनुसंधान केंद्र है, जिसमें प्राचीन भारतीय ग्रंथ, एक थिएटर, एक शैक्षिक गैलरी और श्री रामानुज आचार्य के कई कार्यो का विवरण देने वाला बहु-भाषा ऑडियो टूर है.
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
*🟠●अद्भुत ●ঔৣ● अकल्पनीय●🟠*
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🌹विदेशी कहते है, की अंग्रेजो के भारत मे आने से पहले सुई भी नही बनती थी ।।
अब आप देखें, महाराष्ट्र के पुणे में स्तिथ #लेण्याद्री_गुफा ।। इस गुफा में एक भव्य गणेशजी का मंदिर भी है ।। पूरी गुफा, गुफा में पिल्लर अलग अलग मंदिर, सब कुछ एक ही चट्टान को काटकर बने है ।।। ऐसा भव्य और विराट निर्माण क्या बिना उन्नत तकनीक के हो सकता है ??
भारत मे मिलने वाली सभी प्राचीन गुफाओं की आयु 1000- 1500 वर्ष तक आंकी जाती है, जबकि इसी तर्ज पर बनी जॉर्डन पेट्रा तुर्की आदि की गुफाओं की आयु 5000 वर्ष से भी अधिक बताया जाता है । यह एक तरह की एतिहासिक धांधली ही है ।। हमारा निजी मत तो यही है, की यह सभी गुफाएं महाभारतकालीन है ।। उसी कालखंड में विश्व की सभी महान गुफाओं का निर्माण हुआ होगा, महाभारत युद्ध के पश्चात द्वापरकाल की वैज्ञानिक उन्नति का तो चूर्ण बन गया, लेकिन उस वैज्ञानिक उन्नति की निशानियां इन गुफाओं के रुप में आज भी हमारे साथ है ।।
लेण्याद्री गुफाएं ।
पुणे -
जुन्नर तालुका के निकट
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
🌹व
अब आप देखें, महाराष्ट्र के पुणे में स्तिथ #लेण्याद्री_गुफा ।। इस गुफा में एक भव्य गणेशजी का मंदिर भी है ।। पूरी गुफा, गुफा में पिल्लर अलग अलग मंदिर, सब कुछ एक ही चट्टान को काटकर बने है ।।। ऐसा भव्य और विराट निर्माण क्या बिना उन्नत तकनीक के हो सकता है ??
भारत मे मिलने वाली सभी प्राचीन गुफाओं की आयु 1000- 1500 वर्ष तक आंकी जाती है, जबकि इसी तर्ज पर बनी जॉर्डन पेट्रा तुर्की आदि की गुफाओं की आयु 5000 वर्ष से भी अधिक बताया जाता है । यह एक तरह की एतिहासिक धांधली ही है ।। हमारा निजी मत तो यही है, की यह सभी गुफाएं महाभारतकालीन है ।। उसी कालखंड में विश्व की सभी महान गुफाओं का निर्माण हुआ होगा, महाभारत युद्ध के पश्चात द्वापरकाल की वैज्ञानिक उन्नति का तो चूर्ण बन गया, लेकिन उस वैज्ञानिक उन्नति की निशानियां इन गुफाओं के रुप में आज भी हमारे साथ है ।।
लेण्याद्री गुफाएं ।
पुणे -
जुन्नर तालुका के निकट
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🌹मध्यप्रदेश के पद्मावती पवाया मंदिर गुप्तकालीन ( सन 300 AD) की दीवार में बनी इन सुंदर कलाकृतियों को देखिए....
कहा जाता है कि 'तबला’ हज़ारों साल पुराना 'सनातनी वाद्ययंत्र' है,
परन्तु कुछ ‘विशिष्ट श्रेणी के इतिहासकारों' ने उसे 13वीं शताब्दी के कवि “अमीर खुसरो” की खोज बता दी!
इन् कलाकृतियों में आपको तबला, वीणा, डफली आदि कई वाद्य यंत्र अंकित मिलेंगे।
सोचिये की हमारी कला, संस्कृति, हमारी खोज, हमारी पहचान को किस किस तरह से छीनने की कोशिश की गयी!!
