ओजस्वी भारत
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राष्ट्र एवं भारतीय संस्कृति पर हो रहे आघातों पर भारतीयों की आवाज बुलंद करने का अचूक माध्यम !!
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3 मई 2022 मंगलवार अक्षय तृतीया

1 मई 2022
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🚩अक्षय तृतीया 3 मई मंगलवार को सुबह 05:39 से शुरू होगी और पूर्ण रात्रि तक रहेगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का शुभ मुहूर्त 3 मई को सुबह 05:39 से लेकर दोपहर 12:18 तक रहेगा।

🚩अक्षय तृतीया में पूजा, जप-तप, दान स्नानादि शुभ कार्यों का विशेष महत्व तथा फल रहता है। इस तिथि का जहाँ धार्मिक महत्व है, वहीं यह तिथि व्यापारिक रौनक बढ़ाने वाली भी मानी गई है।

🚩यह दिन सौभाग्य और सफलता का सूचक है। इस दिन को 'सर्वसिद्धि मुहूर्त दिन' भी कहते है, क्योंकि इस दिन शुभ काम के लिये पंचांग देखने की ज़रूरत नहीं होती है।

🚩भगवान विष्णु के नर-नारायण, हयग्रीव और परशुराम जी का अवतरण भी इसी तिथि को हुआ था।

🚩भविष्य पुराण के अनुसार इस तिथि की युगादि तिथियों में गणना होती है, सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ है।

🚩 इस दिन श्री बद्रीनाथ जी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है और श्री लक्ष्मी नारायण के दर्शन किए जाते हैं। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बद्रीनारायण के कपाट भी इसी तिथि से ही पुनः खुलते है।

🚩वृन्दावन स्थित श्री बाँके बिहारी जी मन्दिर में भी केवल इसी दिन श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं, अन्यथा वे पूरे वर्ष वस्त्रों से ढके रहते हैं।

🚩इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था और द्वापर युग का समापन भी इसी दिन हुआ था। ऐसी मान्यता है कि इस दिन से प्रारम्भ किए गए कार्य अथवा इस दिन को किए गए दान का कभी भी क्षय नहीं होता।

🚩इस दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरीत हुई थीं। राजा भागीरथ ने गंगा को धरती पर अवतरित कराने के लिए हजारों वर्ष तक तप कर उन्हें धरती पर लाए थे। इस दिन पवित्र गंगा में डूबकी लगाने से मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।

🚩 इस दिन मां अन्नपूर्णा का जन्मदिन भी मनाया जाता है। इस दिन गरीबों को खाना खिलाया जाता है और भंडारे किए जाते हैं। मां अन्नपूर्णा के पूजन से रसोई तथा भोजन में स्वाद बढ़ जाता है।

🚩अक्षय तृतीया के अवसर पर ही म‍हर्षि वेदव्‍यास जी ने महाभारत लिखना शुरू किया था। महाभारत को पांचवें वेद के रूप में माना जाता है। इसी में श्रीमद्भागवत गीता भी समाहित है। अक्षय तृतीया के दिन श्रीमद्भागवत गीता के 18 वें अध्‍याय का पाठ करना चाहिए।

🚩 बंगाल में इस दिन भगवान गणेशजी और माता लक्ष्मीजी का पूजन कर सभी व्यापारी अपना लेखा-जोखा (ऑडिट बुक) की किताब शुरू करते हैं। वहां इस दिन को ‘हलखता’ कहते हैं।

🚩 भगवान शंकरजी ने इसी दिन भगवान कुबेर माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने की सलाह दी थी। जिसके बाद से अक्षय तृतीया के दिन माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है और यह परंपरा आज तक चली आ रही है।

🚩अक्षय तृतीया के दिन ही पांडव पुत्र युधिष्ठर को अक्षय पात्र की प्राप्ति भी हुई थी। इसकी विशेषता यह थी कि इसमें कभी भी भोजन समाप्त नहीं होता था।

🚩अक्षय तृतीया के दिन शुभ कार्य करने का विशेष महत्व है। अक्षय तृतीया के दिन कम से कम एक गरीब को अपने घर बुलाकर सत्‍कार पूर्वक उन्‍हें भोजन अवश्‍य कराना चाहिए। गृहस्‍थ लोगों के लिए ऐसा करना जरूरी बताया गया है। मान्‍यता है कि ऐसा करने से उनके घर में धन धान्‍य में अक्षय बढ़ोतरी होती है।

🚩अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर हमें धार्मिक कार्यों के लिए अपनी कमाई का कुछ हिस्‍सा दान करना चाहिए। ऐसा करने से हमारी धन और संपत्ति में कई गुना इजाफा होता है।

🚩वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को रेणुका के गर्भ से भगवान विष्णु ने परशुराम रूप में जन्म लिया। वैसे तो देशभर में परशुराम जयंती मनाते है पर,कोंकण और चिप्लून के परशुराम मंदिरों में इस तिथि को परशुराम जयन्ती बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। दक्षिण भारत में परशुराम जयन्ती को विशेष महत्व दिया जाता है,इस दिन परशुराम जी की पूजा करके उन्हें अर्घ्य देने का बड़ा माहात्म्य माना गया है।

🚩एक कथा के अनुसार परशुराम की माता और विश्वामित्र की माता के पूजन के बाद प्रसाद देते समय ऋषि ने प्रसाद बदल कर दे दिया था। जिसके प्रभाव से परशुराम ब्राह्मण होते हुए भी क्षत्रिय स्वभाव के थे और क्षत्रिय पुत्र होने के बाद भी विश्वामित्र ब्रह्मर्षि कहलाए।

🚩सौभाग्यवती स्त्रियाँ और क्वारी कन्याएँ इस दिन गौरी-पूजा करके मिठाई, फल और भीगे हुए चने बाँटती हैं, गौरी-पार्वती की पूजा करके धातु या मिट्टी के कलश में जल, फल, फूल, तिल, अन्न आदि लेकर दान करती हैं ।

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अंगोला में बैन हुआ इस्लाम, गिरा दी सारी मस्जिदे।

2 मई 2022
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🚩इस्लाम धर्म और मुसलमानों पर पाबंदी लगाने वाला अंगोला दुनिया का पहला देश बन गया है।

