ओजस्वी भारत
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राष्ट्र एवं भारतीय संस्कृति पर हो रहे आघातों पर भारतीयों की आवाज बुलंद करने का अचूक माध्यम !!
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वैज्ञानिक : पिज्जा, बर्गर बीमारियां बढ़ाता है, भारतीय भोजन बीमारियां मिटाता है।

8 July 2022
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🚩जर्मनी के वैज्ञानिकों ने लंबी शोध के बाद निष्कर्ष निकाला कि विदेशी फास्टफूड बर्गर, पिज़ा आदि बीमारियों को बुलावा लाता है जबकि भारतीय भोजन दाल-चावल, रोटी,मूंग आदि बीमारियों को मिटाने का काम करता है।

🚩भारतीय लोग अपने आहार का महत्व नहीं समझकर विदेशी लोग का अंधानुकरण करके स्वाद के लिए पिज़ा, बर्गर, चिप्स आदि खाने लगे हैं जिसके कारण आज लगभग हर व्यक्ति को कुछ न कुछ बीमारी पकड़ लेती है फिर डॉक्टरों के पास चक्कर काटता रहता है पर बीमारी ठीक नहीं हो पाती है, अब हमें अपने भोजन का महत्व समझकर भोजन करना चाहिए और बीमारियों को बुलावा देने वाले फास्टफूड आदि का त्याग करना चाहिए।

🚩जर्मनी के वैज्ञानिकों ने बीमारी पर शोध किया:

🚩जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑफ़ L .beck के हालिया अध्ययन में कहा गया है कि भारतीय आहार खराब DNA के कारण होने वाली बीमारी को मार सकता है। शोध में यह भी पाया गया कि DNA, न केवल DNA, बीमारियों का सबसे महत्वपूर्ण कारण है, बल्कि आहार भी सबसे महत्वपूर्ण है जो बीमारी का कारण बन सकता है और इस पर एक स्पंज डाल सकता है

🚩विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रॉल्फ लुडविक के नेतृत्व में तीन वैज्ञानिकों द्वारा हाल ही में किए गए शोध प्रकाशित किए गए थे। तीन शोधकर्ताओं में डॉ. आर्टेम वोरोवैव, इज़राइल के डॉ. तान्या शेजीन और डॉ यास्का गुप्ता शामिल हैं। 2 वर्षों तक चूहों में किए गए शोध से पता चलता है कि पश्चिमी देश में उच्च कैलोरी आहार बीमारी को बढ़ाते हैं। जबकि भारत का कम कैलोरी वाला आहार बीमारियों से बचाता है।

🚩फास्ट फूड, जैसे पिज्जा, बर्गर, आनुवांशिक बीमारियों को बढ़ाता है ।

🚩डॉ. गुप्ता ने जर्मनी से भास्कर को बताया कि अब तक सभी आनुवंशिक बीमारियां केवल डीएनए में दिखाई देती थीं। इस शोध में इसे आहार पर ध्यान केंद्रित करके मापा गया है।

🚩शोधकर्ताओं ने ल्यूपस नामक बीमारी से पीड़ित चूहों के एक समूह पर प्रयोग किया। ल्यूपस बीमारी सीधे डीएनए से संबंधित है। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कम करता है और विभिन्न अंगों और जोड़ों, गुर्दे, हृदय, फेफड़े, मस्तिष्क और रक्त कोशिकाओं को नष्ट करता है।

🚩 डॉ. यास्का गुप्ता ने कहा कि इस शोध के परिणामों से पता चलता है कि पश्चिमी देशों में पिज्जा, बर्गर जैसे फास्ट फूड से भारत के शाकाहारी भोजन -रोटी, चावल,मूंग, दाल, सब्जियां, विशेष रूप से जड़ी-बूटियों को बढ़ाने में मदद मिलती है - शरीर को इन बीमारियों से बचाता है। है।

🚩कौन से फास्ट से फूड क्या नुकसान होता है?

🚩पेस्ट्री

🚩पेस्ट्री में अधिक मात्रा में शुगर, फेट और कैलोरी होती है। पेस्ट्री खाने की आदत आपका मोटापा बढ़ा सकती है। इसलिए थोड़ा ध्यान रखें क्योंकि पेस्ट्री शरीर को काफी नुकसान  देती है।

🚩पिज्जा

🚩पिज्जा की लत से आपको दिल संबंधी बीमारी हो सकती है। इसमें कोलेस्ट्रोल के कारण आपकी आर्ट्रीज बंद हो सकती हैं और इससे हार्ट अटैक भी आ सकता है।

🚩पाइज

🚩पाइज खाने में स्वादिष्ट है लेकिन एक अध्ययन में पता चला है कि यह शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह है। पाइज खाने से आगे चलकर शुगर लेवल बढ़ने और मधुमेह की समस्या आती है।

🚩बर्गर

🚩बर्गर से वजन तो बढ़ता ही है साथ ही दिल की बीमारी भी हो सकती है। यह डाइटरी कोलेस्ट्रोल को तेजी से बढ़ाता है और बर्गर से हाइ ब्लड प्रेशर की भी परेशानी है।

🚩सैंडविच

🚩सैंडविच खाने की आदत आपका मोटापा बढ़ा देगी।

🚩चिप्स

🚩चिप्स खाने से शरीर को नुकसान होता है। चिप्स में कैलोरी ज्यादा होती है जिसके कारण फेट बढ़ता है। नियमित चिप्स खाने वालों को वजन बढ़ने की समस्या हो जाती है। चिप्स खाने से कोलेस्ट्रोल भी बढ़ता है। सोडियम ज्यादा मात्रा में होने के कारण हाई ब्लड प्रेशर भी हो जाता है।

🚩सॉफ्ट ड्रिंक्स

🚩सॉफ्ट ड्रिंक्स भी लोग काफी पीते हैं और कई लोगों ने तो रोजाना सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने की आदक डाल रखी है। मगर इससे समस्या भी उतनी ही है। सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने वालों को दांतों में सड़न बहुत तेजी से हो सकती है। सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने से मोटापा और छाती में जलन की परेशानी भी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती है।

🚩अब आपने देखा कि फास्टफूड शरीर को कितना नुकसान पहुँचता है अतः इससे बचने के लिए हमारा भारतीय भोजन करें। यह ध्यान रखें कि हमारा पेट गटर नहीं है इसलिए कोई भी बीमारी करे ऐसा भोजन नहीं करे।

🚩भारतीय लोग अपनी संस्कृति की महिमा खुद नहीं समझते, जबतक विदेश के कोई वैज्ञानिक नहीं बोल दें जबकि आज के वैज्ञानिक जो शोध कर रहे हैं वे शोध हमारे ऋषि-मुनि लाखों साल पहले बता चुके हैं पर भारतीय उनका आदर करे तब न, जब भारतीय लोग खुद की संस्कृति का आदर करने लगेंगे तब दुनिया भी भारतीय संस्कृति अपनाकर अपने को धन्य मानेंगी।

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आखिर हिन्दू धर्म का अपमान क्यों और कब तक ?

9 July 2022
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🚩हिन्दू घृणा से ग्रसित फिल्ममेकर लीना मणिमेकलई (Leena Manimekalai) की हरकतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। माँ काली को सिगरेट पीते दिखाने के बाद मचे बवाल पर माफी माँगने की बजाय लीना ने भगवान शिव और माता पार्वती के धूम्रपान करने वाली तस्वीरों को पोस्ट किया है। इस पर टीवी जगत के भगवान राम (एक्टर अरुण गोविल) ने इसे हिन्दू धर्म का घोर अपमान करार दिया है।

🚩अरुण गोविल ने लीना मणिमेकलई की हिन्दू आस्था पर कुठाराघात करने की पोस्ट की आलोचना की। उन्होंने ट्वीट किया, “माँ काली का अपमान हिन्दू धर्म का घोर अपमान है। करोड़ों हिन्दुओं की आस्था पर सीधा प्रहार है। फिल्मों और विज्ञापनों में हिन्दू देवी देवताओं का अपमान प्रचलन बन गया है। बार-बार हिन्दू धर्म का अपमान आखिर क्यों और कब तक? ऐसे जघन्य अपराध तत्काल बंद होने चाहिए।”

🚩इसी क्रम में अभिनेता अनुपम खेर ने भी माँ काली के अपमान को लेकर बयान दिया। उन्होंने शिमला का एक किस्सा शेयर किया, “शिमला में माँ काली का एक बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है, कालीबाड़ी। बचपन में कई बार जाता था। बूँदी के प्रसाद और मीठे चरणामृत के लिए। मंदिर के बाहर एक साधु/फक़ीर टाइप बार बार दोहराता था…’जय माँ कलकत्ते वाली…तेरा श्राप ना जाए खाली..’ आजकल उस साधु और मंदिर की बहुत याद आ रही है!”

