Teaching Exam Notes
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शिक्षक कामायनी महाविद्यालय अलीगंज सुलतानपुर
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यूपी डीएलएड प्रथम चरण में कुल 36396 सीटें आवंटित

डायट में 10600 सीटों में 7185 सीटें आवंटित
प्राइवेट 228900 सीटों में 29211 सीटें आवंटित


अभी पूरे यूपी में कुल 239500 सीटों में से 203,104 सीटें खाली है इन सीटों पर काउंसलिंग 2nd चरण फरवरी में होगा।
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CTET की तैयारी हेतु अति महत्वपूर्ण

अगर CTET के पेपर में अच्छे अंक लाना हो तो.. शायद ये बातें आपके काम आ जाए..

सबसे पहले तो ये बात गांठ बांध लो कि..
✍*"
बालक कभी गलत नही हो सकता,*
✍*शिक्षा व्यवस्था ही गलत है.. या आपका पढ़ाने का तरीका..*

CTET का पूरा पेपर सिर्फ दो चीजों पर टिका होता है वो है..

*सकारात्मक एवं नकारात्मक* -
अब हम सबसे पहले जानेंगे कि नकारात्मक तथ्य कौन-कौन से हो सकते हैं..

✍*नकारात्मक तथ्य----*

1. जहां याद करने व रटने की बात हो रही हो तो, दिमाग में बैठा लो कि ये नकारात्मक बिंदु है इसलिए बच्चे को इस ओर नहीं ले जाना है.
2. अगर किसी विकल्प में शिक्षार्थी के लिए दंड का समर्थन किया जा रहा हो तो, तो आपको ऐसे विकल्प का समर्थन नहीं करना है.
3. जहां अलगाव या विद्यार्थियों की योग्यता के आधार पर उनके ग्रुप बनाने की बात हो रही हो, तो आपको ये नहीं करना है.
4. जहां लड़के व लड़कियों में भेदभाव या लड़कों को लड़कियों से उच्चतम बताया जा रहा हो, या लड़कियों को लड़कों से.. तो आपको ऐसे विकल्प के साथ नहीं जाना है. लड़की व लड़का दोनों समान है एक शिक्षक की नजर में..
5. जिस विकल्प में सिलेबस को पूरा करवाने या किताबी ज्ञान पर बल दिया जा रहा हो, तो मान लो कि ये संकीर्ण विचारधारा है और आपको इसका सपोर्ट नहीं करना है.
6. जिस विकल्प में विद्यार्थियों से अनुशासन स्थापना की बात हो रही हो, उस विकल्प के साथ नहीं जाना है.
7. जिस विकल्प में व्याख्यान विधि की बात हो रही हो या विद्यार्थियों को केवल श्रोता बनाने का समर्थन हो तो उस विकल्प के साथ आपको नहीं जाना है.
8. जिस विकल्प में विद्यार्थियों को किसी चीज़ के लिए दोषी ठहराया गया हो तो आपको ऐसे विकल्प की ओर नहीं जाना है.. समझ जाओ कि ये निगेटिव बिंदु है..
9..जिस विकल्प में अंक या ग्रेड देने या केवल परीक्षा पास करने की बात कही जा रही हो तो आपको उसके साथ सहमत नहीं होना है मतलब ये कि ये नकारात्मक विकल्प है.
10. यदि किसी विकल्प में बालक को अनुतीर्ण करने की बात हो रही हो.. या.. उसी कक्षा में रोकने की बात हो रही हो तो समझ जाना कि ये गलत है.. बालक कभी फेल नहीं हो सकता है.. शिक्षा पद्धति में ही दोष है..

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✍अब बात करते हैं सकारात्मक तथ्यों की..
*सकारात्मक तथ्य* --

1. जहां विद्यार्थियों को अधिकाधिक अवसर दिए जा रहे हों.
2. जहां बहुभाषिकता पर बल दिया जा रहा हो.
3. करके सीखने को प्रोत्साहित किया जा रहा हो.
4. जहां विद्यार्थियों को कोई कार्य करने हेतु स्वतंत्रता दी जा रही हो.
5. जहां सभी विद्यार्थियों के समावेशन की बात की जा रही हो..
6. जहां कक्षा कक्षीय जीवन को वास्तविक जीवन से जोड़ा जा रहा हो.
7. जहां विद्यार्थियों में सृजनात्मकता एवं जिज्ञासा विकसित की जा रही हो.

