हिन्दू राष्ट्र क्यों आवश्यक है ? जानिए:-
5 July 2022
http://azaadbharat.org
🚩विश्व में ईसाइयों के 157, मुसलमानों के 52, बौद्धों के 12 जबकि यहूदियों का 1 राष्ट्र है,पर हिन्दुओ का 1 राष्ट्र भी नही है।
🚩छत्रपति शिवाजी महाराज के समय हिन्दू राष्ट्र था,उस समय सारी समस्याएं दूर थी।
🚩सभी के कल्याण हेतु भारत को हिन्दू राष्ट्र स्थापित किया जाना चाहिए।
🚩विश्व में ईसाइयों के 157, मुसलमानों के 52, बौद्धों के 12 जबकि यहूदियों का 1 राष्ट्र है । हिन्दूओं का राष्ट्र इस सौरमंडल में कहा है ? हाँ, हिन्दूओं का एक सनातन राष्ट्र 1947 तक इस पृथ्वी पर था । आज इस राष्ट्र की स्थिति क्या है ?
🚩स्वतंत्रता के समय का एवं आज का भारत !
🚩1947 में जहाँ 1 पैसे का भी ऋण नहीं था, उस भारत में आज प्रत्येक नागरिक अपने सिर पर 32,812 रुपयों के ऋण का भार ढो रहा है ।
🚩 1947 में 33 प्रतिशत से अधिक निर्यात करनेवाला भारत आज 1 प्रतिशत से भी अल्प निर्यात कर रहा है ।
🚩 जहाँ अधिक से अधिक 10 से 20 विदेशी प्रतिष्ठान थे, उस भारत में आज 5,000 से भी अधिक विदेशी प्रतिष्ठानों को सिर पर उठाया जा रहा है ।
🚩जहाँ एक भी संवेदनशील जनपद (जिला) नहीं था, उस भारत में आज 300 से भी अधिक जनपद संवेदनशील बन गए हैं ।
🚩जहाँ प्रति नागरिक के पास एक-दो गाय होती थीं, उस भारत में अबाध गोहत्या के कारण आज 12 व्यक्तियों पर एक गाय है ।
🚩विदेश में जाकर अत्याचारी कर्जन वाइली, ओडवायर जैसे शासकों को ईसावासी करने वाला भारत आज संसद पर आक्रमण करनेवाले अफजल को फांसी देने में कई साल लगा रहा है !
🚩देशाभिमान जागृत रखने वाले भारत से, देशाभिमान गिरवी रखने वाला भारत, निम्नतम भ्रष्टाचार करने वाले भारत से भ्रष्टाचार की उच्चतम सीमा तक पहुंचा भारत, सीमा पार झंडा फहराने वाले भारत से आज नहीं तो कल, कश्मीर से हाथ धो बैठने की प्रतीक्षा करनेवाला भारत… यह सूची लिखते समय भी मन आक्रोशित हो रहा है; परंतु ‘गण की तो दूर, मन की भी लज्जा न रखनेवाले’ शासनकर्ता सर्वत्र गर्व से सीना तानकर घूम रहे हैं ।
🚩 मुसलमान आक्रमणकारियों एवं धूर्त ब्रिटिशों ने भी भारतीय जनता को जितना त्रस्त नहीं किया, उससे सैकडों गुना लोकतंत्र द्वारा उपहार स्वरूप मिले इन शासनकर्ताओं ने मात्र 6 दशकों ( 60 सालों ) में कर दिया है !
🚩‘लोगों द्वारा, लोगों के लिए, लोगों का शासन’, लोकतंत्र की ऐसी व्याख्या, भारत जैसे विश्व के सब से बडे देश के लिए ‘स्वार्थांधों द्वारा स्वार्थ के लिए चयनित (निर्वाचित) स्वार्थी शासनकर्ताओं का शासन’, ऐसी हो चुकी है ।
🚩इस लेखमालिका में भारत की अनेक समस्याएं वर्णित हैं । ये समस्याएं पढकर कुछ लोगों के मन में संदेह उत्पन्न होगा कि ‘हिन्दू राष्ट्र’ में ये समस्याएं दूर कैसे होंगी ? क्या इतिहास में ऐसा कभी हुआ है ? ऐसा समझने वाले लोग यह समझ लें कि – हां, इतिहास में ऐसा हुआ है ! छत्रपति शिवाजी महाराज का ‘हिन्दू राष्ट्र (हिन्दवी स्वराज्य)’ स्थापित होते ही ऐसी तत्कालीन समस्याएं दूर हुई हैं !
🚩छत्रपति शिवाजी महाराज का ‘हिन्दू राष्ट्र’ स्थापित होते ही सबकुछ कुशल-मंगल हुआ था !
🚩छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म होने के पूर्व भी आज के समान ही हिन्दू स्त्रियों का शील सुरक्षित नहीं था, प्रत्यक्ष जीजामाता की जिठानी को ही पानी लाते समय यवन सरदार ने अगवा कर लिया था । उस समय भी मंदिर भ्रष्ट किए जाते थे एवं गोमाता की गर्दन पर कब कसाई का छुरा चल जाएगा, यह कोई बता नहीं सकता था । छत्रपति शिवाजी महाराज का ‘हिन्दू राष्ट्र’ स्थापित होते ही मंदिर ढहाना बंद हुआ, इतना ही नहीं; अपितु मंदिर ढहाकर बनाई मस्जिदों का रूपांतरण पूर्ववत मंदिरों में हुआ ।
🚩 मौन रहकर क्रंदन करने वाली गोमाताएं आनंदित होकर रंभाने लगीं । ‘गोहत्या बंद की जाए !’, ऐसी मांग के लिए कभी शासन के पास लाखों हस्ताक्षर नहीं भेजे गए अथवा छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी कोई ‘गोहत्या प्रतिबंधक विधेयक’ मंत्रीमंडल में प्रस्तुत नहीं किया,हिन्दू राष्ट्र घोषित होते ही गौहत्या रुक गई थी और राष्ट्र में गौमाता की पूजा होने लग गई ।
🚩आज हमें महंगाई दिखती है । क्या कभी पढा है कि छत्रपति शिवाजी ‘महाराज के शासनकाल में प्रजा महंगाई से त्रस्त थी’ ?
🚩‘जय जवान, जय किसान’ की घोषणा करने वाले शासनकर्ता आज जवान एवं किसान, दोनों की नृशंस हत्या करवा रहे हैं । छत्रपति शिवाजी महाराज को तो केवल कृषकों के (किसानों के) प्राण ही नहीं, अपितु उनके द्वारा उपजाई फसल भी अमूल्य लगती थी । उन्होंने ऐसी आज्ञा ही दी थी कि ‘कृषकों द्वारा उपजाई फसल के डंठल को भी कोई हाथ न लगाए ।’ छत्रपति शिवाजी महाराज ने ‘किसानों’ की ही भांति ‘जवानों को’भी संभाला था ।
5 July 2022
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🚩विश्व में ईसाइयों के 157, मुसलमानों के 52, बौद्धों के 12 जबकि यहूदियों का 1 राष्ट्र है,पर हिन्दुओ का 1 राष्ट्र भी नही है।
🚩छत्रपति शिवाजी महाराज के समय हिन्दू राष्ट्र था,उस समय सारी समस्याएं दूर थी।
🚩सभी के कल्याण हेतु भारत को हिन्दू राष्ट्र स्थापित किया जाना चाहिए।
🚩विश्व में ईसाइयों के 157, मुसलमानों के 52, बौद्धों के 12 जबकि यहूदियों का 1 राष्ट्र है । हिन्दूओं का राष्ट्र इस सौरमंडल में कहा है ? हाँ, हिन्दूओं का एक सनातन राष्ट्र 1947 तक इस पृथ्वी पर था । आज इस राष्ट्र की स्थिति क्या है ?
🚩स्वतंत्रता के समय का एवं आज का भारत !
🚩1947 में जहाँ 1 पैसे का भी ऋण नहीं था, उस भारत में आज प्रत्येक नागरिक अपने सिर पर 32,812 रुपयों के ऋण का भार ढो रहा है ।
🚩 1947 में 33 प्रतिशत से अधिक निर्यात करनेवाला भारत आज 1 प्रतिशत से भी अल्प निर्यात कर रहा है ।
🚩 जहाँ अधिक से अधिक 10 से 20 विदेशी प्रतिष्ठान थे, उस भारत में आज 5,000 से भी अधिक विदेशी प्रतिष्ठानों को सिर पर उठाया जा रहा है ।
🚩जहाँ एक भी संवेदनशील जनपद (जिला) नहीं था, उस भारत में आज 300 से भी अधिक जनपद संवेदनशील बन गए हैं ।
🚩जहाँ प्रति नागरिक के पास एक-दो गाय होती थीं, उस भारत में अबाध गोहत्या के कारण आज 12 व्यक्तियों पर एक गाय है ।
🚩विदेश में जाकर अत्याचारी कर्जन वाइली, ओडवायर जैसे शासकों को ईसावासी करने वाला भारत आज संसद पर आक्रमण करनेवाले अफजल को फांसी देने में कई साल लगा रहा है !
🚩देशाभिमान जागृत रखने वाले भारत से, देशाभिमान गिरवी रखने वाला भारत, निम्नतम भ्रष्टाचार करने वाले भारत से भ्रष्टाचार की उच्चतम सीमा तक पहुंचा भारत, सीमा पार झंडा फहराने वाले भारत से आज नहीं तो कल, कश्मीर से हाथ धो बैठने की प्रतीक्षा करनेवाला भारत… यह सूची लिखते समय भी मन आक्रोशित हो रहा है; परंतु ‘गण की तो दूर, मन की भी लज्जा न रखनेवाले’ शासनकर्ता सर्वत्र गर्व से सीना तानकर घूम रहे हैं ।
🚩 मुसलमान आक्रमणकारियों एवं धूर्त ब्रिटिशों ने भी भारतीय जनता को जितना त्रस्त नहीं किया, उससे सैकडों गुना लोकतंत्र द्वारा उपहार स्वरूप मिले इन शासनकर्ताओं ने मात्र 6 दशकों ( 60 सालों ) में कर दिया है !
🚩‘लोगों द्वारा, लोगों के लिए, लोगों का शासन’, लोकतंत्र की ऐसी व्याख्या, भारत जैसे विश्व के सब से बडे देश के लिए ‘स्वार्थांधों द्वारा स्वार्थ के लिए चयनित (निर्वाचित) स्वार्थी शासनकर्ताओं का शासन’, ऐसी हो चुकी है ।
🚩इस लेखमालिका में भारत की अनेक समस्याएं वर्णित हैं । ये समस्याएं पढकर कुछ लोगों के मन में संदेह उत्पन्न होगा कि ‘हिन्दू राष्ट्र’ में ये समस्याएं दूर कैसे होंगी ? क्या इतिहास में ऐसा कभी हुआ है ? ऐसा समझने वाले लोग यह समझ लें कि – हां, इतिहास में ऐसा हुआ है ! छत्रपति शिवाजी महाराज का ‘हिन्दू राष्ट्र (हिन्दवी स्वराज्य)’ स्थापित होते ही ऐसी तत्कालीन समस्याएं दूर हुई हैं !
🚩छत्रपति शिवाजी महाराज का ‘हिन्दू राष्ट्र’ स्थापित होते ही सबकुछ कुशल-मंगल हुआ था !
🚩छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म होने के पूर्व भी आज के समान ही हिन्दू स्त्रियों का शील सुरक्षित नहीं था, प्रत्यक्ष जीजामाता की जिठानी को ही पानी लाते समय यवन सरदार ने अगवा कर लिया था । उस समय भी मंदिर भ्रष्ट किए जाते थे एवं गोमाता की गर्दन पर कब कसाई का छुरा चल जाएगा, यह कोई बता नहीं सकता था । छत्रपति शिवाजी महाराज का ‘हिन्दू राष्ट्र’ स्थापित होते ही मंदिर ढहाना बंद हुआ, इतना ही नहीं; अपितु मंदिर ढहाकर बनाई मस्जिदों का रूपांतरण पूर्ववत मंदिरों में हुआ ।
🚩 मौन रहकर क्रंदन करने वाली गोमाताएं आनंदित होकर रंभाने लगीं । ‘गोहत्या बंद की जाए !’, ऐसी मांग के लिए कभी शासन के पास लाखों हस्ताक्षर नहीं भेजे गए अथवा छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी कोई ‘गोहत्या प्रतिबंधक विधेयक’ मंत्रीमंडल में प्रस्तुत नहीं किया,हिन्दू राष्ट्र घोषित होते ही गौहत्या रुक गई थी और राष्ट्र में गौमाता की पूजा होने लग गई ।
🚩आज हमें महंगाई दिखती है । क्या कभी पढा है कि छत्रपति शिवाजी ‘महाराज के शासनकाल में प्रजा महंगाई से त्रस्त थी’ ?
🚩‘जय जवान, जय किसान’ की घोषणा करने वाले शासनकर्ता आज जवान एवं किसान, दोनों की नृशंस हत्या करवा रहे हैं । छत्रपति शिवाजी महाराज को तो केवल कृषकों के (किसानों के) प्राण ही नहीं, अपितु उनके द्वारा उपजाई फसल भी अमूल्य लगती थी । उन्होंने ऐसी आज्ञा ही दी थी कि ‘कृषकों द्वारा उपजाई फसल के डंठल को भी कोई हाथ न लगाए ।’ छत्रपति शिवाजी महाराज ने ‘किसानों’ की ही भांति ‘जवानों को’भी संभाला था ।
🚩 छत्रपति शिवाजी महाराज लडाई में घायल हुए अनेक सैनिकों को पुरस्कार के साथ सोने के आभूषण देकर सम्मानित करते थे । कारगिल युद्ध में वीरगति प्राप्त करनेवाले सैनिकों की विधवाओं के लिए वर्ष 2010 में ‘आदर्श’ सोसाइटी बनाई गई; परंतु उसमें एक भी सैनिक की विधवा को सदनिका (फ्लैट) नहीं मिली । भ्रष्टासुरों ने ही वे सभी सदनिकाएं हडप लीं !
🚩छत्रपति शिवाजी महाराज ने सिंहगढ के युद्ध में वीरगति प्राप्त करने वाले के यहाँ तानाजी के पुत्र का विवाह कर उनके परिजनों को सांत्वना दी थी !
🚩‘हिन्दू राष्ट्र’ में भारत को त्रस्त करने वाली बाह्य समस्याएं भी दूर होंगी !
🚩‘हिन्दू राष्ट्र’ में आंतरिक समस्याएं दूर होंगी, उसी प्रकार बाह्य समस्याएं भी दूर होंगी । इन समस्याओं में मुख्य हैं :-पाकिस्तान एवं चीन द्वारा भारत पर संभावित आक्रमण ।
🚩 शिवकाल में भी ऐसी ही स्थिति थी । औरंगजेब ‘शिवा’का छोटासा राज्य नष्ट करने को तुला था; परंतु छत्रपति शिवाजी ‘महाराज का राज्याभिषेक और विधिवत ‘हिन्दू राष्ट्र’ स्थापित हुआ’, यह सुनते ही उसके पैरोंतले की भूमि खिसक गई ! तदनंतर आगे छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वर्गारोहणतक वह मात्र महाराष्ट्र में ही नहीं; अपितु दक्षिण में भी नहीं आया ! एक बार ‘हिन्दू राष्ट्र’ की स्थापना हुई कि हमारे सर्व पडोसी अपने आप सीधे हो जाएंगे !
🚩‘हिन्दू राष्ट्र’ का विषय निकलते ही एक निरर्थक प्रश्न तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादियों द्वारा पूछा जाता है, ‘हिन्दूराष्ट्र’ में मुसलमानों के साथ कैसा व्यवहार किया जाएगा ? वास्तव में यह प्रश्न मुसलमानों को पूछना चाहिए । वे नहीं पूछते । वे तो यही कहते हैं, ‘हस के लिया पाकिस्तान, लड के लेंगे हिन्दूस्तान !’ तथापि इस प्रश्न का भी उत्तर है । आगामी ‘हिन्दू राष्ट्र’ में मुसलमानों से ही नहीं; अपितु सभी पंथियों से वैसा ही व्यवहार किया जाएगा जैसा शिवराज्य में किया गया था !