🚩इस आशय की खबरें अफ्रीकी अखबारों में विस्तार से छपी हैं।

🚩अफ्रीकी अखबारों में छपी खबर के मुताबिक अफ्रीका महाद्वीप के इस तटीय देश अंगोला की कल्चर मिनिस्टर रोसा क्रूज ने कहा है कि न्याय और मानवाधिकार मंत्रालय ने इस्लाम को हमारे देश में कानूनी वैधता नहीं दी है।

🚩ऐसे में अगले नोटिस तक सभी मस्जिदें बंद रहेंगी। इसके अलावा इस तरह की खबरें भी हैं कि सरकार ने मस्जिदों को गिराए जाने का भी आदेश दे दिया है।

🚩मंत्री रोसा के मुताबिक ये फैसला देश में पनप रहे कई अवैध धार्मिक मतों को रोकने की कड़ी में लिया गया है। मंत्री ने यह बयान देश की संसद में दिया और कहा कि अंगोला की संस्कृति के खिलाफ जो भी मत हैं, उन्हें रोकने के लिए यह जरूरी था।

🚩इस्लाम के अलावा और भी कई मतों, संप्रदायों पर कानूनी रूप से बंदी की तलवार लटक रही है,इस बारे में मंत्री ने कहा कि हमने जिन संप्रदायों की लिस्ट निकाली है, उन पर सख्ती की जाएगी।

🚩इस फैसले के बारे में अंगोला के प्रेसिडेंट जोस अडुराडो सांतोस ने कहा कि आखिरकार हमारे देश में इस्लामिक प्रभाव के अंत की आखिरी शुरुआत हो चुकी है।

🚩 अंगोला में अधिकांश मुसलमान सुन्नी हैं । वे आम तौर पर पश्चिम अफ्रीका और मध्य पूर्व से विदेशी प्रवासी हैं , हालांकि कुछ स्थानीय धर्मान्तरित हैं । कई इस्लामिक संगठन मौजूद हैं जो मस्जिद, स्कूल और सामुदायिक केंद्र चलाते हैं। अंगोला में इस्लाम के विकास का संघ प्राथमिक धर्म परिवर्तन करने वाला संगठन है।

🚩 मुस्लिम अंगोलन का प्रतिनिधित्व लुआंडा के अंगोलन मुसलमानों की सर्वोच्च परिषद द्वारा किया जाता है।अंगोलन सरकार कानूनी रूप से किसी भी मुस्लिम संगठन को मान्यता नहीं देती है,नतीजा देश में मस्जिदों को प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है और कई को सरकार द्वारा बंद कर दिया गया है।

🚩अंगोला सरकार ने मुसलमानों के बढ़ते आतंक को देखते हुए ,उनपर सारी पाबंदियां लगा दी गई।

🚩सभी देशों को अंगोला देश से अक्कल लेना चाहिए कि जो भी देश की संस्कृति के विरुद्ध कार्य करेगा,उसको बैन किया जाएगा।

🚩भारत में भी कुछ लोग भारतीय संस्कृति को नष्ट करने के प्रयास कर रहे है,हमने आपने सबने देखा होगा कि कैसे भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव रामनवमीं और भगवान हनुमानजी के जन्मोत्सव पर विधर्मियों ने पैट्रोल बम बरसाए।

🚩भारत सरकार से निवेदन है कि जो भी लोग भारतीय संस्कृति को नष्ट करने के प्रयास कर रहे है,उन लोगों को 72 घंटे के अंदर फाँसी की सजा देवे।

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जिहादियों से सावधान!
वरना परिणाम खतरनाक!!!

4 मई 2022
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🚩मुंबई में 18 साल की सोनम शुक्ला की बोरे में लाश मिली।

🚩ट्यूशन के नाम पर बॉयफ्रेंड मोहम्मद अंसारी के घर गई थी ।

🚩गिरफ्तार अंसारी ने गुनाह कबूल कर लिया।
जिहादियों के चक्कर में पड़ने वाली हिन्दू लड़किया सावधान!

🚩मुंबई पुलिस ने NEET की तैयारी कर रही 18 वर्षीय छात्रा सोनम शुक्ला की निर्मम हत्या के मामले में मोहम्मद अंसारी के नाम के 23 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है।

🚩रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता सोनम सोमवार 25 अप्रैल 2022 की शाम के 4 बजे ट्यूशन के लिए घर से निकलने के बाद लापता हो गई थी।

🚩सोनम मुंबई के गोरेगाँव वेस्ट इलाके के प्रेमनगर की रहने वाली थीं। पुलिस के अनुसार , सोनम अपनी ट्यूशन नही गयी और रात के लगभग 9 बजे वहा से निकलने के पहले अपनी फ्रेंड के घर चली गई।

🚩जब सोनम शुक्ला रात 9:30 बजे तक घर नही लोटी ,तो चिंतित पिता ने उसका पता लगाने के लिए उसे फोन किया।

🚩पीड़िता के पिता ने बताया कि मेरी बेटी ने मुझसे कहा कि वह कुछ समय में घर पहुँच जाएगी क्योंकि वह अपने दोस्त के घर पर है।

🚩लेकिन जब वह रात के 11:30 बजे तक अपने घर नही पहुँची, तो में चिंतित हो गया और फिर से उसे कॉल लगाने की कोशिश की,पर इस बार उसका फोन स्विच ऑफ आया था।

🚩बाद में पता चला कि सोनम शुक्ला की हत्या अंसारी ने बहस के दौरान गला दबाकर कर दी थी ।

🚩हालांकि पुलिस को उसका शव 28 अप्रेल 2022 को ही प्राप्त हो गया था। पुलिस ने उसके पिता को शव की पहचान करने के लिए बुलाया, जहाँ पर उसके शव की पहचान की गयी।

🚩 पुलिस का कहना था कि उसका शव एक बोरे में था और काफी सड़ गल गया था। इस विषय में पुलिस का कहना था कि उन्हें अंसारी के विषय में स्थानीय सूत्रों से पता चला था और जब पूछताछ हुई तो अंसारी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।

🚩ये फेशबुक पर हिन्दुओ के नाम की फेक ID बनाते है और फिर हिन्दू लड़की से शादी कर लेते है और बाद में उस हिन्दू लड़की का जीवन नरक से बद्दतर हो जाता है।

🚩 ऐसे आये दिन कई मामले आते है,लवजिहाद वालों को हिन्दुओ की लड़कियों को फंसाने और उससे शादी करने के लिए मोटी रकम मिलती है और जो हिन्दू लडकिया मना कर देती है उन्हें ये मार डालते है,इसलिए इनसे बचकर रहना।

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मुसलमानों ने ईद के दिन 3 मई को जोधपुर में दिन दहाड़े हिन्दुओ को चाकू से मारा और सैकड़ो गाड़ियों को आग लगा दी।

5 मई 2022
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🚩शैतान कांँग्रेसी अशोक गहलोत के अनुसार इतना बड़ा दंगा छिटपुट घटना है।

🚩मतलब इस गहलोत के मुस्लिम दंगाई जब तक 100-200 हिन्दुओ को मार नही डालते तब तक यह छिटपुट घटना में गिनी जाएगी।

🚩मुस्लिम दंगाई साफ नजर आ रहे है,लेकिन 250 अज्ञात लोगों पर FIR की है। आखिर यह कांँग्रेसी मुस्लिम दंगाइयों को इतना सरंक्षण क्यों दे रही है???

