#सुचिन्द्रम_मंदिर_तमिलनाडु
भारत के वामपंथी इतिहासकार हमारे मंदिरो के पीछे की जिस टेक्नोलॉजी को समझ नहीं पाते उसे "छेनी-हथौड़ी" से निर्मित घोषित कर देते हैं । अब आप ही तय कीजिये क्या यह नक्काशी छेनी हथौड़ी से सम्भव है ?
क्या कोई इस मंदिर पर बनी देवताओं के मूर्तियों की संख्या गिन कर बता सकता है...... ? नहीं ना ?
यह केवल मंदिर का 25%हिस्सा है सोचिये मूर्तियों की जिन संख्याओं को हम गिन नहीं सकते उसे हमारे पूर्वजों ने सदियों पहले कैसे बनाया होगा। लेकीन सोची समझी साजिशो के तहत हमे हमारी सभ्यता भुलाने पर मजबुर किया गया है। आएये अपनी सभ्यता को जानते है और उसे पुनर्जीवित करते है।
🙏जय श्री राम 🙏
#हनुमान #ऐतिहासिकमंदिर #मंदिर #सिद्ध #मोदीजी #कृष्णा #शिव #नारायण #ब्रम्हा #राम #राधेगोविंद #सनातनधर्म #संस्कृति #आस्था #मन्दिरदर्शन #भारत #हनुमान #shiv #yatra #history #temples #mandir #modiji #radhe #krishna #ram #india #sanatan #sanatandharam
भारत के वामपंथी इतिहासकार हमारे मंदिरो के पीछे की जिस टेक्नोलॉजी को समझ नहीं पाते उसे "छेनी-हथौड़ी" से निर्मित घोषित कर देते हैं । अब आप ही तय कीजिये क्या यह नक्काशी छेनी हथौड़ी से सम्भव है ?
क्या कोई इस मंदिर पर बनी देवताओं के मूर्तियों की संख्या गिन कर बता सकता है...... ? नहीं ना ?
यह केवल मंदिर का 25%हिस्सा है सोचिये मूर्तियों की जिन संख्याओं को हम गिन नहीं सकते उसे हमारे पूर्वजों ने सदियों पहले कैसे बनाया होगा। लेकीन सोची समझी साजिशो के तहत हमे हमारी सभ्यता भुलाने पर मजबुर किया गया है। आएये अपनी सभ्यता को जानते है और उसे पुनर्जीवित करते है।
🙏जय श्री राम 🙏
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तेलंगाना में मां भद्रकाली का अभिषेक हल्दी से किया जाता है,,
उस समय माता रानी हल्दी गिरते ही अपनी आंखें बंद कर लेती हैं।।
वीडियो👆🏻👇🏻
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दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर
इस महीने खुलने जा रहा है। मंदिर की पहली मंजिल में फिनिशिंग का काम अपने अंतिम चरण में है। यह मंदिर 2022 तक बन कर पूरी तरह तैयार हो जाएगा। वैदिक नक्षत्र भवन वाले इस मंदिर का निर्माण एक लाख वर्ग फीट में किया गया है, जो पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के मायापुर में स्थित है। इस मंदिर में विश्व में कई चीजें पहली बार देखने को मिलेंगी। विश्वभर में लाइव प्रार्थना दिखाएगी। यह मंदिर अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी वाले आधुनिक समय के किसी महल से कम नहीं है, जहां सबसे बड़ा झूमर लगाया जा रहा है।
इस्कॉन या इंटरनैशनल सोसायटी ऑफ कृष्णा कॉन्शियसनैस का मुख्यालय मायापुर में है। इस मंदिर की कई विशेषताएं हैं, जो इसे अद्वितीय बनाती हैं। इसका निर्माण एक दशक पहले शुरू हुआ था और संरचना के निर्माण में दो करोड़ किलो से अधिक सीमैंट का इस्तेमाल हो चुका है। इसमें हर मंजिल का फ्लोर एक लाख वर्ग फुट का होगा, जो इसे और भी खूबसूरत बनाता है और साथ ही मंदिर में सबसे बड़ा गुंबद बना है।