🚩संक्षेप में, सूर्योदय होने से पूर्व सर्वत्र अंधकार छाया रहता है, दुर्गंध आती है; परंतु सूर्य के उगते ही अंधकार अपने आप नष्ट हो जाता है, सर्व दुर्गंध वातावरण में लुप्त हो जाती है । अंधकार अथवा दुर्गंध से कोई नहीं कहता, ‘दूर हटो, सूर्य उग रहा है !’ यह अपने आप ही होता है । उसी प्रकार आज भारत में फैला विविध समस्यारूपी अंधकार एवं दुर्गंध ‘हिन्दू राष्ट्र’ के स्थापित होते ही अपने आप नष्ट हो जाएगी । धर्माचरणी शासनकर्ताओं के कारण भारत की सर्व समस्याएं दूर होंगी तथा सदाचार के कारण सर्व जनता भी सुखी होगी !
🚩किन्हीं एक-दो समस्याओं के विरोध में लडने की अपेक्षा ‘हिन्दू राष्ट्र’ स्थापित करना आवश्यक है। मात्र भारत के लोगों के लिए ही नहीं; अपितु अखिल मानवजाति के कल्याण हेतु हिन्दू राष्ट्र स्थापित किया जाना चाहिए।
🚩 पांडव मात्र पांच गांव चाहते थे, वे भी उन्हें सहजता से नहीं मिल सके । हमें तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक अखंड ‘हिन्दू राष्ट्र’ चाहिए । इसके लिए बडा संघर्ष करना होगा । भारत की किन्हीं एक-दो समस्याओं के (उदा. गोहत्या, धर्मांतरण, गंगा नदी का प्रदूषण, कश्मीर, मंदिर, स्वभाषारक्षा आदि के) विरोध में पृथक-पृथक लडने की अपेक्षा सर्व समविचारी व्यक्ति एवं संस्थाएं मिलकर ‘हिन्दू राष्ट्र-स्थापना’ का ही ध्येय रखकर कार्य करेंगे, तो यह संघर्ष थोडा सुलभ होगा ।
🚩स्वामी विवेकानंद, योगी अरविंद, वीर सावरकर, प.पू. गोळवलकर गुरुजी जैसे हिन्दू धर्म के महान योद्धाओं को अपेक्षित धर्माधारित ‘हिन्दू राष्ट्र’ स्थापित होने हेतु आवश्यक शारीरिक, मानसिक, बौदि्धक एवं आध्याति्मक सामथ्र्य हिन्दूनिष्ठों को मिले।
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🚩‘हिन्दू राष्ट्र’ में भारत को त्रस्त करने वाली बाह्य समस्याएं भी दूर होंगी !
🚩‘हिन्दू राष्ट्र’ में आंतरिक समस्याएं दूर होंगी, उसी प्रकार बाह्य समस्याएं भी दूर होंगी । इन समस्याओं में मुख्य हैं :-पाकिस्तान एवं चीन द्वारा भारत पर संभावित आक्रमण ।
🚩 शिवकाल में भी ऐसी ही स्थिति थी । औरंगजेब ‘शिवा’का छोटासा राज्य नष्ट करने को तुला था; परंतु छत्रपति शिवाजी ‘महाराज का राज्याभिषेक और विधिवत ‘हिन्दू राष्ट्र’ स्थापित हुआ’, यह सुनते ही उसके पैरोंतले की भूमि खिसक गई ! तदनंतर आगे छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वर्गारोहणतक वह मात्र महाराष्ट्र में ही नहीं; अपितु दक्षिण में भी नहीं आया ! एक बार ‘हिन्दू राष्ट्र’ की स्थापना हुई कि हमारे सर्व पडोसी अपने आप सीधे हो जाएंगे !
🚩‘हिन्दू राष्ट्र’ का विषय निकलते ही एक निरर्थक प्रश्न तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादियों द्वारा पूछा जाता है, ‘हिन्दूराष्ट्र’ में मुसलमानों के साथ कैसा व्यवहार किया जाएगा ? वास्तव में यह प्रश्न मुसलमानों को पूछना चाहिए । वे नहीं पूछते । वे तो यही कहते हैं, ‘हस के लिया पाकिस्तान, लड के लेंगे हिन्दूस्तान !’ तथापि इस प्रश्न का भी उत्तर है । आगामी ‘हिन्दू राष्ट्र’ में मुसलमानों से ही नहीं; अपितु सभी पंथियों से वैसा ही व्यवहार किया जाएगा जैसा शिवराज्य में किया गया था !
🚩संक्षेप में, सूर्योदय होने से पूर्व सर्वत्र अंधकार छाया रहता है, दुर्गंध आती है; परंतु सूर्य के उगते ही अंधकार अपने आप नष्ट हो जाता है, सर्व दुर्गंध वातावरण में लुप्त हो जाती है । अंधकार अथवा दुर्गंध से कोई नहीं कहता, ‘दूर हटो, सूर्य उग रहा है !’ यह अपने आप ही होता है । उसी प्रकार आज भारत में फैला विविध समस्यारूपी अंधकार एवं दुर्गंध ‘हिन्दू राष्ट्र’ के स्थापित होते ही अपने आप नष्ट हो जाएगी । धर्माचरणी शासनकर्ताओं के कारण भारत की सर्व समस्याएं दूर होंगी तथा सदाचार के कारण सर्व जनता भी सुखी होगी !
🚩किन्हीं एक-दो समस्याओं के विरोध में लडने की अपेक्षा ‘हिन्दू राष्ट्र’ स्थापित करना आवश्यक है। मात्र भारत के लोगों के लिए ही नहीं; अपितु अखिल मानवजाति के कल्याण हेतु हिन्दू राष्ट्र स्थापित किया जाना चाहिए।
🚩 पांडव मात्र पांच गांव चाहते थे, वे भी उन्हें सहजता से नहीं मिल सके । हमें तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक अखंड ‘हिन्दू राष्ट्र’ चाहिए । इसके लिए बडा संघर्ष करना होगा । भारत की किन्हीं एक-दो समस्याओं के (उदा. गोहत्या, धर्मांतरण, गंगा नदी का प्रदूषण, कश्मीर, मंदिर, स्वभाषारक्षा आदि के) विरोध में पृथक-पृथक लडने की अपेक्षा सर्व समविचारी व्यक्ति एवं संस्थाएं मिलकर ‘हिन्दू राष्ट्र-स्थापना’ का ही ध्येय रखकर कार्य करेंगे, तो यह संघर्ष थोडा सुलभ होगा ।
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संत थॉमस, एक षड्यंत्र, एक गप्प।
6 July 2022
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🚩हर शहर में सेंट थॉमस नाम से एक स्कूल है। हिंदुओं को लगता है कि अवश्य यह कोई सन्त रहा होगा। पुरानी कहानियों में इसे केरल के मालाबार तट पर आया बताया तो नई कहानी में इसे बनारस पहुंचा दिया गया। कहीं इसे ईसामसीह का भाई कहा गया तो कहीं इसे उसका शिष्य। सत्य यह है कि हिंदुओं को मूर्ख बनाने के लिए यह गप्प बनाई गई।
🚩ईसा की तीसरी शताब्दी में लिखी गई एक गल्प पुस्तक Acts of Thomas में लिखा है कि जीसस क्राइस्ट का जुड़वा भाई थॉमस दासत्व में बेच दिया जाता है और वह अन्द्रोपोलिस नामक पश्चिम एशियाई नगर में आता है, राजा को धोखा देता है, सुन्दर लौण्डे के लिये शैतान से भिड़ जाता है तथा अन्त में एक लम्बी विधिक प्रक्रिया के पश्चात मृत्युदंड पाता है।
🚩 उसकी मृत्यु के पश्चात पर्सिया, सीरिया आदि में उसके अनुयायी इसाई पैदा हो जाते हैं। जब उस क्षेत्र से उन सीरियाई ईसाइयों को भगा दिए जाते है तब चौथी सदी में वे लोग एक 'थॉमस काना' नामक व्यक्ति के नेतृत्व में दक्षिण भारत में शरण लेते हैं।
🚩सदियाँ बीतती हैं तथा दक्षिण भारत के कुछ भागों पर पुर्तगाली अधिकार होता है। तब कृतघ्नता की सेमेटिक परम्परा का निर्वाह करते हुये उन ईसाईयों द्वारा झूठ का संचार आरम्भ होता है, जिसके दो उद्देश्य होते हैं:
🚩(1) पुर्तगालियों द्वारा मन्दिर ध्वंस एवं धार्मिक अत्याचारों को छिपाना तथा
(2) लोगों को मसीही / ईसाई बनाना।
🚩इस झूठ के तहत थॉमस के नाम का एक मालाबरी चर्च दिखा कर उसे 52 ई. में भारत आया बताया जाने लगता है। मालाबार से पूर्वी तट पर आकर तमिल क्षेत्र में घुसपैठ कर मइलापुर के प्रसिद्ध प्राचीन कपालीश्वर शिव मन्दिर को पुर्तगाली लोग तोड़ देते हैं तथा उसी स्थान पर चर्च बना कर तथा वहाँ थॉमस शहीद हुआ था ऐसा झूठ फैलाकर उसकी कब्र भी बना दी जाती है! और उसे मारने वाला किसे बताया जाता है? एक ब्राह्मण को!!!
🚩जो थॉमस तीसरी सदी का गल्प है, जो दक्षिण भारत तक कभी नहीं आया, जो कहानी में भी सदियों पहले भारत के पश्चिमी सीमांत प्रदेश के पारसियों के सम्पर्क में आया बताया जाता है, जिसकी पुष्टि स्वयं पोप वेनेडिक्ट करता है, वह सुदूर दक्षिण में ‘सदियों पश्चात’ एक ब्राह्मण द्वारा मारा जा कर मन्दिर के गर्भ गृह में शहीद होकर विराजमान हो जाता है!! और भारत की सेकुलर जमात के समस्त वामपंथी इतिहासकार उसे 52 ई. का भारतीय बताने लगते हैं!!! सदियों की दूरी के एक कल्पित एवं एक समनामधारी, दो थॉमसों मिलाकर तथा एक बना कर एक ऐसा लुभावना मिथक गढ़ा जाता है जो भारत की आत्मघाती सेकुलर शिक्षा तंत्र से निकले लोगों को पसन्द आए और जिस पर वे सहज ही विश्वास कर लें।
🚩इस थॉमस मिथक को वास्तविकता बताकर इतना प्रचारित किया जाता है कि कपालीश्वर मन्दिर के ध्वंस की कोई बात ही नहीं करता, लेकिन थॉमस को शहीद बताकर इसाई सहानुभूति बटोर रहा है तथा दक्षिणी ब्राह्मण पर 'अत्याचारी’ का घृणित लेबल लगा दिया जाता है!! यह आज के तमिलनाडु का यथार्थ है। समूचा दक्षिण भारत इसाई मिशनरियों की चपेट में है।
🚩यह वास्तविकता है कि जीसस के काल्पनिक जन्मदिन (25 दिसम्बर - क्रिसमस) को ईसाईयों से अधिक हिंदू सेलिब्रेट करने लगे हैं। वे ‘बच्चे’ जो सेण्ट थॉमस, सेण्ट पॉल, सेण्ट जेवियर्स आदि स्कूलों में पढ़कर निकले है या पढ़ते हैं, वे क्रिसमस पर प्रसन्नता के मारे फूले नहीं समाते!
🚩संत (?) थॉमस के मिथक और कपालीश्वर शिव मंदिर के विध्वंस की रोचक कहानी को जानने के लिए प्रस्तुत है...
🚩इस पुस्तक के सम्पादक ईश्वर शरण (स्वामी देवानन्द) कनाडा में जन्मे एक पूर्व-ईसाई (Ex-Christian) है। पुस्तक आंग्ल भाषा में है।
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🚩ईसा की तीसरी शताब्दी में लिखी गई एक गल्प पुस्तक Acts of Thomas में लिखा है कि जीसस क्राइस्ट का जुड़वा भाई थॉमस दासत्व में बेच दिया जाता है और वह अन्द्रोपोलिस नामक पश्चिम एशियाई नगर में आता है, राजा को धोखा देता है, सुन्दर लौण्डे के लिये शैतान से भिड़ जाता है तथा अन्त में एक लम्बी विधिक प्रक्रिया के पश्चात मृत्युदंड पाता है।
🚩 उसकी मृत्यु के पश्चात पर्सिया, सीरिया आदि में उसके अनुयायी इसाई पैदा हो जाते हैं। जब उस क्षेत्र से उन सीरियाई ईसाइयों को भगा दिए जाते है तब चौथी सदी में वे लोग एक 'थॉमस काना' नामक व्यक्ति के नेतृत्व में दक्षिण भारत में शरण लेते हैं।
🚩सदियाँ बीतती हैं तथा दक्षिण भारत के कुछ भागों पर पुर्तगाली अधिकार होता है। तब कृतघ्नता की सेमेटिक परम्परा का निर्वाह करते हुये उन ईसाईयों द्वारा झूठ का संचार आरम्भ होता है, जिसके दो उद्देश्य होते हैं:
🚩(1) पुर्तगालियों द्वारा मन्दिर ध्वंस एवं धार्मिक अत्याचारों को छिपाना तथा
(2) लोगों को मसीही / ईसाई बनाना।
🚩इस झूठ के तहत थॉमस के नाम का एक मालाबरी चर्च दिखा कर उसे 52 ई. में भारत आया बताया जाने लगता है। मालाबार से पूर्वी तट पर आकर तमिल क्षेत्र में घुसपैठ कर मइलापुर के प्रसिद्ध प्राचीन कपालीश्वर शिव मन्दिर को पुर्तगाली लोग तोड़ देते हैं तथा उसी स्थान पर चर्च बना कर तथा वहाँ थॉमस शहीद हुआ था ऐसा झूठ फैलाकर उसकी कब्र भी बना दी जाती है! और उसे मारने वाला किसे बताया जाता है? एक ब्राह्मण को!!!
🚩जो थॉमस तीसरी सदी का गल्प है, जो दक्षिण भारत तक कभी नहीं आया, जो कहानी में भी सदियों पहले भारत के पश्चिमी सीमांत प्रदेश के पारसियों के सम्पर्क में आया बताया जाता है, जिसकी पुष्टि स्वयं पोप वेनेडिक्ट करता है, वह सुदूर दक्षिण में ‘सदियों पश्चात’ एक ब्राह्मण द्वारा मारा जा कर मन्दिर के गर्भ गृह में शहीद होकर विराजमान हो जाता है!! और भारत की सेकुलर जमात के समस्त वामपंथी इतिहासकार उसे 52 ई. का भारतीय बताने लगते हैं!!! सदियों की दूरी के एक कल्पित एवं एक समनामधारी, दो थॉमसों मिलाकर तथा एक बना कर एक ऐसा लुभावना मिथक गढ़ा जाता है जो भारत की आत्मघाती सेकुलर शिक्षा तंत्र से निकले लोगों को पसन्द आए और जिस पर वे सहज ही विश्वास कर लें।
🚩इस थॉमस मिथक को वास्तविकता बताकर इतना प्रचारित किया जाता है कि कपालीश्वर मन्दिर के ध्वंस की कोई बात ही नहीं करता, लेकिन थॉमस को शहीद बताकर इसाई सहानुभूति बटोर रहा है तथा दक्षिणी ब्राह्मण पर 'अत्याचारी’ का घृणित लेबल लगा दिया जाता है!! यह आज के तमिलनाडु का यथार्थ है। समूचा दक्षिण भारत इसाई मिशनरियों की चपेट में है।
🚩यह वास्तविकता है कि जीसस के काल्पनिक जन्मदिन (25 दिसम्बर - क्रिसमस) को ईसाईयों से अधिक हिंदू सेलिब्रेट करने लगे हैं। वे ‘बच्चे’ जो सेण्ट थॉमस, सेण्ट पॉल, सेण्ट जेवियर्स आदि स्कूलों में पढ़कर निकले है या पढ़ते हैं, वे क्रिसमस पर प्रसन्नता के मारे फूले नहीं समाते!