🚩भगवान शिव और माता पार्वती की धूम्रपान करती तस्वीरों को पोस्ट करने को लेकर फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने लीना मणिमेकलई को मानसिक बीमार करार दिया है। उन्होंने कहा, “अब ये साबित हो गया है कि तुम्हें मेंटल अस्पताल में भर्ती होने से पहले तत्काल इलाज की जरूरत है। कृपया जल्द से जल्द किसी मनोचिकित्सक से सलाह लें।”

🚩गौरतलब है कि लीना ने बीते 2 जुलाई को ‘काली’ का पोस्टर ट्विटर पर रिलीज किया था। इसमें ‘काली’ बनी एक्ट्रेस को सिगरेट पीते दिखाया गया था। साथ ही एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में LGBT का झंडा था। इस पर विवाद होने के बाद लीना ने माफी माँगने से इनकार कर दिया था।

🚩वही इस मामले में माफी माँगने की बजाय फिल्ममेकर ने एक नया ट्वीट किया जिसमें शिव-पार्वती बने कलाकारों को धूम्रपान करते दिखाया गया है।

🚩हिन्दू जागरूक हो रहा है...

🚩लीना मणिमेकलाई को जो नहीं भी जानते थे वह भी इनसे परिचित हो गए। लेकिन इन्हें पता चल गया है कि अब यह भारत पहले वाला नहीं है, बदल चुका है।

🚩इनकी डॉक्यूमेंट्री काली का आज टोरंटो विश्वविद्यालय में प्रदर्शन नहीं हो सका।

🚩भारतीय उच्चायोग ने कनाडा सरकार से अपना विरोध दर्ज कराया और सारी तैयारी धरी की धरी रह गई।

🚩आगे का नहीं मालूम लेकिन भारत का विरोध इतना तगड़ा है कि आसानी से वहां भी प्रदर्शन कराना संभव नहीं होगा। भारत में तो खैर अब शायद ही कोई इस डॉक्यूमेंट्री को दिखाने का साहस करे।

🚩जो करेगा उसे हिंदू समाज के कोप का शिकार होना पड़ेगा। या तो फिल्म चलने नहीं दी जाएगी या कहीं चली भी तो दर्शक नहीं मिलेंगे।

🚩लीना माणिमेकलई की समस्या का अंत यही नहीं होने वाला। अलग-अलग राज्यों में उनके विरुद्ध केस दर्ज हो गए हैं और उन्हें उनका सामना इसलिए करना पड़ेगा क्योंकि आज भी उनके पास भारतीय पासपोर्ट ही है।

🚩दूसरे, ऐसे स्वयं को लिबरल ,वामपंथी, प्रगतिशील बताने वाले फिल्म फिल्म निर्माताओं के सामने भी यह प्रश्न खड़ा हो गया है कि आगे कैसी फिल्में बनाई जाए।

🚩सबको अंदाजा हो गया है कि हमने पहले की तरह हिंदू धर्म , संस्कृति, देवी-देवताओं ,महापुरुषों, धार्मिक प्रतीकों , धार्मिक विधाओं आदि को अपमानित या लांछित किया या फिर उसका उपहास उड़ाया तो हमारे लिए कठिनाइयां बढ़ जाएंगी।

🚩एक फिल्म निर्माता के रूप में हमारा अस्तित्व संकट में आ जाएगा। इसलिए आगे से ऐसे निर्माता भी इस तरह की फिल्में बनाने से बचेंगे।

🚩एक समय था जब हिंदू समाज अपने देवी-देवताओं, महापुरुषों पर त्योहारों, रीति-रिवाजों, परंपराओं, धार्मिक प्रतीक चिन्हों आदि के अपमान का उपहास उड़ाए जाने पर संवेदनशील नहीं था।

🚩अब वह स्थिति बदली है तो इसका असर होना निश्चित है। आने वाले समय में धीरे धीरे ऐसी फिल्में आएंगी जो सच को सच दिखाएंगी और उसके लिए उन्हें रिसर्च करना पड़ेगा।

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चतुर्मास प्रारम्भ 10 जुलाई 2022 से लेकर 04 नवम्बर 2022 तक

11 July 2022
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🚩चतुर्मास का क्या महत्व है, इसमे क्या करे क्या नही करें?

🚩स्वास्थ्य बनाए रखने, साधना करने तथा वातावरण को सात्त्विक बनाए रखने हेतु हिन्दू धर्म शास्त्र में बताए गए नियमों का पालन सर्वथा उचित है । मानव जीवन से संबंधित इतना गहन अध्ययन केवल हिन्दू धर्म में ही किया गया है । यही इसकी महानता है ।

🚩चातुर्मास को उपासना एवं साधना हेतु पुण्यकारक एवं फलदायी काल माना जाता है । आषाढ शुक्ल एकादशी 10 जुलाई 2022 से कार्तिक शुक्ल एकादशी 4 नवम्बर 2022 तक अर्थात आषाढ पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक 4 महीने के काल को चातुर्मास कहते हैं । यह एक महा पुण्य वाला पर्वकाल है ।

🚩ऐसी मान्यता है कि चातुर्मास का काल देवताओं के शयन का काल है । इसलिए चातुर्मास के आरंभ में जो एकादशी आती है, उसे देवशयनी एकादशी कहते हैं तथा चातुर्मास के समापन पर जो एकादशी आती है, उसे देवोत्थानी अथवा प्रबोधिनी ,देवउठनी एकादशी कहते हैं । परमार्थ के लिए पोषक बातों की विधियां और सांसारिक जीवन के लिए हानिकारक विषयों का निषेध, यह चातुर्मास की विशेषता है ।

🚩चातुर्मास के काल में अधिकाधिक व्रतविधि होने का कारण चातुर्मास का काल, व्रतविधियों का काल भी जाना जाता है । चातुर्मास के काल में सूर्य की किरणें तथा खुली हवा अन्य दिनों के समान पृथ्वी पर नहीं पहुंच पाती । विविध जंतु तथा कष्टदायी तरंगों की मात्रा बढ कर रोग फैलते हैं । आलस्य का अनुभव होता है ।

🚩आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखें, तो चातुर्मास के काल में पृथ्वी के वातावरण में तमोगुण की प्रबलता बढ जाती है । ऐसे में हमारी सात्त्विकता बढाना आवश्यक होता है । चातुर्मास में किए जाने वाले विविध व्रतों की सहायता से विविध देवताओं की उपासना की जाती है और उनका आवाहन किया जाता है ।

🚩 व्रतविधि के कारण हमारा सत्त्वगुण बढता है और हम सर्व स्तरों पर सक्षम बनते हैं । प्रबल तमोगुणी वातावरण में सात्त्विकता बढाने हेतु दिए गए व्रत विधि हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों की देन है ।

🚩यह एक पर्वकाल है, चातुर्मास आनंदप्राप्ति अर्थात ईश्वरप्राप्ति, यह मनुष्य जीवन का एकमात्र उद्देश्य है । अतः मनुष्य के लिए निरंतर ईश्वर का सूक्ष्म-सान्निध्य अत्यावश्यक होता है । ईश्वर से सदैव हमारा संधान बना रहे, इसलिए हमारे ऋषि मुनियों ने विविध माध्यम उपलब्ध करवाए हैं । इनके अंतर्गत कालानुसार उपासना भी बताई गई है । विशिष्ट काल में विशिष्ट उपासना करने से उपासक को उस काल से संबंधित देवता तत्त्वों का अत्यधिक लाभ मिलता है । देवता तत्त्वों के चैतन्य से प्राप्त अंतःप्रेरणा से मनुष्य अध्यात्म के पथ पर चलकर आगे ईश्वर से एक रूप हो जाता है ।

🚩चातुर्मास देवताओं का शयनकाल है,मनुष्य का 1 वर्ष देवताओं की 1 अहोरात्र है । रात्रि काल सामान्यतः 12 घंटे का माना जाता है , तो 1 पूर्ण दिन एवं 1 पूर्ण रात्रि मिलाकर अहोरात्र होती है । मकर संक्रांति से कर्क संक्रांति तक उत्तरायण होता है एवं कर्क संक्रांति से मकर संक्रांति तक दक्षिणायन होता है । उत्तरायण देवताओं का दिन होता है, तो दक्षिणायन देवताओं की रात । कर्क संक्रांति पर उत्तरायण पूर्ण होकर दक्षिणायन प्रारंभ होता है, अर्थात देवताओं की रात आरंभ होती है । कर्क संक्रांति आषाढ महीने में आती है; इसलिए आषाढ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं । ऐसी मान्यता है कि उस दिन देवता शयन करते हैं, अर्थात सो जाते हैं । कार्तिक शुक्ल एकादशी पर देवता नींद से जागते हैं, इसलिए इसे ‘देवोत्थान’ अथवा ‘प्रबोधिनी एकादशी’ देव उठनी एकादशी कहते हैं । वस्तुतः दक्षिणायन 6 महीने का होने के कारण देवताओं की रात्रि भी तत्समान होनी चाहिए; परंतु प्रबोधिनी एकादशी तक 4 महीने पूर्ण होते हैं । इसका अर्थ यह है कि एक तृतीयांश रात शेष होते हुए देवता जागकर अपना व्यवहार करने लगते हैं ।’

