संरक्षित शरीर भारत मे।
पूरी दुनिया के लोग मिस्र की राजाओं के मृत शरीर (ममी) और भारत में रंगनाथस्वामी मंदिर में १००० साल के संरक्षित शरीर को देख हैरान हैं. बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि मिस्र के राजाओं के मृत शरीर, जिस वस्त्र में लपेटे जाते थे। मसलिन भारतवर्ष से ही आयातित थे। तमिलनाडु कज जिला तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम स्थित "श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर”, जिसे भारत के सबसे बड़े मंदिर-परिसर का गौरव प्राप्त है, में विशिष्टाद्वैतदर्शन के महान आचार्य और श्रीवैष्णव परंपरा के अग्रणी संत स्वामी रामानुजाचार्य (1017-1137) का पद्मासनस्थ भौतिक शरीर विगत 878 सालों से संरक्षित रखा जा रहा है और यहां देखा जा सकता है।
श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर के पांचवें परिक्रमा-पथ पर स्थित “श्री रामानुज मंदिर” के दक्षिण-पश्चिम कोने पर यह भौतिक शरीर संरक्षित है। रामानुजाचार्य 120 वर्ष तक जीवित रहे थे। 1137 में उन्होंने पद्मासन अवस्था में ही समाधि ले ली थी। स्वयं श्रीरंगनाथस्वामी के आदेश से उसी अवस्था में रामानुजाचार्य के शिष्यों ने उनके भौतिक शरीर को संरक्षित रख लिया। इस संरक्षित शरीर में आँखें, नाखून आदि स्पष्ट दिखाई देते हैं। सड़न से बचाने के लिए इस शरीर पर रोजाना किसी प्रकार का अभिषेक नहीं किया जाता। वर्ष में दो बार जड़ी-बूटियों से इस शरीर को साफ किया जाता है और उस समय भौतिक शरीर पर चंदन और केसर का आलेपन किया जाता है। उल्लेखनीय बात है की इस पवित्र स्थान का गोवा या मिस्र जैसा कोई प्रचार नहीं किया जाता। रामानुजाचार्य द्वारा इस्तेमाल एक बॉक्स अभी भी मंदिर के अंदर देखा जा सकता है।
#हनुमान #ऐतिहासिकमंदिर #मंदिर #सिद्ध #मोदीजी #कृष्णा #शिव #नारायण #ब्रम्हा #राम #राधेगोविंद #सनातनधर्म #संस्कृति #आस्था #मन्दिरदर्शन #भारत #हनुमान #shiv #yatra #history #temples #mandir #modiji #radhe #krishna #ram #india #sanatan #sanatandharam
पूरी दुनिया के लोग मिस्र की राजाओं के मृत शरीर (ममी) और भारत में रंगनाथस्वामी मंदिर में १००० साल के संरक्षित शरीर को देख हैरान हैं. बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि मिस्र के राजाओं के मृत शरीर, जिस वस्त्र में लपेटे जाते थे। मसलिन भारतवर्ष से ही आयातित थे। तमिलनाडु कज जिला तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम स्थित "श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर”, जिसे भारत के सबसे बड़े मंदिर-परिसर का गौरव प्राप्त है, में विशिष्टाद्वैतदर्शन के महान आचार्य और श्रीवैष्णव परंपरा के अग्रणी संत स्वामी रामानुजाचार्य (1017-1137) का पद्मासनस्थ भौतिक शरीर विगत 878 सालों से संरक्षित रखा जा रहा है और यहां देखा जा सकता है।
श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर के पांचवें परिक्रमा-पथ पर स्थित “श्री रामानुज मंदिर” के दक्षिण-पश्चिम कोने पर यह भौतिक शरीर संरक्षित है। रामानुजाचार्य 120 वर्ष तक जीवित रहे थे। 1137 में उन्होंने पद्मासन अवस्था में ही समाधि ले ली थी। स्वयं श्रीरंगनाथस्वामी के आदेश से उसी अवस्था में रामानुजाचार्य के शिष्यों ने उनके भौतिक शरीर को संरक्षित रख लिया। इस संरक्षित शरीर में आँखें, नाखून आदि स्पष्ट दिखाई देते हैं। सड़न से बचाने के लिए इस शरीर पर रोजाना किसी प्रकार का अभिषेक नहीं किया जाता। वर्ष में दो बार जड़ी-बूटियों से इस शरीर को साफ किया जाता है और उस समय भौतिक शरीर पर चंदन और केसर का आलेपन किया जाता है। उल्लेखनीय बात है की इस पवित्र स्थान का गोवा या मिस्र जैसा कोई प्रचार नहीं किया जाता। रामानुजाचार्य द्वारा इस्तेमाल एक बॉक्स अभी भी मंदिर के अंदर देखा जा सकता है।
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Forwarded from ऐतिहासिक मंदिर और उनकी कथा
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जो लोग रामायण और महाभारत में वर्णित अद्भुद शश्त्र विध्याओं के वर्णन को कपोल कल्पना कहते हैं वो इस वीडियो को अवश्य देखें !!!
