विश्वगुरु भारत के बढ़ते कदम के पीछे भारत के संतों के शुभ संकल्प।
29 मार्च 2022
http://azaadbharat.org
🚩भारत देश संतो का देश है,विश्वगुरु भारत बने हमारा ऐसे शुभ संकल्प सदैव संत करते है,तभी तो आज भारत विश्वगुरु के रूप में नजर आ रहा है।
🚩भारत भूमि देव भूमि है,संतो की भूमि है और संतो के शुभ संकल्पों के कारण ही आज भारत विश्वगुरु के बढ़ते कदम पर है।
🚩आज पश्चिमी देशों के पास भारत ही है एकमात्र विकल्प है ,क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध से गहराये खाद्य संकट के बीच अब पश्चिमी देशों का अन्नदाता बनेगा भारत।
🚩 व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन पर आक्रमण के कारण अमेरिकी सरकार ने रूस पर प्रतिबंध लगा दिए है,अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि इन प्रतिबंधों के बाद अन्न की कमी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
🚩विश्व नेताओं के साथ बैठक के बाद बाइडेन ने बेल्जियम के ब्रुसेल्स में नाटो शिखर सम्मेलन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की बाइडेन ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया को खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है।
🚩 यूक्रेन-रूस युद्ध से सीधे तौर पर यूरोप प्रभावित हुआ है ,यूरोपीय देश खाद्य संकट का सामना करने लगें है , दुनिया भर में गेहूं की कीमतें आसमान छू रही हैं ,कुल मिलाकर रूस और यूक्रेन वैश्विक गेहूं निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा निर्यात करते हैं।
🚩 रूस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और यूक्रेन भी गेहूं के निर्यात को जारी रखने की स्थिति में नहीं है।
🚩संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों ने स्वीकार किया है कि एक वास्तविक और गंभीर भोजन की कमी उन्हें बहुत जल्द प्रभावित कर सकती है ,ऐसे में भारत ही एक मात्र ऐसा देश है,जो अमेरिका सहित अन्य पश्चिमी देशों की मदद कर सकता है।
🚩भारत 2020 में विश्व के कुल उत्पादन में से लगभग 14.14 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बना था , हाल ही में सरकार ने विदेशों में भारत के राजनयिक मिशनों को देश के रिकॉर्ड घरेलू गेहूं के भंडार और निर्यात के लिए सुविधा विकसित करने का निर्देश दिया था।
🚩वर्तमान में भारत में सरकारी अनाज भंडारों में 100 मिलियन टन से अधिक खाद्यान्न है,भारत सालाना लगभग 107.59 मिलियन मीट्रिक टन खाद्यान्न का उत्पादन करता है ,जबकि इसका एक बड़ा हिस्सा घरेलू खपत में जाता है , ऐसे समय में जब यूरोप और अमेरिका संकट से जूझ रहे हैं तो भारत मदद के लिए हाथ बढ़ाने को तैयार है।
🚩भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल का निर्यातक है 2019 में भारत ने 7.1 बिलियन डॉलर के चावल का निर्यात किया , जो वैश्विक चावल निर्यात का 32 प्रतिशत है, 2020 में वियतनाम और चीन जैसे प्रमुख चावल निर्यातकों को भी भारत ने अनाज निर्यात किया था।
🚩भारत सरकार ने रूस और यूक्रेन पर निर्भर बाजारों पर कब्जा करने के लिए एशिया और अफ्रीका के कई देशों में गेहूं के निर्यात को सुचारू रूप से करने के लिए कई उपाय किए हैं।
🚩एक समय था जब भारत को पश्चिम के अमीर और शक्तिशाली देशों ने घटिया प्रकार का अनाज भेजा था और आज वही भारत दुनिया के तथाकथित महाशक्तियों को उच्च गुणवत्ता वाले अनाज का निर्यात करेगा ताकि उनकी आबादी को भुखमरी के हालात न देखने पड़ें।
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🚩भारत देश संतो का देश है,विश्वगुरु भारत बने हमारा ऐसे शुभ संकल्प सदैव संत करते है,तभी तो आज भारत विश्वगुरु के रूप में नजर आ रहा है।
🚩भारत भूमि देव भूमि है,संतो की भूमि है और संतो के शुभ संकल्पों के कारण ही आज भारत विश्वगुरु के बढ़ते कदम पर है।
🚩आज पश्चिमी देशों के पास भारत ही है एकमात्र विकल्प है ,क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध से गहराये खाद्य संकट के बीच अब पश्चिमी देशों का अन्नदाता बनेगा भारत।
🚩 व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन पर आक्रमण के कारण अमेरिकी सरकार ने रूस पर प्रतिबंध लगा दिए है,अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि इन प्रतिबंधों के बाद अन्न की कमी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
🚩विश्व नेताओं के साथ बैठक के बाद बाइडेन ने बेल्जियम के ब्रुसेल्स में नाटो शिखर सम्मेलन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की बाइडेन ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया को खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है।
🚩 यूक्रेन-रूस युद्ध से सीधे तौर पर यूरोप प्रभावित हुआ है ,यूरोपीय देश खाद्य संकट का सामना करने लगें है , दुनिया भर में गेहूं की कीमतें आसमान छू रही हैं ,कुल मिलाकर रूस और यूक्रेन वैश्विक गेहूं निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा निर्यात करते हैं।
🚩 रूस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और यूक्रेन भी गेहूं के निर्यात को जारी रखने की स्थिति में नहीं है।
🚩संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों ने स्वीकार किया है कि एक वास्तविक और गंभीर भोजन की कमी उन्हें बहुत जल्द प्रभावित कर सकती है ,ऐसे में भारत ही एक मात्र ऐसा देश है,जो अमेरिका सहित अन्य पश्चिमी देशों की मदद कर सकता है।
🚩भारत 2020 में विश्व के कुल उत्पादन में से लगभग 14.14 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बना था , हाल ही में सरकार ने विदेशों में भारत के राजनयिक मिशनों को देश के रिकॉर्ड घरेलू गेहूं के भंडार और निर्यात के लिए सुविधा विकसित करने का निर्देश दिया था।
🚩वर्तमान में भारत में सरकारी अनाज भंडारों में 100 मिलियन टन से अधिक खाद्यान्न है,भारत सालाना लगभग 107.59 मिलियन मीट्रिक टन खाद्यान्न का उत्पादन करता है ,जबकि इसका एक बड़ा हिस्सा घरेलू खपत में जाता है , ऐसे समय में जब यूरोप और अमेरिका संकट से जूझ रहे हैं तो भारत मदद के लिए हाथ बढ़ाने को तैयार है।
🚩भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल का निर्यातक है 2019 में भारत ने 7.1 बिलियन डॉलर के चावल का निर्यात किया , जो वैश्विक चावल निर्यात का 32 प्रतिशत है, 2020 में वियतनाम और चीन जैसे प्रमुख चावल निर्यातकों को भी भारत ने अनाज निर्यात किया था।
🚩भारत सरकार ने रूस और यूक्रेन पर निर्भर बाजारों पर कब्जा करने के लिए एशिया और अफ्रीका के कई देशों में गेहूं के निर्यात को सुचारू रूप से करने के लिए कई उपाय किए हैं।
🚩एक समय था जब भारत को पश्चिम के अमीर और शक्तिशाली देशों ने घटिया प्रकार का अनाज भेजा था और आज वही भारत दुनिया के तथाकथित महाशक्तियों को उच्च गुणवत्ता वाले अनाज का निर्यात करेगा ताकि उनकी आबादी को भुखमरी के हालात न देखने पड़ें।
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मेरा नववर्ष चैत्र प्रतिपदा गुड़ी पड़वा (2 अप्रैल शनिवार 2022 )
30 मार्च 2022
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🚩हिन्दू नव संवत्सर 2079 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, 2 अप्रैल 2022 शनिवार को प्रारंभ हो रहा है ।
🚩चैत्र प्रतिपदा गुड़ी पड़वा सबसे श्रेष्ठ मुहर्त होता है,इस दिन मंदिरों में घट स्थापना होती है,नवरात्रों के व्रत का प्रारम्भ दिन शक्ति प्राप्ति करने के लिए नवरात्रों में व्रत,जप,उपवास करना चाहिए।
🚩चैत्र प्रतिपदा गुड़ी पड़वा (2 अप्रैल शनिवार ) को धूमधाम से हिन्दू नववर्ष मनाये।
🚩चैत्र द्वितीया ( 3 अप्रैल रविवार ) भगवान झूलेलाल जी का प्राकट्य दिवस होता है,जिसे सिंधी समाज बड़े धूमधाम से मनाते है और समस्त हिन्दू समाज भगवान झूलेलाल की पूजा करते है ।
🚩चैत्र तृतीया (4 अप्रैल सोमवार) को गणगौर महोत्सव प्रारम्भ होता है,जिसमें शिव-पार्वती की मूर्तियों की पूजा विधि विधान से होती है,जिसे सम्पूर्ण भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
🚩चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा ही हिन्दुओं का वर्षारंभ दिवस है; क्योंकि यह सृष्टि की उत्पत्ति का पहला दिन है । इस दिन प्रजापति देवता की तरंगें पृथ्वी पर अधिक आती हैं।
🚩न शीत न ग्रीष्म। पूरा पावन काल। ऐसे समय में सूर्य की चमकती किरणों की साक्षी में चरित्र और धर्म धरती पर स्वयं श्रीराम रूप धारण कर उतर आए, श्रीराम का अवतार चैत्र शुक्ल नवमी को होता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि के ठीक नवें दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। आर्यसमाज की स्थापना इसी दिन हुई थी।
