दौसा जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मेहंदीपुर बालाजी के लिए, 8 दिसंबर (सोमवार) से हेलिकॉप्टर सेवा शुरू होगी। यह पहली उड़ान सेवा सुबह 11 बजे यहां उतरेगी। मेहंदीपुर बालाजी जो कि ‘पंच गौरव’ में शामिल है, जिला प्रशासन धार्मिक पर्यटन के विकास की संभावनाओं को, बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। उसी क्रम में यहां हेलिकॉप्टर सेवा शुरू होना भी, एक महत्वपूर्ण कदम है।
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🌍 अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस 2025 🌍
थीम: “Our Everyday Essentials”
मानवाधिकार कोई बड़े आदर्श नहीं, बल्कि हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी की वे बुनियादी जरूरतें हैं जो हमें सम्मान और सुरक्षा के साथ जीने का अधिकार देती हैं।
सुरक्षा, भोजन, शिक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,ये सब हमारे दैनिक जीवन के अनिवार्य अधिकार हैं।
आज हम यह संकल्प लेते हैं कि हर व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा और सम्मान हो, चाहे वह कहीं भी रहता हो, कोई भी हो।
मानवाधिकार विशेषाधिकार नहीं, बल्कि हर इंसान के लिए ज़रूरी अधिकार हैं।
थीम: “Our Everyday Essentials”
मानवाधिकार कोई बड़े आदर्श नहीं, बल्कि हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी की वे बुनियादी जरूरतें हैं जो हमें सम्मान और सुरक्षा के साथ जीने का अधिकार देती हैं।
सुरक्षा, भोजन, शिक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,ये सब हमारे दैनिक जीवन के अनिवार्य अधिकार हैं।
आज हम यह संकल्प लेते हैं कि हर व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा और सम्मान हो, चाहे वह कहीं भी रहता हो, कोई भी हो।
मानवाधिकार विशेषाधिकार नहीं, बल्कि हर इंसान के लिए ज़रूरी अधिकार हैं।
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नव नियुक्त राज्य सूचना आयुक्त श्री सुनील शर्मा को राज्य सूचना भवन में, मुख्य सूचना आयुक्त श्री मोहन लाल लाठर ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी श्री शर्मा को राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने गत 8 दिसम्बर को अधिसूचना जारी कर, राज्य सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्ति प्रदान की थी।
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🌸 सिलीसेढ़ झील, अलवर को रामसर साइट घोषित किए जाने के बाद, राजस्थान में अब कुल 5 रामसर स्थल हैं।
✍🏻राजस्थान की रामसर साइट्स 05
1. केवलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान
• जिला: भरतपुर।
• रामसर घोषणा: 1981।
• तथ्य: यह राजस्थान की पहली और भारत की सबसे पुरानी रामसर साइट्स में से एक है। इसे 1985 में UNESCO विश्व धरोहर स्थल भी घोषित किया गया था। यह एक महत्वपूर्ण पक्षी अभयारण्य है, जो मुख्य रूप से विलुप्तप्राय साइबेरियन क्रेन (Siberian Crane) सहित हजारों प्रवासी जलपक्षियों को आकर्षित करता है।
• अतिरिक्त जानकारी: यह स्थल 1990 से मॉन्ट्रो रिकॉर्ड (Montreux Record) में भी शामिल है, जो उन रामसर साइटों को सूचीबद्ध करता है जहाँ पारिस्थितिक चरित्र में परिवर्तन हो गया है, हो रहा है, या होने की संभावना है।
2. सांभर झील (Sambhar Lake)
• जिला: जयपुर, नागौर, अजमेर (तीन जिलों में फैली हुई)।
• रामसर घोषणा: 1990।
• तथ्य: यह भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय (Inland) खारे पानी की झील है। यह भारत के कुल नमक उत्पादन का लगभग 9% हिस्सा उत्पादित करती है। यह प्रवासी पक्षियों, विशेष रूप से फ्लेमिंगो (Flamingos) की विशाल आबादी के लिए एक प्रमुख शीतकालीन गंतव्य है। इसका क्षेत्रफल लगभग 240 वर्ग किलोमीटर है।
3. मेनार वेटलैंड कॉम्प्लेक्स (Menar Wetland Complex)
• जिला: उदयपुर।
• रामसर घोषणा: 2025 (जून में घोषित)।
