थर्ड ग्रेड डीपीसी पर सितंबर में आ सकता है बड़ा फैसला, 25000 शिक्षकों का इंतजार होगा खत्म
थर्ड ग्रेड शिक्षकों की बहुप्रतीक्षित डीपीसी से जुड़े मामले में सितंबर माह सुखद खबर ला सकता है। मामले की अंतिम महत्वपूर्ण सुनवाई के लिए सभी याचिकाओं को एक साथ टैग कर 9 सितंबर को सुनवाई प्रस्तावित की गई है, इसके लिए विभाग और सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट की नियुक्ति भी कर दी गई है। उम्मीद है कि वर्षों से लंबित इस मामले में अनुकूल फैसला आने से करीब 25000 शिक्षकों की डीपीसी का मार्ग प्रशस्त होगा। इधर, विभाग की ओर से डीपीसी की तैयारियां भी जोर-शोर से जारी हैं, डीपीसी कैलेंडर जारी हो चुका है और मंडल स्तर पर वरिष्ठता सूचियां भी जारी की जा रही हैं, ताकि फैसला आते ही कुछ ही दिनों में डीपीसी की प्रक्रिया पूरी करवाई जा सके।
PRAGATI EDUCATION24 NEWS
थर्ड ग्रेड शिक्षकों की बहुप्रतीक्षित डीपीसी से जुड़े मामले में सितंबर माह सुखद खबर ला सकता है। मामले की अंतिम महत्वपूर्ण सुनवाई के लिए सभी याचिकाओं को एक साथ टैग कर 9 सितंबर को सुनवाई प्रस्तावित की गई है, इसके लिए विभाग और सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट की नियुक्ति भी कर दी गई है। उम्मीद है कि वर्षों से लंबित इस मामले में अनुकूल फैसला आने से करीब 25000 शिक्षकों की डीपीसी का मार्ग प्रशस्त होगा। इधर, विभाग की ओर से डीपीसी की तैयारियां भी जोर-शोर से जारी हैं, डीपीसी कैलेंडर जारी हो चुका है और मंडल स्तर पर वरिष्ठता सूचियां भी जारी की जा रही हैं, ताकि फैसला आते ही कुछ ही दिनों में डीपीसी की प्रक्रिया पूरी करवाई जा सके।
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⚖️🔥 संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी कानूनी अपडेट!
7 मई के हाईकोर्ट आदेश की पालना नहीं हुई तो अब अवमानना याचिका तक पहुंचा मामला
राजस्थान हाईकोर्ट के 7 मई 2026 के महत्वपूर्ण आदेश में संविदा/अस्थायी नियुक्ति से जुड़े याचिकाकर्ताओं के लिए बड़ा राहतकारी निर्देश दिया गया था।
🩺 कोर्ट ने क्या लाभ देने के निर्देश दिए थे?
हाईकोर्ट ने कहा था कि संबंधित याचिकाकर्ताओं के—
✅ दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए।
✅ पात्रता एवं दस्तावेज सही पाए जाने पर प्रारंभिक Temporary/Ad-hoc/Urgent नियुक्ति की तारीख से सेवा की गणना की जाए।
✅ पात्र पाए जाने पर “Continuity of Service for All Purposes” का लाभ दिया जाए।
✅ संबंधित विभाग को 8 सप्ताह के भीतर उचित आदेश पारित करने के निर्देश दिए गए थे।
यानी मामला केवल वर्तमान सेवा से जुड़ा नहीं था, बल्कि पात्र पाए जाने पर प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से सेवाकाल की गणना और सेवा निरंतरता देने का निर्देश था। ⚖️
🚨 लेकिन अब नया मोड़!
7 मई 2026 के आदेश के बावजूद लाभ/पालना नहीं होने का आरोप लगाते हुए S.B. Writ Contempt Petition No. 1221/2026 दायर की गई।
📅 24 अगस्त 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर ने इस अवमानना मामले में—
👉 सरकार को नोटिस जारी किया
👉 नोटिस 4 सप्ताह में लौटाने योग्य रखा गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल है—
❓ क्या सरकार कोर्ट के पुराने आदेश की पालना करेगी?
❓ क्या पात्र कर्मचारियों को प्रारंभिक नियुक्ति से सेवाकाल और Continuity of Service का लाभ मिलेगा?
❓ या मामला आगे अवमानना की कार्रवाई तक जाएगा?