🚩संत (?) थॉमस के मिथक और कपालीश्वर शिव मंदिर के विध्वंस की रोचक कहानी को जानने के लिए प्रस्तुत है...
🚩इस पुस्तक के सम्पादक ईश्वर शरण (स्वामी देवानन्द) कनाडा में जन्मे एक पूर्व-ईसाई (Ex-Christian) है। पुस्तक आंग्ल भाषा में है।
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हिंदुओं की सहिष्णुता का हो रहा दुरुपयोग....
7 July 2022
http://azaadbharat.org
🚩लीना मणिमेकलाई की डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ के पोस्टर पर मध्य प्रदेश में भी विरोध हुआ है।
🚩प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा जी ने कहा कि “मैं डायरेक्टर लीना मणिमेकलाई से पूछना चाहता हूँ कि आखिर हिन्दू देवी-देवताओं और हिन्दू संतो पर ही गलत फिल्में क्यों बनाई जाती है ?
🚩किसी और मजहब पर ऐसी फिल्में क्यों नहीं बनती ?
🚩हिंदू-घृणा से सना है हॉलीवुड,
रिहाना के अलावा 5 और हैं नाम
🚩बॉलीवुड में पसरा हिंदूफोबिया अक्सर सिनेमा और वेबसीरीज के माध्यम से दर्शकों में देखा जाता रहा है, लेकिन हाल में अमेरिकी पॉप सिंगर रिहाना के टॉपलेस तस्वीर के साथ भगवान गणेश के लॉकेट ने इस बात को चर्चा में ला दिया है कि क्या ऐसी कोशिश हॉलीवुड ने भी शुरू कर दी है?
🚩वास्तविकता में हॉलीवुड में हिंदूफोबिया कोई नई बात नहीं है। इससे पहले अमेरिका की एक महिला रैपर कार्डी बी ने रिबॉक के स्निकर्स को प्रमोट करने के लिए माँ दुर्गा देवी का मजाक उड़ाया था।
🚩नेक लेस टॉप के साथ वह हाथ में लाल रंग के जूते लिए नजर आई थी और उनका अवतार बिलकुल ऐसा था जैसे हिंदू ग्रंथों में देवी दुर्गा के लिए दर्शाया जाता रहा है। उनकी वह तस्वीर देखने के बाद कई हिन्दू संगठनों और भारतीयों ने इसका विरोध किया था, जिसके चलते उन्हें माफी माँगनी पड़ी थी।
🚩ऐसे ही साल 2008 में हेदी क्लम (Heidi Klum) ने एक हैलोवीन पार्टी में काली माँ का रूप धारण कर हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया था। उनके इस रूप की तस्वीरें वायरल होने के बाद कई हिंदू नेताओं ने उनका विरोध किया था और उनसे सार्वजनिक तौर पर माफी माँगने को कहा गया था। हिंदू नेताओं का कहना था कि काली की पूजा हिंदू मंदिर में करते हैं, पब्लिसिटी स्टंट के लिए क्लब में नहीं लाया जा सकता।
🚩साल 2017 में कैटी पैरी का एक सोशल मीडिया पोस्ट इसी तरह वायरल हुआ था। उसमें अपने मूड की तुलना उन्होंने काली माँ की तस्वीर से शेयर करके की थी। कैटी के ऐसे प्रयासों को हिंदुओं ने अभद्र करार दिया था।
🚩इसी तरह डीजे ओ कार्ली ने भी अपनी आस्था के नाम पर देवी काली के रूप का इस्तेमाल हैलोवीन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए किया था। लोगों ने इसे देख उन पर गुस्सा जाहिर किया था और कहा था कि हमारा धर्म तुम्हारा हैलोईन कॉस्ट्यूम नहीं है।
🚩उक्त घटनाओं से ये साफ है कि हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाना या उन्हें गलत तरह से प्रस्तुत करना हॉलीवुड के लिए कोई नई बात नहीं है। रिहाना ने भी नग्न तस्वीर के साथ गणेश लॉकेट की तस्वीर साझा करके सिर्फ़ उसी परंपरा को आगे बढ़ाया है, जहाँ हिंदुओं की आस्था से ख़िलवाड़ सामान्य माना जाने लगा है।
🚩दिलचस्प बात यह है कि हिंदू देवताओं का लॉकेट गले में टाँग अपनी टॉपलेस तस्वीर ख़िंचाने वाली रिहाना वही खुले विचारों की महिला हैं, जिन्हें जब मस्जिद के बाहर फोटोशूट कराना था तो वह नकाब ओढ़ कर गई थीं, जबकि उससे पहले तक उन्हें उनके सेक्सी पोज और न्यूड फोटोशूट के लिए जाना जाता था।
🚩शायद, रिहाना को मालूम था कि यदि वो एक निश्चित समुदाय के प्रति इतना सम्मान नहीं दिखाएँगी तो उनका क्या होगा। लेकिन फिर भी हालत देखिए, अपनी तरफ से सामान्य पहनावा पहनने के बावजूद शेख जायद शाही मस्जिद के अधिकारियों ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया था, वो भी सिर्फ़ इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने फोटोशूट के दौरान कोई गलत पोज देने की कोशिश की थी। उससे पूर्व मस्जिद के कंपाउंड में खड़े होकर पोज देने के लिए भी बहुत हंगामा मचा था।
🚩मालूम हो कि रिहाना अकेली ऐसी हस्ती नहीं हैं, जिन्हें इस्लामी रिवाज के कारण मस्जिद के बाहर या फिर इस्लामी देश में उटपटांग फोटोशूट कराने के लिए चलता किया गया हो। अभी हाल में मुस्लिम देश दुबई में एक प्लेबॉय मॉडल ल्युआना सैंडियन को टॉपलेस तस्वीर खिंचवाना भारी पड़ गया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यूज़र्स आलोचनाओं के साथ उन्हें धमकी भरे मैसेज भेजे जाने लगे थे।
🚩हालाँकि, इस मामले को लेकर मॉडल का कहना था कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। शूट के दौरान उन्होंने हाथों से अपने ब्रेस्ट को ढक लिया था। उनके अलावा पॉप स्टार सेलेना गोमेज के आबू धाबी की ग्रैंड मस्जिद में ड्रेस उठाकर टखने दिखाते तस्वीर पर विवाद हुआ था। बात इतनी बढ़ गई थी कि सेलेना को लोगों की नाराजगी और बढ़ते विवाद को देख कर अपनी ये दोनों तस्वीरें अपने अकाउंट से हटानी पड़ी थी।
🚩नंगे शरीर पर गणेश जी का लॉकेट लटका कर फोटो खिंचवाने का क्या मतलब हो सकता है? हिंदुओं को आहत करने से अधिक कुछ भी नहीं। प्रोग्रेसिव फोटोशूट की बात थी तो लॉकेट के रूप में कोई और चीज भी गले में लटकाई जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया, क्योंकि उसे हिंदू समुदाय, महिला की निजता का मामला मानता और भावनाओं को ठेस दूर-दूर तक नहीं पहुँचती।
7 July 2022
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🚩लीना मणिमेकलाई की डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ के पोस्टर पर मध्य प्रदेश में भी विरोध हुआ है।
🚩प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा जी ने कहा कि “मैं डायरेक्टर लीना मणिमेकलाई से पूछना चाहता हूँ कि आखिर हिन्दू देवी-देवताओं और हिन्दू संतो पर ही गलत फिल्में क्यों बनाई जाती है ?
🚩किसी और मजहब पर ऐसी फिल्में क्यों नहीं बनती ?
🚩हिंदू-घृणा से सना है हॉलीवुड,
रिहाना के अलावा 5 और हैं नाम
🚩बॉलीवुड में पसरा हिंदूफोबिया अक्सर सिनेमा और वेबसीरीज के माध्यम से दर्शकों में देखा जाता रहा है, लेकिन हाल में अमेरिकी पॉप सिंगर रिहाना के टॉपलेस तस्वीर के साथ भगवान गणेश के लॉकेट ने इस बात को चर्चा में ला दिया है कि क्या ऐसी कोशिश हॉलीवुड ने भी शुरू कर दी है?
🚩वास्तविकता में हॉलीवुड में हिंदूफोबिया कोई नई बात नहीं है। इससे पहले अमेरिका की एक महिला रैपर कार्डी बी ने रिबॉक के स्निकर्स को प्रमोट करने के लिए माँ दुर्गा देवी का मजाक उड़ाया था।
🚩नेक लेस टॉप के साथ वह हाथ में लाल रंग के जूते लिए नजर आई थी और उनका अवतार बिलकुल ऐसा था जैसे हिंदू ग्रंथों में देवी दुर्गा के लिए दर्शाया जाता रहा है। उनकी वह तस्वीर देखने के बाद कई हिन्दू संगठनों और भारतीयों ने इसका विरोध किया था, जिसके चलते उन्हें माफी माँगनी पड़ी थी।
🚩ऐसे ही साल 2008 में हेदी क्लम (Heidi Klum) ने एक हैलोवीन पार्टी में काली माँ का रूप धारण कर हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया था। उनके इस रूप की तस्वीरें वायरल होने के बाद कई हिंदू नेताओं ने उनका विरोध किया था और उनसे सार्वजनिक तौर पर माफी माँगने को कहा गया था। हिंदू नेताओं का कहना था कि काली की पूजा हिंदू मंदिर में करते हैं, पब्लिसिटी स्टंट के लिए क्लब में नहीं लाया जा सकता।
🚩साल 2017 में कैटी पैरी का एक सोशल मीडिया पोस्ट इसी तरह वायरल हुआ था। उसमें अपने मूड की तुलना उन्होंने काली माँ की तस्वीर से शेयर करके की थी। कैटी के ऐसे प्रयासों को हिंदुओं ने अभद्र करार दिया था।
🚩इसी तरह डीजे ओ कार्ली ने भी अपनी आस्था के नाम पर देवी काली के रूप का इस्तेमाल हैलोवीन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए किया था। लोगों ने इसे देख उन पर गुस्सा जाहिर किया था और कहा था कि हमारा धर्म तुम्हारा हैलोईन कॉस्ट्यूम नहीं है।
🚩उक्त घटनाओं से ये साफ है कि हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाना या उन्हें गलत तरह से प्रस्तुत करना हॉलीवुड के लिए कोई नई बात नहीं है। रिहाना ने भी नग्न तस्वीर के साथ गणेश लॉकेट की तस्वीर साझा करके सिर्फ़ उसी परंपरा को आगे बढ़ाया है, जहाँ हिंदुओं की आस्था से ख़िलवाड़ सामान्य माना जाने लगा है।
🚩दिलचस्प बात यह है कि हिंदू देवताओं का लॉकेट गले में टाँग अपनी टॉपलेस तस्वीर ख़िंचाने वाली रिहाना वही खुले विचारों की महिला हैं, जिन्हें जब मस्जिद के बाहर फोटोशूट कराना था तो वह नकाब ओढ़ कर गई थीं, जबकि उससे पहले तक उन्हें उनके सेक्सी पोज और न्यूड फोटोशूट के लिए जाना जाता था।
🚩शायद, रिहाना को मालूम था कि यदि वो एक निश्चित समुदाय के प्रति इतना सम्मान नहीं दिखाएँगी तो उनका क्या होगा। लेकिन फिर भी हालत देखिए, अपनी तरफ से सामान्य पहनावा पहनने के बावजूद शेख जायद शाही मस्जिद के अधिकारियों ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया था, वो भी सिर्फ़ इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने फोटोशूट के दौरान कोई गलत पोज देने की कोशिश की थी। उससे पूर्व मस्जिद के कंपाउंड में खड़े होकर पोज देने के लिए भी बहुत हंगामा मचा था।
🚩मालूम हो कि रिहाना अकेली ऐसी हस्ती नहीं हैं, जिन्हें इस्लामी रिवाज के कारण मस्जिद के बाहर या फिर इस्लामी देश में उटपटांग फोटोशूट कराने के लिए चलता किया गया हो। अभी हाल में मुस्लिम देश दुबई में एक प्लेबॉय मॉडल ल्युआना सैंडियन को टॉपलेस तस्वीर खिंचवाना भारी पड़ गया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यूज़र्स आलोचनाओं के साथ उन्हें धमकी भरे मैसेज भेजे जाने लगे थे।
🚩हालाँकि, इस मामले को लेकर मॉडल का कहना था कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। शूट के दौरान उन्होंने हाथों से अपने ब्रेस्ट को ढक लिया था। उनके अलावा पॉप स्टार सेलेना गोमेज के आबू धाबी की ग्रैंड मस्जिद में ड्रेस उठाकर टखने दिखाते तस्वीर पर विवाद हुआ था। बात इतनी बढ़ गई थी कि सेलेना को लोगों की नाराजगी और बढ़ते विवाद को देख कर अपनी ये दोनों तस्वीरें अपने अकाउंट से हटानी पड़ी थी।
🚩नंगे शरीर पर गणेश जी का लॉकेट लटका कर फोटो खिंचवाने का क्या मतलब हो सकता है? हिंदुओं को आहत करने से अधिक कुछ भी नहीं। प्रोग्रेसिव फोटोशूट की बात थी तो लॉकेट के रूप में कोई और चीज भी गले में लटकाई जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया, क्योंकि उसे हिंदू समुदाय, महिला की निजता का मामला मानता और भावनाओं को ठेस दूर-दूर तक नहीं पहुँचती।
🚩किसी और मजहब पर ऐसी फिल्म क्यों नहीं बनती?’