🚩सभी हिन्दू चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष मनाने का संकल्प लें। इस वर्ष 2 अप्रैल 2022 को हिन्दू नववर्ष आ रहा है। सभी हिन्दू तैयारी शुरू कर दें।
🚩आज से ही अपने सभी सगे-संबंधी, परिचित और मित्रों को पत्र एवं सोशल मीडिया आदि द्वारा शुभ संदेश भेजना शुरू करें।
🚩 संस्कृति रक्षा के लिए गांव-शहरों में हिन्दू नववर्ष निमित्त प्रभात फेरियां, झांकिया की सजावट वाली यात्राएं, पोस्टर लगाकर, स्थानिक केबल पर प्रसारण करवाकर हिन्दू नववर्ष का प्रचार-प्रसार जरूर करें।
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🚩चैत्र प्रतिपदा गुड़ी पड़वा (2 अप्रैल शनिवार ) को धूमधाम से हिन्दू नववर्ष मनाये।
🚩चैत्र द्वितीया ( 3 अप्रैल रविवार ) भगवान झूलेलाल जी का प्राकट्य दिवस होता है,जिसे सिंधी समाज बड़े धूमधाम से मनाते है और समस्त हिन्दू समाज भगवान झूलेलाल की पूजा करते है ।
🚩चैत्र तृतीया (4 अप्रैल सोमवार) को गणगौर महोत्सव प्रारम्भ होता है,जिसमें शिव-पार्वती की मूर्तियों की पूजा विधि विधान से होती है,जिसे सम्पूर्ण भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
🚩चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा ही हिन्दुओं का वर्षारंभ दिवस है; क्योंकि यह सृष्टि की उत्पत्ति का पहला दिन है । इस दिन प्रजापति देवता की तरंगें पृथ्वी पर अधिक आती हैं।
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विदेशी जमीन की देन साबूदाना,
साबूदाने खाने से व्रत-उपवास टूट जाते है।
31 मार्च 2022
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🚩साबूदाना मूल रूप से पूर्वी अफ़्रीका का पौधा है।
🚩साबूदाने विदेशी जमीन की देन है,विदेशियों ने भारतीयों के व्रत-उपवास को तोड़ने के लिए साबुदानो को भारत में पैदा करवाया।
🚩साबूदाने खाने से पाचनतंत्र बिगड़ता है,लिवर,किडनी पर बुरा असर पड़ता है,इसलिए भूलकर भी साबूदाने न खायें।
🚩साबूदाना टैपिओका नामक स्टार्च से बनाया जाता है। जब साबूदाने को बनाते है तो सबसे टैपिओका के गूदे को निकालकर किसी बड़े टैंकों में डाल लेते है,फिर कई दिनों तक उसे सड़ाते है, फिर उसमें लगातार केमिकल वाला पानी डाला जाता है,फिर कई तरह के केमिकल डालते है,जो शरीर के लिए नुकसान पहुचाते है, इसे सुखाने के लिए बाद इन पर ग्लूकोज और स्टार्च से बने पाउडर की इस पर पॉलिश की जाती है,उसके बाद साबूदाना बनकर तैयार हो जाता है।
🚩साबूदाना छोटे-छोटे मोती की तरह सफ़ेद और गोल होते हैं। भारत मे यह कसावा/टेपियोका की जडों से व अन्य अफ्रीकी देशों मे सैगो पाम नामक पेड़ के तने के गूदे से बनता है। सागो, ताड़ की तरह का एक पौधा होता है।
🚩भारत में साबूदाना केवल टेपियोका की जड से बनाया जाता है, जिसे कसावा कहते है।
🚩भारत में साबूदाने का उत्पादन सबसे पहले तमिलनाडु के सेलम में हुआ था।
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साबूदाने खाने से व्रत-उपवास टूट जाते है।
31 मार्च 2022
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🚩साबूदाना मूल रूप से पूर्वी अफ़्रीका का पौधा है।
🚩साबूदाने विदेशी जमीन की देन है,विदेशियों ने भारतीयों के व्रत-उपवास को तोड़ने के लिए साबुदानो को भारत में पैदा करवाया।
🚩साबूदाने खाने से पाचनतंत्र बिगड़ता है,लिवर,किडनी पर बुरा असर पड़ता है,इसलिए भूलकर भी साबूदाने न खायें।
🚩साबूदाना टैपिओका नामक स्टार्च से बनाया जाता है। जब साबूदाने को बनाते है तो सबसे टैपिओका के गूदे को निकालकर किसी बड़े टैंकों में डाल लेते है,फिर कई दिनों तक उसे सड़ाते है, फिर उसमें लगातार केमिकल वाला पानी डाला जाता है,फिर कई तरह के केमिकल डालते है,जो शरीर के लिए नुकसान पहुचाते है, इसे सुखाने के लिए बाद इन पर ग्लूकोज और स्टार्च से बने पाउडर की इस पर पॉलिश की जाती है,उसके बाद साबूदाना बनकर तैयार हो जाता है।
🚩साबूदाना छोटे-छोटे मोती की तरह सफ़ेद और गोल होते हैं। भारत मे यह कसावा/टेपियोका की जडों से व अन्य अफ्रीकी देशों मे सैगो पाम नामक पेड़ के तने के गूदे से बनता है। सागो, ताड़ की तरह का एक पौधा होता है।
🚩भारत में साबूदाना केवल टेपियोका की जड से बनाया जाता है, जिसे कसावा कहते है।
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आप सभी को हिन्दू नववर्ष गुड़ी-पड़वा ( 2 अप्रैल शनिवार ) की बहुत-बहुत बधाइयां।
1 अप्रैल 2022
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🚩हिन्दू नव सवंत्सर 2079 चैत्र प्रतिपदा गुड़ी-पड़वा की आप सभी को शुभकामनाएं।
🚩चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा ही हिन्दुओं का वर्षारंभ दिवस है,क्योंकि यह सृष्टि की उत्पत्ति का पहला दिन है । इस दिन प्रजापति देवता की तरंगें पृथ्वी पर अधिक आती हैं।
🚩 इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण किया था। भगवान विष्णु जी का प्रथम अवतार भी इसी दिन हुआ था। नवरात्र की शुरुआत इसी दिन से होती है। जिसमें हिन्दू उपवास एवं पवित्र रहकर नववर्ष की शुरूआत करते हैं।
🚩चैत्र प्रतिपदा गुड़ी-पड़वा के दिन भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ था।
🚩चैत्र प्रतिपदा गुड़ी-पड़वा के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के डॉ. हेडगेवारजी का जन्मदिन मनाया जाता हैं।
🚩 सिंधी समाज का मुख्य त्यौहार चेटीचंड महोत्सव भी आज से ही प्रारम्भ होता है। भगवान वरुण अवतार झूलेलाल जी का अवतरण दिवस भी आज ही के दिन हुआ था।
🚩स्वामी दयानंद जी ने आर्य समाज की स्थापना आज ही के दिन की थी।
🚩सतयुग का प्रारम्भ भी आज के दिन ही हुआ था।
🚩धर्मराज युधिष्ठिर संवत का प्रारम्भ भी आज ही के दिन हुआ था।
🚩आज के दिन ही राजा विक्रमादित्य का राज्याभिषेक हुआ था और फिर विक्रम सवंत्सर प्रारम्भ हुआ।
🚩 ऐसा कहा जाता है कि राजा विक्रमादित्य के राज्य में कभी भी सूर्य नही होता था अस्त - विक्रमादित्य अपने ज्ञान और वीरता के लिए थे प्रसिद्ध ।
🚩राजा विक्रमादित्य के राज्य में प्रजा सुखी और सम्पन्न रहती थी,राजा विक्रमादित्य के राज्य में कभी किसी के साथ भी अन्याय नही होता था,बल्कि तुरन्त सभी के साथ न्याय होता था,पर आज देखो तो सालों निकल जाते है , पर न्याय नही मिल पाता है,मिलती है तो सिर्फ तारीख।
🚩चैत्र नवरात्रि का प्रारम्भ इसी दिन से होता है,सुखी-स्वस्थ जीवन के लिए और जीवन में आने वाले विघ्नों के निवारण के लिए और शक्ति प्राप्ति के लिए नवरात्रि व्रत किया जाता है।
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1 अप्रैल 2022
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🚩हिन्दू नव सवंत्सर 2079 चैत्र प्रतिपदा गुड़ी-पड़वा की आप सभी को शुभकामनाएं।
🚩चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा ही हिन्दुओं का वर्षारंभ दिवस है,क्योंकि यह सृष्टि की उत्पत्ति का पहला दिन है । इस दिन प्रजापति देवता की तरंगें पृथ्वी पर अधिक आती हैं।
🚩 इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण किया था। भगवान विष्णु जी का प्रथम अवतार भी इसी दिन हुआ था। नवरात्र की शुरुआत इसी दिन से होती है। जिसमें हिन्दू उपवास एवं पवित्र रहकर नववर्ष की शुरूआत करते हैं।
🚩चैत्र प्रतिपदा गुड़ी-पड़वा के दिन भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ था।
🚩चैत्र प्रतिपदा गुड़ी-पड़वा के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के डॉ. हेडगेवारजी का जन्मदिन मनाया जाता हैं।
🚩 सिंधी समाज का मुख्य त्यौहार चेटीचंड महोत्सव भी आज से ही प्रारम्भ होता है। भगवान वरुण अवतार झूलेलाल जी का अवतरण दिवस भी आज ही के दिन हुआ था।
🚩स्वामी दयानंद जी ने आर्य समाज की स्थापना आज ही के दिन की थी।
🚩सतयुग का प्रारम्भ भी आज के दिन ही हुआ था।
🚩धर्मराज युधिष्ठिर संवत का प्रारम्भ भी आज ही के दिन हुआ था।
🚩आज के दिन ही राजा विक्रमादित्य का राज्याभिषेक हुआ था और फिर विक्रम सवंत्सर प्रारम्भ हुआ।
🚩 ऐसा कहा जाता है कि राजा विक्रमादित्य के राज्य में कभी भी सूर्य नही होता था अस्त - विक्रमादित्य अपने ज्ञान और वीरता के लिए थे प्रसिद्ध ।
🚩राजा विक्रमादित्य के राज्य में प्रजा सुखी और सम्पन्न रहती थी,राजा विक्रमादित्य के राज्य में कभी किसी के साथ भी अन्याय नही होता था,बल्कि तुरन्त सभी के साथ न्याय होता था,पर आज देखो तो सालों निकल जाते है , पर न्याय नही मिल पाता है,मिलती है तो सिर्फ तारीख।
🚩चैत्र नवरात्रि का प्रारम्भ इसी दिन से होता है,सुखी-स्वस्थ जीवन के लिए और जीवन में आने वाले विघ्नों के निवारण के लिए और शक्ति प्राप्ति के लिए नवरात्रि व्रत किया जाता है।
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हिन्दुस्तान में हिन्दू अल्पसंख्यक ???