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
🌹म
कहा जाता है कि 'तबला’ हज़ारों साल पुराना 'सनातनी वाद्ययंत्र' है,
परन्तु कुछ ‘विशिष्ट श्रेणी के इतिहासकारों' ने उसे 13वीं शताब्दी के कवि “अमीर खुसरो” की खोज बता दी!
इन् कलाकृतियों में आपको तबला, वीणा, डफली आदि कई वाद्य यंत्र अंकित मिलेंगे।
सोचिये की हमारी कला, संस्कृति, हमारी खोज, हमारी पहचान को किस किस तरह से छीनने की कोशिश की गयी!!
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🌹#आपको_ताजमहल_अजूबा_लगता_है,तो यह पढ़िए बारिश की पूर्व सूचना देता है कानपुर का जगन्नाथ मंदिर ।
क्या आप कल्पना कर सकते हैं किसी ऐसे भवन की जिसकी छत चिलचिलाती धूप में टपकने लगे बारिश की शुरुआत होते ही जिसकी छत से पानी टपकना बंद हो जाए
ये घटना है तो हैरान कर देने वाली लेकिन सच है उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कहे जाने वाले कानपुर जनपद के भीतरगांव विकास खंड से ठीक तीन किलोमीटर की दूरी पर एक गांव है बेहटा
यहीं पर है धूप में छत से पानी की बूंदों के टपकने और बारिश में छत के रिसाव के बंद होने का रहस्य
यह घटनाक्रम किसी आम ईमारत या भवन में नहीं बल्कि यह होता है भगवान जगन्नाथ के अति प्राचीन मंदिर में
छत टपकने से हो जाती है बारिश की आहट -
ग्रामीण बताते हैं कि बारिश होने के छह-सात दिन पहले मंदिर की छत से पानी की बूंदे टपकने लगती हैं इतना ही नहीं जिस आकार की बूंदे टपकती हैं उसी आधार पर बारिश होती है
अब तो लोग मंदिर की छत टपकने के संदेश को समझकर जमीनों को जोतने के लिए निकल पड़ते हैं हैरानी में डालने वाली बात यह भी है कि जैसे ही बारिश शुरु होती है छत अंदर से पूरी तरह सूख जाती है
वैज्ञानिक भी नहीं जान पाए रहस्य -
मंदिर की प्राचीनता व छत टपकने के रहस्य के बारे में मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पुरातत्व विशेषज्ञ एवं वैज्ञानिक कई दफा आए लेकिन इसके रहस्य को नहीं जान पाए हैं अभी तक बस इतना पता चल पाया है कि मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य 11वीं सदी में किया गया
मंदिर की बनावट बौद्ध मठ की तरह है। इसकी दिवारें 14 फीट मोटी हैं जिससे इसके सम्राट अशोक के शासन काल में बनाए जाने के अनुमान लगाए जा रहे हैं वहीं मंदिर के बाहर मोर का निशान व चक्र बने होने से चक्रवर्ती सम्राट हर्षवर्धन के कार्यकाल में बने होने के कयास भी लगाए जाते हैं लेकिन इसके निर्माण का ठीक-ठीक अनुमान अभी नहीं लग पाया है
भगवान जगन्नाथ का यह मंदिर अति प्राचीन है मंदिर में भगवान जगन्नाथ बलदाऊ व सुभद्रा की काले चिकने पत्थरों की मूर्तियां विराजमान हैं प्रांगण में सूर्यदेव और पद्मनाभम की मूर्तियां भी हैं जगन्नाथ पुरी की तरह यहां भी स्थानीय लोगों द्वारा भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकाली जाती है लोगों की आस्था मंदिर के साथ गहरे से जुड़ी है लोग दर्शन करने के लिए आते रहते हैं ।
( साभार )
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
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क्या आप कल्पना कर सकते हैं किसी ऐसे भवन की जिसकी छत चिलचिलाती धूप में टपकने लगे बारिश की शुरुआत होते ही जिसकी छत से पानी टपकना बंद हो जाए
ये घटना है तो हैरान कर देने वाली लेकिन सच है उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कहे जाने वाले कानपुर जनपद के भीतरगांव विकास खंड से ठीक तीन किलोमीटर की दूरी पर एक गांव है बेहटा