वैदिक ज्ञान पर आधारित एक वैज्ञानिक और आधिकारिक प्रस्तुति के माध्यम से दुनिया भर में वैदिक संस्कृति और ज्ञान का प्रसार करने के इरादे से इस मंदिर को बनाया गया है। 380 फीट ऊंचे मंदिर में विशेष ब्लू बोलिवियन संगमरमर का उपयोग किया गया है, जो मंदिर में पश्चिमी वास्तुकला के प्रभाव को दिखाता है।
मंदिर के प्रबंध निदेशक सदबुझा दास ने कहा कि यह मंदिर पूर्व और पश्चिम का मिश्रण है। संगमरमर वियतनाम से आयात किया गया है। हमने भारत से भी संगमरमर खरीदा है। मंदिर अद्वितीय है क्योंकि इसमें पुजारी मंजिल 2.5 एकड़ में फैली है और मंदिर का फर्श 60 मीटर व्यास का है। देवताओं का घर भी अनोखा है। हम 20 मीटर लंबे वैदिक झूमर का निर्माण कर रहे हैं।
मंदिर इतना विशाल है कि इसकी एक मंजिल में एक बार में 10,000 से अधिक श्रद्धालु बैठ कर भगवान श्री कृष्ण के सामने प्रार्थना कर सकते हैं, गा सकते हैं और नृत्य भी कर सकते हैं। मंदिर में संचार प्रमुख सुब्रतो दास ने कहा कि हमारे संस्थापक आचार्य प्रभुपाद कुछ ऐसा निर्माण करना चाहते थे, जो पूरे विश्व को मायापुर की ओर आकर्षित करे। मायापुर चैतन्य महाप्रभु की जन्मस्थली रहा था।
वह चाहते थे कि सभी लोग आएं। मंदिर के दरवाजे सभी समुदायों, सभी जातीय पृष्ठभूमि, सभी धार्मिक पृष्ठभूमि के लिए खुले रहेंगे। लोग यहां आ सकते हैं, जाप कर सकते हैं, प्रभु के सामने नृत्य कर सकते हैं और ‘संत कीर्तन आंदोलन’ का हिस्सा बन सकते हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, मायापुर में हर साल लगभग 70 लाख लोग आते हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मायापुर को हैरिटेज सिटी घोषित किया था।
हैरिटेज सिटी मायापुर
2022 तक बन कर पूरी तरह तैयार होगा वैदिक नक्षत्र भवन
10,000 श्रद्धालु एक साथ कर सकेंगे प्रार्थना
20 मीटर लंबा होगा वैदिक झूमर
70 लाख लोग हर साल आते हैं मायापुर
पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के मायापुर में स्थित है मंदिर हरेक मंजिल का फ्लोर एक लाख वर्ग फीट में होगा।
हरे कृष्ण
#हनुमान #ऐतिहासिकमंदिर #मंदिर #सिद्ध #मोदीजी #कृष्णा #शिव #नारायण #ब्रम्हा #राम #राधेगोविंद #सनातनधर्म #संस्कृति #आस्था #मन्दिरदर्शन #भारत #हनुमान #shiv #yatra #history #temples #mandir #modiji #radhe #krishna #ram #india #sanatan #sanatandharam
इस महीने खुलने जा रहा है। मंदिर की पहली मंजिल में फिनिशिंग का काम अपने अंतिम चरण में है। यह मंदिर 2022 तक बन कर पूरी तरह तैयार हो जाएगा। वैदिक नक्षत्र भवन वाले इस मंदिर का निर्माण एक लाख वर्ग फीट में किया गया है, जो पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के मायापुर में स्थित है। इस मंदिर में विश्व में कई चीजें पहली बार देखने को मिलेंगी। विश्वभर में लाइव प्रार्थना दिखाएगी। यह मंदिर अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी वाले आधुनिक समय के किसी महल से कम नहीं है, जहां सबसे बड़ा झूमर लगाया जा रहा है।
