ओजस्वी भारत
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राष्ट्र एवं भारतीय संस्कृति पर हो रहे आघातों पर भारतीयों की आवाज बुलंद करने का अचूक माध्यम !!
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🚩हमारे राष्ट्र में ईसाई धर्मान्तरण विकराल रूप धारण करता जा रहा है

18 मई 2022 azaadbharat.org

🚩दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ समय पहले बयान दिया है कि ईसाई मिशनरी द्वारा किये जाने वाले कार्य भारतीय संविधान के अंतर्गत वैध है । डॉ क्रिस्टो थॉमस मूलरूप से भारत के रहने वाले हैं जो वर्षों पहले अमरीका चले गए थे। कुछ समय पहले वह भारत आकर चिकित्सा सेवा देने लगे। उन पर आरोप लगा कि वह सेवा की आड़ में ईसाई मिशनरी के धर्मान्तरण का कार्य कर रहे हैं। आपका वीजा निलंबित कर विदेश वापिस भेज दिया गया। आपने दिल्ली हाई कोर्ट में अपने निलंबन को चुनौती दी। कोर्ट ने आपके पक्ष में फैसला सुनाते हुआ कहा कि मिशनरी द्वारा किये जाने वाला कार्य संविधान के अंतर्गत आता हैं। संविधान में कोई धारा ऐसी नहीं है जो उन्हें अपने कार्यों को करने से रोकती हो।

🚩कोर्ट के फैसले से जहाँ ईसाई मिशनरियों की मानो लाटरी निकल गई मगर कोर्ट ने भारत देश की अखंडता और सुरक्षा की अनदेखी कर दी। कोर्ट ने धर्मान्तरण से होने वाले दूरगामी परिणामों की भी अनदेखी कर दी। कोर्ट ने वर्तमान एवं पूर्व में ईसाई मिशनरियों द्वारा देशविरुद्ध किये गए कार्यों को भी नहीं देखा। कोर्ट ने यह भी नहीं देखा कि तमिलनाडु के कुंडमकुलम के परमाणु संयंत्र का विरोध करने वालों में चर्च से सम्बंधित लोग संलिप्त पाए गए थे। कोर्ट ने यह भी नहीं देखा कि उड़ीसा में स्वामी लक्ष्मणानंद जी की हत्या में चर्च समर्थक आतंकवादियों का हाथ था। कोर्ट ने यह भी नहीं देखा कि उत्तरपूर्वी राज्यों में रियांग वनवासी चर्च समर्थित हिंसा के कारण ही निर्वासित जीवन जी रहे हैं। कोर्ट ने यह भी नहीं देखा कि देश में होने वाले चुनावों में चर्च सरकार के चयन के लिए एकतरफ़ा फतवे जारी कर ईसाई समाज को प्रभावित करता हैं। कोर्ट ने यह भी नहीं देखा कि किस प्रकार देश में ईसाई मिशनरी धर्मान्तरण के कार्यों को प्रलोभन देकर कर रहे हैं। धर्मान्तरण पर बनी नियोगी कमेटी की रिपोर्ट को भी कोर्ट ने संज्ञान में नहीं लिया। संसद में ओमप्रकाश त्यागी द्वारा धर्मान्तरण के विरोध में प्रस्तुत किये गए विधेयक पर आज तक दोबारा चर्चा न होना भी चिंता का विषय हैं।

🚩ईसाई धर्मान्तरण के विरुद्ध सबसे अधिक मुखर स्वर हमारे ही देश के गणमान्य व्यक्तियों ने उठाया हैं। महात्मा गाँधी, स्वामी दयानन्द, स्वामी श्रद्धानन्द, स्वामी विवेकानंद, लाला लाजपत राय, डॉ अम्बेडकर, वीर सावरकर आदि ने चर्च द्वारा किये जाने वाले धर्मान्तरण के विरुद्ध अपना व्यक्तव्य दिया था। उनका मानना था कि धर्मांतरण से आस्थाएं बदल जाती है, पूर्वजों के प्रति भाव बदल जाता है। जो पूर्वज पहले पूज्य होते थे, धर्मांतरण के बाद वही घृणा के पात्र बन जाते हैं। खान पान बदल जाता है, पहनावा बदल जाता है। नाम बदल जाते हैं, विदेशी नाम, जिसका अर्थ स्वयं उन्हें ही मालूम नहीं हो ऐसे नाम धर्मांतरण के बाद रखे जाते हैं। इसलिए धर्मांतरण का वास्तविक अर्थ राष्टांतरण है।