यहीं पर है धूप में छत से पानी की बूंदों के टपकने और बारिश में छत के रिसाव के बंद होने का रहस्य
यह घटनाक्रम किसी आम ईमारत या भवन में नहीं बल्कि यह होता है भगवान जगन्नाथ के अति प्राचीन मंदिर में
छत टपकने से हो जाती है बारिश की आहट -
ग्रामीण बताते हैं कि बारिश होने के छह-सात दिन पहले मंदिर की छत से पानी की बूंदे टपकने लगती हैं इतना ही नहीं जिस आकार की बूंदे टपकती हैं उसी आधार पर बारिश होती है
अब तो लोग मंदिर की छत टपकने के संदेश को समझकर जमीनों को जोतने के लिए निकल पड़ते हैं हैरानी में डालने वाली बात यह भी है कि जैसे ही बारिश शुरु होती है छत अंदर से पूरी तरह सूख जाती है
वैज्ञानिक भी नहीं जान पाए रहस्य -
मंदिर की प्राचीनता व छत टपकने के रहस्य के बारे में मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पुरातत्व विशेषज्ञ एवं वैज्ञानिक कई दफा आए लेकिन इसके रहस्य को नहीं जान पाए हैं अभी तक बस इतना पता चल पाया है कि मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य 11वीं सदी में किया गया
मंदिर की बनावट बौद्ध मठ की तरह है। इसकी दिवारें 14 फीट मोटी हैं जिससे इसके सम्राट अशोक के शासन काल में बनाए जाने के अनुमान लगाए जा रहे हैं वहीं मंदिर के बाहर मोर का निशान व चक्र बने होने से चक्रवर्ती सम्राट हर्षवर्धन के कार्यकाल में बने होने के कयास भी लगाए जाते हैं लेकिन इसके निर्माण का ठीक-ठीक अनुमान अभी नहीं लग पाया है
भगवान जगन्नाथ का यह मंदिर अति प्राचीन है मंदिर में भगवान जगन्नाथ बलदाऊ व सुभद्रा की काले चिकने पत्थरों की मूर्तियां विराजमान हैं प्रांगण में सूर्यदेव और पद्मनाभम की मूर्तियां भी हैं जगन्नाथ पुरी की तरह यहां भी स्थानीय लोगों द्वारा भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकाली जाती है लोगों की आस्था मंदिर के साथ गहरे से जुड़ी है लोग दर्शन करने के लिए आते रहते हैं ।
( साभार )
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
*सर्पमंदिर मन्नारशाला*
*आलापुज्हा केरल*
मन्नारशाला - एक अनोखा मंदिर जहा 30000 से ज्यादा नाग और सर्प मूर्तियॉ मौजूद है और सबकी पूजा होती है वह भी सिर्फ महिलाओं द्वारा
(मन्नारशाला - अलेप्पी - केरला)
वैसे तो भारत चमत्कारों का देश है ही और जितना हम इनको जानने का प्रयास करते है यह उतना ही और विशाल नज़र आता है। देश में वैसे तो बहुत सारे मंदिर नाग और सर्पो को समर्पित है पर वह पर उनकी सिर्फ एक प्रतिमा की पूजा होती है पर केरल के मन्नारशाला में में एक ऐसा मंदिर है जहा सर्र्पो की 30000 से ज्यादा प्रतिमाये है जिसमे प्रमुख पूजा नागराज और उनकी साथिन नागयक्षी की होती है और सबसे बड़ी बात है की उनकी पूजा सिर्फ महिलाये ही करती है।
इस मंदिर की गिनती भारत के सात आश्चर्यो में होती है और कहा जाता है कि श्री भगवान परशुराम जी ने इस मंदिर की स्थापना करी थी। बताया जाता है महाभारत काल के दौरान यहाँ जंगल हुआ करता था जिसे जला दिया गया था और सिर्फ इस क्षेत्र में आग नहीं लगी थी तो नागराज और अन्य सर्पो ने यही पर शरण ली थी और तबसे यह जगह मन्नारशाला बनी।
इस क्षेत्र के पास में ही नम्बूदिरी का खानदानी घर है जहा की महिलाये विवाह होने के बाद भी ब्रह्मचर्य का पालन कर मंदिर में पूजा करती है। पूजा करने वाली महिला को अम्मा के नाम सम्बोधित करते है।
क्यों होती है नागराज की पूजा ?