🚩चातुर्मास भगवान श्रीविष्णु का शयनकाल है,चातुर्मास में ‘ब्रह्मदेव द्वारा नई सृष्टि की रचना का कार्य जारी रहता है एवं पालनकर्ता श्री विष्णु निष्क्रिय रहते हैं; इसलिए चातुर्मास को विष्णु शयनकाल भी कहते हैं । ऐसी मान्यता है कि उस समय विष्णु क्षीर सागर में शयन करते हैं । इसके संदर्भ में एक पौराणिक कथा है – वामनावतारमें श्री विष्णु ने असुरों के राजा बली से त्रिपाद भूमि दान में मांग ली । श्री विष्णुने एक पद में पृथ्वी, दूसरे पद में संपूर्ण ब्रह्मांड माप लिया तथा तीसरी बार श्री विष्णु ने राजा बलि की प्रार्थना के अनुसार उनके सर पर पद रखकर उन्हें पाताल में भेज दिया । राजा बलि ने भगवान श्री विष्णु की भक्ति में अपना सर्वस्व अर्पण कर दिया । इस पर प्रसन्न होकर भगवान श्रीविष्णु ने राजा बलि के निकट रहना मान्य किया । तब से श्रीविष्णु क्षीरसागर में शयन करने लगे । वास्तव में चातुर्मास के इस काल में श्रीविष्णु शेष
शय्या पर योगनिद्रा का लाभ लेते हैं ।

🚩श्रीविष्णु-शयन के संदर्भ में वैज्ञानिक दृष्टिकोण चातुर्मास में जगत पालनकर्ता श्री विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं । ऐसे में किसी के मन में यह प्रश्न उभर सकता है कि इस काल में सृष्टि का कार्य कैसे होता होगा ? इसलिए इसे वैज्ञानिक दृष्टि से समझ लेना भी उपयुक्त होगा । श्री विष्णु का एक नाम है, हरि । हरि शब्द के अर्थ हैं, सूर्य, चंद्र, वायु इत्यादि । चातुर्मास में परमेश्वर की ये शक्तियां भी क्षीण होती हैं, इस बात को कोई अमान्य नहीं कर सकता । चातुर्मास में अति वर्षा के कारण हमें सूर्य, चंद्रके दर्शन नहीं होते । तथा वायु के क्षीण होने के उपरांत ही वर्षा होती है । यह क्रिया अन्य ऋतुओं में नहीं होती । इस दृष्टि से चातुर्मास सूर्य, चंद्र, वायु, अर्थात श्रीविष्णु का शयनकाल होता है ।

🚩चातुर्मास में किए गए दान, पुण्य, तप, व्रत इत्यादि अधिक फलदायी होते हैं,चातुर्मास में तीर्थक्षेत्र में पवित्र नदियों का स्नान करना,चातुर्मास में की जाने वाली तीर्थ यात्रा, दान, पुण्य, तप, व्रत इत्यादि श्री विष्णु के चरणों में अर्पित होते हैं । जो मनुष्य चातुर्मास में तीर्थ क्षेत्र में पवित्र नदियों का स्नान करता है, उसके अनेक पापों का नाश होता है । क्योंकि वर्षा का जल विभिन्न स्थानों से मिट्टी के माध्यम से प्राकृतिक शक्ति को अपने साथ बहाकर समुद्र की ओर ले जाता है । यहां चातुर्मास में श्री विष्णु का जल में शयन करने का अर्थ है, जल में उनके तेज एवं शक्ति का अंश विद्यमान होना । इस तेज युक्त जल से स्नान करना सर्व तीर्थ यात्राओं की तुलना में अधिक फलदायी है । इससे इस काल में व्रतों की अधिक संख्या का कारण स्पष्ट होता है । इसके अतिरिक्त इस काल में अधिकाधिक व्रतविधि करने के अन्य कारण भी हैं ।

🚩विविध रोगों का प्रतिकार करने के लिए स्वयं को सक्षम बनाना वर्षा ॠतु में हमारे एवं सूर्य के बीच मेघ का एक पट्टा बनता होता है । इसलिए सूर्य की किरणें अर्थात तेजतत्त्व तथा आकाशतत्त्व अन्य दिनों के समान पृथ्वी पर नहीं पहुंच पाते, जिसके कारण वातावरण में पृथ्वी एवं आपतत्त्व प्रबल होते हैं,विविध जंतु, रज-तम तथा काली शक्तिका विघटन नहीं हो पाता; इसलिए रोग फेलते हैं । आलस का अनुभव होता है । शिकागो मेडिकल स्कूल के स्त्री रोग-विशेषज्ञ,प्रोफेसर डॉ. डब्ल्यू.एस. कोगर द्वारा किए गए शोध में पाया गया कि जुलाई, अगस्त, सितंबर एवं अक्टूबर के 4 महीनों में, विशेषकर भारत में स्त्रियों को गर्भाशय संबंधी रोग होते हैं, बढते हैं । इसलिए इस काल में व्रत विधि, उपवास करना, सात्त्विक आहार तथा नामजप के कारण हमारा सत्त्वगुण बढता है । इससे हम शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक दृष्टि से इन रोगों का अर्थात रज-तम का प्रतिकार करने में सक्षम बनते हैं ।

🚩असुरों की प्रबलता अर्थात रज-तम अल्प करना धर्मशास्त्र के अनुसार आषाढ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक अर्थात देवताओं के निद्राकाल में असुर प्रबल होते हैं एवं वे मनुष्य को कष्ट पहुंचाते हैं । चौमासे में पृथ्वी पर प्रवाहित तरंगों में तमोगुण प्रबल तरंगों की मात्रा अधिक रहती है । उनका सामना कर पाने के लिए सात्त्विकता बढाना आवश्यक है । व्रतों के पालन से सात्त्विकता में वृद्धि होती है तथा रज-तम की मात्रा अल्प होती है । इसी कारण चातुर्मास में अधिकाधिक व्रत होते हैं । असुरों से अपना संरक्षण करने के लिए इस काल में प्रत्येक व्यक्ति को कोई न कोई व्रत अवश्य रखना चाहिए । मनुष्य स्वस्थ, निरोगी, दीर्घायु तथा अध्यात्म पथ पर अग्रेसर हो, ये दोनों हेतु साध्य करनेके लिए हमारे ऋषिमुनियों ने चातुर्मास में विविध व्रतों का विधान बताया है । इन ऋषिमुनियों तथा हिंदु धर्म की महानता के सामने हम नतमस्तक हैं ।

🚩 चातुर्मास की परिकल्पना भागवत में मुनिश्रेष्ठ नारदजी ने महर्षि व्यासजी को अपना चरित्र बताया । वे कहते हैं,
अहं पुरातीतभवेऽभवं मुने दास्यास्तु कस्याश्चन वेदवादिनाम् ।
निरूपितो बालक एव योगिनां शुश्रूषणे प्रावृषि निर्विविक्षताम् ।।

🚩अर्थ : हे मुनिवर, पिछले जन्म में मैं वेद विषयक विवाद करने वाले एक योगी की दासी का पुत्र था । जब मैं बालक ही था, तब ये योगी वर्षाकाल में एक स्थान पर चातुर्मास व्रत कर रहे थे । उस समय उनकी सेवा मुझे सौंपी गई थी । इसी प्रकार भागवत में नारद मुनि ने धर्मराज युधिष्ठिर को प्रवृत्त एवं निवृत्त कर्मों के बारे में बताते हुए चातुर्मास का उल्लेख किया है । इससे बोध मिलता है कि, चातुर्मास व्रत अनादि कालसे परंपरागत रूपमें चला आ रहा है ।
🚩चातुर्मास से संबंधित व्रत सामान्य लोग चातुर्मास में कोई तो एक व्रत रखते ही हैं । उसके अंतर्गत भोजन नियम बनाते हैं, जैसे पर्णभोजन अर्थात पत्ते पर भोजन करना, एक समय भोजन करना, अयाचित अर्थात मांगे बिना जितना मिले उतना ही ग्रहण करना, मिश्रभोजन अर्थात सर्व पदार्थ एक साथ परोसकर, उसका कलेवा बनाकर अर्थात मिलाकर कर भोजन करना इत्यादि । अनेक स्त्रियां चातुर्मास में एक दिन भोजन एवं अगले दिन उपवास इस प्रकार का व्रत रखती हैं । कुछ स्त्रियां चातुर्मास में एक अथवा दो अनाजों पर ही निर्वाह करती हैं । उनमें से कुछ पंचामृत का त्याग करती हैं, तो कुछ एकभुक्त रहती हैं । इसके साथ ही चातुर्मास में कुछ अन्य व्रत भी रखे जाते हैं।