🚩ये तो हद हो गई,रामनवमी पर हिन्दुओ पर हमला,हनुमान जयंती पर हिन्दुओ पर हमला ओर ईद के दिन भी हिन्दुओ पर हमला,आखिर हिन्दुस्तान में हिन्दुओ के साथ इतने अत्याचार क्यों?

🚩जोधपुर ( राजस्थान ) में सैकड़ो गाड़ियाँ तोड़ी, युवक की पीठ में छुरा घोपा: कर्फ्यू के बावजूद ईद की नमाज के बाद सड़क पर उतरी मुस्लिम भीड़, फेंके तेज़ाब वाले बोतल ,कहना पड़ेगा कांग्रेस राज गुंडा राज ।

🚩राजस्स्थान के जोधपुर में लगातार हिंसा भड़कती रही, वो भी तब जब जिले के कई हिस्सों में कर्फ्यू लगा हुआ है। एक बार फिर पूरी साजिश के तहत मुस्लिम दंगाई सड़क पर निकले और उन्होंने जम कर हिंसा की।

🚩घरों के ऊपर तेजाब से भरी बोतलें फेंकी गईं। तलवारें लहराई गईं। ‘कबूतरों का चौक’ नामक जगह पर दीपक परिहार नामक एक युवक की पीठ में छुरा घोंप दिया गया। महात्मा गाँधी अस्पताल में उक्त युवक का इलाज चल रहा है, जहाँ उसकी पीठ में से चाकू निकाला गया।

🚩दंगाइयों ने जोधपुर शहर के 14 से अधिक मोहल्लों में मंगलवार (3 मई, 2022) को उत्पात मचाया। जालोरी गेट से ये दंगा शुरू हुआ और शहर की कई गलियों में पसर गया। जालपा मोहल्ले में विधायक के घर के बाहर ही बाइक को फूँक दिया गया। दंगाइयों ने बाइकों से मजहबी नारों के साथ रैली भी निकाली और सोनारो मोहल्ला में तलवारें लहराते हुए पहुँच कर लोगों के घरों पर तेजाब भरी बोतलें और पत्थर फेंके गये।

🚩मोहल्ले में अलग-अलग गुट को दंगा करने के लिए भेजा गया था। इस दौरान सैकड़ो गाड़ियों में तोड़फोड़ किया गया।

🚩 इससे पहले हुए दंगों में शहर के कई एटीएम बूथ तोड़े जा चुके हैं। ताज़ा हिंसा में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। जोधपुर के 10 इलाकों में कर्फ्यू लगा हुआ है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि दंगाई भीड़ मजहबी नारेबाजी करती रही और पुलिस देखती रही।

🚩जनता का कहना है कि “मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले में हिंसा हो रही है, लेकिन एक दिन तक उन्होंने कोई ट्वीट तक नहीं किया। फिर उन्होंने गुलदस्ते लेकर न आने की अपील की। रोम जल रहा था और नीरो बाँसुरी बजा रहा था – ये वही बात हो गई। सीएम का शहर जल रहा था और वो गुलदस्ते लेने में व्यस्त थे।

🚩स्वतंत्रता सेनानी बालमुकुंद बिस्सा की प्रतिमा पर भी इस्लामी झंडे लगा दिए गए। परशुराम जयंती पर लगे भगवा झंडों को हटा दिया गया और पाकिस्तानी झंडे लगाए ।

🚩दंगाइयों को खदेड़ने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और बल प्रयोग भी करना पड़ा।

🚩मुस्लिम युवकों ने सर्किल पर लगे तिरंगा को अपमानित करते हुए हटा दिया और पाकिस्तानी झंडा लगाया, नमाज के बाद दंगे की घटनाएँ शुरू हुईं।

🚩 फ़िलहाल बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को वहाँ तैनात किया गया है। ईदगाह के चारों तरफ भी पुलिस बलों को तैनात किया गया है। हिन्दू लोग इन घटनाओं को लेकर अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर क्रोधित है।

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हिन्दुस्तान में मुसलमानों का आतंक

6 मई 2022
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🚩हिन्दुस्तान में आये दिन मुसलमानों द्वारा आतंकियों से भी ज्यादा खतरनाक हमले हो रहे है।

🚩रमजान के महीने में भारतीय पुलिस कर्मचारियों द्वारा मुसलमानों को भोजन थाली परोसी गई और उन्हीं मुसलमानों ने पुलिस पर लाठियां बरसाई ओर पत्थर बाजी की।

🚩भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव रामनवमी के पर्व पर मुस्लिम लोगों ने देश भर में हिन्दू धर्म यात्रा पर पत्थर बरसाए और मंदिरों पर पैट्रोल बम फेंके गए,वहीं घटना फिर हनुमान जयंती पर भी हुई।

🚩अप्रैल 2022 में महीने भर तक मुसलमानों ने आतंकी हमलों का सिलसिला जारी रखा , फिर भी इन दरिंदो का मन नहीं भरा तो इन्होंने 3 मई 2022 परशुराम जयंती के दिन भी रोड़ पर नमाज पढ़ने के बाद ,हथियार लेकर हिन्दुओ पर हमले किये और सैकड़ों गाड़ियों को आग लगा दी।

🚩हिन्दुस्तान के सम्पूर्ण हिन्दुओ की भारत सरकार से विनती है कि इन मुस्लिम समुदाय पर कड़ी सख्ती करें, इन पर पाबंदी लगाई जाय,जैसे अंगोला सरकार ने बढ़ते इस्लामी आतंकवाद से इस्लाम को ही बैन कर दिया,वैसे ही आज भारत सरकार को भी भारत में इस्लाम को बैन कर देना चाहिए और इनकी सारी सुविधाएं भी बंद होनी चाहिए।

