Aayush Officer (Contractual) (Aayurved/Homeo/Unani) 2025 : List of Withdrawl Candidates
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड: आयुष चिकित्सा अधिकारी भर्ती 2025
निर्धारित शैक्षणिक योग्यता नहीं रखने वाले एवं परीक्षा में सम्मिलित नहीं होने वाले इच्छुक 204 अभ्यर्थियों ने अपना ऑनलाइन आवेदन प्रत्याहरित (Withdrawal) किया है !...
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राजस्थान : 40 साल की अस्थायी नौकरी को हाईकोर्ट ने नियमित माना: संविदा पर लगे कर्मचारियों को मिलेगी पेंशन; जानें-कितने लोगों को मिलेगा फायदा
🔹राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने एक अहम फैसले में कहा- दशकों तक दी गई सेवा को महज अस्थायी कहकर किसी कर्मचारी को नियमितीकरण के अधिकार से नहीं रोका जा सकता। जस्टिस रेखा बोराणा की सिंगल बेंच ने भीलवाड़ा के सत्यनारायण शर्मा समेत अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया।
कोर्ट ने कहा- याचिकाकर्ताओं को उनकी शुरुआती नियुक्ति की तारीख से ही नियमित चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी माना जाए और उन्हें पेंशन सहित सभी रिटायरमेंट लाभ दिए जाए। याचिकाकर्ताओं ने विभाग में करीब 40 साल तक सेवा दी थी, लेकिन सरकार ने उन्हें नियमित नहीं किया था।
सरकार ने 1998 में दिया था छंटनी नहीं करने का आदेश
याचिकाकर्ता सत्यनारायण शर्मा को 5 अगस्त 1981 को पंचायत समिति लूणकरणसर में गेट कीपर के पद पर अस्थायी तौर पर नियुक्त किया गया था। बाद में 1992 में उन्हें चुंगी नाका रक्षक बनाया गया। राज्य में चुंगी खत्म होने पर ऐसे कर्मचारी सरप्लस हो गए।
6 अगस्त 1998 को राज्य सरकार ने आदेश दिया कि ऑक्ट्रॉय (चुंगी) से जुड़े कर्मचारियों की छंटनी नहीं की जाएगी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने नियुक्ति की तारीख 14 अगस्त 1981 से लगातार ग्राम पंचायत लूणकरणसर में काम किया।
जिला परिषद बीकानेर ने 23 नवंबर 2007 को एक पत्र जारी कर राजस्थान में ऑक्ट्रॉय खत्म होने से अधिशेष कर्मचारियों को अन्य पदों पर समायोजित करने के लिए लिस्ट भेजी। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने 27 नवंबर 2016 को आदेश दिया कि ऐसे कर्मचारियों को चतुर्थ श्रेणी का न्यूनतम वेतनमान दिया जाए, लेकिन याचिकाकर्ता का नाम इसमें शामिल नहीं था।
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि सत्यनारायण ने लगभग 40 साल तक एक नियमित कर्मचारी की तरह सेवा दी, लेकिन उन्हें नियमित नहीं किया गया।
🔹सरकार का तर्क: नियुक्ति नियमित तरीके से नहीं हुई
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता और सरकारी वकीलों ने कहा कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति चौथी श्रेणी के लिए नियमित प्रक्रिया से नहीं हुई। वकीलों ने कहा कि उन्हें अस्थायी आधार पर रखा गया था और चुंगी खत्म होने के बाद मानवीय आधार पर सेवा में बनाए रखा गया, इसलिए रिटायरमेंट के बाद वे नियमितीकरण का दावा नहीं कर सकते।
जस्टिस रेखा बोराणा ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि-
“यह निर्विवाद है कि याचिकाकर्ता ने विभाग में लगातार 40 साल सेवा दी है। कोर्ट ने कन्हैयालाल नाई और लालाराम सैनी व अन्य पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि इतनी लंबी सेवा को अस्थायी नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया, इतनी लंबी सेवा को मूल सेवा माना जाना चाहिए। राज्य या उसके अधिकारियों की किसी भी कार्रवाई से किसी व्यक्ति को उस सेवा के मूल अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता जो उसने उन्हें प्रदान की है।”
🔹🔹पेंशन मिलेगी, एरियर नहीं
हाईकोर्ट ने कन्हैयालाल नाई मामले को लागू करते हुए आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं को शुरुआती नियुक्ति से नियमित मानकर पेंशन और अन्य लाभ दिए जाए। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि याचिकाकर्ता को वेतनमान में वेतन निर्धारण (Pay-fixation) के अनुसार किसी भी एरियर (बकाया राशि) का दावा करने का हक नहीं होगा।
तीन याचिकाओं में कुल 11 लोगों को राहत
इस फैसले से मुख्य याचिकाकर्ता सत्यनारायण शर्मा के अलावा दो अन्य जुड़ी हुई याचिकाओं में शामिल कुल 10 कर्मचारियों को भी लाभ मिलेगा। इनमें पाली जिले (सोजत रोड क्षेत्र) के 7 कर्मचारी- परमानंद शर्मा, सोहन सिंह चौहान, कल्याण सिंह, शांतिलाल सेन, महेंद्र कुमार, श्रीमती सुंदर और ढगलाराम प्रजापत शामिल है। वहीं, भीलवाड़ा जिले (मांडल और कोटड़ी क्षेत्र) के 3 अन्य कर्मचारी- रमेश चंद्र भट्ट, छोटूसिंह राजपूत और ललितशंकर भट्ट भी इस आदेश के दायरे में आएंगे!