और फिर सोचें -- श्रीराम, लक्ष्मण, मेघनाद, रावण, अर्जुन, कर्ण, आचार्य द्रोण, कृप, भीष्म इत्यादी कैसे धनुर्धर रहे होंगें 😐😐😐
और फिर सोचें -- श्रीराम, लक्ष्मण, मेघनाद, रावण, अर्जुन, कर्ण, आचार्य द्रोण, कृप, भीष्म इत्यादी कैसे धनुर्धर रहे होंगें 😐😐😐
Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
*महादेव के मंदिर का नवनिर्माण।
वीडियो👇🏻👆🏻*
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Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
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Video from हरे कृष्ण 🙏🏻
युद्धग्रस्त अज़रबैजान देश मे मां भवानी की शक्तिपीठ में आज भी 3000 वर्षों से इस मंदिर में जल रही है माँ भवानी की अखंड ज्वाला ।
सोवियत रूस के पूर्व देश अर्मेनिया और मुस्लिम देश अजरबेजान वर्तमान में युद्धग्रस्त है। इसी अज़रबैजान की ईरान सीमा के निकट हम हिन्दुओं का एक माँ भवानी की शक्तिपीठ है।
इस शक्तिपीठ में अखंड ज्वाला आज से 3 हजार साल से यू हीं जल रही है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, ऐसा उस देश का विज्ञान और वैज्ञानिक कह रहे हैं जिसकी 90% आबादी मुस्लिम है यानी अजरबेजान।
1860 तक यहाँ हिन्दू और फ़ारसी इस मंदिर में पूजा किया करते थे। आज यह मंदिर खण्डर है, पर इसकी ज्वाला आज भी जल रही है। जिसे मिटाने की या बुझाने, नष्ट करने की कोशिश कई सालों से की गई पर ज्वाला को कोई बुझा नहीं सका ।
मंदिर के खंडहरों के शिलालेखों पर आज भी श्री गणेश भगवान, शिव, माता पार्वती के चित्र हैं और संस्कृत में श्लोक लिखे हुये कोई भी जाकर देख सकता है।
1998 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया और 2007 में अजरबेजान सरकार ने इसे राष्टीय धरोहर घोषित किया।
#हनुमान #ऐतिहासिकमंदिर #मंदिर #सिद्ध #मोदीजी #कृष्णा #शिव #नारायण #ब्रम्हा #राम #राधेगोविंद #सनातनधर्म #संस्कृति #आस्था #मन्दिरदर्शन #भारत #हनुमान #shiv #yatra #history #temples #mandir #modiji #radhe #krishna #ram #india #sanatan #sanatandharam
सोवियत रूस के पूर्व देश अर्मेनिया और मुस्लिम देश अजरबेजान वर्तमान में युद्धग्रस्त है। इसी अज़रबैजान की ईरान सीमा के निकट हम हिन्दुओं का एक माँ भवानी की शक्तिपीठ है।
इस शक्तिपीठ में अखंड ज्वाला आज से 3 हजार साल से यू हीं जल रही है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, ऐसा उस देश का विज्ञान और वैज्ञानिक कह रहे हैं जिसकी 90% आबादी मुस्लिम है यानी अजरबेजान।
1860 तक यहाँ हिन्दू और फ़ारसी इस मंदिर में पूजा किया करते थे। आज यह मंदिर खण्डर है, पर इसकी ज्वाला आज भी जल रही है। जिसे मिटाने की या बुझाने, नष्ट करने की कोशिश कई सालों से की गई पर ज्वाला को कोई बुझा नहीं सका ।
मंदिर के खंडहरों के शिलालेखों पर आज भी श्री गणेश भगवान, शिव, माता पार्वती के चित्र हैं और संस्कृत में श्लोक लिखे हुये कोई भी जाकर देख सकता है।
1998 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया और 2007 में अजरबेजान सरकार ने इसे राष्टीय धरोहर घोषित किया।
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Forwarded from सिंधी सभ्यता गाने और वीडियो मैसेज (Hitendra D. Nagpal)