🚩भूमि पर कंबल बिछाकर सोना,ब्रह्मचर्य का पालन करना,नमक का त्याग करना,आदि

🚩इन 4 महीनो में पराया धन हड़प करना, परस्त्री से समागम करना, निंदा करना, ब्रह्मचर्य तोड़ना तो मानो हाथ में आया हुआ अमृत कलश ढोल दिया । निंदा न करें , ब्रह्मचर्य का पालन करें , परधन परस्त्री पर बुरी नज़र न करें ।

🚩ताम्बे के बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिये पानी नहीं पीना चाहिये ।

🚩चतुर्मास में काला और नीला वस्त्र पहनने से स्वास्थ्य हानि और पुण्य नाश होता है ।

🚩परनिंदा महा पापं शास्त्र वचन :- “परनिंदा महा पापं परनिंदा महा भयं परनिंदा महा दुखंतस्या पातकम न परम” ।

🚩ये स्कन्द पुराण का श्लोक है परनिंदा महा पाप है, परनिंदा महा भय है, परनिंदा महा दुःख है, तस्यापातकम न परम, उससे बड़ा कोई पाप नही । इस चतुर्मास में पक्का व्रत ले लो कि हम किसी की निंदा न करेंगे।

🚩चातुर्मास में वर्ज्य,त्याज्य........कंद, मूली, बैंगन, प्याज, लहसुन, इमली, मसूर, चवली अर्थात लोबिया, अचार, तरबूज अर्थात सत्दह, बहुबीज या निर्बीज फल, बेर, मांस इत्यादि पदार्थोंका सेवन नहीं करना चाहिए ।

🚩 खाट, पलंग अदि पर शयन नहीं करना चाहिए । केशवपन अर्थात केश काटना वर्जित है । विवाह एवं तत्सम अन्य कार्य भी वर्जित हैं ।

🚩ऐसे में यह प्रश्न अवश्य खडा होता है, कि चातुर्मास में किन पदार्थों का सेवन करना चाहिए ? चातुर्मास में हविष्यान्न अर्थात हवन के लिए उपयुक्त सात्त्विक अन्न, जैसे चावल, जौ, तिल, गेहूं, देशी गाय का दूध, दही, घी, नारियल, केला इत्यादि का सेवन बताया गया है । चातुर्मासमें वर्जित पदार्थ रज-तमोगुण युक्त होते हैं, तो सेवनके लिए ग्राह्य माने गए हविष्यान्न सत्त्वगुणप्रधान होते हैं ।

🚩चातुर्मासमें व्रत रखने के लाभ स्वरूप अनिष्ट शक्तियोंके आक्रमणकी तीव्रता घट जाना।वर्षाऋतुमें तेजतत्त्व रूपी सूर्यकी किरणें पृथ्वीपर अल्प मात्रामें आती हैं । इस कारण अनिष्ट शक्तियोंके आक्रमण भी अधिक मात्रामें होते हैं । चातुर्मास में किए जाने वाले व्रतों के कारण व्यक्ति के साथ साथ वायुमंडल की सात्त्विकता भी बढती है । इस सात्त्विकता के प्रभाव से अनिष्ट शक्तियों के आक्रमण की तीव्रता घट जाती है ।

🚩 इसी कारण हिंदुधर्म ने चातुर्मास व्रतोंकी विधि बनाई है ।

🚩सूर्यनाडी कार्यरत होकर पेशियोंकी प्रतिकारक्षमता बढना

🚩व्रतपालन से आपतत्त्व के बल पर तेजतत्त्व प्रवाही बनता है । इससे व्रती की सूर्यनाडी कार्यरत होकर उसकी पेशियों की प्रतिकार क्षमता बढती है ।

🚩 परिणामस्वरूप व्रती की स्थूल देह से संबंधित रोग, तथा सूक्ष्म अर्थात अनिष्ट शक्तियों के आक्रमणके कारण होने वाले कष्ट, इन दोनों से रक्षण होता है ।

🚩पाताल से प्रक्षेपित कष्टदायी तरंगों से रक्षण होना चातुर्मास में किए जाने वाले विविध व्रतों की सहायता से विविध देवताओं की उपासना की जाती है । इसके द्वारा उन देवताओं की तत्त्वतरंगों का आवाहन किया जाता है । ये तत्त्वतरंगें भूमि के पृष्ठभाग पर घनीभूत होती हैं ,परिणाम स्वरूप पाताल से प्रक्षेपित तेजतत्त्वरूपी कष्टदायी तरंगों से पृथ्वी पर रहनेवाले जीवोंका रक्षण होता है ।

🚩 देवताओंकी कृपा दृष्टि होना चातुर्मास में भूलोक में सूर्य किरणों से मिलने वाले तेज तत्त्व की मात्रा घटती है, जो व्रतों-के माध्यम से प्राप्त तेजतत्त्व से बढाई जाती है । यह तेजतत्त्व वायुमंडल में विद्यमान पृथ्वी एवं आप कणों की सहायता से व्यक्ति की देह में एकत्रित होता है, जिसके कारण साधारण व्यक्ति को इससे कष्ट नहीं होता।

🚩चातुर्मास के इन 4 महीनों में जिससे जितना हो उतना शक्तिनुसार जप,तप,उपवास,नियम ,ब्रह्मचर्य ,दान,पुण्य,आदि पुण्य कार्य करें।

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खेल खिला रहे हो शंकर को पर जब वो खेल खिलाएंगे तो बड़ा भारी पड़ेगा।

31 July 2022
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🚩ज्ञानवापी परिसर में मिले 'शिवलिंग' की कार्बन डेटिंग के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इंकार....

🚩इस मामले ने कई मोड़ देख लिए हैं,सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका के जरिए मांग की गई कि 'शिवलिंग' की कार्बन डेटिंग और जीपीआरएस सर्वे करवाया जाए,लेकिन याचिकाकर्ता को कोर्ट से लगा है झटका.....

🚩किसी को पता चला, ज्ञानवापी मंदिर में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने से मना कर दिया जस्टिस चंद्रचूड़ ने।

🚩मेरा ख्याल है ये खबर मीडिया में आई ही नहीं कि हिन्दू संगठनों की ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने की मांग जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ने ठुकरा दी।

🚩जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़,सूर्यकांत और पी एस नरसिम्हा की बेंच ने 21 जुलाई 2022 को हिन्दू संगठनों की मांग ठुकराते हुए कहा कि हम वाराणसी जिला जज के आर्डर 7 रूल 11 में मुस्लिम संगठनों की हिन्दू महिलाओं की मंदिर परिसर में पूजा करने की मांग के खिलाफ अर्जी पर फैसला होने के बाद ही कोई सुनवाई करेंगे।

🚩याद रहे सिविल जज रवि कुमार दिवाकर जब केस की सुनवाई कर रहे थे तो चंद्रचूड़ जी की बेंच ने केस जिला जज के पास भेज दिया।

🚩अब हिन्दू संगठनों को कहा है कि वो अपनी मांग जिला जज कोर्ट में रखें और उसके फैसले के बाद ही हम सुनवाई करेंगे।

🚩जिला जज के फैसले पर कैसे सीधे सुनवाई करेंगे। उसे हाई कोर्ट को सुनने को कहा जायेगा और शायद सिंगल जज बेंच पहले सुनेगी, फिर डबल बेंच और फिर सुप्रीम कोर्ट।

🚩जबकि कार्बन डेटिंग का फैसला करने में आपको कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए जब आप राज्य सरकारों को दरकिनार कर जुबैर की FIRs दिल्ली ट्रांसफर कर सकते हैं।

🚩बस मंशा होनी चाहिए। सिविल जज दिवाकर सही जा रहे थे,पर उनसे केस जिला जज को भेजना दिवाकर का अपमान करना था, ये कह कर कि सुनवाई किसी "परिपक़्व" जज से होनी चाहिए और इससे केस लटक भी गया क्योंकि जिला जज ने पहली ही सुनवाई सवा महीने के लिए टाल दी थी।