🚩लीना मणिमेकलाई की डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ के पोस्टर पर मध्य प्रदेश में भी विवाद गहरा गया है। प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ट्वीट किया, “डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ में काली माता को सिगरेट पीते हुए दिखाना काफी आपत्तिजनक है। इस मामले में FIR करवाने के लिए बोलूँगा और फिल्म मध्य प्रदेश में कैसे बैन हो इस पर विचार किया जाएगा। माँ काली का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर तत्काल फिल्म के पोस्टर नहीं हटाए तो आगे कड़ी कानूनी कार्रवाई करेंगे।
🚩उन्होंने कहा, “मैं डायरेक्टर लीना मणिमेकलाई से पूछना चाहता हूँ कि आखिर हमारे देवी देवताओं पर ही फिल्म क्यों बनाई जाती है? किसी और धर्म के देवी देवताओं पर फिल्म बनाने की हिम्मत क्यों नहीं हो पाती है। यह बेहद आपत्तिजनक है। तत्काल पोस्टर नहीं हटाए, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
🚩लीना मणिमेकलई ने 2 जुलाई 2022 को अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ का पोस्टर ट्विटर पर रिलीज किया था। इस पोस्टर में एक्ट्रेस को ‘काली’ के रूप में दिखाया गया है। इसमें उसने एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में LGBT समुदाय का झंडा पकड़ा हुआ। इसके साथ ही उसे सिगरेट पीते हुए भी दिखाया गया है। पोस्टर रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर इस फिल्म का विरोध किया जा रहा है।
🚩भारत सरकार , प्रसाशन से हिन्दू समाज की मांग हैं कि हिन्दू देवी-देवताओं , हिन्दू संतो के ऊपर गलत टिप्पणी, पोस्ट या फ़िल्म बनाने वालो को कड़ी से कड़ी सजा हो ।
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🚩लीना मणिमेकलाई की डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ के पोस्टर पर मध्य प्रदेश में भी विवाद गहरा गया है। प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ट्वीट किया, “डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ में काली माता को सिगरेट पीते हुए दिखाना काफी आपत्तिजनक है। इस मामले में FIR करवाने के लिए बोलूँगा और फिल्म मध्य प्रदेश में कैसे बैन हो इस पर विचार किया जाएगा। माँ काली का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर तत्काल फिल्म के पोस्टर नहीं हटाए तो आगे कड़ी कानूनी कार्रवाई करेंगे।
🚩उन्होंने कहा, “मैं डायरेक्टर लीना मणिमेकलाई से पूछना चाहता हूँ कि आखिर हमारे देवी देवताओं पर ही फिल्म क्यों बनाई जाती है? किसी और धर्म के देवी देवताओं पर फिल्म बनाने की हिम्मत क्यों नहीं हो पाती है। यह बेहद आपत्तिजनक है। तत्काल पोस्टर नहीं हटाए, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
🚩लीना मणिमेकलई ने 2 जुलाई 2022 को अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ का पोस्टर ट्विटर पर रिलीज किया था। इस पोस्टर में एक्ट्रेस को ‘काली’ के रूप में दिखाया गया है। इसमें उसने एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में LGBT समुदाय का झंडा पकड़ा हुआ। इसके साथ ही उसे सिगरेट पीते हुए भी दिखाया गया है। पोस्टर रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर इस फिल्म का विरोध किया जा रहा है।
🚩भारत सरकार , प्रसाशन से हिन्दू समाज की मांग हैं कि हिन्दू देवी-देवताओं , हिन्दू संतो के ऊपर गलत टिप्पणी, पोस्ट या फ़िल्म बनाने वालो को कड़ी से कड़ी सजा हो ।
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वैज्ञानिक : पिज्जा, बर्गर बीमारियां बढ़ाता है, भारतीय भोजन बीमारियां मिटाता है।
8 July 2022
http://azaadbharat.org
🚩जर्मनी के वैज्ञानिकों ने लंबी शोध के बाद निष्कर्ष निकाला कि विदेशी फास्टफूड बर्गर, पिज़ा आदि बीमारियों को बुलावा लाता है जबकि भारतीय भोजन दाल-चावल, रोटी,मूंग आदि बीमारियों को मिटाने का काम करता है।
🚩भारतीय लोग अपने आहार का महत्व नहीं समझकर विदेशी लोग का अंधानुकरण करके स्वाद के लिए पिज़ा, बर्गर, चिप्स आदि खाने लगे हैं जिसके कारण आज लगभग हर व्यक्ति को कुछ न कुछ बीमारी पकड़ लेती है फिर डॉक्टरों के पास चक्कर काटता रहता है पर बीमारी ठीक नहीं हो पाती है, अब हमें अपने भोजन का महत्व समझकर भोजन करना चाहिए और बीमारियों को बुलावा देने वाले फास्टफूड आदि का त्याग करना चाहिए।
🚩जर्मनी के वैज्ञानिकों ने बीमारी पर शोध किया:
🚩जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑफ़ L .beck के हालिया अध्ययन में कहा गया है कि भारतीय आहार खराब DNA के कारण होने वाली बीमारी को मार सकता है। शोध में यह भी पाया गया कि DNA, न केवल DNA, बीमारियों का सबसे महत्वपूर्ण कारण है, बल्कि आहार भी सबसे महत्वपूर्ण है जो बीमारी का कारण बन सकता है और इस पर एक स्पंज डाल सकता है
🚩विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रॉल्फ लुडविक के नेतृत्व में तीन वैज्ञानिकों द्वारा हाल ही में किए गए शोध प्रकाशित किए गए थे। तीन शोधकर्ताओं में डॉ. आर्टेम वोरोवैव, इज़राइल के डॉ. तान्या शेजीन और डॉ यास्का गुप्ता शामिल हैं। 2 वर्षों तक चूहों में किए गए शोध से पता चलता है कि पश्चिमी देश में उच्च कैलोरी आहार बीमारी को बढ़ाते हैं। जबकि भारत का कम कैलोरी वाला आहार बीमारियों से बचाता है।
🚩फास्ट फूड, जैसे पिज्जा, बर्गर, आनुवांशिक बीमारियों को बढ़ाता है ।
🚩डॉ. गुप्ता ने जर्मनी से भास्कर को बताया कि अब तक सभी आनुवंशिक बीमारियां केवल डीएनए में दिखाई देती थीं। इस शोध में इसे आहार पर ध्यान केंद्रित करके मापा गया है।
🚩शोधकर्ताओं ने ल्यूपस नामक बीमारी से पीड़ित चूहों के एक समूह पर प्रयोग किया। ल्यूपस बीमारी सीधे डीएनए से संबंधित है। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कम करता है और विभिन्न अंगों और जोड़ों, गुर्दे, हृदय, फेफड़े, मस्तिष्क और रक्त कोशिकाओं को नष्ट करता है।
🚩 डॉ. यास्का गुप्ता ने कहा कि इस शोध के परिणामों से पता चलता है कि पश्चिमी देशों में पिज्जा, बर्गर जैसे फास्ट फूड से भारत के शाकाहारी भोजन -रोटी, चावल,मूंग, दाल, सब्जियां, विशेष रूप से जड़ी-बूटियों को बढ़ाने में मदद मिलती है - शरीर को इन बीमारियों से बचाता है। है।
🚩कौन से फास्ट से फूड क्या नुकसान होता है?
🚩पेस्ट्री
🚩पेस्ट्री में अधिक मात्रा में शुगर, फेट और कैलोरी होती है। पेस्ट्री खाने की आदत आपका मोटापा बढ़ा सकती है। इसलिए थोड़ा ध्यान रखें क्योंकि पेस्ट्री शरीर को काफी नुकसान देती है।
🚩पिज्जा
🚩पिज्जा की लत से आपको दिल संबंधी बीमारी हो सकती है। इसमें कोलेस्ट्रोल के कारण आपकी आर्ट्रीज बंद हो सकती हैं और इससे हार्ट अटैक भी आ सकता है।
🚩पाइज
🚩पाइज खाने में स्वादिष्ट है लेकिन एक अध्ययन में पता चला है कि यह शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह है। पाइज खाने से आगे चलकर शुगर लेवल बढ़ने और मधुमेह की समस्या आती है।
🚩बर्गर
🚩बर्गर से वजन तो बढ़ता ही है साथ ही दिल की बीमारी भी हो सकती है। यह डाइटरी कोलेस्ट्रोल को तेजी से बढ़ाता है और बर्गर से हाइ ब्लड प्रेशर की भी परेशानी है।
🚩सैंडविच
🚩सैंडविच खाने की आदत आपका मोटापा बढ़ा देगी।
🚩चिप्स
🚩चिप्स खाने से शरीर को नुकसान होता है। चिप्स में कैलोरी ज्यादा होती है जिसके कारण फेट बढ़ता है। नियमित चिप्स खाने वालों को वजन बढ़ने की समस्या हो जाती है। चिप्स खाने से कोलेस्ट्रोल भी बढ़ता है। सोडियम ज्यादा मात्रा में होने के कारण हाई ब्लड प्रेशर भी हो जाता है।
🚩सॉफ्ट ड्रिंक्स
🚩सॉफ्ट ड्रिंक्स भी लोग काफी पीते हैं और कई लोगों ने तो रोजाना सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने की आदक डाल रखी है। मगर इससे समस्या भी उतनी ही है। सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने वालों को दांतों में सड़न बहुत तेजी से हो सकती है। सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने से मोटापा और छाती में जलन की परेशानी भी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती है।
🚩अब आपने देखा कि फास्टफूड शरीर को कितना नुकसान पहुँचता है अतः इससे बचने के लिए हमारा भारतीय भोजन करें। यह ध्यान रखें कि हमारा पेट गटर नहीं है इसलिए कोई भी बीमारी करे ऐसा भोजन नहीं करे।
🚩भारतीय लोग अपनी संस्कृति की महिमा खुद नहीं समझते, जबतक विदेश के कोई वैज्ञानिक नहीं बोल दें जबकि आज के वैज्ञानिक जो शोध कर रहे हैं वे शोध हमारे ऋषि-मुनि लाखों साल पहले बता चुके हैं पर भारतीय उनका आदर करे तब न, जब भारतीय लोग खुद की संस्कृति का आदर करने लगेंगे तब दुनिया भी भारतीय संस्कृति अपनाकर अपने को धन्य मानेंगी।
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8 July 2022
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🚩जर्मनी के वैज्ञानिकों ने लंबी शोध के बाद निष्कर्ष निकाला कि विदेशी फास्टफूड बर्गर, पिज़ा आदि बीमारियों को बुलावा लाता है जबकि भारतीय भोजन दाल-चावल, रोटी,मूंग आदि बीमारियों को मिटाने का काम करता है।
🚩भारतीय लोग अपने आहार का महत्व नहीं समझकर विदेशी लोग का अंधानुकरण करके स्वाद के लिए पिज़ा, बर्गर, चिप्स आदि खाने लगे हैं जिसके कारण आज लगभग हर व्यक्ति को कुछ न कुछ बीमारी पकड़ लेती है फिर डॉक्टरों के पास चक्कर काटता रहता है पर बीमारी ठीक नहीं हो पाती है, अब हमें अपने भोजन का महत्व समझकर भोजन करना चाहिए और बीमारियों को बुलावा देने वाले फास्टफूड आदि का त्याग करना चाहिए।
🚩जर्मनी के वैज्ञानिकों ने बीमारी पर शोध किया:
🚩जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑफ़ L .beck के हालिया अध्ययन में कहा गया है कि भारतीय आहार खराब DNA के कारण होने वाली बीमारी को मार सकता है। शोध में यह भी पाया गया कि DNA, न केवल DNA, बीमारियों का सबसे महत्वपूर्ण कारण है, बल्कि आहार भी सबसे महत्वपूर्ण है जो बीमारी का कारण बन सकता है और इस पर एक स्पंज डाल सकता है
🚩विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रॉल्फ लुडविक के नेतृत्व में तीन वैज्ञानिकों द्वारा हाल ही में किए गए शोध प्रकाशित किए गए थे। तीन शोधकर्ताओं में डॉ. आर्टेम वोरोवैव, इज़राइल के डॉ. तान्या शेजीन और डॉ यास्का गुप्ता शामिल हैं। 2 वर्षों तक चूहों में किए गए शोध से पता चलता है कि पश्चिमी देश में उच्च कैलोरी आहार बीमारी को बढ़ाते हैं। जबकि भारत का कम कैलोरी वाला आहार बीमारियों से बचाता है।
🚩फास्ट फूड, जैसे पिज्जा, बर्गर, आनुवांशिक बीमारियों को बढ़ाता है ।
🚩डॉ. गुप्ता ने जर्मनी से भास्कर को बताया कि अब तक सभी आनुवंशिक बीमारियां केवल डीएनए में दिखाई देती थीं। इस शोध में इसे आहार पर ध्यान केंद्रित करके मापा गया है।
🚩शोधकर्ताओं ने ल्यूपस नामक बीमारी से पीड़ित चूहों के एक समूह पर प्रयोग किया। ल्यूपस बीमारी सीधे डीएनए से संबंधित है। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कम करता है और विभिन्न अंगों और जोड़ों, गुर्दे, हृदय, फेफड़े, मस्तिष्क और रक्त कोशिकाओं को नष्ट करता है।
🚩 डॉ. यास्का गुप्ता ने कहा कि इस शोध के परिणामों से पता चलता है कि पश्चिमी देशों में पिज्जा, बर्गर जैसे फास्ट फूड से भारत के शाकाहारी भोजन -रोटी, चावल,मूंग, दाल, सब्जियां, विशेष रूप से जड़ी-बूटियों को बढ़ाने में मदद मिलती है - शरीर को इन बीमारियों से बचाता है। है।
🚩कौन से फास्ट से फूड क्या नुकसान होता है?
🚩पेस्ट्री
🚩पेस्ट्री में अधिक मात्रा में शुगर, फेट और कैलोरी होती है। पेस्ट्री खाने की आदत आपका मोटापा बढ़ा सकती है। इसलिए थोड़ा ध्यान रखें क्योंकि पेस्ट्री शरीर को काफी नुकसान देती है।
🚩पिज्जा
🚩पिज्जा की लत से आपको दिल संबंधी बीमारी हो सकती है। इसमें कोलेस्ट्रोल के कारण आपकी आर्ट्रीज बंद हो सकती हैं और इससे हार्ट अटैक भी आ सकता है।
🚩पाइज
🚩पाइज खाने में स्वादिष्ट है लेकिन एक अध्ययन में पता चला है कि यह शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह है। पाइज खाने से आगे चलकर शुगर लेवल बढ़ने और मधुमेह की समस्या आती है।
🚩बर्गर
🚩बर्गर से वजन तो बढ़ता ही है साथ ही दिल की बीमारी भी हो सकती है। यह डाइटरी कोलेस्ट्रोल को तेजी से बढ़ाता है और बर्गर से हाइ ब्लड प्रेशर की भी परेशानी है।
🚩सैंडविच
🚩सैंडविच खाने की आदत आपका मोटापा बढ़ा देगी।
🚩चिप्स
🚩चिप्स खाने से शरीर को नुकसान होता है। चिप्स में कैलोरी ज्यादा होती है जिसके कारण फेट बढ़ता है। नियमित चिप्स खाने वालों को वजन बढ़ने की समस्या हो जाती है। चिप्स खाने से कोलेस्ट्रोल भी बढ़ता है। सोडियम ज्यादा मात्रा में होने के कारण हाई ब्लड प्रेशर भी हो जाता है।
🚩सॉफ्ट ड्रिंक्स
🚩सॉफ्ट ड्रिंक्स भी लोग काफी पीते हैं और कई लोगों ने तो रोजाना सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने की आदक डाल रखी है। मगर इससे समस्या भी उतनी ही है। सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने वालों को दांतों में सड़न बहुत तेजी से हो सकती है। सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने से मोटापा और छाती में जलन की परेशानी भी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती है।
🚩अब आपने देखा कि फास्टफूड शरीर को कितना नुकसान पहुँचता है अतः इससे बचने के लिए हमारा भारतीय भोजन करें। यह ध्यान रखें कि हमारा पेट गटर नहीं है इसलिए कोई भी बीमारी करे ऐसा भोजन नहीं करे।
🚩भारतीय लोग अपनी संस्कृति की महिमा खुद नहीं समझते, जबतक विदेश के कोई वैज्ञानिक नहीं बोल दें जबकि आज के वैज्ञानिक जो शोध कर रहे हैं वे शोध हमारे ऋषि-मुनि लाखों साल पहले बता चुके हैं पर भारतीय उनका आदर करे तब न, जब भारतीय लोग खुद की संस्कृति का आदर करने लगेंगे तब दुनिया भी भारतीय संस्कृति अपनाकर अपने को धन्य मानेंगी।
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आखिर हिन्दू धर्म का अपमान क्यों और कब तक ?
9 July 2022
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🚩हिन्दू घृणा से ग्रसित फिल्ममेकर लीना मणिमेकलई (Leena Manimekalai) की हरकतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। माँ काली को सिगरेट पीते दिखाने के बाद मचे बवाल पर माफी माँगने की बजाय लीना ने भगवान शिव और माता पार्वती के धूम्रपान करने वाली तस्वीरों को पोस्ट किया है। इस पर टीवी जगत के भगवान राम (एक्टर अरुण गोविल) ने इसे हिन्दू धर्म का घोर अपमान करार दिया है।
🚩अरुण गोविल ने लीना मणिमेकलई की हिन्दू आस्था पर कुठाराघात करने की पोस्ट की आलोचना की। उन्होंने ट्वीट किया, “माँ काली का अपमान हिन्दू धर्म का घोर अपमान है। करोड़ों हिन्दुओं की आस्था पर सीधा प्रहार है। फिल्मों और विज्ञापनों में हिन्दू देवी देवताओं का अपमान प्रचलन बन गया है। बार-बार हिन्दू धर्म का अपमान आखिर क्यों और कब तक? ऐसे जघन्य अपराध तत्काल बंद होने चाहिए।”
🚩इसी क्रम में अभिनेता अनुपम खेर ने भी माँ काली के अपमान को लेकर बयान दिया। उन्होंने शिमला का एक किस्सा शेयर किया, “शिमला में माँ काली का एक बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है, कालीबाड़ी। बचपन में कई बार जाता था। बूँदी के प्रसाद और मीठे चरणामृत के लिए। मंदिर के बाहर एक साधु/फक़ीर टाइप बार बार दोहराता था…’जय माँ कलकत्ते वाली…तेरा श्राप ना जाए खाली..’ आजकल उस साधु और मंदिर की बहुत याद आ रही है!”