इस्कॉन या इंटरनैशनल सोसायटी ऑफ कृष्णा कॉन्शियसनैस का मुख्यालय मायापुर में है। इस मंदिर की कई विशेषताएं हैं, जो इसे अद्वितीय बनाती हैं। इसका निर्माण एक दशक पहले शुरू हुआ था और संरचना के निर्माण में दो करोड़ किलो से अधिक सीमैंट का इस्तेमाल हो चुका है। इसमें हर मंजिल का फ्लोर एक लाख वर्ग फुट का होगा, जो इसे और भी खूबसूरत बनाता है और साथ ही मंदिर में सबसे बड़ा गुंबद बना है।
वैदिक ज्ञान पर आधारित एक वैज्ञानिक और आधिकारिक प्रस्तुति के माध्यम से दुनिया भर में वैदिक संस्कृति और ज्ञान का प्रसार करने के इरादे से इस मंदिर को बनाया गया है। 380 फीट ऊंचे मंदिर में विशेष ब्लू बोलिवियन संगमरमर का उपयोग किया गया है, जो मंदिर में पश्चिमी वास्तुकला के प्रभाव को दिखाता है।
मंदिर के प्रबंध निदेशक सदबुझा दास ने कहा कि यह मंदिर पूर्व और पश्चिम का मिश्रण है। संगमरमर वियतनाम से आयात किया गया है। हमने भारत से भी संगमरमर खरीदा है। मंदिर अद्वितीय है क्योंकि इसमें पुजारी मंजिल 2.5 एकड़ में फैली है और मंदिर का फर्श 60 मीटर व्यास का है। देवताओं का घर भी अनोखा है। हम 20 मीटर लंबे वैदिक झूमर का निर्माण कर रहे हैं।
मंदिर इतना विशाल है कि इसकी एक मंजिल में एक बार में 10,000 से अधिक श्रद्धालु बैठ कर भगवान श्री कृष्ण के सामने प्रार्थना कर सकते हैं, गा सकते हैं और नृत्य भी कर सकते हैं। मंदिर में संचार प्रमुख सुब्रतो दास ने कहा कि हमारे संस्थापक आचार्य प्रभुपाद कुछ ऐसा निर्माण करना चाहते थे, जो पूरे विश्व को मायापुर की ओर आकर्षित करे। मायापुर चैतन्य महाप्रभु की जन्मस्थली रहा था।
वह चाहते थे कि सभी लोग आएं। मंदिर के दरवाजे सभी समुदायों, सभी जातीय पृष्ठभूमि, सभी धार्मिक पृष्ठभूमि के लिए खुले रहेंगे। लोग यहां आ सकते हैं, जाप कर सकते हैं, प्रभु के सामने नृत्य कर सकते हैं और ‘संत कीर्तन आंदोलन’ का हिस्सा बन सकते हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, मायापुर में हर साल लगभग 70 लाख लोग आते हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मायापुर को हैरिटेज सिटी घोषित किया था।
हैरिटेज सिटी मायापुर
2022 तक बन कर पूरी तरह तैयार होगा वैदिक नक्षत्र भवन
10,000 श्रद्धालु एक साथ कर सकेंगे प्रार्थना
20 मीटर लंबा होगा वैदिक झूमर
70 लाख लोग हर साल आते हैं मायापुर
पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के मायापुर में स्थित है मंदिर हरेक मंजिल का फ्लोर एक लाख वर्ग फीट में होगा।
हरे कृष्ण
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कुछ तो #साज़िशें रही होगी... वरना #भारत जैसे खूबसूरत देश मे #टूरिज्म मतलब #ताजमहल नही होता।
क्या कारण रहा है कि #दुनिया के किसी भी पन्ने पे भारत लिखा हो तो वहाँ सिर्फ क़ुतुब मीनार, लाल किला और ताजमहल की तस्वीर #छापी गयी??
#सोचना जरूर...!!