आज भी हिन्दू एकजुट नही हुए तो आगे परिणाम भयंकर आएगा!
2 अप्रैल 2022
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🚩बहुसंख्यक हिन्दू बाहुल भारत देश में भले हिन्दू निश्चिंत हों लेकिन रिपोर्ट चौकाने वाला है भारत के ही कई राज्यों में हिन्दू एकदम अल्पसंख्यक हो गए हैं, उसमे बाकी जो बचे है, उनको भी जबरदस्ती धर्मपरिवर्तन करने या यातनायें देकर भगाने की साजिश रची जा रही है ।
🚩आंकडों के अनुसार इन 8 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में हिन्दू इतने प्रतिशत ही बचे है:-
मिजोरम (2.70%), लक्षद्वीप (2.80%), नागालैंड (8.70%), मेघालय (11.50%), जम्मू-कश्मीर (28.40%), अरुणाचल प्रदेश (29.00%), पंजाब (38.50%) और मणिपुर में (41.40) प्रतिशत है। तीन राज्यों नागालैंड, मिजोरम और मेघालय में ईसाई बहुसंख्यक होते जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर और लक्षद्वीप में मुस्लिम समुदाय बहुसंख्यक है।
🚩भारत मे हिन्दू ख़त्म किये जा रहे है। अगर अब भी हिन्दू नहीं जागे तो समाप्त होते चले जाएंगे। हिन्दुओं के खात्मे की बड़ी भयंकर साजिश रची जा रही है।
🚩अभी हाल ही में एक सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहा था उसमें बताया कि ये वीडियो नायगाओ पश्चिम में विजय पार्क चेल्सी बिल्डिंग में रहने वाले गुजराती परिवार किरीट बारिया का है, इनकी बिल्डिंग में सारे परिवार क्रिश्चन है, सिर्फ यही एक फैमिली हिन्दू है। इनको पिछले 10 साल से प्रताड़ित किया जा रहा है कभी पानी बन्द कर देते है, कभी मार पीट करते है।
🚩 अभी नवरात्रि में इनके घर के बाहर तुलसी का पौधा तोड़ दिया, बच्चो से मारपीट की ओर कहा कि तुम लोग क्रिश्चन बन जाओ । पुलिस भी इनको सहयोग नहीं कर रही है।
🚩उत्तर प्रदेश में भी आए दिन धर्म परिवर्तन करने के मामले सामने आते हैं। जहां आये दिन जबरन धर्मपरिवर्तन कराया जाता है, धर्म की आड़ में ना जाने कितने लोगों को निशाना बनाया जाता है, उत्तर प्रदेश में रहेने वाले लोगों को जबरदस्ती या फिर उनकी कमज़ोरी का फायदा उठाकर उन्हें धर्मपरिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता है। जिसको लेकर आए दिन हंगामा हो रहा है।
🚩नया मामला कानपुर का है, जहां श्रवण को जबरन धर्मपरिवर्तन करने को मजबूर कर रहे थे, लेकिन श्रवण को अपना हिंदू धर्म छोड़ कर किसी और धर्म में जाना मंजूर नहीं था, इसलिए पुलिस से धर्म परिवर्तन करवाने की शिकायत कर डाली। श्रवण ने बताया कि उसके इलाके में चर्च का पादरी प्रदीप राव लोगों को लालच देकर उनका धर्म परिवर्तन कर गुमराह कर रहा है।
🚩आपको बता दें कि केवल उत्तर प्रदेश या मुम्बई में ही नही भारत में हर कोने में ईसाई पादरी प्रलोभन देकर धर्मान्तरण करवा रहे हैं,दूसरी और मुस्लिमों द्वारा जबरन धर्मपरिवर्तन कराया जा रहा है, अभी भी हिन्दू नहीं जागे तो जैसे 8 राज्यों में हिन्दू अल्पसंख्यक हो गये है ऐसे ही अन्य राज्यों में भी होने लगेंगे ।
🚩 वेटिकन सिटी और इस्लामिक देशों द्वारा भारतीय मीडिया में भारी फंडिंग की जा रही है, जिससे वे श्री राम मंदिर, धारा 370, गौ-हत्या, महंगाई, किसानों की आत्महत्या, जवानों की हत्या, हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार आदि समस्याओं पर बहस नहीं करके केवल हिन्दू साधु-संतों के खिलाफ ही खबरें दिखाते हैं और भोले हिन्दू इसी बात को सही समझकर उनके ही धर्मगुरुओं पर उंगली उठाता है और गलत बोलता है जबकि मीडिया ईसाई पादरियों और मौलवियों द्वारा हो रहे कुकर्मो को छुपाता है क्योंकि उनके द्वारा फंडिग की जा रही है।
🚩गौरतलब है कि आजतक जिन्होंने भी हिन्दू धर्म की हित की बात की, धर्मांतरण पर रोक लगाई, हिन्दुओ की घर वापसी करवाई, विदेशी कम्पनियों का बहिष्कार करवाया, पाश्चात्य संस्कृति का विरोध किया उन हिन्दू साधु-संतों एवं कार्यकताओं के खिलाफ सुनियोजित षडयंत्र करके उनकी हत्या करवा दी या मीडिया द्वारा बदनाम करवाकर राजनेताओं से मिलकर जेल में भिजवा दिया ।
🚩अतः हिन्दू आज भी एकजुट होकर इन षडयंत्रों का विरोध नहीं करेंगे तो एक के बाद एक हिन्दुओं को नष्ट कर दिया जायेगा और हिन्दू अल्पसंख्यक होते जायेंगे ।
अवश्य देखिए👇🏻
https://youtu.be/SOoqyAX6e1c
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आज भी हिन्दू एकजुट नही हुए तो आगे परिणाम भयंकर आएगा!
