23 मार्च को भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव ने देश के लिए बलिदान दिया था , इसलिए हम 23 मार्च को शहीदी दिवस के रूप में मनाते आये है।
23 मार्च 2022
http://azaadbharat.org
🚩पुलिस की बर्बरता से लाला लाजपत राय का देहांत हो गया ,इसका बदला लेने के लिए भगतसिंह, राजगुरु, व सुखदेव ने पुलिस अधीक्षक सांडर्स को 17/09/1928 को गोली से उड़ा दिया ।
🚩जनता में क्रान्ति रोकने के लिए अंग्रेज कानून लाने की तैयारी में थे,जिसको रोकने के लिए भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 08/04/1929 को सैंट्रल असेम्बली के अंदर बम फेंका।
🚩7 अक्टूबर 1930 को तीनों सपूतों को फांसी की सजा सुनाई गई।
🚩23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में भारत माता के तीनों सपूतों को फांसी दे दी गई।
🚩जरा विचार कीजिये कि देश को आजादी दिलाने के लिए अपने प्राणों की आहुति देनेवाले इन वीर शहीदों के सपने को हम कहाँ तक साकार कर सके है.....???
🚩सरदार भगतसिंह का नाम अमर शहीदों में सबसे प्रमुख रूप से लिया जाता है भगतसिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के जिला लायलपुर में बंगा गांव (जो अभी पाकिस्तान में है) के एक देशभक्त सिख परिवार में हुआ था, जिसका अनुकूल प्रभाव उन पर पड़ा था उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था।
🚩यह एक सिख परिवार था जिसने आर्य समाज के विचार को अपना लिया था, उनके परिवार पर आर्य समाज व महर्षि दयानन्द की विचारधारा का गहरा प्रभाव था,भगत सिंह के जन्म के समय उनके पिता 'सरदार किशन सिंह' एवं उनके दो चाचा 'अजीतसिंह' तथा 'स्वर्णसिंह' अंग्रेजों के खिलाफ होने के कारण जेल में बंद थे,जिस दिन भगतसिंह पैदा हुए उनके पिता एवं चाचा को जेल से रिहा किया गया, इस शुभ घड़ी के अवसर पर भगतसिंह के घर में खुशी और भी बढ़ गई थी।
🚩भगतसिंह के जन्म के बाद उनकी दादी ने उनका नाम 'भागो वाला' रखा था जिसका मतलब होता है 'अच्छे भाग्य वाला' बाद में उन्हें 'भगतसिंह' कहा जाने लगा,भगतसिंह 14 वर्ष की आयु से ही पंजाब की क्रांतिकारी संस्थाओं में कार्य करने लगे थे डी.ए.वी. स्कूल से उन्होंने नौवीं की परीक्षा भी उत्तीर्ण की थी ।
🚩1923 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद उन्हें विवाह बंधन में बांधने की तैयारियां होने लगी तो वह लाहौर से भागकर कानपुर आ गए, फिर देश की आजादी के संघर्ष में ऐसे रमें कि पूरा जीवन ही देश को समर्पित कर दिया, भगतसिंह ने देश की आजादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुकाबला किया, वह युवकों के लिए हमेशा ही एक बहुत बड़ा आदर्श बना रहेगा।
🚩भगतसिंह को हिन्दी, उर्दू, पंजाबी तथा अंग्रेजी के अलावा बांग्ला भी आती थी,जो उन्होंने बटुकेश्वर दत्त से सीखी थी,जेल के दिनों में उनके लिखे खतों व लेखों से उनके विचारों का अंदाजा लगता है ,उन्होंने भारतीय समाज में भाषा, जाति और धर्म के कारण आई दूरियों पर दु:ख व्यक्त किया था।
🚩उन्होंने समाज के कमजोर वर्ग पर किसी भारतीय के प्रहार को भी उसी सख्ती से सोचा जितना कि किसी अंग्रेज के द्वारा किए गए अत्याचार को उनका विश्वास था कि उनकी शहादत से भारतीय जनता और उग्र हो जाएगी, लेकिन जब तक वह जिंदा रहेंगे ऐसा नहीं हो पाएगा,इसी कारण उन्होंने मौत की सजा सुनाने के बाद भी माफीनामा लिखने से साफ मना कर दिया था।
🚩अमृतसर में 13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह की सोच पर इतना गहरा प्रभाव डाला कि लाहौर के नेशनल कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर भगत सिंह ने भारत की आजादी के लिए नौजवान भारत सभा की स्थापना की काकोरी कांड में रामप्रसाद 'बिस्मिल' सहित 4 क्रांतिकारियों को फांसी व 16 अन्य को कारावास की सजा से भगत सिंह इतने ज्यादा बेचैन हुए कि चन्द्रशेखर आजाद के साथ उनकी पार्टी हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से जुड़ गए और उसे एक नया नाम दिया'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' इस संगठन का उद्देश्य सेवा, त्याग और पीड़ा झेल सकने वाले नवयुवक तैयार करना था।
🚩इसके बाद भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर 17 दिसंबर 1928 को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज अधिकारी जेपी सांडर्स को मारा; इस कार्रवाई में क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद ने भी उनकी पूरी सहायता की इसके बाद भगत सिंह ने अपने क्रांतिकारी साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर अलीपुर रोड़ दिल्ली स्थित ब्रिटिश भारत की तत्कालीन सेंट्रल असेम्बली के सभागार में 8 अप्रैल 1929 को अंग्रेज सरकार को जगाने के लिए बम और पर्चे फेंके; बम फेंकने के बाद वहीं पर उन दोनों ने अपनी गिरफ्तारी भी दी।
🚩इसके बाद 'लाहौर षडयंत्र' के इस मुकदमें में भगतसिंह को और उनके दो अन्य साथियों, राजगुरु तथा सुखदेव को 23 मार्च, 1931 को एक साथ फांसी पर लटका दिया गया यह माना जाता है कि मृत्युदंड के लिए 24 मार्च की सुबह ही तय थी लेकिन लोगों के भय से डरी सरकार ने 23-24 मार्च की मध्यरात्रि ही इन वीरों की जीवन लीला समाप्त
23 मार्च 2022
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🚩पुलिस की बर्बरता से लाला लाजपत राय का देहांत हो गया ,इसका बदला लेने के लिए भगतसिंह, राजगुरु, व सुखदेव ने पुलिस अधीक्षक सांडर्स को 17/09/1928 को गोली से उड़ा दिया ।
🚩जनता में क्रान्ति रोकने के लिए अंग्रेज कानून लाने की तैयारी में थे,जिसको रोकने के लिए भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 08/04/1929 को सैंट्रल असेम्बली के अंदर बम फेंका।
🚩7 अक्टूबर 1930 को तीनों सपूतों को फांसी की सजा सुनाई गई।
🚩23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में भारत माता के तीनों सपूतों को फांसी दे दी गई।
🚩जरा विचार कीजिये कि देश को आजादी दिलाने के लिए अपने प्राणों की आहुति देनेवाले इन वीर शहीदों के सपने को हम कहाँ तक साकार कर सके है.....???