🚩धर्मांतरण के प्रति महात्मा गाँधी का भाव क्या था? यह उन्होंने अपनी आत्मकथा में उल्लेख किया है। यह तब की बात है जब वह विद्यालय में पढ़ते थे। उन्होंने लिखा कि “ उन्हीं दिनों मैने सुना कि एक मशहूर हिन्दू सज्जन अपना धर्म बदल कर ईसाई बन गये हैं। शहर में चर्चा थी कि बपतिस्मा लेते समय उन्हें गोमांस खाना पड़ा और शराब पीनी पड़ी । अपनी वेशभूषा भी बदलनी पड़ी तथा तब से हैट लगाने और यूरोपीय वेशभूषा धारण करने लगे। मैने सोचा जो धर्म किसी को गोमांस खाने शराब पीने और पहनावा बदलने के लिए विवश करे वह तो धर्म कहे जाने योग्य नहीं है। मैने यह भी सुना नया कन्वर्ट अपने पूर्वजों के धर्म को उनके रहन सहन को तथा उनके देश को गालियां देने लगा है। इस सबसे मुझसे ईसाईयत के प्रति नापसंदगी पैदा हो गई। ” ( एन आटोवाय़ोग्राफी आर द स्टोरी आफ माइं एक्सपेरिमेण्ट विद ट्रूथ, पृष्ठ -3-4 नवजीवन, अहमदाबाद)

🚩गांधी जी का स्पष्ट मानना था कि ईसाई मिशनरियों का मूल लक्ष्य उद्देश्य भारत की संस्कृति को समाप्त कर भारत का यूरोपीयकरण करना है। उनका कहना था कि भारत में आम तौर पर ईसाइयत का अर्थ है भारतीयों को राष्ट्रीयता से रहित बनाना और उसका यूरोपीयकरण करना।

🚩गांधीजी ने धर्मांतरण के लिए मिशनरी प्रयासों के सिद्धांतों का ही विरोध किया। गांधी जी मिशनरियों आध्यात्मिक शक्तिसंपन्न व्यक्ति नहीं मानते थे बल्कि उन्हें प्रोपगेण्डिस्ट मानते थे। गांधी जी ने एक जगह लिखा कि “ दूसरों के हृदय को केवल आध्यात्मिक शक्तिसंपन्न व्यक्ति ही प्रभावित कर सकता है। जबकि अधिकांश मिशनरी बाकपटु होते हैं, आध्यात्मिक शक्ति संपन्न व्यक्ति नहीं। “ ( संपूर्ण गांधी बाङ्मय, खंड-36, पृष्ठ -147)
🚩गांधी जी ने क्रिश्चियन मिशन पुस्तक में कहा है कि "भारत में ईसाईयत अराष्ट्रीयता एवं यूरोपीयकरण का पर्याय बन चुकी है।"(क्रिश्चियम मिशन्स, देयर प्लेस इंडिया, नवजीवन, पृष्ठ-32)। उन्होंने यह भी कहा कि ईसाई पादरी अभी जिस तरह से काम कर रहे हैं उस तरह से तो उनके लिए स्वतंत्र भारत में कोई भी स्थान नहीं होगा। वे तो अपना भी नुकसान कर रहे हैं। वे जिनके बीच काम करते हैं उन्हें हानि पहुंचाते हैं और जिनके बीच काम नहीं करते उन्हें भी हानि पहुंचाते हैं। सारे देश को वे नुकसान पहुंचाते हैं। गाधीजी धर्मांतरण (कनवर्जन) को मानवता के लिए भयंकर विष मानते थे। गांधी जी ने बार -बार कहा कि धर्मांतरण महापाप है और यह बंद होना चाहिए।"

🚩उन्होंने कहा कि “मिशनरियों द्वारा बांटा जा रहा पैसा तो धन पिशाच का फैलाव है।“ उन्होंने कहा कि “ आप साफ साफ सुन लें मेरा यह निश्चित मत है, जो कि अनुभवों पर आधारित हैं, कि आध्यात्मिक विषयों पर धन का तनिक भी महत्व नहीं है। अतः आध्य़ात्मिक चेतना के प्रचार के नाम पर आप पैसे बांटना और सुविधाएं बांटना बंद करें।"