• तथ्य: इसे स्थानीय रूप से 'बर्ड विलेज' के नाम से जाना जाता है। यह कॉम्प्लेक्स मुख्य रूप से दो प्रमुख तालाबों - ब्राह्म तालाब और ढांढ तालाब - से मिलकर बना है। यह एक वर्षा-आधारित मीठे पानी का वेटलैंड है जो 463.414 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करता है और कई स्थानीय तथा अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी पक्षी प्रजातियों को आश्रय देता है।
4. खीचन गाँव (Kheechan Village)
• जिला: फलोदी।
• रामसर घोषणा: 2025 (जून में घोषित)।
• तथ्य: यह साइट अपनी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ स्थानीय समुदाय द्वारा बड़ी संख्या में डेमोइसेल क्रेन (Demoiselle Crane) पक्षी को खिलाया जाता है। यह पक्षी जिसे स्थानीय भाषा में 'कुरजां' कहा जाता है, सर्दियों के दौरान यहां हजारों की संख्या में प्रवास करता है। इसका क्षेत्रफल लगभग 54.187 हेक्टेयर है।
5. सिलीसेढ़ झील (Siliserh Lake)
• जिला: अलवर।
• रामसर घोषणा: (12 Dec.2025)
• तथ्य: यह राजस्थान की पाँचवीं रामसर साइट है। इस कृत्रिम झील का निर्माण महाराजा विनय सिंह ने 1845 ई. में करवाया था। यह अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित एक प्रमुख पर्यटन और जल स्रोत है, जो 150 से अधिक पक्षी प्रजातियों (प्रवासी और स्थानीय) को आश्रय प्रदान करती है।
✍🏻राजस्थान की रामसर साइट्स 05
1. केवलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान
• जिला: भरतपुर।
• रामसर घोषणा: 1981।
• तथ्य: यह राजस्थान की पहली और भारत की सबसे पुरानी रामसर साइट्स में से एक है। इसे 1985 में UNESCO विश्व धरोहर स्थल भी घोषित किया गया था। यह एक महत्वपूर्ण पक्षी अभयारण्य है, जो मुख्य रूप से विलुप्तप्राय साइबेरियन क्रेन (Siberian Crane) सहित हजारों प्रवासी जलपक्षियों को आकर्षित करता है।
• अतिरिक्त जानकारी: यह स्थल 1990 से मॉन्ट्रो रिकॉर्ड (Montreux Record) में भी शामिल है, जो उन रामसर साइटों को सूचीबद्ध करता है जहाँ पारिस्थितिक चरित्र में परिवर्तन हो गया है, हो रहा है, या होने की संभावना है।
2. सांभर झील (Sambhar Lake)
• जिला: जयपुर, नागौर, अजमेर (तीन जिलों में फैली हुई)।
• रामसर घोषणा: 1990।
• तथ्य: यह भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय (Inland) खारे पानी की झील है। यह भारत के कुल नमक उत्पादन का लगभग 9% हिस्सा उत्पादित करती है। यह प्रवासी पक्षियों, विशेष रूप से फ्लेमिंगो (Flamingos) की विशाल आबादी के लिए एक प्रमुख शीतकालीन गंतव्य है। इसका क्षेत्रफल लगभग 240 वर्ग किलोमीटर है।
3. मेनार वेटलैंड कॉम्प्लेक्स (Menar Wetland Complex)
• जिला: उदयपुर।
• रामसर घोषणा: 2025 (जून में घोषित)।
• तथ्य: इसे स्थानीय रूप से 'बर्ड विलेज' के नाम से जाना जाता है। यह कॉम्प्लेक्स मुख्य रूप से दो प्रमुख तालाबों - ब्राह्म तालाब और ढांढ तालाब - से मिलकर बना है। यह एक वर्षा-आधारित मीठे पानी का वेटलैंड है जो 463.414 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करता है और कई स्थानीय तथा अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी पक्षी प्रजातियों को आश्रय देता है।
4. खीचन गाँव (Kheechan Village)
• जिला: फलोदी।
• रामसर घोषणा: 2025 (जून में घोषित)।
• तथ्य: यह साइट अपनी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ स्थानीय समुदाय द्वारा बड़ी संख्या में डेमोइसेल क्रेन (Demoiselle Crane) पक्षी को खिलाया जाता है। यह पक्षी जिसे स्थानीय भाषा में 'कुरजां' कहा जाता है, सर्दियों के दौरान यहां हजारों की संख्या में प्रवास करता है। इसका क्षेत्रफल लगभग 54.187 हेक्टेयर है।
5. सिलीसेढ़ झील (Siliserh Lake)
• जिला: अलवर।
• रामसर घोषणा: (12 Dec.2025)
• तथ्य: यह राजस्थान की पाँचवीं रामसर साइट है। इस कृत्रिम झील का निर्माण महाराजा विनय सिंह ने 1845 ई. में करवाया था। यह अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित एक प्रमुख पर्यटन और जल स्रोत है, जो 150 से अधिक पक्षी प्रजातियों (प्रवासी और स्थानीय) को आश्रय प्रदान करती है।