🚩सरदार भगतसिंह का नाम अमर शहीदों में सबसे प्रमुख रूप से लिया जाता है भगतसिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के जिला लायलपुर में बंगा गांव (जो अभी पाकिस्तान में है) के एक देशभक्त सिख परिवार में हुआ था, जिसका अनुकूल प्रभाव उन पर पड़ा था उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था।
🚩यह एक सिख परिवार था जिसने आर्य समाज के विचार को अपना लिया था, उनके परिवार पर आर्य समाज व महर्षि दयानन्द की विचारधारा का गहरा प्रभाव था,भगत सिंह के जन्म के समय उनके पिता 'सरदार किशन सिंह' एवं उनके दो चाचा 'अजीतसिंह' तथा 'स्वर्णसिंह' अंग्रेजों के खिलाफ होने के कारण जेल में बंद थे,जिस दिन भगतसिंह पैदा हुए उनके पिता एवं चाचा को जेल से रिहा किया गया, इस शुभ घड़ी के अवसर पर भगतसिंह के घर में खुशी और भी बढ़ गई थी।
🚩भगतसिंह के जन्म के बाद उनकी दादी ने उनका नाम 'भागो वाला' रखा था जिसका मतलब होता है 'अच्छे भाग्य वाला' बाद में उन्हें 'भगतसिंह' कहा जाने लगा,भगतसिंह 14 वर्ष की आयु से ही पंजाब की क्रांतिकारी संस्थाओं में कार्य करने लगे थे डी.ए.वी. स्कूल से उन्होंने नौवीं की परीक्षा भी उत्तीर्ण की थी ।
🚩1923 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद उन्हें विवाह बंधन में बांधने की तैयारियां होने लगी तो वह लाहौर से भागकर कानपुर आ गए, फिर देश की आजादी के संघर्ष में ऐसे रमें कि पूरा जीवन ही देश को समर्पित कर दिया, भगतसिंह ने देश की आजादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुकाबला किया, वह युवकों के लिए हमेशा ही एक बहुत बड़ा आदर्श बना रहेगा।
🚩भगतसिंह को हिन्दी, उर्दू, पंजाबी तथा अंग्रेजी के अलावा बांग्ला भी आती थी,जो उन्होंने बटुकेश्वर दत्त से सीखी थी,जेल के दिनों में उनके लिखे खतों व लेखों से उनके विचारों का अंदाजा लगता है ,उन्होंने भारतीय समाज में भाषा, जाति और धर्म के कारण आई दूरियों पर दु:ख व्यक्त किया था।
🚩उन्होंने समाज के कमजोर वर्ग पर किसी भारतीय के प्रहार को भी उसी सख्ती से सोचा जितना कि किसी अंग्रेज के द्वारा किए गए अत्याचार को उनका विश्वास था कि उनकी शहादत से भारतीय जनता और उग्र हो जाएगी, लेकिन जब तक वह जिंदा रहेंगे ऐसा नहीं हो पाएगा,इसी कारण उन्होंने मौत की सजा सुनाने के बाद भी माफीनामा लिखने से साफ मना कर दिया था।
🚩अमृतसर में 13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह की सोच पर इतना गहरा प्रभाव डाला कि लाहौर के नेशनल कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर भगत सिंह ने भारत की आजादी के लिए नौजवान भारत सभा की स्थापना की काकोरी कांड में रामप्रसाद 'बिस्मिल' सहित 4 क्रांतिकारियों को फांसी व 16 अन्य को कारावास की सजा से भगत सिंह इतने ज्यादा बेचैन हुए कि चन्द्रशेखर आजाद के साथ उनकी पार्टी हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से जुड़ गए और उसे एक नया नाम दिया'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' इस संगठन का उद्देश्य सेवा, त्याग और पीड़ा झेल सकने वाले नवयुवक तैयार करना था।
🚩इसके बाद भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर 17 दिसंबर 1928 को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज अधिकारी जेपी सांडर्स को मारा; इस कार्रवाई में क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद ने भी उनकी पूरी सहायता की इसके बाद भगत सिंह ने अपने क्रांतिकारी साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर अलीपुर रोड़ दिल्ली स्थित ब्रिटिश भारत की तत्कालीन सेंट्रल असेम्बली के सभागार में 8 अप्रैल 1929 को अंग्रेज सरकार को जगाने के लिए बम और पर्चे फेंके; बम फेंकने के बाद वहीं पर उन दोनों ने अपनी गिरफ्तारी भी दी।
🚩इसके बाद 'लाहौर षडयंत्र' के इस मुकदमें में भगतसिंह को और उनके दो अन्य साथियों, राजगुरु तथा सुखदेव को 23 मार्च, 1931 को एक साथ फांसी पर लटका दिया गया यह माना जाता है कि मृत्युदंड के लिए 24 मार्च की सुबह ही तय थी लेकिन लोगों के भय से डरी सरकार ने 23-24 मार्च की मध्यरात्रि ही इन वीरों की जीवन लीला समाप्त
कर दी और रात के अंधेरे में ही सतलज के किनारे उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया।
🚩यह एक संयोग ही था कि जब उन्हें फांसी दी गई और उन्होंने संसार से विदा ली उस वक्त उनकी उम्र 23 वर्ष 5 माह और 23 दिन थी और दिन भी था 23 मार्च ।
🚩 अपने फांसी से पहले भगत सिंह ने अंग्रेज सरकार को एक पत्र भी लिखा था जिसमें कहा था कि उन्हें अंग्रेजी सरकार के खिलाफ भारतीयों के युद्ध का प्रतीक एक युद्धबंदी समझा जाए तथा फांसी देने के बजाए गोली से उड़ा दिया जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
🚩भगतसिंह की शहादत से न केवल अपने देश के स्वतंत्रता संघर्ष को गति मिली बल्कि नवयुवकों के लिए भी वह प्रेरणा स्रोत बन गए, वह देश के समस्त शहीदों के सिरमौर बन गए; उनके जीवन पर आधारित कई हिन्दी फिल्में भी बनी हैं जिनमें द लीजेंड ऑफ भगत सिंह, शहीद, शहीद भगत सिंह आदि आज भी सारा देश उनके बलिदान को बड़ी गंभीरता व सम्मान से याद करता है,भारत की जनता उन्हें आजादी के दीवाने के रूप में देखती है जिसने अपनी जवानी सहित सारी जिंदगी देश के लिए समर्पित कर दी।
🚩भगतसिंह, राजगुरु,सुखदेव जैसे महान देशभक्तों कारण ही हम आज सुरक्षित है और हम आजादी का जीवन जी पा रहे है,ऐसे महान सभी देशभक्तों को शत-शत नमन ।
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🚩यह एक संयोग ही था कि जब उन्हें फांसी दी गई और उन्होंने संसार से विदा ली उस वक्त उनकी उम्र 23 वर्ष 5 माह और 23 दिन थी और दिन भी था 23 मार्च ।
🚩 अपने फांसी से पहले भगत सिंह ने अंग्रेज सरकार को एक पत्र भी लिखा था जिसमें कहा था कि उन्हें अंग्रेजी सरकार के खिलाफ भारतीयों के युद्ध का प्रतीक एक युद्धबंदी समझा जाए तथा फांसी देने के बजाए गोली से उड़ा दिया जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
🚩भगतसिंह की शहादत से न केवल अपने देश के स्वतंत्रता संघर्ष को गति मिली बल्कि नवयुवकों के लिए भी वह प्रेरणा स्रोत बन गए, वह देश के समस्त शहीदों के सिरमौर बन गए; उनके जीवन पर आधारित कई हिन्दी फिल्में भी बनी हैं जिनमें द लीजेंड ऑफ भगत सिंह, शहीद, शहीद भगत सिंह आदि आज भी सारा देश उनके बलिदान को बड़ी गंभीरता व सम्मान से याद करता है,भारत की जनता उन्हें आजादी के दीवाने के रूप में देखती है जिसने अपनी जवानी सहित सारी जिंदगी देश के लिए समर्पित कर दी।
🚩भगतसिंह, राजगुरु,सुखदेव जैसे महान देशभक्तों कारण ही हम आज सुरक्षित है और हम आजादी का जीवन जी पा रहे है,ऐसे महान सभी देशभक्तों को शत-शत नमन ।
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बंगाल में खूनी खेला खुल्लम खुल्ला....
हिन्दू देश में ही हिन्दुओ के साथ घोर अत्याचार....
24 मार्च 2022
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🚩कोलकाता: पश्चिम बंगाल (West Bengal) के बीरभूम जिले (Birbhum) में 6 महिलाओं और 2 बच्चों को उनके घरों में बन्द करके जिंदा जला दिया गया।
🚩आप शायद कल्पना भी नहीं कर सकते कि इन महिलाओं और बच्चों की कितनी दर्दनाक मौत हुई होगी।
🚩दुखत बात ये है कि हमारे देश के बहुत सारे विपक्षी नेताओं और मीडिया के एक वर्ग को अब ना तो संविधान खतरे में दिख रहा है और ना ही लोकतंत्र खतरे में दिख रहा है।
🚩पश्चिम बंगाल में बीरभूम जिले की हिंसक घटना में 9 लोगों की मौत के बाद बीजेपी और तृणमूल में जबर्दस्त सियासी बहस चल रही है।
🚩 पश्चिम बंगाल की घटनाओ को देखते है तो शरीर में कम्पन्न सा होता है। आज देश की सारी जनता की आवाज है कि पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन घोषित हो।
🚩बड़े दुःख की बात है कि हिन्दूवादी सरकार होने के बाद भी हिन्दू देश में हिन्दुओ के साथ घोर अत्याचार हो रहे है।
🚩 देश के कुछ पागल नेता है जो बंदूक पर हाथ रखकर आराम की रोटी खाना चाहते है।
🚩देश में जितने भी झगड़े और लड़ाइयां हो रही है , वे सारी निजी स्वार्थ के कारण ही हो रही है,अब भी अगर देशवासी परस्पर देवो की भावना से व्यवहार करें तो देश में शांति सम्भव है।
🚩इतना विनाश होने के बाद अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) आज बीरभूम जिले के रामपुर हाट का दौरा कर रही हैं,पर हिन्दुओ के साथ हो रहे अत्याचारों को नही रोक रही है
🚩पिछले सप्ताह हुई इस घटना में तृणमूल के एक कार्यकर्ता की मौत के बाद 8 लोगों को जिंदा जलाकर मार दिया गया था,बंगाल सरकार 23 मार्च को कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक इलाके में सीसीटीवी लगाने का काम कर रही है।
🚩आओ हम सभी मिलकर हिन्दुओ के साथ हो रहे अत्याचारों पर आवाज उठाये और उन्हें सुरक्षित करने में सहायक बने।
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हिन्दू देश में ही हिन्दुओ के साथ घोर अत्याचार....