✍सकारात्मक तथ्यों वाले ऑप्शंस के साथ ही आपको जाना है..

विशेष - कुछ शब्द भी सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों होते हैं..
जैस - "प्रोत्साहित" एवं "हतोत्साहित"..
CTET के पेपर में कई सारे प्रश्नों में ये दोनों शब्द कई बार देखने को मिलेंगे..
प्रोत्साहित शब्द सकारात्मक है, जबकि हतोत्साहित शब्द नकारात्मक है.. बस आपको ध्यान ये रखना है कि ये किस अर्थ में प्रयुक्त हो रहे हैं..
(जैसे - या तो सही चीज को प्रोत्साहित किया जा रहा होगा या फिर सही चीज़ को हतोत्साहित.. या
गलत बात को प्रोत्साहित किया जा रहा होगा या गलत बात को हतोत्साहित) तो किस अर्थ में प्रयोग हो रहा है इनका.. ये ध्यान रखें..
और भी कई शब्द देखने को मिलेंगे जैसे - आंशिक, पूर्ण, केवल..
केवल शब्द का प्रयोग ज़्यादातर नकारात्मक अर्थ में ही प्रयोग होता है.. इस चीज का अवश्य ध्यान रखें.. फिर भी किस परिस्थिति में प्रयोग हो रहा है.. ये ध्यान अवश्य रखें..

✍ऊपर बात हो चुकी है सकारात्मक एवं नकारात्मक तथ्यों की..
पूरा पेपर इन्हीं के इर्द-गिर्द घूमेगा..
कई प्रश्न ऐसे होते हैं जिनमें ये पूछकर कन्फ्यूज किया जाता है।
कि कौनसा सही है कौनसा सही नहीं है...
या अलग तरीके से प्रश्न पूछा जाता है तो प्रश्न को ध्यान से पढ़ना है पहले कि पूछा क्या है.. ऑप्शंस पूरे पढ़ें क्योंकि कई बार गलत पूछा होता है और आपको पहला ही ऑप्शन सही लगता है और आप वहीं रूक जाते हैं.. तो इस चीज का ध्यान रखें...

CTET में प्रेक्टिस ही काम आती है साथ ही में आपकी सकारात्मक सोच एवं आपका कॉमन सेंस..
ऊपर लिखी बातों का अवश्य ध्यान रखें.. क्योंकि अधिकतर पेपर इन्हीं बिंदुओं के आसपास रहेगा.. साथ ही में हर टीचिंग एग्जाम में ये तथ्य आपके काम आयेंगे.. इसलिए सही से नोट कर लें..
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CTET CDP 2024 (PREVIOUS YEAR PAPER) व्याख्या सहित
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CTET

परीक्षा में टैग वर्ड्स (Tag Words) जो आपको सही उत्तर तक तेजी से पहुँचाते हैं। विशेषकर 'Pedagogy' (शिक्षाशास्त्र) के सेक्शन में ये बहुत काम आते हैं ।

यहाँ इन्हें इस्तेमाल करने का सही तरीका 👇🏻
1. सकारात्मक टैग वर्ड्स (Positive Tag Words)
यदि प्रश्न में पूछा जाए कि "क्या करना चाहिए" या "कौन सा कथन सही है", तो इन शब्दों वाले विकल्पों को चुनें:
* सर्वांगीण विकास (Overall Development): जहाँ बालक के हर पक्ष के विकास की बात हो।
* करके सीखना (Learning by Doing): सक्रिय भागीदारी सबसे अच्छा तरीका है।
* हस्तपरक अनुभव (Hands-on Experience): बच्चा खुद काम करके सीखे।
* प्रोत्साहन (Encouragement): बच्चे को प्रेरित करना।
* जिज्ञासा (Curiosity): बच्चे के कौतूहल को बढ़ाना।
* विभिन्न संदर्भों में भाषा प्रयोग: भाषा को अलग-अलग स्थितियों में इस्तेमाल करना।
* समावेशी शिक्षा (Inclusive Education): सभी बच्चों को साथ लेकर चलना।
* अवसर देना (Providing Opportunities): बच्चों को अपनी बात रखने या खोजने का मौका देना।
2. नकारात्मक टैग वर्ड्स (Negative Tag Words)
यदि प्रश्न में "नहीं है" या "क्या नहीं करना चाहिए" पूछा गया है, या फिर विकल्प में ये शब्द दिखें, तो वे अक्सर गलत उत्तर होते हैं:
* केवल/ही (Only/Just): शिक्षा में 'केवल' जैसे शब्द संकीर्णता दर्शाते हैं।
* रटना/याद करना (Rote Learning): रटने को कभी बढ़ावा नहीं देना है।
* कंठस्थ करना (Memorize): यह भी नकारात्मक है।
* दंड/सजा/बोझ (Punishment/Burden): बच्चे को डर नहीं दिखाना है।
* व्याख्यान विधि (Lecture Method): प्राथमिक स्तर पर यह प्रभावी नहीं मानी जाती।
* अंक/ग्रेड के लिए पढ़ना: केवल परीक्षा पास करना शिक्षा का उद्देश्य नहीं है।
* शिक्षक केंद्रित (Teacher Centric): शिक्षा हमेशा 'बाल केंद्रित' (Child Centric) होनी चाहिए।
टैग वर्ड्स का उपयोग कैसे करें? (Strategies)
प्रश्न की प्रकृति पहचानें
सबसे पहले देखें कि प्रश्न Positive है या Negative।
* अगर प्रश्न में "नहीं" या "के सिवाय" (Except) लगा है, तो आपको नकारात्मक विकल्प ढूँढना है।
* अगर प्रश्न सीधा है, तो सकारात्मक टैग वर्ड्स वाला विकल्प आपका उत्तर होगा।

