🌺*UPPCS प्रीलिम्स Cutoff Last 08 years*
🐹सामान्य एग्जीक्यूटिव वर्ग
▪️(200 अंक व 150 प्रश्नों में से)
👉2018 में 126 मार्क्स (94+ प्रश्न)
👉2019 में 117 मार्क्स ( 88 प्रश्न)
👉2020 में 110 मार्क्स (82+ प्रश्न)
👉2021 में 115 मार्क्स (86+ प्रश्न)
👉2022 में 111 मार्क्स (83+ प्रश्न)
👉2023 में 125 मार्क्स (94 प्रश्न)
👉2024 में 101 मार्क्स (76 प्रश्न)
🐹सामान्य एग्जीक्यूटिव वर्ग
▪️(200 अंक व 150 प्रश्नों में से)
👉2018 में 126 मार्क्स (94+ प्रश्न)
👉2019 में 117 मार्क्स ( 88 प्रश्न)
👉2020 में 110 मार्क्स (82+ प्रश्न)
👉2021 में 115 मार्क्स (86+ प्रश्न)
👉2022 में 111 मार्क्स (83+ प्रश्न)
👉2023 में 125 मार्क्स (94 प्रश्न)
👉2024 में 101 मार्क्स (76 प्रश्न)
🥱10🔥4❤2
😁15❤5🔥2
तांत्रिक का कहना है कल से कुछ लड़कियां ज्यादा बोल रही हैं उनको बैन किया जाए।
नाजीवाद फैला रही हैं।
नाजीवाद फैला रही हैं।
🤣37😁4👏3😐2❤1
Rejection list FOR UPPCS MAINS Acf-Rfo.pdf
1.8 MB
Rejection list FOR UPPCS MAINS Acf-Rfo.pdf
👍3❤2🔥1💊1
काफ़ी दिन हो गए हैं..
आप सब काफी चीज़ों से परेशान हो..
अपने ही टूटे सपनों से लाचार हो..
सिस्टम से लेके समाज तक
सबसे ऊब चुके हो..
थोड़ा खुल के जिओ
थोड़ा मुस्कुरा के जिओ
खुद को घसीटो मत
जो जा रहा है उसे जाने दो
प्रकृति को थोड़ा सुस्ताने दो..
जरुरी नहीं कि सब मिले
या मन का मिले..
नहीं मिल रहा तो भी ज़िंदा हो..
मुर्दोँ की तरह क्यों रहते हो..
आगे बढ़ो..समय की तरह..
जीवन यही है..
यात्रा है..
सबकी एक जैसी नहीं होती..
अलग अलग पड़ाव हैं.
द्वेष हैं विषाद हैं..
जैसी विधि की इच्छा..
वैसे जीना है..
अपनी -अपनी यात्रा में..
खुद को आगे ले जाना है...
बहुत परे.. माया के संसार से दूर..
तुम्हारी अपनी आत्मा
तुमसे सुकून मांगती है..
देदो यार..
झगड़ो मत.. उसके लिए जो वक्त के पैमाने पर..
तुम्हारा नहीं है..
उसके लिए जो कुछ समय बाद..
मिथ्या और तुक्ष होगा...
बढ़ते रहो..
ज़िंदा रहने के लिए..
आबाद रहने के लिए..
एक दिन शांति से..
बिना किसी खेद के..
मरने के लिए..
जैसा कि मेरा प्रिय मित्र तांत्रिक कहता है..
एक दिन सबको मर जाना है...
धन्यवाद..
आप सब काफी चीज़ों से परेशान हो..
अपने ही टूटे सपनों से लाचार हो..
सिस्टम से लेके समाज तक
सबसे ऊब चुके हो..
थोड़ा खुल के जिओ
थोड़ा मुस्कुरा के जिओ
खुद को घसीटो मत
जो जा रहा है उसे जाने दो
प्रकृति को थोड़ा सुस्ताने दो..
जरुरी नहीं कि सब मिले
या मन का मिले..
नहीं मिल रहा तो भी ज़िंदा हो..
मुर्दोँ की तरह क्यों रहते हो..
आगे बढ़ो..समय की तरह..
जीवन यही है..
यात्रा है..
सबकी एक जैसी नहीं होती..
अलग अलग पड़ाव हैं.
द्वेष हैं विषाद हैं..
जैसी विधि की इच्छा..
वैसे जीना है..
अपनी -अपनी यात्रा में..
खुद को आगे ले जाना है...
बहुत परे.. माया के संसार से दूर..
तुम्हारी अपनी आत्मा
तुमसे सुकून मांगती है..
देदो यार..
झगड़ो मत.. उसके लिए जो वक्त के पैमाने पर..
तुम्हारा नहीं है..
उसके लिए जो कुछ समय बाद..
मिथ्या और तुक्ष होगा...
बढ़ते रहो..
ज़िंदा रहने के लिए..
आबाद रहने के लिए..
एक दिन शांति से..
बिना किसी खेद के..
मरने के लिए..
जैसा कि मेरा प्रिय मित्र तांत्रिक कहता है..
एक दिन सबको मर जाना है...
धन्यवाद..
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