24 मार्च 2022
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🚩कोलकाता: पश्चिम बंगाल (West Bengal) के बीरभूम जिले (Birbhum) में 6 महिलाओं और 2 बच्चों को उनके घरों में बन्द करके जिंदा जला दिया गया।
🚩आप शायद कल्पना भी नहीं कर सकते कि इन महिलाओं और बच्चों की कितनी दर्दनाक मौत हुई होगी।
🚩दुखत बात ये है कि हमारे देश के बहुत सारे विपक्षी नेताओं और मीडिया के एक वर्ग को अब ना तो संविधान खतरे में दिख रहा है और ना ही लोकतंत्र खतरे में दिख रहा है।
🚩पश्चिम बंगाल में बीरभूम जिले की हिंसक घटना में 9 लोगों की मौत के बाद बीजेपी और तृणमूल में जबर्दस्त सियासी बहस चल रही है।
🚩 पश्चिम बंगाल की घटनाओ को देखते है तो शरीर में कम्पन्न सा होता है। आज देश की सारी जनता की आवाज है कि पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन घोषित हो।
🚩बड़े दुःख की बात है कि हिन्दूवादी सरकार होने के बाद भी हिन्दू देश में हिन्दुओ के साथ घोर अत्याचार हो रहे है।
🚩 देश के कुछ पागल नेता है जो बंदूक पर हाथ रखकर आराम की रोटी खाना चाहते है।
🚩देश में जितने भी झगड़े और लड़ाइयां हो रही है , वे सारी निजी स्वार्थ के कारण ही हो रही है,अब भी अगर देशवासी परस्पर देवो की भावना से व्यवहार करें तो देश में शांति सम्भव है।
🚩इतना विनाश होने के बाद अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) आज बीरभूम जिले के रामपुर हाट का दौरा कर रही हैं,पर हिन्दुओ के साथ हो रहे अत्याचारों को नही रोक रही है
🚩पिछले सप्ताह हुई इस घटना में तृणमूल के एक कार्यकर्ता की मौत के बाद 8 लोगों को जिंदा जलाकर मार दिया गया था,बंगाल सरकार 23 मार्च को कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक इलाके में सीसीटीवी लगाने का काम कर रही है।
🚩आओ हम सभी मिलकर हिन्दुओ के साथ हो रहे अत्याचारों पर आवाज उठाये और उन्हें सुरक्षित करने में सहायक बने।
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आजीवन स्वस्थ रहने के नियम
25 March 2022
azaadbharat.org
🚩आजकल पाये जाने वाले अधिकांश रोगों का कारण अस्त-व्यस्त दिनचर्या व विपरीत आहार ही है। हम अपनी दिनचर्या शरीर की जैविक घड़ी के अनुरूप बनाये रखें तो शरीर के विभिन्न अंगों की सक्रियता का हमें अनायास ही लाभ मिलेगा। इस प्रकार थोड़ी-सी सजगता हमें स्वस्थ जीवन की प्राप्ति करा देगी।
🚩जैविक घड़ी पर आधारित शरीर की दिनचर्या ऐसे बनाएं…
★ प्रातः 3 से 5 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से फेफड़ो में होती है। थोड़ा गुनगुना पानी पीकर खुली हवा में घूमना एवं प्राणायाम करना चाहिए । इस समय दीर्घ श्वसन करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता खूब विकसित होती है। उन्हें शुद्ध वायु ( ऑक्सीजन) और ऋण आयन विपुल मात्रा में मिलने से शरीर स्वस्थ व स्फूर्तिमान होता है। ब्रह्म मुहूर्त में उठने वाले लोग बुद्धिमान व उत्साही होते है, और सोते रहनेवालो का जीवन निस्तेज हो जाता है ।
★ प्रातः 5 से 7 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से आंत में होती है। प्रातः जागरण से लेकर सुबह 7 बजे के बीच मल-त्याग एवं स्नान कर लेना चाहिए । सुबह 7 के बाद जो मल – त्याग करते हैं, उनकी आँतें मल में से त्याज्य द्रवांश का शोषण कर मल को सुखा देती हैं। इससे कब्ज तथा कई अन्य रोग उत्पन्न होते हैं।
★ सुबह 7 से 9 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से आमाशय में होती है। यह समय भोजन के लिए उपर्युक्त है । इस समय पाचक रस अधिक बनते हैं। भोजन के बीच –बीच में गुनगुना पानी (अनुकूलता अनुसार ) घूँट-घूँट पिये।
★ सुबह 11 से 1 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से हृदय में होती है। दोपहर 12 बजे के आस–पास मध्याह्न – संध्या (आराम ) करने की हमारी संस्कृति में विधान है। इसीलिए भोजन वर्जित है । इस समय तरल पदार्थ ले सकते हैं। जैसे मट्ठा पी सकते हैं। दही खा सकते हैं।
★ दोपहर 1 से 3 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से छोटी आंत में होती है। इसका कार्य आहार से मिले पोषक तत्त्वों का अवशोषण व व्यर्थ पदार्थों को बड़ी आँत की ओर धकेलना है। भोजन के बाद प्यास अनुरूप पानी पीना चाहिए । इस समय भोजन करने अथवा सोने से पोषक आहार-रस के शोषण में अवरोध उत्पन्न होता है व शरीर रोगी तथा दुर्बल हो जाता है ।
★ दोपहर 3 से 5 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से मूत्राशय में होती है । 2-4 घंटे पहले पिये पानी से इस समय मूत्र-त्याग की प्रवृति होती है।
★ शाम 5 से 7 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से गुर्दे में होती है । इस समय हल्का भोजन कर लेना चाहिए । शाम को सूर्यास्त से 40 मिनट पहले भोजन कर लेना उत्तम रहेगा। सूर्यास्त के 10 मिनट पहले से 10 मिनट बाद तक (संध्याकाल) भोजन नही करना चाहिए। शाम को भोजन के तीन घंटे बाद दूध पी सकते हैं । देर रात को किया गया भोजन सुस्ती लाता है यह अनुभवगम्य है।
★ रात्रि 7 से 9 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से मस्तिष्क में होती है । इस समय मस्तिष्क विशेष रूप से सक्रिय रहता है । अतः प्रातःकाल के अलावा इस काल में पढ़ा हुआ पाठ जल्दी याद रह जाता है । आधुनिक अन्वेषण से भी इसकी पुष्टि हुई है।
★ रात्रि 9 से 11 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से रीढ़ की हड्डी में स्थित मेरुरज्जु में होती है। इस समय पीठ के बल या बायीं करवट लेकर विश्राम करने से मेरूरज्जु को प्राप्त शक्ति को ग्रहण करने में मदद मिलती है। इस समय की नींद सर्वाधिक विश्रांति प्रदान करती है । इस समय का जागरण शरीर व बुद्धि को थका देता है । यदि इस समय भोजन किया जाय तो वह सुबह तक जठर में पड़ा रहता है, पचता नहीं और उसके सड़ने से हानिकारक द्रव्य पैदा होते हैं जो अम्ल (एसिड) के साथ आँतों में जाने से रोग उत्पन्न करते हैं। इसलिए इस समय भोजन करना खतरनाक है।
★ रात्री 11 से 1 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से पित्ताशय में होती है । इस समय का जागरण पित्त-विकार, अनिद्रा , नेत्ररोग उत्पन्न करता है व बुढ़ापा जल्दी लाता है । इस समय नई कोशिकाएं बनती हैं ।
★ रात्रि 1 से 3 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से लीवर में होती है । अन्न का सूक्ष्म पाचन करना यह यकृत का कार्य है। इस समय का जागरण यकृत (लीवर) व पाचन-तंत्र को बिगाड़ देता है । इस समय यदि जागते रहे तो शरीर नींद के वशीभूत होने लगता हैं, दृष्टि मंद होती है और शरीर की प्रतिक्रियाएं मंद होती हैं। अतः इस समय सड़क दुर्घटनाएँ अधिक होती हैं।
🚩नोट :– ऋषियों व आयुर्वेदाचार्यों ने बिना भूख लगे भोजन करना वर्जित बताया है। अतः प्रातः एवं शाम के भोजन की मात्रा ऐसी रखे, जिससे ऊपर बताए भोजन के समय में खुलकर भूख लगे। जमीन पर कुछ बिछाकर सुखासन में बैठकर ही भोजन करें। इस आसन में मूलाधार चक्र सक्रिय होने से जठराग्नि प्रदीप्त रहती है। कुर्सी पर बैठकर भोजन करने में पाचनशक्ति कमजोर तथा खड़े होकर भोजन करने से तो बिल्कुल नहींवत् हो जाती है। इसलिए ʹबुफे डिनरʹ से बचना चाहिए।
25 March 2022
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🚩आजकल पाये जाने वाले अधिकांश रोगों का कारण अस्त-व्यस्त दिनचर्या व विपरीत आहार ही है। हम अपनी दिनचर्या शरीर की जैविक घड़ी के अनुरूप बनाये रखें तो शरीर के विभिन्न अंगों की सक्रियता का हमें अनायास ही लाभ मिलेगा। इस प्रकार थोड़ी-सी सजगता हमें स्वस्थ जीवन की प्राप्ति करा देगी।
🚩जैविक घड़ी पर आधारित शरीर की दिनचर्या ऐसे बनाएं…
★ प्रातः 3 से 5 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से फेफड़ो में होती है। थोड़ा गुनगुना पानी पीकर खुली हवा में घूमना एवं प्राणायाम करना चाहिए । इस समय दीर्घ श्वसन करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता खूब विकसित होती है। उन्हें शुद्ध वायु ( ऑक्सीजन) और ऋण आयन विपुल मात्रा में मिलने से शरीर स्वस्थ व स्फूर्तिमान होता है। ब्रह्म मुहूर्त में उठने वाले लोग बुद्धिमान व उत्साही होते है, और सोते रहनेवालो का जीवन निस्तेज हो जाता है ।
