किसी की जिंदगी छोटी,
तो किसी की बड़ी होती है!
मौत किसी के दरवाजे पर,
तो किसी के सिर पर खडी होती है!
कौन जाने किसी के हिस्से में,
कल का सुरज आएगा कि नहीं!
जिससे मुंह फुलाकर बैठे हो आज,
वो क्या पता कल मिल पाएगा की नहीं!
दिल से जुडे रिश्तों को,
युं ना गलतफहमियों यों का शिकार बनाइए!
मन-मुटाव की इस गांठ को,
इतना कस कर ना लगाइए!
ये वक्त की रेत हाथों से,
पल में फिसल जाएगी!
तुम आवाज लगाते रहोगे,
और वो बहुत दुर निकल जाएगी!😇
तो किसी की बड़ी होती है!
मौत किसी के दरवाजे पर,
तो किसी के सिर पर खडी होती है!
कौन जाने किसी के हिस्से में,
कल का सुरज आएगा कि नहीं!
जिससे मुंह फुलाकर बैठे हो आज,
वो क्या पता कल मिल पाएगा की नहीं!
दिल से जुडे रिश्तों को,
युं ना गलतफहमियों यों का शिकार बनाइए!
मन-मुटाव की इस गांठ को,
इतना कस कर ना लगाइए!
ये वक्त की रेत हाथों से,
पल में फिसल जाएगी!
तुम आवाज लगाते रहोगे,
और वो बहुत दुर निकल जाएगी!😇
Kabhi kabhi sab theek hote hue bhi 💭
Dil udaas sa ho jaata hai 🤍
Shayad zindagi thodi si thak jaati hai 🌙
Ya hum zyada sochne lagte hain 🖤✨
Dil udaas sa ho jaata hai 🤍
Shayad zindagi thodi si thak jaati hai 🌙
Ya hum zyada sochne lagte hain 🖤✨
❤2
हर नजर को एक नजर की तलाश है .।।👀
उस चेहरे मे कुछ तो खाश है 🗣️
आप से दोस्ती हम युं नहीं कर बैठे 🤞🥰🥳
क्या करे हमारी पसंद ही कुछ खाश है ☺️🤭
उस चेहरे मे कुछ तो खाश है 🗣️
आप से दोस्ती हम युं नहीं कर बैठे 🤞🥰🥳
क्या करे हमारी पसंद ही कुछ खाश है ☺️🤭
❤2
वो बस्ते का बोझ और यादों का खज़ानावो सुबह की नींद का कच्चा नाता,
वो माँ का ज़बरदस्ती हमें जगाना।
आँखें मलते हुए बस की तरफ भागना,
और पीछे से माँ का 'टिफिन ले लो' चिल्लाना।
भारी बस्ता कंधों पर, पर दिल बिलकुल हल्का था,
हर मुश्किल का हल तब बस एक छोटा सा छर्रा था।
वो प्रार्थना की लाइन में पीछे खड़े होकर बतियाना,
और टीचर को देख अचानक 'इतनी शक्ति हमें देना' गाना।
चौक की वो डस्ट, ब्लैकबोर्ड का वो कालापन,
वहीं तो रंगा था हमारा मासूम सा बचपन।
वो रफ कॉपी के पीछे 'कट्टम-कुट्टम' का खेल,
दोस्ती ऐसी कि जैसे हो लोहे का मेल।
पेंसिल की नोक टूटना और शापनर का गुमान,
रबड़ खो जाने पर जैसे जाता था जहान।
डेस्क पर नाम कुरेदना अपनी पहचान बनाना,
और पेन की स्याही से उँगलियों को सजाना।
पीरियड के बीच में छुपकर टिफिन का खाना,
वो आम का अचार और पराठे का दीवाना।
घंटी बजते ही जैसे पिंजरा खुल जाता था,
पूरा स्कूल गलियारे में उमड़ आता था।
वाटर बोतल से पानी नहीं, प्यार पीते थे,
हम असल में उसी एक घंटे में जीते थे।
वो पीटी के पीरियड में धूप का सुहानापन,
और रेस में जीतने का वो पागल सा जुनून।
तब लगता था कि कब आज़ाद होंगे हम,
कब इस स्कूल की कैद से बाहर होंगे हम।
पर आज जब पीछे मुड़कर उन गलियों को देखते हैं,
तो अपनी आज़ादी को स्कूल की उस 'कैद' से तौलते हैं।
अब न वो लाइनें हैं, न वो बेंचों का शोर है,
ज़िंदगी अब भाग रही किसी अनजानी ओर है।
डिग्रियाँ तो हाथ में हैं, पर वो हुनर खो गया,
वो बेपरवाह बच्चा कहीं भीड़ में सो गया।
> "किताबों के बीच दबी वो सूखी गुलाब की पत्ती तो नहीं मिली, पर स्कूल की यादों ने आज दिल की हर धूल साफ कर दी।"
❤3
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
🌿🪷 *श्रीकृष्ण ज्ञान* 🪷🌿
✨ *कर्म का अटल न्याय* ✨
जो दूसरों को दुख देकर हँसता है,
वह यह भूल जाता है कि समय सब देख रहा है। ⏳
होनी जब लौटती है,
तो वही पीड़ा सौ गुना बनकर
मन को झकझोर देती है। ⚖️
इसलिए किसी का दिल दुखाने से पहले
एक क्षण ठहर कर सोचिए —
यदि यही वज्र मेरे सिर पर गिरे,
तो क्या मैं सह पाऊँगा?
💛 *श्रीकृष्ण सिखाते हैं —*
_दूसरों के आँसू कभी व्यर्थ नहीं जाते।_
_हर आह सीधी न्याय तक पहुँचती है।_
❓ *क्या आपके शब्द और व्यवहार किसी को सुख दे रहे हैं या पीड़ा?* 🪔
✨ *कर्म का अटल न्याय* ✨
जो दूसरों को दुख देकर हँसता है,
वह यह भूल जाता है कि समय सब देख रहा है। ⏳
होनी जब लौटती है,
तो वही पीड़ा सौ गुना बनकर
मन को झकझोर देती है। ⚖️
इसलिए किसी का दिल दुखाने से पहले
एक क्षण ठहर कर सोचिए —
यदि यही वज्र मेरे सिर पर गिरे,
तो क्या मैं सह पाऊँगा?
💛 *श्रीकृष्ण सिखाते हैं —*
_दूसरों के आँसू कभी व्यर्थ नहीं जाते।_
_हर आह सीधी न्याय तक पहुँचती है।_
❓ *क्या आपके शब्द और व्यवहार किसी को सुख दे रहे हैं या पीड़ा?* 🪔
👏1
🤔1