भारत मे #मुगलों के #आक्रमण के बाद भी हमारे देश मे बहुत खूबसूरत #नक्काशी के #मंदिर मौजूद है।
उनमें से एक है #उदयपुर में #जगदीश_मंदिर.... इसकी कारीगरी के सामने ताजमहल #पानी मांगता है।
कृपया अपनी धरोहरों का ज्यादा से ज्यादा प्रचार करें।
#हनुमान #ऐतिहासिकमंदिर #मंदिर #सिद्ध #मोदीजी #कृष्णा #शिव #नारायण #ब्रम्हा #राम #राधेगोविंद #सनातनधर्म #संस्कृति #आस्था #मन्दिरदर्शन #भारत #हनुमान #shiv #yatra #history #temples #mandir #modiji #radhe #krishna #ram #india #sanatan #sanatandharam
क्या कारण रहा है कि #दुनिया के किसी भी पन्ने पे भारत लिखा हो तो वहाँ सिर्फ क़ुतुब मीनार, लाल किला और ताजमहल की तस्वीर #छापी गयी??
#सोचना जरूर...!!
भारत मे #मुगलों के #आक्रमण के बाद भी हमारे देश मे बहुत खूबसूरत #नक्काशी के #मंदिर मौजूद है।
उनमें से एक है #उदयपुर में #जगदीश_मंदिर.... इसकी कारीगरी के सामने ताजमहल #पानी मांगता है।
कृपया अपनी धरोहरों का ज्यादा से ज्यादा प्रचार करें।
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संरक्षित शरीर भारत मे।
पूरी दुनिया के लोग मिस्र की राजाओं के मृत शरीर (ममी) और भारत में रंगनाथस्वामी मंदिर में १००० साल के संरक्षित शरीर को देख हैरान हैं. बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि मिस्र के राजाओं के मृत शरीर, जिस वस्त्र में लपेटे जाते थे। मसलिन भारतवर्ष से ही आयातित थे। तमिलनाडु कज जिला तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम स्थित "श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर”, जिसे भारत के सबसे बड़े मंदिर-परिसर का गौरव प्राप्त है, में विशिष्टाद्वैतदर्शन के महान आचार्य और श्रीवैष्णव परंपरा के अग्रणी संत स्वामी रामानुजाचार्य (1017-1137) का पद्मासनस्थ भौतिक शरीर विगत 878 सालों से संरक्षित रखा जा रहा है और यहां देखा जा सकता है।
श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर के पांचवें परिक्रमा-पथ पर स्थित “श्री रामानुज मंदिर” के दक्षिण-पश्चिम कोने पर यह भौतिक शरीर संरक्षित है। रामानुजाचार्य 120 वर्ष तक जीवित रहे थे। 1137 में उन्होंने पद्मासन अवस्था में ही समाधि ले ली थी। स्वयं श्रीरंगनाथस्वामी के आदेश से उसी अवस्था में रामानुजाचार्य के शिष्यों ने उनके भौतिक शरीर को संरक्षित रख लिया। इस संरक्षित शरीर में आँखें, नाखून आदि स्पष्ट दिखाई देते हैं। सड़न से बचाने के लिए इस शरीर पर रोजाना किसी प्रकार का अभिषेक नहीं किया जाता। वर्ष में दो बार जड़ी-बूटियों से इस शरीर को साफ किया जाता है और उस समय भौतिक शरीर पर चंदन और केसर का आलेपन किया जाता है। उल्लेखनीय बात है की इस पवित्र स्थान का गोवा या मिस्र जैसा कोई प्रचार नहीं किया जाता। रामानुजाचार्य द्वारा इस्तेमाल एक बॉक्स अभी भी मंदिर के अंदर देखा जा सकता है।
#हनुमान #ऐतिहासिकमंदिर #मंदिर #सिद्ध #मोदीजी #कृष्णा #शिव #नारायण #ब्रम्हा #राम #राधेगोविंद #सनातनधर्म #संस्कृति #आस्था #मन्दिरदर्शन #भारत #हनुमान #shiv #yatra #history #temples #mandir #modiji #radhe #krishna #ram #india #sanatan #sanatandharam