★ प्रातः 5 से 7 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से आंत में होती है। प्रातः जागरण से लेकर सुबह 7 बजे के बीच मल-त्याग एवं स्नान कर लेना चाहिए । सुबह 7 के बाद जो मल – त्याग करते हैं, उनकी आँतें मल में से त्याज्य द्रवांश का शोषण कर मल को सुखा देती हैं। इससे कब्ज तथा कई अन्य रोग उत्पन्न होते हैं।
★ सुबह 7 से 9 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से आमाशय में होती है। यह समय भोजन के लिए उपर्युक्त है । इस समय पाचक रस अधिक बनते हैं। भोजन के बीच –बीच में गुनगुना पानी (अनुकूलता अनुसार ) घूँट-घूँट पिये।
★ सुबह 11 से 1 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से हृदय में होती है। दोपहर 12 बजे के आस–पास मध्याह्न – संध्या (आराम ) करने की हमारी संस्कृति में विधान है। इसीलिए भोजन वर्जित है । इस समय तरल पदार्थ ले सकते हैं। जैसे मट्ठा पी सकते हैं। दही खा सकते हैं।
★ दोपहर 1 से 3 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से छोटी आंत में होती है। इसका कार्य आहार से मिले पोषक तत्त्वों का अवशोषण व व्यर्थ पदार्थों को बड़ी आँत की ओर धकेलना है। भोजन के बाद प्यास अनुरूप पानी पीना चाहिए । इस समय भोजन करने अथवा सोने से पोषक आहार-रस के शोषण में अवरोध उत्पन्न होता है व शरीर रोगी तथा दुर्बल हो जाता है ।
★ दोपहर 3 से 5 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से मूत्राशय में होती है । 2-4 घंटे पहले पिये पानी से इस समय मूत्र-त्याग की प्रवृति होती है।
★ शाम 5 से 7 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से गुर्दे में होती है । इस समय हल्का भोजन कर लेना चाहिए । शाम को सूर्यास्त से 40 मिनट पहले भोजन कर लेना उत्तम रहेगा। सूर्यास्त के 10 मिनट पहले से 10 मिनट बाद तक (संध्याकाल) भोजन नही करना चाहिए। शाम को भोजन के तीन घंटे बाद दूध पी सकते हैं । देर रात को किया गया भोजन सुस्ती लाता है यह अनुभवगम्य है।
★ रात्रि 7 से 9 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से मस्तिष्क में होती है । इस समय मस्तिष्क विशेष रूप से सक्रिय रहता है । अतः प्रातःकाल के अलावा इस काल में पढ़ा हुआ पाठ जल्दी याद रह जाता है । आधुनिक अन्वेषण से भी इसकी पुष्टि हुई है।
★ रात्रि 9 से 11 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से रीढ़ की हड्डी में स्थित मेरुरज्जु में होती है। इस समय पीठ के बल या बायीं करवट लेकर विश्राम करने से मेरूरज्जु को प्राप्त शक्ति को ग्रहण करने में मदद मिलती है। इस समय की नींद सर्वाधिक विश्रांति प्रदान करती है । इस समय का जागरण शरीर व बुद्धि को थका देता है । यदि इस समय भोजन किया जाय तो वह सुबह तक जठर में पड़ा रहता है, पचता नहीं और उसके सड़ने से हानिकारक द्रव्य पैदा होते हैं जो अम्ल (एसिड) के साथ आँतों में जाने से रोग उत्पन्न करते हैं। इसलिए इस समय भोजन करना खतरनाक है।
★ रात्री 11 से 1 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से पित्ताशय में होती है । इस समय का जागरण पित्त-विकार, अनिद्रा , नेत्ररोग उत्पन्न करता है व बुढ़ापा जल्दी लाता है । इस समय नई कोशिकाएं बनती हैं ।
★ रात्रि 1 से 3 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से लीवर में होती है । अन्न का सूक्ष्म पाचन करना यह यकृत का कार्य है। इस समय का जागरण यकृत (लीवर) व पाचन-तंत्र को बिगाड़ देता है । इस समय यदि जागते रहे तो शरीर नींद के वशीभूत होने लगता हैं, दृष्टि मंद होती है और शरीर की प्रतिक्रियाएं मंद होती हैं। अतः इस समय सड़क दुर्घटनाएँ अधिक होती हैं।
🚩नोट :– ऋषियों व आयुर्वेदाचार्यों ने बिना भूख लगे भोजन करना वर्जित बताया है। अतः प्रातः एवं शाम के भोजन की मात्रा ऐसी रखे, जिससे ऊपर बताए भोजन के समय में खुलकर भूख लगे। जमीन पर कुछ बिछाकर सुखासन में बैठकर ही भोजन करें। इस आसन में मूलाधार चक्र सक्रिय होने से जठराग्नि प्रदीप्त रहती है। कुर्सी पर बैठकर भोजन करने में पाचनशक्ति कमजोर तथा खड़े होकर भोजन करने से तो बिल्कुल नहींवत् हो जाती है। इसलिए ʹबुफे डिनरʹ से बचना चाहिए।
🚩पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का लाभ लेने हेतु सिर पूर्व या दक्षिण दिशा में करके ही सोयें, अन्यथा अनिद्रा जैसी तकलीफें होती हैं।
🚩शरीर की जैविक घड़ी को ठीक ढंग से चलाने हेतु रात्रि को बत्ती बंद करके सोयें। इस संदर्भ में हुए शोध चौंकाने वाले हैं। देर रात तक कार्य या अध्ययन करने से और बत्ती चालू रख के सोने से जैविक घड़ी निष्क्रिय होकर भयंकर स्वास्थ्य-संबंधी हानियाँ होती हैं। अँधेरे में अथवा कम प्रकाश में सोने से यह जैविक घड़ी ठीक ढंग से चलती है।
🚩आप अपना जीवन नियमित बनाएं और स्वस्थ रहें।
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🚩शरीर की जैविक घड़ी को ठीक ढंग से चलाने हेतु रात्रि को बत्ती बंद करके सोयें। इस संदर्भ में हुए शोध चौंकाने वाले हैं। देर रात तक कार्य या अध्ययन करने से और बत्ती चालू रख के सोने से जैविक घड़ी निष्क्रिय होकर भयंकर स्वास्थ्य-संबंधी हानियाँ होती हैं। अँधेरे में अथवा कम प्रकाश में सोने से यह जैविक घड़ी ठीक ढंग से चलती है।
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स्वस्थ शरीर सुखी जीवन के लिए आँवला , तुलसी , केले , तरबूज, सेबफल, चुकन्दर जैसे प्रकृति के अनमोल उत्पादों का सेवन करें
और
जीवन में शाकाहार अपनाए,जीव हिंसा से बचे और रोगों से दूर रहे।
स्वस्थ रहे-सुखी रहें।
*26 मार्च 2022*
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🚩आँवला : आयुर्वेद शास्त्रों में आंवला को अमृत समान कहा गया है,आँवला त्रिदोषनाशक है।
शरीर की गर्मी को पित्त जन्य बीमारियों को आँवला जड़ मूल नष्ट करता है।
जो आँवला या आँवला चूर्ण या आँवला केन्डी, या आँवला मुरब्बा का सेवन करता है, उनसे रोग दूर भागते है।
🚩तुलसी: आयुर्वेद शास्त्रों में लिखा है कि तुलसी के 1 पत्ते खाने से कई तरह की बीमारियों से रक्षा हो जाती है,तुलसी से महामारियों से रक्षा होती है,तुलसी से यादशक्ति बढ़ती है,स्किन एलर्जी दूर होती है इसके अलावा सर्दी, खांसी, कफ,मलेरिया, टाइफाइड जैसे रोगों को दूर करने में तुलसी का अदभुत फायदा होता है ।
🚩हल्दी: हल्दी एंटीबायोटिक है,गुनगुने दूध में 1 चुटकी हल्दी डालकर पीने से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है ।
🚩केला: ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,हड्डियों को मजबूत बनाता है,हृदय की सुरक्षा करता है,अतिसार में लाभदायक है,वजन बढ़ाता है।
🚩जामुन: केन्सर की रोक थाम,हृदय की सुरक्षा,कब्ज मिटाता है,स्मरण शक्ति बढाता है,रक्त शर्करा नियंत्रित करता है। डायबीटीज में अति लाभदायक।
🚩सेवफ़ल: हृदय की सुरक्षा करता है, दस्त रोकता है,कब्ज में फ़ायदेमंद है,फ़ेफ़डे की शक्ति बढाता है एवं हीमोग्लोबिन बढ़ाता है।
🚩चुकंदर: वजन घटाता है,ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,अस्थिक्छरण रोकता है,केंसर के विरुद्ध लडता है,हृदय की सुरक्षा करता है, रक्त बढ़ाता है।
🚩पत्ता गोभी: बवासीर में हितकारी है,हृदय रोगों में लाभदायक है,कब्ज मिटाता है,वजन घटाने में सहायक है। केंसर में फ़ायदेमंद है।
🚩गाजर:नेत्र ज्योति वर्धक है, केंसर प्रतिरोधक है, वजन घटाने मेँ सहायक है, कब्ज मिटाता है, हृदय की सुरक्षा करता है।
🚩फ़ूल गोभी:हड्डियों को मजबूत बनाता है, स्तन केंसर से बचाव करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के केंसर में भी उपयोगी है, चोंट,खरोंच ठीक करता है।
🚩लहसुन: कोलेस्टरोल घटाती है, रक्त चाप घटाती है, पेट के रोग दूर करता , कीटाणुनाशक है,केंसर से लडती है ।
🚩नींबू:त्वचा को मुलायम बनाता है,केंसर अवरोधक है, हृदय की सुरक्षा करता है,,ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है, स्कर्वी रोग नाशक है,गर्मियों से रक्षा करता है
🚩अंगूर: रक्त प्रवाह वर्धक है, हृदय की सुरक्षा करता है, केंसर से लडता है, गुर्दे की पथरी नष्ट करता है, नेत्र ज्योति वर्धक है,पेट साफ करता है
🚩आम:केंसर से बचाव करता है,थायराईड रोग में हितकारी है, पाचन शक्ति बढाता है, याददाश्त की कमजोरी में हितकर है,वजन बढ़ाता।