🚩1935 में एक मिशनरी नर्स ने गांधी जी से पूछा “क्या आप धर्मांतरण के लिए मिशनरियों के भारत आगमन पर रोक लगा देना चाहते है? गांधी जी ने उत्तर दिया “मैं रोक लगाने वाला कौन होता हूँ, अगर सत्ता मेरे हाथ में हो और मैं कानून बना सकूं, तो मैं धर्मांतरण का यह सारा धंधा ही बंद करा दूँ । मिशनरियों के प्रवेश से उन हिन्दू परिवारों में, जहाँ मिशनरी बैठे हैं, वेशभूषा, रीति-रिवाज और खान-पान तक में परिवर्तन हो गया है । आज भी हिन्दू धर्म की निंदा जारी हैं ईसाई मिशनिरयों की दुकानों में मरडोक की पुस्तकें बिकती हैं। इन पुस्तकों में सिवाय हिन्दू धर्म की निंदा के और कुछ है ही नहीं। अभी कुछ ही दिन हुए, एक ईसाई मिशनरी एक दुर्भिक्ष-पीड़ित अंचल में खूब धन लेकर पहुँचा वहाँ अकाल-पीड़ितों को पैसा बाँटा व उन्हें ईसाई बनाया फिर उनका मंदिर हथिया लिया और उसे तुड़वा डाला। यह अत्याचार नहीं तो क्या है, जब उन लोगों ने ईसाई धर्म अपनाया तो तभी उनका मंदिर पर अधिकार समाप्त। वह हक उनका बचा ही नहीं। ईसाई मिशनरी का भी मंदिर पर कोई हक नहीं। पर वह मिशनरी का भी मंदिर पर कोई हक नहीं। पर वह मिशनरी वहाँ पहुँचकर उन्हीं लोगों से वह मंदिर तुडवाला है, जहाँ कुछ समय पहले तक वे ही लोग मानते थे कि वहाँ ईश्वर वास है। ‘‘ ( संपूर्ण गांधी बांङ्मय खंड-61 पृष्ठ-48-49)

🚩स्वामी दयानन्द ने एक बार कहा था कि देखो जयपुर आदि नगरों में गिरिजाघर बन गए है जहाँ पर आर्यों के पुरोधा श्री राम और श्री कृष्ण की निंदा की जाती हैं। इस पर शासक वर्ग को ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अपने जीवन में अनेक ईसाई पादरियों से शास्त्रार्थ कर वेदों के पक्ष को बाइबिल के सिद्धांतों से बेहतर सिद्ध किया। सत्यार्थ प्रकाश रूपी ग्रन्थ में उन्होंने 13 वें समुल्लास में ईसाई मत की तार्किक विवेचना कर हिन्दू समाज पर जो अप्रतिम उपकार किया। वह उसके लिए धन्य हैं।लाला लाजपत राय द्वारा प्राकृतिक आपदाओं में अनाथ बच्चों एवं विधवा स्त्रियों को मिशनरी द्वारा धर्मान्तरित करने का पुरजोर विरोध किया गया जिसके कारण यह मामला अदालत तक पहुंच गया। ईसाई मिशनरी द्वारा किये गए कोर्ट केस में लाला जी की विजय हुई एवं एक आयोग के माध्यम से लाला जी ने यह प्रस्ताव पास करवाया की जब तक कोई भी स्थानीय संस्था निराश्रितों को आश्रय देने से मना न कर दे तब तक ईसाई मिशनरी उन्हें अपना नहीं सकती। डॉ अम्बेडकर को ईसाई समाज द्वारा अनेक प्रलोभन ईसाई मत अपनाने के लिए दिए गए मगर यह जमीनी हकीकत से परिचित थे की ईसाई मत ग्रहण कर लेने से भी दलित समाज अपने मुलभुत अधिकारों से वंचित ही रहेगा। वीर सावरकर कहते थे “यदि कोई व्यक्ति धर्मान्तरण करके ईसाई या मुसलमान बन जाता है तो फिर उसकी आस्था भारत में न रहकर उस देश के तीर्थ स्थलों में हो जाती है जहाँ के धर्म में वह आस्था रखता है, इसलिए धर्मान्तरण यानी राष्ट्रान्तरण है।
इस प्रकार से प्राय: सभी देशभक्त नेता ईसाई धर्मान्तरण के विरोधी रहे है एवं उसे राष्ट्र एवं समाज के लिए हानिकारक मानते है।