🚩भगवान शिव और माता पार्वती की धूम्रपान करती तस्वीरों को पोस्ट करने को लेकर फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने लीना मणिमेकलई को मानसिक बीमार करार दिया है। उन्होंने कहा, “अब ये साबित हो गया है कि तुम्हें मेंटल अस्पताल में भर्ती होने से पहले तत्काल इलाज की जरूरत है। कृपया जल्द से जल्द किसी मनोचिकित्सक से सलाह लें।”
🚩गौरतलब है कि लीना ने बीते 2 जुलाई को ‘काली’ का पोस्टर ट्विटर पर रिलीज किया था। इसमें ‘काली’ बनी एक्ट्रेस को सिगरेट पीते दिखाया गया था। साथ ही एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में LGBT का झंडा था। इस पर विवाद होने के बाद लीना ने माफी माँगने से इनकार कर दिया था।
🚩वही इस मामले में माफी माँगने की बजाय फिल्ममेकर ने एक नया ट्वीट किया जिसमें शिव-पार्वती बने कलाकारों को धूम्रपान करते दिखाया गया है।
🚩हिन्दू जागरूक हो रहा है...
🚩लीना मणिमेकलाई को जो नहीं भी जानते थे वह भी इनसे परिचित हो गए। लेकिन इन्हें पता चल गया है कि अब यह भारत पहले वाला नहीं है, बदल चुका है।
🚩इनकी डॉक्यूमेंट्री काली का आज टोरंटो विश्वविद्यालय में प्रदर्शन नहीं हो सका।
🚩भारतीय उच्चायोग ने कनाडा सरकार से अपना विरोध दर्ज कराया और सारी तैयारी धरी की धरी रह गई।
🚩आगे का नहीं मालूम लेकिन भारत का विरोध इतना तगड़ा है कि आसानी से वहां भी प्रदर्शन कराना संभव नहीं होगा। भारत में तो खैर अब शायद ही कोई इस डॉक्यूमेंट्री को दिखाने का साहस करे।
🚩जो करेगा उसे हिंदू समाज के कोप का शिकार होना पड़ेगा। या तो फिल्म चलने नहीं दी जाएगी या कहीं चली भी तो दर्शक नहीं मिलेंगे।
🚩लीना माणिमेकलई की समस्या का अंत यही नहीं होने वाला। अलग-अलग राज्यों में उनके विरुद्ध केस दर्ज हो गए हैं और उन्हें उनका सामना इसलिए करना पड़ेगा क्योंकि आज भी उनके पास भारतीय पासपोर्ट ही है।
🚩दूसरे, ऐसे स्वयं को लिबरल ,वामपंथी, प्रगतिशील बताने वाले फिल्म फिल्म निर्माताओं के सामने भी यह प्रश्न खड़ा हो गया है कि आगे कैसी फिल्में बनाई जाए।
🚩सबको अंदाजा हो गया है कि हमने पहले की तरह हिंदू धर्म , संस्कृति, देवी-देवताओं ,महापुरुषों, धार्मिक प्रतीकों , धार्मिक विधाओं आदि को अपमानित या लांछित किया या फिर उसका उपहास उड़ाया तो हमारे लिए कठिनाइयां बढ़ जाएंगी।
🚩एक फिल्म निर्माता के रूप में हमारा अस्तित्व संकट में आ जाएगा। इसलिए आगे से ऐसे निर्माता भी इस तरह की फिल्में बनाने से बचेंगे।
🚩एक समय था जब हिंदू समाज अपने देवी-देवताओं, महापुरुषों पर त्योहारों, रीति-रिवाजों, परंपराओं, धार्मिक प्रतीक चिन्हों आदि के अपमान का उपहास उड़ाए जाने पर संवेदनशील नहीं था।
🚩अब वह स्थिति बदली है तो इसका असर होना निश्चित है। आने वाले समय में धीरे धीरे ऐसी फिल्में आएंगी जो सच को सच दिखाएंगी और उसके लिए उन्हें रिसर्च करना पड़ेगा।
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🚩अरुण गोविल ने लीना मणिमेकलई की हिन्दू आस्था पर कुठाराघात करने की पोस्ट की आलोचना की। उन्होंने ट्वीट किया, “माँ काली का अपमान हिन्दू धर्म का घोर अपमान है। करोड़ों हिन्दुओं की आस्था पर सीधा प्रहार है। फिल्मों और विज्ञापनों में हिन्दू देवी देवताओं का अपमान प्रचलन बन गया है। बार-बार हिन्दू धर्म का अपमान आखिर क्यों और कब तक? ऐसे जघन्य अपराध तत्काल बंद होने चाहिए।”
🚩इसी क्रम में अभिनेता अनुपम खेर ने भी माँ काली के अपमान को लेकर बयान दिया। उन्होंने शिमला का एक किस्सा शेयर किया, “शिमला में माँ काली का एक बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है, कालीबाड़ी। बचपन में कई बार जाता था। बूँदी के प्रसाद और मीठे चरणामृत के लिए। मंदिर के बाहर एक साधु/फक़ीर टाइप बार बार दोहराता था…’जय माँ कलकत्ते वाली…तेरा श्राप ना जाए खाली..’ आजकल उस साधु और मंदिर की बहुत याद आ रही है!”
🚩भगवान शिव और माता पार्वती की धूम्रपान करती तस्वीरों को पोस्ट करने को लेकर फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने लीना मणिमेकलई को मानसिक बीमार करार दिया है। उन्होंने कहा, “अब ये साबित हो गया है कि तुम्हें मेंटल अस्पताल में भर्ती होने से पहले तत्काल इलाज की जरूरत है। कृपया जल्द से जल्द किसी मनोचिकित्सक से सलाह लें।”
🚩गौरतलब है कि लीना ने बीते 2 जुलाई को ‘काली’ का पोस्टर ट्विटर पर रिलीज किया था। इसमें ‘काली’ बनी एक्ट्रेस को सिगरेट पीते दिखाया गया था। साथ ही एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में LGBT का झंडा था। इस पर विवाद होने के बाद लीना ने माफी माँगने से इनकार कर दिया था।
🚩वही इस मामले में माफी माँगने की बजाय फिल्ममेकर ने एक नया ट्वीट किया जिसमें शिव-पार्वती बने कलाकारों को धूम्रपान करते दिखाया गया है।
🚩हिन्दू जागरूक हो रहा है...
🚩लीना मणिमेकलाई को जो नहीं भी जानते थे वह भी इनसे परिचित हो गए। लेकिन इन्हें पता चल गया है कि अब यह भारत पहले वाला नहीं है, बदल चुका है।
🚩इनकी डॉक्यूमेंट्री काली का आज टोरंटो विश्वविद्यालय में प्रदर्शन नहीं हो सका।
🚩भारतीय उच्चायोग ने कनाडा सरकार से अपना विरोध दर्ज कराया और सारी तैयारी धरी की धरी रह गई।
🚩आगे का नहीं मालूम लेकिन भारत का विरोध इतना तगड़ा है कि आसानी से वहां भी प्रदर्शन कराना संभव नहीं होगा। भारत में तो खैर अब शायद ही कोई इस डॉक्यूमेंट्री को दिखाने का साहस करे।
🚩जो करेगा उसे हिंदू समाज के कोप का शिकार होना पड़ेगा। या तो फिल्म चलने नहीं दी जाएगी या कहीं चली भी तो दर्शक नहीं मिलेंगे।
🚩लीना माणिमेकलई की समस्या का अंत यही नहीं होने वाला। अलग-अलग राज्यों में उनके विरुद्ध केस दर्ज हो गए हैं और उन्हें उनका सामना इसलिए करना पड़ेगा क्योंकि आज भी उनके पास भारतीय पासपोर्ट ही है।
🚩दूसरे, ऐसे स्वयं को लिबरल ,वामपंथी, प्रगतिशील बताने वाले फिल्म फिल्म निर्माताओं के सामने भी यह प्रश्न खड़ा हो गया है कि आगे कैसी फिल्में बनाई जाए।
🚩सबको अंदाजा हो गया है कि हमने पहले की तरह हिंदू धर्म , संस्कृति, देवी-देवताओं ,महापुरुषों, धार्मिक प्रतीकों , धार्मिक विधाओं आदि को अपमानित या लांछित किया या फिर उसका उपहास उड़ाया तो हमारे लिए कठिनाइयां बढ़ जाएंगी।
🚩एक फिल्म निर्माता के रूप में हमारा अस्तित्व संकट में आ जाएगा। इसलिए आगे से ऐसे निर्माता भी इस तरह की फिल्में बनाने से बचेंगे।
🚩एक समय था जब हिंदू समाज अपने देवी-देवताओं, महापुरुषों पर त्योहारों, रीति-रिवाजों, परंपराओं, धार्मिक प्रतीक चिन्हों आदि के अपमान का उपहास उड़ाए जाने पर संवेदनशील नहीं था।
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चतुर्मास प्रारम्भ 10 जुलाई 2022 से लेकर 04 नवम्बर 2022 तक
11 July 2022
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🚩चतुर्मास का क्या महत्व है, इसमे क्या करे क्या नही करें?
🚩स्वास्थ्य बनाए रखने, साधना करने तथा वातावरण को सात्त्विक बनाए रखने हेतु हिन्दू धर्म शास्त्र में बताए गए नियमों का पालन सर्वथा उचित है । मानव जीवन से संबंधित इतना गहन अध्ययन केवल हिन्दू धर्म में ही किया गया है । यही इसकी महानता है ।
🚩चातुर्मास को उपासना एवं साधना हेतु पुण्यकारक एवं फलदायी काल माना जाता है । आषाढ शुक्ल एकादशी 10 जुलाई 2022 से कार्तिक शुक्ल एकादशी 4 नवम्बर 2022 तक अर्थात आषाढ पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक 4 महीने के काल को चातुर्मास कहते हैं । यह एक महा पुण्य वाला पर्वकाल है ।
🚩ऐसी मान्यता है कि चातुर्मास का काल देवताओं के शयन का काल है । इसलिए चातुर्मास के आरंभ में जो एकादशी आती है, उसे देवशयनी एकादशी कहते हैं तथा चातुर्मास के समापन पर जो एकादशी आती है, उसे देवोत्थानी अथवा प्रबोधिनी ,देवउठनी एकादशी कहते हैं । परमार्थ के लिए पोषक बातों की विधियां और सांसारिक जीवन के लिए हानिकारक विषयों का निषेध, यह चातुर्मास की विशेषता है ।
🚩चातुर्मास के काल में अधिकाधिक व्रतविधि होने का कारण चातुर्मास का काल, व्रतविधियों का काल भी जाना जाता है । चातुर्मास के काल में सूर्य की किरणें तथा खुली हवा अन्य दिनों के समान पृथ्वी पर नहीं पहुंच पाती । विविध जंतु तथा कष्टदायी तरंगों की मात्रा बढ कर रोग फैलते हैं । आलस्य का अनुभव होता है ।
🚩आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखें, तो चातुर्मास के काल में पृथ्वी के वातावरण में तमोगुण की प्रबलता बढ जाती है । ऐसे में हमारी सात्त्विकता बढाना आवश्यक होता है । चातुर्मास में किए जाने वाले विविध व्रतों की सहायता से विविध देवताओं की उपासना की जाती है और उनका आवाहन किया जाता है ।
🚩 व्रतविधि के कारण हमारा सत्त्वगुण बढता है और हम सर्व स्तरों पर सक्षम बनते हैं । प्रबल तमोगुणी वातावरण में सात्त्विकता बढाने हेतु दिए गए व्रत विधि हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों की देन है ।
🚩यह एक पर्वकाल है, चातुर्मास आनंदप्राप्ति अर्थात ईश्वरप्राप्ति, यह मनुष्य जीवन का एकमात्र उद्देश्य है । अतः मनुष्य के लिए निरंतर ईश्वर का सूक्ष्म-सान्निध्य अत्यावश्यक होता है । ईश्वर से सदैव हमारा संधान बना रहे, इसलिए हमारे ऋषि मुनियों ने विविध माध्यम उपलब्ध करवाए हैं । इनके अंतर्गत कालानुसार उपासना भी बताई गई है । विशिष्ट काल में विशिष्ट उपासना करने से उपासक को उस काल से संबंधित देवता तत्त्वों का अत्यधिक लाभ मिलता है । देवता तत्त्वों के चैतन्य से प्राप्त अंतःप्रेरणा से मनुष्य अध्यात्म के पथ पर चलकर आगे ईश्वर से एक रूप हो जाता है ।
🚩चातुर्मास देवताओं का शयनकाल है,मनुष्य का 1 वर्ष देवताओं की 1 अहोरात्र है । रात्रि काल सामान्यतः 12 घंटे का माना जाता है , तो 1 पूर्ण दिन एवं 1 पूर्ण रात्रि मिलाकर अहोरात्र होती है । मकर संक्रांति से कर्क संक्रांति तक उत्तरायण होता है एवं कर्क संक्रांति से मकर संक्रांति तक दक्षिणायन होता है । उत्तरायण देवताओं का दिन होता है, तो दक्षिणायन देवताओं की रात । कर्क संक्रांति पर उत्तरायण पूर्ण होकर दक्षिणायन प्रारंभ होता है, अर्थात देवताओं की रात आरंभ होती है । कर्क संक्रांति आषाढ महीने में आती है; इसलिए आषाढ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं । ऐसी मान्यता है कि उस दिन देवता शयन करते हैं, अर्थात सो जाते हैं । कार्तिक शुक्ल एकादशी पर देवता नींद से जागते हैं, इसलिए इसे ‘देवोत्थान’ अथवा ‘प्रबोधिनी एकादशी’ देव उठनी एकादशी कहते हैं । वस्तुतः दक्षिणायन 6 महीने का होने के कारण देवताओं की रात्रि भी तत्समान होनी चाहिए; परंतु प्रबोधिनी एकादशी तक 4 महीने पूर्ण होते हैं । इसका अर्थ यह है कि एक तृतीयांश रात शेष होते हुए देवता जागकर अपना व्यवहार करने लगते हैं ।’
🚩चातुर्मास भगवान श्रीविष्णु का शयनकाल है,चातुर्मास में ‘ब्रह्मदेव द्वारा नई सृष्टि की रचना का कार्य जारी रहता है एवं पालनकर्ता श्री विष्णु निष्क्रिय रहते हैं; इसलिए चातुर्मास को विष्णु शयनकाल भी कहते हैं । ऐसी मान्यता है कि उस समय विष्णु क्षीर सागर में शयन करते हैं । इसके संदर्भ में एक पौराणिक कथा है – वामनावतारमें श्री विष्णु ने असुरों के राजा बली से त्रिपाद भूमि दान में मांग ली । श्री विष्णुने एक पद में पृथ्वी, दूसरे पद में संपूर्ण ब्रह्मांड माप लिया तथा तीसरी बार श्री विष्णु ने राजा बलि की प्रार्थना के अनुसार उनके सर पर पद रखकर उन्हें पाताल में भेज दिया । राजा बलि ने भगवान श्री विष्णु की भक्ति में अपना सर्वस्व अर्पण कर दिया । इस पर प्रसन्न होकर भगवान श्रीविष्णु ने राजा बलि के निकट रहना मान्य किया । तब से श्रीविष्णु क्षीरसागर में शयन करने लगे । वास्तव में चातुर्मास के इस काल में श्रीविष्णु शेष
11 July 2022
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🚩चतुर्मास का क्या महत्व है, इसमे क्या करे क्या नही करें?