कोर्ट ने कहा- याचिकाकर्ताओं को उनकी शुरुआती नियुक्ति की तारीख से ही नियमित चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी माना जाए और उन्हें पेंशन सहित सभी रिटायरमेंट लाभ दिए जाए। याचिकाकर्ताओं ने विभाग में करीब 40 साल तक सेवा दी थी, लेकिन सरकार ने उन्हें नियमित नहीं किया था।
सरकार ने 1998 में दिया था छंटनी नहीं करने का आदेश
याचिकाकर्ता सत्यनारायण शर्मा को 5 अगस्त 1981 को पंचायत समिति लूणकरणसर में गेट कीपर के पद पर अस्थायी तौर पर नियुक्त किया गया था। बाद में 1992 में उन्हें चुंगी नाका रक्षक बनाया गया। राज्य में चुंगी खत्म होने पर ऐसे कर्मचारी सरप्लस हो गए।
6 अगस्त 1998 को राज्य सरकार ने आदेश दिया कि ऑक्ट्रॉय (चुंगी) से जुड़े कर्मचारियों की छंटनी नहीं की जाएगी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने नियुक्ति की तारीख 14 अगस्त 1981 से लगातार ग्राम पंचायत लूणकरणसर में काम किया।
जिला परिषद बीकानेर ने 23 नवंबर 2007 को एक पत्र जारी कर राजस्थान में ऑक्ट्रॉय खत्म होने से अधिशेष कर्मचारियों को अन्य पदों पर समायोजित करने के लिए लिस्ट भेजी। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने 27 नवंबर 2016 को आदेश दिया कि ऐसे कर्मचारियों को चतुर्थ श्रेणी का न्यूनतम वेतनमान दिया जाए, लेकिन याचिकाकर्ता का नाम इसमें शामिल नहीं था।
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि सत्यनारायण ने लगभग 40 साल तक एक नियमित कर्मचारी की तरह सेवा दी, लेकिन उन्हें नियमित नहीं किया गया।
🔹सरकार का तर्क: नियुक्ति नियमित तरीके से नहीं हुई
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता और सरकारी वकीलों ने कहा कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति चौथी श्रेणी के लिए नियमित प्रक्रिया से नहीं हुई। वकीलों ने कहा कि उन्हें अस्थायी आधार पर रखा गया था और चुंगी खत्म होने के बाद मानवीय आधार पर सेवा में बनाए रखा गया, इसलिए रिटायरमेंट के बाद वे नियमितीकरण का दावा नहीं कर सकते।
जस्टिस रेखा बोराणा ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि-
“यह निर्विवाद है कि याचिकाकर्ता ने विभाग में लगातार 40 साल सेवा दी है। कोर्ट ने कन्हैयालाल नाई और लालाराम सैनी व अन्य पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि इतनी लंबी सेवा को अस्थायी नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया, इतनी लंबी सेवा को मूल सेवा माना जाना चाहिए। राज्य या उसके अधिकारियों की किसी भी कार्रवाई से किसी व्यक्ति को उस सेवा के मूल अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता जो उसने उन्हें प्रदान की है।”
🔹🔹पेंशन मिलेगी, एरियर नहीं
हाईकोर्ट ने कन्हैयालाल नाई मामले को लागू करते हुए आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं को शुरुआती नियुक्ति से नियमित मानकर पेंशन और अन्य लाभ दिए जाए। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि याचिकाकर्ता को वेतनमान में वेतन निर्धारण (Pay-fixation) के अनुसार किसी भी एरियर (बकाया राशि) का दावा करने का हक नहीं होगा।
तीन याचिकाओं में कुल 11 लोगों को राहत
इस फैसले से मुख्य याचिकाकर्ता सत्यनारायण शर्मा के अलावा दो अन्य जुड़ी हुई याचिकाओं में शामिल कुल 10 कर्मचारियों को भी लाभ मिलेगा। इनमें पाली जिले (सोजत रोड क्षेत्र) के 7 कर्मचारी- परमानंद शर्मा, सोहन सिंह चौहान, कल्याण सिंह, शांतिलाल सेन, महेंद्र कुमार, श्रीमती सुंदर और ढगलाराम प्रजापत शामिल है। वहीं, भीलवाड़ा जिले (मांडल और कोटड़ी क्षेत्र) के 3 अन्य कर्मचारी- रमेश चंद्र भट्ट, छोटूसिंह राजपूत और ललितशंकर भट्ट भी इस आदेश के दायरे में आएंगे!
LSI_Recruitment_2024_Couseling_Order_for_Posting_Place_choice.pdf
186.3 KB
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पशुधन निरीक्षक सीधी भर्ती 2024 में नवचयनित अभ्यर्थियों के काउंसलिंग हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी ✅
नई RAS की भर्ती जल्द ही आने की संभावना है (पदों की संख्या 600+)
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संविदा भर्ती 2023
ANM, नर्स चॉइस फिलिंग हेतु राज हेल्थ पोर्टल ओपन अंतिम
तिथि 18 दिसंबर 2025
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