🚩जस्टिस चंद्रचूड़ को पता है कि कार्बन डेटिंग शिवलिंग कितना पुराना है, उसका पुख्ता सबूत दे सकती है और इससे हिन्दुओं को अधिकार मिलना आसान हो जायेगा, वही मंशा नहीं है।

🚩ये कैसी विडम्बना है कि भगवान राम को अयोध्या में जन्मस्थान के सबूत देने पड़े अदालत में और फिर भी 70 वर्ष लग गए न्याय में। आज जगत चेतना आदि अनंता भगवान् शंकर को भी सबूत देने पड़ रहे हैं अपने अस्तित्व के इन जजों के सामने।

🚩पर याद रखना अगर शिव-शंकर की तीसरी आँख खुल गई तो समझो अन्याय करने वालो का महा-विनाश निश्चित होगा।

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15 अगस्त कैसी स्वतंत्रता? स्वतंत्रता अपहरण दिवस या स्वतंत्रता दिवस ? - महामंडलेश्वर डॉ अन्नपूर्णा भारती

15 August 2022
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🚩भारत सरकार सन 2022 में 75 वे स्वतंत्रता दिवस को अमृत महोत्सव के रूप में मना रही है । सत्य, न्याय, मानवता के आधार पर यदि शासन तंत्र कार्य कर रहा है,तो उसे स्वतंत्रता कहा जा सकता है। यह लोक व्यवहार की स्वतंत्रता का न्यूनतम मापदंड है, चाहे लोकतंत्र हो या राजतन्त्र या कोई अन्य तंत्र। इसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी स्वीकार करना पड़ेगा अन्यथा वह दानवाधिकार आयोग कहलाएगा ।

🚩आज भारत में छद्म युद्ध के द्वारा हिंदुओं को समाप्त किया जा रहा है। गौ मांस खाने की खुली घोषणा करने वाले आज भी खुले घूम रहे हैं। गौ रक्षकों की आए दिन हत्याएं हो रही है,गोरक्षकों को जेल में डाला जा रहा है। शहर गांव के मुख्य चौराहे चौक गली गली में शराब की दुकानें खोल दी गई है। क्रिश्चियन अंग्रेजों ने स्कूलों में गीता पढ़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था, जो आज भी लागू है । धर्मांतरण के विरोध मे कार्य करने वाले संतो को झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल में डाला जा रहा है। इसकी भरपाई कौन करेगा ?

🚩आज भी भारत का शासन तंत्र धर्मांतरण करने वाली शक्तियों के प्रभाव में कार्य करता है । नेता असली मुद्दे छुपाकर नए नए मुद्दे बनाकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। हिंदू मुस्लिम मुद्दे बनाए जा रहे हैं । अलगाववादी जातिवादी मुद्दे पैदा किए जा रहे हैं। वोट बैंक के लिए हिंदुओं की जेब काटी जा रही है । छद्म धर्मनिरपेक्षता के द्वारा छद्म युद्ध के द्वारा सनातन धर्म हिंदू जनता को समाप्त किया जा रहा है। भारत के 8 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हो चुका है,वहाँ आज भी हिन्दू भयंकर अन्याय अत्याचार सहन कर रहा है ।

🚩अखाड़ा के दो निर्दोष साधुओं की पालघर में पुलिस के सामने पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, वहां भगवा वस्त्र धारियों को देखते ही क्रिस्चन बाहुल आदिवासी जनता हमला कर देती है। धर्मांतरण रोकने वाले उड़ीसा के स्वामी लक्ष्मणानंद के आश्रम में घुस कर उनकी और उनके छात्र छात्राओं की निर्मम हत्या कर दी गई। शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती 9 वर्ष बाद निर्दोष साबित हुए। बैंगलोर के स्वामी नित्यानंद के चरित्र हनन की सीडी फर्जी साबित हुई। वर्तमान सरकार से जान बचाकर उन्हें भारत से भागना पड़ा अलग हिंदू राष्ट्र स्थापित करना पड़ा। जबकि वो अखाड़ा के बड़े साधु संत है। दांती महाराज पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाया गया।

🚩संत आशाराम जी बापू पर चारित्रिक हनन का आरोप लगाने वाली लड़की की मेडिकल रिपोर्ट में लड़की का कौमार्य सुरक्षित पाया गया । बलात्कार हुआ ही नहीं है, फिर भी निर्दोष बापूजी को आजीवन कारावास। बीमार होने पर भी जमानत नहीं। संविधान और न्याय की समानता के अधिकारों का खुला उल्लंघन किया गया। संत आशाराम जी बापू धर्मांतरण के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बने हुए थे इसलिए राजनीतिक षड्यंत्र करके उन्हें फंसाया गया।

🚩15 अगस्त 1947 को अल्पसंख्यकों को बढ़ावा देकर क्रिश्चन अंग्रेजों ने भारत के टुकड़े किए। लाखों हिंदुओं की हत्या की गई लाखों हिंदू स्त्रियों का बलात्कार किया गया। अमानवीय अत्याचार किए गए, जो इतिहास में पहले कभी नहीं हुए। कायरों द्वारा कायरता के कीर्तिमान स्थापित किए गए। उससे अधिक दयनीय भयावह स्थिति में आज हिंदू जा चुका है।

🚩 आज भी क्रिश्चियन मुस्लिम औरंगजेबी जजिया टैक्स हिंदुओं से वसूला जा रहा है। संविधान का खुला उल्लंघन करके सन 2006 में धर्म के आधार पर अल्पसंख्याक मंत्रालय बना दिया गया । सैकड़ों योजनाओं के बहाने हिंदुओं की जेब काटकर अल्पसंख्यकों के नाम पर गैर हिंदुओं को वह सुविधाएं दी जा रही है, जो पूरी दुनिया में कहीं नहीं दी गई है । धार्मिक भेदभाव करके आरक्षण ,अनुदान,छात्र वृत्ति, बैंक ऋण, छूट, सुविधाएं दी जा रही है। इससे बढ़कर बाबासाहेब अंबेडकर जी का अपमान नहीं किया जा सकता है।

🚩 इस अन्याय अत्याचार के कारण करोड़ों हिंदू परिवार आर्थिक संकट से ग्रस्त है, लाखों हिंदू परिवार आत्महत्या कर रहे हैं। सन 2007 में हिन्दू संगठनों के एक अनुमान के अनुसार इस अन्याय अत्याचार के कारण प्रतिदिन लगभग 2700 हिंदू लड़कियां गैर हिंदुओं का शिकार बन रही थी, उनके पूरे परिवार का जीवन नर्क बन गया है। यह समस्या बढ़ती जा रही है। इनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं है।

🚩 दोषी राजनेताओं को नीलाम करके उनकी संपत्ति जप्त करके उनको बीच चौक में फांसी पर लटका कर पीड़ित हिंदुओं को हर्जाना देना चाहिए। रामराज्य लाने वाले राष्ट्रवादी नेता साढ़े 7 वर्ष से सत्ता में है जो अल्पसंख्यक मंत्रालय को बढ़ावा दे रहे हैं , बंद करना तो दूर, दोषी राजनेताओं को दंडित करना तो दूर, कानून बनाना तो दूर , आयोग बनाना तो दूर । जो बहुसंख्यक है उनके लिए अल्पसंख्यक आयोग बन सकता है, अल्पसंख्यक मंत्रालय बन सकता है , काला
कानून सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक बनाने वाले वाले खुलेआम घूम सकते है, बलात्कार के दोषी क्रिश्चियन पंथगुरु बाहर घूम सकते हैं ,कई अपराधी राजनेता जेल से बाहर घूम सकते हैं ,खुलेआम धर्मांतरण हो सकता है। लेकिन हिन्दू संगठनों को हिन्दू जनता को न्याय मांगने पर प्रताड़ित किया जाता है।

🚩 छल बल से धर्मांतरण से पीड़ित सन 2015 में पूरे देश में चर्चित राष्ट्रीय खिलाड़ी तारा सहदेव के मामले में केंद्र सरकार के गृहमंत्री ने कहा लव जिहाद क्या है मैं नहीं जानता। हिंदू भीख नहीं मांग रहे हैं न्याय मांग रहे हैं। नेता वह है जो नीति पर चले न्याय करें।

🚩लाखों हिंदू मंदिरों की दान पेटी से प्रतिवर्ष सरकार करोड़ों अरबों रुपया हड़पकर उसकी 90 से 95% राशि क्रिश्चियन और मुस्लिम संस्थाओं को दे देती है। पर किसी मस्जिद या किसी क्रिश्चियन संस्था के एक रुपये को सरकार छूती भी नहीं है।

🚩 गैर हिंदू शिक्षण या धार्मिक संस्थाओं को अनेक छूट और हिन्दुओ पर टैक्स लादे जा रहे हैं ।

🚩अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आजादी के मायने क्या है? भारतीय संस्कृति , सनातन धर्म के अनुसार आजादी के क्या मायने हैं ?

