वह बार-बार अपना निकम्मापन साबित कर रहे हैं, लेकिन जनता हर बार उसे भूल जाती है।
इंदौर में 34 मासूमों की मौत को भी प्रदेश की जनता ने बहुत जल्दी भुला दिया। अखबारों में साफ़ लिखा गया कि यह हादसा गैरजिम्मेदारी का नतीजा था और लोगों की मौत जरूरी सुरक्षा उपकरणों की कमी के कारण हुई।
आज हालात ऐसे हो गए हैं कि आम इंसान की ज़िंदगी कीड़ों-मकोड़ों जैसी समझी जा रही है—न जान की कोई कीमत, न किसी की जिम्मेदारी, न कोई जवाबदेही।
समझ लीजिए, कोई मसीहा आपको बचाने नहीं आएगा। आम जनता की करोड़ों में जनसंख्या है ,अपनी आवाज़ उठाकर तो देखो,अधिकारों के लिए लड़ना तो सीखो यह सिस्टम अपने आप सुधर जाएगा।
इंदौर में 34 मासूमों की मौत को भी प्रदेश की जनता ने बहुत जल्दी भुला दिया। अखबारों में साफ़ लिखा गया कि यह हादसा गैरजिम्मेदारी का नतीजा था और लोगों की मौत जरूरी सुरक्षा उपकरणों की कमी के कारण हुई।
आज हालात ऐसे हो गए हैं कि आम इंसान की ज़िंदगी कीड़ों-मकोड़ों जैसी समझी जा रही है—न जान की कोई कीमत, न किसी की जिम्मेदारी, न कोई जवाबदेही।
समझ लीजिए, कोई मसीहा आपको बचाने नहीं आएगा। आम जनता की करोड़ों में जनसंख्या है ,अपनी आवाज़ उठाकर तो देखो,अधिकारों के लिए लड़ना तो सीखो यह सिस्टम अपने आप सुधर जाएगा।
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मध्यप्रदेश की जनता आप का 30 हजार करोड़ खर्च करने के बाद भी जनता को न कोई सुविधा न प्रदेश को फायदा मिल रहा है,इस 30 हजार करोड़ बर्बाद करने के लिए कोई तो जिम्मेदार होगा ❓️
दुनिया की सबसे खराब Planning में से एक अगर किसी शहर की मेट्रो Planning को रखा जाए, तो इंदौर मेट्रो उसका उदाहरण बनती जा रही है।
जहाँ सबसे ज्यादा आबादी, ट्रैफिक और रोज़गार के केंद्र हैं, वहाँ मेट्रो पहुँच ही नहीं रही। घनी आबादी वाले इलाकों को छोड़कर लाइन ऐसे रूट पर डाल दी गई मानो जनता के यातायात के लिए नहीं, बल्कि “घूमने” के लिए बनाई गई हो।
आज हालत यह है कि करोड़ों खर्च करने के बाद भी यात्रियों की संख्या नहीं मिल रही। क्योंकि मेट्रो वहीं सफल होती है जहाँ रोज़ लाखों लोग आना-जाना करते हैं — न कि सुनसान और कम उपयोग वाले कॉरिडोर में।
इंदौर में सबसे Practical और High Demand Metro Route यह हो सकता था 👇
📍 Vijay Nagar → AB Road → Palasia → Bhawarkua → Rajendra Nagar → Rau → Pithampur
लेकिन यहाँ Planning Ground Reality देखकर नहीं, राजनीति, नेताओं की पसंद, मोटा पैसा कमाना देखकर की गई लगती है।
दुनिया की सबसे खराब Planning में से एक अगर किसी शहर की मेट्रो Planning को रखा जाए, तो इंदौर मेट्रो उसका उदाहरण बनती जा रही है।
जहाँ सबसे ज्यादा आबादी, ट्रैफिक और रोज़गार के केंद्र हैं, वहाँ मेट्रो पहुँच ही नहीं रही। घनी आबादी वाले इलाकों को छोड़कर लाइन ऐसे रूट पर डाल दी गई मानो जनता के यातायात के लिए नहीं, बल्कि “घूमने” के लिए बनाई गई हो।
आज हालत यह है कि करोड़ों खर्च करने के बाद भी यात्रियों की संख्या नहीं मिल रही। क्योंकि मेट्रो वहीं सफल होती है जहाँ रोज़ लाखों लोग आना-जाना करते हैं — न कि सुनसान और कम उपयोग वाले कॉरिडोर में।
इंदौर में सबसे Practical और High Demand Metro Route यह हो सकता था 👇
📍 Vijay Nagar → AB Road → Palasia → Bhawarkua → Rajendra Nagar → Rau → Pithampur
लेकिन यहाँ Planning Ground Reality देखकर नहीं, राजनीति, नेताओं की पसंद, मोटा पैसा कमाना देखकर की गई लगती है।
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गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है, बारिश कम हो रही है, पानी का भयंकर संकट गहराता जा रहा है, उसके बावजूद ऐसे हरे-भरे जंगलों को काटने के बारे में कोई सोच भी कैसे सकता है?