🚩भारत में बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए अब भारत में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करना ही होगा ।

🚩दुनियाभर में यदि कहीं पर भी आतंकवाद है तो उसके पीछे इस्ला‍म की सुन्नी विचारधारा के अंतर्गत वहाबी और सलाफी विचारधारा को दोषी माना जाता है। इनका मकसद है जिहाद के द्वारा धरती को इस्लामिक बनाना।

🚩आतंकवाद अब किसी एक देश या प्रांत की बात नहीं रह गया है। यह अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गठजोड़ कर चुका है और इसके समर्थन में कई मुस्लिम राष्ट्र और वामपंथी ताकतें हैं। सऊदी, सीरिया, इराक, अफगानिस्तान, कुर्दिस्तान, सूडान, यमन, लेबनान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, इंडोनेशिया और तुर्की जैसे इस्लामिक मुल्क इनकी पहानगाह हैं।

🚩इस्लामिक आतंकवाद की समस्या व उसकी जड़ के असली पोषक तत्व सिर्फ सऊदी अरब, चीन, ईरान ही नहीं हैं। इनके समर्थक गैर-मुस्लिम मुल्कों में वामपंथ, समाजसेवी और धर्मनिरपेक्षता की खोल में भी छुपे हुए हैं। इनके कई छद्म संगठन भी हैं, जो इस्लामिक शिक्षा और प्रचार-प्रसार के नाम की आड़ में कार्यरत हैं।

🚩अल कायदा, आईएस, तालिबान, बोको हराम, हिज्बुल्ला, हमास, लश्कर-ए-तोइबा, जमात-उद-दावा, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, जैश-ए-मुहम्मद, हरकत उल मुजाहिदीन, हरकत उल अंसार, हरकत उल जेहाद-ए-इस्लामी, अल शबाब, हिजबुल मुजाहिदीन, अल उमर मुजाहिदीन, जम्मू-कश्मीर इस्लामिक फ्रंट, स्टूडेंटस इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी), दीनदार अंजुमन, अल बदर, जमात उल मुजाहिदीन, दुख्तरान-ए-मिल्लत और इंडियन मुजाहिदीन जहां इस्लाम की एक विशेष विचारधारा से संबंध रखते हैं वहीं इस्लामिक मुल्कों को छोड़कर हर देश में कम्युनिस्ट या साम्यवादी विचारधारा की आड़ में भी ये संगठन पल और बढ़ रहे हैं।

🚩एक और जहां मुस्लिम मुल्कों में हिन्दू, ईसाई, बौद्ध आदि अल्पसंख्‍यकों पर हमले करके उन्हें वहां से खदेड़ा जा रहा है वहीं दूसरी और गैर-मुस्लिम मुल्कों के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में दहशत और आतंक का माहौल बनाकर वहां से भी गैर-मुस्लिमों, ईसाइयों, बौद्धों, शियाओं, अहमदियों आदि को खदेड़े जाने की साजिश पिछले कई वर्षों से जारी है।

🚩इस साजिश में वामपंथ ने लगभग सभी आतंकवादी गुटों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दे रखा। इस बात के कई सबूत पेश किए जा सकते हैं। भारत की बात करें तो पूर्वोत्तर, झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा,राजस्थान, मुम्बई में ऐसे कई ग्रुप सक्रिय हैं जिन्हें नक्सलवादी, माओवादी या लेनिन-मार्क्सवादी लिबरेशन फ्रंट कहा जाता है।

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ईसाई मिशनरियों द्वारा हो रहे धर्मान्तरण पर रोक जरूरी

7 मई 2022
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🚩असम हो या उड़ीसा हो या झाबुआ हो या अन्य वनवासी इलाका भारत में ईसाई मिशनरियों ने धर्मांतरण का कार्य बड़ी तेजी से कर दिया।

🚩तमिलनाडु में तो जबरन हो रहा है धर्मान्तरण

🚩चेन्नई हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से मांगा जवाब सरकारी स्कूलों में जबरन धर्म परिवर्तन क्यों किया जा रहा है???

🚩तमिलनाडु की ही एक ओर घटना में, तिरुवन्नामलाई में एक 13 वर्षीय आदिवासी लड़की का कुछ महीने पहले एक ईसाई पादरी ने उसके गाँव से अपहरण कर धर्मपरिवर्तन करा लिया था।

🚩ईसाई पादरी गाँव के बच्चों को कोचिंग पढ़ाने के नाम पर गाँव में ही उनका धर्मपरिवर्तन करते थे।

🚩कोचिंग में गाँव के बच्चों को धर्म-परिवर्तन के लिए बहलाया जा रहा था। गाँव वालों को इसकी जानकरी हुई तो उन्होंने बच्चों को कोचिंग जाने से रोक दिया मगर ईसाई पादरी एक 13 साल की आदिवासी लड़की का ब्रेनवॉश करके उसे अपने साथ ले जाने में कामयाब रहा,कुछ समय बाद लड़की को पादरी कल के घर से बरामद किया गया।

🚩महिला कैदियों के बच्चों की शैक्षिक स्थिति पर किए गए एक अध्ययन में, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग(NCPCR) ने पाया कि बाल सुधार गृहों, छात्रावासों और जेलों में ईसाई न होने पर भी बच्चों को बाइबिल पढ़ाई जा रही है।

🚩ईसाई मिशनरियों का लक्ष्य है कि हिन्दुओ को 2050 तक 95% तक ईसाई बनाना।

🚩ओक्लाहोमा शहर के ईसाई बिज़नेसमैन मार्ट ग्रीन साल 2033 तक दुनिया की हर भाषा में बाइबिल के अनुवाद की एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहे है। उनकी योजना वर्ष 2050 तक दुनिया की 95% आबादी के हाथों में बाइबिल देने की है।

🚩मार्ट ग्रीन ने अपने अभियान के लिए सभी प्रमुख बाइबिल अनुवाद संगठनों के साथ मिल कर ‘आई वांट टू नो’ (मैं जानना चाहता हूँ) बाइबिल के अनुवाद का मिशन चला रहे हैं।

🚩इस मिशन के तहत वो अमेरिकन बाइबिल सोसाइटी, बाइबिलिका, डेफ बाइबिल सोसाइटी, लूथरन बाइबिल ट्रांसलेटर्स, पायनियर बाइबिल ट्रांसलेटर्स, सीड कंपनी, एसआईएल इंटरनेशनल, यूनाइटेड बाइबिल सोसाइटीज, द वर्ड फॉर द वर्ल्ड और वाईक्लिफ बाइबिल ट्रांसलेटर्स यूएसए के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