🚩लोकव्यवहार में,लोकाचार में देश, काल, परिस्थिति, क्षेत्र के अनुसार आजादी ,काल्पनिक आजादी,सापेक्ष आजादी,तात्विक आजादी, सच्ची आजादी के मायने जो संत अपने सत्संग में बता रहे हैं सच्ची आजादी की ओर वे जनता को ले जाने में सक्षम है। ऐसे संत आशारामजी बापू निर्दोषता के सबूत के बाद भी 10 साल से जेल में बंद है तो जनता को यह साक्षात हो जाना चाहिए की भारत की स्वतंत्रता का अपहरण हो चुका है।

🚩संत आशाराम जी बापू के पास आशिर्वाद लेने बड़े बड़े नेता जाते रहते थे। वे नेता सत्ता में बैठ गए और उन संतो पर शाशन द्वारा अन्याय अत्याचार करने पर चुप्पी साधे बैठे है। संतो पर अत्याचार होने पर भगवान भी शासन करने वालों की रक्षा नहीं कर पाएंगे।

🚩नेता उसे कहते हैं जो नीति पर चलें न्याय के लिए लड़ाई करें। भगवान श्री कृष्ण ने भी न्याय के लिए महाभारत युद्ध किया। संत आशारामजी बापू ने अपने सत्संग में बताया की भगवान श्री कृष्ण ने गीता में तात्विक आजादी को सच्ची आजादी बताया है।

🚩राष्ट्र की ,जनता की सच्ची सेवा क्या है? कैसे हो सकती है? ,कौन कर सकता है ? अपने आप को राष्ट्रवादी मानने वाले ,रामराज्य की बातें करने वाले, हिंदू राष्ट्र की बातें करने वाले क्या सच्ची आजादी के मायने जानते हैं? भगवान श्री राम भी गुरु वशिष्ठजी के चरणों में बैठकर उनकी आज्ञा में रहकर शासन करते थे उन्होंने भी सच्ची आजादी को समझा और पाया तभी रामराज्य साकार हो पाया।

🚩संत आशारामजी बापू के दैवी कार्यों द्वारा विश्व मानवता की जो सेवा हो रही है, उसकी महिमा का वर्णन नहीं किया जा सकता है। युवा पीढ़ी को उचित खान पान संयम , ब्रह्मचर्य की शिक्षा द्वारा विश्व स्तर पर मातृ पितृ पूजन दिवस के द्वारा आने वाली पीढ़ी में दैवी संस्कार जगा रहे हैं। विश्व मानवता को जन्म मृत्यु रूपी दुख से मुक्ति का मार्ग दिखाकर सच्ची आजादी की ओर ले जा रहे हैं।

🚩भारत के विश्व प्रसिद्ध हिंदू संत आशारामजी बापू की उपेक्षा करके भारत के राजनेता इस देश को कहां ले जा रहे हैं ।

🚩भारत के प्रधानमंत्री गृह मंत्री का यह प्रथम कर्तव्य है कि संत आशाराम जी बापू के समर्थन में सार्वजनिक रूप से अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करें। कई कई बार केंद्र सरकारों ने राज्य सरकारों ने न्यायालय में अनेक मुकदमे वापस लिए हैं । कई सरकारों ने सजायाफ्ता बड़े बड़े अपराधियों को जेल से छोड़ा है । उनके केस खत्म किए हैं।

🚩राजनीतिक ,व्यक्तिगत कारणों से ऊपर उठकर देश के प्रधानमंत्री ,गृहमंत्री को सनातन धर्म की रक्षा के लिए ऐसे महान संतों के सानिध्य में इस राष्ट्र की जनता के कल्याण के लिए अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए।- महामंडलेश्वर डॉ अन्नपूर्णा भारती
(डॉ पूजा शकुन पाण्डेय) निरंजनी अखाड़ा,राष्ट्रीय सचिव, हिन्दू महासभा Mob7678325905

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भयानक रिपोर्ट : 1 जनवरी को नववर्ष मनाने वाले पहले यह रिपोर्ट पढ़ ले:-

26 December 2022
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🚩भारत की इतनी दिव्य और महान संस्कृति है कि इसका अनुसरण करने वाला बिना किसी वस्तु, व्यक्ति के यहां तक कि विपरीत परिस्थितियों में भी सुखी रह सकता है, इसके विपरीत विदेशों में भोग सामग्री होते हुए भी वहां के लोग इतने दुःखी व चिंतित हैं कि वहां के आंकड़े देखकर दंग रह जाएंगे आप लोग !!

🚩फिर भी भारत का एक बड़ा वर्ग उनका अंधानुकरण कर, उनका नववर्ष मनाने लगा और भूल गया अपनी संस्कृति को ।

🚩एक सर्वे के अनुसार…

🚩ईसाई नववर्ष पर तीन गुनी हुई एल्कोहल की खपत:-

🚩वाणिज्य एवं उद्योग मंडल ( एसोचेम – ASSOCHAM ) के क्रिसमस और ईसाई नववर्ष पर एल्कोहल पर खपत किये गये सर्वेक्षण में यह निष्कर्ष सामने आया है कि इन अवसरों पर 14 से 19 वर्ष के किशोर भी शराब व मादक पदार्थों का जमकर सेवन करते हैं और यही कारण है कि इस दौरान शराब की खपत तीन गुनी बढ़ जाती है।

🚩इन दिनों में दूसरे मादक पेय पदार्थों की भी खपत बढ़ जाती है । बड़ों के अलावा छोटी उम्रवाले भी बड़ी संख्या में इनका सेवन करते हैं । इससे किशोर-किशोरियों, कोमल वय के लड़के-लड़कियों को शारीरिक नुकसान तो होता ही है, उनका व्यवहार भी बदल जाता है और हरकतें भी जोखिमपूर्ण हो जाती हैं । उसका परिणाम कई बार एचआईवी संक्रमण (एड्स रोग) के तौर पर सामने आता है तो कइयों को टी.बी., लीवर की बीमारी, अल्सर और गले का कैंसर जैसे कई असाध्य रोग भी पैदा हो जाते हैं । करीब 70 प्रतिशत किशोर फेयरवेल पार्टी, क्रिसमस एवं ईसाई नूतन वर्ष पार्टी, वेलेंटाइन डे और बर्थ डे जैसे अवसरों पर शराब का सेवन करते हैं । एक अन्य सर्वेक्षण के अनुसार भारत में कुल सड़क दुर्घटनाओं में से 40 प्रतिशत शराब के कारण होती हैं ।

🚩सूत्रों का कहना है कि क्रिसमस (25 दिसम्बर से 1 जनवरी ) के दिनों में शराब आदि नशीले पदार्थों का सेवन, युवाधन की तबाही व आत्महत्याएँ खूब होती हैं ।

🚩भारत से 10 गुणा ज्यादा दवाईयां खर्च होती हैं ।

🚩पाश्चात्य संस्कृति और त्यौहार का अनुसरण करने पर यूरोप, अमेरिका आदि देशों में मानसिक रोग इतने बढ़ गए हैं कि हर दस व्यक्ति में से एक को मानसिक रोग होता है । दुर्वासनाएँ इतनी बढ़ी हैं कि हर छः सेकंड में एक बलात्कार होता है और हर वर्ष लगभग 20 लाख से अधिक कन्याएँ विवाह के पूर्व ही गर्भवती हो जाती हैं । वहाँ पर 65% शादियाँ तलाक में बदल जाती हैं । AIDS की बीमारी दिन दुगनी रात चौगुनी फैलती जा रही है | वहाँ के पारिवारिक व सामाजिक जीवन में क्रोध, कलह, असंतोष, संताप, उच्छृंखता, उद्यंडता और शत्रुता का महा भयानक वातावरण छाया रहता है ।

🚩विश्व की लगभग 4% जनसंख्या अमेरिका में है । उसके उपभोग के लिये विश्व की लगभग 40% साधन-सामग्री (जैसे कि कार, टी वी, वातानुकूलित मकान आदि) मौजूद हैं फिर भी वहाँ अपराधवृति इतनी बढ़ी है कि हर 10 सेकण्ड में एक सेंधमारी होती है, 1 लाख व्यक्तियों में से 425 व्यक्ति कारागार में सजा भोग रहे हैं । इन सबका मुख्य कारण दिव्य संस्कारों की कमी है ।

🚩31 दिसम्बर की रात नए साल के स्वागत के लिए लोग जमकर दारू पीते हैं । हंगामा करते हैं, महिलाओं से छेड़खानी करते हैं, रात को दारू पीकर गाड़ी चलाने से दुर्घटना की सम्भावना, रेप जैसी वारदात, पुलिस व प्रशासन बेहाल और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विनाश होता है और 1 जनवरी से आरंभ हुई ये घटनाएं सालभर में बढ़ती ही रहती हैं ।

🚩जबकि भारतीय नववर्ष नवरात्रों के व्रत से शुरू होता है । घर-घर में माता रानी की पूजा होती है । शुद्ध सात्विक वातावरण बनता है । चैत्र प्रतिपदा के दिन से महाराज विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् की शुरुआत, भगवान झूलेलाल का जन्म, नवरात्रे प्रारंम्भ, ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना इत्यादि का संबंध है ।

🚩भोगी देश का अन्धानुकरण न करके युवा पीढ़ी भारत देश की महान संस्कृति को पहचाने ।

🚩1 जनवरी में सिर्फ नया कलैण्डर आता है, लेकिन चैत्र में नया पंचांग आता है उसी से सभी भारतीय पर्व ,विवाह और अन्य मुहूर्त देखे जाते हैं । इसके बिना हिन्दू समाज जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता इतना महत्वपूर्ण है ये कैलेंडर यानि पंचांग ।

🚩स्वयं सोचें कि क्यों मनाएं 1 जनवरी को नया वर्ष..???