पूरी दुनिया के लोग मिस्र की राजाओं के मृत शरीर (ममी) और भारत में रंगनाथस्वामी मंदिर में १००० साल के संरक्षित शरीर को देख हैरान हैं. बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि मिस्र के राजाओं के मृत शरीर, जिस वस्त्र में लपेटे जाते थे। मसलिन भारतवर्ष से ही आयातित थे। तमिलनाडु कज जिला तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम स्थित "श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर”, जिसे भारत के सबसे बड़े मंदिर-परिसर का गौरव प्राप्त है, में विशिष्टाद्वैतदर्शन के महान आचार्य और श्रीवैष्णव परंपरा के अग्रणी संत स्वामी रामानुजाचार्य (1017-1137) का पद्मासनस्थ भौतिक शरीर विगत 878 सालों से संरक्षित रखा जा रहा है और यहां देखा जा सकता है।
श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर के पांचवें परिक्रमा-पथ पर स्थित “श्री रामानुज मंदिर” के दक्षिण-पश्चिम कोने पर यह भौतिक शरीर संरक्षित है। रामानुजाचार्य 120 वर्ष तक जीवित रहे थे। 1137 में उन्होंने पद्मासन अवस्था में ही समाधि ले ली थी। स्वयं श्रीरंगनाथस्वामी के आदेश से उसी अवस्था में रामानुजाचार्य के शिष्यों ने उनके भौतिक शरीर को संरक्षित रख लिया। इस संरक्षित शरीर में आँखें, नाखून आदि स्पष्ट दिखाई देते हैं। सड़न से बचाने के लिए इस शरीर पर रोजाना किसी प्रकार का अभिषेक नहीं किया जाता। वर्ष में दो बार जड़ी-बूटियों से इस शरीर को साफ किया जाता है और उस समय भौतिक शरीर पर चंदन और केसर का आलेपन किया जाता है। उल्लेखनीय बात है की इस पवित्र स्थान का गोवा या मिस्र जैसा कोई प्रचार नहीं किया जाता। रामानुजाचार्य द्वारा इस्तेमाल एक बॉक्स अभी भी मंदिर के अंदर देखा जा सकता है।
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Forwarded from ऐतिहासिक मंदिर और उनकी कथा
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जो लोग रामायण और महाभारत में वर्णित अद्भुद शश्त्र विध्याओं के वर्णन को कपोल कल्पना कहते हैं वो इस वीडियो को अवश्य देखें !!!
और फिर सोचें -- श्रीराम, लक्ष्मण, मेघनाद, रावण, अर्जुन, कर्ण, आचार्य द्रोण, कृप, भीष्म इत्यादी कैसे धनुर्धर रहे होंगें 😐😐😐
और फिर सोचें -- श्रीराम, लक्ष्मण, मेघनाद, रावण, अर्जुन, कर्ण, आचार्य द्रोण, कृप, भीष्म इत्यादी कैसे धनुर्धर रहे होंगें 😐😐😐
Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
*महादेव के मंदिर का नवनिर्माण।
वीडियो👇🏻👆🏻*
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Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
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Video from हरे कृष्ण 🙏🏻
युद्धग्रस्त अज़रबैजान देश मे मां भवानी की शक्तिपीठ में आज भी 3000 वर्षों से इस मंदिर में जल रही है माँ भवानी की अखंड ज्वाला ।
सोवियत रूस के पूर्व देश अर्मेनिया और मुस्लिम देश अजरबेजान वर्तमान में युद्धग्रस्त है। इसी अज़रबैजान की ईरान सीमा के निकट हम हिन्दुओं का एक माँ भवानी की शक्तिपीठ है।
इस शक्तिपीठ में अखंड ज्वाला आज से 3 हजार साल से यू हीं जल रही है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, ऐसा उस देश का विज्ञान और वैज्ञानिक कह रहे हैं जिसकी 90% आबादी मुस्लिम है यानी अजरबेजान।