🚩इस मिशन का लक्ष्य लगभग सभी 3800 भाषाओं में बाइबिल का अनुवाद करना है।

🚩जॉन से लेकर मदर टेरेसा तक चलता रहा ‘धंधा’
कहने को तो ईसा मसीह के सूली चढ़ने के बाद ही उनका संदेश को लेकर उनके शिष्य थॉमस भारत आ गए थे, लेकिन धर्मांतरण का खेल सही मायनों में वर्ष 1542 में भारत में रोमन कैथोलिक चर्च की स्‍थापना के साथ ही शुरू हुआ।

🚩इसी चर्च से जुड़ी मिशनरीज ने सबसे पहले भारत के गरीब हिन्दू और आदिवासियों की अशिक्षा और गरीबी को देखते हुए उन्हें धन का लालच देकर ईसाई बनाया था।

🚩अंग्रेजों के जाने के बाद कॉंग्रेस की सरपरस्ती में मदर टेरेसा ने देशभर में व्यापक रूप से लोगों को ईसाई बनाया। मिशनरीज ऑफ चैरिटी बनाकर उन्होंने मानवता की आड़ जमकर गरीब हिंदुओं का धर्मपरिवर्तन कराया। आज ईसाई मिशनरियों के कारण भारत के कई राज्यों के आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों में तनाव की स्थि‍ति बन गई है।

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नारियल एक फायदे अनेक

8 मई 2022
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🚩नारियल पानी त्रिदोषशामक है और 140 प्रकार की बीमारियों को दूर करता है।

🚩नारियल पानी में विटामिन ई की अच्छी मात्रा होती है, इसलिए इसे रोजाना पीने से बाल झड़ना बंद होते है और बाल मजबूत होते है ,साथ ही इससे स्किन का रुखापन भी दूर होता है,आँखों की रोशनी बढ़ती है,कोलेस्ट्रॉल और फैट-फ्री होने की वजह से ये दिल (हार्ट) के लिए बहुत अच्छा होता है।

🚩 पोटेशियम, सोडियम, कैल्शियम, एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर नारियल का पानी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। बहुत सारे लोग सालों से नारियल का इस्तेमाल खान-पान और सौंदर्य निखारने के लिए करते आए हैं।

🚩नारियल पानी में विषैले तत्वों को शरीर से दूर रखने के गुण भी होते हैं,हर रोज नारियल का पानी पीने से शरीर में डी हाइड्रेशन की कमी दूर होती हैं। इसके अलावा बॉडी इम्युनिटी को मजबूत करने में और बीमारियों से हमें सुरक्षित रखने में भी ये काफी कारगर होता है। इसके अलावा अगर आप शरीर के मोटापा से परेशान हैं तो नारियल पानी का सेवन करें, इससे आपको काफी फायदा होगा और आपकी फिटनेस परफेक्ट बनी रहेंगी।

🚩सिर दर्द से जुड़ी ज्यादातर समस्याएं डिहाइड्रेशन की वजह से ही होती हैं,ऐसे में नारियल पानी पीने से शरीर को तुरंत इलेक्ट्रोलाइट्स पहुंचाने का का काम करता है, जिससे हाइड्रेशन का स्तर सुधर जाता है।

🚩नारियल पानी पीने से रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, एक नारियल में करीब 600 मिलिग्राम पोटेशियम पाया जाता है,इसलिए सभी को नारियल पानी का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।

🚩 नारियल पानी पीने से सिर दर्द, उल्टी, दस्त, पेट में जलन, आंतों में सूजन और अल्सर की समस्या भी दूर होती है साथ ही मुह के छाले और कील, मुँहासे भी दूर होते है।

🚩 नारियल पानी पीने से शरीर के विषाणु खत्म होते है और 140 प्रकार की बीमारियों को दूर करने में नारियल पानी कारागर है,इसलिए इसका सेवन सभी को करना चाहिए।

🚩विदेशी कंपनियों के बने कोल्ड्रिंक्स से बचो और भारतीय संस्कृति के अनमोल उपहार नारियल पानी का सभी को सेवन करना ही चाहिए।

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महाराणा प्रताप जयंती पर शत्-शत् नमन।

9 मई 2022
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🚩महाराणा प्रताप का वजन 110 किलो था और लंबाई 7 '5'' फिट थी,वे दो म्यान वाली तलवार और 80 किलो का भाला रखते थे।

🚩हल्दीघाटी युद्ध में राणा के 20,000 सैनिकों ने अकबर के 80,000 सैनिकों को भगा दिया था।

🚩महाराणा प्रताप एक ही झटके में घोड़े समेत दुश्मन को काट डालते थे।

🚩अकबर महाराणा प्रताप के युद्ध कौशल से इतना घबरा गया था कि वह सपने में भी महाराणा प्रताप का नाम लेकर कांपने लगता था।

🚩महाराणा प्रताप आज भी अमरता के गौरव तथा मानवता के विजय सूर्य है। एक सच्चे शूरवीर ,महान पराक्रमी, देशभक्त ,वीर योद्धा ,मातृ भूमि के रखवाले के रूप में महाराणा प्रताप दुनिया में सदैव के लिए अमर हो गए।

🚩महाराणा प्रताप ने मुगलों को कईं बार युद्ध में हराया और हिंदुस्थान के पुरे मुगल साम्राज्य को घुटनो पर ला दिया था।

🚩दिवेर का महायुद्ध में तो महाराणा प्रताप ने बहलोल खान को घोड़े समेत 2 टुकड़ों में काट दिया था।

🚩आज भी महाराणा प्रताप का नाम असंख्य भारतीयों लिए प्रेरणास्रोत है। महाराणा प्रताप का स्वाभिमान भारत माता की पूंजी है।

🚩वे अजर अमरता के गौरव तथा मानवता के विजय सूर्य है। महाराणा प्रताप की देशभक्ति ,पत्थर की अमिट लकीर है ।

🚩ऐसे पराक्रमी भारत माँ के वीर सपूत महाराणा प्रताप को राष्ट्र का शत्- शत् नमन।

🚩महाराणा प्रताप के जीवनकाल को देखते है,तो देशभक्ति का संचार स्वाभाविक होने लगता है और आँखों में भक्ति के आँसू आ जाते है।

