दालचीनी में न दाल है, न चीनी। थोड़ी सी मिठास है, जो तीखेपन से दब जाती है। दाल तो न साबुत, न धुली। मिलती है पेड़ की छाल से।
दालचीनी पैदा होती थी इंडोनेशिया में। वहाँ से चीन, चीन से पहुँची अरब। अरब वालों ने देखा चीन से आई हुई दार (लकड़ी) है, तो नाम हो गया दार-उल-चीनी!
संस्कृत में दालचीनी को दारुसिता (सिता= चीनी), त्वक् (त्वचा) कहा जाता है।
Good morning
दालचीनी पैदा होती थी इंडोनेशिया में। वहाँ से चीन, चीन से पहुँची अरब। अरब वालों ने देखा चीन से आई हुई दार (लकड़ी) है, तो नाम हो गया दार-उल-चीनी!
संस्कृत में दालचीनी को दारुसिता (सिता= चीनी), त्वक् (त्वचा) कहा जाता है।
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