🚩केवल कैलेंडर बदलें अपनी संस्कृति नहीं…!!!
रावण रूपी पाश्‍चात्य संस्कृति के आक्रमणों को नष्ट कर चैत्र प्रतिपदा के दिन नववर्ष का विजयध्वज अपने घरों व मंदिरों पर फहराएं ।
अंग्रेजी गुलामी तजकर ,अमर स्वाभिमान भर लें भारतवासी । हिन्दू नववर्ष मनाकर खुद में आत्मसम्मान भर लें भारतवासी ।।

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भारत से मुगल साम्राज्य को उखाड़ फेंकने वाले गोविंद सिंह का इतिहास

28 December 2022
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🚩सिख समुदाय के दसवें धर्म-गुरु (सतगुरु) गोविंद सिंह जी का जन्म पौष शुदि सप्तमी संवत 1723 को हुआ था । उनका जन्म बिहार के पटना शहर में हुआ था।

🚩उनके पिता गुरू तेग बहादुर की मृत्यु के उपरान्त 11 नवम्बर सन 1675 को वे गुरू बने । वह एक महान योद्धा, कवि, भक्त एवं आध्यात्मिक संत थे।

🚩सन 1699 में बैसाखी के दिन उन्होने खालसा पन्थ की स्थापना की । जो सिखों के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।

🚩गुरू गोविन्द सिंह ने सिखों के पवित्र ग्रन्थ गुरु ग्रंथ साहिब को पूरा किया तथा उन्हें गुरु रूप में सुशोभित किया।

🚩उन्होंने मुगलों या उनके सहयोगियों (जैसे, शिवालिक पहाड़ियों के राजा) के साथ 14 युद्ध लड़े । धर्म के लिए समस्त परिवार का बलिदान किया, जिसके लिए उन्हें ‘सरबंसदानी’ भी कहा जाता है । इसके अतिरिक्त जनसाधारण में वे कलगीधर, दशमेश, बाजांवाले आदि कई नाम, उपनाम व उपाधियों से भी जाने जाते हैं ।

🚩गुरु गोविंद सिंह जो विश्व की बलिदानी परम्परा में अद्वितीय थे, वहीं वे स्वयं एक महान लेखक, मौलिक चिंतक तथा कई भाषाओं के ज्ञाता भी थे। उन्होंने स्वयं कई ग्रंथों की रचना की। वे विद्वानों के संरक्षक थे। उनके दरबार में 52 कवियों तथा लेखकों की उपस्थिति रहती थी, इसीलिए उन्हें ‘संत सिपाही’ भी कहा जाता था। वे भक्ति तथा शक्ति के अद्वितीय संगम थे।

🚩गुरु गोबिन्द सिंह का जन्म!!

🚩प्राग राज के निवास समय श्री गोबिंद राय जी के जन्म से एक दिन पहले माता नानकी जी ने स्वाभाविक श्री गुरु तेग बहादुर जी (Shri Guru Teg Bahadar Ji) को कहा कि बेटा! आप जी के पिता ने एक बार मुझे वचन दिया था कि तेरे घर तलवार का धनी बड़ा प्रतापी शूरवीर पोत्र ईश्वर का अवतार होगा । मैं उनके वचनों को याद करके प्रतीक्षा कर रही हूँ कि आपके पुत्र का मुँह मैं कब देखूँगी !
बेटा जी! मेरी यह मुराद पूरी करो, जिससे मुझे सुख की प्राप्ति हो ।

🚩अपनी माता जी के यह मीठे वचन सुनकर गुरु जी ने वचन किया कि माता जी! आप जी का मनोरथ पूरा करना अकाल पुरख के हाथ मैं है । हमें भरोसा है कि आप के घर तेज प्रतापी ब्रह्मज्ञानी पौत्र देंगे ।

🚩गुरु जी के ऐसे आशावादी वचन सुनकर माता जी बहुत प्रसन्न हुए । माता जी के मनोरथ को पूरा करने के लिए गुरु जी नित्य प्रति प्रातकाल त्रिवेणी स्नान करके अंतर्ध्यान हो कर वृति जोड़ कर बैठ जाते व पुत्र प्राप्ति के लिए अकाल पुरुष की आराधना करते ।

🚩गुरु जी की नित्य आराधना और याचना अकाल पुरख के दरबार में स्वीकार हो गई। उसने हेमकुंट के महा तपस्वी दुष्ट दमन को आप जी के घर माता गुजरी जी के गर्भ में जन्म लेने कि आज्ञा की । जिसे स्वीकार करके श्री दमन (दसमेश) जी ने अपनी माता गुजरी जी के गर्भ में आकर प्रवेश किया ।

🚩गुरु गोविंद सिंह का जन्म नौवें सिख गुरु तेगबहादुर और माता गुजरी के घर पटना में हुआ था। जब वह पैदा हुए थे उस समय उनके पिता असम में धर्म उपदेश को गये थे। उन्होंने बचपन में फारसी, संस्कृत की शिक्षा ली और एक योद्धा बनने के लिए सैन्य कौशल सीखा।

🚩गुरु गोबिंद सिंह की तीन पत्नियाँ थी :-

🚩21 जून, 1677 को 10 साल की उम्र में उनका विवाह माता जीतो के साथ आनंदपुर से 10 किलोमीटर दूर बसंतगढ़ में किया गया। उन दोनों के 3 लड़के हुए जिनके नाम थे – जुझार सिंह, जोरावर सिंह, फतेह सिंह ।

🚩4 अप्रैल, 1684 को 17 वर्ष की आयु में उनका दूसरा विवाह माता सुंदरी के साथ आनंदपुर में हुआ। उनका एक बेटा हुआ जिसका नाम था अजीत सिंह।

🚩15 अप्रैल 1700 को 33 वर्ष की आयु में उन्होंने माता साहिब देवन से विवाह किया। वैसे तो उनकी कोई संतान नहीं थी पर सिख धर्म के पन्नों पर उनका दौर भी बहुत प्रभावशाली रहा।

🚩गुरु गोबिन्द सिंह मार्ग :-

🚩अप्रैल 1685 में, सिरमौर के राजा मत प्रकाश के निमंत्रण पर गुरू गोबिंद सिंह ने अपने निवास को सिरमौर राज्य के पांवटा शहर में स्थानांतरित कर दिया । सिरमौर राज्य के गजट के अनुसार, राजा भीम चंद के साथ मतभेद के कारण गुरु जी को आनंदपुर साहिब छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था और वे वहाँ से टोका शहर चले गये । मत प्रकाश ने गुरु जी को टोका से सिरमौर की राजधानी नाहन के लिए आमंत्रित किया। नाहन से वह पांवटा के लिए रवाना हुये। मत प्रकाश ने गढ़वाल के राजा फतेह शाह के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से गुरु जी को अपने राज्य में आमंत्रित किया था। राजा मत प्रकाश के अनुरोध पर गुरु जी ने पांवटा मे बहुत कम समय में उनके अनुयायियों की मदद से एक किले का निर्माण करवाया। गुरु जी पांवटा में लगभग तीन साल के लिए रहे और कई ग्रंथों की रचना की।
🚩सन 1687 में नादौन की लड़ाई में, गुरु गोविंद सिंह, भीम चंद, और अन्य मित्र देशों की पहाड़ी राजाओं की सेनाओं ने अलिफ खान और उनके सहयोगियों की सेनाओं को हरा दिया था । और भट्ट वाहिस के अनुसार, नादौन पर बने व्यास नदी के तट पर गुरु गोबिंद सिंह आठ दिनों तक रहे और विभिन्न महत्वपूर्ण सैन्य प्रमुखों का दौरा किया।