🚩महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया उदयपुर, मेवाड में सिसोदिया राजपूत राजवंश के राजा थे। उनका नाम इतिहास में वीरता, शौर्य, त्याग, पराक्रम और दृढ प्रण के लिये अमर है।


🚩महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को हुआ था। महाराणा प्रताप के पिता का नाम राणा उदयसिंह एवं माता जयवंताबाई था।

🚩 महाराणा प्रताप का बचपन भील समुदाय के साथ बिता , भीलों के साथ ही वे युद्ध कला सीखते थे , भील अपने पुत्र को कीका कहकर पुकारते है, इसलिए भील महाराणा को कीका नाम से पुकारते थे।

🚩महाराणा प्रताप के शासनकाल में सबसे रोचक तथ्य यह है कि मुगल सम्राट अकबर बिना युद्ध के प्रताप को अपने अधीन लाना चाहता था इसलिए अकबर ने प्रताप को समझाने के लिए चार राजदूत नियुक्त किए।

🚩जिसमें सर्वप्रथम सितम्बर 1572 ई. में जलाल खाँ प्रताप के खेमे में गया, इसी क्रम में मानसिंह (1573 ई. में ), भगवानदास ( सितम्बर, 1573 ई. में ) तथा राजा टोडरमल ( दिसम्बर,1573 ई. ) प्रताप को समझाने के लिए पहुँचे, लेकिन राणा प्रताप ने चारों को निराश किया, इस तरह राणा प्रताप ने मुगलों की अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया जिसके परिणामस्वरूप हल्दी घाटी का ऐतिहासिक युद्ध हुआ।

🚩हल्दीघाटी युद्ध 18 जून 1576 ईस्वी में मेवाड़ तथा मुगलों के मध्य हुआ था। इस युद्ध में मेवाड़ की सेना का नेतृत्व महाराणा प्रताप ने किया था ।

🚩इस युद्ध में महाराणा प्रताप सिंह विजय हुए। अकबर की विशाल सेना के सामने मुट्ठीभर राजपूत कितनी देर तक टिक पाते, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ, ये युद्ध पूरे एक दिन चला ओेैर राजपूतों ने मुग़लों के छक्के छुड़ा दिया थे और सबसे बड़ी बात यह है कि युद्ध आमने सामने लड़ा गया था। महाराणा की सेना ने मुगलों की सेना को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया था और मुगल सेना भागने लग गयी थी।

🚩जहां हल्दीघाटी का युद्ध नैतिक विजय और परीक्षण का युद्ध था, वहां दिवेर-छापली का युद्ध एक निर्णायक युद्ध बना। इसी विजय के फलस्वरूप संपूर्ण मेवाड़ पर महाराणा का अधिकार स्थापित हो गया।

🚩महाराणा प्रताप के सबसे प्रिय और प्रसिद्ध नीलवर्ण ईरानी मूल के घोड़े का नाम चेतक था। चेतक अश्व गुजरात के काठियावाड़ी व्यापारी ईरानी नस्ल के तीन घोडे चेतक,त्राटक और अटक लेकर मारवाड आया।

🚩अटक परीक्षण में काम आ गया। त्राटक महाराणा प्रताप ने उनके छोटे भाई शक्ती सिंह को दे दिया और चेतक को स्वयं रख लिया। हल्दी घाटी-(१५७६) के युद्ध में चेतक ने अपनी अद्वितीय स्वामिभक्ति, बुद्धिमत्ता एवं वीरता का परिचय दिया था। युद्ध में बुरी तरह घायल हो जाने पर भी महाराणा प्रताप को सुरक्षित रणभूमि से निकाल लाने में सफल वह एक बरसाती नाला उलांघ कर अन्ततः वीरगति को प्राप्त हुआ।

🚩हिंदी कवि श्याम नारायण पाण्डेय द्वारा रचित प्रसिद्ध महाकाव्य हल्दी घाटी में चेतक के पराक्रम एवं उसकी स्वामिभक्ति की मार्मिक कथा वर्णित हुई है। आज भी राजसमंद के हल्दी घाटी गांव में चेतक की समाधि बनी हुई है, जहाँ स्वयं प्रताप और उनके भाई शक्तिसिंह ने अपने हाथों से इस अश्व का दाह-संस्कार किया था।
🚩 एक अर्थ में हल्दीघाटी का युद्ध में राजपूतो ने रक्त का बदला दिवेर में चुकाया। दिवेर की विजय ने यह प्रमाणित कर दिया कि महाराणा का शौर्य, संकल्प और वंश गौरव अकाट्य और अमिट है, इस युद्ध ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि महाराणा के त्याग और बलिदान की भावना के नैतिक बल ने सत्तावादी नीति को परास्त किया।

🚩कर्नल टाॅड ने जहां हल्दीघाटी को 'थर्मोपाली' कहा है वहां के युद्ध को 'मेरोथान' की संज्ञा दी है।जिस प्रकार एथेन्स जैसी छोटी इकाई ने फारस की बलवती शक्ति को 'मेरोथन' में पराजित किया था, उसी प्रकार मेवाड़ जैसे छोटे राज्य ने मुगल राज्य के वृहत सैन्यबल को दिवेर में परास्त किया। महाराणा की दिवेर विजय की दास्तान सर्वदा हमारे देश की प्रेरणा स्रोत बनी रहेगी।

🚩मुगल शासक अकबर कभी भी महाराणा प्रताप को अपने अधीन नहीं कर पाया और जब 57 वर्ष की उम्र में 29 जनवरी, 1597 को अपनी राजधानी चावंड मे धनुष की डोर खींचते वक्त आँत में चोट लगने के कारण उनकी मृत्यु हो गई तो कहा जाता है कि अकबर इस खबर को सुनकर बहुत दुखी हुआ था।

🚩भारत के वीर सपूत महाराणा प्रताप के जीवन से हम सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए कि कैसे उन्होंने अपनी मातृ भूमि के रक्षा के लिए कितने संघर्ष किये।

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आखिर क्यों 10 मई 1857 को ब्रिटिश शासन के खिलाफ आजादी की पहली चिंगारी लगी थी❓, ये जानना जरूरी है।

10 मई 2022
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🚩वर्ष 1857 में वह ऐतिहासिक दिन 10 मई ही था, जब देश की आजादी के लिए पहली चिंगारी मेरठ से भड़की थी। अंग्रेजों को खदेड़ने के लिए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की नींव साल 1857 में सबसे पहले मेरठ के सदर बाजार में भड़की, जो पूरे देश में फैल गई थी। यह मेरठ के साथ-साथ पूरे देश के लिए गौरव की बात है।

