Forwarded from PHD NOTIFICATION ONLY ( Ugc Net Jrf Phd ) (Professor Pratham Bhanotra)
जीवन का एक छोटा सा ज्ञान 🙏....ये बस इस कारण दे रहा हूँ क्युकी कास मुझे भी ये ज्ञान किसी ने उस टाइम दे दिया होता तो मुझे इतना बुरा नहीं लगता ।।
कई बार ज़िंदगी में एक ऐसा समय आता है जब हमें लगता है —
“काश ऐसा हो जाता तो कितना अच्छा होता…”
मुझे भी एक समय ऐसा ही लगा था।
एम.ए. खत्म होने के बाद जेआरएफ होने के बावजूद, मेरी अपनी गलती से मैं पीएचडी का फॉर्म नहीं भर पाया। नोटिफिकेशन की आख़िरी तारीख निकल गई थी।और नोटिफिकेशन की इन्फो ही मुझे लास्ट डेट के बाद मिली ।
अगर फॉर्म भर देता तो हाथों-हाथ पीएचडी एडमिशन मिल जाता। जेआरएफ भी मिल जाता ।
उस समय बहुत बुरा लगा था… सच में लगा कि बहुत बड़ा मौका चला गया।
लेकिन आज जब पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो लगता है — अच्छा ही हुआ।
अगर उस समय पीएचडी में एडमिशन मिल जाता, तो मैं उसी में व्यस्त रहता।
शायद एम.पी. असिस्टेंट प्रोफेसर की तैयारी उतनी अच्छे से नहीं कर पाता, जितनी उस एक साल के खाली समय में कर पाया। और प्रोफेसर में सिलेक्शन उस एक साल का बहुत योगदान था । साथ ही साथ ये चैनल भी उसी एक साल के दौरान बनाया था तो जिस साल को में बुरा मानता था दुख होता था
व्ही साल ने मुझे सब कुछ दिया ।
इसलिए अगर कभी आपके जीवन में कुछ ना हो, कोई मौका हाथ से निकल जाए,
तो थोड़ा सा भरोसा रखिए — ईश्वर/खुदा या जिसे भी आप मानते हैं — उस पर विश्वास कीजिए।
हो सकता है जो अभी नहीं मिला, वह आगे चलकर कुछ और बेहतर देने वाला हो।
हाँ, उस समय रोना भी आएगा… दुख भी होगा…
लेकिन भविष्य में जब पीछे मुड़कर देखेंगे, तो शायद यही कहेंगे —
“अच्छा हुआ, जो नहीं मिला।”
बस थोड़ा इंतज़ार करना…
हार मत मानना…
आगे बढ़ते रहना… 🙌
https://www.instagram.com/reel/DUse416DaOl/?igsh=MWF6Z2o3YXZxZHNyOA==
कई बार ज़िंदगी में एक ऐसा समय आता है जब हमें लगता है —
“काश ऐसा हो जाता तो कितना अच्छा होता…”
मुझे भी एक समय ऐसा ही लगा था।
एम.ए. खत्म होने के बाद जेआरएफ होने के बावजूद, मेरी अपनी गलती से मैं पीएचडी का फॉर्म नहीं भर पाया। नोटिफिकेशन की आख़िरी तारीख निकल गई थी।और नोटिफिकेशन की इन्फो ही मुझे लास्ट डेट के बाद मिली ।
अगर फॉर्म भर देता तो हाथों-हाथ पीएचडी एडमिशन मिल जाता। जेआरएफ भी मिल जाता ।
उस समय बहुत बुरा लगा था… सच में लगा कि बहुत बड़ा मौका चला गया।
लेकिन आज जब पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो लगता है — अच्छा ही हुआ।
अगर उस समय पीएचडी में एडमिशन मिल जाता, तो मैं उसी में व्यस्त रहता।
शायद एम.पी. असिस्टेंट प्रोफेसर की तैयारी उतनी अच्छे से नहीं कर पाता, जितनी उस एक साल के खाली समय में कर पाया। और प्रोफेसर में सिलेक्शन उस एक साल का बहुत योगदान था । साथ ही साथ ये चैनल भी उसी एक साल के दौरान बनाया था तो जिस साल को में बुरा मानता था दुख होता था
व्ही साल ने मुझे सब कुछ दिया ।
इसलिए अगर कभी आपके जीवन में कुछ ना हो, कोई मौका हाथ से निकल जाए,
तो थोड़ा सा भरोसा रखिए — ईश्वर/खुदा या जिसे भी आप मानते हैं — उस पर विश्वास कीजिए।
हो सकता है जो अभी नहीं मिला, वह आगे चलकर कुछ और बेहतर देने वाला हो।
हाँ, उस समय रोना भी आएगा… दुख भी होगा…
लेकिन भविष्य में जब पीछे मुड़कर देखेंगे, तो शायद यही कहेंगे —
“अच्छा हुआ, जो नहीं मिला।”
बस थोड़ा इंतज़ार करना…
हार मत मानना…
आगे बढ़ते रहना… 🙌
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