🚩स्वास्थ्य बनाए रखने, साधना करने तथा वातावरण को सात्त्विक बनाए रखने हेतु हिन्दू धर्म शास्त्र में बताए गए नियमों का पालन सर्वथा उचित है । मानव जीवन से संबंधित इतना गहन अध्ययन केवल हिन्दू धर्म में ही किया गया है । यही इसकी महानता है ।
🚩चातुर्मास को उपासना एवं साधना हेतु पुण्यकारक एवं फलदायी काल माना जाता है । आषाढ शुक्ल एकादशी 10 जुलाई 2022 से कार्तिक शुक्ल एकादशी 4 नवम्बर 2022 तक अर्थात आषाढ पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक 4 महीने के काल को चातुर्मास कहते हैं । यह एक महा पुण्य वाला पर्वकाल है ।
🚩ऐसी मान्यता है कि चातुर्मास का काल देवताओं के शयन का काल है । इसलिए चातुर्मास के आरंभ में जो एकादशी आती है, उसे देवशयनी एकादशी कहते हैं तथा चातुर्मास के समापन पर जो एकादशी आती है, उसे देवोत्थानी अथवा प्रबोधिनी ,देवउठनी एकादशी कहते हैं । परमार्थ के लिए पोषक बातों की विधियां और सांसारिक जीवन के लिए हानिकारक विषयों का निषेध, यह चातुर्मास की विशेषता है ।
🚩चातुर्मास के काल में अधिकाधिक व्रतविधि होने का कारण चातुर्मास का काल, व्रतविधियों का काल भी जाना जाता है । चातुर्मास के काल में सूर्य की किरणें तथा खुली हवा अन्य दिनों के समान पृथ्वी पर नहीं पहुंच पाती । विविध जंतु तथा कष्टदायी तरंगों की मात्रा बढ कर रोग फैलते हैं । आलस्य का अनुभव होता है ।
🚩आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखें, तो चातुर्मास के काल में पृथ्वी के वातावरण में तमोगुण की प्रबलता बढ जाती है । ऐसे में हमारी सात्त्विकता बढाना आवश्यक होता है । चातुर्मास में किए जाने वाले विविध व्रतों की सहायता से विविध देवताओं की उपासना की जाती है और उनका आवाहन किया जाता है ।
🚩 व्रतविधि के कारण हमारा सत्त्वगुण बढता है और हम सर्व स्तरों पर सक्षम बनते हैं । प्रबल तमोगुणी वातावरण में सात्त्विकता बढाने हेतु दिए गए व्रत विधि हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों की देन है ।
🚩यह एक पर्वकाल है, चातुर्मास आनंदप्राप्ति अर्थात ईश्वरप्राप्ति, यह मनुष्य जीवन का एकमात्र उद्देश्य है । अतः मनुष्य के लिए निरंतर ईश्वर का सूक्ष्म-सान्निध्य अत्यावश्यक होता है । ईश्वर से सदैव हमारा संधान बना रहे, इसलिए हमारे ऋषि मुनियों ने विविध माध्यम उपलब्ध करवाए हैं । इनके अंतर्गत कालानुसार उपासना भी बताई गई है । विशिष्ट काल में विशिष्ट उपासना करने से उपासक को उस काल से संबंधित देवता तत्त्वों का अत्यधिक लाभ मिलता है । देवता तत्त्वों के चैतन्य से प्राप्त अंतःप्रेरणा से मनुष्य अध्यात्म के पथ पर चलकर आगे ईश्वर से एक रूप हो जाता है ।
🚩चातुर्मास देवताओं का शयनकाल है,मनुष्य का 1 वर्ष देवताओं की 1 अहोरात्र है । रात्रि काल सामान्यतः 12 घंटे का माना जाता है , तो 1 पूर्ण दिन एवं 1 पूर्ण रात्रि मिलाकर अहोरात्र होती है । मकर संक्रांति से कर्क संक्रांति तक उत्तरायण होता है एवं कर्क संक्रांति से मकर संक्रांति तक दक्षिणायन होता है । उत्तरायण देवताओं का दिन होता है, तो दक्षिणायन देवताओं की रात । कर्क संक्रांति पर उत्तरायण पूर्ण होकर दक्षिणायन प्रारंभ होता है, अर्थात देवताओं की रात आरंभ होती है । कर्क संक्रांति आषाढ महीने में आती है; इसलिए आषाढ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं । ऐसी मान्यता है कि उस दिन देवता शयन करते हैं, अर्थात सो जाते हैं । कार्तिक शुक्ल एकादशी पर देवता नींद से जागते हैं, इसलिए इसे ‘देवोत्थान’ अथवा ‘प्रबोधिनी एकादशी’ देव उठनी एकादशी कहते हैं । वस्तुतः दक्षिणायन 6 महीने का होने के कारण देवताओं की रात्रि भी तत्समान होनी चाहिए; परंतु प्रबोधिनी एकादशी तक 4 महीने पूर्ण होते हैं । इसका अर्थ यह है कि एक तृतीयांश रात शेष होते हुए देवता जागकर अपना व्यवहार करने लगते हैं ।’
🚩चातुर्मास भगवान श्रीविष्णु का शयनकाल है,चातुर्मास में ‘ब्रह्मदेव द्वारा नई सृष्टि की रचना का कार्य जारी रहता है एवं पालनकर्ता श्री विष्णु निष्क्रिय रहते हैं; इसलिए चातुर्मास को विष्णु शयनकाल भी कहते हैं । ऐसी मान्यता है कि उस समय विष्णु क्षीर सागर में शयन करते हैं । इसके संदर्भ में एक पौराणिक कथा है – वामनावतारमें श्री विष्णु ने असुरों के राजा बली से त्रिपाद भूमि दान में मांग ली । श्री विष्णुने एक पद में पृथ्वी, दूसरे पद में संपूर्ण ब्रह्मांड माप लिया तथा तीसरी बार श्री विष्णु ने राजा बलि की प्रार्थना के अनुसार उनके सर पर पद रखकर उन्हें पाताल में भेज दिया । राजा बलि ने भगवान श्री विष्णु की भक्ति में अपना सर्वस्व अर्पण कर दिया । इस पर प्रसन्न होकर भगवान श्रीविष्णु ने राजा बलि के निकट रहना मान्य किया । तब से श्रीविष्णु क्षीरसागर में शयन करने लगे । वास्तव में चातुर्मास के इस काल में श्रीविष्णु शेष
शय्या पर योगनिद्रा का लाभ लेते हैं ।
🚩श्रीविष्णु-शयन के संदर्भ में वैज्ञानिक दृष्टिकोण चातुर्मास में जगत पालनकर्ता श्री विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं । ऐसे में किसी के मन में यह प्रश्न उभर सकता है कि इस काल में सृष्टि का कार्य कैसे होता होगा ? इसलिए इसे वैज्ञानिक दृष्टि से समझ लेना भी उपयुक्त होगा । श्री विष्णु का एक नाम है, हरि । हरि शब्द के अर्थ हैं, सूर्य, चंद्र, वायु इत्यादि । चातुर्मास में परमेश्वर की ये शक्तियां भी क्षीण होती हैं, इस बात को कोई अमान्य नहीं कर सकता । चातुर्मास में अति वर्षा के कारण हमें सूर्य, चंद्रके दर्शन नहीं होते । तथा वायु के क्षीण होने के उपरांत ही वर्षा होती है । यह क्रिया अन्य ऋतुओं में नहीं होती । इस दृष्टि से चातुर्मास सूर्य, चंद्र, वायु, अर्थात श्रीविष्णु का शयनकाल होता है ।
🚩चातुर्मास में किए गए दान, पुण्य, तप, व्रत इत्यादि अधिक फलदायी होते हैं,चातुर्मास में तीर्थक्षेत्र में पवित्र नदियों का स्नान करना,चातुर्मास में की जाने वाली तीर्थ यात्रा, दान, पुण्य, तप, व्रत इत्यादि श्री विष्णु के चरणों में अर्पित होते हैं । जो मनुष्य चातुर्मास में तीर्थ क्षेत्र में पवित्र नदियों का स्नान करता है, उसके अनेक पापों का नाश होता है । क्योंकि वर्षा का जल विभिन्न स्थानों से मिट्टी के माध्यम से प्राकृतिक शक्ति को अपने साथ बहाकर समुद्र की ओर ले जाता है । यहां चातुर्मास में श्री विष्णु का जल में शयन करने का अर्थ है, जल में उनके तेज एवं शक्ति का अंश विद्यमान होना । इस तेज युक्त जल से स्नान करना सर्व तीर्थ यात्राओं की तुलना में अधिक फलदायी है । इससे इस काल में व्रतों की अधिक संख्या का कारण स्पष्ट होता है । इसके अतिरिक्त इस काल में अधिकाधिक व्रतविधि करने के अन्य कारण भी हैं ।
🚩विविध रोगों का प्रतिकार करने के लिए स्वयं को सक्षम बनाना वर्षा ॠतु में हमारे एवं सूर्य के बीच मेघ का एक पट्टा बनता होता है । इसलिए सूर्य की किरणें अर्थात तेजतत्त्व तथा आकाशतत्त्व अन्य दिनों के समान पृथ्वी पर नहीं पहुंच पाते, जिसके कारण वातावरण में पृथ्वी एवं आपतत्त्व प्रबल होते हैं,विविध जंतु, रज-तम तथा काली शक्तिका विघटन नहीं हो पाता; इसलिए रोग फेलते हैं । आलस का अनुभव होता है । शिकागो मेडिकल स्कूल के स्त्री रोग-विशेषज्ञ,प्रोफेसर डॉ. डब्ल्यू.एस. कोगर द्वारा किए गए शोध में पाया गया कि जुलाई, अगस्त, सितंबर एवं अक्टूबर के 4 महीनों में, विशेषकर भारत में स्त्रियों को गर्भाशय संबंधी रोग होते हैं, बढते हैं । इसलिए इस काल में व्रत विधि, उपवास करना, सात्त्विक आहार तथा नामजप के कारण हमारा सत्त्वगुण बढता है । इससे हम शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक दृष्टि से इन रोगों का अर्थात रज-तम का प्रतिकार करने में सक्षम बनते हैं ।
🚩असुरों की प्रबलता अर्थात रज-तम अल्प करना धर्मशास्त्र के अनुसार आषाढ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक अर्थात देवताओं के निद्राकाल में असुर प्रबल होते हैं एवं वे मनुष्य को कष्ट पहुंचाते हैं । चौमासे में पृथ्वी पर प्रवाहित तरंगों में तमोगुण प्रबल तरंगों की मात्रा अधिक रहती है । उनका सामना कर पाने के लिए सात्त्विकता बढाना आवश्यक है । व्रतों के पालन से सात्त्विकता में वृद्धि होती है तथा रज-तम की मात्रा अल्प होती है । इसी कारण चातुर्मास में अधिकाधिक व्रत होते हैं । असुरों से अपना संरक्षण करने के लिए इस काल में प्रत्येक व्यक्ति को कोई न कोई व्रत अवश्य रखना चाहिए । मनुष्य स्वस्थ, निरोगी, दीर्घायु तथा अध्यात्म पथ पर अग्रेसर हो, ये दोनों हेतु साध्य करनेके लिए हमारे ऋषिमुनियों ने चातुर्मास में विविध व्रतों का विधान बताया है । इन ऋषिमुनियों तथा हिंदु धर्म की महानता के सामने हम नतमस्तक हैं ।
🚩 चातुर्मास की परिकल्पना भागवत में मुनिश्रेष्ठ नारदजी ने महर्षि व्यासजी को अपना चरित्र बताया । वे कहते हैं,
अहं पुरातीतभवेऽभवं मुने दास्यास्तु कस्याश्चन वेदवादिनाम् ।
निरूपितो बालक एव योगिनां शुश्रूषणे प्रावृषि निर्विविक्षताम् ।।
🚩अर्थ : हे मुनिवर, पिछले जन्म में मैं वेद विषयक विवाद करने वाले एक योगी की दासी का पुत्र था । जब मैं बालक ही था, तब ये योगी वर्षाकाल में एक स्थान पर चातुर्मास व्रत कर रहे थे । उस समय उनकी सेवा मुझे सौंपी गई थी । इसी प्रकार भागवत में नारद मुनि ने धर्मराज युधिष्ठिर को प्रवृत्त एवं निवृत्त कर्मों के बारे में बताते हुए चातुर्मास का उल्लेख किया है । इससे बोध मिलता है कि, चातुर्मास व्रत अनादि कालसे परंपरागत रूपमें चला आ रहा है ।
🚩श्रीविष्णु-शयन के संदर्भ में वैज्ञानिक दृष्टिकोण चातुर्मास में जगत पालनकर्ता श्री विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं । ऐसे में किसी के मन में यह प्रश्न उभर सकता है कि इस काल में सृष्टि का कार्य कैसे होता होगा ? इसलिए इसे वैज्ञानिक दृष्टि से समझ लेना भी उपयुक्त होगा । श्री विष्णु का एक नाम है, हरि । हरि शब्द के अर्थ हैं, सूर्य, चंद्र, वायु इत्यादि । चातुर्मास में परमेश्वर की ये शक्तियां भी क्षीण होती हैं, इस बात को कोई अमान्य नहीं कर सकता । चातुर्मास में अति वर्षा के कारण हमें सूर्य, चंद्रके दर्शन नहीं होते । तथा वायु के क्षीण होने के उपरांत ही वर्षा होती है । यह क्रिया अन्य ऋतुओं में नहीं होती । इस दृष्टि से चातुर्मास सूर्य, चंद्र, वायु, अर्थात श्रीविष्णु का शयनकाल होता है ।
🚩चातुर्मास में किए गए दान, पुण्य, तप, व्रत इत्यादि अधिक फलदायी होते हैं,चातुर्मास में तीर्थक्षेत्र में पवित्र नदियों का स्नान करना,चातुर्मास में की जाने वाली तीर्थ यात्रा, दान, पुण्य, तप, व्रत इत्यादि श्री विष्णु के चरणों में अर्पित होते हैं । जो मनुष्य चातुर्मास में तीर्थ क्षेत्र में पवित्र नदियों का स्नान करता है, उसके अनेक पापों का नाश होता है । क्योंकि वर्षा का जल विभिन्न स्थानों से मिट्टी के माध्यम से प्राकृतिक शक्ति को अपने साथ बहाकर समुद्र की ओर ले जाता है । यहां चातुर्मास में श्री विष्णु का जल में शयन करने का अर्थ है, जल में उनके तेज एवं शक्ति का अंश विद्यमान होना । इस तेज युक्त जल से स्नान करना सर्व तीर्थ यात्राओं की तुलना में अधिक फलदायी है । इससे इस काल में व्रतों की अधिक संख्या का कारण स्पष्ट होता है । इसके अतिरिक्त इस काल में अधिकाधिक व्रतविधि करने के अन्य कारण भी हैं ।
🚩विविध रोगों का प्रतिकार करने के लिए स्वयं को सक्षम बनाना वर्षा ॠतु में हमारे एवं सूर्य के बीच मेघ का एक पट्टा बनता होता है । इसलिए सूर्य की किरणें अर्थात तेजतत्त्व तथा आकाशतत्त्व अन्य दिनों के समान पृथ्वी पर नहीं पहुंच पाते, जिसके कारण वातावरण में पृथ्वी एवं आपतत्त्व प्रबल होते हैं,विविध जंतु, रज-तम तथा काली शक्तिका विघटन नहीं हो पाता; इसलिए रोग फेलते हैं । आलस का अनुभव होता है । शिकागो मेडिकल स्कूल के स्त्री रोग-विशेषज्ञ,प्रोफेसर डॉ. डब्ल्यू.एस. कोगर द्वारा किए गए शोध में पाया गया कि जुलाई, अगस्त, सितंबर एवं अक्टूबर के 4 महीनों में, विशेषकर भारत में स्त्रियों को गर्भाशय संबंधी रोग होते हैं, बढते हैं । इसलिए इस काल में व्रत विधि, उपवास करना, सात्त्विक आहार तथा नामजप के कारण हमारा सत्त्वगुण बढता है । इससे हम शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक दृष्टि से इन रोगों का अर्थात रज-तम का प्रतिकार करने में सक्षम बनते हैं ।