📌 ध्यान रखें: अवमानना मामले में अभी केवल नोटिस जारी हुआ है। इसे सरकार के खिलाफ अंतिम अवमानना निर्णय नहीं माना जा सकता। आगे की न्यायालयीन कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
---
🔥 संविदा कर्मचारियों की नजर अब अगली सुनवाई पर!
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Dr. Dinesh Kumar Soni, Dr. Paritosh Ujjwal और Jaggo v. Union of India में बताए गए सिद्धांतों के आधार पर प्रारंभिक Temporary/Ad-hoc/Urgent नियुक्ति से सेवा गणना और Continuity of Service for All Purposes का मुद्दा सामने आया है।
⚠️ महत्वपूर्ण सावधानी:
इसका अर्थ यह नहीं है कि राजस्थान के सभी संविदा/NHM/UTB कर्मचारियों का सेवाकाल स्वतः नियमित सेवा में जुड़ जाएगा। लाभ संबंधित मामले में नियुक्ति की प्रकृति, चयन प्रक्रिया, पात्रता, दस्तावेज और न्यायालय के आदेश पर निर्भर करेगा।
📢 अब देखना होगा—
7 मई के आदेश के बाद शुरू हुई यह कानूनी लड़ाई आगे क्या मोड़ लेती है?
7 मई के हाईकोर्ट आदेश की पालना नहीं हुई तो अब अवमानना याचिका तक पहुंचा मामला
राजस्थान हाईकोर्ट के 7 मई 2026 के महत्वपूर्ण आदेश में संविदा/अस्थायी नियुक्ति से जुड़े याचिकाकर्ताओं के लिए बड़ा राहतकारी निर्देश दिया गया था।
🩺 कोर्ट ने क्या लाभ देने के निर्देश दिए थे?
हाईकोर्ट ने कहा था कि संबंधित याचिकाकर्ताओं के—
✅ दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए।
✅ पात्रता एवं दस्तावेज सही पाए जाने पर प्रारंभिक Temporary/Ad-hoc/Urgent नियुक्ति की तारीख से सेवा की गणना की जाए।
✅ पात्र पाए जाने पर “Continuity of Service for All Purposes” का लाभ दिया जाए।
✅ संबंधित विभाग को 8 सप्ताह के भीतर उचित आदेश पारित करने के निर्देश दिए गए थे।
यानी मामला केवल वर्तमान सेवा से जुड़ा नहीं था, बल्कि पात्र पाए जाने पर प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से सेवाकाल की गणना और सेवा निरंतरता देने का निर्देश था। ⚖️
🚨 लेकिन अब नया मोड़!
7 मई 2026 के आदेश के बावजूद लाभ/पालना नहीं होने का आरोप लगाते हुए S.B. Writ Contempt Petition No. 1221/2026 दायर की गई।
📅 24 अगस्त 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर ने इस अवमानना मामले में—
👉 सरकार को नोटिस जारी किया
👉 नोटिस 4 सप्ताह में लौटाने योग्य रखा गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल है—
❓ क्या सरकार कोर्ट के पुराने आदेश की पालना करेगी?
❓ क्या पात्र कर्मचारियों को प्रारंभिक नियुक्ति से सेवाकाल और Continuity of Service का लाभ मिलेगा?
❓ या मामला आगे अवमानना की कार्रवाई तक जाएगा?
📌 ध्यान रखें: अवमानना मामले में अभी केवल नोटिस जारी हुआ है। इसे सरकार के खिलाफ अंतिम अवमानना निर्णय नहीं माना जा सकता। आगे की न्यायालयीन कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
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🔥 संविदा कर्मचारियों की नजर अब अगली सुनवाई पर!
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Dr. Dinesh Kumar Soni, Dr. Paritosh Ujjwal और Jaggo v. Union of India में बताए गए सिद्धांतों के आधार पर प्रारंभिक Temporary/Ad-hoc/Urgent नियुक्ति से सेवा गणना और Continuity of Service for All Purposes का मुद्दा सामने आया है।
⚠️ महत्वपूर्ण सावधानी:
इसका अर्थ यह नहीं है कि राजस्थान के सभी संविदा/NHM/UTB कर्मचारियों का सेवाकाल स्वतः नियमित सेवा में जुड़ जाएगा। लाभ संबंधित मामले में नियुक्ति की प्रकृति, चयन प्रक्रिया, पात्रता, दस्तावेज और न्यायालय के आदेश पर निर्भर करेगा।
📢 अब देखना होगा—
7 मई के आदेश के बाद शुरू हुई यह कानूनी लड़ाई आगे क्या मोड़ लेती है?
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