लेकिन जंगल लगातार काटे जा रहे हैं और सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाली आम जनता जैसे किसी अलग ही दुनिया में जी रही है।
“एक पेड़ माँ के नाम” जैसी नौटंकी करने से बेहतर है पहले बचे हुए जंगल बचा लो 🙏
#SingrauliForest
लेकिन जंगल लगातार काटे जा रहे हैं और सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाली आम जनता जैसे किसी अलग ही दुनिया में जी रही है।
“एक पेड़ माँ के नाम” जैसी नौटंकी करने से बेहतर है पहले बचे हुए जंगल बचा लो 🙏
#SingrauliForest
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Chief Minister Thalapathy Vijay What An Aura 🔥
More popularity means more responsibility — and now everyone is waiting to see how this aura transforms into leadership. ⏳
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पहले छोटी परीक्षाओं के पेपर लीक होते थे अब बड़ी-बड़ी परीक्षाओं के भी पेपर लीक होने लगे हैं,यह New Normalise है हमारे देश की जनता इसको भी Accept कर लेगी।
देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में एक NEET सवालों के घेरे में है। 3 मई को परीक्षा हुई। इसके लीक होने की आशंका है। राजस्थान SOG ने देहरादून, सीकर, झुंझनू ने कई संदिग्ध पकड़े हैं।
SOG को एक गैस पेपर मिला है। 300 प्रश्नों के गैस पेपर में 140 प्रश्न हूबहू वही थे, जो NEET में पूछे गए थे। हालांकि इसे पेपर लीक माना जाए या नहीं, इसका फैसला NTA और SOG को करना है।
देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में एक NEET सवालों के घेरे में है। 3 मई को परीक्षा हुई। इसके लीक होने की आशंका है। राजस्थान SOG ने देहरादून, सीकर, झुंझनू ने कई संदिग्ध पकड़े हैं।
SOG को एक गैस पेपर मिला है। 300 प्रश्नों के गैस पेपर में 140 प्रश्न हूबहू वही थे, जो NEET में पूछे गए थे। हालांकि इसे पेपर लीक माना जाए या नहीं, इसका फैसला NTA और SOG को करना है।
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NEET पेपर लीक मामले में पकड़ा गया आरोपी खुद कह रहा है —
“बड़े लोगों को बचाया जा रहा है।”
तो आखिर कौन हैं ये “बड़े लोग” ❓️
क्यों हर बार छोटे लोग पकड़ लिए जाते हैं और असली मास्टरमाइंड बच निकलते हैं ❓️
जबतक देश का युवा नहीं जागेगा तबतक बदलाव नहीं आएगा
https://x.com/i/status/2054784568562262419
“बड़े लोगों को बचाया जा रहा है।”
तो आखिर कौन हैं ये “बड़े लोग” ❓️
क्यों हर बार छोटे लोग पकड़ लिए जाते हैं और असली मास्टरमाइंड बच निकलते हैं ❓️
जबतक देश का युवा नहीं जागेगा तबतक बदलाव नहीं आएगा
https://x.com/i/status/2054784568562262419
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यह Suicides नहीं बल्कि मानसिक प्रताड़ना देकर की जा रहीं हत्याएँ हैं
देश के युवाओं Suicide करना समाधान नहीं, Suicide की नौबत लाने वालों को फांसी के फंदे पर चढ़ाने के लिए सडकों पर संघर्ष करो।
https://x.com/i/status/2054916452751479277
देश के युवाओं Suicide करना समाधान नहीं, Suicide की नौबत लाने वालों को फांसी के फंदे पर चढ़ाने के लिए सडकों पर संघर्ष करो।
https://x.com/i/status/2054916452751479277
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यह मांगें पूरी तरह legitimate हैं।
साथ ही चुनाव आयोग और SC/HC के Judges की appointment process भी पूरी तरह transparent, independent और fair होनी चाहिए।
True democracy वही होती है जहाँ लोकतंत्र के संस्थान सत्ता के दबाव से मुक्त हों, वरना सिर्फ लोकतंत्र के नाम पर देश धीरे-धीरे dictatorship के trap में फँस जाता है।