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*तमिलनाडु के तंजावूर का राजराजेश्वर मंदिर अपने आप में एक आश्चर्य..*
*टेम्पल कॉम्प्लेक्स इतना बड़ा है कि इसमें 200 ताजमहल समा सकते है 🤔*
🙏🙏🙏
*टेम्पल कॉम्प्लेक्स इतना बड़ा है कि इसमें 200 ताजमहल समा सकते है 🤔*
🙏🙏🙏
आप विश्वास न करे पर यह बरगद का पेड़ है मान्यता है 5000 साल से आज तक ऐसा ही है इस पेड़ पर सिर्फ तीन पत्ते आते हैं जबकि बरगद का पेड़ बहुत विशाल होता है इस पेड़ का तना आज तक 1 इंच से ज्यादा नहीं हुआ और तीन पत्ते के अलावा चौथा पत्ता नहीं आया और यह तीन पत्ते ब्रह्मा विष्णु महेश के संकेत है।
यह पेड सूरत के पास तापी नदी पर स्थित है यह महाभारत के योद्धा अंगराज कर्ण की समाधि है।अब आप सोच रहे होंगे कि युद्ध तो कुरुक्षेत्र हरियाणा में हुआ था तो कर्ण को समाधि सूरत में क्यों दी गई।इसके पीछे कर्ण द्वारा मांगा गया वह वरदान था जिसे भगवान कृष्ण ने पूरा किया जब कर्ण ने कवच और कुंडल इंद्र को दान किए थे तब इंद्र से एक शक्ति बाण और एक वरदान मांगा था कि मैं अधर्म का साथ दे रहा हूं इसलिए मेरी मृत्यु निश्चित है परंतु मेरा अंतिम संस्कार कुंवारी जमीन पर किया जाए अर्थात जहां पहले किसी का अंतिम संस्कार ना किया गया हो।
युद्ध में अर्जुन के हाथों जब
कर्ण का वध हुआ. तो कृष्ण ने पांचों पांडवों को बताया कि ये तुम्हारे बड़े भाई है इनकी अंतिम इच्छा थी कि इनका अंतिम संस्कार कुंवारी जमीन पर किया जाए और मेरी दृष्टि में इस पृथ्वी पर सिर्फ एक ही जगह ही तापी नदी के पास नजर आ रही है तब इंद्र ने अपना रथ भेजा और कृष्ण पांचो पांडव और कर्ण के शरीर को आकाश मार्ग से तापी नदी के पास लाए यहां भगवान कृष्ण ने उस ऐक इंच जमीन पर अपना अमुक बांण छोड़ा बांण के ऊपर कर्ण का अंतिम संस्कार हुआ।
कृष्ण ने कहा था कि युगो युगांतर तक इस जगह ऐक बरगद का पेड़ रहेगा जिस पर मात्र तीन पत्ते ही आएगें तब से आज तक इस बरगद के पेड़ पर चौथा पत्ता नही आया और ना ये ऐक इंच से ज्यादा चोड़ा हुआ यहां कर्ण का मंदिर बना हुआ है यहां सभी की मनोकामनाएं पूरी हो जाती दानवीर कर्ण किसी को खाली हाथ नहीं जाने देते।
हर हर महादेव🔱🙏🏻
जय सनातन जय श्री राम🚩🏹🙏🏻
धर्मो⛳रक्षति🏹रक्षित:☝🏻
यह पेड सूरत के पास तापी नदी पर स्थित है यह महाभारत के योद्धा अंगराज कर्ण की समाधि है।अब आप सोच रहे होंगे कि युद्ध तो कुरुक्षेत्र हरियाणा में हुआ था तो कर्ण को समाधि सूरत में क्यों दी गई।इसके पीछे कर्ण द्वारा मांगा गया वह वरदान था जिसे भगवान कृष्ण ने पूरा किया जब कर्ण ने कवच और कुंडल इंद्र को दान किए थे तब इंद्र से एक शक्ति बाण और एक वरदान मांगा था कि मैं अधर्म का साथ दे रहा हूं इसलिए मेरी मृत्यु निश्चित है परंतु मेरा अंतिम संस्कार कुंवारी जमीन पर किया जाए अर्थात जहां पहले किसी का अंतिम संस्कार ना किया गया हो।
युद्ध में अर्जुन के हाथों जब
कर्ण का वध हुआ. तो कृष्ण ने पांचों पांडवों को बताया कि ये तुम्हारे बड़े भाई है इनकी अंतिम इच्छा थी कि इनका अंतिम संस्कार कुंवारी जमीन पर किया जाए और मेरी दृष्टि में इस पृथ्वी पर सिर्फ एक ही जगह ही तापी नदी के पास नजर आ रही है तब इंद्र ने अपना रथ भेजा और कृष्ण पांचो पांडव और कर्ण के शरीर को आकाश मार्ग से तापी नदी के पास लाए यहां भगवान कृष्ण ने उस ऐक इंच जमीन पर अपना अमुक बांण छोड़ा बांण के ऊपर कर्ण का अंतिम संस्कार हुआ।
