ईद मुबारक!या अल्लाह की रहमत से चाँद नजर आया, ईद का जश्न मुबारक हो! दिल से दुआ है कि ये मुकद्दस मौका आपकी जिंदगी में खुशियाँ, बरकत और अमन लाए। रौनक भरी शामें, चाँदनी रातें, सेवईयों की महक और अपनों के गले मिलन का सुकून—सब कुछ अल्लाह की इबादत के साथ हो। गुनाहों से तौबा करें, नेक अमल को अपनाएँ। खानदान में मुहब्बत बरसे, दुख दूर हों, और हर मुश्किल आसान हो जाए। ईद के इस पावन दिन, सबको तस्लीमती नजरें और बेपनाह खुशी मिले। ईद मुबारक हो, मेरे यारों! 🌙
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चीफ एग्जाम की पढ़ाई करें या लड़की वालों से बात जो कि घर पर आये हैं देखने। बहुत दुविधा है।
आपका चित्रेश
आपका चित्रेश
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उत्तर_प्रदेश_लोक_सेवा_आयोग_की_सहायक_अभियोजन_अधिकारी_प्रारंभिक_परीक्षा.pdf
10 MB
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की सहायक अभियोजन अधिकारी प्रारंभिक परीक्षा.pdf
In the Mahabharata Shri Krishna took no sides, sent his Narayani Sena to fight on the Kaurava side, while he stayed on only as Arjuna's charioteer, that was statecraft. India's actions including the PMs visit to recieve a medal on the eve of a war, shows no statecraft but a Shakuni like low cunning, which cannot be now wished away. "Samar shesh hai, nahi paap ka baaghi kewal wyaadh"
~~ Sanjay Hegde
महाभारत में श्रीकृष्ण ने प्रत्यक्ष रूप से किसी एक पक्ष का साथ नहीं लिया। उन्होंने अपनी नारायणी सेना को कौरवों की ओर से युद्ध के लिए भेज दिया, जबकि स्वयं अर्जुन के सारथी बनकर रहे—यह एक उच्च स्तर की कूटनीति (राजनीतिक सूझबूझ) का उदाहरण था।
इसके विपरीत, भारत की हालिया कार्रवाइयाँ—जिसमें युद्ध की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री का पदक ग्रहण करने जाना भी शामिल है—कूटनीति का परिचय नहीं देतीं, बल्कि शकुनि जैसी निम्नस्तरीय चतुराई (कपटपूर्ण चालाकी) का आभास कराती हैं, जिसे अब नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
“समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध”
— संजय हेगड़े
~~ Sanjay Hegde
महाभारत में श्रीकृष्ण ने प्रत्यक्ष रूप से किसी एक पक्ष का साथ नहीं लिया। उन्होंने अपनी नारायणी सेना को कौरवों की ओर से युद्ध के लिए भेज दिया, जबकि स्वयं अर्जुन के सारथी बनकर रहे—यह एक उच्च स्तर की कूटनीति (राजनीतिक सूझबूझ) का उदाहरण था।
इसके विपरीत, भारत की हालिया कार्रवाइयाँ—जिसमें युद्ध की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री का पदक ग्रहण करने जाना भी शामिल है—कूटनीति का परिचय नहीं देतीं, बल्कि शकुनि जैसी निम्नस्तरीय चतुराई (कपटपूर्ण चालाकी) का आभास कराती हैं, जिसे अब नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
“समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध”
— संजय हेगड़े
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सभी प्रतियोगी छात्रों से निवेदन:
एक एग्जाम के लिए अपनी जिंदगी मत हारिए।मौके फिर मिलेंगे… जिंदगी नहीं।
सरकारी नौकरी ही अंतिम विकल्प नहीं रखिए । सरकारी नौकरी में अब कोई दम नहीं बचा है । दरोगा टीचर अपने जीवन भर की कमाई से एक घर भी खरीद ले वही बहुत बड़ी बात होगी उनके लिए ।
प्राइवेट सेक्टर में बहुत स्कोप है । जितना मेहनत और समय आप सरकारी नौकरी की तैयारी में बर्बाद करते है , उसका आधा भी प्राइवेट सेक्टर की स्किल में देंगे तो 1 से 2 लाख महीना कमाया जा सकता है । भारत में अभी भी कमीशन सेक्टर पर हाइस्कूल इंटर फैल लोगो का कब्जा है । फिर आप सब तो मेहनत से ग्रेजुएशन पास किए लोग है । बस एक इच्छाशक्ति और जागरूकता की कमी है ।
एक एग्जाम के लिए अपनी जिंदगी मत हारिए।मौके फिर मिलेंगे… जिंदगी नहीं।
सरकारी नौकरी ही अंतिम विकल्प नहीं रखिए । सरकारी नौकरी में अब कोई दम नहीं बचा है । दरोगा टीचर अपने जीवन भर की कमाई से एक घर भी खरीद ले वही बहुत बड़ी बात होगी उनके लिए ।
प्राइवेट सेक्टर में बहुत स्कोप है । जितना मेहनत और समय आप सरकारी नौकरी की तैयारी में बर्बाद करते है , उसका आधा भी प्राइवेट सेक्टर की स्किल में देंगे तो 1 से 2 लाख महीना कमाया जा सकता है । भारत में अभी भी कमीशन सेक्टर पर हाइस्कूल इंटर फैल लोगो का कब्जा है । फिर आप सब तो मेहनत से ग्रेजुएशन पास किए लोग है । बस एक इच्छाशक्ति और जागरूकता की कमी है ।
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