🚩1857 का संग्राम ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक बड़ी और अहम घटना थी। इस क्रांति की शुरुआत 10 मई, 1857 ई. को मेरठ से हुई, जो धीरे-धीरे कानपुर, बरेली, झांसी, दिल्ली, अवध आदि स्थानों पर फैल गई। क्रांति की शुरूआत तो एक सैन्य विद्रोह के रूप में हुई, लेकिन समय के साथ उसका स्वरूप बदल कर ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध एक जनव्यापी विद्रोह के रूप में हो गया, जिसे भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम कहा गया।

🚩आइये आजादी की पहली लड़ाई के इस वर्षगांठ के मौके पर इससे जुड़ी खास बातें जानते हैं…

🚩19वीं सदी की पहली आधी सदी के दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी का भारत के बड़े हिस्से पर कब्जा हो चुका था। जैसे-जैसे ब्रिटिश शासन का भारत पर प्रभाव बढ़ता गया, वैसे-वैसे भारतीय जनता के बीच ब्रिटिश शासन के खिलाफ असंतोष फैलता गया। पलासी के युद्ध के एक सौ साल बाद ब्रिटिश राज के दमनकारी और अन्यायपूर्ण शासन के खिलाफ असंतोष विद्रोह के रूप में भड़कने लगा जिसने भारत में ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की बात करें तो इससे पहले देश के अलग-अलग हिस्सों में कई घटनाएं घट चुकी थीं। जैसे कि 18वीं सदी के अंत में उत्तरी बंगाल में संन्यासी आंदोलन और बिहार एवं बंगाल में चुआड़ आंदोलन हो चुका था। 19वीं सदी के मध्य में कई किसान आंदोलन हुए।

🚩19वी सदी के पहले 5 दशकों में कई जनजातीय विद्रोह भी हुए, जैसे- मध्य प्रदेश में भीलों का, बिहार में संथालों और ओडिशा में गोंड़ एवं खोंड़ जनजातियों का विद्रोह अहम था। लेकिन इन सभी आंदोलनों का प्रभाव क्षेत्र बहुत सीमित था यानी ये स्थानीय प्रकृति के थे। अंग्रेजों के खिलाफ जो संगठित पहला विद्रोह भड़का वह 1857 में था। शुरू में तो यह सिपाहियों के विद्रोह के रूप में भड़का लेकिन बाद में यह जनव्यापी क्रांति बन गया।

🚩विद्रोह के कौन-कौन से कारण थे???

🚩राजनीतिक कारण

🚩1857 के विद्रोह का प्रमुख राजनीतिक कारण ब्रिटिश सरकार की ‘गोद निषेध प्रथा’ या ‘हड़प नीति’ थी। यह अंग्रेजों की विस्तारवादी नीति थी जो ब्रिटिश भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी के दिमाग की उपज थी। कंपनी के गवर्नर जनरलों ने भारतीय राज्यों को अंग्रेजी साम्राज्य में मिलाने के उद्देश्य से कई नियम बनाए। उदाहरण के लिए, किसी राजा के निःसंतान होने पर उसका राज्य ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा बन जाता था। राज्य हड़प नीति के कारण भारतीय राजाओं में बहुत असंतोष पैदा हुआ था। रानी लक्ष्मी बाई के दत्तक पुत्र को झांसी की गद्दी पर नहीं बैठने दिया गया। हड़प नीति के तहत ब्रिटिश शासन ने सतारा, नागपुर और झांसी को ब्रिटिश राज्य में मिला लिया। अब अन्य राजाओं को भय सताने लगा कि उनका भी विलय थोड़े दिनों की बात रह गई है। इसके अलावा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहेब की पेंशन रोक दी गई जिससे भारत के शासक वर्ग में विद्रोह की भावना मजबूत होने लगी।

🚩आग में घी का काम उस घटना ने किया जब बहादुर शाह द्वितीय के वंशजों को लाल किले में रहने पर पाबंदी लगा दी गई। कुशासन के नाम पर लार्ड डलहौजी ने अवध का विलय करा लिया जिससे बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, अधिकारी एवं सैनिक बेरोजगार हो गए। इस घटना के बाद जो अवध पहले तक ब्रिटिश शासन का वफादार था, अब विद्रोही बन गया।

🚩सामाजिक एवं धार्मिक कारण

🚩भारत में तेजी से पैर पसारती पश्चिमी सभ्यता को लेकर समाज के बड़े वर्ग में आक्रोश था। 1850 में ब्रिटिश सरकार ने हिंदुओं के उत्तराधिकार कानून में बदलाव कर दिया और अब क्रिस्चन धर्म अपनाने वाला हिंदू ही अपने पूर्वजों की संपत्ति में हकदार बन सकता था। इसके अलावा मिशनरियों को पूरे भारत में धर्म परिवर्तन की छूट मिल गई थी। लोगों को लगा कि ब्रिटिश सरकार भारतीय लोगों को क्रिस्चन बनाना चाहती है। भारतीय समाज में सदियों से चली आ रही कुछ प्रथाओं, जैसे- सती प्रथा आदि को समाप्त करने पर लोगों के मन में असंतोष पैदा हुआ।

🚩आर्थिक कारण

🚩भारी टैक्स और राजस्व संग्रहण के कड़े नियमों के कारण किसान और जमींदार वर्गों में असंतोष था। इन सबमें से बहुत से ब्रिटिश सरकार की टैक्स मांग को पूरा करने में असक्षम थे और वे साहूकारों का कर्ज चुका नहीं पा रहे थे जिससे अंत में उनको अपनी पुश्तैनी जमीन से हाथ धोना पड़ता था। बड़ी संख्या में सिपाहियों का इन किसानों से संबंध था और इसलिए किसानों की पीड़ा से वे भी प्रभावित हुए।
🚩इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति के बाद भारतीय बाजार ब्रिटेन में निर्मित उत्पादों से पट गए। इससे भारत का स्थानीय कपड़ा उद्योग खासतौर पर तबाह हो गया। भारत के हस्तशिल्प उद्योग ब्रिटेन के मशीन से बने सस्ते सामानों का मुकाबला नहीं कर पाए। भारत कच्ची सामग्री का सप्लायर और ब्रिटेन में बने सामानों का उपभोक्ता बन गया। जो लोग अपनी आजीविका के लिए शाही संरक्षण पर आश्रित थे, सभी बेरोजगार हो गए। इसलिए अंग्रेजों के खिलाफ उनमें काफी गुस्सा भरा हुआ था।