🚩असुरों की प्रबलता अर्थात रज-तम अल्प करना धर्मशास्त्र के अनुसार आषाढ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक अर्थात देवताओं के निद्राकाल में असुर प्रबल होते हैं एवं वे मनुष्य को कष्ट पहुंचाते हैं । चौमासे में पृथ्वी पर प्रवाहित तरंगों में तमोगुण प्रबल तरंगों की मात्रा अधिक रहती है । उनका सामना कर पाने के लिए सात्त्विकता बढाना आवश्यक है । व्रतों के पालन से सात्त्विकता में वृद्धि होती है तथा रज-तम की मात्रा अल्प होती है । इसी कारण चातुर्मास में अधिकाधिक व्रत होते हैं । असुरों से अपना संरक्षण करने के लिए इस काल में प्रत्येक व्यक्ति को कोई न कोई व्रत अवश्य रखना चाहिए । मनुष्य स्वस्थ, निरोगी, दीर्घायु तथा अध्यात्म पथ पर अग्रेसर हो, ये दोनों हेतु साध्य करनेके लिए हमारे ऋषिमुनियों ने चातुर्मास में विविध व्रतों का विधान बताया है । इन ऋषिमुनियों तथा हिंदु धर्म की महानता के सामने हम नतमस्तक हैं ।
🚩 चातुर्मास की परिकल्पना भागवत में मुनिश्रेष्ठ नारदजी ने महर्षि व्यासजी को अपना चरित्र बताया । वे कहते हैं,
अहं पुरातीतभवेऽभवं मुने दास्यास्तु कस्याश्चन वेदवादिनाम् ।
निरूपितो बालक एव योगिनां शुश्रूषणे प्रावृषि निर्विविक्षताम् ।।
🚩अर्थ : हे मुनिवर, पिछले जन्म में मैं वेद विषयक विवाद करने वाले एक योगी की दासी का पुत्र था । जब मैं बालक ही था, तब ये योगी वर्षाकाल में एक स्थान पर चातुर्मास व्रत कर रहे थे । उस समय उनकी सेवा मुझे सौंपी गई थी । इसी प्रकार भागवत में नारद मुनि ने धर्मराज युधिष्ठिर को प्रवृत्त एवं निवृत्त कर्मों के बारे में बताते हुए चातुर्मास का उल्लेख किया है । इससे बोध मिलता है कि, चातुर्मास व्रत अनादि कालसे परंपरागत रूपमें चला आ रहा है ।
🚩चातुर्मास से संबंधित व्रत सामान्य लोग चातुर्मास में कोई तो एक व्रत रखते ही हैं । उसके अंतर्गत भोजन नियम बनाते हैं, जैसे पर्णभोजन अर्थात पत्ते पर भोजन करना, एक समय भोजन करना, अयाचित अर्थात मांगे बिना जितना मिले उतना ही ग्रहण करना, मिश्रभोजन अर्थात सर्व पदार्थ एक साथ परोसकर, उसका कलेवा बनाकर अर्थात मिलाकर कर भोजन करना इत्यादि । अनेक स्त्रियां चातुर्मास में एक दिन भोजन एवं अगले दिन उपवास इस प्रकार का व्रत रखती हैं । कुछ स्त्रियां चातुर्मास में एक अथवा दो अनाजों पर ही निर्वाह करती हैं । उनमें से कुछ पंचामृत का त्याग करती हैं, तो कुछ एकभुक्त रहती हैं । इसके साथ ही चातुर्मास में कुछ अन्य व्रत भी रखे जाते हैं।
🚩भूमि पर कंबल बिछाकर सोना,ब्रह्मचर्य का पालन करना,नमक का त्याग करना,आदि
🚩इन 4 महीनो में पराया धन हड़प करना, परस्त्री से समागम करना, निंदा करना, ब्रह्मचर्य तोड़ना तो मानो हाथ में आया हुआ अमृत कलश ढोल दिया । निंदा न करें , ब्रह्मचर्य का पालन करें , परधन परस्त्री पर बुरी नज़र न करें ।
🚩ताम्बे के बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिये पानी नहीं पीना चाहिये ।
🚩चतुर्मास में काला और नीला वस्त्र पहनने से स्वास्थ्य हानि और पुण्य नाश होता है ।
🚩परनिंदा महा पापं शास्त्र वचन :- “परनिंदा महा पापं परनिंदा महा भयं परनिंदा महा दुखंतस्या पातकम न परम” ।
🚩ये स्कन्द पुराण का श्लोक है परनिंदा महा पाप है, परनिंदा महा भय है, परनिंदा महा दुःख है, तस्यापातकम न परम, उससे बड़ा कोई पाप नही । इस चतुर्मास में पक्का व्रत ले लो कि हम किसी की निंदा न करेंगे।
🚩चातुर्मास में वर्ज्य,त्याज्य........कंद, मूली, बैंगन, प्याज, लहसुन, इमली, मसूर, चवली अर्थात लोबिया, अचार, तरबूज अर्थात सत्दह, बहुबीज या निर्बीज फल, बेर, मांस इत्यादि पदार्थोंका सेवन नहीं करना चाहिए ।
🚩 खाट, पलंग अदि पर शयन नहीं करना चाहिए । केशवपन अर्थात केश काटना वर्जित है । विवाह एवं तत्सम अन्य कार्य भी वर्जित हैं ।
🚩ऐसे में यह प्रश्न अवश्य खडा होता है, कि चातुर्मास में किन पदार्थों का सेवन करना चाहिए ? चातुर्मास में हविष्यान्न अर्थात हवन के लिए उपयुक्त सात्त्विक अन्न, जैसे चावल, जौ, तिल, गेहूं, देशी गाय का दूध, दही, घी, नारियल, केला इत्यादि का सेवन बताया गया है । चातुर्मासमें वर्जित पदार्थ रज-तमोगुण युक्त होते हैं, तो सेवनके लिए ग्राह्य माने गए हविष्यान्न सत्त्वगुणप्रधान होते हैं ।
🚩चातुर्मासमें व्रत रखने के लाभ स्वरूप अनिष्ट शक्तियोंके आक्रमणकी तीव्रता घट जाना।वर्षाऋतुमें तेजतत्त्व रूपी सूर्यकी किरणें पृथ्वीपर अल्प मात्रामें आती हैं । इस कारण अनिष्ट शक्तियोंके आक्रमण भी अधिक मात्रामें होते हैं । चातुर्मास में किए जाने वाले व्रतों के कारण व्यक्ति के साथ साथ वायुमंडल की सात्त्विकता भी बढती है । इस सात्त्विकता के प्रभाव से अनिष्ट शक्तियों के आक्रमण की तीव्रता घट जाती है ।
🚩 इसी कारण हिंदुधर्म ने चातुर्मास व्रतोंकी विधि बनाई है ।
🚩सूर्यनाडी कार्यरत होकर पेशियोंकी प्रतिकारक्षमता बढना
🚩व्रतपालन से आपतत्त्व के बल पर तेजतत्त्व प्रवाही बनता है । इससे व्रती की सूर्यनाडी कार्यरत होकर उसकी पेशियों की प्रतिकार क्षमता बढती है ।
🚩 परिणामस्वरूप व्रती की स्थूल देह से संबंधित रोग, तथा सूक्ष्म अर्थात अनिष्ट शक्तियों के आक्रमणके कारण होने वाले कष्ट, इन दोनों से रक्षण होता है ।
🚩पाताल से प्रक्षेपित कष्टदायी तरंगों से रक्षण होना चातुर्मास में किए जाने वाले विविध व्रतों की सहायता से विविध देवताओं की उपासना की जाती है । इसके द्वारा उन देवताओं की तत्त्वतरंगों का आवाहन किया जाता है । ये तत्त्वतरंगें भूमि के पृष्ठभाग पर घनीभूत होती हैं ,परिणाम स्वरूप पाताल से प्रक्षेपित तेजतत्त्वरूपी कष्टदायी तरंगों से पृथ्वी पर रहनेवाले जीवोंका रक्षण होता है ।
🚩 देवताओंकी कृपा दृष्टि होना चातुर्मास में भूलोक में सूर्य किरणों से मिलने वाले तेज तत्त्व की मात्रा घटती है, जो व्रतों-के माध्यम से प्राप्त तेजतत्त्व से बढाई जाती है । यह तेजतत्त्व वायुमंडल में विद्यमान पृथ्वी एवं आप कणों की सहायता से व्यक्ति की देह में एकत्रित होता है, जिसके कारण साधारण व्यक्ति को इससे कष्ट नहीं होता।
🚩चातुर्मास के इन 4 महीनों में जिससे जितना हो उतना शक्तिनुसार जप,तप,उपवास,नियम ,ब्रह्मचर्य ,दान,पुण्य,आदि पुण्य कार्य करें।
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🚩भूमि पर कंबल बिछाकर सोना,ब्रह्मचर्य का पालन करना,नमक का त्याग करना,आदि
🚩इन 4 महीनो में पराया धन हड़प करना, परस्त्री से समागम करना, निंदा करना, ब्रह्मचर्य तोड़ना तो मानो हाथ में आया हुआ अमृत कलश ढोल दिया । निंदा न करें , ब्रह्मचर्य का पालन करें , परधन परस्त्री पर बुरी नज़र न करें ।
🚩ताम्बे के बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिये पानी नहीं पीना चाहिये ।
🚩चतुर्मास में काला और नीला वस्त्र पहनने से स्वास्थ्य हानि और पुण्य नाश होता है ।
🚩परनिंदा महा पापं शास्त्र वचन :- “परनिंदा महा पापं परनिंदा महा भयं परनिंदा महा दुखंतस्या पातकम न परम” ।
🚩ये स्कन्द पुराण का श्लोक है परनिंदा महा पाप है, परनिंदा महा भय है, परनिंदा महा दुःख है, तस्यापातकम न परम, उससे बड़ा कोई पाप नही । इस चतुर्मास में पक्का व्रत ले लो कि हम किसी की निंदा न करेंगे।
🚩चातुर्मास में वर्ज्य,त्याज्य........कंद, मूली, बैंगन, प्याज, लहसुन, इमली, मसूर, चवली अर्थात लोबिया, अचार, तरबूज अर्थात सत्दह, बहुबीज या निर्बीज फल, बेर, मांस इत्यादि पदार्थोंका सेवन नहीं करना चाहिए ।
🚩 खाट, पलंग अदि पर शयन नहीं करना चाहिए । केशवपन अर्थात केश काटना वर्जित है । विवाह एवं तत्सम अन्य कार्य भी वर्जित हैं ।
🚩ऐसे में यह प्रश्न अवश्य खडा होता है, कि चातुर्मास में किन पदार्थों का सेवन करना चाहिए ? चातुर्मास में हविष्यान्न अर्थात हवन के लिए उपयुक्त सात्त्विक अन्न, जैसे चावल, जौ, तिल, गेहूं, देशी गाय का दूध, दही, घी, नारियल, केला इत्यादि का सेवन बताया गया है । चातुर्मासमें वर्जित पदार्थ रज-तमोगुण युक्त होते हैं, तो सेवनके लिए ग्राह्य माने गए हविष्यान्न सत्त्वगुणप्रधान होते हैं ।
🚩चातुर्मासमें व्रत रखने के लाभ स्वरूप अनिष्ट शक्तियोंके आक्रमणकी तीव्रता घट जाना।वर्षाऋतुमें तेजतत्त्व रूपी सूर्यकी किरणें पृथ्वीपर अल्प मात्रामें आती हैं । इस कारण अनिष्ट शक्तियोंके आक्रमण भी अधिक मात्रामें होते हैं । चातुर्मास में किए जाने वाले व्रतों के कारण व्यक्ति के साथ साथ वायुमंडल की सात्त्विकता भी बढती है । इस सात्त्विकता के प्रभाव से अनिष्ट शक्तियों के आक्रमण की तीव्रता घट जाती है ।
🚩 इसी कारण हिंदुधर्म ने चातुर्मास व्रतोंकी विधि बनाई है ।
🚩सूर्यनाडी कार्यरत होकर पेशियोंकी प्रतिकारक्षमता बढना
🚩व्रतपालन से आपतत्त्व के बल पर तेजतत्त्व प्रवाही बनता है । इससे व्रती की सूर्यनाडी कार्यरत होकर उसकी पेशियों की प्रतिकार क्षमता बढती है ।
🚩 परिणामस्वरूप व्रती की स्थूल देह से संबंधित रोग, तथा सूक्ष्म अर्थात अनिष्ट शक्तियों के आक्रमणके कारण होने वाले कष्ट, इन दोनों से रक्षण होता है ।
🚩पाताल से प्रक्षेपित कष्टदायी तरंगों से रक्षण होना चातुर्मास में किए जाने वाले विविध व्रतों की सहायता से विविध देवताओं की उपासना की जाती है । इसके द्वारा उन देवताओं की तत्त्वतरंगों का आवाहन किया जाता है । ये तत्त्वतरंगें भूमि के पृष्ठभाग पर घनीभूत होती हैं ,परिणाम स्वरूप पाताल से प्रक्षेपित तेजतत्त्वरूपी कष्टदायी तरंगों से पृथ्वी पर रहनेवाले जीवोंका रक्षण होता है ।
🚩 देवताओंकी कृपा दृष्टि होना चातुर्मास में भूलोक में सूर्य किरणों से मिलने वाले तेज तत्त्व की मात्रा घटती है, जो व्रतों-के माध्यम से प्राप्त तेजतत्त्व से बढाई जाती है । यह तेजतत्त्व वायुमंडल में विद्यमान पृथ्वी एवं आप कणों की सहायता से व्यक्ति की देह में एकत्रित होता है, जिसके कारण साधारण व्यक्ति को इससे कष्ट नहीं होता।
🚩चातुर्मास के इन 4 महीनों में जिससे जितना हो उतना शक्तिनुसार जप,तप,उपवास,नियम ,ब्रह्मचर्य ,दान,पुण्य,आदि पुण्य कार्य करें।
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खेल खिला रहे हो शंकर को पर जब वो खेल खिलाएंगे तो बड़ा भारी पड़ेगा।
31 July 2022
http://azaadbharat.org
🚩ज्ञानवापी परिसर में मिले 'शिवलिंग' की कार्बन डेटिंग के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इंकार....
🚩इस मामले ने कई मोड़ देख लिए हैं,सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका के जरिए मांग की गई कि 'शिवलिंग' की कार्बन डेटिंग और जीपीआरएस सर्वे करवाया जाए,लेकिन याचिकाकर्ता को कोर्ट से लगा है झटका.....
🚩किसी को पता चला, ज्ञानवापी मंदिर में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने से मना कर दिया जस्टिस चंद्रचूड़ ने।
🚩मेरा ख्याल है ये खबर मीडिया में आई ही नहीं कि हिन्दू संगठनों की ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने की मांग जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ने ठुकरा दी।
🚩जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़,सूर्यकांत और पी एस नरसिम्हा की बेंच ने 21 जुलाई 2022 को हिन्दू संगठनों की मांग ठुकराते हुए कहा कि हम वाराणसी जिला जज के आर्डर 7 रूल 11 में मुस्लिम संगठनों की हिन्दू महिलाओं की मंदिर परिसर में पूजा करने की मांग के खिलाफ अर्जी पर फैसला होने के बाद ही कोई सुनवाई करेंगे।
🚩याद रहे सिविल जज रवि कुमार दिवाकर जब केस की सुनवाई कर रहे थे तो चंद्रचूड़ जी की बेंच ने केस जिला जज के पास भेज दिया।
🚩अब हिन्दू संगठनों को कहा है कि वो अपनी मांग जिला जज कोर्ट में रखें और उसके फैसले के बाद ही हम सुनवाई करेंगे।
🚩जिला जज के फैसले पर कैसे सीधे सुनवाई करेंगे। उसे हाई कोर्ट को सुनने को कहा जायेगा और शायद सिंगल जज बेंच पहले सुनेगी, फिर डबल बेंच और फिर सुप्रीम कोर्ट।
🚩जबकि कार्बन डेटिंग का फैसला करने में आपको कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए जब आप राज्य सरकारों को दरकिनार कर जुबैर की FIRs दिल्ली ट्रांसफर कर सकते हैं।
🚩बस मंशा होनी चाहिए। सिविल जज दिवाकर सही जा रहे थे,पर उनसे केस जिला जज को भेजना दिवाकर का अपमान करना था, ये कह कर कि सुनवाई किसी "परिपक़्व" जज से होनी चाहिए और इससे केस लटक भी गया क्योंकि जिला जज ने पहली ही सुनवाई सवा महीने के लिए टाल दी थी।
🚩जस्टिस चंद्रचूड़ को पता है कि कार्बन डेटिंग शिवलिंग कितना पुराना है, उसका पुख्ता सबूत दे सकती है और इससे हिन्दुओं को अधिकार मिलना आसान हो जायेगा, वही मंशा नहीं है।
🚩ये कैसी विडम्बना है कि भगवान राम को अयोध्या में जन्मस्थान के सबूत देने पड़े अदालत में और फिर भी 70 वर्ष लग गए न्याय में। आज जगत चेतना आदि अनंता भगवान् शंकर को भी सबूत देने पड़ रहे हैं अपने अस्तित्व के इन जजों के सामने।
🚩पर याद रखना अगर शिव-शंकर की तीसरी आँख खुल गई तो समझो अन्याय करने वालो का महा-विनाश निश्चित होगा।
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31 July 2022
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🚩ज्ञानवापी परिसर में मिले 'शिवलिंग' की कार्बन डेटिंग के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इंकार....