🚩प्याज: फ़ंगस रोधी गुण हैं, हार्ट अटेक की रिस्क को कम करता है। जीवाणु नाशक है,केंसर विरोधी है खराब कोलेस्टरोल को घटाता है ,गर्मी से बचाव करता।
🚩अलसी के बीज:मानसिक शक्ति वर्धक है, रोग प्रतिकारक शक्ति को ताकत देता है, डायबीटीज में उपकारी है, हृदय की सुरक्षा करता है, पाचन शक्ति को ठीक करता है।
🚩संतरा:हृदय की सुरक्षा करता है, रोग प्रतिकारक शक्ति उन्नत करता है,, श्वसन पथ के विकारों में लाभकारी है, केंसर में हितकारी है ,गर्मियों के रोग दूर करता।
🚩टमाटर:कोलेस्टरोल कम करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के स्वास्थ्य के लिये उपकारी है,केंसर से बचाव करता है, हृदय की सुरक्षा ,कृमि दूर करता।
🚩पानी: गुर्दे की पथरी नाशक है, केसर के विरुद्ध लडता है, त्वचा के चमक बढाता है,जल ही जीवन है।
🚩अखरोट: मूड उन्नत करन में सहायक है, मेमोरी पावर बढाता है,केंसर से लड सकता है, हृदय रोगों से बचाव करता है, कोलेस्टरोल घटाने मं मददगार है।
🚩तरबूज: स्ट्रोक रोकने में उपयोगी है, प्रोस्टेट के स्वास्थ्य के लियेओ हितकारी है, रक्तचाप घटाता है,हीमोग्लोबिन बढ़ाता है।
🚩अंकुरित गेहूं: बडी आंत की केंसर से लडता है, कब्ज प्रतिकारक है, स्ट्रोक से रक्षा करता है, कोलेस्टरोल कम करता है, पाचन सुधारता है।
🚩चावल: किडनी स्टोन में हितकारी है, डायबीटीज में लाभदायक है,स्ट्रोक से बचाव करता है, केंसर से लडता है, हृदय की सुरक्षा करता है।
🚩आलू बुखारा: हृदय रोगों से बचाव करता है, बुढापा जल्द आने से रोकता है, याददाश्त बढाता है, कोलेस्टरोल घटाता है, कब्ज प्रतिकारक है।
🚩पाईनएपल: अतिसार(दस्त) रोकता है, वार्ट्स(मस्से) ठीक करता है, सर्दी,ठंड से बचाव करता है, अस्थि क्छरण रोकता है। पाचन सुधारता है।
🚩जौ,जई: कोलेस्टरोल घटाता है,केंसर से लडता है, डायबीटीज में उपकारी है,,कब्ज प्रतिकारक् है ,त्वचा पर शाईनिंग लाता है।
🚩अंजीर:रक्त चाप नियंत्रित करता है, स्ट्रोक्स से बचाता है, कोलेस्टरोल कम करता है, केंसर से लडता है,पेट की कृमि दूर करता है
और
जीवन में शाकाहार अपनाए,जीव हिंसा से बचे और रोगों से दूर रहे।
स्वस्थ रहे-सुखी रहें।
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🚩आँवला : आयुर्वेद शास्त्रों में आंवला को अमृत समान कहा गया है,आँवला त्रिदोषनाशक है।
शरीर की गर्मी को पित्त जन्य बीमारियों को आँवला जड़ मूल नष्ट करता है।
जो आँवला या आँवला चूर्ण या आँवला केन्डी, या आँवला मुरब्बा का सेवन करता है, उनसे रोग दूर भागते है।
🚩तुलसी: आयुर्वेद शास्त्रों में लिखा है कि तुलसी के 1 पत्ते खाने से कई तरह की बीमारियों से रक्षा हो जाती है,तुलसी से महामारियों से रक्षा होती है,तुलसी से यादशक्ति बढ़ती है,स्किन एलर्जी दूर होती है इसके अलावा सर्दी, खांसी, कफ,मलेरिया, टाइफाइड जैसे रोगों को दूर करने में तुलसी का अदभुत फायदा होता है ।
🚩हल्दी: हल्दी एंटीबायोटिक है,गुनगुने दूध में 1 चुटकी हल्दी डालकर पीने से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है ।
🚩केला: ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,हड्डियों को मजबूत बनाता है,हृदय की सुरक्षा करता है,अतिसार में लाभदायक है,वजन बढ़ाता है।
🚩जामुन: केन्सर की रोक थाम,हृदय की सुरक्षा,कब्ज मिटाता है,स्मरण शक्ति बढाता है,रक्त शर्करा नियंत्रित करता है। डायबीटीज में अति लाभदायक।
🚩सेवफ़ल: हृदय की सुरक्षा करता है, दस्त रोकता है,कब्ज में फ़ायदेमंद है,फ़ेफ़डे की शक्ति बढाता है एवं हीमोग्लोबिन बढ़ाता है।
🚩चुकंदर: वजन घटाता है,ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,अस्थिक्छरण रोकता है,केंसर के विरुद्ध लडता है,हृदय की सुरक्षा करता है, रक्त बढ़ाता है।
🚩पत्ता गोभी: बवासीर में हितकारी है,हृदय रोगों में लाभदायक है,कब्ज मिटाता है,वजन घटाने में सहायक है। केंसर में फ़ायदेमंद है।
🚩गाजर:नेत्र ज्योति वर्धक है, केंसर प्रतिरोधक है, वजन घटाने मेँ सहायक है, कब्ज मिटाता है, हृदय की सुरक्षा करता है।
🚩फ़ूल गोभी:हड्डियों को मजबूत बनाता है, स्तन केंसर से बचाव करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के केंसर में भी उपयोगी है, चोंट,खरोंच ठीक करता है।
🚩लहसुन: कोलेस्टरोल घटाती है, रक्त चाप घटाती है, पेट के रोग दूर करता , कीटाणुनाशक है,केंसर से लडती है ।
🚩नींबू:त्वचा को मुलायम बनाता है,केंसर अवरोधक है, हृदय की सुरक्षा करता है,,ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है, स्कर्वी रोग नाशक है,गर्मियों से रक्षा करता है
🚩अंगूर: रक्त प्रवाह वर्धक है, हृदय की सुरक्षा करता है, केंसर से लडता है, गुर्दे की पथरी नष्ट करता है, नेत्र ज्योति वर्धक है,पेट साफ करता है
🚩आम:केंसर से बचाव करता है,थायराईड रोग में हितकारी है, पाचन शक्ति बढाता है, याददाश्त की कमजोरी में हितकर है,वजन बढ़ाता।
🚩प्याज: फ़ंगस रोधी गुण हैं, हार्ट अटेक की रिस्क को कम करता है। जीवाणु नाशक है,केंसर विरोधी है खराब कोलेस्टरोल को घटाता है ,गर्मी से बचाव करता।
🚩अलसी के बीज:मानसिक शक्ति वर्धक है, रोग प्रतिकारक शक्ति को ताकत देता है, डायबीटीज में उपकारी है, हृदय की सुरक्षा करता है, पाचन शक्ति को ठीक करता है।
🚩संतरा:हृदय की सुरक्षा करता है, रोग प्रतिकारक शक्ति उन्नत करता है,, श्वसन पथ के विकारों में लाभकारी है, केंसर में हितकारी है ,गर्मियों के रोग दूर करता।
🚩टमाटर:कोलेस्टरोल कम करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के स्वास्थ्य के लिये उपकारी है,केंसर से बचाव करता है, हृदय की सुरक्षा ,कृमि दूर करता।
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🚩तरबूज: स्ट्रोक रोकने में उपयोगी है, प्रोस्टेट के स्वास्थ्य के लियेओ हितकारी है, रक्तचाप घटाता है,हीमोग्लोबिन बढ़ाता है।
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🚩चावल: किडनी स्टोन में हितकारी है, डायबीटीज में लाभदायक है,स्ट्रोक से बचाव करता है, केंसर से लडता है, हृदय की सुरक्षा करता है।
🚩आलू बुखारा: हृदय रोगों से बचाव करता है, बुढापा जल्द आने से रोकता है, याददाश्त बढाता है, कोलेस्टरोल घटाता है, कब्ज प्रतिकारक है।
🚩पाईनएपल: अतिसार(दस्त) रोकता है, वार्ट्स(मस्से) ठीक करता है, सर्दी,ठंड से बचाव करता है, अस्थि क्छरण रोकता है। पाचन सुधारता है।
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🚩अंजीर:रक्त चाप नियंत्रित करता है, स्ट्रोक्स से बचाता है, कोलेस्टरोल कम करता है, केंसर से लडता है,पेट की कृमि दूर करता है
🚩शकरकंद: आंखों की रोशनी बढाता है,मूड उन्नत करता है, हड्डिया बलवान बनाता है, केंसर से लडता है ।
🚩जीवन में शाकाहार अपनाएं और जीव हिंसा से बचें , रोगों से दूर और स्वस्थ रहे।
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30 मार्च 2022 बुधवार को करोड़ो गुणा पुण्य देने वाला वारुणी योग
100 सूर्यग्रहण के समय में जो जप-तप का पुण्य मिलता है,वो वारुणी योग में 1 बार गंगा स्नान से पुण्य मिल जाता है।
27 मार्च 2022
http://azaadbharat.org
🚩वारुणी शुभ योग में पवित्र नदी में स्नान और दान करने का विशेष महत्व बताया गया है,साथ ही इस दौरान जप-तप व अन्य उपाय भी किए जा सकते हैं। यह योग अत्यंत दुर्लभ और लाभदायक होता है।
🚩वारूणी योग के बारे में कहा गया है कि चैत्र कृष्ण त्रयोदशी शततारका नक्षत्रयुता वारूणी संज्ञका स्नानादिना ग्रहणादि पर्वतुल्य फलदा अर्थात्- चैत्र कृष्ण त्रयोदशी के दिन शततारका अर्थात् शतभिषा नक्षत्र की युति हो तो वारूणी नाम का योग बनता है जिसमें स्नान व जप-तपादि करने से सूर्य ग्रहण के समान फल प्राप्त होता है।
🚩शुभ फल पाने के लिए वारुणी योग में किसी पवित्र नदी में स्नान करें और शिव मंदिर में पूजा करें। इससे जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। यदि पवित्र नदियों में स्नान करने का संयोग ना बन पाए तो अपने घर में ही पवित्र नदियों का जल डालकर स्नान करें।
*ल🚩 वारुणी योग में भगवान शिव का रुद्राभिषेक करें या किसी योग्य पंडित से करवाएं। इससे आपकी हर इच्छा पूरी हो सकती है।
🚩वारुणी योग मंत्र जप, अनुष्ठान, यज्ञ, हवन आदि करने का बड़ा महत्व है। ऐसा करने वालों को हजारों यज्ञों का पुण्य मिलता है।