https://x.com/i/status/2056227129780846824
साथ ही चुनाव आयोग और SC/HC के Judges की appointment process भी पूरी तरह transparent, independent और fair होनी चाहिए।
True democracy वही होती है जहाँ लोकतंत्र के संस्थान सत्ता के दबाव से मुक्त हों, वरना सिर्फ लोकतंत्र के नाम पर देश धीरे-धीरे dictatorship के trap में फँस जाता है।
https://x.com/i/status/2056227129780846824
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देश में सरकारी University/Colleges भ्रष्टाचार और परिवारवाद के अड्डा बन गए हैं, यह सड़ी हुई अतिथि व्यवस्था को मध्यप्रदेश के युवा क्यों झेल रहे हैं❓️
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India needs a New Nationalism — but not the one of hate and division. ❤️
We need a nationalism of real solutions.
This nationalism should fight against unemployment.
It should give us good roads in every village and city, clean food & pure drinking water, better schools and good hospitals. 🛤️💧🏥
This nationalism should be full of humanity — one that feels the pain of those suffering, helps the weak, shows kindness to animals, love for trees, and responsibility towards future generations. 🐾🌳🙏
The foundation of this New Nationalism can only be built after we completely remove the poison of religious and caste fanaticism from our minds. 🚫☣️
And this big work can only be done by India’s cockroach youth! 💪
#NeoNationalism #NewIndia
https://x.com/i/status/2056940656678109336
We need a nationalism of real solutions.
This nationalism should fight against unemployment.
It should give us good roads in every village and city, clean food & pure drinking water, better schools and good hospitals. 🛤️💧🏥
This nationalism should be full of humanity — one that feels the pain of those suffering, helps the weak, shows kindness to animals, love for trees, and responsibility towards future generations. 🐾🌳🙏
The foundation of this New Nationalism can only be built after we completely remove the poison of religious and caste fanaticism from our minds. 🚫☣️
And this big work can only be done by India’s cockroach youth! 💪
#NeoNationalism #NewIndia
https://x.com/i/status/2056940656678109336
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https://x.com/i/status/2057127819227123724
12 सालों में पहली बार IT Cell इतनी असहाय दिख रही है।
जितना IT Cell इन्हें दबाने, ट्रोल करने और मज़ाक उड़ाने की कोशिश कर रही है, उतनी ही तेज़ी से इनके फॉलोअर्स आग की तरह बढ़ रहे हैं।
क्योंकि Gen Z अब जाति-धर्म के जाल में नहीं फंसना चाहती।
Gen Z पेपर लीक , बेरोज़गारी , महंगाई, भ्रष्टाचार और जवाबदेही पर बात चाहती है।
12 सालों में पहली बार IT Cell इतनी असहाय दिख रही है।
जितना IT Cell इन्हें दबाने, ट्रोल करने और मज़ाक उड़ाने की कोशिश कर रही है, उतनी ही तेज़ी से इनके फॉलोअर्स आग की तरह बढ़ रहे हैं।
क्योंकि Gen Z अब जाति-धर्म के जाल में नहीं फंसना चाहती।
Gen Z पेपर लीक , बेरोज़गारी , महंगाई, भ्रष्टाचार और जवाबदेही पर बात चाहती है।
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मध्यप्रदेश_लोक_सेवा_आयोग_की_भरती_परीक्षाओं_को_संचालित_करने_के_लिये.pdf
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