हनुमान जी - सबसे बड़े ऋषि, योगी और भक्त को अंजनेया के नाम से भी जाना जाता है। इसलिए, पहाड़ी को अंजयनाद्री का नाम दिया गया है।
इसे रामायण में वर्णित वानर साम्राज्य किष्किंधा का स्थल माना जाता है।
पहाड़ी के शीर्ष पर सफेद धुला हुआ हनुमान मंदिर है।
*जय हनुमान*
इसे रामायण में वर्णित वानर साम्राज्य किष्किंधा का स्थल माना जाता है।
पहाड़ी के शीर्ष पर सफेद धुला हुआ हनुमान मंदिर है।
*जय हनुमान*
*🟠●अद्भुत ●ঔৣ● अकल्पनीय●🟠*
~~~~
🌹जब #रावण ने अपने दरबार में #अंगद को बैठने के लिए सम्माननीय आसन नही दिया , तो अंगद ने अपने पुंछ से रावण के #सिंहासन से ज्यादा ऊंचा आसन बना कर बैठ गए ...!!
... और .. अंतिम प्रसंग .. #रावण_अंगद के पांव को उठाने आता है ..
बाली पुत्र महा बलधाम..#पतितपावन #सीताराम..
रावण पाँव हटाने आया ...अंगद ने फिर पांव उठाया..
क्षमा करें तुझको #श्रीराम ..पतितपावन सीताराम ..
फ़ोटो - चिन्तला वेंकटरमण स्वामी मंदिर , आंध्र प्रदेश ....
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
🌹जब #रावण ने अपने दरबार में #अंगद को बैठने के लिए सम्माननीय आसन नही दिया , तो अंगद ने अपने पुंछ से रावण के #सिंहासन से ज्यादा ऊंचा आसन बना कर बैठ गए ...!!
... और .. अंतिम प्रसंग .. #रावण_अंगद के पांव को उठाने आता है ..
बाली पुत्र महा बलधाम..#पतितपावन #सीताराम..
रावण पाँव हटाने आया ...अंगद ने फिर पांव उठाया..
क्षमा करें तुझको #श्रीराम ..पतितपावन सीताराम ..
फ़ोटो - चिन्तला वेंकटरमण स्वामी मंदिर , आंध्र प्रदेश ....
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*🟠●अद्भुत ●ঔৣ● अकल्पनीय●🟠*
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🌹अविश्वसनीय किंतु सत्य
ये #गर्भस्थ_शिशु की प्रस्तर प्रतिमा #कुंददम_वादककुनाथ_स्वामी_मन्दिर की दीवारों पर उकीर्ण हैं।
कल्पना करें X-RAY की खोज से हजार साल पहले ये जानकारी उस समय के लोगों को कैसे मिली होगी??
उत्तर है - दिव्यदृष्टि!!
मन्दिर की दूसरी दीवारों पर भी गर्भस्थ शिशु के हर महीने की स्थिति की प्रतिमा उकेरी हुई है।
#सनातन_धर्म संसार का सबसे प्राचीन पहला और आखरी वैज्ञानिक धर्म है।
सनातन ने ही विश्व को विज्ञान दिया।
दृष्टि दी।
जीवन जीने की कला दी।
सहित्य दिया, संस्कृति दी।
विज्ञान दिया, विमान शास्त्र दिया।
चिकित्सा शास्त्र दिया।
अर्थ शास्त्र दिया।
व्याकरण दिया।
दर्शनशास्त्र दिया।
सनातन धर्म करोड़ों वर्षों से वैज्ञानिक अनुसंधान करता आया है।
हमारे ऋषि मुनियों (विज्ञानियों) ने विज्ञान की नींव रखे हैं।
सनातन ऋषियों (विज्ञानियों) ने अपनी हड्डिया गलाकर विश्व को विज्ञान ओर अनुसंधान के दर्शन कराए हैं।
सम्पूर्ण विश्व कभी सनातन के ऋषी मुनियों (विज्ञानियों) के ऋण से उऋण नहीं हो पाएँगे।
इतना दिया है विश्व को हमारे सनातनी पूर्वजों ने।
कुंददम कोयम्बटूर से करीब ८० किलोमीटर की दूरी पर है।
महादेव 🙏🔱🚩🔱 साभार🙏🚩
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
इमेज👆🏻👇🏻
🌹अविश्वसनीय किंतु सत्य
ये #गर्भस्थ_शिशु की प्रस्तर प्रतिमा #कुंददम_वादककुनाथ_स्वामी_मन्दिर की दीवारों पर उकीर्ण हैं।
कल्पना करें X-RAY की खोज से हजार साल पहले ये जानकारी उस समय के लोगों को कैसे मिली होगी??