🚩 ज्योतिष शास्त्र के सर्वश्रेष्ठ और शुभ योगों में से एक वारूणी योग चैत्र कृष्ण त्रयोदशी 30 मार्च 2022 को सूर्योदय से सुबह 10:48 बजे तक रहेगा । यह योग अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी योग कहलाता है। इसमें पवित्र नदियों में स्नान,दान-पुण्य, जप, तप आदि करने का फल सूर्यग्रहण -चंद्र ग्रहण के समय किए गए स्नान-दान के समान प्राप्त होता है। चैत्र माह में बनने वाला यह एक अत्यंत पुण्यप्रद महायोग होता है।
🚩वारुणी योग में गंगा, यमुना, नर्मदा, कावेरी, गोदावरी समेत अन्य पवित्र नदियों में स्नान और दान का बड़ा महत्व है। वारुणी योग में हरिद्वार, इलाहाबाद, वाराणसी, उज्जैन, रामेश्वरम, नासिक आदि तीर्थ स्थलों पर नदियों में स्नान करके भगवान शिव की पूजा की जाती है। इससे जीवन में समस्त प्रकार के सुख, ऐश्वर्य प्राप्त होते हैं। वारुणी योग के दिन भगवान शिव की पूजा, अभिषेक से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन मंत्र जप, अनुष्ठान, यज्ञ, हवन आदि करने का बड़ा महत्व है। पुराणों का कथन है कि इस दिन किए गए एक यज्ञ का फल हजारों यज्ञों के समान मिलता है। यदि पवित्र नदियों में स्नान करने का संयोग ना बन पाए तो अपने घर में ही पवित्र नदियों का जल डालकर स्नान करें।
🚩वारुणी योग में शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाएं, बेलपत्र की माला अर्पित करें। शिवलिंग पर एक जोड़ा केला चढ़ाएं और वहीं बैठकर शिव पंचाक्षरी मंत्र का जाप करें। इससे आशातीत पुण्य होता है।
🚩किसी विशेष मंत्र की सिद्धि करना हो तो इस योग में जरूर जप करें तो मंत्र जल्दी सिद्ध होता है।
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100 सूर्यग्रहण के समय में जो जप-तप का पुण्य मिलता है,वो वारुणी योग में 1 बार गंगा स्नान से पुण्य मिल जाता है।
27 मार्च 2022
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🚩वारुणी शुभ योग में पवित्र नदी में स्नान और दान करने का विशेष महत्व बताया गया है,साथ ही इस दौरान जप-तप व अन्य उपाय भी किए जा सकते हैं। यह योग अत्यंत दुर्लभ और लाभदायक होता है।
🚩वारूणी योग के बारे में कहा गया है कि चैत्र कृष्ण त्रयोदशी शततारका नक्षत्रयुता वारूणी संज्ञका स्नानादिना ग्रहणादि पर्वतुल्य फलदा अर्थात्- चैत्र कृष्ण त्रयोदशी के दिन शततारका अर्थात् शतभिषा नक्षत्र की युति हो तो वारूणी नाम का योग बनता है जिसमें स्नान व जप-तपादि करने से सूर्य ग्रहण के समान फल प्राप्त होता है।
🚩शुभ फल पाने के लिए वारुणी योग में किसी पवित्र नदी में स्नान करें और शिव मंदिर में पूजा करें। इससे जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। यदि पवित्र नदियों में स्नान करने का संयोग ना बन पाए तो अपने घर में ही पवित्र नदियों का जल डालकर स्नान करें।
*ल🚩 वारुणी योग में भगवान शिव का रुद्राभिषेक करें या किसी योग्य पंडित से करवाएं। इससे आपकी हर इच्छा पूरी हो सकती है।
🚩वारुणी योग मंत्र जप, अनुष्ठान, यज्ञ, हवन आदि करने का बड़ा महत्व है। ऐसा करने वालों को हजारों यज्ञों का पुण्य मिलता है।
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🚩वारुणी योग में गंगा, यमुना, नर्मदा, कावेरी, गोदावरी समेत अन्य पवित्र नदियों में स्नान और दान का बड़ा महत्व है। वारुणी योग में हरिद्वार, इलाहाबाद, वाराणसी, उज्जैन, रामेश्वरम, नासिक आदि तीर्थ स्थलों पर नदियों में स्नान करके भगवान शिव की पूजा की जाती है। इससे जीवन में समस्त प्रकार के सुख, ऐश्वर्य प्राप्त होते हैं। वारुणी योग के दिन भगवान शिव की पूजा, अभिषेक से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन मंत्र जप, अनुष्ठान, यज्ञ, हवन आदि करने का बड़ा महत्व है। पुराणों का कथन है कि इस दिन किए गए एक यज्ञ का फल हजारों यज्ञों के समान मिलता है। यदि पवित्र नदियों में स्नान करने का संयोग ना बन पाए तो अपने घर में ही पवित्र नदियों का जल डालकर स्नान करें।
🚩वारुणी योग में शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाएं, बेलपत्र की माला अर्पित करें। शिवलिंग पर एक जोड़ा केला चढ़ाएं और वहीं बैठकर शिव पंचाक्षरी मंत्र का जाप करें। इससे आशातीत पुण्य होता है।
🚩किसी विशेष मंत्र की सिद्धि करना हो तो इस योग में जरूर जप करें तो मंत्र जल्दी सिद्ध होता है।
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क्या किया संत श्रीआशारामजी बापू ने.....लाखों लोगों को नशे से मुक्त कराया,14 फरवरी को वैलेंटाइन डे की जगह मातृ-पितृ पूजन दिवस प्रारम्भ करवाया, 25 दिसंबर को क्रिसमस की जगह तुलसी पूजन दिवस प्रारम्भ करवाया एवं ईसाई मिशनरियों द्वारा हो रहे धर्मान्तरण को रोका,इसलिए विधर्मियों ने षड्यंत्र रचा और बापूजी को एक फर्जी केस में जेल करावा दी।
28 मार्च 2022
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🚩हिंदू संत आशारामजी बापू के बारे में तो सब जानते ही है कि उन्होंने समाज, देश और संस्कृति बचाने का अथाह कार्य किया जिसके कारण झुठा केस बनाकर साजिश के तहत जेल भेज गया।
🚩बापू आशारामजी ने क्या किया और आज भी उनके आश्रमों द्वारा क्या प्रवृत्तियां चल रही है देख लीजिए...
1). लाखों धर्मांतरित ईसाईयों को पुनः हिंदू बनाया व करोड़ों हिन्दुओं को अपने धर्म के प्रति जागरूक किया व आदिवासी इलाकों में जाकर जीवनोपयोगी सामग्री, मकान, पैसे, दवाइयां आदि दी जिससे धर्मान्तरण करने वालों का धंधा चौपट हो गया।
https://youtu.be/8Xrhgjye3XY
2). कत्लखानों में जाती हज़ारों गौ-माताओं को बचाकर, उनके लिए विशाल गौशालाओं का निर्माण करवाया।
https://youtu.be/d8RdbBjfjF8
3). शिकागो विश्व धर्मपरिषद में स्वामी विवेकानंदजी के 100 साल बाद जाकर हिन्दू संस्कृति का परचम लहराया।
https://youtu.be/wmswegtRqus
4). विदेशी कंपनियों द्वारा देश को लूटने से बचाकर आयुर्वेद/होम्योपैथी के प्रचार-प्रसार द्वारा एलोपैथिक दवाईयों के कुप्रभाव से असंख्य लोगों का स्वास्थ्य और पैसा बचाया।
https://youtu.be/fhwcW1mT92M
5). लाखों-करोड़ों विद्यार्थियों को सारस्वत्य मंत्र देकर और योग व उच्च संस्कार का प्रशिक्षण देकर ओजस्वी- तेजस्वी बनाया।
6). लंदन, पाकिस्तान, चाईना, अमेरिका और बहुत सारे देशों में जाकर सनातन हिंदू धर्म का ध्वज फहराया, पाकिस्तान में तो कराची में गाजी दरगाह में दोपहर की अजान के समय भी वे हरि कथा करते रहे।
7). वैलेंटाइन डे का विरोध करके "मातृ-पितृ पूजन दिवस" का प्रारम्भ करवाया।
https://youtu.be/LO7MWmLPz7w
8). क्रिसमस डे के दिन प्लास्टिक के क्रिसमस ट्री को सजाने के बजाय, तुलसी पूजन दिवस मनाना शुरू करवाया।
https://www.youtube.com/playlist?list=PLbBmiOH-57U42_T8gMe-Q1pE7sO78E1Sq
9). करोड़ों लोगों को अधर्म से धर्म की ओर मोड़ दिया।
10). नशा मुक्ति अभियान के द्वारा करोड़ों लोगों को व्यसन-मुक्त कराया।
11). वैदिक शिक्षा पर आधारित अनेकों गुरुकुल खुलवाएं।
12). मुश्किल हालातों में कांची कामकोटि पीठ के "शंकराचार्य श्री जयेंद्र सरस्वतीजी", बाबा रामदेव, मोरारी बापूजी, साध्वी प्रज्ञा एवं अन्य संतों का साथ दिया।*https://youtu.be/jZBu4ZSu-tE
🚩ऐसे अनेक भारतीय संस्कृति के उत्थान के कार्य किये हैं जो विस्तार से नहीं बता पा रहे हैं।
https://youtu.be/fhwcW1mT92M
🚩डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने तो यह भी बताया कि हिन्दू संत आशारामजी बापू ने लाखों हिंदुओं की घर वापसी की और करोड़ो लोगों को सनातन धर्म की तरफ ले आये इसके कारण वेटिकन सिटी ने सोनिया गाँधी को कहकर झूठे केस में फँसाया गया। उनके आश्रम में फेक्स भी आया था कि 50 करोड़ दो नहीं तो जेल जाने को तैयार रहो इससे साफ होता है कि उन पर अंतर्राष्ट्रीय षड्यंत्र हुआ है।
https://youtu.be/rwOJIG3YHEI
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28 मार्च 2022
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🚩हिंदू संत आशारामजी बापू के बारे में तो सब जानते ही है कि उन्होंने समाज, देश और संस्कृति बचाने का अथाह कार्य किया जिसके कारण झुठा केस बनाकर साजिश के तहत जेल भेज गया।
🚩बापू आशारामजी ने क्या किया और आज भी उनके आश्रमों द्वारा क्या प्रवृत्तियां चल रही है देख लीजिए...