कृष्ण ने कहा था कि युगो युगांतर तक इस जगह ऐक बरगद का पेड़ रहेगा जिस पर मात्र तीन पत्ते ही आएगें तब से आज तक इस बरगद के पेड़ पर चौथा पत्ता नही आया और ना ये ऐक इंच से ज्यादा चोड़ा हुआ यहां कर्ण का मंदिर बना हुआ है यहां सभी की मनोकामनाएं पूरी हो जाती दानवीर कर्ण किसी को खाली हाथ नहीं जाने देते।
हर हर महादेव🔱🙏🏻
जय सनातन जय श्री राम🚩🏹🙏🏻
धर्मो⛳रक्षति🏹रक्षित:☝🏻
*👆 ये बांध (Dam) तब बना था, जब दूसरा कोई धर्म पैदा भी नहीं हुआ था।*
*भारतीय ज्ञान कौशल से बना यह बांध आज भी मजबूती से अपनी सेवा दे रहा है ।*
*हमे किसी से विज्ञान सीखने की जरूरत नहीं, हम से दुनिया सीखी है। 😊* Proud on our Religion 💪
*भारतीय ज्ञान कौशल से बना यह बांध आज भी मजबूती से अपनी सेवा दे रहा है ।*
*हमे किसी से विज्ञान सीखने की जरूरत नहीं, हम से दुनिया सीखी है। 😊* Proud on our Religion 💪
*श्री कृष्ण भगवान कौन है*
*विज्ञान की दृष्टि से समझे*
ये कार्तिकेय 2 फ़िल्म का वीडियो है
⏳⏳2.51👇🏻👆🏻
*वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनं | देवकी परमानन्दम कृष्णं वंदे जगदगुरुम*
*विज्ञान की दृष्टि से समझे*
ये कार्तिकेय 2 फ़िल्म का वीडियो है
⏳⏳2.51👇🏻👆🏻
*वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनं | देवकी परमानन्दम कृष्णं वंदे जगदगुरुम*
टॉर्च का आविष्कार :-
हमें हमेशा यह बताया गया कि टॉर्च का आविष्कार एक ब्रिटिश डेविड मिशेल ने 1899 में किया । यह तथ्य अब संदेह के घेरे में जाता दिख रहा है । वह इसलिए कि इसके 124 वर्ष पहले की कोटाशैली की 1775 ई. की हिंदुस्तान की एक पेंटिंग The Walters Art Museum Baltimore USA में रखी हुई मिली है, जिसमें एक शिकारी को हिरणों का शिकार करते हुए दिखाया गया है और एक स्त्री हिरणों पर टॉर्च पर प्रकाश फेंकते हुए शिकारी का मार्गदर्शन कर रही है।
हमारे धन संपत्ति के साथ इन विदेशियों ने हमारा ज्ञान-विज्ञान तकनीक आदि भी सब कुछ चुराया है।
और इससे भी अधिक प्राचीन प्रमाण वैदिक काल के मिस्र के इतिहास के है ।। दूसरी 5000-7000 वर्ष पूर्व हुई नक्काशी है, यह ठीक वैसी ही आकृति है, जो कभी बल्ब हुआ करती थी....!!
#हनुमान #ऐतिहासिकमंदिर #मंदिर #सिद्ध #मोदीजी #कृष्णा #शिव #नारायण #ब्रम्हा #राम #राधेगोविंद #सनातनधर्म #संस्कृति #आस्था #मन्दिरदर्शन #भारत #हनुमान #shiv #yatra #history #temples #mandir #modiji #radhe #krishna #ram #india #sanatan #sanatandharam
हमें हमेशा यह बताया गया कि टॉर्च का आविष्कार एक ब्रिटिश डेविड मिशेल ने 1899 में किया । यह तथ्य अब संदेह के घेरे में जाता दिख रहा है । वह इसलिए कि इसके 124 वर्ष पहले की कोटाशैली की 1775 ई. की हिंदुस्तान की एक पेंटिंग The Walters Art Museum Baltimore USA में रखी हुई मिली है, जिसमें एक शिकारी को हिरणों का शिकार करते हुए दिखाया गया है और एक स्त्री हिरणों पर टॉर्च पर प्रकाश फेंकते हुए शिकारी का मार्गदर्शन कर रही है।
हमारे धन संपत्ति के साथ इन विदेशियों ने हमारा ज्ञान-विज्ञान तकनीक आदि भी सब कुछ चुराया है।
और इससे भी अधिक प्राचीन प्रमाण वैदिक काल के मिस्र के इतिहास के है ।। दूसरी 5000-7000 वर्ष पूर्व हुई नक्काशी है, यह ठीक वैसी ही आकृति है, जो कभी बल्ब हुआ करती थी....!!