उत्तर है - दिव्यदृष्टि!!
मन्दिर की दूसरी दीवारों पर भी गर्भस्थ शिशु के हर महीने की स्थिति की प्रतिमा उकेरी हुई है।
#सनातन_धर्म संसार का सबसे प्राचीन पहला और आखरी वैज्ञानिक धर्म है।
सनातन ने ही विश्व को विज्ञान दिया।
दृष्टि दी।
जीवन जीने की कला दी।
सहित्य दिया, संस्कृति दी।
विज्ञान दिया, विमान शास्त्र दिया।
चिकित्सा शास्त्र दिया।
अर्थ शास्त्र दिया।
व्याकरण दिया।
दर्शनशास्त्र दिया।
सनातन धर्म करोड़ों वर्षों से वैज्ञानिक अनुसंधान करता आया है।
हमारे ऋषि मुनियों (विज्ञानियों) ने विज्ञान की नींव रखे हैं।
सनातन ऋषियों (विज्ञानियों) ने अपनी हड्डिया गलाकर विश्व को विज्ञान ओर अनुसंधान के दर्शन कराए हैं।
सम्पूर्ण विश्व कभी सनातन के ऋषी मुनियों (विज्ञानियों) के ऋण से उऋण नहीं हो पाएँगे।
इतना दिया है विश्व को हमारे सनातनी पूर्वजों ने।
कुंददम कोयम्बटूर से करीब ८० किलोमीटर की दूरी पर है।
महादेव 🙏🔱🚩🔱 साभार🙏🚩
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*🟠●अद्भुत ●ঔৣ● अकल्पनीय●🟠*
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🌹जो असीमित और अनंत है...
वही सनातन धर्म है।
आकाश की तरह सीमाहीन, सनातन धर्म कोई सीमा नहीं जानता है।
श्री शक्ति मंदिर, बुकिट रोटन,
मलेशिया में हिंदू वास्तुशिल्प उत्कृष्टता का अद्वितीय नमूना।
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
🌹जो असीमित और अनंत है...
वही सनातन धर्म है।
आकाश की तरह सीमाहीन, सनातन धर्म कोई सीमा नहीं जानता है।
श्री शक्ति मंदिर, बुकिट रोटन,
मलेशिया में हिंदू वास्तुशिल्प उत्कृष्टता का अद्वितीय नमूना।
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
*🟠●अद्भुत ●ঔৣ● अकल्पनीय●🟠*
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🌹पवित्र धार्मिक ग्रंथ रामायण में वर्णित पक्षीराज जटायु की प्रतिछवि, जो विश्व में किसी पक्षी की सबसे बड़ी प्रतिछवि है.
पुराणों के अनुसार केरल राज्य में स्थित यह वही स्थान है , जहां पक्षीराज जटायु ने देवी सीता को मुक्त कराने के लिए लंकाधिपति रावण से युद्ध किया था.
पक्षीराज जटायु देवी सीता को मुक्त नहीं करा सके थे, किन्तु उन्होंने एक अबला की रक्षार्थ अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया था.
वस्तुत: उक्त पौराणिक आख्यान हमारे देश के महाकाव्य काल का अनुकरणीय प्रसंग है ।
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
🌹पवित्र धार्मिक ग्रंथ रामायण में वर्णित पक्षीराज जटायु की प्रतिछवि, जो विश्व में किसी पक्षी की सबसे बड़ी प्रतिछवि है.
पुराणों के अनुसार केरल राज्य में स्थित यह वही स्थान है , जहां पक्षीराज जटायु ने देवी सीता को मुक्त कराने के लिए लंकाधिपति रावण से युद्ध किया था.
पक्षीराज जटायु देवी सीता को मुक्त नहीं करा सके थे, किन्तु उन्होंने एक अबला की रक्षार्थ अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया था.
