रेत भरी है इन आँखों में आँसू से तुम धो लेना
कोई सूखा पेड़ मिले तो उस से लिपट के रो लेना
उस के बाद बहुत तन्हा हो जैसे जंगल का रस्ता
जो भी तुम से प्यार से बोले साथ उसी के हो लेना
कुछ तो रेत की प्यास बुझाओ जनम जनम की प्यासी है
साहिल पर चलने से पहले अपने पाँव भिगो लेना
मैंने दरिया से सीखी है पानी की ये पर्दा-दारी
ऊपर ऊपर हँसते रहना गहराई में रो लेना
रोते क्यूँ हो दिल वालों की क़िस्मत ऐसी होती है
सारी रात यूँही जागोगे दिन निकले तो सो लेना
*~बशीर बद्र*
कोई सूखा पेड़ मिले तो उस से लिपट के रो लेना
उस के बाद बहुत तन्हा हो जैसे जंगल का रस्ता
जो भी तुम से प्यार से बोले साथ उसी के हो लेना
कुछ तो रेत की प्यास बुझाओ जनम जनम की प्यासी है
साहिल पर चलने से पहले अपने पाँव भिगो लेना
मैंने दरिया से सीखी है पानी की ये पर्दा-दारी
ऊपर ऊपर हँसते रहना गहराई में रो लेना
रोते क्यूँ हो दिल वालों की क़िस्मत ऐसी होती है
सारी रात यूँही जागोगे दिन निकले तो सो लेना
*~बशीर बद्र*
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महाराज श्री का यह संदेश हमारे बिखरते रिश्तों को जोड़ने की एक अचूक दवा है। दूसरों की कमियां निकालने के बजाय आपसी समझ बढ़ाएं, क्योंकि टांग खींचने से किसी का भला नहीं होता। क्षमा करें, संशय छोड़ें और जीवन में आगे बढ़ें।
*राधे राधे* 🌸
*राधे राधे* 🌸
_मोहब्बत की किताब में मेरा पन्ना उसने यूँ ही मोड़ दिया,_
_कल तक जो मेरा साया थी, आज उसने मेरा साथ छोड़ दिया।_
_शिकायत किससे करें इस बदलते हुए ज़माने की,_
_जिसने दिल में रहने की कसम खाई थी, उसी ने इसे तोड़ दिया।_
_वो महफ़िल सजाए बैठे हैं किसी और की बांहों में आज,_
_और हमें तन्हाइयों के अंधेरे कमरों की तरफ मोड़ दिया।_
_कभी सोचा न था कि ऐसा भी एक दौर देखना होगा,_
_जिसने जीना सिखाया था, उसी ने मरने के लिए छोड़ दिया।_
💔😔
_कल तक जो मेरा साया थी, आज उसने मेरा साथ छोड़ दिया।_
_शिकायत किससे करें इस बदलते हुए ज़माने की,_
_जिसने दिल में रहने की कसम खाई थी, उसी ने इसे तोड़ दिया।_
_वो महफ़िल सजाए बैठे हैं किसी और की बांहों में आज,_
_और हमें तन्हाइयों के अंधेरे कमरों की तरफ मोड़ दिया।_
_कभी सोचा न था कि ऐसा भी एक दौर देखना होगा,_
_जिसने जीना सिखाया था, उसी ने मरने के लिए छोड़ दिया।_
💔😔