🚩भारत में वर्तमान में प्रत्येक राज्य में बड़े पैमाने पर ईसाई धर्मप्रचारक मौजूद है जो मूलत: ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में सक्रिय हैं। अरुणालच प्रदेश में वर्ष 1971 में ईसाई समुदाय की संख्या 1 प्रतिशत थी जो वर्ष 2011 में बढ़कर 30 प्रतिशत हो गई है। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि भारतीय राज्यों में ईसाई प्रचारक किस तरह से सक्रिय हैं। इसी तरह नगालैंड में ईसाई जनसंख्‍या 93 प्रतिशत, मिजोरम में 90 प्रतिशत, मणिपुर में 41 प्रतिशत और मेघालय में 70 प्रतिशत हो गई है। चंगाई सभा और धन के बल पर भारत में ईसाई धर्म तेजी से फैल रहा है।
🚩वर्ष 2011 में भारत की कुल आबादी 121.09 करोड़ है। जारी जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक देश में ईसाइयों की आबादी 2.78 करोड़ है। जो देश की कुल आबादी का 2.3% है। ईसाइयों की जनसंख्या वृद्धि दर 15.5% रही, जबकि सिखों की 8.4%, बौद्धों की 6.1% और जैनियों की 5.4% है। ध्यान दीजिये ईसाईयों की वृद्धि दर का कारण केवल ईसाई समाज में बच्चे अधिक पैदा होना नहीं हैं। अपितु हिन्दुओं का ईसाई मत को स्वीकार करना भी हैं।

🚩इसलिए राष्ट्रहित को देखते हुए धर्मान्तरण पर लगाम देश में अवश्य लगनी चाहिए।- डॉ विवेक आर्य


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🚩छत्रपति शिवाजी महाराज का पराई स्त्री के प्रति कैसा नजरिया था?

19 फरवरी 2022
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🚩भारतीय सभ्यता और संस्कृति में 'माता' को इतना पवित्र स्थान दिया गया है कि यह मातृभाव मनुष्य को पतित होते-होते बचा लेता है। श्री रामकृष्ण एवं अन्य पवित्र संतों के समक्ष जब कोई स्त्री कुचेष्टा करना चाहती तब वे सज्जन, साधक, संत यह पवित्र मातृभाव मन में लाकर विकार के फंदे से बच जाते। यह मातृभाव मन को विकारी होने से बहुत हद तक रोके रखता है। जब भी किसी स्त्री को देखने पर मन में विकार उठने लगे, उस समय सचेत रहकर इस मातृभाव का प्रयोग कर ही लेना चाहिए।

🚩शिवाजी महाराज के सामने जब किसी सुंदर स्त्री को प्रस्तुत किया गया तब शिवाजी महाराज के यही शब्द थे कि काश ऐसी सुंदर मेरी जननी माता होती तो मैं भी ऐसा सुंदर रूप पाता ... शब्दों का तात्पर्य वह हर पराई स्त्री को अपनी बहन व माता के समान मानते थे।

छत्रपति शिवाजी महाराज के समय में कभी भी किसी औरत का नाच-गाना नहीं हुआ। महिलाओं का हमेशा सम्मान किया जाता था चाहे वह दुश्मन की पत्नी भी क्यों ना हो। उन्होंने महिलाओं की गरिमा हमेशा बनाए रखी, बेशक वह महिला किसी भी जाति या धर्म से हो क्यों ना हो।

🚩28 फरवरी 1678 को सुकुजी नामक सरदार ने बेलवाड़ी किले की घेराबंदी की। इस किले की किलेदार एक स्त्री थी।

उसका नाम सावित्रीबाई देसाई था। इस बहादुर महिला ने 27 दिनों तक किले के लिए लड़ाई लड़ी। लेकिन अंत में, सुकुजी ने किले को जीत लिया और सावित्रीबाई से बदला लेने के लिए उसका अपमान किया l
जब राजे ने यह समाचार सुना, तो वह क्रोधित हो गए।
राजे के आदेशानुसार सुकुजी की आंखें फोड कर उसे आजीवन कैद कर दिया गया।
🚩24 अक्टूबर 1657 को छत्रपति शिवाजी महाराज के आदेश पर सोने देव ने जब कल्याण के किले पर घेराबंदी की और उसको जीत लिया, उस समय मौलाना अहमद की पुत्रवधू यानी औरंगजेब की बहन और शाहजहां की बेटी रोशनआरा जो एक अभूतपूर्व सुंदरी थी उसको किले में कैद कर लिया गया। उसके बाद सैनिकों ने उस रोशनआरा को जब छत्रपति शिवाजी महाराज के सामने पेश किया तो छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने सैनिकों को यह कहा था कि यह तुम्हारी पहली और आखरी गलती है। इसके बाद अगर ऐसा अपमानित करने का कार्य किसी भी जाति और धर्म की औरत के साथ किया तो इसकी सजा मौत होगी और एक पालकी सजा कर रोशनआरा को उसके कहने पर उसके महल में भेज दिया गया। इसी प्रकार से शाइस्ता खान ने सन 1663 ईस्वी में कोंकण को जीतने के लिए अपने सेनापति दिलेर खान के साथ एक ब्राह्मण उदित राज देशमुख की पत्नी राय बाघिन (शेरनी) को भेजा तो छत्रपति शिवाजी महाराज ने राय बाघिन और मुगल दिलेर खान को रात में कोल्हापुर में ही घेर लिया और दिलेर खान अपनी जान बचा कर भाग गया। उस समय राय बाघिन को एक सजी हुई पालकी में बैठा कर वापस उसके घर भेज दिया था।