🚩इस मामले ने कई मोड़ देख लिए हैं,सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका के जरिए मांग की गई कि 'शिवलिंग' की कार्बन डेटिंग और जीपीआरएस सर्वे करवाया जाए,लेकिन याचिकाकर्ता को कोर्ट से लगा है झटका.....
🚩किसी को पता चला, ज्ञानवापी मंदिर में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने से मना कर दिया जस्टिस चंद्रचूड़ ने।
🚩मेरा ख्याल है ये खबर मीडिया में आई ही नहीं कि हिन्दू संगठनों की ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने की मांग जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ने ठुकरा दी।
🚩जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़,सूर्यकांत और पी एस नरसिम्हा की बेंच ने 21 जुलाई 2022 को हिन्दू संगठनों की मांग ठुकराते हुए कहा कि हम वाराणसी जिला जज के आर्डर 7 रूल 11 में मुस्लिम संगठनों की हिन्दू महिलाओं की मंदिर परिसर में पूजा करने की मांग के खिलाफ अर्जी पर फैसला होने के बाद ही कोई सुनवाई करेंगे।
🚩याद रहे सिविल जज रवि कुमार दिवाकर जब केस की सुनवाई कर रहे थे तो चंद्रचूड़ जी की बेंच ने केस जिला जज के पास भेज दिया।
🚩अब हिन्दू संगठनों को कहा है कि वो अपनी मांग जिला जज कोर्ट में रखें और उसके फैसले के बाद ही हम सुनवाई करेंगे।
🚩जिला जज के फैसले पर कैसे सीधे सुनवाई करेंगे। उसे हाई कोर्ट को सुनने को कहा जायेगा और शायद सिंगल जज बेंच पहले सुनेगी, फिर डबल बेंच और फिर सुप्रीम कोर्ट।
🚩जबकि कार्बन डेटिंग का फैसला करने में आपको कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए जब आप राज्य सरकारों को दरकिनार कर जुबैर की FIRs दिल्ली ट्रांसफर कर सकते हैं।
🚩बस मंशा होनी चाहिए। सिविल जज दिवाकर सही जा रहे थे,पर उनसे केस जिला जज को भेजना दिवाकर का अपमान करना था, ये कह कर कि सुनवाई किसी "परिपक़्व" जज से होनी चाहिए और इससे केस लटक भी गया क्योंकि जिला जज ने पहली ही सुनवाई सवा महीने के लिए टाल दी थी।
🚩जस्टिस चंद्रचूड़ को पता है कि कार्बन डेटिंग शिवलिंग कितना पुराना है, उसका पुख्ता सबूत दे सकती है और इससे हिन्दुओं को अधिकार मिलना आसान हो जायेगा, वही मंशा नहीं है।
🚩ये कैसी विडम्बना है कि भगवान राम को अयोध्या में जन्मस्थान के सबूत देने पड़े अदालत में और फिर भी 70 वर्ष लग गए न्याय में। आज जगत चेतना आदि अनंता भगवान् शंकर को भी सबूत देने पड़ रहे हैं अपने अस्तित्व के इन जजों के सामने।
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15 अगस्त कैसी स्वतंत्रता? स्वतंत्रता अपहरण दिवस या स्वतंत्रता दिवस ? - महामंडलेश्वर डॉ अन्नपूर्णा भारती
15 August 2022
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🚩भारत सरकार सन 2022 में 75 वे स्वतंत्रता दिवस को अमृत महोत्सव के रूप में मना रही है । सत्य, न्याय, मानवता के आधार पर यदि शासन तंत्र कार्य कर रहा है,तो उसे स्वतंत्रता कहा जा सकता है। यह लोक व्यवहार की स्वतंत्रता का न्यूनतम मापदंड है, चाहे लोकतंत्र हो या राजतन्त्र या कोई अन्य तंत्र। इसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी स्वीकार करना पड़ेगा अन्यथा वह दानवाधिकार आयोग कहलाएगा ।
🚩आज भारत में छद्म युद्ध के द्वारा हिंदुओं को समाप्त किया जा रहा है। गौ मांस खाने की खुली घोषणा करने वाले आज भी खुले घूम रहे हैं। गौ रक्षकों की आए दिन हत्याएं हो रही है,गोरक्षकों को जेल में डाला जा रहा है। शहर गांव के मुख्य चौराहे चौक गली गली में शराब की दुकानें खोल दी गई है। क्रिश्चियन अंग्रेजों ने स्कूलों में गीता पढ़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था, जो आज भी लागू है । धर्मांतरण के विरोध मे कार्य करने वाले संतो को झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल में डाला जा रहा है। इसकी भरपाई कौन करेगा ?
🚩आज भी भारत का शासन तंत्र धर्मांतरण करने वाली शक्तियों के प्रभाव में कार्य करता है । नेता असली मुद्दे छुपाकर नए नए मुद्दे बनाकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। हिंदू मुस्लिम मुद्दे बनाए जा रहे हैं । अलगाववादी जातिवादी मुद्दे पैदा किए जा रहे हैं। वोट बैंक के लिए हिंदुओं की जेब काटी जा रही है । छद्म धर्मनिरपेक्षता के द्वारा छद्म युद्ध के द्वारा सनातन धर्म हिंदू जनता को समाप्त किया जा रहा है। भारत के 8 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हो चुका है,वहाँ आज भी हिन्दू भयंकर अन्याय अत्याचार सहन कर रहा है ।
🚩अखाड़ा के दो निर्दोष साधुओं की पालघर में पुलिस के सामने पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, वहां भगवा वस्त्र धारियों को देखते ही क्रिस्चन बाहुल आदिवासी जनता हमला कर देती है। धर्मांतरण रोकने वाले उड़ीसा के स्वामी लक्ष्मणानंद के आश्रम में घुस कर उनकी और उनके छात्र छात्राओं की निर्मम हत्या कर दी गई। शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती 9 वर्ष बाद निर्दोष साबित हुए। बैंगलोर के स्वामी नित्यानंद के चरित्र हनन की सीडी फर्जी साबित हुई। वर्तमान सरकार से जान बचाकर उन्हें भारत से भागना पड़ा अलग हिंदू राष्ट्र स्थापित करना पड़ा। जबकि वो अखाड़ा के बड़े साधु संत है। दांती महाराज पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाया गया।
🚩संत आशाराम जी बापू पर चारित्रिक हनन का आरोप लगाने वाली लड़की की मेडिकल रिपोर्ट में लड़की का कौमार्य सुरक्षित पाया गया । बलात्कार हुआ ही नहीं है, फिर भी निर्दोष बापूजी को आजीवन कारावास। बीमार होने पर भी जमानत नहीं। संविधान और न्याय की समानता के अधिकारों का खुला उल्लंघन किया गया। संत आशाराम जी बापू धर्मांतरण के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बने हुए थे इसलिए राजनीतिक षड्यंत्र करके उन्हें फंसाया गया।
🚩15 अगस्त 1947 को अल्पसंख्यकों को बढ़ावा देकर क्रिश्चन अंग्रेजों ने भारत के टुकड़े किए। लाखों हिंदुओं की हत्या की गई लाखों हिंदू स्त्रियों का बलात्कार किया गया। अमानवीय अत्याचार किए गए, जो इतिहास में पहले कभी नहीं हुए। कायरों द्वारा कायरता के कीर्तिमान स्थापित किए गए। उससे अधिक दयनीय भयावह स्थिति में आज हिंदू जा चुका है।
🚩 आज भी क्रिश्चियन मुस्लिम औरंगजेबी जजिया टैक्स हिंदुओं से वसूला जा रहा है। संविधान का खुला उल्लंघन करके सन 2006 में धर्म के आधार पर अल्पसंख्याक मंत्रालय बना दिया गया । सैकड़ों योजनाओं के बहाने हिंदुओं की जेब काटकर अल्पसंख्यकों के नाम पर गैर हिंदुओं को वह सुविधाएं दी जा रही है, जो पूरी दुनिया में कहीं नहीं दी गई है । धार्मिक भेदभाव करके आरक्षण ,अनुदान,छात्र वृत्ति, बैंक ऋण, छूट, सुविधाएं दी जा रही है। इससे बढ़कर बाबासाहेब अंबेडकर जी का अपमान नहीं किया जा सकता है।
🚩 इस अन्याय अत्याचार के कारण करोड़ों हिंदू परिवार आर्थिक संकट से ग्रस्त है, लाखों हिंदू परिवार आत्महत्या कर रहे हैं। सन 2007 में हिन्दू संगठनों के एक अनुमान के अनुसार इस अन्याय अत्याचार के कारण प्रतिदिन लगभग 2700 हिंदू लड़कियां गैर हिंदुओं का शिकार बन रही थी, उनके पूरे परिवार का जीवन नर्क बन गया है। यह समस्या बढ़ती जा रही है। इनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं है।
🚩 दोषी राजनेताओं को नीलाम करके उनकी संपत्ति जप्त करके उनको बीच चौक में फांसी पर लटका कर पीड़ित हिंदुओं को हर्जाना देना चाहिए। रामराज्य लाने वाले राष्ट्रवादी नेता साढ़े 7 वर्ष से सत्ता में है जो अल्पसंख्यक मंत्रालय को बढ़ावा दे रहे हैं , बंद करना तो दूर, दोषी राजनेताओं को दंडित करना तो दूर, कानून बनाना तो दूर , आयोग बनाना तो दूर । जो बहुसंख्यक है उनके लिए अल्पसंख्यक आयोग बन सकता है, अल्पसंख्यक मंत्रालय बन सकता है , काला
15 August 2022
http://azaadbharat.org
🚩भारत सरकार सन 2022 में 75 वे स्वतंत्रता दिवस को अमृत महोत्सव के रूप में मना रही है । सत्य, न्याय, मानवता के आधार पर यदि शासन तंत्र कार्य कर रहा है,तो उसे स्वतंत्रता कहा जा सकता है। यह लोक व्यवहार की स्वतंत्रता का न्यूनतम मापदंड है, चाहे लोकतंत्र हो या राजतन्त्र या कोई अन्य तंत्र। इसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी स्वीकार करना पड़ेगा अन्यथा वह दानवाधिकार आयोग कहलाएगा ।
🚩आज भारत में छद्म युद्ध के द्वारा हिंदुओं को समाप्त किया जा रहा है। गौ मांस खाने की खुली घोषणा करने वाले आज भी खुले घूम रहे हैं। गौ रक्षकों की आए दिन हत्याएं हो रही है,गोरक्षकों को जेल में डाला जा रहा है। शहर गांव के मुख्य चौराहे चौक गली गली में शराब की दुकानें खोल दी गई है। क्रिश्चियन अंग्रेजों ने स्कूलों में गीता पढ़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था, जो आज भी लागू है । धर्मांतरण के विरोध मे कार्य करने वाले संतो को झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल में डाला जा रहा है। इसकी भरपाई कौन करेगा ?
🚩आज भी भारत का शासन तंत्र धर्मांतरण करने वाली शक्तियों के प्रभाव में कार्य करता है । नेता असली मुद्दे छुपाकर नए नए मुद्दे बनाकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। हिंदू मुस्लिम मुद्दे बनाए जा रहे हैं । अलगाववादी जातिवादी मुद्दे पैदा किए जा रहे हैं। वोट बैंक के लिए हिंदुओं की जेब काटी जा रही है । छद्म धर्मनिरपेक्षता के द्वारा छद्म युद्ध के द्वारा सनातन धर्म हिंदू जनता को समाप्त किया जा रहा है। भारत के 8 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हो चुका है,वहाँ आज भी हिन्दू भयंकर अन्याय अत्याचार सहन कर रहा है ।
🚩अखाड़ा के दो निर्दोष साधुओं की पालघर में पुलिस के सामने पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, वहां भगवा वस्त्र धारियों को देखते ही क्रिस्चन बाहुल आदिवासी जनता हमला कर देती है। धर्मांतरण रोकने वाले उड़ीसा के स्वामी लक्ष्मणानंद के आश्रम में घुस कर उनकी और उनके छात्र छात्राओं की निर्मम हत्या कर दी गई। शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती 9 वर्ष बाद निर्दोष साबित हुए। बैंगलोर के स्वामी नित्यानंद के चरित्र हनन की सीडी फर्जी साबित हुई। वर्तमान सरकार से जान बचाकर उन्हें भारत से भागना पड़ा अलग हिंदू राष्ट्र स्थापित करना पड़ा। जबकि वो अखाड़ा के बड़े साधु संत है। दांती महाराज पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाया गया।
🚩संत आशाराम जी बापू पर चारित्रिक हनन का आरोप लगाने वाली लड़की की मेडिकल रिपोर्ट में लड़की का कौमार्य सुरक्षित पाया गया । बलात्कार हुआ ही नहीं है, फिर भी निर्दोष बापूजी को आजीवन कारावास। बीमार होने पर भी जमानत नहीं। संविधान और न्याय की समानता के अधिकारों का खुला उल्लंघन किया गया। संत आशाराम जी बापू धर्मांतरण के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बने हुए थे इसलिए राजनीतिक षड्यंत्र करके उन्हें फंसाया गया।
🚩15 अगस्त 1947 को अल्पसंख्यकों को बढ़ावा देकर क्रिश्चन अंग्रेजों ने भारत के टुकड़े किए। लाखों हिंदुओं की हत्या की गई लाखों हिंदू स्त्रियों का बलात्कार किया गया। अमानवीय अत्याचार किए गए, जो इतिहास में पहले कभी नहीं हुए। कायरों द्वारा कायरता के कीर्तिमान स्थापित किए गए। उससे अधिक दयनीय भयावह स्थिति में आज हिंदू जा चुका है।
🚩 आज भी क्रिश्चियन मुस्लिम औरंगजेबी जजिया टैक्स हिंदुओं से वसूला जा रहा है। संविधान का खुला उल्लंघन करके सन 2006 में धर्म के आधार पर अल्पसंख्याक मंत्रालय बना दिया गया । सैकड़ों योजनाओं के बहाने हिंदुओं की जेब काटकर अल्पसंख्यकों के नाम पर गैर हिंदुओं को वह सुविधाएं दी जा रही है, जो पूरी दुनिया में कहीं नहीं दी गई है । धार्मिक भेदभाव करके आरक्षण ,अनुदान,छात्र वृत्ति, बैंक ऋण, छूट, सुविधाएं दी जा रही है। इससे बढ़कर बाबासाहेब अंबेडकर जी का अपमान नहीं किया जा सकता है।
🚩 इस अन्याय अत्याचार के कारण करोड़ों हिंदू परिवार आर्थिक संकट से ग्रस्त है, लाखों हिंदू परिवार आत्महत्या कर रहे हैं। सन 2007 में हिन्दू संगठनों के एक अनुमान के अनुसार इस अन्याय अत्याचार के कारण प्रतिदिन लगभग 2700 हिंदू लड़कियां गैर हिंदुओं का शिकार बन रही थी, उनके पूरे परिवार का जीवन नर्क बन गया है। यह समस्या बढ़ती जा रही है। इनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं है।
🚩 दोषी राजनेताओं को नीलाम करके उनकी संपत्ति जप्त करके उनको बीच चौक में फांसी पर लटका कर पीड़ित हिंदुओं को हर्जाना देना चाहिए। रामराज्य लाने वाले राष्ट्रवादी नेता साढ़े 7 वर्ष से सत्ता में है जो अल्पसंख्यक मंत्रालय को बढ़ावा दे रहे हैं , बंद करना तो दूर, दोषी राजनेताओं को दंडित करना तो दूर, कानून बनाना तो दूर , आयोग बनाना तो दूर । जो बहुसंख्यक है उनके लिए अल्पसंख्यक आयोग बन सकता है, अल्पसंख्यक मंत्रालय बन सकता है , काला