2 अप्रैल 2022
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🚩बहुसंख्यक हिन्दू बाहुल भारत देश में भले हिन्दू निश्चिंत हों लेकिन रिपोर्ट चौकाने वाला है भारत के ही कई राज्यों में हिन्दू एकदम अल्पसंख्यक हो गए हैं, उसमे बाकी जो बचे है, उनको भी जबरदस्ती धर्मपरिवर्तन करने या यातनायें देकर भगाने की साजिश रची जा रही है ।
🚩आंकडों के अनुसार इन 8 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में हिन्दू इतने प्रतिशत ही बचे है:-
मिजोरम (2.70%), लक्षद्वीप (2.80%), नागालैंड (8.70%), मेघालय (11.50%), जम्मू-कश्मीर (28.40%), अरुणाचल प्रदेश (29.00%), पंजाब (38.50%) और मणिपुर में (41.40) प्रतिशत है। तीन राज्यों नागालैंड, मिजोरम और मेघालय में ईसाई बहुसंख्यक होते जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर और लक्षद्वीप में मुस्लिम समुदाय बहुसंख्यक है।
🚩भारत मे हिन्दू ख़त्म किये जा रहे है। अगर अब भी हिन्दू नहीं जागे तो समाप्त होते चले जाएंगे। हिन्दुओं के खात्मे की बड़ी भयंकर साजिश रची जा रही है।
🚩अभी हाल ही में एक सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहा था उसमें बताया कि ये वीडियो नायगाओ पश्चिम में विजय पार्क चेल्सी बिल्डिंग में रहने वाले गुजराती परिवार किरीट बारिया का है, इनकी बिल्डिंग में सारे परिवार क्रिश्चन है, सिर्फ यही एक फैमिली हिन्दू है। इनको पिछले 10 साल से प्रताड़ित किया जा रहा है कभी पानी बन्द कर देते है, कभी मार पीट करते है।
🚩 अभी नवरात्रि में इनके घर के बाहर तुलसी का पौधा तोड़ दिया, बच्चो से मारपीट की ओर कहा कि तुम लोग क्रिश्चन बन जाओ । पुलिस भी इनको सहयोग नहीं कर रही है।
🚩उत्तर प्रदेश में भी आए दिन धर्म परिवर्तन करने के मामले सामने आते हैं। जहां आये दिन जबरन धर्मपरिवर्तन कराया जाता है, धर्म की आड़ में ना जाने कितने लोगों को निशाना बनाया जाता है, उत्तर प्रदेश में रहेने वाले लोगों को जबरदस्ती या फिर उनकी कमज़ोरी का फायदा उठाकर उन्हें धर्मपरिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता है। जिसको लेकर आए दिन हंगामा हो रहा है।
🚩नया मामला कानपुर का है, जहां श्रवण को जबरन धर्मपरिवर्तन करने को मजबूर कर रहे थे, लेकिन श्रवण को अपना हिंदू धर्म छोड़ कर किसी और धर्म में जाना मंजूर नहीं था, इसलिए पुलिस से धर्म परिवर्तन करवाने की शिकायत कर डाली। श्रवण ने बताया कि उसके इलाके में चर्च का पादरी प्रदीप राव लोगों को लालच देकर उनका धर्म परिवर्तन कर गुमराह कर रहा है।
🚩आपको बता दें कि केवल उत्तर प्रदेश या मुम्बई में ही नही भारत में हर कोने में ईसाई पादरी प्रलोभन देकर धर्मान्तरण करवा रहे हैं,दूसरी और मुस्लिमों द्वारा जबरन धर्मपरिवर्तन कराया जा रहा है, अभी भी हिन्दू नहीं जागे तो जैसे 8 राज्यों में हिन्दू अल्पसंख्यक हो गये है ऐसे ही अन्य राज्यों में भी होने लगेंगे ।
🚩 वेटिकन सिटी और इस्लामिक देशों द्वारा भारतीय मीडिया में भारी फंडिंग की जा रही है, जिससे वे श्री राम मंदिर, धारा 370, गौ-हत्या, महंगाई, किसानों की आत्महत्या, जवानों की हत्या, हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार आदि समस्याओं पर बहस नहीं करके केवल हिन्दू साधु-संतों के खिलाफ ही खबरें दिखाते हैं और भोले हिन्दू इसी बात को सही समझकर उनके ही धर्मगुरुओं पर उंगली उठाता है और गलत बोलता है जबकि मीडिया ईसाई पादरियों और मौलवियों द्वारा हो रहे कुकर्मो को छुपाता है क्योंकि उनके द्वारा फंडिग की जा रही है।
🚩गौरतलब है कि आजतक जिन्होंने भी हिन्दू धर्म की हित की बात की, धर्मांतरण पर रोक लगाई, हिन्दुओ की घर वापसी करवाई, विदेशी कम्पनियों का बहिष्कार करवाया, पाश्चात्य संस्कृति का विरोध किया उन हिन्दू साधु-संतों एवं कार्यकताओं के खिलाफ सुनियोजित षडयंत्र करके उनकी हत्या करवा दी या मीडिया द्वारा बदनाम करवाकर राजनेताओं से मिलकर जेल में भिजवा दिया ।
🚩अतः हिन्दू आज भी एकजुट होकर इन षडयंत्रों का विरोध नहीं करेंगे तो एक के बाद एक हिन्दुओं को नष्ट कर दिया जायेगा और हिन्दू अल्पसंख्यक होते जायेंगे ।
अवश्य देखिए👇🏻
https://youtu.be/SOoqyAX6e1c
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चैत्र मास की तृतीया तिथि ( 4 अप्रैल 2022 सोमवार ) शिव-पार्वती की महापूजा गणगौरी तीज के नाम से प्रसिद्ध त्यौहार का नाम गणगौर पर्व
3 अप्रैल 2022
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🚩गणगौर : गणगौर माता पार्वती का गौर अर्थात श्वेत रूप है। उन्हें गौरी और महागौरी भी कहते हैं। अष्टमी के दिन इनकी पूजा होता है, लेकिन चैत्र नवरात्रि की तृतीया को उन्हें इसलिए पूजा जाता है, क्योंकि राजस्थान और मध्यप्रदेश की लोक परंपरा के अनुसार इस दिन माता की अपने मायके के यहां से विदाई हुई थी।
🚩गणगौर राजस्थान और मध्यप्रदेश का मुख्य पर्व है और वहां इसकी काफी मान्यता है,इसे राजस्थान और मध्यप्रदेश में भक्ति-भाव से मनाया जाता है,इस दिन गणगौर की पूजा की जाती है, लड़कियां एवं महिलाएं शंकर जी एवं पार्वती जी की पूजा करती हैं, गणगौर पर्व से भगवान शंकर और माता पार्वती की कहानी जुड़ी हुई है, इसीलिए इस पर्व की हिन्दू धर्म में काफी मान्यता है।
🚩गणगौर व्रत कथा:एक समय की बात है, भगवान शंकर, माता पार्वती एवं नारद जी के साथ पृथ्वी पर भ्रमण हेतु चल दिए। वह चलते-चलते चैत्र शुक्ल तृतीया को एक गांव में पहुंचे।
🚩उनका आना सुनकर ग्राम कि स्त्रियां उनके स्वागत के लिए थालियों में हल्दी व अक्षत लेकर पूजन हेतु तुरंत पहुंच गई । पार्वती जी ने उनके पूजा भाव को समझकर सारा सुहाग रस उन पर छिड़क दिया। वे अटल सुहाग प्राप्त कर लौटी।
🚩गणगौर पर्व पर शिव-पार्वती के रूप में ईसर जी-गणगौर माता की पूजा की जाती है,उन्हें दूध,खीर, ज्यूस, फल,फ्रूट,मिठाइयों से भोग लगाया जाता है।
🚩चैत्र मास की नवरात्रि की गणगौरी तीज से पंचमी तक 3 दिनों तक ये पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है
गणगौर पर्व की एक झलक वीडियो लिंक में👇🏻
https://youtu.be/Z94a7I7AQIM
https://youtu.be/f7r6TRliWis
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3 अप्रैल 2022
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🚩गणगौर : गणगौर माता पार्वती का गौर अर्थात श्वेत रूप है। उन्हें गौरी और महागौरी भी कहते हैं। अष्टमी के दिन इनकी पूजा होता है, लेकिन चैत्र नवरात्रि की तृतीया को उन्हें इसलिए पूजा जाता है, क्योंकि राजस्थान और मध्यप्रदेश की लोक परंपरा के अनुसार इस दिन माता की अपने मायके के यहां से विदाई हुई थी।
🚩गणगौर राजस्थान और मध्यप्रदेश का मुख्य पर्व है और वहां इसकी काफी मान्यता है,इसे राजस्थान और मध्यप्रदेश में भक्ति-भाव से मनाया जाता है,इस दिन गणगौर की पूजा की जाती है, लड़कियां एवं महिलाएं शंकर जी एवं पार्वती जी की पूजा करती हैं, गणगौर पर्व से भगवान शंकर और माता पार्वती की कहानी जुड़ी हुई है, इसीलिए इस पर्व की हिन्दू धर्म में काफी मान्यता है।
🚩गणगौर व्रत कथा:एक समय की बात है, भगवान शंकर, माता पार्वती एवं नारद जी के साथ पृथ्वी पर भ्रमण हेतु चल दिए। वह चलते-चलते चैत्र शुक्ल तृतीया को एक गांव में पहुंचे।
🚩उनका आना सुनकर ग्राम कि स्त्रियां उनके स्वागत के लिए थालियों में हल्दी व अक्षत लेकर पूजन हेतु तुरंत पहुंच गई । पार्वती जी ने उनके पूजा भाव को समझकर सारा सुहाग रस उन पर छिड़क दिया। वे अटल सुहाग प्राप्त कर लौटी।
🚩गणगौर पर्व पर शिव-पार्वती के रूप में ईसर जी-गणगौर माता की पूजा की जाती है,उन्हें दूध,खीर, ज्यूस, फल,फ्रूट,मिठाइयों से भोग लगाया जाता है।
🚩चैत्र मास की नवरात्रि की गणगौरी तीज से पंचमी तक 3 दिनों तक ये पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है
गणगौर पर्व की एक झलक वीडियो लिंक में👇🏻
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कश्मीर लुटता रहा, हिन्दू सोता रहा !
हिन्दू जागता है, पर बहुत देर से!!!
4 अप्रैल 2022
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🚩कश्मीरी पंडितों की बहन-बेटियां लूटती रही हिन्दू सोता रहा !
कश्मीरी पंडित बेघर हो गये हिन्दू सोता रहा !
कश्मीरी पंडित दर-दर की ठोकरें खाते रहे पर हिन्दू सोता रहा !