अगर किसी दुश्मन की पत्नी भी चाहे वह किसी भी धर्म या जाति से हो लड़ाई में फंस जाती है, तो उसे परेशानी नहीं होना चाहिए- महाराज के इस तरह के आदेश पत्थर की लकीर होते थे।

🚩पर स्त्री के प्रति मातृभाव रखने का यह एक सुंदर उदाहरण है। ऐसा ही एक उदाहरण वाल्मीकि कृत रामायण में भी आता है। भगवान श्रीराम के छोटे भाई लक्ष्मण को जब सीताजी के गहने पहचानने को कहा गया तो लक्ष्मण जी बोले: हे तात! मैं तो सीता माता के पैरों के गहने और नूपुर ही पहचानता हूँ, जो मुझे उनकी चरणवन्दना के समय दृष्टिगोचर होते रहते थे। केयूर-कुण्डल आदि दूसरे गहनों को मैं नहीं जानता।" यह मातृभाव वाली दृष्टि ही इस बात का एक बहुत बड़ा कारण था कि लक्ष्मणजी इतने काल तक ब्रह्मचर्य का पालन किये रह सके; तभी रावणपुत्र मेघनाद को, जिसे इन्द्र भी नहीं हरा सका था, लक्ष्मणजी हरा पाये। पवित्र मातृभाव द्वारा वीर्यरक्षण का यह अनुपम उदाहरण है जो ब्रह्मचर्य की महत्ता भी प्रकट करता है।

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🚩इस बार महाशिवरात्रि पर्व देशभर में 1 मार्च 2022 मंगलवार को मनाया जाएगा।

27 फरवरी 2022
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🚩भगवान शिव आराधना के लिए महाशिवरात्रि को विशेष माना गया है,हिन्दू धर्म के प्रमुख पर्वों में से महाशिवरात्रि को विशेष पर्व माना गया है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को यह पर्व मनाया जाता है।

🚩महाशिवरात्रि व्रत सारे पापों को भस्म करने वाला सर्वोत्तम व्रत है, महाशिवरात्रि के दिन जप,तप उपवास ओर रात्रि को शिवलिंग की चार प्रहर की पूजा करने का विधान है,जो कि प्रथम पहर की पूजा 1 मार्च 2022 को शाम की 6:21 मिनिट से प्रारम्भ होगी,दूसरे पहर की पूजा रात्रि को 9:27 से प्रारम्भ होगी।तीसरे पहर की पूजा रात्रि 12:33 से प्रारम्भ होगी।चौथे पहर की पूजा रात्रि के 3:39 से प्रारम्भ होगी।

🚩भगवती पार्वती ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी,फलस्वरूप फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव और पार्वती माता का विवाह हुआ था।यही कारण है कि महाशिवरात्रि को जप-तप उपवास के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

🚩महाशिवरात्रि के दिन एक निषादराज अपने कुत्ते के साथ शिकार खेलने गया था किन्तु उस दिन उसे कोई शिकार नही मिला।वह थककर भूख-प्यास से परेशान होकर ,एक तालाब के किनारे गया,जहाँ बिल्वपत्र के वृक्ष के नीचे शिवलिंग था।अपने शरीर को आराम देने के लिए उसने कुछ बिल्वपत्र तोड़े जो कि कुछ बिल्वपत्र शिवलिंग के ऊपर भी गिर गए,अपने पैरों को साफ करने के लिए उसने उन पर जल छिड़का ,जिसकी बूंदे शिवलिंग पर भी गिर गई,ऐसा करते समय उसका 1 तीर नीचे गिर गया, जिसे उठाने के लिए वो नीचे की ओर झुका ,इस तरह महाशिवरात्रि के दिन अनजाने में उसके द्वारा शिव पूजन हो गया ,जिसके पूण्य के प्रभाव से उसे मृत्यु के बाद नरक से मुक्ति मिली ओर शिवधाम की प्राप्ति हुई।