🚩सैन्य कारण

🚩भारत में ब्रिटिश सेना में 87 फीसदी से ज्यादा भारतीय सैनिक थे। उनको ब्रिटिश सैनिकों की तुलना में कमतर माना जाता था। एक ही रैंक के भारतीय सिपाही को यूरोपीय सिपाही के मुकाबले कम वेतन दिया जाता था। इसके अलावा भारतीय सिपाही को सूबेदार रैंक के ऊपर प्रोन्नति नहीं मिल सकती थी। इसके अलावा भारत में ब्रिटिश शासन के विस्तार के बाद भारतीय सिपाहियों की स्थिति बुरी तरह प्रभावित हुई। उनको अपने घरों से काफी दूर-दूर सेवा देनी पड़ती थी। 1856 में लार्ड कैनिंग ने एक नियम जारी किया जिसके मुताबिक सैनिकों को भारत के बाहर भी सेवा देनी पड़ सकती थी।

🚩बंगाल आर्मी में अवध के उच्च समुदाय के लोगों की भर्ती की गई थी। उनकी धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, उनका समुद्र (कालापानी) पार करना वर्जित था। उनलोगों को लार्ड कैनिंग के नियम से शक हुआ कि ब्रिटिश सरकार उनलोगों को क्रिस्चन बनाने पर तुली हुई है। अवध के विलय के बाद नवाब की सेना को भंग कर दिया गया। उनके सिपाही बेरोजगार हो गए और ब्रिटिश हुकूमत के कट्टर दुश्मन बन गए।

🚩तात्कालिक कारण

🚩1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों में यह अफवाह थी कि 1853 की राइफल के कारतूस की खोल पर सूअर और गाय की चर्बी लगी हुई है। यह अफवाह हिन्दू एवं मुस्लिम दोनों धर्म के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचा रही थी। ये राइफलें 1853 के राइफल के जखीरे का हिस्सा थीं।


🚩मंगल पांडे

🚩29 मार्च, 1857 ई. को मंगल पांडे नाम के एक सैनिक ने ‘बैरकपुर छावनी’ में अपने अफसरों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया, लेकिन ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों ने इस सैनिक विद्रोह को सरलता से नियंत्रित कर लिया और साथ ही उसकी बटालियन ’34 एन.आई.’ को भंग कर दिया। 24 अप्रैल को 3 एल.सी. परेड मेरठ में 90 घुड़सवारों में से 85 सैनिकों ने नए कारतूस लेने से इंकार कर दिया। आज्ञा की अवहेलना के कारण इन 85 घुड़सवारों को कोर्ट मार्शल द्वारा 5 वर्ष का कारावास दिया गया। ‘खुला विद्रोह’ 10 मई, दिन रविवार को सांयकाल 5 व 6 बजे के मध्य प्रारम्भ हुआ। सर्वप्रथम पैदल टुकड़ी ’20 एन.आई.’ में विद्रोह की शुरूआत हुई, उसके बाद ‘3 एल.सी.’ में भी विद्रोह फैल गया। इन विद्रोहियों ने अपने अधिकारियों के ऊपर गोलियां चलाई। मंगल पांडे ने ‘ह्यूसन’ को गोली मारी थी, जबकि ‘अफसर बाग’ की हत्या कर दी गई थी। मंगल पांडे को 8 अप्रैल को फांसी दे दी गई। 9 मई को मेरठ में 85 सैनिकों ने नई राइफल इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया जिनको नौ साल जेल की सजा सुनाई गई।

🚩विद्रोह का प्रसार

🚩इस घटना के बाद मेरठ छावनी में विद्रोह की आग भड़क गई। 9 मई को मेरठ विद्रोह 1857 के संग्राम की शुरूआत का प्रतीक था। मेरठ में भारतीय सिपाहियों ने ब्रिटिश अधिकारियों की हत्या कर दी और जेल को तोड़ दिया। 10 मई को वे दिल्ली के लिए आगे बढ़े। 11 मई को मेरठ के क्रांतिकारी सैनिकों ने दिल्ली पहुंचकर, 12 मई को दिल्ली पर अधिकार कर लिया। इन सैनिकों ने मुगल सम्राट बहादुरशाह द्वितीय को दिल्ली का सम्राट घोषित कर दिया। शीघ्र ही विद्रोह लखनऊ, इलाहाबाद, कानपुर, बरेली, बनारस, बिहार और झांसी में भी फैल गया। अंग्रेजों ने पंजाब से सेना बुलाकर सबसे पहले दिल्ली पर अधिकार किया। 21 सितंबर, 1857 ई. को दिल्ली पर अंग्रेजों ने पुनः अधिकार कर लिया, परन्तु संघर्ष में ‘जॉन निकोलसन’ मारा गया और लेफ्टिनेंट ‘हडसन’ ने धोखे से बहादुरशाह द्वितीय के दो पुत्रों ‘मिर्जा मुगल’ और ‘मिर्जा ख्वाजा सुल्तान’ एवं एक पोते ‘मिर्जा अबूबक्र’ को गोली मरवा दी। लखनऊ में विद्रोह की शुरुआत 4 जून, 1857 ई. को हुई। यहां के क्रांतिकारी सैनिकों द्वारा ब्रिटिश रेजिडेंसी के घेराव के बाद ब्रिटिश रेजिडेंट ‘हेनरी लॉरेन्स’ की मृत्यु हो गई। हैवलॉक और आउट्रम ने लखनऊ को दबाने का भरकस प्रयत्न किया, लेकिन वे असफल रहे। आखिर में कॉलिन कैंपवेल’ ने गोरखा रेजिमेंट के सहयोग से मार्च, 1858 ई. में शहर पर अधिकार कर लिया। वैसे यहां क्रांति का असर सितंबर तक रहा।

🚩बगावत को कुचलना

🚩1857 का संग्राम एक साल से ज्यादा समय तक चला। इसे 1858 के मध्य में कुचला गया। मेरठ में विद्रोह भड़कने के चौदह महीने बाद 8 जुलाई, 1858 को आखिरकार कैनिंग ने घोषणा किया कि विद्रोह को पूरी तरह दबा दिया गया है।

🚩विद्रोह की असफलता के कारण