1). लाखों धर्मांतरित ईसाईयों को पुनः हिंदू बनाया व करोड़ों हिन्दुओं को अपने धर्म के प्रति जागरूक किया व आदिवासी इलाकों में जाकर जीवनोपयोगी सामग्री, मकान, पैसे, दवाइयां आदि दी जिससे धर्मान्तरण करने वालों का धंधा चौपट हो गया।
https://youtu.be/8Xrhgjye3XY
2). कत्लखानों में जाती हज़ारों गौ-माताओं को बचाकर, उनके लिए विशाल गौशालाओं का निर्माण करवाया।
https://youtu.be/d8RdbBjfjF8
3). शिकागो विश्व धर्मपरिषद में स्वामी विवेकानंदजी के 100 साल बाद जाकर हिन्दू संस्कृति का परचम लहराया।
https://youtu.be/wmswegtRqus
4). विदेशी कंपनियों द्वारा देश को लूटने से बचाकर आयुर्वेद/होम्योपैथी के प्रचार-प्रसार द्वारा एलोपैथिक दवाईयों के कुप्रभाव से असंख्य लोगों का स्वास्थ्य और पैसा बचाया।
https://youtu.be/fhwcW1mT92M
5). लाखों-करोड़ों विद्यार्थियों को सारस्वत्य मंत्र देकर और योग व उच्च संस्कार का प्रशिक्षण देकर ओजस्वी- तेजस्वी बनाया।
6). लंदन, पाकिस्तान, चाईना, अमेरिका और बहुत सारे देशों में जाकर सनातन हिंदू धर्म का ध्वज फहराया, पाकिस्तान में तो कराची में गाजी दरगाह में दोपहर की अजान के समय भी वे हरि कथा करते रहे।
7). वैलेंटाइन डे का विरोध करके "मातृ-पितृ पूजन दिवस" का प्रारम्भ करवाया।
https://youtu.be/LO7MWmLPz7w
8). क्रिसमस डे के दिन प्लास्टिक के क्रिसमस ट्री को सजाने के बजाय, तुलसी पूजन दिवस मनाना शुरू करवाया।
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9). करोड़ों लोगों को अधर्म से धर्म की ओर मोड़ दिया।
10). नशा मुक्ति अभियान के द्वारा करोड़ों लोगों को व्यसन-मुक्त कराया।
11). वैदिक शिक्षा पर आधारित अनेकों गुरुकुल खुलवाएं।
12). मुश्किल हालातों में कांची कामकोटि पीठ के "शंकराचार्य श्री जयेंद्र सरस्वतीजी", बाबा रामदेव, मोरारी बापूजी, साध्वी प्रज्ञा एवं अन्य संतों का साथ दिया।*https://youtu.be/jZBu4ZSu-tE
🚩ऐसे अनेक भारतीय संस्कृति के उत्थान के कार्य किये हैं जो विस्तार से नहीं बता पा रहे हैं।
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विश्वगुरु भारत के बढ़ते कदम के पीछे भारत के संतों के शुभ संकल्प।
29 मार्च 2022
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🚩भारत देश संतो का देश है,विश्वगुरु भारत बने हमारा ऐसे शुभ संकल्प सदैव संत करते है,तभी तो आज भारत विश्वगुरु के रूप में नजर आ रहा है।
🚩भारत भूमि देव भूमि है,संतो की भूमि है और संतो के शुभ संकल्पों के कारण ही आज भारत विश्वगुरु के बढ़ते कदम पर है।
🚩आज पश्चिमी देशों के पास भारत ही है एकमात्र विकल्प है ,क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध से गहराये खाद्य संकट के बीच अब पश्चिमी देशों का अन्नदाता बनेगा भारत।
🚩 व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन पर आक्रमण के कारण अमेरिकी सरकार ने रूस पर प्रतिबंध लगा दिए है,अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि इन प्रतिबंधों के बाद अन्न की कमी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
🚩विश्व नेताओं के साथ बैठक के बाद बाइडेन ने बेल्जियम के ब्रुसेल्स में नाटो शिखर सम्मेलन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की बाइडेन ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया को खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है।
🚩 यूक्रेन-रूस युद्ध से सीधे तौर पर यूरोप प्रभावित हुआ है ,यूरोपीय देश खाद्य संकट का सामना करने लगें है , दुनिया भर में गेहूं की कीमतें आसमान छू रही हैं ,कुल मिलाकर रूस और यूक्रेन वैश्विक गेहूं निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा निर्यात करते हैं।
🚩 रूस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और यूक्रेन भी गेहूं के निर्यात को जारी रखने की स्थिति में नहीं है।
🚩संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों ने स्वीकार किया है कि एक वास्तविक और गंभीर भोजन की कमी उन्हें बहुत जल्द प्रभावित कर सकती है ,ऐसे में भारत ही एक मात्र ऐसा देश है,जो अमेरिका सहित अन्य पश्चिमी देशों की मदद कर सकता है।
🚩भारत 2020 में विश्व के कुल उत्पादन में से लगभग 14.14 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बना था , हाल ही में सरकार ने विदेशों में भारत के राजनयिक मिशनों को देश के रिकॉर्ड घरेलू गेहूं के भंडार और निर्यात के लिए सुविधा विकसित करने का निर्देश दिया था।
🚩वर्तमान में भारत में सरकारी अनाज भंडारों में 100 मिलियन टन से अधिक खाद्यान्न है,भारत सालाना लगभग 107.59 मिलियन मीट्रिक टन खाद्यान्न का उत्पादन करता है ,जबकि इसका एक बड़ा हिस्सा घरेलू खपत में जाता है , ऐसे समय में जब यूरोप और अमेरिका संकट से जूझ रहे हैं तो भारत मदद के लिए हाथ बढ़ाने को तैयार है।
🚩भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल का निर्यातक है 2019 में भारत ने 7.1 बिलियन डॉलर के चावल का निर्यात किया , जो वैश्विक चावल निर्यात का 32 प्रतिशत है, 2020 में वियतनाम और चीन जैसे प्रमुख चावल निर्यातकों को भी भारत ने अनाज निर्यात किया था।
🚩भारत सरकार ने रूस और यूक्रेन पर निर्भर बाजारों पर कब्जा करने के लिए एशिया और अफ्रीका के कई देशों में गेहूं के निर्यात को सुचारू रूप से करने के लिए कई उपाय किए हैं।
🚩एक समय था जब भारत को पश्चिम के अमीर और शक्तिशाली देशों ने घटिया प्रकार का अनाज भेजा था और आज वही भारत दुनिया के तथाकथित महाशक्तियों को उच्च गुणवत्ता वाले अनाज का निर्यात करेगा ताकि उनकी आबादी को भुखमरी के हालात न देखने पड़ें।
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29 मार्च 2022
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🚩भारत भूमि देव भूमि है,संतो की भूमि है और संतो के शुभ संकल्पों के कारण ही आज भारत विश्वगुरु के बढ़ते कदम पर है।
🚩आज पश्चिमी देशों के पास भारत ही है एकमात्र विकल्प है ,क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध से गहराये खाद्य संकट के बीच अब पश्चिमी देशों का अन्नदाता बनेगा भारत।
🚩 व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन पर आक्रमण के कारण अमेरिकी सरकार ने रूस पर प्रतिबंध लगा दिए है,अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि इन प्रतिबंधों के बाद अन्न की कमी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
🚩विश्व नेताओं के साथ बैठक के बाद बाइडेन ने बेल्जियम के ब्रुसेल्स में नाटो शिखर सम्मेलन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की बाइडेन ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया को खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है।
🚩 यूक्रेन-रूस युद्ध से सीधे तौर पर यूरोप प्रभावित हुआ है ,यूरोपीय देश खाद्य संकट का सामना करने लगें है , दुनिया भर में गेहूं की कीमतें आसमान छू रही हैं ,कुल मिलाकर रूस और यूक्रेन वैश्विक गेहूं निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा निर्यात करते हैं।
🚩 रूस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और यूक्रेन भी गेहूं के निर्यात को जारी रखने की स्थिति में नहीं है।
🚩संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों ने स्वीकार किया है कि एक वास्तविक और गंभीर भोजन की कमी उन्हें बहुत जल्द प्रभावित कर सकती है ,ऐसे में भारत ही एक मात्र ऐसा देश है,जो अमेरिका सहित अन्य पश्चिमी देशों की मदद कर सकता है।
🚩भारत 2020 में विश्व के कुल उत्पादन में से लगभग 14.14 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बना था , हाल ही में सरकार ने विदेशों में भारत के राजनयिक मिशनों को देश के रिकॉर्ड घरेलू गेहूं के भंडार और निर्यात के लिए सुविधा विकसित करने का निर्देश दिया था।