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01 मार्च 2022 मंगलवार को महाशिवरात्रि पर्व विशेष ।

28 फरवरी 2022
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🚩महाशिवरात्रि का व्रत, पूजन, जागरण और उपवास करनेवाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है

🚩शिवरात्रि के दिन व्रत की शुरुआत ये श्लोक बोल के शुरू करें :-

देव देव महादेव नीलकंठ नमोस्तुते l
कर्तुम इच्छा म्याहम प्रोक्तं, शिवरात्रि व्रतं तव ll

🚩 काल सर्प के लिए महाशिवरात्रि के दिन घर के मुख्य दरवाजे पर पिसी हल्दी से स्वस्तिक बना देना....शिवलिंग पर दूध और बिल्व पत्र चढ़ाकर जप करना और रात को ईशान कोण में मुख करके जप करना l

🚩 शिवरात्रि के दिन ईशान कोण में मुख करके जप करने की महिमा विशेष है, क्योंकि ईशान के स्वामी शिव जी हैं l रात को जप करें, ईशान को दिया जलाकर पूर्व के तरफ रखें , लेकिन हमारा मुख ईशान में हो तो विशेष लाभ होगा ll

🚩 महाशिवरात्रि को कोई मंदिर में जाकर शिवजी पर दूध चढाते हैं तो ये ५ मंत्र बोलें :-

ॐ हरये नमः
ॐ महेश्वराए नमः
ॐ शूलपानायाय नमः
ॐ पिनाकपनाये नमः
ॐ पशुपतये नमः

🚩शिव पूजा आराधना का एक तरीका यह है भी है कि उपवास रखकर पुष्प, पंचामृत, बिल्वपत्रादि से चार प्रहर पूजा की जाय।

🚩दूसरा तरीका यह है कि मानसिक पूजा की जाय। हम मन-ही-मन भावना करें-
ज्योतिर्मात्रस्वरूपाय निर्मलज्ञानचक्षुषे।
नमः शिवाय शान्ताय ब्रह्मणे लिंगमूर्तये।।
ज्योतिमात्र (ज्ञानज्योति अर्थात् सच्चिदानंद, साक्षी) जिनका स्वरूप है, निर्मल ज्ञान ही जिनका नेत्र है, जो लिंगस्वरूप ब्रह्म है, उन परम शांत कल्याणमय भगवान शिव को हम नमस्कार करते हैं

🚩महाशिवरात्रि की रात्रि में ॐ बं, बं.... बीजमंत्र के सवा लाख जप से गठिया जैसे वायु विकारों से छुटकारा मिलता है।

🚩ॐ नमः शिवाय जप को विनियोगः करके जप करे

विनियोगः अथ ॐ नमः शिवाय मंत्र। वामदेव ऋषिः। पंक्तिः छंदः। शिवो देवता। ॐ बीजम्। नमः शक्तिः। शिवाय कीलकम्। अर्थात् ॐ नमः शिवाय का कीलक है 'शिवाय', 'नमः' है शक्ति, ॐ है बीज... हम इस उद्देश्य से (मन ही मन अपना उद्देश्य बोलें) शिवजी का मंत्र जप रहे हैं – ऐसा संकल्प करके जप किया जाय मंत्र जल्दी फलीभूत होता है।

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*2 मार्च 2022 फाल्गुन अमावस्या द्वापर युगादि तिथि विशेष*

*1 मार्च 2022* http://azaadbharat.org

*🚩2 मार्च फाल्गुन अमावस्या हिन्दू पंचाग के हिसाब से आखरी अमावस्या है।*

*🚩2 मार्च को दो शुभ योग बनेंगे,एक शिव योग ओर दूसरा सिद्ध योग ।*

*🚩अमावस्या के दिन पेड़,पत्ता तोड़ने से ब्रह्म हत्या का पाप लगता है,आज के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व माना गया है।*

*🚩अगर आपके घर मे पितृ दोष लगा है और आप पितृ दोष निवारण करना चाहते है तो आप फाल्गुन अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त श्राद्ध, दान और तर्पण करना चाहिए और गीता के सातवें अध्याय का पाठ करना चाहिए, इससे पितरों को तमाम यातनाओं से मुक्ति मिलती है।*

*🚩फाल्गुन मास की अमावस्या को सूर्य नारायण देव को जल अर्पण करने का महत्व है,आज के दिन पीपल के मूल में जल,दूध,काले तिल,गुड़ मिश्रित जल अर्पण करने से कई तरह के दोष दूर होते है।*