🚩हिन्दू तब जगते हैं, जब उन पर मुसीबत आ पड़ती है !
🚩संत श्रीआशाराम बापू पर एक झूठा आरोप लगा और हम मजे लेने में जुट गये !! अरे ! सब बाबा ऐसे ही होते हैं ।
🚩पर हमने कभी ये जानने की कोशिश नही की क्या जो आरोप संत श्रीआशारामजी बापू पर लगा हैं वो सच है या झूठ ? नही ! बिल्कुल भी कोशिश नही की।
🚩क्योंकि ईसाई मिशनरियों के टुकड़ों पर चलने वाली बिकाऊ मीडिया कहती है वो आरोपी हैं , ओर हम झूठी बात को सच मान लेते है,पर ये वही मीडिया है जो लाखों कश्मीरी पंडितों की दुर्दशा पर एक न्यूज तक दिखाना उचित नही समझी।
🚩हिंदुओं के धर्मांतरण और अत्याचारों पर बोलती बंद हो जाती है,बिकाऊ मीडिया की, बात संत श्रीआशारामजी बापू की नही बात न्याय की है ।
🚩संत श्रीआशारामजी बापू के साथ लगे संत शब्द के सम्मान की है और ये शब्द हमारी संस्कृति एवं सभ्यता का प्रतीक है ।
🚩हम ये नही कहते कि आप गलत का विरोध न करें पर सत्य और न्याय का साथ न देना भी तो अधर्म ही कहलाता है ।
🚩कश्मीरी पंडित जिन घरों में कभी ऐशो आराम से रहा करते थे , आज उनके ढहे हुये मकानों में कबूतर, मकड़ी के जालो और छिपकलियों के सिवाय कुछ नही है ।
🚩उनकी गलती बस इतनी थी कि जब तक खुद उन पर मुसीबत नही आ गई तब तक उन्होंने कभी विरोध नही किया ।
🚩मैं ये भी नही कहता कि आप किसी का आंखे बंद करके समर्थन करो ,पर इतने अंधे भी मत बन जाओ कि सच और झूठ में फर्क ही समझ मे न आये ।
🚩अरे! हमारा कानून दोषियों को भी अपनी बात रखने का हक देती है , पर संत श्रीआशारामजी बापू को निर्दोष होने पर भी दोषी और न्याय की मांग करने वाले उनके समर्थकों को भी पिछले 9 सालों से पीड़ित होना पड़ रहा है।
🚩और सेक्युलर हिंदुओं की आंखों पर मीडिया भक्ति का ऐसा पट्टी बांध कर दिमाग मे कीड़ा घुसा दिया गया कि अब दूसरा कुछ उनके दिमाग मे घुसता ही नही ।
🚩जो कीड़ा मीडिया ने उनके दिमाग मे घुसाया है वो कुरेदता रहता है कि सारे बाबा, साधु, संत सब ऐसे ही होते हैं। ऐसे लोगों से मेरा दावा है, उन्होंने कभी उनके या उन पर लगे आरोपों के बारे में जानने की कोशिश नही की होगी ।
🚩और जिस दिन हमने उनके बारे में जानने की कोशिश की खुद को न्याय की मांग करने के लिए रोक नही पायेंगे, क्योंकि वो हिन्दू ही क्या जो अन्याय के विरुद्ध आवाज न उठाएं ।
जागों हिन्दू जागों
और
अपने हिन्दू संतो और हिन्दू संस्कृति की रक्षा के लिए तैय्यार हो जाओ।
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हिन्दू जागता है, पर बहुत देर से!!!
4 अप्रैल 2022
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🚩कश्मीरी पंडितों की बहन-बेटियां लूटती रही हिन्दू सोता रहा !
कश्मीरी पंडित बेघर हो गये हिन्दू सोता रहा !
कश्मीरी पंडित दर-दर की ठोकरें खाते रहे पर हिन्दू सोता रहा !
🚩हिन्दू तब जगते हैं, जब उन पर मुसीबत आ पड़ती है !
🚩संत श्रीआशाराम बापू पर एक झूठा आरोप लगा और हम मजे लेने में जुट गये !! अरे ! सब बाबा ऐसे ही होते हैं ।
🚩पर हमने कभी ये जानने की कोशिश नही की क्या जो आरोप संत श्रीआशारामजी बापू पर लगा हैं वो सच है या झूठ ? नही ! बिल्कुल भी कोशिश नही की।
🚩क्योंकि ईसाई मिशनरियों के टुकड़ों पर चलने वाली बिकाऊ मीडिया कहती है वो आरोपी हैं , ओर हम झूठी बात को सच मान लेते है,पर ये वही मीडिया है जो लाखों कश्मीरी पंडितों की दुर्दशा पर एक न्यूज तक दिखाना उचित नही समझी।
🚩हिंदुओं के धर्मांतरण और अत्याचारों पर बोलती बंद हो जाती है,बिकाऊ मीडिया की, बात संत श्रीआशारामजी बापू की नही बात न्याय की है ।
🚩संत श्रीआशारामजी बापू के साथ लगे संत शब्द के सम्मान की है और ये शब्द हमारी संस्कृति एवं सभ्यता का प्रतीक है ।
🚩हम ये नही कहते कि आप गलत का विरोध न करें पर सत्य और न्याय का साथ न देना भी तो अधर्म ही कहलाता है ।
🚩कश्मीरी पंडित जिन घरों में कभी ऐशो आराम से रहा करते थे , आज उनके ढहे हुये मकानों में कबूतर, मकड़ी के जालो और छिपकलियों के सिवाय कुछ नही है ।
🚩उनकी गलती बस इतनी थी कि जब तक खुद उन पर मुसीबत नही आ गई तब तक उन्होंने कभी विरोध नही किया ।
🚩मैं ये भी नही कहता कि आप किसी का आंखे बंद करके समर्थन करो ,पर इतने अंधे भी मत बन जाओ कि सच और झूठ में फर्क ही समझ मे न आये ।
🚩अरे! हमारा कानून दोषियों को भी अपनी बात रखने का हक देती है , पर संत श्रीआशारामजी बापू को निर्दोष होने पर भी दोषी और न्याय की मांग करने वाले उनके समर्थकों को भी पिछले 9 सालों से पीड़ित होना पड़ रहा है।
🚩और सेक्युलर हिंदुओं की आंखों पर मीडिया भक्ति का ऐसा पट्टी बांध कर दिमाग मे कीड़ा घुसा दिया गया कि अब दूसरा कुछ उनके दिमाग मे घुसता ही नही ।
🚩जो कीड़ा मीडिया ने उनके दिमाग मे घुसाया है वो कुरेदता रहता है कि सारे बाबा, साधु, संत सब ऐसे ही होते हैं। ऐसे लोगों से मेरा दावा है, उन्होंने कभी उनके या उन पर लगे आरोपों के बारे में जानने की कोशिश नही की होगी ।
🚩और जिस दिन हमने उनके बारे में जानने की कोशिश की खुद को न्याय की मांग करने के लिए रोक नही पायेंगे, क्योंकि वो हिन्दू ही क्या जो अन्याय के विरुद्ध आवाज न उठाएं ।
जागों हिन्दू जागों
और
अपने हिन्दू संतो और हिन्दू संस्कृति की रक्षा के लिए तैय्यार हो जाओ।
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5 अप्रैल बाबू जगजीवनराम के जन्मदिवस की शुभकामनाएं
5 अप्रैल 2022
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🚩हिन्दू समाज के निर्धन और वंचित वर्ग के जिन लोगों ने उपेक्षा सहकर भी अपना मनोबल ऊंचा रखा, उनमें ग्राम चन्दवा (बिहार) में 5 अप्रैल 1906 को जन्मे बाबू जगजीवनराम का नाम उल्लेखनीय है। उनके पिता श्री शोभीराम ने कुछ मतभेदों के कारण सेना छोड़ दी थी। उनकी माता श्रीमती बसन्ती देवी ने आर्थिक अभावों के बीच अपने बच्चों को स्वाभिमान से जीना सिखाया।
🚩उनके विद्यालय में हिन्दू तथा दलित हिन्दुओं के लिए पानी के अलग घड़े रखे जाते थे। उन्होंने अपने मित्रों के साथ मिलकर दलित घड़ों को फोड़ दिया। प्रबन्ध समिति के पूछने पर उन्होंने कहा कि उन्हें हिन्दुओं में बंटवारा स्वीकार नहीं है। अतः सब हिन्दुओं के लिए एक ही घड़े की व्यवस्था की गयी। 1925 में उनके विद्यालय में मालवीय जी आये। उन्होंने जगजीवनराम द्वारा दिये गये स्वागत भाषण से प्रभावित होकर उन्हें काशी बुला लिया।
🚩पर छुआछूत यहां भी पीछे पड़ी थी। नाई उनके बाल नहीं काटता था। खाना बनाने वाले उन्हें भोजन नहीं देते थे। मोची जूते पाॅलिश नहीं करता था। ऐसे में मालवीय जी ही उनका सहारा बनते थे। कई बार तो मालवीय जी स्वयं उनके जूते पाॅलिश कर देते थे। ऐसे वातावरण में बाबूजी अपने विद्यालय और काशी नगर में सामाजिक विषमताओं के विरुद्ध जनजागरण करते रहे।
🚩1935 में बाबूजी ने हिन्दू महासभा के अधिवेशन में एक प्रस्ताव पारित कराया, जिसमें मंदिर, तालाब एवं कुओं को सब हिन्दुओं के लिए खोलने की बात कही गयी थी। 1936 में उन्होंने प्रत्यक्ष राजनीति में प्रवेश किया और 1986 तक लगातार एक ही सीट से निर्वाचित होते रहे।
🚩गांधी जी के आह्वान पर वे कई बार जेल गये। अंग्रेज भारत को हिन्दू, मुसलमान तथा दलित वर्ग के रूप में कई भागों में बांटना चाहते थे,पर बाबूजी ने अपने लोगों को इसके खतरे बताये। इस प्रकार पाकिस्तान तो बना; पर शेष भारत एक ही रहा।