🚩वर्तमान में भारत में सरकारी अनाज भंडारों में 100 मिलियन टन से अधिक खाद्यान्न है,भारत सालाना लगभग 107.59 मिलियन मीट्रिक टन खाद्यान्न का उत्पादन करता है ,जबकि इसका एक बड़ा हिस्सा घरेलू खपत में जाता है , ऐसे समय में जब यूरोप और अमेरिका संकट से जूझ रहे हैं तो भारत मदद के लिए हाथ बढ़ाने को तैयार है।
🚩भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल का निर्यातक है 2019 में भारत ने 7.1 बिलियन डॉलर के चावल का निर्यात किया , जो वैश्विक चावल निर्यात का 32 प्रतिशत है, 2020 में वियतनाम और चीन जैसे प्रमुख चावल निर्यातकों को भी भारत ने अनाज निर्यात किया था।
🚩भारत सरकार ने रूस और यूक्रेन पर निर्भर बाजारों पर कब्जा करने के लिए एशिया और अफ्रीका के कई देशों में गेहूं के निर्यात को सुचारू रूप से करने के लिए कई उपाय किए हैं।
🚩एक समय था जब भारत को पश्चिम के अमीर और शक्तिशाली देशों ने घटिया प्रकार का अनाज भेजा था और आज वही भारत दुनिया के तथाकथित महाशक्तियों को उच्च गुणवत्ता वाले अनाज का निर्यात करेगा ताकि उनकी आबादी को भुखमरी के हालात न देखने पड़ें।
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मेरा नववर्ष चैत्र प्रतिपदा गुड़ी पड़वा (2 अप्रैल शनिवार 2022 )
30 मार्च 2022
http://azaadbharat.org
🚩हिन्दू नव संवत्सर 2079 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, 2 अप्रैल 2022 शनिवार को प्रारंभ हो रहा है ।
🚩चैत्र प्रतिपदा गुड़ी पड़वा सबसे श्रेष्ठ मुहर्त होता है,इस दिन मंदिरों में घट स्थापना होती है,नवरात्रों के व्रत का प्रारम्भ दिन शक्ति प्राप्ति करने के लिए नवरात्रों में व्रत,जप,उपवास करना चाहिए।
🚩चैत्र प्रतिपदा गुड़ी पड़वा (2 अप्रैल शनिवार ) को धूमधाम से हिन्दू नववर्ष मनाये।
🚩चैत्र द्वितीया ( 3 अप्रैल रविवार ) भगवान झूलेलाल जी का प्राकट्य दिवस होता है,जिसे सिंधी समाज बड़े धूमधाम से मनाते है और समस्त हिन्दू समाज भगवान झूलेलाल की पूजा करते है ।
🚩चैत्र तृतीया (4 अप्रैल सोमवार) को गणगौर महोत्सव प्रारम्भ होता है,जिसमें शिव-पार्वती की मूर्तियों की पूजा विधि विधान से होती है,जिसे सम्पूर्ण भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
🚩चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा ही हिन्दुओं का वर्षारंभ दिवस है; क्योंकि यह सृष्टि की उत्पत्ति का पहला दिन है । इस दिन प्रजापति देवता की तरंगें पृथ्वी पर अधिक आती हैं।
🚩न शीत न ग्रीष्म। पूरा पावन काल। ऐसे समय में सूर्य की चमकती किरणों की साक्षी में चरित्र और धर्म धरती पर स्वयं श्रीराम रूप धारण कर उतर आए, श्रीराम का अवतार चैत्र शुक्ल नवमी को होता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि के ठीक नवें दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। आर्यसमाज की स्थापना इसी दिन हुई थी।
🚩सभी हिन्दू चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष मनाने का संकल्प लें। इस वर्ष 2 अप्रैल 2022 को हिन्दू नववर्ष आ रहा है। सभी हिन्दू तैयारी शुरू कर दें।
🚩आज से ही अपने सभी सगे-संबंधी, परिचित और मित्रों को पत्र एवं सोशल मीडिया आदि द्वारा शुभ संदेश भेजना शुरू करें।
🚩 संस्कृति रक्षा के लिए गांव-शहरों में हिन्दू नववर्ष निमित्त प्रभात फेरियां, झांकिया की सजावट वाली यात्राएं, पोस्टर लगाकर, स्थानिक केबल पर प्रसारण करवाकर हिन्दू नववर्ष का प्रचार-प्रसार जरूर करें।
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🚩चैत्र प्रतिपदा गुड़ी पड़वा सबसे श्रेष्ठ मुहर्त होता है,इस दिन मंदिरों में घट स्थापना होती है,नवरात्रों के व्रत का प्रारम्भ दिन शक्ति प्राप्ति करने के लिए नवरात्रों में व्रत,जप,उपवास करना चाहिए।
🚩चैत्र प्रतिपदा गुड़ी पड़वा (2 अप्रैल शनिवार ) को धूमधाम से हिन्दू नववर्ष मनाये।
🚩चैत्र द्वितीया ( 3 अप्रैल रविवार ) भगवान झूलेलाल जी का प्राकट्य दिवस होता है,जिसे सिंधी समाज बड़े धूमधाम से मनाते है और समस्त हिन्दू समाज भगवान झूलेलाल की पूजा करते है ।
🚩चैत्र तृतीया (4 अप्रैल सोमवार) को गणगौर महोत्सव प्रारम्भ होता है,जिसमें शिव-पार्वती की मूर्तियों की पूजा विधि विधान से होती है,जिसे सम्पूर्ण भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
🚩चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा ही हिन्दुओं का वर्षारंभ दिवस है; क्योंकि यह सृष्टि की उत्पत्ति का पहला दिन है । इस दिन प्रजापति देवता की तरंगें पृथ्वी पर अधिक आती हैं।
🚩न शीत न ग्रीष्म। पूरा पावन काल। ऐसे समय में सूर्य की चमकती किरणों की साक्षी में चरित्र और धर्म धरती पर स्वयं श्रीराम रूप धारण कर उतर आए, श्रीराम का अवतार चैत्र शुक्ल नवमी को होता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि के ठीक नवें दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। आर्यसमाज की स्थापना इसी दिन हुई थी।
🚩सभी हिन्दू चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष मनाने का संकल्प लें। इस वर्ष 2 अप्रैल 2022 को हिन्दू नववर्ष आ रहा है। सभी हिन्दू तैयारी शुरू कर दें।
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विदेशी जमीन की देन साबूदाना,
साबूदाने खाने से व्रत-उपवास टूट जाते है।
31 मार्च 2022
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🚩साबूदाना मूल रूप से पूर्वी अफ़्रीका का पौधा है।
🚩साबूदाने विदेशी जमीन की देन है,विदेशियों ने भारतीयों के व्रत-उपवास को तोड़ने के लिए साबुदानो को भारत में पैदा करवाया।
🚩साबूदाने खाने से पाचनतंत्र बिगड़ता है,लिवर,किडनी पर बुरा असर पड़ता है,इसलिए भूलकर भी साबूदाने न खायें।
🚩साबूदाना टैपिओका नामक स्टार्च से बनाया जाता है। जब साबूदाने को बनाते है तो सबसे टैपिओका के गूदे को निकालकर किसी बड़े टैंकों में डाल लेते है,फिर कई दिनों तक उसे सड़ाते है, फिर उसमें लगातार केमिकल वाला पानी डाला जाता है,फिर कई तरह के केमिकल डालते है,जो शरीर के लिए नुकसान पहुचाते है, इसे सुखाने के लिए बाद इन पर ग्लूकोज और स्टार्च से बने पाउडर की इस पर पॉलिश की जाती है,उसके बाद साबूदाना बनकर तैयार हो जाता है।
🚩साबूदाना छोटे-छोटे मोती की तरह सफ़ेद और गोल होते हैं। भारत मे यह कसावा/टेपियोका की जडों से व अन्य अफ्रीकी देशों मे सैगो पाम नामक पेड़ के तने के गूदे से बनता है। सागो, ताड़ की तरह का एक पौधा होता है।
🚩भारत में साबूदाना केवल टेपियोका की जड से बनाया जाता है, जिसे कसावा कहते है।
🚩भारत में साबूदाने का उत्पादन सबसे पहले तमिलनाडु के सेलम में हुआ था।
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साबूदाने खाने से व्रत-उपवास टूट जाते है।
31 मार्च 2022
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🚩साबूदाना मूल रूप से पूर्वी अफ़्रीका का पौधा है।
🚩साबूदाने विदेशी जमीन की देन है,विदेशियों ने भारतीयों के व्रत-उपवास को तोड़ने के लिए साबुदानो को भारत में पैदा करवाया।
🚩साबूदाने खाने से पाचनतंत्र बिगड़ता है,लिवर,किडनी पर बुरा असर पड़ता है,इसलिए भूलकर भी साबूदाने न खायें।
🚩साबूदाना टैपिओका नामक स्टार्च से बनाया जाता है। जब साबूदाने को बनाते है तो सबसे टैपिओका के गूदे को निकालकर किसी बड़े टैंकों में डाल लेते है,फिर कई दिनों तक उसे सड़ाते है, फिर उसमें लगातार केमिकल वाला पानी डाला जाता है,फिर कई तरह के केमिकल डालते है,जो शरीर के लिए नुकसान पहुचाते है, इसे सुखाने के लिए बाद इन पर ग्लूकोज और स्टार्च से बने पाउडर की इस पर पॉलिश की जाती है,उसके बाद साबूदाना बनकर तैयार हो जाता है।
🚩साबूदाना छोटे-छोटे मोती की तरह सफ़ेद और गोल होते हैं। भारत मे यह कसावा/टेपियोका की जडों से व अन्य अफ्रीकी देशों मे सैगो पाम नामक पेड़ के तने के गूदे से बनता है। सागो, ताड़ की तरह का एक पौधा होता है।
🚩भारत में साबूदाना केवल टेपियोका की जड से बनाया जाता है, जिसे कसावा कहते है।
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