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स्कूल शिक्षा विभाग, राजस्थान की ओर से राज्य के समस्त राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों के कक्षा 9 से 12 में अध्ययनरत विद्यार्थियों में 21 वीं सदी के कौशलों के विकास हेतु ‘प्रबल कार्यक्रम’ (PRABAL - Program to Recognize Abilities and Build up Adaptive Life Skills of 21st Century) संचालित किया जा रहा है।
प्रबल कार्यक्रम 2025 के तहत 15 दिसम्बर को राजस्थान विधानसभा में आयोजित किया जा रहा है कार्यक्रम ‘‘राजस्थान युवा सभा’’।
प्रबल कार्यक्रम 2025 के तहत 15 दिसम्बर को राजस्थान विधानसभा में आयोजित किया जा रहा है कार्यक्रम ‘‘राजस्थान युवा सभा’’।
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अम्मान में भव्य स्वागत, भारत–जॉर्डन मित्रता की गूंज।। 🇮🇳🤝🇯🇴
प्रधानमंत्री @narendramodi के अम्मान इंटरनेशनल एयरपोर्ट आगमन पर जॉर्डन के प्रधानमंत्री जाफ़र हसन द्वारा किया गया औपचारिक एवं गर्मजोशी भरा स्वागत, दोनों देशों के मजबूत, विश्वासपूर्ण और ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री @narendramodi के अम्मान इंटरनेशनल एयरपोर्ट आगमन पर जॉर्डन के प्रधानमंत्री जाफ़र हसन द्वारा किया गया औपचारिक एवं गर्मजोशी भरा स्वागत, दोनों देशों के मजबूत, विश्वासपूर्ण और ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक है।
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3 दिसंबर 1971 को जनरल मानेक शॉ के नेतृत्व में शुरू हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारत और बांग्लादेश की संयुक्त सेना (मुक्ति वाहिनी) ने 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान को पराजित कर एक नए राष्ट्र, बांग्लादेश का निर्माण हुआ। इस युद्ध में ढाका में 93,000 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य आत्मसमर्पण था जिसमे पाकिस्तानी के सेना कमांडर Lt. Gen. A.A.K. Niazi ने भारतीय कमांडर Lt. Gen. जगजीत सिंह अरोड़ा के समक्ष आत्मसमर्पण के दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए। इसे #विजय_दिवस के रूप में मनाया जाता है🇮🇳
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प्रधानमंत्री narendramodi को मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मान भारत की मजबूत नेतृत्व क्षमता, निरंतर प्रगति और बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रमाण हैं।
इथियोपिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के साथ यह संख्या 28 शीर्ष सम्मानों तक पहुँच चुकी है, जो न केवल प्रधानमंत्री का, बल्कि हर भारतीय का गौरव है। यह सम्मान भारत की निरंतर आगे बढ़ती वैश्विक यात्रा का प्रतीक है।
इथियोपिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के साथ यह संख्या 28 शीर्ष सम्मानों तक पहुँच चुकी है, जो न केवल प्रधानमंत्री का, बल्कि हर भारतीय का गौरव है। यह सम्मान भारत की निरंतर आगे बढ़ती वैश्विक यात्रा का प्रतीक है।
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भारत–ओमान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) पर हस्ताक्षर!
द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग में एक नया अध्याय
💠 भारत–ओमान CEPA के तहत ओमान की 98.08% टैरिफ लाइनों पर शून्य-शुल्क (Zero Duty) पहुंच मिलेगी, जिससे भारत के 99.38% निर्यात को लाभ होगा
💠 यह समझौता लागू होते ही पहले दिन से 97.96% उत्पादों पर शून्य-शुल्क रियायतें प्रदान करता है
द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग में एक नया अध्याय
💠 भारत–ओमान CEPA के तहत ओमान की 98.08% टैरिफ लाइनों पर शून्य-शुल्क (Zero Duty) पहुंच मिलेगी, जिससे भारत के 99.38% निर्यात को लाभ होगा
💠 यह समझौता लागू होते ही पहले दिन से 97.96% उत्पादों पर शून्य-शुल्क रियायतें प्रदान करता है
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