"केवल" (Only) शब्द पर ध्यान दें
CTET में 90% मामलों में जिस विकल्प में "केवल" शब्द होता है, वह उत्तर गलत होता है। इसे 'Elimination Method' के लिए इस्तेमाल करें।
बड़ा और सकारात्मक विकल्प
अक्सर Pedagogy में वह विकल्प सही होता है जो थोड़ा विस्तृत हो और जिसमें बच्चे के भले और सक्रियता की बात कही गई हो।

✍याद रखें: टैग वर्ड्स एक ट्रिक हैं, लेकिन आपको प्रश्न का संदर्भ (Context) भी समझना चाहिए। हमेशा बच्चे को सक्रिय, जिज्ञासु और सम्मानजनक स्थान देने वाले विकल्प को प्राथमिकता दें।

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गणित (Mathematics) की पेडागोजी बाकी विषयों से थोड़ी अलग होती है क्योंकि यहाँ तर्क (Logic) और समझ पर ज्यादा जोर दिया जाता है। CTET में गणित के सवालों को हल करने के लिए नीचे दिए गए टैग वर्ड्स आपकी बहुत मदद करेंगे:
1. सकारात्मक टैग वर्ड्स (Positive Tag Words)
इन शब्दों को देखते ही समझ जाएँ कि ये विकल्प उत्तर होने की प्रबल संभावना रखते हैं:
* तार्किक सोच (Logical Thinking): गणित का मुख्य उद्देश्य बच्चे की सोच का 'गणितीकरण' करना और उसे तार्किक बनाना है।
* गणितीयकरण (Mathematization): बच्चे के अनुभवों को गणित की दृष्टि से देखना।
* दैनिक जीवन से जोड़ना: गणित को किताबी न रखकर बाहरी दुनिया और रोजमर्रा के कामों से जोड़ना।
* व्यावहारिक कुशलता: गणितीय संक्रियाओं (जोड़, घटाव, गुणा) का असल जीवन में उपयोग।
* NCERT 2005 के अनुसार: गणित का उद्देश्य बच्चों के साधन विकसित करना है ताकि वे गणितीय ढंग से सोच सकें।
* त्रुटियाँ (Errors): गलतियाँ सीखने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा और 'खिड़की' हैं, जो शिक्षक को बताती हैं कि बच्चा कैसे सोच रहा है।
* समझ और बोध (Understanding): रटने के बजाय अवधारणा (Concept) को समझना।
* खुले अंत वाले प्रश्न (Open-ended Questions): ऐसे सवाल जिनके एक से ज्यादा सही उत्तर या तरीके हो सकते हैं (जैसे: "कोई दो संख्याएँ बताओ जिनका योग 10 हो")।
2. नकारात्मक टैग वर्ड्स (Negative Tag Words)
इन शब्दों वाले विकल्पों को आप देखते ही हटा (Eliminate) सकते हैं:
* उच्च कक्षाओं के लिए तैयारी: प्राथमिक स्तर पर गणित का उद्देश्य बड़ी कक्षाओं के लिए तैयार करना नहीं होता।
* रटना/कंठस्थ करना: सूत्रों या पहाड़ों को रटाना हमेशा गलत है।
* केवल/ही (Only): जैसे "केवल गणनाओं पर जोर देना" या "केवल पाठ्यपुस्तक का पालन करना"।
* कठोर अभ्यास/ड्रिल: बच्चों को बार-बार एक ही सवाल करने के लिए मजबूर करना।
* कलन विधि (Algorithms): प्राथमिक स्तर पर जटिल कलन विधियों या रटे-रटाए स्टेप्स पर जोर देना नकारात्मक है।