1860 तक यहाँ हिन्दू और फ़ारसी इस मंदिर में पूजा किया करते थे। आज यह मंदिर खण्डर है, पर इसकी ज्वाला आज भी जल रही है। जिसे मिटाने की या बुझाने, नष्ट करने की कोशिश कई सालों से की गई पर ज्वाला को कोई बुझा नहीं सका ।
मंदिर के खंडहरों के शिलालेखों पर आज भी श्री गणेश भगवान, शिव, माता पार्वती के चित्र हैं और संस्कृत में श्लोक लिखे हुये कोई भी जाकर देख सकता है।
1998 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया और 2007 में अजरबेजान सरकार ने इसे राष्टीय धरोहर घोषित किया।
#हनुमान #ऐतिहासिकमंदिर #मंदिर #सिद्ध #मोदीजी #कृष्णा #शिव #नारायण #ब्रम्हा #राम #राधेगोविंद #सनातनधर्म #संस्कृति #आस्था #मन्दिरदर्शन #भारत #हनुमान #shiv #yatra #history #temples #mandir #modiji #radhe #krishna #ram #india #sanatan #sanatandharam
सोवियत रूस के पूर्व देश अर्मेनिया और मुस्लिम देश अजरबेजान वर्तमान में युद्धग्रस्त है। इसी अज़रबैजान की ईरान सीमा के निकट हम हिन्दुओं का एक माँ भवानी की शक्तिपीठ है।
इस शक्तिपीठ में अखंड ज्वाला आज से 3 हजार साल से यू हीं जल रही है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, ऐसा उस देश का विज्ञान और वैज्ञानिक कह रहे हैं जिसकी 90% आबादी मुस्लिम है यानी अजरबेजान।
1860 तक यहाँ हिन्दू और फ़ारसी इस मंदिर में पूजा किया करते थे। आज यह मंदिर खण्डर है, पर इसकी ज्वाला आज भी जल रही है। जिसे मिटाने की या बुझाने, नष्ट करने की कोशिश कई सालों से की गई पर ज्वाला को कोई बुझा नहीं सका ।
मंदिर के खंडहरों के शिलालेखों पर आज भी श्री गणेश भगवान, शिव, माता पार्वती के चित्र हैं और संस्कृत में श्लोक लिखे हुये कोई भी जाकर देख सकता है।
1998 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया और 2007 में अजरबेजान सरकार ने इसे राष्टीय धरोहर घोषित किया।
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Forwarded from सिंधी सभ्यता गाने और वीडियो मैसेज (Hitendra D. Nagpal)
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*तमिलनाडु के तंजावूर का राजराजेश्वर मंदिर अपने आप में एक आश्चर्य..*
*टेम्पल कॉम्प्लेक्स इतना बड़ा है कि इसमें 200 ताजमहल समा सकते है 🤔*
🙏🙏🙏
*टेम्पल कॉम्प्लेक्स इतना बड़ा है कि इसमें 200 ताजमहल समा सकते है 🤔*
🙏🙏🙏
आप विश्वास न करे पर यह बरगद का पेड़ है मान्यता है 5000 साल से आज तक ऐसा ही है इस पेड़ पर सिर्फ तीन पत्ते आते हैं जबकि बरगद का पेड़ बहुत विशाल होता है इस पेड़ का तना आज तक 1 इंच से ज्यादा नहीं हुआ और तीन पत्ते के अलावा चौथा पत्ता नहीं आया और यह तीन पत्ते ब्रह्मा विष्णु महेश के संकेत है।
यह पेड सूरत के पास तापी नदी पर स्थित है यह महाभारत के योद्धा अंगराज कर्ण की समाधि है।अब आप सोच रहे होंगे कि युद्ध तो कुरुक्षेत्र हरियाणा में हुआ था तो कर्ण को समाधि सूरत में क्यों दी गई।इसके पीछे कर्ण द्वारा मांगा गया वह वरदान था जिसे भगवान कृष्ण ने पूरा किया जब कर्ण ने कवच और कुंडल इंद्र को दान किए थे तब इंद्र से एक शक्ति बाण और एक वरदान मांगा था कि मैं अधर्म का साथ दे रहा हूं इसलिए मेरी मृत्यु निश्चित है परंतु मेरा अंतिम संस्कार कुंवारी जमीन पर किया जाए अर्थात जहां पहले किसी का अंतिम संस्कार ना किया गया हो।