*🚩गृह दोष निवारण के लिए आज के दिन गाय के गोबर के कंडे से घर में धूप देवे, धूप में घी,चावल, जो, काले तिल,गुड़, चंदन,गूगल को मिला लेवें।*
*🚩 अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में जाकर स्नान करें, अगर नदियों तक नही जा सके तो घर पर ही बाल्टी में गंगा जल मिलाकर गंगे माँ स्मरण करते हुए स्नान करें।*

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2 मार्च 2022 फाल्गुन अमावस्या द्वापर युगादि तिथि विशेष

1 मार्च 2022
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🚩2 मार्च फाल्गुन अमावस्या हिन्दू पंचाग के हिसाब से आखरी अमावस्या है।

🚩2 मार्च को दो शुभ योग बनेंगे,एक शिव योग ओर दूसरा सिद्ध योग।

🚩अमावस्या के दिन पेड़,पत्ता तोड़ने से ब्रह्म हत्या का पाप लगता है,आज के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व माना गया है।

🚩अगर आपके घर मे पितृ दोष लगा है और आप पितृ दोष निवारण करना चाहते है तो आप फाल्गुन अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त श्राद्ध, दान और तर्पण करना चाहिए और गीता के सातवें अध्याय का पाठ करना चाहिए, इससे पितरों को तमाम यातनाओं से मुक्ति मिलती है।

🚩फाल्गुन मास की अमावस्या को सूर्य नारायण देव को जल अर्पण करने का महत्व है,आज के दिन पीपल के मूल में जल,दूध,काले तिल,गुड़ मिश्रित जल अर्पण करने से कई तरह के दोष दूर होते है।

🚩गृह दोष निवारण के लिए आज के दिन गाय के गोबर के कंडे से घर में धूप देवे, धूप में घी,चावल, जो, काले तिल,गुड़, चंदन,गूगल को मिला लेवें।
🚩 अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में जाकर स्नान करें, अगर नदियों तक नही जा सके तो घर पर ही बाल्टी में गंगा जल मिलाकर गंगे माँ स्मरण करते हुए स्नान करें।

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होली महापर्व विशेष

2 मार्च 2022
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🚩होली हमेशा प्राकृतिक रंगों से ही मनाये

🚩केमिकलों के रंगों से कई प्रकार के चमड़ी के रोग होते है, स्किन एलर्जी, दाग, धब्बें, कील-मुँहासे आदि स्किन से सम्बंधित रोग होते है,जबकि प्राकृतिक रंगों से कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है।

🚩प्राकृतिक रंगों में सबसे ज्यादा लाभ पलाश के रंग से होते है, पलाश के फूलों से केसरी रंग बनता है,पलाश के रंग को अगर बाल्टी में डालकर स्नान करते है तो गर्मी के कारण होने वाली बीमारियों से रक्षा होती है।

🚩पलाश के फूलों से बने रंग से कई प्रकार के चर्म रोग दूर होते है,यहाँ तक कि इस रंग से त्वचा में निखार आता है,आँखों की रोशनी बढ़ती है।

🚩किसी की कुंडली में काल सर्प दोष हो तो उसे पलाश के रंग से स्नान करवाये तो उसे काल सर्प दोष से छुटकारा मिलता है।

🚩केमिकलों के रंगों से बचे ओर दूसरों को भी बचाये ओर प्राकृतिक रंग से पलाश रंग से चमत्कारी फायदे होते है, तो स्वंय लाभ ले और दूसरों को भी लाभ करवाये,
पलाश के फूलों का रंग आप घर पर बना सकते हो या आप संत श्रीआशारामजी आश्रमों से भी मात्र 10 रुपये में 1 पैकेट मंगा सकते हो।


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4 मार्च राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस

3 मार्च 2022
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🚩देश के कार्य स्थलों पर सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए 4 मार्च को पूरे देश में राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया जाता है।

🚩स्वयं की सुरक्षा से परिवार की सुरक्षा का महत्व ज्यादा होता है,परिवार की सुरक्षा से शहर की सुरक्षा का ज्यादा महत्व होता है,शहर की सुरक्षा से भी राज्य की सुरक्षा का महत्व है और सबसे ज्यादा अधिक महत्व अगर किसी का है तो वो देश की सुरक्षा का होता है,क्योंकि देश सुरक्षित तो सब सुरक्षित,इसलिए देश की सुरक्षा के लिए सभी देशवासियों को हमेशा तत्पर रहना चाहिए।