* लैंगिक भेदभाव: यह कहना कि "लड़कियाँ गणित में कमजोर होती हैं" या "लड़के बेहतर होते हैं"।
* अंक या ग्रेड: केवल परीक्षा में नंबर लाने के लिए पढ़ना।
गणितीय शिक्षण के कुछ महत्वपूर्ण मॉडल
गणित के पेडागोजी प्रश्नों में ELPS Model और Van Hiele (वैन हीले) का सिद्धांत बहुत पूछा जाता है। इसे इस चित्र के माध्यम से समझा जा सकता है:
* ELPS Model (सीखने का क्रम):
* E - Experience (ठोस वस्तुओं के साथ अनुभव)
* L - Language (उस अनुभव को भाषा में बोलना)
* P - Pictures (चित्रों के माध्यम से समझना)
* S - Symbols (चिन्हों जैसे +, -, x का प्रयोग करना)
* Van Hiele (ज्यामितीय विचार):
* स्तर 0 (Visualisation): बच्चा आकृतियों को उनके दिखने के आधार पर पहचानता है।
* स्तर 1 (Analysis): बच्चा गुणों (Properties) के आधार पर आकृतियों को समझता है।
याद रखने योग्य बात:
गणित की प्रकृति पदानुक्रमित (Hierarchical) होती है। इसका मतलब है कि जब तक बच्चा 'जोड़' नहीं सीखेगा, वह 'गुणा' नहीं समझ पाएगा। इसलिए, बुनियादी समझ सबसे जरूरी है।
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गणित (Mathematics) की पेडागोजी बाकी विषयों से थोड़ी अलग होती है क्योंकि यहाँ तर्क (Logic) और समझ पर ज्यादा जोर दिया जाता है। CTET में गणित के सवालों को हल करने के लिए नीचे दिए गए टैग वर्ड्स आपकी बहुत मदद करेंगे:
1. सकारात्मक टैग वर्ड्स (Positive Tag Words)
इन शब्दों को देखते ही समझ जाएँ कि ये विकल्प उत्तर होने की प्रबल संभावना रखते हैं:
* तार्किक सोच (Logical Thinking): गणित का मुख्य उद्देश्य बच्चे की सोच का 'गणितीकरण' करना और उसे तार्किक बनाना है।
* गणितीयकरण (Mathematization): बच्चे के अनुभवों को गणित की दृष्टि से देखना।
* दैनिक जीवन से जोड़ना: गणित को किताबी न रखकर बाहरी दुनिया और रोजमर्रा के कामों से जोड़ना।
* व्यावहारिक कुशलता: गणितीय संक्रियाओं (जोड़, घटाव, गुणा) का असल जीवन में उपयोग।
* NCERT 2005 के अनुसार: गणित का उद्देश्य बच्चों के साधन विकसित करना है ताकि वे गणितीय ढंग से सोच सकें।
* त्रुटियाँ (Errors): गलतियाँ सीखने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा और 'खिड़की' हैं, जो शिक्षक को बताती हैं कि बच्चा कैसे सोच रहा है।
* समझ और बोध (Understanding): रटने के बजाय अवधारणा (Concept) को समझना।
* खुले अंत वाले प्रश्न (Open-ended Questions): ऐसे सवाल जिनके एक से ज्यादा सही उत्तर या तरीके हो सकते हैं (जैसे: "कोई दो संख्याएँ बताओ जिनका योग 10 हो")।
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CTET गणित (Mathematics) की पेडागोजी