वस्तुत: उक्त पौराणिक आख्यान हमारे देश के महाकाव्य काल का अनुकरणीय प्रसंग है ।
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
🔸विष्णु पुराण के अनुसार भगवान विष्णु ने पृथ्वी मां को बचाने के लिए वाराह अवतार लिया था,तथा समुद्र में डूबी हुई धरती को जल से बाहर निकाल कर पुनः स्थापित किया
था 🌍 ,,,,
🔸मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में स्थित उदयगिरि की गुफाओं में उस घटना को करीब चौथी शताब्दी में पाषाण पर वर्णित किया गया था,,,
*यदा यदा ही धर्मस्य,ग्लानिर्भवति भारत,,,अभ्युत्थानम् धर्मस्य, तदात्मनं सृजाम्यहम्*
🔸अर्थ हे जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-
तब मैं प्रकट होता हूँ,,,
था 🌍 ,,,,
🔸मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में स्थित उदयगिरि की गुफाओं में उस घटना को करीब चौथी शताब्दी में पाषाण पर वर्णित किया गया था,,,
*यदा यदा ही धर्मस्य,ग्लानिर्भवति भारत,,,अभ्युत्थानम् धर्मस्य, तदात्मनं सृजाम्यहम्*
🔸अर्थ हे जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-
तब मैं प्रकट होता हूँ,,,
ये टेलीग्राम के चैनल मे 84 महादेव (उज्जैन) की कथा का प्रसारण किया गया है।
https://t.me/joinchat/AAAAAEnyiQebQ-9vQSrlwQ
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84 महादेव कथाएं 84 दिन
इस चैनल मे 84 महादेव (उज्जैन) की कथा का प्रसारण किया जा रहा है
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Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
आंध्रप्रदेश के पिठापुर मे श्री गुरुदेव दत्त भगवान के चरण पादुका को जिस थाली से जलाभिषे क किया जाता है उस थाली में एक भी छेद नही
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Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
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Video from जैकी मनवानी
सोलन में हैं एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर, बनने में लगे थे 39 साल
देवभूमि हिमाचल में भगवान शिव के बहुत सारे मंदिर हैं। सबका अपना-अपना महत्व है। वहीं हिमाचल के सोलन में जटोली शिव मंदिर स्थित है। यह एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है। दक्षिण-द्रविड़ शैली में बने इस मंदिर को बनने में करीब 39 साल का समय लगा। जटोली शिव मंदिर सोलन से करीब सात किलोमीटर दूर है।
माना जाता है कि पौराणिक समय में भोलेनाथ यहां आकर कुछ समय के लिए रुके थे। बाद में एक सिद्ध बाबा स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने यहां आकर तपस्या की। उनके मार्गदर्शन और दिशा-निर्देश पर ही जटोली शिव मंदिर का निर्माण शुरू हुआ। मंदिर के कोने में स्वामी कृष्णानंद की गुफा भी है। यहां पर शिवलिंग स्थापित किया गया है। मंदिर परिसर में दाईं अोर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित है। इसके 200 मीटर की दूरी पर शिवलिंग है। मंदिर का गुंबद 111 फीट ऊंचा है जिसके कारण ये एशिया का सबसे ऊंचा मंदिर है।
मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने यहां एक रात के लिए विश्राम किया था। कहा जाता है कि यहां के लोगों को पानी की समस्या से जुझना पड़ा था। जिस देखते हुए स्वामी कृष्णानंद परमहंस जी ने भगवान शिव की घोर तपस्या की अौर त्रिशूल के प्रहार से जमीन में से पानी निकाला। तब से लेकर आज तक जटोली में पानी की समस्या नहीं है। लोग इस पानी को चमत्कारी मानते हैं। इनका मानना है कि इस जल में किसी भी बीमारी को ठीक करने के गुण हैं। यहां हर रविवार को भंडारा लगता है
देवभूमि हिमाचल में भगवान शिव के बहुत सारे मंदिर हैं। सबका अपना-अपना महत्व है। वहीं हिमाचल के सोलन में जटोली शिव मंदिर स्थित है। यह एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है। दक्षिण-द्रविड़ शैली में बने इस मंदिर को बनने में करीब 39 साल का समय लगा। जटोली शिव मंदिर सोलन से करीब सात किलोमीटर दूर है।
माना जाता है कि पौराणिक समय में भोलेनाथ यहां आकर कुछ समय के लिए रुके थे। बाद में एक सिद्ध बाबा स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने यहां आकर तपस्या की। उनके मार्गदर्शन और दिशा-निर्देश पर ही जटोली शिव मंदिर का निर्माण शुरू हुआ। मंदिर के कोने में स्वामी कृष्णानंद की गुफा भी है। यहां पर शिवलिंग स्थापित किया गया है। मंदिर परिसर में दाईं अोर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित है। इसके 200 मीटर की दूरी पर शिवलिंग है। मंदिर का गुंबद 111 फीट ऊंचा है जिसके कारण ये एशिया का सबसे ऊंचा मंदिर है।
मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने यहां एक रात के लिए विश्राम किया था। कहा जाता है कि यहां के लोगों को पानी की समस्या से जुझना पड़ा था। जिस देखते हुए स्वामी कृष्णानंद परमहंस जी ने भगवान शिव की घोर तपस्या की अौर त्रिशूल के प्रहार से जमीन में से पानी निकाला। तब से लेकर आज तक जटोली में पानी की समस्या नहीं है। लोग इस पानी को चमत्कारी मानते हैं। इनका मानना है कि इस जल में किसी भी बीमारी को ठीक करने के गुण हैं। यहां हर रविवार को भंडारा लगता है
#चौंसठ_योगिनी_मंदिर ।।
चौसठ योगिनी मंदिर या चौंसठ योगिनियां प्रायः आदिशक्ति मां काली का अवतार या अंश होती है। घोर नामक दैत्य के साथ युद्ध करते हुए माता ने उक्त चौंसठ चौंसठ अवतार लिए थे । यह भी माना जाता है कि ये सभी माता पर्वती की सखियां हैं। इन चौंसठ देवियों में से दस महाविद्याएं और सिद्ध विद्याओं की भी गणना की जाती है। ये सभी प्रायः आद्य शक्ति काली के ही भिन्न-भिन्न अवतारी अंश हैं। कुछ लोग कहते हैं कि समस्त योगिनियों का संबंध मुख्यतः काली कुल से हैं और ये सभी तंत्र तथा योग विद्या से घनिष्ठ सम्बन्ध रखती हैं। भारत में आठ या 9 प्रमुख चौसठ-योगिनी मंदिर का उल्लेख मिलता है । इसमें केवल पांच के लिखित साक्ष्य उपलब्ध होते हैं-दो ओडिशा में तथा तीन मध्य प्रदेश में। समस्त योगिनियां अलौकिक शक्तिओं से सम्पन्न हैं तथा इंद्रजाल, जादू, वशीकरण, मारण, स्तंभन इत्यादि कर्म इन्हीं की कृपा द्वारा ही सफल हो पाते हैं। प्रमुख रूप से आठ योगिनियों के नाम इस प्रकार हैं:- 1.सुर-सुंदरी योगिनी, 2.मनोहरा योगिनी, 3. कनकवती योगिनी, 4.कामेश्वरी योगिनी, 5. रति सुंदरी योगिनी, 6. पद्मिनी योगिनी, 7. नतिनी योगिनी और 8. मधुमती योगिनी।
चौंसठ योगिनियों के नाम :-