🚩स्वाधीनता के बाद वे लगातार केन्द्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य रहे। 1967 से 70 तक खाद्य मंत्री रहते हुए उन्होंने हरित क्रांति का सूत्रपात किया। श्रम मंत्री के नाते वे अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन के अध्यक्ष भी रहे। रेलमंत्री रहते हुए उन्होंने स्टेशन पर सबको एक लोटे से पानी पिलाने वाले ‘पानी पांडे’ नियुक्त किये तथा इस पर अधिकांश वंचित वर्ग के लोगों को रखा।
🚩1971 में रक्षामंत्री के नाते पाकिस्तान की पराजय और बंगलादेश के निर्माण में उनकी भी बड़ी भूमिका रही। 1975 के आपातकाल से उनके दिल को बहुत चोट लगी; पर वे शान्त रहे और चुनाव घोषित होते ही ‘कांग्रेस फाॅर डैमोक्रैसी’ बनाकर कांग्रेस के विरुद्ध चुनाव लड़े। जनता पार्टी के शासन में वे उपप्रधानमंत्री रहे।
🚩1954 में ‘हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी’ का उद्घाटन तथा देवनागरी लिपि के प्रथम टेलिप्रिंटर का लोकार्पण पटना में राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन तथा दिल्ली में उन्होंने एक साथ किया था। 1974 में छत्रपति शिवाजी के राज्यारोहण की 300 वीं वर्षगांठ पर निर्मित भव्य चित्र का लोकार्पण भी रक्षामंत्री के नाते उन्होंने किया था। 1978 में दिल्ली में ‘विद्या भारती’ द्वारा आयोजित बाल संगम में वे सरसंघचालक श्री बालासाहब देवरस के साथ मंचासीन हुए।
🚩वंचित वर्ग में प्रभाव देखकर मुसलमान तथा ईसाइयों ने उन्हें धर्मान्तरित करने का प्रयास किया; पर वे उनके धोखे में नहीं आये। गुरु दीक्षा लेते समय अपने पिताजी की तरह उन्होंने भी शिवनारायणी पंथ के संत से दीक्षा ली। 6 जुलाई 1986 को समरस भारत बनाने के इच्छुक बाबूजी का देवलोकगमन हुआ।
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5 अप्रैल 2022
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🚩हिन्दू समाज के निर्धन और वंचित वर्ग के जिन लोगों ने उपेक्षा सहकर भी अपना मनोबल ऊंचा रखा, उनमें ग्राम चन्दवा (बिहार) में 5 अप्रैल 1906 को जन्मे बाबू जगजीवनराम का नाम उल्लेखनीय है। उनके पिता श्री शोभीराम ने कुछ मतभेदों के कारण सेना छोड़ दी थी। उनकी माता श्रीमती बसन्ती देवी ने आर्थिक अभावों के बीच अपने बच्चों को स्वाभिमान से जीना सिखाया।
🚩उनके विद्यालय में हिन्दू तथा दलित हिन्दुओं के लिए पानी के अलग घड़े रखे जाते थे। उन्होंने अपने मित्रों के साथ मिलकर दलित घड़ों को फोड़ दिया। प्रबन्ध समिति के पूछने पर उन्होंने कहा कि उन्हें हिन्दुओं में बंटवारा स्वीकार नहीं है। अतः सब हिन्दुओं के लिए एक ही घड़े की व्यवस्था की गयी। 1925 में उनके विद्यालय में मालवीय जी आये। उन्होंने जगजीवनराम द्वारा दिये गये स्वागत भाषण से प्रभावित होकर उन्हें काशी बुला लिया।
🚩पर छुआछूत यहां भी पीछे पड़ी थी। नाई उनके बाल नहीं काटता था। खाना बनाने वाले उन्हें भोजन नहीं देते थे। मोची जूते पाॅलिश नहीं करता था। ऐसे में मालवीय जी ही उनका सहारा बनते थे। कई बार तो मालवीय जी स्वयं उनके जूते पाॅलिश कर देते थे। ऐसे वातावरण में बाबूजी अपने विद्यालय और काशी नगर में सामाजिक विषमताओं के विरुद्ध जनजागरण करते रहे।
🚩1935 में बाबूजी ने हिन्दू महासभा के अधिवेशन में एक प्रस्ताव पारित कराया, जिसमें मंदिर, तालाब एवं कुओं को सब हिन्दुओं के लिए खोलने की बात कही गयी थी। 1936 में उन्होंने प्रत्यक्ष राजनीति में प्रवेश किया और 1986 तक लगातार एक ही सीट से निर्वाचित होते रहे।
🚩गांधी जी के आह्वान पर वे कई बार जेल गये। अंग्रेज भारत को हिन्दू, मुसलमान तथा दलित वर्ग के रूप में कई भागों में बांटना चाहते थे,पर बाबूजी ने अपने लोगों को इसके खतरे बताये। इस प्रकार पाकिस्तान तो बना; पर शेष भारत एक ही रहा।
🚩स्वाधीनता के बाद वे लगातार केन्द्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य रहे। 1967 से 70 तक खाद्य मंत्री रहते हुए उन्होंने हरित क्रांति का सूत्रपात किया। श्रम मंत्री के नाते वे अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन के अध्यक्ष भी रहे। रेलमंत्री रहते हुए उन्होंने स्टेशन पर सबको एक लोटे से पानी पिलाने वाले ‘पानी पांडे’ नियुक्त किये तथा इस पर अधिकांश वंचित वर्ग के लोगों को रखा।
🚩1971 में रक्षामंत्री के नाते पाकिस्तान की पराजय और बंगलादेश के निर्माण में उनकी भी बड़ी भूमिका रही। 1975 के आपातकाल से उनके दिल को बहुत चोट लगी; पर वे शान्त रहे और चुनाव घोषित होते ही ‘कांग्रेस फाॅर डैमोक्रैसी’ बनाकर कांग्रेस के विरुद्ध चुनाव लड़े। जनता पार्टी के शासन में वे उपप्रधानमंत्री रहे।
🚩1954 में ‘हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी’ का उद्घाटन तथा देवनागरी लिपि के प्रथम टेलिप्रिंटर का लोकार्पण पटना में राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन तथा दिल्ली में उन्होंने एक साथ किया था। 1974 में छत्रपति शिवाजी के राज्यारोहण की 300 वीं वर्षगांठ पर निर्मित भव्य चित्र का लोकार्पण भी रक्षामंत्री के नाते उन्होंने किया था। 1978 में दिल्ली में ‘विद्या भारती’ द्वारा आयोजित बाल संगम में वे सरसंघचालक श्री बालासाहब देवरस के साथ मंचासीन हुए।
🚩वंचित वर्ग में प्रभाव देखकर मुसलमान तथा ईसाइयों ने उन्हें धर्मान्तरित करने का प्रयास किया; पर वे उनके धोखे में नहीं आये। गुरु दीक्षा लेते समय अपने पिताजी की तरह उन्होंने भी शिवनारायणी पंथ के संत से दीक्षा ली। 6 जुलाई 1986 को समरस भारत बनाने के इच्छुक बाबूजी का देवलोकगमन हुआ।
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सर्वे भवन्तु सुखिन:। सर्वे सन्तु निरामया:।।
7 अप्रैल विश्व स्वास्थ्य दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
6 अप्रैल 2022
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🚩विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ WHO) विश्व के देशों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग एवं मानक विकसित करने की संस्था है।
🚩विश्व स्वास्थ्य संगठन के 193 सदस्य देश तथा 2 संबद्ध सदस्य हैं। यह संयुक्त राष्ट्र संघ की 1 अनुषांगिक इकाई है। इस संस्था की स्थापना 7 अप्रैल 1948 को की गयी थी। इसी लिए प्रत्येक साल 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता हैं।
🚩 इसका उद्देश्य संसार के लोगो के स्वास्थ्य का स्तर ऊँचा करना है। डब्ल्यूएचओ का मुख्यालय स्विट्ज़रलैण्ड के जिनेवा शहर में स्थित है। इथियोपिया के डॉक्टर टैड्रोस ऐडरेनॉम ग़ैबरेयेसस विश्व स्वास्थ्य संगठन के नए महानिदेशक निर्वाचित हुए हैं।
🚩वो डॉक्टर मार्गरेट चैन का स्थान लेंगे जो 5-5 साल के 2 कार्यकाल यानी 10 वर्षों तक काम करने के बाद इस पद से रिटायर हो रही हैं।
🚩भारत भी विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक सदस्य देश है और इसका भारतीय मुख्यालय भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है।
