राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह के साथ, जैसलमेर पोखरण में 'वायु शक्ति-2026' अभ्यास का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय वायु सेना द्वारा, युद्धाभ्यास में भारतीय रक्षा प्रौद्योगिकी, युद्ध अभियानों से जुड़े, सेना के शौर्य प्रदर्शन 'वायु शक्ति-2026' के उत्कृष्ट प्रदर्शन का अवलोकन किया। उन्होंने अग्रणी लड़ाकू विमानों से लेकर, उन्नत वायु रक्षा प्रणालि
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12 मार्च
दांडी मार्च की शुरुआत महात्मा गाँधी ने 12 मार्च 1930 को की थी।
यह ऐतिहासिक यात्रा साबरमती आश्रम से गुजरात के तटीय गाँव दांडी तक निकाली गई थी।
इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार द्वारा नमक पर लगाए गए अन्यायपूर्ण कर का विरोध करना था।
गाँधी जी के साथ इस कूच में उनके 79 अनुयायी शामिल थे, जो बाद में एक बड़े जनसमूह में बदल गया।
यह पैदल यात्रा लगभग 390 किलोमीटर लंबी थी, जिसे पूरा करने में 24 दिन लगे।
गाँधी जी ने अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए लोगों को ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ एकजुट किया।
6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुँचकर गाँधी जी ने समुद्र किनारे नमक उठाकर अंग्रेजी कानून को चुनौती दी।
इस घटना ने पूरे भारत में 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' (Civil Disobedience Movement) की शुरुआत की।
दांडी मार्च की शुरुआत महात्मा गाँधी ने 12 मार्च 1930 को की थी।
यह ऐतिहासिक यात्रा साबरमती आश्रम से गुजरात के तटीय गाँव दांडी तक निकाली गई थी।
इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार द्वारा नमक पर लगाए गए अन्यायपूर्ण कर का विरोध करना था।
गाँधी जी के साथ इस कूच में उनके 79 अनुयायी शामिल थे, जो बाद में एक बड़े जनसमूह में बदल गया।
यह पैदल यात्रा लगभग 390 किलोमीटर लंबी थी, जिसे पूरा करने में 24 दिन लगे।
गाँधी जी ने अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए लोगों को ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ एकजुट किया।
6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुँचकर गाँधी जी ने समुद्र किनारे नमक उठाकर अंग्रेजी कानून को चुनौती दी।
इस घटना ने पूरे भारत में 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' (Civil Disobedience Movement) की शुरुआत की।
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