1.बहुरूप, 3.तारा, 3.नर्मदा, 4.यमुना, 5.शांति, 6.वारुणी 7.क्षेमंकरी, 8.ऐन्द्री, 9.वाराही, 10.रणवीरा, 11.वानर-मुखी, 12.वैष्णवी, 13.कालरात्रि, 14.वैद्यरूपा, 15.चर्चिका, 16.बेतली, 17.छिन्नमस्तिका, 18.वृषवाहन, 19.ज्वालाकामिनी, 20.घटवार, 21.कराकाली, 22.सरस्वती, 23.बिरूपा, 24.कौवेरी. 25.भलुका, 26.नारसिंही, 27.बिरजा,28.विकतांना, 29.महालक्ष्मी, 30.कौमारी, 31.महामाया, 32.रति, 33.करकरी, 34.सर्पश्या, 35.यक्षिणी, 36.विनायकी, 37.विंध्यवासिनी, 38. वीर कुमारी, 39. माहेश्वरी, 40.अम्बिका, 41.कामिनी, 42.घटाबरी, 43.स्तुती, 44.काली, 45.उमा, 46.नारायणी, 47.समुद्र, 48.ब्रह्मिनी, 49.ज्वाला मुखी, 50.आग्नेयी, 51.अदिति, 51.चन्द्रकान्ति, 53.वायुवेगा, 54.चामुण्डा, 55.मूरति, 56.गंगा, 57.धूमावती, 58.गांधार, 59.सर्व मंगला, 60.अजिता, 61.सूर्यपुत्री 62.वायु वीणा, 63.अघोर और 64. भद्रकाली।
🔸1. चौसठ योगिनी मंदिर, मुरैना:-
मध्य प्रदेश के मुरैना स्थित चौसठ योगिनी मंदिर का विशेष महत्व है। इस मंदिर को गुजरे ज़माने में तांत्रिक विश्वविद्यालय कहा जाता था। उस दौर में इस मंदिर में तांत्रिक अनुष्ठान करके तांत्रिक सिद्धियाँ हासिल करने के लिए तांत्रिकों का जमवाड़ लगा रहता था I
🔸2. चौंसठ योगिनी मंदिर, जबलपुर:-
चौंसठ योगिनी मंदिर जबलपुर, मध्य प्रदेश का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। यह मंदिर जबलपुर की ऐतिहासिक संपन्नता में एक और अध्याय जोड़ता है। प्रसिद्ध संगमरमर चट्टान के पास स्थित इस मंदिर में देवी दुर्गा की 64 अनुषंगिकों की प्रतिमा है।
🔸3. चौंसठ योगिनी मंदिर, खजुराहो:-
शिवसागर झील के दक्षिण पश्चिम में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर चंदेल कला की प्रथम कृति है। यह मंदिर भारत के सभी योगिनी मंदिरों में उत्तम है तथा यह निर्माण की दृष्टि से सबसे अधिक प्राचीन है।
🔸4. चौंसठ योगिनी मंदिर हीरापुर उडीसा :-
हीरापुर भुवनेश्वर से 20 किलोमीटर दूर एक छोटा सा गांव है। इसी गांव में भारत की सबसे छोटी योगिनी मंदिर 'चौसठ योगिनी' स्थित है।
🔸5.रानीपुर-
झरिया बलांनगिर उडीसा का चौंसठ योगिनी मन्दिर:-ईटों से निर्मित यह एतिहासिक मन्दिर उड़ीसा के बलांगिर जिले के तितिलागढ़ तहसील रानीपुर झरिया नामक जुड़वे गांव में स्थित है।
हर हर महादेव !!🚩🚩🚩
हमसे झूठ बोला गया की #संसद_भवन के वास्तुकार विदेशी थे ।
उन्होंने हमारे चौसठ योगिनी मंदिर से डिजाइन चुराया और हमारा ही संसद बनाकर नाम कमाया ।
यह मंदिर सूर्य के आधार पर ज्योतिष और गणित शिक्षा का स्थान था।
अब मेरा प्रश्न है - क्या हमने अपने इतिहास की किताबों में इसके बारे में पढ़ा है?
नहीं क्योकिं इससे वामपंथी इतिहासकारों के मित्र देशों की पोल खुल जाती ।
(चौसठ योगिनी मंदिर- मुरैना, मध्यप्रदेश)
#Divinetemplesofshiva
चौसठ योगिनी मंदिर या चौंसठ योगिनियां प्रायः आदिशक्ति मां काली का अवतार या अंश होती है। घोर नामक दैत्य के साथ युद्ध करते हुए माता ने उक्त चौंसठ चौंसठ अवतार लिए थे । यह भी माना जाता है कि ये सभी माता पर्वती की सखियां हैं। इन चौंसठ देवियों में से दस महाविद्याएं और सिद्ध विद्याओं की भी गणना की जाती है। ये सभी प्रायः आद्य शक्ति काली के ही भिन्न-भिन्न अवतारी अंश हैं। कुछ लोग कहते हैं कि समस्त योगिनियों का संबंध मुख्यतः काली कुल से हैं और ये सभी तंत्र तथा योग विद्या से घनिष्ठ सम्बन्ध रखती हैं। भारत में आठ या 9 प्रमुख चौसठ-योगिनी मंदिर का उल्लेख मिलता है । इसमें केवल पांच के लिखित साक्ष्य उपलब्ध होते हैं-दो ओडिशा में तथा तीन मध्य प्रदेश में। समस्त योगिनियां अलौकिक शक्तिओं से सम्पन्न हैं तथा इंद्रजाल, जादू, वशीकरण, मारण, स्तंभन इत्यादि कर्म इन्हीं की कृपा द्वारा ही सफल हो पाते हैं। प्रमुख रूप से आठ योगिनियों के नाम इस प्रकार हैं:- 1.सुर-सुंदरी योगिनी, 2.मनोहरा योगिनी, 3. कनकवती योगिनी, 4.कामेश्वरी योगिनी, 5. रति सुंदरी योगिनी, 6. पद्मिनी योगिनी, 7. नतिनी योगिनी और 8. मधुमती योगिनी।