#हनुमान #ऐतिहासिकमंदिर #मंदिर #सिद्ध #मोदीजी #कृष्णा #शिव #नारायण #ब्रम्हा #राम #राधेगोविंद #सनातनधर्म #संस्कृति #आस्था #मन्दिरदर्शन #भारत #हनुमान #shiv #yatra #history #temples #mandir #modiji #radhe #krishna #ram #india #sanatan #sanatandharam
VID-20230526-WA0000.mp4
9 MB
*अद्भुत शिव मंदिर महाराष्ट्र में....जय गौरी( माँ सप्तशृंगी ) जय भोले...*
Forwarded from वैश्नव सेवन SANJAY DHINGRA संजय ढींगरा
जय गौर हरि
_मोहे आपने ही रंग मे रंग लै गोपाल सांवरे..._
🧭 3:46
स्वर: परम् वैश्नव अंजुना जी
_मोहे आपने ही रंग मे रंग लै गोपाल सांवरे..._
🧭 3:46
स्वर: परम् वैश्नव अंजुना जी
जो सिर्फ एफिल टावर का ही गुणगान करते हैं,,शायद उन्होंने इस मंदिर को नही देखा।
दर्शन कीजिये
245 फीट ऊंचा महान मुरूडेश्वर_मंदिर का जिक्र रामायण काल से है, इसकी प्राचीनता का कोई अनुमान नही की यह वास्तव में कितने वर्ष प्राचीन है, शायद हजारो वर्ष या इससे भी प्राचीन ....
यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है ....
मुरुदेश्वर (दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में उत्तर कन्नड जिले के भटकल तहसील स्थित एक कस्बा है। 'मुरुदेश्वर' भगवान शिव का एक नाम है। यहाँ भगवान शंकर की विश्व की दूसरी सबसे ऊँची मूर्ति स्थित है। यह कस्बा अरब सागर के तट पर स्थित है और मंगलुरु से १६५ किलोमीटर दूर अरब सागर के किनारे बहुत ही सुन्दर एवं शांत स्थान पर बना हुआ है। मुरुदेश्वर सागरतट, कर्णाटक के सब से सुन्दर तटों में से एक है। पर्यटकों के लिए यहाँ आना दोगुना लाभप्रद रहता है, जहां एक ओर इस धार्मिक स्थल के दर्शन होते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्राकृतिक सुन्दरता का आनन्द भी मिलता है।
मुरुदेश्वर मंगलुरु-मुम्बई रेलपथ पर स्थित एक रेलवे स्टेशन भी है।
मुरुदेश्वर मन्दिर परिसर के पीछे एक दुर्ग है जो विजयनगर साम्राज्य के काल का है।
🙏🌹हर हर महादेव🌹🙏
दर्शन कीजिये
245 फीट ऊंचा महान मुरूडेश्वर_मंदिर का जिक्र रामायण काल से है, इसकी प्राचीनता का कोई अनुमान नही की यह वास्तव में कितने वर्ष प्राचीन है, शायद हजारो वर्ष या इससे भी प्राचीन ....
यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है ....
मुरुदेश्वर (दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में उत्तर कन्नड जिले के भटकल तहसील स्थित एक कस्बा है। 'मुरुदेश्वर' भगवान शिव का एक नाम है। यहाँ भगवान शंकर की विश्व की दूसरी सबसे ऊँची मूर्ति स्थित है। यह कस्बा अरब सागर के तट पर स्थित है और मंगलुरु से १६५ किलोमीटर दूर अरब सागर के किनारे बहुत ही सुन्दर एवं शांत स्थान पर बना हुआ है। मुरुदेश्वर सागरतट, कर्णाटक के सब से सुन्दर तटों में से एक है। पर्यटकों के लिए यहाँ आना दोगुना लाभप्रद रहता है, जहां एक ओर इस धार्मिक स्थल के दर्शन होते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्राकृतिक सुन्दरता का आनन्द भी मिलता है।
मुरुदेश्वर मंगलुरु-मुम्बई रेलपथ पर स्थित एक रेलवे स्टेशन भी है।
मुरुदेश्वर मन्दिर परिसर के पीछे एक दुर्ग है जो विजयनगर साम्राज्य के काल का है।
🙏🌹हर हर महादेव🌹🙏