🚩वर्ष 1948 में विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रमुख वास्तविक प्राथमिकताओं में मलेरिया (Malaria), मातृ तथा शिशु स्वास्थ्य (Mother and Child Health), ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis), यौन रोग (Venereal Disease), पोषण (nutrition) तथा पर्यावरणीय स्वच्छता (Environmental Sanitation) इत्यादि विषय सम्मिलित थे। इसके अलावा कुछ अतिरिक्त विषय जो संज्ञान में लिए गए थे, वे थे : जन स्वास्थ्य कल्याण प्रशासन, परजैविक तथा विषाणुजनित बीमारियाँ, तथा मानसिक स्वास्थ्य।
🚩विश्व स्वास्थ्य संगठन उन सभी अन्तरराष्ट्रीय स्वच्छता आयोगों के प्रयासों के परिणाम के रूप में सामने आया, जिन्हें 19वीं शताब्दी में संक्रामक रोगों की रोकथाम तथा उपचार हेतु बनाया गया था। जहाँ एक तरफ पूर्व में बनाये गए संगठनों का उद्देश्य किसी संक्रामक रोग को एक विशेष राष्ट्र अथवा क्षेत्र से बाहर रखना होता था, वहीं दूसरी तरफ विश्व स्वास्थ्य संगठन का उद्देश्य किसी संक्रामक बीमारी को जड़ से खत्म करना होता है, फिर चाहे वह विश्व के किसी भी राष्ट्र अथवा भाग में फैली हुई हो।
🚩21वीं शताब्दी के प्रारम्भ में, विश्व स्वास्थ्य संगठन की इमेरजेंसी टीम, जिसमे कि कुशल डॉक्टरों को शामिल किया गया होता है, को किसी नई संक्रमणशील बीमारी, जैसे कि श्वसन सम्बन्धी रोग, फ्लू इत्यदि वाले क्षेत्र में उपचार हेतु भेजा गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन अपने सदस्य राष्ट्रों में स्वास्थ्य सुविधाएँ बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तथा केन्द्रों आदि का निर्माण भी करवाता है।
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7 अप्रैल विश्व स्वास्थ्य दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
6 अप्रैल 2022
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🚩विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ WHO) विश्व के देशों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग एवं मानक विकसित करने की संस्था है।
🚩विश्व स्वास्थ्य संगठन के 193 सदस्य देश तथा 2 संबद्ध सदस्य हैं। यह संयुक्त राष्ट्र संघ की 1 अनुषांगिक इकाई है। इस संस्था की स्थापना 7 अप्रैल 1948 को की गयी थी। इसी लिए प्रत्येक साल 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता हैं।
🚩 इसका उद्देश्य संसार के लोगो के स्वास्थ्य का स्तर ऊँचा करना है। डब्ल्यूएचओ का मुख्यालय स्विट्ज़रलैण्ड के जिनेवा शहर में स्थित है। इथियोपिया के डॉक्टर टैड्रोस ऐडरेनॉम ग़ैबरेयेसस विश्व स्वास्थ्य संगठन के नए महानिदेशक निर्वाचित हुए हैं।
🚩वो डॉक्टर मार्गरेट चैन का स्थान लेंगे जो 5-5 साल के 2 कार्यकाल यानी 10 वर्षों तक काम करने के बाद इस पद से रिटायर हो रही हैं।
🚩भारत भी विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक सदस्य देश है और इसका भारतीय मुख्यालय भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है।
🚩वर्ष 1948 में विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रमुख वास्तविक प्राथमिकताओं में मलेरिया (Malaria), मातृ तथा शिशु स्वास्थ्य (Mother and Child Health), ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis), यौन रोग (Venereal Disease), पोषण (nutrition) तथा पर्यावरणीय स्वच्छता (Environmental Sanitation) इत्यादि विषय सम्मिलित थे। इसके अलावा कुछ अतिरिक्त विषय जो संज्ञान में लिए गए थे, वे थे : जन स्वास्थ्य कल्याण प्रशासन, परजैविक तथा विषाणुजनित बीमारियाँ, तथा मानसिक स्वास्थ्य।
🚩विश्व स्वास्थ्य संगठन उन सभी अन्तरराष्ट्रीय स्वच्छता आयोगों के प्रयासों के परिणाम के रूप में सामने आया, जिन्हें 19वीं शताब्दी में संक्रामक रोगों की रोकथाम तथा उपचार हेतु बनाया गया था। जहाँ एक तरफ पूर्व में बनाये गए संगठनों का उद्देश्य किसी संक्रामक रोग को एक विशेष राष्ट्र अथवा क्षेत्र से बाहर रखना होता था, वहीं दूसरी तरफ विश्व स्वास्थ्य संगठन का उद्देश्य किसी संक्रामक बीमारी को जड़ से खत्म करना होता है, फिर चाहे वह विश्व के किसी भी राष्ट्र अथवा भाग में फैली हुई हो।
🚩21वीं शताब्दी के प्रारम्भ में, विश्व स्वास्थ्य संगठन की इमेरजेंसी टीम, जिसमे कि कुशल डॉक्टरों को शामिल किया गया होता है, को किसी नई संक्रमणशील बीमारी, जैसे कि श्वसन सम्बन्धी रोग, फ्लू इत्यदि वाले क्षेत्र में उपचार हेतु भेजा गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन अपने सदस्य राष्ट्रों में स्वास्थ्य सुविधाएँ बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तथा केन्द्रों आदि का निर्माण भी करवाता है।
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संत श्रीआशारामजी बापू के साथ POCSO ACT का भरपूर दुरुपयोग हुआ ...जानिए.....
7 अप्रैल 2022
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🚩एक महान संत को जेल भेजने के लिए prosecution के द्वारा कैसे एक बालिग़ लडकी को नाबालिग दिखाया गया !
🚩चूंकि संत श्रीआशारामजी बापू का मुकदमा 5 साल तक POCSO ACT के तहत चला.. पहला और सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न था...क्या लडकी नाबालिग है ? यदि लडकी 18 वर्ष से कम आयु की पायी नहीं जाती तो पोक्सो के तहत मुकदमा चलाने का न्यायालय के पास कोई अधिकार क्षेत्र नहीं था |
🚩बापूजी के पक्ष ने लडकी के बालिग़ होने के सम्बन्ध में 6 महत्वपूर्ण दस्तावेज कोर्ट के सामने रखे थे।
🚩पहला था- लडकी के प्रथम स्कुल शंकर मुमुक्षु का एडमिशन फ़ॉर्म।
दुसरा- रजिस्ट्रेशन फॉर्म
तीसरा- स्कॉलर रजिस्टर
चौथा - लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी प्रपोजल फॉर्म
और पाँचवा था राशन कार्ड
साथ ही लडकी के पिता का शंकर मुमुक्षु स्कुल में प्रस्तुत हुआ एफिडेविट !
🚩परन्तु, जोधपुर न्यायालय ने हाईस्कूल सर्टिफिकेट को आयु निर्धारण का एकमात्र आधार मानते हुए लड़की को नाबालिग मान पोक्सो के तहत केस चलाया । पोक्सो नॉन-बेलेबल होने के कारण बापूजी को बेल नहीं दी गयी और.. इस एक्ट के अनुसार जेल में रहते हुए अपने को बेगुनाह साबित करने की जिम्मेदारी भी बापू आशाराम जी की रही !
🚩जब जोधपुर के सेशंस कोर्ट व हाईकोर्ट ने इन (यहाँ पर प्रथम स्कुल के दस्तावेज, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी, राशन कार्ड दिखायें) आयु के दस्तावेजों को consider करने से मना किया, तब बापूजी के पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगायी ।
🚩 15 ओक्टोबर 2014 को सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश हुआ की जोधपुर कोर्ट मात्र हाईस्कूल सर्टिफिकेट के आधार पर नहीं अपितु पहले बताये गये सभी दस्तावेजों को मद्दे नजर रखते हुए लडकी की आयु सुनिश्चित करें (यहाँ पर प्रथम स्कुल के दस्तावेज, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी, राशन कार्ड दिखायें)| सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, बापू आशारामजी जी के पक्ष ने इन सभी दस्तवेज़ों को एविडेन्स एक्ट के तहत न्यायालय में प्रमाणित भी किया। फिर भी सेशन कोर्ट द्वारा 2018 में दिए गए जजमेंट में इन सभी दस्तावेजों को झुठलाते हुए मात्र उस हाईस्कूल सर्टिफिकेट के आधार पर लडकी को नाबालिग घोषित कर सजा सुनाई गयी !
🚩सबसे पहले सवाल उठता है- क्या यह सर्टिफिकेट न्यायालय में कानून के अनुसार प्रमाणित किया गया है?.....
उत्तर है- नहीं ..!