चौंसठ योगिनियों के नाम :-
1.बहुरूप, 3.तारा, 3.नर्मदा, 4.यमुना, 5.शांति, 6.वारुणी 7.क्षेमंकरी, 8.ऐन्द्री, 9.वाराही, 10.रणवीरा, 11.वानर-मुखी, 12.वैष्णवी, 13.कालरात्रि, 14.वैद्यरूपा, 15.चर्चिका, 16.बेतली, 17.छिन्नमस्तिका, 18.वृषवाहन, 19.ज्वालाकामिनी, 20.घटवार, 21.कराकाली, 22.सरस्वती, 23.बिरूपा, 24.कौवेरी. 25.भलुका, 26.नारसिंही, 27.बिरजा,28.विकतांना, 29.महालक्ष्मी, 30.कौमारी, 31.महामाया, 32.रति, 33.करकरी, 34.सर्पश्या, 35.यक्षिणी, 36.विनायकी, 37.विंध्यवासिनी, 38. वीर कुमारी, 39. माहेश्वरी, 40.अम्बिका, 41.कामिनी, 42.घटाबरी, 43.स्तुती, 44.काली, 45.उमा, 46.नारायणी, 47.समुद्र, 48.ब्रह्मिनी, 49.ज्वाला मुखी, 50.आग्नेयी, 51.अदिति, 51.चन्द्रकान्ति, 53.वायुवेगा, 54.चामुण्डा, 55.मूरति, 56.गंगा, 57.धूमावती, 58.गांधार, 59.सर्व मंगला, 60.अजिता, 61.सूर्यपुत्री 62.वायु वीणा, 63.अघोर और 64. भद्रकाली।
🔸1. चौसठ योगिनी मंदिर, मुरैना:-
मध्य प्रदेश के मुरैना स्थित चौसठ योगिनी मंदिर का विशेष महत्व है। इस मंदिर को गुजरे ज़माने में तांत्रिक विश्वविद्यालय कहा जाता था। उस दौर में इस मंदिर में तांत्रिक अनुष्ठान करके तांत्रिक सिद्धियाँ हासिल करने के लिए तांत्रिकों का जमवाड़ लगा रहता था I
🔸2. चौंसठ योगिनी मंदिर, जबलपुर:-
चौंसठ योगिनी मंदिर जबलपुर, मध्य प्रदेश का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। यह मंदिर जबलपुर की ऐतिहासिक संपन्नता में एक और अध्याय जोड़ता है। प्रसिद्ध संगमरमर चट्टान के पास स्थित इस मंदिर में देवी दुर्गा की 64 अनुषंगिकों की प्रतिमा है।
🔸3. चौंसठ योगिनी मंदिर, खजुराहो:-
शिवसागर झील के दक्षिण पश्चिम में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर चंदेल कला की प्रथम कृति है। यह मंदिर भारत के सभी योगिनी मंदिरों में उत्तम है तथा यह निर्माण की दृष्टि से सबसे अधिक प्राचीन है।
🔸4. चौंसठ योगिनी मंदिर हीरापुर उडीसा :-
हीरापुर भुवनेश्वर से 20 किलोमीटर दूर एक छोटा सा गांव है। इसी गांव में भारत की सबसे छोटी योगिनी मंदिर 'चौसठ योगिनी' स्थित है।
🔸5.रानीपुर-
झरिया बलांनगिर उडीसा का चौंसठ योगिनी मन्दिर:-ईटों से निर्मित यह एतिहासिक मन्दिर उड़ीसा के बलांगिर जिले के तितिलागढ़ तहसील रानीपुर झरिया नामक जुड़वे गांव में स्थित है।
हर हर महादेव !!🚩🚩🚩
हमसे झूठ बोला गया की #संसद_भवन के वास्तुकार विदेशी थे ।
उन्होंने हमारे चौसठ योगिनी मंदिर से डिजाइन चुराया और हमारा ही संसद बनाकर नाम कमाया ।
यह मंदिर सूर्य के आधार पर ज्योतिष और गणित शिक्षा का स्थान था।
अब मेरा प्रश्न है - क्या हमने अपने इतिहास की किताबों में इसके बारे में पढ़ा है?
नहीं क्योकिं इससे वामपंथी इतिहासकारों के मित्र देशों की पोल खुल जाती ।
(चौसठ योगिनी मंदिर- मुरैना, मध्यप्रदेश)
#Divinetemplesofshiva