🚩4 मार्च भारत के इतिहास का अहम दिन है, इस दिन भारतीय नोसेना को उसका पहला विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत मिला था। साल 1957 में भारत ने इसे ब्रिटेन की रॉयल नेवी से अधूरे कंस्ट्रक्शन के साथ खरीदा था।1961 में इसका निर्माण पूरा हुआ और 4 मार्च को इसे सेवा में ले आया गया था।

🚩विक्रांत के कारण भारत का समुद्र में दबदबा बढ़ गया था । 1971 में इंडो-पाक वाँर में इस विमान वाहक पोत के कारण पाकिस्तान के पसीने छूट गए थे।

🚩4 मार्च 1886 में मद्रास के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी बलूसु संबमूर्ति का जन्म भी हुआ था,ऐसे महान देशभक्तों के कारण ही आज भारत देश सुरक्षित है।

🚩हम सभी संगठित होकर देशहित कार्य करते रहे और हम सभी आज ये संकल्प लेते है कि भारत देश की सुरक्षा के लिए हमेशा हम तैय्यार रहेंगे।

🚩शास्त्रों में आया है कि संत सदैव सबका मंगल-सबका भला करते है,संत देश के लिए सदैव सेवा कार्य करते रहते है,आज हम सभी का कर्तव्य है कि हम संत की सुरक्षा के लिए भी एकजुट रहे क्योंकि संत हम सभी को जीवन में सही मार्गदर्शन करते रहते है, ब्रह्मज्ञानी संत के सत्संग से विश्वशांति सम्भव है।

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लव जिहाद को बढ़ावा देने वाले फ़िल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली, अभनेता अजय देवगन उर्फ रहीम लाला और अभिनेत्री आलिया भट्ट उर्फ गंगू बाई का देशभर में हिन्दू संस्थाओं द्वारा विरोध जारी

4 मार्च 2022
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🚩हिन्दुओ के लिए सबसे घातक हैं, बॉलीवुड फ़िल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली और उनके किरदार अजय देवगन ( रहीम लाला) और आलिया भट्ट ( गंगू बाई)

🚩अपने बच्चों को लव जिहाद को बढ़ावा देने वाली संजय लीला भंसाली,अजय देवगन,आलिया भट्ट की तमाम छोटी-बड़ी बॉलीवुड फिल्मो से बचाओ -- जैसे गंगू बाई ।

🚩गंगू बाई फ़िल्म को संजय लीला भंसाली ने हुसैन जैदी द्वारा लिखित पुस्तक मुम्बई के माफिया क्वीन के आधार पर बनाया गया है।

🚩फ़िल्म गंगू बाई कठियावाड़ी को देश के कई इलाकों में विरोध हुआ है क्योंकि फ़िल्म को तोड़ मरोड़ कर प्रदर्शित किया गया है।

🚩ऐसा पहली बार नही हुआ है कि संजय लीला भंसाली की फ़िल्म को लेकर विरोध हुआ, पहले भी संजय लीला भंसाली की पद्दमावत जैसी फिल्मों का विरोध हो चुका है,पर कहते है न कि पैसों से सब हो जाता है, तो ऐसे ही पैसों से संजय लीला भंसाली की लव जिहाद वाली फिल्में भी रिलीज हुई।

🚩आज समय की मांग है कि हिन्दू धर्म विरोधी तमाम फिल्मों का बहिष्कार हो और हम सभी इन्हें देखना बंद करें और उनका विरोध भी करें।

🚩 आज कल की फिल्मों के निर्देशको से हम पूछते है कि आप समाज को क्या बताना चाहते हो ❓

कि एक लड़की वेश्या बन जाये ❓

फिर समाज को क्यों गुमराह कर रहे हो❓

🚩राजा हरिश्चन्द्र जैसी चरित्रवान बनाने वाली, आध्यात्मिक, ओज, तेज़, बल, बुद्धि विकसित करनेवाली धार्मिक फिल्में तथा बॉर्डर जैसे देशभक्ति फिल्में बना सकते हो तो बढ़िया है, नहीं तो हिन्दू धर्म विरोधी फिल्में बनाने का आपको कोई हक नही है।

🚩आओ हम संकल्प लेते है कि प्रतिदिन घर बैठे-बैठे मोबाइल के माध्यम से सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप आदि ऐप के द्वारा हम हिन्दू धर्म विरोधी फिल्मों का विरोध एवं बहिस्कार करेंगे।

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