🚩स्वयं लड़की के वकील ने, 21 मार्च 2018 को, अपने Final arguments के पहले दिन, कोर्ट में 311 की application लगाकर कहा था कि हम इस हायस्कुल सर्टिफिकेट की सत्यता को Indian Evidence Act के अनुसार न्यायालय में सिद्ध नहीं कर पाए हैं... इसे सिद्ध करने के लिये लड़की को कोर्ट में फिर से बुलाया जाए ।
🚩 इस अर्जी में अभियोजन पक्ष ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि वे POCSO के तहत आरोप को बनाए रखने के लिए आवश्यक तथ्यों को साबित करने में विफल रहे हैं ।
🚩इस अर्ज़ी को जजसाहब ने यह कहकर ख़ारिज कर दिया था की ‘Prosecution को 34 महीने पहले हुए जाँच अधिकारी नितिन दवे के बयान के समय से ही पता था कि हाई स्कूल सर्टिफिकेट साबित नही हुआ है और अब अंतिम सुनवाई में पेश की गयी यह अर्जी कार्यवाही में देरी करने के इरादे से पेश की गयी है ।
🚩इस ऑर्डर के कुछ ही दिन बाद आश्चर्यजनक ढंग से उसी unproved High School certificate को सेशन्स कोर्ट के द्वारा ‘सरकारी दस्तावेज’ कहकर सबूत में स्वीकारा गया और बापू आशारामजी को केवल लडकी के बयान के आधार पर सजा सुनायी गयी !
🚩यहाँ एक बात गौर करने योग्य है.... कानून कहता है, ‘सरकारी दस्तावेज’ को भी Indian Evidence Act के तहत साबित करना आवश्यक है ।
🚩ऐसे में अब सवाल उठता है निचली अदालतों के निर्णयों पर ..!
🚩हाल ही में 6 मार्च 2022 को मध्यप्रदेश इंदौर हायकोर्ट की खंडपीठ ने सेशन कोर्ट द्वारा pocso में दिए गए १० साल की सजा के निर्णय को ख़ारिज करते हुए कहा की “दुष्कर्म केस में लड़की की उम्र साबित किये बिना सजा देना गंभीर गलती है।
🚩इंदौर हायकोर्ट ने POCSO हटाते समय इस तथ्य को मद्देनजर रखा की लडकी के स्कुल एडमिशन के समय उसके डेट ऑफ़ बर्थ से सम्बंधित कोई प्रमाणपत्र पेश नही किया गया था व लड़की के स्कुल के प्राध्यापक भी उसके आयु की सही जानकारी सही नहीं दे पाए थे।
🚩इस पर इंदौर हायकोर्ट ने पोक्सो के तहत सजा भुगतने वाले, ७ साल से जेल में बंद युवक को निर्दोष बरी किया व उसका जुर्माना भी लौटाया ! दोस्तों ! जुर्माना तो कोर्ट ने लौटा दिया लेकिन उसकी जिन्दगी के 7 साल कोई लौटा पाएगा?
🚩अब सवाल उठता है- क्या बापू आशारामजी के केस में हायस्कुल सर्टिफिकेट में लिखे डेट ऑफ़ बर्थ का कोई प्रमाण है?
🚩उत्तर है- इसका कोई प्रमाण नहीं है | लडकी का बर्थ सर्टिफिकेट कोर्ट के रिकोर्ड पर नहीं है !!
7 अप्रैल 2022
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🚩एक महान संत को जेल भेजने के लिए prosecution के द्वारा कैसे एक बालिग़ लडकी को नाबालिग दिखाया गया !
🚩चूंकि संत श्रीआशारामजी बापू का मुकदमा 5 साल तक POCSO ACT के तहत चला.. पहला और सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न था...क्या लडकी नाबालिग है ? यदि लडकी 18 वर्ष से कम आयु की पायी नहीं जाती तो पोक्सो के तहत मुकदमा चलाने का न्यायालय के पास कोई अधिकार क्षेत्र नहीं था |
🚩बापूजी के पक्ष ने लडकी के बालिग़ होने के सम्बन्ध में 6 महत्वपूर्ण दस्तावेज कोर्ट के सामने रखे थे।
🚩पहला था- लडकी के प्रथम स्कुल शंकर मुमुक्षु का एडमिशन फ़ॉर्म।
दुसरा- रजिस्ट्रेशन फॉर्म
तीसरा- स्कॉलर रजिस्टर
चौथा - लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी प्रपोजल फॉर्म
और पाँचवा था राशन कार्ड
साथ ही लडकी के पिता का शंकर मुमुक्षु स्कुल में प्रस्तुत हुआ एफिडेविट !
🚩परन्तु, जोधपुर न्यायालय ने हाईस्कूल सर्टिफिकेट को आयु निर्धारण का एकमात्र आधार मानते हुए लड़की को नाबालिग मान पोक्सो के तहत केस चलाया । पोक्सो नॉन-बेलेबल होने के कारण बापूजी को बेल नहीं दी गयी और.. इस एक्ट के अनुसार जेल में रहते हुए अपने को बेगुनाह साबित करने की जिम्मेदारी भी बापू आशाराम जी की रही !
🚩जब जोधपुर के सेशंस कोर्ट व हाईकोर्ट ने इन (यहाँ पर प्रथम स्कुल के दस्तावेज, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी, राशन कार्ड दिखायें) आयु के दस्तावेजों को consider करने से मना किया, तब बापूजी के पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगायी ।
🚩 15 ओक्टोबर 2014 को सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश हुआ की जोधपुर कोर्ट मात्र हाईस्कूल सर्टिफिकेट के आधार पर नहीं अपितु पहले बताये गये सभी दस्तावेजों को मद्दे नजर रखते हुए लडकी की आयु सुनिश्चित करें (यहाँ पर प्रथम स्कुल के दस्तावेज, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी, राशन कार्ड दिखायें)| सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, बापू आशारामजी जी के पक्ष ने इन सभी दस्तवेज़ों को एविडेन्स एक्ट के तहत न्यायालय में प्रमाणित भी किया। फिर भी सेशन कोर्ट द्वारा 2018 में दिए गए जजमेंट में इन सभी दस्तावेजों को झुठलाते हुए मात्र उस हाईस्कूल सर्टिफिकेट के आधार पर लडकी को नाबालिग घोषित कर सजा सुनाई गयी !
🚩सबसे पहले सवाल उठता है- क्या यह सर्टिफिकेट न्यायालय में कानून के अनुसार प्रमाणित किया गया है?.....
उत्तर है- नहीं ..!
🚩स्वयं लड़की के वकील ने, 21 मार्च 2018 को, अपने Final arguments के पहले दिन, कोर्ट में 311 की application लगाकर कहा था कि हम इस हायस्कुल सर्टिफिकेट की सत्यता को Indian Evidence Act के अनुसार न्यायालय में सिद्ध नहीं कर पाए हैं... इसे सिद्ध करने के लिये लड़की को कोर्ट में फिर से बुलाया जाए ।
🚩 इस अर्जी में अभियोजन पक्ष ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि वे POCSO के तहत आरोप को बनाए रखने के लिए आवश्यक तथ्यों को साबित करने में विफल रहे हैं ।
🚩इस अर्ज़ी को जजसाहब ने यह कहकर ख़ारिज कर दिया था की ‘Prosecution को 34 महीने पहले हुए जाँच अधिकारी नितिन दवे के बयान के समय से ही पता था कि हाई स्कूल सर्टिफिकेट साबित नही हुआ है और अब अंतिम सुनवाई में पेश की गयी यह अर्जी कार्यवाही में देरी करने के इरादे से पेश की गयी है ।
🚩इस ऑर्डर के कुछ ही दिन बाद आश्चर्यजनक ढंग से उसी unproved High School certificate को सेशन्स कोर्ट के द्वारा ‘सरकारी दस्तावेज’ कहकर सबूत में स्वीकारा गया और बापू आशारामजी को केवल लडकी के बयान के आधार पर सजा सुनायी गयी !
🚩यहाँ एक बात गौर करने योग्य है.... कानून कहता है, ‘सरकारी दस्तावेज’ को भी Indian Evidence Act के तहत साबित करना आवश्यक है ।
🚩ऐसे में अब सवाल उठता है निचली अदालतों के निर्णयों पर ..!
🚩हाल ही में 6 मार्च 2022 को मध्यप्रदेश इंदौर हायकोर्ट की खंडपीठ ने सेशन कोर्ट द्वारा pocso में दिए गए १० साल की सजा के निर्णय को ख़ारिज करते हुए कहा की “दुष्कर्म केस में लड़की की उम्र साबित किये बिना सजा देना गंभीर गलती है।
🚩इंदौर हायकोर्ट ने POCSO हटाते समय इस तथ्य को मद्देनजर रखा की लडकी के स्कुल एडमिशन के समय उसके डेट ऑफ़ बर्थ से सम्बंधित कोई प्रमाणपत्र पेश नही किया गया था व लड़की के स्कुल के प्राध्यापक भी उसके आयु की सही जानकारी सही नहीं दे पाए थे।
🚩इस पर इंदौर हायकोर्ट ने पोक्सो के तहत सजा भुगतने वाले, ७ साल से जेल में बंद युवक को निर्दोष बरी किया व उसका जुर्माना भी लौटाया ! दोस्तों ! जुर्माना तो कोर्ट ने लौटा दिया लेकिन उसकी जिन्दगी के 7 साल कोई लौटा पाएगा?
🚩अब सवाल उठता है- क्या बापू आशारामजी के केस में हायस्कुल सर्टिफिकेट में लिखे डेट ऑफ़ बर्थ का कोई प्रमाण है?
🚩उत्तर है- इसका कोई प्रमाण नहीं है | लडकी का बर्थ सर्टिफिकेट कोर्ट के रिकोर्ड पर नहीं है !!