कहते है नम्बूदिरी खानदान की एक महिला को बच्चा नहीं हो रहा था और उसने यहाँ वासुकि नागराज से प्रार्थना करी थी और उनके दो का जन्म हुआ जिसमे एक लड़का था और एक पाँच सर लिए हुए नागराज थे, उन्हें इसी मंदिर में स्थापित किया गया और तबसे आज तक इनकी पूजा होती है। प्रबल मान्यता है की यहाँ प्रार्थना करने से महिलाओं की सूनी गोद भर जाती है | इस मंदिर में बने हुए तालाब में कपड़ो सहित जोड़े से स्नान करने के बाद गीले कपड़ो में ही प्रार्थना की होती है और वह ज़रूर पूरी होती है।
*आलापुज्हा केरल*
मन्नारशाला - एक अनोखा मंदिर जहा 30000 से ज्यादा नाग और सर्प मूर्तियॉ मौजूद है और सबकी पूजा होती है वह भी सिर्फ महिलाओं द्वारा
(मन्नारशाला - अलेप्पी - केरला)
वैसे तो भारत चमत्कारों का देश है ही और जितना हम इनको जानने का प्रयास करते है यह उतना ही और विशाल नज़र आता है। देश में वैसे तो बहुत सारे मंदिर नाग और सर्पो को समर्पित है पर वह पर उनकी सिर्फ एक प्रतिमा की पूजा होती है पर केरल के मन्नारशाला में में एक ऐसा मंदिर है जहा सर्र्पो की 30000 से ज्यादा प्रतिमाये है जिसमे प्रमुख पूजा नागराज और उनकी साथिन नागयक्षी की होती है और सबसे बड़ी बात है की उनकी पूजा सिर्फ महिलाये ही करती है।
इस मंदिर की गिनती भारत के सात आश्चर्यो में होती है और कहा जाता है कि श्री भगवान परशुराम जी ने इस मंदिर की स्थापना करी थी। बताया जाता है महाभारत काल के दौरान यहाँ जंगल हुआ करता था जिसे जला दिया गया था और सिर्फ इस क्षेत्र में आग नहीं लगी थी तो नागराज और अन्य सर्पो ने यही पर शरण ली थी और तबसे यह जगह मन्नारशाला बनी।
इस क्षेत्र के पास में ही नम्बूदिरी का खानदानी घर है जहा की महिलाये विवाह होने के बाद भी ब्रह्मचर्य का पालन कर मंदिर में पूजा करती है। पूजा करने वाली महिला को अम्मा के नाम सम्बोधित करते है।
क्यों होती है नागराज की पूजा ?
कहते है नम्बूदिरी खानदान की एक महिला को बच्चा नहीं हो रहा था और उसने यहाँ वासुकि नागराज से प्रार्थना करी थी और उनके दो का जन्म हुआ जिसमे एक लड़का था और एक पाँच सर लिए हुए नागराज थे, उन्हें इसी मंदिर में स्थापित किया गया और तबसे आज तक इनकी पूजा होती है। प्रबल मान्यता है की यहाँ प्रार्थना करने से महिलाओं की सूनी गोद भर जाती है | इस मंदिर में बने हुए तालाब में कपड़ो सहित जोड़े से स्नान करने के बाद गीले कपड़ो में ही प्रार्थना की होती है और वह ज़रूर पूरी होती है।