बाकी विषयों से थोड़ी अलग होती है क्योंकि यहाँ तर्क (Logic) और समझ पर ज्यादा जोर दिया जाता है। CTET में गणित के सवालों को हल करने के लिए नीचे दिए गए टैग वर्ड्स आपकी बहुत मदद करेंगे:
1. सकारात्मक टैग वर्ड्स (Positive Tag Words)
इन शब्दों को देखते ही समझ जाएँ कि ये विकल्प उत्तर होने की प्रबल संभावना रखते हैं:
* तार्किक सोच (Logical Thinking): गणित का मुख्य उद्देश्य बच्चे की सोच का 'गणितीकरण' करना और उसे तार्किक बनाना है।
* गणितीयकरण (Mathematization): बच्चे के अनुभवों को गणित की दृष्टि से देखना।
* दैनिक जीवन से जोड़ना: गणित को किताबी न रखकर बाहरी दुनिया और रोजमर्रा के कामों से जोड़ना।
* व्यावहारिक कुशलता: गणितीय संक्रियाओं (जोड़, घटाव, गुणा) का असल जीवन में उपयोग।
* NCERT 2005 के अनुसार: गणित का उद्देश्य बच्चों के साधन विकसित करना है ताकि वे गणितीय ढंग से सोच सकें।
* त्रुटियाँ (Errors): गलतियाँ सीखने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा और 'खिड़की' हैं, जो शिक्षक को बताती हैं कि बच्चा कैसे सोच रहा है।
* समझ और बोध (Understanding): रटने के बजाय अवधारणा (Concept) को समझना।
* खुले अंत वाले प्रश्न (Open-ended Questions): ऐसे सवाल जिनके एक से ज्यादा सही उत्तर या तरीके हो सकते हैं (जैसे: "कोई दो संख्याएँ बताओ जिनका योग 10 हो")।
2. नकारात्मक टैग वर्ड्स (Negative Tag Words)
इन शब्दों वाले विकल्पों को आप देखते ही हटा (Eliminate) सकते हैं:
* उच्च कक्षाओं के लिए तैयारी: प्राथमिक स्तर पर गणित का उद्देश्य बड़ी कक्षाओं के लिए तैयार करना नहीं होता।
* रटना/कंठस्थ करना: सूत्रों या पहाड़ों को रटाना हमेशा गलत है।
* केवल/ही (Only): जैसे "केवल गणनाओं पर जोर देना" या "केवल पाठ्यपुस्तक का पालन करना"।
* कठोर अभ्यास/ड्रिल: बच्चों को बार-बार एक ही सवाल करने के लिए मजबूर करना।
* कलन विधि (Algorithms): प्राथमिक स्तर पर जटिल कलन विधियों या रटे-रटाए स्टेप्स पर जोर देना नकारात्मक है।
* लैंगिक भेदभाव: यह कहना कि "लड़कियाँ गणित में कमजोर होती हैं" या "लड़के बेहतर होते हैं"।
* अंक या ग्रेड: केवल परीक्षा में नंबर लाने के लिए पढ़ना।
गणितीय शिक्षण के कुछ महत्वपूर्ण मॉडल
गणित के पेडागोजी प्रश्नों में ELPS Model और Van Hiele (वैन हीले) का सिद्धांत बहुत पूछा जाता है। इसे इस चित्र के माध्यम से समझा जा सकता है:
* ELPS Model (सीखने का क्रम):
   * E - Experience (ठोस वस्तुओं के साथ अनुभव)
   * L - Language (उस अनुभव को भाषा में बोलना)
   * P - Pictures (चित्रों के माध्यम से समझना)
   * S - Symbols (चिन्हों जैसे +, -, x का प्रयोग करना)
* Van Hiele (ज्यामितीय विचार):
   * स्तर 0 (Visualisation): बच्चा आकृतियों को उनके दिखने के आधार पर पहचानता है।
   * स्तर 1 (Analysis): बच्चा गुणों (Properties) के आधार पर आकृतियों को समझता है।
याद रखने योग्य बात:
गणित की प्रकृति पदानुक्रमित (Hierarchical) होती है। इसका मतलब है कि जब तक बच्चा 'जोड़' नहीं सीखेगा, वह 'गुणा' नहीं समझ पाएगा। इसलिए, बुनियादी समझ सबसे जरूरी है।

