साथियों आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय कि जस्टिस नरसिंहा & जस्टिस आलोक अराडे सर कि बेंच से
महाराष्ट्र स्टेट काउंसिल कि शिक्षकों के भर्ती विवाद मामले पर एक विस्तृत आदेश जारी हुआ है
लगभग 30 पन्नों के आदेश में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने
माइग्रेशन रूल , रिफ्लैक्शन बनाम रिजर्वेशन के डिफरेंस को काफी हद तक स्पष्ट करने का प्रयास किया है
*#विवाद_कि_शुरुआत_होती_है - कि याचिकाकर्ताओं को , यद्यपि वे अधिक योग्य थे राज्य द्वारा जारी की गई मेरिट सूची से फिर भी इस आधार पर बाहर कर दिया गया कि उन्होंने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को उत्तीर्ण अंकों में छूट का लाभ उठाया था।
इस आदेश में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने माइग्रेशन एवं रिफ्लैक्शन बनाम रिजर्वेशन के अनेक संदेहास्पद मामलों जैसे ( विकास श्रंखृला , प्रदीप कुमार , जी किरन , जितेंद्र सिंह) के बीच कि चीजों को स्पष्ट रूप से निस्तारित कर दिया है
*#कोर्ट_ने_अपने_आदेश_में_बिल्कुल_स्पष्ट_किया_है_कि
(i) किसी योग्यता परीक्षा में दी गई छूट, किसी उम्मीदवार को केवल विचार-क्षेत्र में प्रवेश दिलाती है; इसे लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए निर्धारित मानकों में दी गई छूट नहीं माना जा सकता, बशर्ते कि ऐसी छूट मेरिट (योग्यता) को प्रभावित न करती हो—
(ii) योग्यता परीक्षा में दी गई छूट या रियायत, केवल एक 'समान अवसर का मंच' तैयार करती है; अंतिम चयन प्रक्रिया में ऐसी कोई छूट या रियायत नहीं दी जाती, और यह चयन पूरी तरह से उम्मीदवारों के आपसी मेरिट के आधार पर ही किया जाता है।
(iii) यदि कोई उम्मीदवार जो आरक्षित श्रेणी से संबंधित है, चयन के लिए निर्धारित आवश्यक पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करता है, तो उसे खुली श्रेणी में जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
(iv) किसी ऐसे आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार का खुली श्रेणी में जाना, जिसने अर्हता परीक्षा में किसी प्रकार की छूट/रियायत का लाभ उठाया है, भर्ती नियमों कि अधिसूचना पर निर्भर करता है। यदि ऐसे भर्ती नियम या रोज़गार अधिसूचना इस प्रकार के बदलाव की अनुमति देते हैं, तो यह मान्य होगा।
(v) इस प्रकार का बदलाव तब भी मान्य होगा, यदि भर्ती नियम या रोज़गार अधिसूचना इस विषय पर मौन हैं, या स्पष्ट रूप से इसे प्रतिबंधित नहीं करते हैं।
इस प्रकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने बिल्कुल स्पष्ट रूप से 69000 भर्ती विवाद कि कड़ी कि मुख्य कड़ियों को भी लगभग सुलझा दिया है माननीय न्यायालय ने आगे यह भी स्पष्ट किया है कि -
प्रदीप कुमार और अन्य बनाम साजिब रॉय यूनियन ऑफ़ इंडिया बनाम जी. किरण और अन्य मामलों में इस न्यायालय के निर्णय, इन अपीलों के मौजूदा तथ्यों पर लागू नहीं होते हैं;
जबकि, जितेंद्र कुमार सिंह और विकास सांखला मामलों में इस न्यायालय के निर्णय, इन अपीलों के तथ्यों पर लागू होते हैं। अतः अपीलकर्ता सामान्य श्रेणी में जाने अर्थात माइग्रेशन पाने के हकदार हैं।
साथियों 69000 मामले में चल रही आरक्षण विसंगति मामले कि सुनवाई में अहम रूप से विवादित इन बिंदुओं पर लगभग चीजें कोर्ट ने स्पष्ट कर दी है , बस जल्द से जल्द सुनवाई हो और मामले के संपूर्ण विवाद का सुखद अंत हो