🚩भंगानी के युद्ध के कुछ दिन बाद, रानी चंपा (बिलासपुर की विधवा रानी) ने गुरु जी से आनंदपुर साहिब (या चक नानकी जो उस समय कहा जाता था) वापस लौटने का अनुरोध किया जिसे गुरु जी ने स्वीकार किया । वह नवंबर 1688 में वापस आनंदपुर साहिब पहुंच गये ।

🚩1695 में, दिलावर खान (लाहौर का मुगल मुख्य) ने अपने बेटे हुसैन खान को आनंदपुर साहिब पर हमला करने के लिए भेजा । मुगल सेना हार गई और हुसैन खान मारा गया। हुसैन की मृत्यु के बाद, दिलावर खान ने अपने आदमियों जुझार हाडा और चंदेल राय को शिवालिक भेज दिया। हालांकि, वे जसवाल के गज सिंह से हार गए थे। पहाड़ी क्षेत्र में इस तरह के घटनाक्रम मुगल सम्राट औरंगजेब के लिए चिंता का कारण बन गए और उसने क्षेत्र में मुगल अधिकार बहाल करने के लिए सेना को अपने बेटे के साथ भेजा।

🚩खालसा पंथ की स्थापना :-

🚩गुरु गोविंद सिंह जी का नेतृत्व सिख समुदाय के इतिहास में बहुत कुछ नया रंग ले कर आया। उन्होंने सन 1699 में बैसाखी के दिन खालसा जो कि सिख धर्म के विधिवत् दीक्षा प्राप्त अनुयायियों का एक सामूहिक रूप है उसका निर्माण किया।

🚩सिख समुदाय के एक सभा में उन्होंने सबके सामने पूछा – कौन अपने सर का बलिदान देना चाहता है? उसी समय एक स्वयंसेवक इस बात के लिए राजी हो गया और गुरु गोबिंद सिंह उसे तम्बू में ले गए और कुछ देर बाद वापस लौटे एक खून लगे हुए तलवार के साथ। गुरु ने दोबारा उस भीड़ के लोगों से वही सवाल दोबारा पूछा और उसी प्रकार एक और व्यक्ति राजी हुआ और उनके साथ गया पर वे तम्बू से जब बाहर निकले तो खून से सना तलवार उनके हाथ में था। उसी प्रकार पांचवा स्वयंसेवक जब उनके साथ तम्बू के भीतर गया, कुछ देर बाद गुरु गोबिंद सिंह सभी जीवित सेवकों के साथ वापस लौटे और उन्होंने उन्हें पंज प्यारे या पहले खालसा का नाम दिया।

🚩उसके बाद गुरु गोबिंद जी ने एक लोहे का कटोरा लिया और उसमें पानी और चीनी मिला कर दुधारी तलवार से घोल कर अमृत का नाम दिया। पहले 5 खालसा के बनाने के बाद उन्हें छटवां खालसा का नाम दिया गया जिसके बाद उनका नाम गुरु गोबिंद राय से गुरु गोबिंद सिंह रख दिया गया। उन्होंने क शब्द के पांच महत्व खालसा के लिए समझाये और कहा – केश, कंगा, कड़ा, किरपान, कच्चेरा।

🚩यह कहा जाता है कि गुरु गोबिंद सिंह ने कुल चौदह युद्ध लड़े परन्तु कभी भी किसी पूजा के स्थल के लोगों को ना ही बंदी बनाया या क्षतिग्रस्त किया।

🚩भंगानी का युद्ध Battle of Bhangani (1688)नादौन का युद्ध

🚩Battle of Nadaun (1691)गुलेर का युद्ध

🚩Battle of Guler (1696)आनंदपुर का पहला युद्ध

🚩First Battle of Anandpur (1700)आनंदपुर साहिब का युद्ध

🚩Battle of Anandpur Sahib (1701) निर्मोहगढ़ का युद्ध

🚩Battle of Nirmohgarh (1702) बसोली का युद्ध

🚩Battle of Basoli (1702) आनंदपुर का युद्ध

🚩Battle of Anandpur (1704) सरसा का युद्ध

🚩Battle of Sarsa (1704) चमकौर का युद्ध

🚩Battle of Chamkaur (1704) मुक्तसर का युद्ध Battle of Muktsar (1705)

🚩परिवार के लोगों की मृत्यु :-

🚩कहा जाता है कि सिरहिन्द के मुस्लिम गवर्नर ने गुरु गोबिंद सिंह के माता और दो पुत्र को बंदी बना लिया था। जब उनके दोनों पुत्रों ने इस्लाम धर्म को कुबूल करने से मना कर दिया तो उन्हें जिन्दा दफना दिया गया। अपने पोतों के मृत्यु के दुःख को ना सह सकने के कारण माता गुजरी भी ज्यादा दिन तक जीवित ना रह सकी और जल्द ही उनकी मृत्यु हो गयी। मुगल सेना के साथ युद्ध करते समय 1704 में उनके दोनों बड़े बेटों की मृत्यु हो गयी।

🚩जफरनामा :-

🚩गुरु गोबिंद सिंह ने जब देखा कि मुगल सेना ने गलत तरीके से युद्ध किया है और क्रूर तरीके से उनके पुत्रों का हत्या कर दी है तो हथियार डाल देने के बजाये गुरु गोविंद सिंह ने औरंगजेब को एक जफरनामा (विजय की चिट्ठी) लिखा, जिसमें उन्होंने औरगंजेब को चेतावनी दी कि तेरा साम्राज्य नष्ट करने के लिए खालसा पंथ तैयार हो गया है।

🚩8 मई सन्‌ 1705 में ‘मुक्तसर’ नामक स्थान पर मुगलों से भयानक युद्ध हुआ, जिसमें गुरुजी की जीत हुई। मुक्तसर को पंजाब में दोबारा गुरु जी ने स्थापित किया और अदि ग्रन्थ Adi Granth के नए अध्याय को बनाने के लिए खुद को समर्पित कर दिया जो पांचवें सिख गुरु अर्जुन द्वारा संकलित किया गया है।
🚩उन्होंने अपने लेखन का एक संग्रह बनाया है जिसको नाम दिया दसम ग्रन्थ Dasam Granth और अपनी स्वयं की आत्मकथा जिसका नाम रखा है बिचित्र नाटक Bicitra Natak

🚩अक्टूबर सन्‌ 1706 में गुरुजी दक्षिण में गए जहाँ पर उनको औरंगजेब की मृत्यु का पता लगा। औरंगजेब ने मरते समय एक शिकायत पत्र लिखा था। हैरानी की बात है कि जो सब कुछ लुटा चुका था, (गुरुजी) वो फतहनामा लिख रहे थे व जिसके पास सब कुछ था वह शिकस्त नामा लिख रहा है। इसका कारण था सच्चाई। गुरुजी ने युद्ध सदैव अत्याचार के विरुद्ध किए थे न कि अपने निजी लाभ के लिए।

🚩अन्तिम समय :-

🚩औरंगजेब की मृत्यु के बाद आपने बहादुरशाह को बादशाह बनाने में मदद की। गुरुजी व बहादुरशाह के संबंध अत्यंत मधुर थे। इन संबंधों को देखकर सरहद का नवाब वजीत खाँ घबरा गया। अतः उसने दो पठान गुरुजी के पीछे लगा दिए। इन पठानों ने गुरुजी पर धोखे से घातक वार किया, जिससे 7 अक्टूबर 1708 में गुरुजी (गुरु गोबिन्द सिंह जी) नांदेड साहिब में दिव्य ज्योति में लीन हो गए। अंत समय में सिक्खों को गुरु ग्रंथ साहिब को अपना गुरु मानने को कहा व खुद भी माथा टेका। गुरुजी के बाद माधोदास ने, जिसे गुरुजी ने सिक्ख बनाया बंदासिंह बहादुर नाम दिया था, जिन्होंने सरहद पर आक्रमण किया और अत्याचारियों की ईंट से ईंट बजा दी।

🚩गुरु गोविंद सिंह के नारा था : ‘चिड़ियों से मैं बाज़ लड़ाऊं, सवा लाख से एक लड़ाऊं ।

🚩जिनका एक एक सिपाही मुगलों को धूल चटा देता था, जिनका नाम सुनते ही औरंगजेब के पसीने छूटने लगते थे उन गुरु गोविंद सिंह जी को प्राणों से प्यारा था धर्म।

🚩 धर्म की रक्षा के लिए कुर्बान हो गए ऐसे गुरु गोविंद सिंह को शत्- शत् नमन।

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