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UP BOARD परीक्षा 2026 प्रति पाली कक्ष निरीक्षकों को ₹50 भारी भरकम पारिश्रमिक अनुमन्य.....
बोर्ड परीक्षा में ₹50 प्रति पाली पारिश्रमिक देय।
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RO/ARO 2023 Mains Admit Card
Exam Date- 2 & 3 February 2026
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विज्ञापन संख्या-05-परीक्षा/2023, लेखा परीक्षक एवं सहायक लेखाकार (सामान्य चयन) मुख्य परीक्षा (प्रा०अ०प०-2022)/05 का अंतिम चयन परिणाम ।
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परीक्षा की तिथि बहुत लोगों की 7 फरवरी दिख रहा है, तो इसमें घबराने की बात नहीं है । परीक्षा तिथि 8 February 2026 को नोटीफिकेशन में है । जिनका 7 फरवरी दिख रहा है उसकी जानकारी आयोग द्वारा दी जाएगी । आप सभी लोग समय समय पर चेक करते रहे ।

नोट : ज्यादा कैंडिडेट होने के कारण CBSE दो दिनों में एग्जाम करा सकती है। तो जिनका 7 february दिख रहा वे उसी हिसाब से तैयारी करे।
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CTET के इन तीन मनोवैज्ञानिकों (Piaget, Vygotsky, Kohlberg) से हर साल 5 से 8 नंबर के सवाल आते हैं। इन्हें समझने की "शॉर्टकट ट्रिक" 👇🏻

1. जीन पियाजे (Jean Piaget) - "नन्हा वैज्ञानिक"
पियाजे कहते हैं कि बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता है, उसका दिमाग विकसित होता है।
👉ट्रिक कीवर्ड: परिपक्वता (Maturation), स्वयं से सीखना, खोजबीन।
👉4 अवस्थाएं (याद करने की ट्रिक: S P C F)
👉S (Sensorimotor - 0-2 वर्ष): इंद्रियों (आंख, कान, नाक) से सीखना। (वस्तु स्थायित्व/Object Permanence)।
👉P (Pre-operational - 2-7 वर्ष): बच्चा अहंकारी होता है (Ego-centric), उसे लगता है सब उसे देख रहे हैं। जीववाद (सजीव-निर्जीव में फर्क न कर पाना)।
👉C (Concrete - 7-11 वर्ष): तर्क करना शुरू (Logic), लेकिन सिर्फ सामने रखी चीजों पर।
👉F (Formal - 11+ वर्ष): अमूर्त सोच (Abstract thinking) - बिना देखे भी चीजों के बारे में सोचना।

2. लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) - "समाज और सहारा"
वाइगोत्स्की मानते हैं कि बच्चा अकेले नहीं, समाज और बड़ों की मदद से सीखता है।

👉ट्रिक कीवर्ड: समाज (Social), संस्कृति (Culture), भाषा (Language), परस्पर अंतःक्रिया।

* तीन मुख्य शब्द:
* ZPD: वह अंतर जो बच्चा खुद कर सकता है और जो किसी की मदद से कर सकता है।
* Scaffolding (पाड़/ढांचा): शुरुआत में दी जाने वाली अस्थायी मदद (जैसे साइकिल सिखाते समय पीछे से पकड़ना)।
* MKO: वह व्यक्ति जिसे बच्चे से ज्यादा ज्ञान हो (शिक्षक या माता-पिता)।

3. लॉरेंस कोहलबर्ग (Kohlberg) - "सही और गलत"
इन्होंने नैतिकता (Morality) के बारे में बताया।
* ट्रिक कीवर्ड: नैतिक दुविधा (Hienz की कहानी), सही और गलत का निर्णय।
* 3 स्तर (Levels):
* पूर्व-पारंपरिक: डर से नियम मानना (दंड और आज्ञाकारिता) या 'जैसे को तैसा'।
* पारंपरिक: अच्छा लड़का/अच्छी लड़की बनने के लिए नियम मानना या समाज के नियमों का पालन करना।
* उत्तर-पारंपरिक: खुद के नियम बनाना, मानवता के लिए नियमों को बदल देना।

👉पियाजे –विकास/अवस्था/स्वयं | उम्र के साथ अपने आप |
👉वाइगोत्स्की – समाज/मदद/सहयोग | दूसरों के साथ मिलकर |
👉कोहलबर्ग –नैतिकता/नियम/दुविधा | समाज के नियमों और विवेक से |

एक बोनस टिप: अगर प्रश्न में "निजी भाषण" (Private Speech) आए, तो उत्तर वाइगोत्स्की होगा। अगर "अहं-केंद्रित वाक्" (Egocentric Speech) आए, तो उत्तर पियाजे होगा

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