युद्ध में अर्जुन के हाथों जब
कर्ण का वध हुआ. तो कृष्ण ने पांचों पांडवों को बताया कि ये तुम्हारे बड़े भाई है इनकी अंतिम इच्छा थी कि इनका अंतिम संस्कार कुंवारी जमीन पर किया जाए और मेरी दृष्टि में इस पृथ्वी पर सिर्फ एक ही जगह ही तापी नदी के पास नजर आ रही है तब इंद्र ने अपना रथ भेजा और कृष्ण पांचो पांडव और कर्ण के शरीर को आकाश मार्ग से तापी नदी के पास लाए यहां भगवान कृष्ण ने उस ऐक इंच जमीन पर अपना अमुक बांण छोड़ा बांण के ऊपर कर्ण का अंतिम संस्कार हुआ।
कृष्ण ने कहा था कि युगो युगांतर तक इस जगह ऐक बरगद का पेड़ रहेगा जिस पर मात्र तीन पत्ते ही आएगें तब से आज तक इस बरगद के पेड़ पर चौथा पत्ता नही आया और ना ये ऐक इंच से ज्यादा चोड़ा हुआ यहां कर्ण का मंदिर बना हुआ है यहां सभी की मनोकामनाएं पूरी हो जाती दानवीर कर्ण किसी को खाली हाथ नहीं जाने देते।
हर हर महादेव🔱🙏🏻
जय सनातन जय श्री राम🚩🏹🙏🏻
धर्मो⛳रक्षति🏹रक्षित:☝🏻
यह पेड सूरत के पास तापी नदी पर स्थित है यह महाभारत के योद्धा अंगराज कर्ण की समाधि है।अब आप सोच रहे होंगे कि युद्ध तो कुरुक्षेत्र हरियाणा में हुआ था तो कर्ण को समाधि सूरत में क्यों दी गई।इसके पीछे कर्ण द्वारा मांगा गया वह वरदान था जिसे भगवान कृष्ण ने पूरा किया जब कर्ण ने कवच और कुंडल इंद्र को दान किए थे तब इंद्र से एक शक्ति बाण और एक वरदान मांगा था कि मैं अधर्म का साथ दे रहा हूं इसलिए मेरी मृत्यु निश्चित है परंतु मेरा अंतिम संस्कार कुंवारी जमीन पर किया जाए अर्थात जहां पहले किसी का अंतिम संस्कार ना किया गया हो।
युद्ध में अर्जुन के हाथों जब
कर्ण का वध हुआ. तो कृष्ण ने पांचों पांडवों को बताया कि ये तुम्हारे बड़े भाई है इनकी अंतिम इच्छा थी कि इनका अंतिम संस्कार कुंवारी जमीन पर किया जाए और मेरी दृष्टि में इस पृथ्वी पर सिर्फ एक ही जगह ही तापी नदी के पास नजर आ रही है तब इंद्र ने अपना रथ भेजा और कृष्ण पांचो पांडव और कर्ण के शरीर को आकाश मार्ग से तापी नदी के पास लाए यहां भगवान कृष्ण ने उस ऐक इंच जमीन पर अपना अमुक बांण छोड़ा बांण के ऊपर कर्ण का अंतिम संस्कार हुआ।
कृष्ण ने कहा था कि युगो युगांतर तक इस जगह ऐक बरगद का पेड़ रहेगा जिस पर मात्र तीन पत्ते ही आएगें तब से आज तक इस बरगद के पेड़ पर चौथा पत्ता नही आया और ना ये ऐक इंच से ज्यादा चोड़ा हुआ यहां कर्ण का मंदिर बना हुआ है यहां सभी की मनोकामनाएं पूरी हो जाती दानवीर कर्ण किसी को खाली हाथ नहीं जाने देते।
हर हर महादेव🔱🙏🏻
जय सनातन जय श्री राम🚩🏹🙏🏻
धर्मो⛳रक्षति🏹रक्षित:☝🏻
*👆 ये बांध (Dam) तब बना था, जब दूसरा कोई धर्म पैदा भी नहीं हुआ था।*
*भारतीय ज्ञान कौशल से बना यह बांध आज भी मजबूती से अपनी सेवा दे रहा है ।*
*हमे किसी से विज्ञान सीखने की जरूरत नहीं, हम से दुनिया सीखी है। 😊* Proud on our Religion 💪
*भारतीय ज्ञान कौशल से बना यह बांध आज भी मजबूती से अपनी सेवा दे रहा है ।*
*हमे किसी से विज्ञान सीखने की जरूरत नहीं, हम से दुनिया सीखी है। 😊* Proud on our Religion 💪