महाराष्ट्र स्टेट काउंसिल कि शिक्षकों के भर्ती विवाद मामले पर एक विस्तृत आदेश जारी हुआ है
लगभग 30 पन्नों के आदेश में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने
माइग्रेशन रूल , रिफ्लैक्शन बनाम रिजर्वेशन के डिफरेंस को काफी हद तक स्पष्ट करने का प्रयास किया है
*#विवाद_कि_शुरुआत_होती_है - कि याचिकाकर्ताओं को , यद्यपि वे अधिक योग्य थे राज्य द्वारा जारी की गई मेरिट सूची से फिर भी इस आधार पर बाहर कर दिया गया कि उन्होंने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को उत्तीर्ण अंकों में छूट का लाभ उठाया था।
इस आदेश में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने माइग्रेशन एवं रिफ्लैक्शन बनाम रिजर्वेशन के अनेक संदेहास्पद मामलों जैसे ( विकास श्रंखृला , प्रदीप कुमार , जी किरन , जितेंद्र सिंह) के बीच कि चीजों को स्पष्ट रूप से निस्तारित कर दिया है
*#कोर्ट_ने_अपने_आदेश_में_बिल्कुल_स्पष्ट_किया_है_कि
(i) किसी योग्यता परीक्षा में दी गई छूट, किसी उम्मीदवार को केवल विचार-क्षेत्र में प्रवेश दिलाती है; इसे लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए निर्धारित मानकों में दी गई छूट नहीं माना जा सकता, बशर्ते कि ऐसी छूट मेरिट (योग्यता) को प्रभावित न करती हो—
(ii) योग्यता परीक्षा में दी गई छूट या रियायत, केवल एक 'समान अवसर का मंच' तैयार करती है; अंतिम चयन प्रक्रिया में ऐसी कोई छूट या रियायत नहीं दी जाती, और यह चयन पूरी तरह से उम्मीदवारों के आपसी मेरिट के आधार पर ही किया जाता है।
(iii) यदि कोई उम्मीदवार जो आरक्षित श्रेणी से संबंधित है, चयन के लिए निर्धारित आवश्यक पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करता है, तो उसे खुली श्रेणी में जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
(iv) किसी ऐसे आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार का खुली श्रेणी में जाना, जिसने अर्हता परीक्षा में किसी प्रकार की छूट/रियायत का लाभ उठाया है, भर्ती नियमों कि अधिसूचना पर निर्भर करता है। यदि ऐसे भर्ती नियम या रोज़गार अधिसूचना इस प्रकार के बदलाव की अनुमति देते हैं, तो यह मान्य होगा।
(v) इस प्रकार का बदलाव तब भी मान्य होगा, यदि भर्ती नियम या रोज़गार अधिसूचना इस विषय पर मौन हैं, या स्पष्ट रूप से इसे प्रतिबंधित नहीं करते हैं।
इस प्रकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने बिल्कुल स्पष्ट रूप से 69000 भर्ती विवाद कि कड़ी कि मुख्य कड़ियों को भी लगभग सुलझा दिया है माननीय न्यायालय ने आगे यह भी स्पष्ट किया है कि -
प्रदीप कुमार और अन्य बनाम साजिब रॉय यूनियन ऑफ़ इंडिया बनाम जी. किरण और अन्य मामलों में इस न्यायालय के निर्णय, इन अपीलों के मौजूदा तथ्यों पर लागू नहीं होते हैं;
जबकि, जितेंद्र कुमार सिंह और विकास सांखला मामलों में इस न्यायालय के निर्णय, इन अपीलों के तथ्यों पर लागू होते हैं। अतः अपीलकर्ता सामान्य श्रेणी में जाने अर्थात माइग्रेशन पाने के हकदार हैं।
साथियों 69000 मामले में चल रही आरक्षण विसंगति मामले कि सुनवाई में अहम रूप से विवादित इन बिंदुओं पर लगभग चीजें कोर्ट ने स्पष्ट कर दी है , बस जल्द से जल्द सुनवाई हो और मामले के संपूर्ण विवाद का सुखद अंत हो
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